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आईपीसी की धारा 498A: कर्नाटक हाईकोर्ट ने ननद पर प्रताड़ना के आरोप में दर्ज आपराधिक मामला खारिज किया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने वह आपराधिक मामला खारिज कर दिया, जिसमें महिला द्वारा अपनी ननद के खिलाफ शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के "आरोप" लगाए गए थे।जस्टिस मोहम्मद नवाज की एकल न्यायाधीश की पीठ ने महिला द्वारा दायर याचिका स्वीकार कर ली, जिसे भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498-ए, 323, 504 सपठित धारा 149 के तहत अन्य आरोपियों के साथ चार्जशीट किया गया।कोर्ट ने कहा,'शिकायतकर्ता की मां और भाइयों के बयानों में याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई विशिष्ट आरोप नहीं लगाया गया।'शिकायतकर्ता का आरोप है कि दहेज के लिए उसके पति...
'आजादी का अमृत महोत्सव' नागरिकों के कल्याण से जुड़ा, लेकिन पुलिस प्रशासन के लिए अब भी औपनिवेशिक ढांचे के साथ रहना ज्यादा सहज: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में सुनवाई के दरमियान टिप्पणी की, "75 वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के बाद से, सरकार 'आजादी-का-अमृत महोत्सव' मना रहा है और देश के नागरिकों के कल्याण की संभावित दृष्टि से इसे 'अमृत काल' करार दिया गया है, हालांकि पुलिस प्रशासन को अब भी औपनिवेशिक संरचना के साथ रहना अधिक सहज महसूस होता है।"हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका में राज्य की ओर से दायर एक जवाबी हलफनामे पर आपत्ति जताते हुए कहा कि आवेदक आपराधिक मंशा का है।जस्टिस मंजू रानी चौहान की खंडपीठ ने जवाबी हलफनामे के अभिसाक्षी...
इस साल की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत में 97 लाख से अधिक मामले निपटाए गए
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के मार्गदर्शन और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और NALSA के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस संजय किशन कौल के नेतृत्व में देश भर के कानूनी सेवा प्राधिकरणों ने सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वर्ष 2023 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया। नालसा को प्राप्त जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय लोक अदालत में 11 फरवरी शाम 7.30 बजे तक 97.54 लाख प्रकरणों का निपटान किया। निपटाए गए मामलों में लगभग 17.13 लाख लंबित मामले और 80.50 लाख मुकदमेबाजी से पूर्व के मामले शामिल...
केरल हाईकोर्ट ने ISIS में शामिल होने के लिए सीरिया जाने का प्रयास करने के आरोपियों की सजा निलंबित करने से इनकार किया, कहा- उन्हें रिहा करना सुरक्षित नहीं
केरल हाईकोर्ट ने उन तीन लोगों की सजा निलंबित करने की अर्जी खारिज कर दी, जिन्हें पिछले साल कथित रूप से आईएसआईएस में शामिल होने के लिए सीरिया जाने की कोशिश करने के लिए दोषी ठहराया गया था। आवेदकों ने तर्क दिया कि वे पांच साल से अधिक समय तक हिरासत में रहे हैं और यहां तक कि मुकदमे के दौरान उन्हें कभी जमानत पर रिहा नहीं किया गया।जस्टिस अलेक्जेंडर थॉमस और जस्टिस सोफी थॉमस की खंडपीठ ने कहा कि सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम केंद्रीय जांच ब्यूरो (2022) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा गया कि सीआरपीसी की धारा...
AIBE XVII : बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने संशोधित आंसर की जारी की
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने अखिल भारतीय बार परीक्षा (एआईबीई) XVII के सेट ए, बी, सी और डी के लिए संशोधित आंसर की जारी की है। एआईबीई 17 की आंसर शीट (अंग्रेजी सेट ए, सेट बी, सेट सी, और सेट डी) परीक्षा आयोजित होने के बाद 5 फरवरी को जारी की गई थी, हालांकि बाद में इसे हटा दिया गया, कथित तौर पर आंसर की में गलत उत्तर थे।बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने 5 फरवरी को अखिल भारतीय बार परीक्षा XVII आयोजित की।बीसीआई के अनुसार, निष्पक्ष परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए 53 शहरों और 261 केंद्रों में...
