मुख्य सुर्खियां
संज्ञेय अपराध का खुलासा होने पर सामग्री की सत्यता की जांच नहीं कर सकते: केरल हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार का मामला रद्द करने की मांग को लेकर दायर पुलिसकर्मी की याचिका खारिज की
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि ऐसे मामले में सामग्री की सत्यता की जांच, जहां अभियोजन पक्ष द्वारा लगाए गए आरोप संज्ञेय अपराध का खुलासा करते हैं, सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अपराधी कार्यवाही रद्द करने के लिए अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए हाईकोर्ट के विचार योग्य नहीं है।जस्टिस के बाबू ने कहा,यह घिसी-पिटी बात है कि आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की शक्ति का प्रयोग सावधानी के साथ किया जाना चाहिए और वह भी दुर्लभतम मामलों में और इस न्यायालय द्वारा अंतिम रिपोर्ट या शिकायत में लगाए गए आरोपों की...
दिल्ली कोर्ट ने फ्लैट की फर्जी बुकिंग के मामले में सुपरटेक और उसके एमडी को समन जारी किया
पटियाला हाउस कोर्ट के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की एक अदालत ने रियल एस्टेट कंपनी के प्रोजेक्ट में फ्लैट की कथित फर्जी बुकिंग से संबंधित मामले में सुपरटेक लिमिटेड और उसके प्रबंध निदेशक राम किशोर अरोड़ा को समन जारी किया।मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट यशदीप चहल ने कहा कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि सुपरटेक ने शिकायतकर्ता के अनुरोधों पर निष्पक्ष रूप से काम नहीं किया और उसके बचाव में आने के बजाय उसने "उल्लंघन" जारी रखने का विकल्प चुना और राशि वापस करने से इनकार कर दिया।न्यायाधीश ने इस आरोप पर भी ध्यान दिया कि...
कृष्ण जन्मभूमि विवाद: कोर्ट के आदेश पर ईदगाह के सर्वेक्षण के दौरान एएसआई अधिकारियों की उपस्थिति की मांग वाली याचिका मथुरा कोर्ट में दायर
श्रीकृष्ण जन्मस्थान-शाही ईदगाह विवाद (Sri Krishna Janmabhumi Dispute) में कोर्ट के 22 दिसंबर के आदेश के अनुसार ईदगाह मस्जिद परिसर के निरीक्षण/सर्वेक्षण के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारियों की उपस्थिति की मांग करते हुए मथुरा की एक अदालत के समक्ष एक नई याचिका दायर की गई है।यह याचिका अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष दिनेश शर्मा ने हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष (अधिवक्ता शैलेश दुबे के माध्यम से) विष्णु गुप्ता द्वारा दायर वाद (भगवान बालकृष्ण बनाम इंतेजामिया समिति)...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ‘झूठी’ मेडिकल रिपोर्ट तैयार करने के आरोप में दो डॉक्टरों के खिलाफ एनएमसी को जांच के आदेश दिए
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (पूर्व में भारतीय चिकित्सा परिषद) को दो डॉक्टरों के आचरण की जांच करने का निर्देश देते हुए कहा है कि प्रथम दृष्टया यह पाया गया है कि उन्होंने घायल व्यक्ति के साथ मिलकर एक झूठी मेडिकल रिपोर्ट तैयार की थी, ताकि आरोपियों को गलत तरीके से नुकसान पहुंचाया जा सके। जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने वीबीआरओएस अस्पताल, सहारनपुर में काम करने वाले डॉक्टरों (ललित कौशिक और इमरान) के आचरण की जांच करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने पाया कि घायल व्यक्ति को लगी...
वकील को मुवक्किल के साथ पत्राचार का खुलासा करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, यह विशेषाधिकार प्राप्त: बॉम्बे हाईकोर्ट ने वकील को दिया गवाह सम्मन रद्द किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा, वकील और मुवक्किल के बीच पत्राचार विशेषाधिकार प्राप्त है और एक वकील को मुकदमे में इस प्रकार के पत्राचार की पुष्टि करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है, भले ही यह पहले से ही किसी अन्य पक्ष द्वारा ट्रायल कोर्ट को बता दिया गया हो।उक्त टिप्पणी के साथ कोर्ट ने वकील को दिया गवाह सम्मन रद्द कर दिया।कोर्ट ने कहा,"इसलिए भले ही याचिकाकर्ता और उनके मुवक्किल श्री दारा भरूचा, जो अब मृतक हैं, के बीच 11 जनवरी, 2004 के पत्राचार को पहले से ही ट्रायल कोर्ट के सामने बताया जा...
