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किसी व्यक्ति ने भाई के साथ मिलकर चाची के साथ दुष्कर्म किया हो, यह उम्मीद नहीं की जा सकती, उड़ीसा हाईकोर्ट ने आईपीसी की धारा 354 के तहत दोषसिद्धि रद्द की
उड़ीसा हाईकोर्ट ने 31 साल पुराने एक मामले में एक व्यक्ति को अपने भाई और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर अपनी चाची के साथ दुष्कर्म करने के आरोप से बरी कर दिया।जस्टिस शशिकांत मिश्रा की एकल पीठ ने अपीलकर्ता को राहत देते हुए कहा,“विद्वान सत्र न्यायाधीश खुद को यह भरोसा नहीं दिला पाए कि कि एक बड़ा भाई और छोटा भाई मिलकर अपनी चाची के साथ बलात्कार करेंगे… एक व्यक्ति से शायद ही यह उम्मीद की जा सकती है कि वह अपने छोटे भाई के मिलकर अपनी चाची की गरिमा को ठेस पहुंचाएगा। ”28.02.1992 को पीड़िता ने वर्तमान अपीलकर्ता...
चेक बाउंस मामले में शिकायतकर्ता को दी गई अंतरिम मुआवजे की राशि का कारण बताने के लिए मजिस्ट्रेट बाध्य नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि ट्रायल कोर्ट चेक बाउंस मामलों में अंतरिम मुआवजे की राशि के लिए कारण बताने के लिए बाध्य नहीं है, जब तक कि निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 143 ए में प्रदान की गई आवश्यकताओं को पूरा किया जाता है।जस्टिस अनिल पानसरे ने कहा कि धारा 143ए की संतुष्टि शिकायतकर्ता को 20 प्रतिशत अंतरिम मुआवजा देने के लिए पर्याप्त कारण है और ट्रायल कोर्ट को राशि के लिए अतिरिक्त कारण बताने की आवश्यकता धारा के उद्देश्य को विफल कर देगी।एक रिट याचिका की सुनवाई कर रही अदालत ने...
एनडीपीएस एक्ट | जब आरोपी के खिलाफ कई एफआईआर हों तो धारा 37 के तहत जमानत की दोहरी शर्तों को संतुष्ट करना आवश्यक नहींः पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि जब किसी आरोपी के खिलाफ कई एफआईआर होती हैं तो एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 के तहत तय दो शर्तें, कि आरोपी दोषी नहीं है और उसके जमानत पर रहते हुए अपराध करने की संभावना नहीं है, को संतुष्ट नहीं किया जा सकता।जस्टिस जसजीत सिंह बेदी ने कहा,"जब किसी आरोपी के खिलाफ किसी विशेष अविध में कई एफआईआर दर्ज की गई हों तो एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 के तहत परिकल्पित जुड़वां शर्तों को संतुष्ट नहीं किया जा सकता है .....एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 के तहत जमानत देने के लिए तय...
1992 में हुए वाचाथी अपराध का मामला: मद्रास हाईकोर्ट ने पुलिस, वन और राजस्व अधिकारियों की सजा बरकरार रखी, बलात्कार पीड़ितों के लिए 10 लाख मुआवजे का आदेश दिया
मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार (29 सितंबर) को तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले के वाचथी में हुए विभिन्न अपराधों के लिए उनकी दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ 126 वन अधिकारियों, 84 पुलिस कर्मियों और 5 राजस्व अधिकारियों की अपील को खारिज कर दिया। संयोगवश, आरोपी को दोषी ठहराने वाला सत्र न्यायालय का फैसला भी वर्ष 2011 में 29 सितंबर को पारित किया गया था।जस्टिस पी वेलमुरुगन ने तत्कालीन जिला कलेक्टर, जिला वन अधिकारी और पुलिस अधीक्षक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आह्वान किया।पीठ ने राज्य को बलात्कार पीड़ितों को प्रत्येक को 10...
झूठी गवाही | अदालत में दिया गया हर झूठा बयान अभियोजन का विषय नहीं हो सकता, प्रथम दृष्टया जानबूझकर इरादा होना चाहिए: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि अदालत के समक्ष झूठे बयान देने के लिए किसी पक्षकार के खिलाफ झूठी गवाही की कार्यवाही शुरू करने का निर्देश देने से पहले उसे इस बात से संतुष्ट होने पर एक राय बनानी चाहिए कि जिस व्यक्ति पर आरोप लगाया गया है, उसने जानबूझकर झूठे सबूत/बयान दिए हैं और उसके समक्ष विधिवत रखी गई सामग्रियों पर विचार करने पर इस तरह की राय का गठन होना चाहिए।जस्टिस शिवशंकर अमरन्नवर की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा,"यह हर गलत बयान नहीं है जिसका उद्देश्य अभियोजन का विषय होना है...किसी ठोस मामले पर जानबूझकर...
मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य को निजी वाहनों पर "भारत सरकार", "पुलिस" "हाईकोर्ट" जैसे स्टिकर के उपयोग को रोकने का निर्देश दिया
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में देखा कि गृह विभाग, परिवहन विभाग और पुलिस सहित राज्य प्राधिकरण यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य हैं कि निजी वाहनों पर स्टिकर और कलाकृतियां के "प्रतीक", “G” "भारत सरकार", "तमिलनाडु सरकार", "हाईकोर्ट", "पुलिस" का प्रयोग नहीं किया जाए। मुख्य न्यायाधीश एसवी गंगापुरवाला और जस्टिस पीडी औडिकेसवालु ने इस तरह की निगरानी को एक सतत प्रक्रिया बताते हुए निम्नानुसार कहा,“ऐसे वाहनों की निगरानी और सर्वेक्षण एक सतत प्रक्रिया है। प्रतिवादी अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य हैं कि...
आपराधिक मुकदमों में राज्य 'पीड़ित' नहीं, दोषमुक्ति को चुनौती देने के लिए सीआरपीसी की धारा 372 लागू नहीं कर सकता; सीआरपीसी की धारा 378 के तहत कार्यवाही हो सकती है: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना कि राज्य सरकार को सीआरपीसी की धारा 372 के तहत 'पीड़ित' नहीं माना जा सकता और बरी करने के आदेश के खिलाफ उसके द्वारा दायर अपील उक्त प्रावधान के तहत सुनवाई योग्य नहीं है।जस्टिस एस राचैया की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा कि विधायिका ने बरी किए जाने के खिलाफ अपील को प्राथमिकता देने के लिए राज्य को धारा 378 सीपीसी के तहत एक अलग प्रावधान प्रदान किया है।यह देखा गया,"जब बरी किए जाने के खिलाफ राज्य में अपील दायर करने के लिए अलग प्रावधान निर्धारित है...तो राज्य उस क्षेत्राधिकार का प्रयोग...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनजाने में बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर करने के बाद उसकी पहचान छिपाने के निर्देश दिये
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने कार्यालयों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि गर्भावस्था की मेडिकल टर्मिनेशन की मांग करने वाली बलात्कार पीड़िता गर्भवती महिला की पहचान सभी अदालती रिकॉर्डों से छिपाई जाए, जिसमें न्यायालय द्वारा पारित सभी संचार और आदेश भी शामिल हैं। जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस सुरेंद्र सिंह-प्रथम की पीठ ने याचिकाकर्ता को गर्भावस्था का मेडिकल टर्मिनेश कराने की अनुमति देते हुए कहा कि उसकी पहचान रिट याचिका में उजागर की गई थी और अनजाने में हाईकोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध आदेश में इसका...
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने चंद्रबाबू नायडू की याचिका सुनने वाले न्यायाधीशों के खिलाफ अपमानजनक सोशल मीडिया पोस्ट के लिए अवमानना नोटिस जारी किया
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार को उन सभी लोगों को अवमानना नोटिस जारी किया जो स्किल डेवेलपमेंट घोटाला मामलों में पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई करने वाले न्यायाधीशों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी पोस्ट करने में कथित रूप से शामिल थे।जस्टिस चीकाती मानवेंद्रनाथ रॉय और जस्टिस तारालादा राजशेखर राव की खंडपीठ ने नाराजगी व्यक्त की और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को उत्तरदाताओं से जुड़े खातों के वास्तविक मालिकों की पहचान करने का निर्देश दिया।आपराधिक अवमानना प्रस्ताव ...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के आधार पर व्यक्ति ने 17 साल तक मृत पिता के सरकारी आवास पर कब्जा किया, राज्य सरकार को अब देने होंगे 5 लाख रुपये
मृत सरकारी कर्मचारी के बेटे द्वारा 2006 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा पारित अंतरिम आदेश के आधार पर 17 साल की अवधि तक अपने पिता के सरकारी आवास पर कब्जा करने के लिए अब उसे दंडात्मक लगाने के बदले में राज्य सरकार को मुआवजा देने के लिए कहा गया।हालांकि बेटे को अनुकंपा के आधार पर क्लर्क के रूप में नियुक्त किया गया था और वह खुद सरकारी आवास का हकदार था, लेकिन वह जिस घर पर रह रहा था, वह उससे अलग श्रेणी का होगा।कोर्ट ने कहा कि जब मामला शुरू किया गया था तब यह तथ्य उसके संज्ञान में नहीं लाया...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने भर्ती घोटाले में सीबीआई, ईडी की जांच के लिए 'नुकसानदेह' कार्य करने पर स्पेशल सीबीआई जज को फटकार लगाई, ट्रांसफर का आदेश दिया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक तीखे फैसले में पश्चिम बंगाल के कानून मंत्री मोलॉय घटक को अलीपुर के विशेष सीबीआई जज अर्पण चटर्जी के लंबित स्थानांतरण को तुरंत लागू करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह निर्देश सीबीआई के डीआइजी और एसआईटी प्रमुख अश्विन शेनवी की ओर से दिए गए सबमिशन कि भर्ती घोटाले की जांच कर रहे एसआईटी सदस्यों को सीबीआई जज पूछताछ के लिए कोलकाता पुलिस के पास भेज रहे हैं। विशेष सीबीआई जज के कार्यों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने कहा,"मुझे एसआईटी प्रमुख ने बताया कि एक...