सरकार लुटेरों की तरह कार्य नहीं कर सकती, बिना मुआवजे के निजी भूमि लेना संवैधानिक गारंटी के खिलाफ: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड (KIADB) और उसके अधिकारियों की कार्रवाइयों पर गहरा दुख व्यक्त किया, जो लगभग 15 वर्षों तक भूस्वामियों को मुआवजा देने में विफल रहे, जिनकी संपत्तियों को 2007 में सार्वजनिक उद्देश्य के लिए अधिग्रहित किया गया था।जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित ने एमवी गुरुप्रसाद नाम के व्यक्ति द्वारा दायर याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कहा,"सरकार नागरिकों की भूमि के लुटेरे की तरह कार्य नहीं कर सकती।"उन्होंने आगे कहा,"मुआवजे के बिना कथित सार्वजनिक उद्देश्य के...
वक्फ अधिनियम से संबंधित रिट याचिकाओं पर विचार बंद करने का समय, पक्षकारों को पहले वैधानिक अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि समय आ गया है कि वह वक्फ से संबंधित निर्देशों की मांग करने वाली रिट याचिकाओं पर विचार करना बंद करे और इस बात पर जोर दे कि पक्षकार पहले वक्फ अधिनियम के तहत अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए।जस्टिस ए.के. जयशंकरन नांबियार और जस्टिस मोहम्मद नियास सी.पी. की खंडपीठ ने उस व्यक्ति द्वारा दायर रिट याचिका खारिज कर दिया, जिसने पन्नूर करंदोमथुक जुमा-अठ पल्ली समिति के वर्तमान वंशानुगत मुथावल्ली होने का दावा किया था और उस आदेश को चुनौती दी थी जिसके द्वारा वक्फ बोर्ड ने...
जामिया हिंसा मामले में शरजील इमाम, अन्य को डिस्चार्ज करने के आदेश के खिलाफ दिल्ली पुलिस की याचिका पर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने 2019 के जामिया हिंसा मामले में शारजील इमाम, सफूरा जरगर, आसिफ इकबाल तन्हा और आठ अन्य को आरोपमुक्त करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ दिल्ली पुलिस की याचिका पर नोटिस जारी किया।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि इस मामले में ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों का पुलिस की आगे की जांच या मुकदमे पर कोई असर नहीं पड़ेगा।इसके साथ ही मामले को 16 मार्च को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।विस्तृत प्रारंभिक सुनवाई के बाद अदालत ने कहा,"आगे की जांच की जाएगी, इसलिए जांच...
सक्षम व्यक्ति के लिए बेरोजगारी कोई बहाना नहीं, उसे पत्नी और बच्चों के भरण-पोषण के लिए रोजगार तलाशना चाहिए : कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि एक सक्षम शरीर वाले व्यक्ति को अपनी पत्नी और बच्चे की भी देखभाल करनी ही है, भले ही उसके पास कोई काम न हो। जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल न्यायाधीश की पीठ ने सीआरपीसी की धारा 125 के तहत 10,000 रुपये प्रति माह की पारिवारिक अदालत के आदेश पर सवाल उठाते हुए एक पति द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए यह अवलोकन किया।पति ने दलील दी थी कि वह पत्नी को गुजारा भत्ता देने की स्थिति में नहीं है, क्योंकि वह खुद कई बीमारियों से पीड़ित है और प्रति माह 15,000 रुपये से अधिक...
‘कुछ छिपाया नहीं गया, कम्युनिकेशन गैप के लिए माफी मांगते हैं’: सीनियर एएजी ने जम्मू- कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट से कहा
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में सीनियर एडिशनल एडवोकेट जनरल एआर मलिक को कोर्ट द्वारा समन किए गए सरकारी अधिकारी की वास्तविक पहचान का खुलासा करने में विफल रहने के अपने आचरण की व्याख्या करने के लिए कहा था।सीनियर एडिशनल एडवोकेट जनरल एआर मलिक ने हलफनामा दायर किया, जिसमें परिस्थितियों की व्याख्या की गई है और उनकी ओर से कम्युनिकेशन गैप के लिए माफी मांगी गई है।हाईकोर्ट ने मलिक को अतिरिक्त जिला आयुक्त को जिला आयुक्त अनंतनाग पेश कर अदालत को गुमराह करने के लिए फटकार लगाई थी।याचिकाकर्ता के...
