मुख्य सुर्खियां
मोरबी ब्रिज हादसा - "अभियुक्तों के खिलाफ आरोप अच्छी तरह से स्थापित हैं" : मोरबी की अदालत ने आरोपियों को 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा
मोरबी की एक अदालत ने 30 अक्टूबर को मोरबी पुल ढहने की घटना के सिलसिले में मंगलवार को चार आरोपियों को 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। इस हादसे में 130 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।ब्रिटिश शासन के दौरान बनाए गए इस ब्रिज को मार्च से ही जीर्णोद्धार के लिए बंद कर दिया गया था। रविवार की रात ढहने से ठीक चार दिन पहले इसे जनता के लिए फिर से खोल दिया गया था। चार आरोपियों में से दो ओरेवा कंपनी के प्रबंधक हैं, जिन्हें ठेका दिया गया था और वे पुल के नवीनीकरण के मामलों के प्रभारी थे। अन्य दो को पुल के...
अनुकंपा नियुक्ति | किसी व्यक्ति को केवल इसलिए वित्तीय रूप से स्थिर नहीं माना जा सकता क्योंकि उसने शादी कर ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी व्यक्ति का विवाह अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति से इनकार करने का कोई आधार नहीं है क्योंकि वैवाहिक संबंध में प्रवेश करने से यह धारणा नहीं बनती कि व्यक्ति आर्थिक रूप से स्थिर है।इसके साथ ही जस्टिस विक्रम डी चौहान की खंडपीठ ने डीआईजी (स्थापना) पुलिस मुख्यालय, उत्तर प्रदेश के एक आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें यूपी पुलिस के एक सिपाही के छोटे बेटे को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित कर दिया गया था, जिनकी सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी।मामलाप्रेम शंकर द्विवेदी यूपी पुलिस में...
'आप छोटे-मोटे विवाद के चलते विश्वविद्यालय को बर्बाद करना चाहते हैं': हाईकोर्ट ने केरल विश्वविद्यालय की सीनेट को फटकार लगाई
केरल विश्वविद्यालय की सीनेट से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नए कुलपति की नियुक्ति के लिए गठित चयन समिति में एक प्रतिनिधि को नामित नहीं करने के लिए निकाय की कड़ी आलोचना की।कोर्ट ने देखा कि 5 अगस्त को चांसलर द्वारा लिए गए निर्णय के कारण सीनेट अपने सदस्य को नामित करने से इनकार कर रही थी। इस पर जस्टिस देवन रामचंद्रन ने कहा,"जैसा भी हो, इसमें कोई संदेह नहीं हो सकता है कि केरल विश्वविद्यालय को जल्द ही एक कुलपति की आवश्यकता है। हितधारकों के बीच विवाद ऐसी स्थिति में आगे नहीं बढ़ सकता है...
'धर्मनिरपेक्ष संस्था के रूप में, न्यायालय विशेष धर्म को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकता': केरल हाईकोर्ट ने गुरुवायुर मंदिर कार्यक्रम पर न्यायिक अधिकारियों को बताया
केरल हाईकोर्ट ने त्रिशूर जिले के प्रभारी न्यायाधीश के एक संदर्भ के बाद मंगलवार को जिले के न्यायिक अधिकारियों को एक आधिकारिक ज्ञापन जारी कर उनसे गुरुवायुर मंदिर में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले "कोडथी विलाक्कू" के आयोजन में सक्रिय रूप से शामिल नहीं होने के लिए कहा।यह देखते हुए कि चावक्कड़ मुंसिफ कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्यों की एक आयोजन समिति द्वारा गुरुवायुर मंदिर में "कोडथी विलाक्कू" के बैनर तले सालाना एक कार्यक्रम आयोजित किया जाता है, हाईकोर्ट प्रशासन ने कहा कि भले ही बार एसोसिएशन के सदस्यों को...
सेवा से बर्खास्तगी पर ग्रेच्युटी की जब्ती स्वतः नहीं होगी, प्रभावित पक्ष को कारण बताओ नोटिस जरूरी: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने माना कि ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के अनुसार सेवा से बर्खास्तगी पर ग्रेच्युटी की जब्ती स्वत: नहीं होती है।जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास ने कहा कि प्रभावित पक्ष को कारण बताओ नोटिस जरूरी है।पीठ सियाराम बसंती द्वारा दायर एक रिट याचिका पर विचार कर रही थी, जिसे कदाचार के लिए विभागीय जांच के बाद ग्रामीण बैंक में 33 साल की सेवा के बाद बर्खास्त कर दिया गया था। उन्होंने अपनी भविष्य निधि राशि, ग्रेच्युटी राशि और छुट्टी नकदीकरण जारी करने की मांग की।जबकि बैंक ने स्वीकार किया कि...
ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की धारा 25 के तहत सरकारी विश्लेषक की रिपोर्ट "निर्णायक" नहीं होगी, यदि यह उस व्यक्ति को नहीं दी जाती है, जिससे नमूना एकत्र किया गया था: जेएंडकेएंड एल हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा कि एक सरकारी विश्लेषक की रिपोर्ट ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की धारा 25 (3) के तहत केवल उस व्यक्ति के खिलाफ निर्णायक होगी जो रिपोर्ट की एक प्रति प्राप्त करने के बावजूद 28 दिनों की अवधि के भीतर रिपोर्ट के विवाद में सबूत पेश करने के अपने इरादे को सूचित करने में विफल रहा है।जस्टिस संजय धर ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिसके संदर्भ में याचिकाकर्ता ने अपने खिलाफ और सह-आरोपियों के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट,...
बलात्कार के आरोपी के डीएनए नमूने लेना आत्म-अपराध के खिलाफ उसके संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने एक फैसला सुनाया कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 20 (3) के तहत गारंटीकृत सुरक्षा एक आपराधिक मामले की जांच के दौरान किसी आरोपी को अपना रक्त नमूना देने के लिए मजबूर करने से बचाने के लिए विस्तारित नहीं होती है।जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने कहा कि अनुच्छेद 20(3) का विशेषाधिकार केवल प्रशंसापत्र साक्ष्य पर लागू होता है और एक आपराधिक मामले में एक आरोपी के शरीर से डीएनए नमूने लेना, विशेष रूप से यौन अपराध से जुड़े मामले में, अनुच्छेद 20(3) के तहत संरक्षित आत्म-अपराध के खिलाफ उसके अधिकार का...
नियुक्ति पर राज्यपाल के कारण बताओ नोटिस को चुनौती देते हुए ने कुलपतियों ने केरल हाईकोर्ट का रुख किया
विभिन्न राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने पिछले महीने राज्य के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान द्वारा उन्हें जारी कारण बताओ नोटिस के खिलाफ केरल उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।नोटिस में कुलपतियों को यह बताने के लिए कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में एपीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति को रद्द करने के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मानदंडों के विपरीत वे अपने पदों पर कैसे बने रह सकते हैं।खान, जो विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति हैं, ने नोटिस में...
तलाक की याचिका वापस लेने पर भी परित्यक्त पत्नी अंतरिम भरण पोषण की हकदार: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता उपेक्षित पत्नी के अधिकार का मामला है, यहां तक कि उन मामलों में भी जहां वह तलाक की मांग वाली याचिका वापस लेती है।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा,"पत्नी द्वारा वापस ली जा रही तलाक की याचिका का कोई फायदा नहीं है, क्योंकि पत्नी अभी भी पति के साथ वैवाहिक बंधन में है। जब तक प्रतिवादी याचिकाकर्ता की कानूनी रूप से विवाहित पत्नी है और तथ्य यह है कि उसे पति ने छोड़ दिया है, अंतरिम भरण-पोषण पत्नी के अधिकार का मामला...
एस 41डी सीआरपीसी | एडवोकेट को पूरी पूछताछ के दरमियान आरोपी के साथ उपस्थित रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीआरपीसी की धारा 41 डी, जो एक आरोपी को जांच एजेंसी द्वारा पूछताछ के दरमियान पसंद के वकील से मिलने का अधिकार देती है, पूरी जांच के दरमियान वकील की उपस्थिति तक विस्तारित नहीं होती है।जस्टिस विवेक चौधरी ने मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर एक आपराधिक पुनरीक्षण आवेदन को स्वीकार करते हुए जांच के समय विपक्षी पक्ष/अभियुक्तों को सभी के साथ उपस्थित रहने की अनुमति दी, जस्टिस बिबेक चौधरी ने कहा,"सीआरपीसी की धारा 41D को लागू करने का उद्देश्य...