अनुच्छेद 22(4) | राज्य को हिरासत के 3 महीने के भीतर केरल असामाजिक गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत आदेश की पुष्टि करनी चाहिए: हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को घोषणा की कि राज्य सरकार को इसके निष्पादन की तारीख से 3 महीने के भीतर केरल असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 2007 (कापा, 2007) के तहत जारी हिरासत आदेश की पुष्टि करनी चाहिए।जस्टिस अनु शिवरामन और जस्टिस सी. जयचंद्रन की खंडपीठ ने कहा कि हालांकि संविधान का अनुच्छेद 22 (4) तीन महीने की अवधि से अधिक हिरासत में रखने पर रोक नहीं लगाता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उज्जल मंडल बनाम राज्य (1972) मामले में फैसला सुनाया कि जब तक हिरासत की तारीख से 3 महीने के भीतर पुष्टि की शक्ति का...
यूपी स्कॉलरशिप स्कैम: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेडिकल आधार पर हाइगिया एजुकेशनल ग्रुप के वाइस प्रेसिडेंट को अग्रिम जमानत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को हाइगिया एजुकेशनल ग्रुप के वाइस प्रेसिडेंट सैयद इशरत हुसैन जाफरी को मेडिकल आधार पर अग्रिम जमानत दे दी, जो यूपी के 500 करोड़ रुपये के पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप घोटाले में आरोपी हैं।कोर्ट ने जमानत देते हुए इस तथ्य को ध्यान में रखा कि आवेदक की मेडिकल स्थिति को एक्सपर्ट डॉक्टरों के पैनल द्वारा प्रमाणित किया गया है।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने 23 अगस्त के आदेश में आवेदक को अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी।जाफरी ने तब हाईकोर्ट का रुख किया जब लखनऊ की एक सत्र अदालत ने 5 अगस्त...
क्या नियमित/अग्रिम जमानत के लिए आरोपी के आवेदन में पीड़ित को शामिल किया जाना 'आवश्यक पक्ष' है: राजस्थान हाईकोर्ट फैसला करेगा
राजस्थान हाईकोर्ट जल्द ही यह तय करेगा कि क्या किसी आपराधिक मामले में पीड़ित "आवश्यक पक्ष" है और उसे सीआरपीसी की धारा 437, 438 और 439 के तहत नियमित या अग्रिम जमानत के लिए आरोपी द्वारा दायर आवेदनों में आवश्यक रूप से पक्षकार बनाया जाना चाहिए।जस्टिस अनिल कुमार उपमन ने बुधवार को इस मामले को बड़ी बेंच के पास भेज दिया।न्यायाधीश ने नीटू सिंह उर्फ नीटू सिंह बनाम राजस्थान राज्य मामले में समन्वय पीठ द्वारा की गई टिप्पणियों के आधार पर राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यालय द्वारा जारी 15 सितंबर, 2023 के स्थायी आदेश...
एक विवाहित व्यक्ति के दूसरी महिला के साथ "अवैध संबंध" का खामियाजा उसकी पत्नी, बच्चों को भुगतना पड़ता है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में एक विवाहित व्यक्ति के तलाकशुदा महिला के साथ रहने पर आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा कि उनके "अवैध संबंध" का खामियाजा उस व्यक्ति की पत्नी और बच्चों को भुगतना पड़ा। कोर्ट ने उस व्यक्ति की पत्नी के खिलाफ दंपति की सुरक्षा याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह महज एक "छिपाना" है और उसे पत्नी को 25 हजार रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया।दंपति ने आरोप लगाया कि उस व्यक्ति की पत्नी उसके घर पर आई, महिला के साथ दुर्व्यवहार किया और झूठे और तुच्छ आरोप लगाकर "एक...