निर्वासन आदेश उस अपराध के आधार पर दर्ज नहीं किया जा सकता जिसमें अभियुक्त को बरी कर दिया गया था: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने हाल ही में कहा कि निर्वासन आदेश उस अपराध के आधार पर दर्ज नहीं किया जा सकता जिसमें अभियुक्त को बरी कर दिया गया था।जस्टिस जी ए सनप ने निर्वासन के आदेश को रद्द करते हुए कहा,"जिन अपराधों में याचिकाकर्ता को बरी कर दिया गया था, उन पर निर्भरता से संकेत मिलता है कि जांच त्रुटिपूर्ण थी। इस बात पर जोर देने की आवश्यकता है कि इस तरह के आदेश को पारित करने के लिए व्यक्तिपरक संतुष्टि वस्तुनिष्ठ सबूत के आधार पर आनी चाहिए।“रिट याचिकाकर्ता ने पुलिस उपायुक्त, अमरावती द्वारा...
यौन पीड़िता ने स्कूल काउंसलर से खुद पर हुए हमले की जानकारी छह साल बाद साझा की, केरल की पोक्सो कोर्ट ने कहा, देरी घातक नहीं, 63 वर्षीय दोषी
फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पोक्सो), तिरुवनंतपुरम ने 63 वर्षीय एक व्यक्ति को पोक्सो एक्ट 2012 की धारा 9(m) सहपठित धारा 10 के तहत 7 साल की कारावास की सजा सुनाई है। उसने 2014 में पड़ोस की 9 साल की लड़की का यौन उत्पीड़न किया था।घटना का खुलासा 6 साल बाद हुआ जब पीड़िता ने अपने स्कूल काउंसलर से बात की। अदालत ने पाया कि एफआईआर दर्ज करने में 6 साल की देरी को अभियोजन पक्ष द्वारा संतोषजनक ढंग से समझाया गया था, और उसे स्वीकार कर लिया।विशेष न्यायाधीश आज सुदर्शन ने अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए कहा,"शोध और...
समरी सूट को कमर्शियल सूट में बदलने के बाद भी सीपीसी के तहत समरी जजमेंट के लिए आवेदन सुनवाई योग्य: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एक आदेश में कहा कि सीपीसी के आदेश 13-ए के तहत सिविल कोर्ट के समक्ष संक्षिप्त निर्णय के लिए एक व्यक्ति का आवेदन, जिसका समरी सूट कमर्शियल सूट में परिवर्तित हो गया है, सुनवाई योग्य है।जस्टिस संदीप वी मार्ने ने कहा कि इस तरह के रूपांतरण से याचिकाकर्ता को आदेश 13-ए के तहत संक्षिप्त निर्णय लेने का अधिकार और आदेश 37 नियम 3 के तहत फैसला सुनाने का अधिकार नहीं खोना पड़ेगा।कोर्ट ने कहा,"आदेश XIII ए के नियम एक के उप-नियम 3 के प्रावधानों की व्याख्या यह नहीं की जा सकती है कि वादी...
सीपीसी अनुच्छेद 226 की कार्यवाही पर लागू नहीं, कोर्ट रिट याचिका पर पक्षकार के पेश न होने पर भी गुण-दोष के आधार पर फैसला कर सकता है: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए हाल ही में याचिकाकर्ता की अनुपस्थिति में एक रिट याचिका पर निर्णय लेने के अपने फैसले को बरकरार रखा, यह देखते हुए कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत कार्यवाही में सीपीसी के प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य नहीं था।जस्टिस विवेक अग्रवाल की पीठ ने कहा कि सीपीसी के प्रावधानों का अनिवार्य रूप से पालन करने के लिए एक रिट कोर्ट की आवश्यकता विधायिका की मंशा नहीं थी।इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि जब विधायिका का इरादा संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत...