इस्लामिक कानून मुस्लिम महिला के तलाक मांगने के अधिकार को मान्यता देता है, पति की सहमति जरूरी नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा कि पत्नी की इच्छा "पति की इच्छा से संबंधित" नहीं हो सकती। कोर्ट ने उक्त टिप्पणी यह देखते हुए कि इस्लामी कानून एक मुस्लिम महिला के विवाह की समाप्ति की मांग के अधिकार को मान्यता देता है।एक फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए, जिसमें अदालत ने एक मुस्लिम महिला को खुला का सहारा लेने के अधिकार को मान्यता दी थी, जस्टिस ए मोहम्मद मुस्ताक और जस्टिस सीएस डायस की खंडपीठ ने कहा,"पत्नी के कहने पर विवाह के खात्मे को मान्यता देने, जबकि पति सहमति देने से...
मोरबी ब्रिज हादसा | जिला बार एसोसिएशन ने अभियुक्तों का प्रतिनिधित्व करने के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया
मोरबी बार एसोसिएशन ने मंगलवार को सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित कर अपने सदस्य वकीलों को मोरबी ब्रिज ढहने की घटना से जुड़े किसी भी आरोपी का प्रतिनिधित्व नहीं करने के लिए कहा है। इस हादसे में 130 से अधिक लोगों की जान गई है।ब्रिटिश शासन के दौरान बनाए गए इस ब्रिज को मार्च से ही जीर्णोद्धार के लिए बंद कर दिया गया था। रविवार की रात पुल टूटने से ठीक चार दिन पहले इसे जनता के लिए फिर से खोला गया था।लाइव लॉ से बात करते हुए राजकोट जिला एसोसिएशन के सदस्य ने भी पुष्टि की कि उन्होंने इस घटना में शामिल आरोपियों का...
केरल हाईकोर्ट ने विवादास्पद 'यौन उत्तेजक पोशाक' टिप्पणी करने वाले सेशन जज के ट्रांसफर के आदेश को रद्द किया
केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने कोझीकोड के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एस. कृष्णकुमार के ट्रांसफर के आदेश को रद्द कर दिया, जिन्होंने सिविक चंद्रन के मामले में विवादास्पद 'यौन उत्तेजक पोशाक' टिप्पणी की थी।जस्टिस एके जयशंकरन नांबियार और जस्टिस मोहम्मद नियास सी पी की खंडपीठ ने न्यायिक अधिकारी की रिट अपील की अनुमति दी और जज को पीठासीन अधिकारी, श्रम न्यायालय, कोल्लम के पद पर ट्रांसफर करने के रजिस्ट्रार जनरल के आदेश को खारिज कर दिया।सत्र न्यायाधीश ने रिट अपील में ट्रांसफर के खिलाफ उनकी याचिका...
'राज्य अंतरधार्मिक जोड़े को शादी करने से नहीं रोक सकता': दिल्ली हाईकोर्ट ने विदेशी नागरिकों की विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह रजिस्ट्रेशन की मांग को लेकर दायर याचिका पर कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत विदेशी नागरिकों के विवाह रजिस्टर्ड करने के अधिकार के मुद्दे को उठाने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए बुधवार को कहा कि "कोई वजह नहीं" कि राज्य अंतरधार्मिक जोड़े को शादी करने से रोक सकता है।जस्टिस यशवंत वर्मा छह महीने से अधिक समय से राष्ट्रीय राजधानी में रहने वाले दो अंतरधार्मिक विदेशी नागरिकों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जो भारत में रहने और विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी करने का इरादा रखते हैं।जोड़े में महिला कनाडाई नागरिक है और...
मप्र हाईकोर्ट ने नारेबाजी कर रही भीड़ के बीच हवा में गोलियां चलाकर अपनी रिहाई का जश्न मनाने वाले आरोपी की जमानत रद्द की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, ग्वालियर खंडपीठ ने हाल ही में उस आरोपी की जमानत रद्द कर दी, जिसने उसके पक्ष में नारे लगाने वाली भीड़ के बीच हवा में गोलियां चलाकर और उसकी रिहाई पर उसे माला पहनाकर रिहाई का जश्न मनाया था।जस्टिस जीएस अहलूवालिया ने इस तरह के व्यवहार पर आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी आरोपी के इस तरह के महिमामंडन से समाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।उन्होंने कहा,कई व्यक्तियों की भीड़ द्वारा अभियुक्त की रिहाई पर उसकी महिमा का यह महिमामंडन निश्चित रूप से समाज पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। इसके अलावा,...