क्या एनटीपीसी यह शर्त रख सकता है कि लॉ ऑफिसर की पोस्ट के उम्मीदवारों को CLAT-PG पास करना आवश्यक है? सुप्रीम कोर्ट विचार करेगा
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (NTPC) में सहायक विधि अधिकारी (Assistant Law Officer) के पद पर आवेदन करने वाले आवेदकों के लिए CLAT को पास करना अनिवार्य करने वाली शर्त को गैरकानूनी, अवैध और संविधान के दायरे से बाहर घोषित करने की याचिका पर नोटिस जारी किया। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ याचिकाकर्ता ऐश्वर्या मोहन द्वारा दायर एक विशेष अवकाश याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो एनटीपीसी में ईओ लेवल पर सहायक विधि अधिकारी के पद के उमीदवार हैं और कोचीन विज्ञान और...
श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद : मथुरा मस्जिद कमेटी ने कोर्ट के 'सर्वे' आदेश के खिलाफ आपत्ति दाखिल की
शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी ने सोमवार को मथुरा कोर्ट के समक्ष एक आवेदन दायर कर श्री कृष्ण जन्मस्थान-शाही ईदगाह विवाद मामले में मस्जिद परिसर के 'सर्वेक्षण' करने के पिछले महीने के कोर्ट के आदेश पर आपत्ति जताई। अपने आदेश में सिविल जज III सोनिका वर्मा ने सिविल कोर्ट अमीन (जिसे अदालत का अधिकारी भी कहा जाता है) को विवादित स्थल का दौरा करने और सर्वेक्षण करने और 20 जनवरी तक अदालत के समक्ष एक रिपोर्ट (नक्शे के साथ) जमा करने का निर्देश दिया था।यह आदेश हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बेबी पाउडर के टेस्ट के लिए 'खराब' मानकों का उपयोग करने पर महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाई, कोर्ट ने कहा- COVID का बहाना मत बनाओ
बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने मंगलवार को महाराष्ट्र सरकार के खाद्य और प्रशासन विभाग (एफडीए) को कथित रूप से खराब मानकों का उपयोग करने और जॉनसन एंड जॉनसन के खिलाफ किसी भी कार्रवाई के लिए 2.5 साल से अधिक समय लेने के लिए फटकार लगाई।जस्टिस गौतम पटेल ने पूछा,“आपको सार्वजनिक स्वास्थ्य के वाहक और चैंपियन माना जाता हैं। मैं उल्टा पक्ष मानूंगा कि एक बेबी पाउडर तीसरे दर्जे की गुणवत्ता का है और इससे मौतें हो सकती हैं। क्या यह आपकी तात्कालिकता की भावना है?जब राज्य ने प्रतिक्रिया में COVID का हवाला...
अनधिकृत कब्जा करने वाले को भी संपत्ति के मालिक को 'कानून द्वारा प्रदान किए गए तरीके' से बेदखल करना चाहिए: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दोहराया कि कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही एक किरायेदार को संपत्ति से बेदखल किया जा सकता है और इसलिए, संपत्ति का मालिक कानून द्वारा प्रदान किए गए तरीके के अलावा किसी अन्य तरीके से जबरन कब्जा वापस नहीं ले सकता।मालिकों द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस मनोज कुमार तिवारी की सिंगल जज बेंच ने कहा,"हालांकि, यह कानून की स्थापित स्थिति है कि संपत्ति के असली मालिक के खिलाफ निषेधाज्ञा नहीं दी जा सकती है, लेकिन यह न्यायशास्त्र में समान रूप से स्थापित है कि...
सीएससी कार्यालय में कर्मचारियों की उपस्थिति के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम शुरू करें, सुनिश्चित करें कि मामले की फाइलें सुबह 10 बजे तक हाईकोर्ट पहुंचें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को निर्देश दिए
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने मुख्य सरकारी वकील के कार्यालय से कोर्ट में फाइलों के आने में देरी पर आपत्ति जताते हुए प्रमुख सचिव (विधि) और एलआर, यूपी सरकार को सीएससी के कार्यालय में दो सप्ताह के भीतर बायोमेट्रिक सिस्टम शुरू करने का निर्देश दिया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कार्यालय के कर्मचारी समय पर पहुंचें।जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया, जिसमें राज्य की ओर से पेश सरकारी वकील ने इस आधार पर मामले को स्थगित करने की प्रार्थना की...