एनसीडीआरसी मधुमेह के रोगी को 10 लाख का मुआवजा बरकरार रखा, अस्पताल ने रात भर उसके हाथ बिस्तर से बांध कर रखे थे, जिससे उसकी उंगलियां काटनी पड़ी
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने शुक्रवार को दिल्ली राज्य आयोग के एक फैसले को बरकरार रखा, जिसमें उसने मधुमेह के एक रोगी को 10 लाख का मुआवजा दिया था, जिसे अस्पताल में रात भर बिस्तर से बांध दिया गया था, जिससे उसकी उंगलियां काटनी पड़ी थी।पीठासीन सदस्य आयुक्त डॉ एसएम कांतिकर ने यह कहते हुए आदेश पारित किया कि,"ओपी अस्पताल में आईसीयू कर्मचारियों की ओर से देखभाल की ड्यूटी ठीक ढंग से नहीं पूरी की गई। राज्य आयोग का आदेश तर्कपूर्ण है और शिकायतकर्ता को उचित और पर्याप्त मुआवजा दिया गया है। मुझे...
कोर्ट को गुमराह करने के लिए जेकेएल हाईकोर्ट ने सीनियर एएजी को लगाई फटकार
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने सोमवार को सीनियर एडिशनल एडवोकेट जनरल एआर मलिक को कोर्ट को गुमराह करने के मामले फटकार लगाई। उन्होंने अतिरिक्त जिला आयुक्त को अनंतनाग जिला आयुक्त के रूप में पेश किया था। जिला आयुक्त ने याचिकाकर्ता के खिलाफ बेदखली आदेश पारित किया था, जिसके खिलाफ दायर याचिका पर अदालत ने बाद में उन्हें तलब किया था।कोर्ट ने 31 दिसंबर, 2022 को अनंतनाग के जिलाधिकारी को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का आखिरी मौका देते हुए डिफॉल्ट की स्थिति में कोर्ट के सामने पेश होने का आदेश...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (06 फरवरी, 2023 से 10 फरवरी, 2023) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 के अनुपालन के लिए सहमति/गैर-सहमति मेमो तैयार करने के समय के संबंध में अनिश्चितता को दूर करने की आवश्यकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्टपंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य को एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 के अनुपालन / गैर-सहमति मेमो तैयार करने की जगह, तारीख और समय के बारे में अनिश्चितता...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने शाहिद आज़मी मर्डर केस की सुनवाई पर लगी रोक हटाई, ट्रांसफर के लिए अभियुक्त की याचिका खारिज की
बॉम्बे हाईकोर्ट ने वकील एडवोकेट शाहिद आज़मी की 13वीं पुण्यतिथि से कुछ दिन पहले उनकी हत्या के मुकदमे को स्थानांतरित करने की याचिका खारिज कर दी। जस्टिस प्रकाश डी नाइक ने आरोपी हसमुख सोलंकी द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा," मुझे इस निष्कर्ष पर आने का कोई कारण नहीं मिला कि विद्वान न्यायाधीश आवेदक के खिलाफ पक्षपाती रहे। आवेदक के लिए यह आशंका करने के लिए कोई सामग्री नहीं है कि विद्वान न्यायाधीश के समक्ष उसकी निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो पाएगी, इसलिए कार्यवाही को किसी अन्य सत्र न्यायाधीश को...
व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से अधिक सक्रियता दिखाई जानी चाहिए: जस्टिस मदन बी लोकुर
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मदन बी लोकुर ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से अधिक सक्रियता होनी चाहिए।पीटीआई की एक खबर के अनुसार उन्होंने कहा,"व्यक्तिगत स्वतंत्रता हमारे मौलिक अधिकारों का सबसे पोषित पहलू है। और हमारी व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करना राज्य का दायित्व है, न कि हमें हमारी व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित करना, जब व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मुद्दा आता है, तब सुप्रीम कोर्ट की ओर से अधिक सक्रियता होनी चाहिए।"जस्टिस लोकुर इंटरनेशनल प्रेस...
केरल हाईकोर्ट में जनहित याचिका, खतना पर प्रतिबंध लगाने की मांग
केरल स्थित एक सांस्कृतिक संगठन, नॉन रिलिजियस सिटिजन्स (NRC) ने केरल हाईकोर्ट के समक्ष एक याचिका दायर की है और गैर-चिकित्सीय खतने की प्रथा को अवैध घोषित करने की मांग की है।याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि खतना की प्रथा एक 'क्रूर' और 'अवैज्ञानिक प्रथा' है, जिसके शिकार अक्सर बच्चे होते हैं। याचिका में इसे मानवाधिकार का उल्लंघन बताया गया है।याचिका में यह भी दावा किया गया है कि इस तरह की प्रथा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है और इसलिए अदालत इस मामले में हस्तक्षेप करने के...

