पूर्वोत्तर दिल्ली दंगे: कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की जांच में त्रुटि पाई जाने पर पूछा कि क्या एफआईआर में आरोपी का गलत नाम लेने पर कार्रवाई की गई
दिल्ली के एक सत्र न्यायालय ने 2020 के पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले की दिल्ली पुलिस की जांच में त्रुटि पाते हुए इस मामले में अभियोजन पक्ष के "परस्पर विरोधी रुख" पर डीसीपी से स्पष्टीकरण मांगा है, जहां शुरू में 30 शिकायतों को एक साथ रखा गया था, वहीं पिछले महीने जांच अधिकारी ने उक्त शिकायतों की वापसी की मांग करते हुए आवेदन दायर किया।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्तय प्रमचला ने मंगलवार को पारित आदेश में कहा,"कई सवाल उठते हैं कि आजाद सिंह की शिकायत में चौथा नाम स्याही से क्यों काटा गया? यह...
धारा 138 एनआई अधिनियम | कंपनी को आरोपी बताए बिना चेक अनादर के लिए निदेशक पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने दोहराया कि जब किसी कंपनी द्वारा जारी किया गया चेक अनादरित हो जाता है, तो उसके निदेशक के खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत अभियोजन जारी नहीं रहेगा, यदि कंपनी को आरोपी के रूप में नहीं रखा गया है।जस्टिस ए बधारुद्दीन ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कानून पर भरोसा करते हुए कहा कि कंपनी के निदेशक के खिलाफ अभियोजन केवल इस कारण से है कि निदेशक ने चेक पर हस्ताक्षर किए हैं, अगर कंपनी को मामले में आरोपी के रूप में पेश नहीं किया जाता है तो वह कायम नहीं रहेगा।"इस मामले...
'महापदयात्रा' केवल 600 किसानों के साथ आयोजित की जा सकती है: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने अमरावती परिक्षण समिति द्वारा घोषित 'महा पदयात्रा' पर उसके द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को संशोधित करने से इनकार कर दिया।समिति ने आंध्र प्रदेश राज्य में तीन राजधानियों की प्रस्तावित योजना के खिलाफ अपना विरोध व्यक्त करने के लिए अमरावती से अरासविल्ली तक 'महा पदयात्रा' की घोषणा की है।हाईकोर्ट ने पिछले महीने पारित आदेश में निम्नलिखित निर्देश जारी किए थे:i) प्रथम याचिकाकर्ता-न्यास को केवल 600 लोगों के साथ जुलूस निकालने की अनुमति है, जो किसान होंगे।ii) इन 600 व्यक्तियों के नाम और...
दो व्यक्तियों के बीच अनुकंपा नियुक्ति की अनुमति देने वाले व्यक्तियों के बीच अनुबंध राज्य पर बाध्यकारी नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि कर्नाटक सिविल सेवा (अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति) नियम, 1996 के तहत दो व्यक्तियों के बीच अनुकंपा नियुक्ति की अनुमति देने वाला समझौता राज्य के खिलाफ लागू नहीं किया जा सकता।जस्टिस एस जी पंडित की एकल पीठ ने मंजुला की याचिका खारिज कर दी। याचिका में पुलिस उपायुक्त, सशस्त्र रिजर्व बल को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए उनके आवेदन पर विचार करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।याचिकाकर्ता का यह दावा था कि वह दिवंगत एच.एस.सिद्धाराजू की कानूनी रूप से विवाहित पत्नी है, जो...
भारतीय क्षेत्र से बाहर रहने वाले व्यक्ति के खिलाफ बंदी प्रत्यक्षीकरण का रिट जारी नहीं किया जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, इंदौर खंडपीठ ने हाल ही में कहा कि वह भारत के क्षेत्र से बाहर रहने वाले व्यक्ति के खिलाफ बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) का रिट जारी नहीं कर सकता।जस्टिस विवेक रूस और जस्टिस ए.एन. केशरवानी ने कहा कि याचिका खारिज किए जाने योग्य है, क्योंकि याचिकाकर्ता भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपनी शक्ति के दायरे से बाहर किसी चीज के लिए प्रार्थना कर रहा है।पूर्वोक्त से यह स्पष्ट है कि हाईकोर्ट के पास उन सभी क्षेत्रों में शक्ति होगी जिनके संबंध में वह किसी भी व्यक्ति या...



