ट्रेनिंग, कोचिंग सर्विस 'शैक्षणिक संस्थान' के अंतर्गत नहीं आतीं, कोई जीएसटी छूट उपलब्ध नहीं: केरल एएआर
केरल अथॉरिटी फॉर एडवांस रूलिंग (एएआर) ने फैसला सुनाया कि जीएसटी छूट का दावा करने के लिए ट्रेनिंग और कोचिंग सर्विस "शैक्षणिक संस्थान" की परिभाषा के तहत नहीं आती ।एस.एल. श्रीपार्वती और अब्राहम रेन एस की दो सदस्यीय पीठ ने देखा कि वर्तमान में लागू किसी भी कानून द्वारा मान्यता प्राप्त योग्यता प्राप्त करने के लिए कोर्स के एक भाग के रूप में शिक्षा के माध्यम से सेवाएं प्रदान करने वाले संस्थान और अनुमोदित व्यावसायिक शिक्षा कोर्स के भाग के रूप में शिक्षा प्रदान करने में लगे हुए हैं। "शैक्षणिक संस्थान" की...
कानून पति को पत्नी की सहमति और जानकारी के बिना उसका घरेलू सामान और ज्वैलरी ले जाने की अनुमति नहीं देता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि कानून पति को पत्नी की सहमति और जानकारी के बिना उसकी ज्वैलरी सहित घरेलू सामान ले जाने की अनुमति नहीं देता।जस्टिस अमित महाजन ने यह देखते हुए कि किसी भी व्यक्ति को इस बहाने से कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती कि पक्षकार मुकदमेबाजी कर रहे हैं, कहा,"सिर्फ इसलिए कि स्त्रीधन के संबंध में पत्नी की शिकायत लंबित है, इसका मतलब यह नहीं कि पति को चुपके से पत्नी को वैवाहिक घर से बाहर फेंकने और सामान ले जाने की अनुमति दी जा सकती है।"अदालत ने एक व्यक्ति को उसकी पत्नी...
मकोका | मुकदमा चलाने की अनुमति से इनकार न्यायिक हिरासत के विस्तार के आदेश को अमान्य नहीं करता: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मामले में कहा कि अदालत जब किसी आरोपी की न्यायिक हिरासत बढ़ा देती है तो मुकदमा चलाने की मंजूरी से इनकार हिरासत के बढ़ाने को अमान्य नहीं कर देता।उक्त टिप्पणी के साथ कोर्ट ने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम, 1999 के तहत एक मामले में डिफॉल्ट जमानत देने से इनकार कर दिया।कोर्ट ने कहा,"एक बार, जब विशेष अदालत ने कारण बताते हुए जांच की अवधि को 180 दिनों तक बढ़ा दिया है तो मुकदमे की मंजूरी से इनकार से विशेष अदालत द्वारा दी गई 90 दिनों की विस्तारित अवधि खत्म नहीं...
फेशियल रिकग्निशन सिस्टम सीसीटीवी के माध्यम से लोगों को ट्रेस नहीं करती, इसका इस्तेमाल सार्वजनिक सुरक्षा के लिए किया जाता है: हैदराबाद पुलिस ने हाईकोर्ट को बताया
हैदराबाद शहर के पुलिस कमिश्नर सीवी आनंद ने तेलंगाना हाईकोर्ट को सूचित किया है कि फेशियल रिकग्निशन सिस्टम एक अकेला उपकरण है जिसका उपयोग सार्वजनिक सुरक्षा के लिए अपराधों को रोकने और उनका पता लगाने के लिए किया जाता है।उपकरण का उपयोग मुख्य रूप से संदिग्ध आतंकवादी, आदतन अपराधियों, खूंखार अपराधियों, लापता व्यक्तियों, अज्ञात शवों आदि की पहचान करने के लिए किया जाता है। यह सार्वजनिक स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों से जुड़ा नहीं है और वास्तविक समय की प्रोफाइलिंग/सामूहिक निगरानी के लिए उपयोग नहीं किया जाता...
दिल्ली यूनिवर्सिटी एडमिशन: हाईकोर्ट ने CUET, 2022 के लिए सीट आवंटन नीति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट, 2022 (CUET) से कॉलेजों में विभिन्न ग्रेजुएशन कोर्स में एडमिशन के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी की नीति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।जस्टिस विभु बाखरू की अवकाश पीठ ने कहा कि याचिका निराधार है और यह मानने का कोई प्रशंसनीय कारण नहीं कि कॉमन सीट आवंटन सिस्टम (CSAS) मनमाना, अनुचित और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 या 21 का उल्लंघन है।अदालत दो उम्मीदवारों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने सीएसएएस को चुनौती देने के अलावा, अपने कोर्स...