ट्रेडमार्क के उपयोग को उचित ठहराने के लिए भारतीय कंपनी ने किया ब्रह्मा, विष्णु और महेश का उल्लेख, दिल्ली हाईकोर्ट ने दलील नहीं मानी; जर्मन कंपनी को अंतरिम राहत दी
एक भारतीय कंपनी ने हाल ही में ट्रेडमार्क के उपयोग को उचित ठहराने के लिए हिंदू त्रिदेव-ब्रह्मा, विष्णु और महेश का उल्लेख किया, हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट ने उसकी दलील को खारिज कर दिया। कपंनी पर एक जर्मन मेडिकल उपकरण कंपनी "वीबीएम" के चिन्ह का उल्लंघन करने का आरोप है।जर्मन कंपनी को अंतरिम राहत देते हुए जस्टिस सी हरि शंकर की पीठ ने कहा, "किसी पुष्ट दस्तावेजी साक्ष्य के अभाव में ''ब्रह्मा, विष्णु, महेश'' की सफाई कानून की कसौट पर खरा उतरने के लिए बहुत ही कमज़ोर है।"पीठ "वीबीएम" ब्रांड के तहत...
धारा 15ए एससी/एसटी अधिनियम| निवारक हिरासत के बाद आरोपी द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर पीड़ित को नोटिस देने की आवश्यकता नहीं: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी व्यक्ति की निवारक हिरासत, जिस पर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराध करने का आरोप है, के खिलाफ दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका, अधिनियम की धारा 15-ए(3) और (5) के प्रयोजनों के लिए 'संबद्ध कार्यवाही' नहीं है। ये धाराएं पीड़ित को उसके मामले से जुड़ी किसी भी अदालती कार्यवाही के लिए नोटिस और सुनवाई के अवसर का प्रावधान करती हैं, जिसमें आरोपी की जमानत, डिसचार्ज, रिहाई, पैरोल, दोषसिद्धि या सजा शामिल है।कोर्ट ने माना कि...
केरल हाईकोर्ट ने आरोपी और पीड़िता की शादी के बाद POCSO Act के तहत कार्यवाही रद्द की
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में उस व्यक्ति के खिलाफ कार्यवाही रद्द कर दी, जिस पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 और 376 और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO Act) की धारा 8 सपठित धारा 7 के तहत अपराध करने का आरोप था। कोर्ट ने उक्त कार्यवाही इस आधार पर कि अब दोनों पक्षकारों विवाहित हैं।जस्टिस गोपीनाथ पी. ने कहा,"याचिकाकर्ता और पीड़िता अब पति-पत्नी के रूप में एक साथ रह रहे हैं। इसलिए याचिकाकर्ता के खिलाफ अभियोजन जारी रखने से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होगा।"याचिकाकर्ता...
'एक प्रमुख एजेंसी होने के नाते एनआईए से कानूनी प्रक्रिया का पालन करने की अपेक्षा की जाती है': तेलंगाना हाईकोर्ट ने 'डीके बसु दिशानिर्देशों' का पालन किए बिना गिरफ्तार व्यक्ति को रिहा करने का आदेश दिया
तेलंगाना हाईकोर्ट ने एनआईए द्वारा की गई एक 34 वर्षीय व्यक्ति की गिरफ्तारी को अवैध घोषित कर दिया है और उसकी रिहाई का आदेश दिया है। कोर्ट ने बुधवार को कहा कि एक प्रमुख जांच एजेंसी होने के नाते, एनआईए से कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने की उम्मीद की जाती है।जस्टिस के लक्ष्मण और जस्टिस के सुजाना की पीठ ने यह टिप्पणी की क्योंकि उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि एनआईए ने बंदी को गिरफ्तार करते समय डीके बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित गिरफ्तारी...
मामले को ट्रांसफर करने का सेशन जज का आदेश सीआरपीसी की धारा 407 के तहत अपील योग्य नहीं: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने एक मामले के ट्रांसफर के लिए सीआरपीसी की धारा 408 के तहत सत्र न्यायाधीशों द्वारा जारी आदेश की अपीलीयता के संबंध में स्पष्टीकरण प्रदान करते हुए पुष्टि की है कि ऐसे आदेश सीआरपीसी की धारा 407 के तहत अपील योग्य नहीं हैं।सीआरपीसी की धारा 408 सत्र न्यायाधीश को अपने सत्र प्रभाग में मामलों और अपीलों को एक आपराधिक न्यायालय से दूसरे आपराधिक न्यायालय में ट्रांसफर करने का अधिकार देती है। सीआरपीसी की धारा 407 मामलों और अपीलों को ट्रांसफर करने की हाईकोर्ट की शक्ति से संबंधित है। इसकी उप-धारा...


















