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इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा हापुड घटना पर वकीलों की शिकायतें दूर करने के लिए गठित न्यायिक समिति की बैठक 16 सितंबर को होगी
इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा हापुड घटना पर वकीलों की शिकायतें दूर करने के लिए गठित न्यायिक समिति की बैठक 16 सितंबर को होगी

इलाहाबाद हाईकोर्ट हापुड घटना के संबंध में बार में उठाई गई शिकायतों के समाधान के लिए गठित न्यायिक समिति 16 सितंबर को सुबह 11:00 बजे बैठक करेगी। सीनियर रजिस्ट्रार (न्यायिक) द्वारा जारी एक नोटिस के अनुसार,“ समिति के माननीय अध्यक्ष को यह निर्देश देते हुए खुशी हो रही है कि समिति 16.09.2023 को सुबह 11.00 बजे इलाहाबाद हाईकोर्ट के समिति कक्ष में अपनी बैठक आयोजित करेगी।”इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक विशेष बैठक में हापुड घटना के संबंध में वकीलों की शिकायतों को दूर करने के लिए न्यायालय द्वारा एक न्यायिक समिति...

पत्नी और दो बेटियों के लिए मात्र 4 हजार रुपये महीने का अंतरिम भरण-पोषण पर्याप्त नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट
पत्नी और दो बेटियों के लिए मात्र 4 हजार रुपये महीने का अंतरिम भरण-पोषण पर्याप्त नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा पत्नी और उसकी दो बेटियों के पक्ष में दिया गया 4,000 रुपये प्रति माह का अंतरिम गुजारा भत्ता उनके भरण-पोषण के लिए पर्याप्त नहीं होगा।जस्टिस शंपा (दत्त) पॉल की एकल पीठ ने सीआरपीसी की धारा 127 के तहत अंतरिम गुजारा भत्ता बढ़ाने की पत्नी/याचिकाकर्ताओं की प्रार्थना को उनके आवेदन के लंबित होने के कारण 'समय से पहले' खारिज करने के मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की मांग को लेकर दायर पुनर्विचार आवेदन पर सुनवाई...

अपीलीय प्राधिकारी या संविधान का अनुच्छेद 226 निर्दिष्ट समय सीमा के साथ विलंब माफी अवधि नहीं बढ़ा सकता: पटना हाईकोर्ट
अपीलीय प्राधिकारी या संविधान का अनुच्छेद 226 निर्दिष्ट समय सीमा के साथ विलंब माफी अवधि नहीं बढ़ा सकता: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने बिहार माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (बीजीएसटी) से जुड़े मामलों में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 की सीमाओं को स्पष्ट करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने माना है कि जब कोई कानून देरी को माफ करने के लिए एक विशिष्ट समय सीमा निर्धारित करता है, तो अनुच्छेद 226 के तहत अपीलीय प्राधिकरण के पास इस निर्धारित अवधि को बढ़ाने का अधिकार नहीं है।विचाराधीन मामले में मेसर्स नारायणी इंडस्ट्री, एक साझेदारी फर्म शामिल है, जो बीजीएसटी अधिनियम के तहत एक निर्धारिती थी। याचिकाकर्ता उस...

विवाहित व्यक्ति लिव-इन रिलेशनशिप में नहीं रह सकते: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
विवाहित व्यक्ति लिव-इन रिलेशनशिप में नहीं रह सकते: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि विवाह के बिना एक साथ रहने के जोड़े की पसंद की मान्यता विवाहित लोगों को उनकी शादी के दौरान दूसरों के साथ रहने का अधिकार नहीं देती है।जस्टिस रवि नाथ तिलहरी और जस्टिस बीवीएलएन चक्रवर्ती की खंडपीठ ने एक विवाहित व्यक्ति द्वारा उस महिला को पेश करने के लिए दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज कर दिया, जिसके साथ वह रह रहा था, जिसे कथित तौर पर उसका पिता वापस ले गया था।कोर्ट ने कहा,"विवाह के बाहर रहने की किसी की पसंद का मतलब यह नहीं है कि विवाहित व्यक्ति...

विनायक चतुर्थी को राजनीति न बनाएं: मद्रास हाईकोर्ट ने राजनीतिक दलों के जुलूस की अनुमति देने से इनकार किया
"विनायक चतुर्थी को राजनीति न बनाएं": मद्रास हाईकोर्ट ने राजनीतिक दलों के जुलूस की अनुमति देने से इनकार किया

मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को एक राजनीतिक दल की उस याचिका की कड़ी आलोचना की, जिसमें विनायक की मूर्ति स्थापित करके और जुलूस निकालकर विनायक चतुर्थी मनाने की सुरक्षा और अनुमति मांगी गई थी।जस्टिस आनंद वेंकटेश ने जनता के लिए कुछ भी किए बिना ऐसे जुलूस निकालने के लिए पुलिस से अनुमति मांगने वाले राजनीतिक दलों की आलोचना की। अदालत ने कहा कि ऐसे मुद्दे अधिक सार्वजनिक उपद्रव पैदा कर रहे हैं और यह भी कहा कि पुलिस के पास ऐसे राजनीतिक हितों के लिए सुरक्षा देने की तुलना में बहुत अधिक उत्पादक कार्य है।न्यायाधीश...