सड़कों से होर्डिंग हटाने के 18 साल पुराने आदेश के उल्लंघन पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर
काउंसिल ऑफ इंजीनियर्स ने हाल ही में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष हाइवे, मेन रोड और सड़क के किनारे लगे साइनबोर्ड, होर्डिंग और विज्ञापन बोर्ड को हटाने के मामलों में अधिकारियों की कथित निष्क्रियता के खिलाफ एक अवमानना याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है अधिकारियों द्वारा बोर्ड को न हटाना दो दशक पुराने आदेश का उल्लंघन है। काउंसिल ऑफ इंजीजियर्स अखिल भारतीय स्तर का संगठन है, याचिका उसके संगठन और अध्यक्ष, दोनों की ओर से दायर की गई है।याचिकाकर्ताओं ने पंजाब सिविल सचिवालय के मुख्य सचिव के...
महिला जज के साथ दुर्व्यवहार| इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी वकील को यूपी की अदालतों में प्रैक्टिस करने से रोका, जज को सुरक्षा देने के आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुलंदशहर जिले में तैनात एक महिला जज के साथ दुर्व्यवहार करने वाले एक वकील को उत्तर प्रदेश की अदालतों में प्रैक्टिस करने से रोक दिया है। कोर्ट ने उसे 12 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट के समक्ष पेश होने का भी आदेश दिया है।जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस शिव शंकर प्रसाद की खंडपीठ ने सोमवार को बुलंदशहर के खुर्जा की बाहरी अदालत में तैनात महिला न्यायिक अधिकारी की ओर से दिए गए संदर्भ पर आपराधिक अवमानना कार्यवाही सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।न्यायालय ने...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पत्नी की भरणपोषण याचिका स्थानांतरित करने की पति की याचिका खारिज की, कहा-पति का इरादा केवल पत्नी को परेशान करना है
कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में एक पति की याचिका खारिज कर दिया, जिसमें उसने बर्दवान स्थित फैमिली कोर्ट में पत्नी की ओर से दायर धारा 125 सीआरपीसी कार्यवाही को ट्रांसफर करने की मांग की थी। पत्नी ने पति से मुआवजे की मांग की थी।जस्टिस शम्पा दत्त (पॉल) की पीठ फैसले में कहा कि पति की यह प्रार्थना कि मामले को बर्दवान अदालत को छोड़कर किसी भी अदालत में स्थानांतरित किया जा सकता है, यह प्रदर्शित करता है कि उसका एकमात्र इरादा पत्नी को परेशान करना है।मामलापुनरीक्षणवादी/याचिकाकर्ता का यह मामला था कि पति और...
सीआरपीसी की धारा 125 | पत्नी और बच्चों की आर्थिक मदद करने के लिए पति बाध्य, उन्हें पालने की जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में देखा कि पति अपनी कानूनी रूप से विवाहित पत्नी और बच्चों को वित्तीय रूप से सहायता देने के लिए बाध्य है और वह उन्हें बनाए रखने की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।जस्टिस समीर जे. दवे ने कहा कि पिता और पति होने के नाते पुरुष का सामाजिक और कानूनी कर्तव्य है कि वह अपनी पत्नी और बच्चों को उसी तरह का जीवन स्तर प्रदान करे, जिसका वे अलगाव से पहले आनंद उठाते थे।कोर्ट ने कहा,"पति का यह कर्तव्य है कि वह अपनी पत्नी का भरण-पोषण करे और उसे और उनके बच्चों को वित्तीय रूप से सहायता दें और...
सीआरपीसी की धारा 82 के तहत उद्घोषणा जारी करने और आरोपी की पेशी के लिए दो अलग-अलग तारीख दी जाएं : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट से कहा
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 'उद्घोषणा' (Publication Of Proclamation) जारी करने से संबंधित सीआरपीसी की धारा 82 के उल्लंघन को रोकने के प्रयास में न्यायिक मजिस्ट्रेटों की अदालतों को उद्घोषणा में दो अलग-अलग तिथियां देने की सलाह दी है; पहली 15-20 दिनों के भीतर उद्घोषणा का प्रकाशन सुनिश्चित करने के लिए और दूसरी 30 दिनों के बाद अभियुक्तों की पेशी सुनिश्चित करने के लिए।जस्टिस गुरबीर सिंह की एकल पीठ ने कहा,“न्यायिक मजिस्ट्रेटों की अदालतों को सीआरपीसी की धारा 82 के प्रावधानों को अक्षरशः और सच्ची भावना...
