वकीलों की हड़ताल: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने काम से दूर रहने के लिए प्रस्ताव जारी करने के बार काउंसिल के अधिकार पर टिप्पणी करने से इनकार किया
वकीलों की हड़ताल: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने काम से दूर रहने के लिए प्रस्ताव जारी करने के बार काउंसिल के अधिकार पर टिप्पणी करने से इनकार किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के क़ानून और निर्णयों के विपरीत वकीलों की हड़ताल का आह्वान करने वाले प्रस्ताव जारी करने के लिए यूपी बार काउंसिल के अधिकार पर कोई टिप्पणी करने से परहेज किया। जस्टिस क्षितिज शैलेन्द्र ने मामले में सकारात्मक न्यायिक हस्तक्षेप के बावजूद हापुड जिले में वकीलों पर पुलिस लाठीचार्ज को लेकर वकीलों की हड़ताल जारी रहने पर निराशा व्यक्त की।हाईकोर्ट ने 4 सितंबर को घटना का स्वत: संज्ञान लिया था और पुलिस को इस मुद्दे पर वकीलों की एफआईआर दर्ज करने और जांच करने का...

अदालतों का सहयोगी वादी को उपचारहीन छोड़ने का हथियार नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने शादी.कॉम के सीईओ अनुपम मित्तल के खिलाफ सिंगापुर हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई
अदालतों का सहयोगी वादी को उपचारहीन छोड़ने का हथियार नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने शादी.कॉम के सीईओ अनुपम मित्तल के खिलाफ सिंगापुर हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शादी.कॉम के संस्थापक और सीईओ अनुपम मित्तल के खिलाफ सिंगापुर हाईकोर्ट द्वारा जारी एंटी-सूट स्थायी निषेधाज्ञा आदेश के प्रवर्तन पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी।सिंगापुर हाईकोर्ट के आदेश ने मित्तल को शादी.कॉम की मूल कंपनी पीपुल्स इंटरएक्टिव (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के उत्पीड़न और कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के समक्ष अपनी याचिका पर आगे बढ़ने से रोक दिया था।जस्टिस मनीष पितले ने कहा कि उत्पीड़न और कुप्रबंधन से संबंधित विवाद भारत में...

फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने की परिसीमा अवधि 30 दिन, पर्याप्त कारण दिखाने पर देरी माफ की जा सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट
फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने की परिसीमा अवधि 30 दिन, पर्याप्त कारण दिखाने पर देरी माफ की जा सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि फैमिली कोर्ट के फैसले या आदेश के खिलाफ अपील दायर करने की समय-सीमा 30 दिन है।जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विकास महाजन की खंडपीठ ने कहा कि इस तरह की अपील दायर करने में देरी को परिसीमन अधिनियम, 1963 की धारा 5 के तहत पर्याप्त कारण दिखाने पर माफ किया जा सकता है।अदालत ने कहा,“…फैमिली कोर्ट के किसी फैसले या आदेश के खिलाफ अपील दायर करने की समय-सीमा 30 दिन है। हालांकि, पर्याप्त कारण दिखाने के लिए परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 5 के तहत फाइलिंग में देरी को माफ किया जा...

बैप्‍टिजम स‌र्टिफिकेट को एसएसएलसी स‌र्टिफिकेट, आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे आधिकारिक दस्तावेजों पर प्रधानता नहीं दी जा सकतीः केरल हाईकोर्ट
बैप्‍टिजम स‌र्टिफिकेट को एसएसएलसी स‌र्टिफिकेट, आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे आधिकारिक दस्तावेजों पर प्रधानता नहीं दी जा सकतीः केरल हाईकोर्ट

केरल ‌हाईकोर्ट ने एक फैसले में माना कि ईसाई समुदाय से संबंधित व्यक्ति की जन्मतिथि सुनिश्चित करने के लिए बैप्‍टिजम सर्ट‌िफिकेट को एसएसएलसी सर्ट‌िफिकेट, आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे आधिकारिक दस्तावेजों पर प्रधानता नहीं दी जा सकती है।जस्टिस मुरली पुरूषोतमन ने कहा,“किसी व्यक्ति के बपतिस्मा को रिकॉर्ड करने के लिए चर्च बपतिस्मा प्रमाणपत्र जारी करता है। जब जन्मतिथि संबंधी सार्वजनिक दस्तावेज़ उपलब्ध हों तो बपतिस्मा प्रमाणपत्र को प्रधानता नहीं दी जा सकती।''याचिकाकर्ता ने राजस्व मंडल...

दिल्ली दंगे: कोर्ट ने जी20 शिखर सम्मेलन का हवाला देते हुए सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर करने में विफलता के लिए दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई, कहा संतुलन कायम करना जरूरी
दिल्ली दंगे: कोर्ट ने जी20 शिखर सम्मेलन का हवाला देते हुए सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर करने में विफलता के लिए दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई, कहा संतुलन कायम करना जरूरी

दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के मामले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करने में विफलता के लिए मंगलवार को दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई। अदालत की फटकार इस प्रस्तुति के बाद आई कि जांच अधिकारी 9-10 सितंबर को राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित "जी20 शिखर सम्मेलन में व्यस्त थे, इसलिए चार्जशीट दाखिल नहीं की गई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला शिखर सम्मेलन में व्यस्त होने के कारण से संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने कहा,“यह उम्मीद नहीं की जाती है कि पुलिस संगठन अपने काम की...

स्विगी और ज़ोमैटो से ऑर्डर करने के बजाय, बच्चों को मां के हाथ का पकाया स्वादिष्ट भोजन का आनंद लेने दें : केरल हाईकोर्ट ने माता-पिता को सलाह दी
स्विगी और ज़ोमैटो से ऑर्डर करने के बजाय, बच्चों को मां के हाथ का पकाया स्वादिष्ट भोजन का आनंद लेने दें : केरल हाईकोर्ट ने माता-पिता को सलाह दी

केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को बच्चों के लिए घर पर बने भोजन के महत्व पर जोर दिया और माता-पिता को सलाह दी कि वे ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी और ज़ोमैटो के माध्यम से रेस्तरां से खाना ऑर्डर करने से बचें। जस्टिस पीवी कुन्हिकृष्णन मोबाइल फोन के कुछ क्लिक के माध्यम से पोर्न कंटेंट तक पहुंच से संबंधित एक मामले से निपट रहे थे। उन्होंने आधुनिक पालन-पोषण के पर बात की, जहां बच्चों को मोबाइल फोन दिए जाते हैं ताकि माता-पिता "अपने घर में अपने दैनिक दिनचर्या के काम पूरा कर सकें।".उन्होंने माता-पिता से आग्रह...

प्राप्त सेवाओं के बारे में केवल निगेटिव Google रिव्यू लिखना सेवा देने वाले की मानहानि नहीं: मद्रास हाईकोर्ट
प्राप्त सेवाओं के बारे में केवल निगेटिव Google रिव्यू लिखना सेवा देने वाले की मानहानि नहीं: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति द्वारा प्राप्त सेवाओं के लिए Google Review जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर प्रतिकूल विचार व्यक्त करना सेवा देने वाले की मानहानि नहीं होगी, क्योंकि यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(A)के तहत भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्गत आता है।अदालत ने कहा,“निचली अदालत ने सही कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत व्यक्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म में प्राप्त सेवाओं के लिए किसी की रिव्यू की अभिव्यक्ति जैसे कि Google रिव्यू और...

स्किल डेवेलपमेंट घोटाला: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ सुनवाई पर 18 सितंबर तक रोक लगाई
स्किल डेवेलपमेंट घोटाला: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ सुनवाई पर 18 सितंबर तक रोक लगाई

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार को करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार वाले आंध्र प्रदेश स्किल डेवेलपमेंट कार्यक्रम घोटाला मामले में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी के नेता एन चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ निचली अदालत की कार्यवाही पर अगले सोमवार तक रोक लगा दी। कोर्ट ने विजयवाड़ा की अदालत को सीआईडी ​​द्वारा दायर चंद्रबाबू नायडू की हिरासत याचिका पर सोमवार, 18 सितंबर तक सुनवाई नहीं करने का भी निर्देश दिया है। सीआईडी ​​को अगले सोमवार तक उन्हें अपनी हिरासत में नहीं लेने का भी निर्देश दिया गया...

[E-Surveillance] वैध अवरोधन के रिकॉर्ड हाइली क्लासिफाइड, कोई स्टेटिस्टिकल डाटा नहीं रखा जाता: दिल्ली हाईकोर्ट से गृह मंत्रालय ने कहा
[E-Surveillance] वैध अवरोधन के रिकॉर्ड हाइली क्लासिफाइड, कोई स्टेटिस्टिकल डाटा नहीं रखा जाता: दिल्ली हाईकोर्ट से गृह मंत्रालय ने कहा

दिल्ली हाईकोर्ट को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बताया कि वैध अवरोधन और निगरानी से संबंधित रिकॉर्ड को हाइली क्लासिफाइड डॉक्यूमेंट्स के रूप में वर्गीकृत किया गया है और ऐसी हाइली क्सालिफाइड जानकारी के लिए न्यूनतम डेटा बनाए रखा जाता है।केंद्र ने कहा कि गृह मंत्रालय का सीआईएस प्रभाग वैध अवरोधन और निगरानी से संबंधित कोई स्टेटिस्टिकल डाटा नहीं रखता है, क्योंकि किसी भी कार्यात्मक उद्देश्य के लिए ऐसे रिकॉर्ड की आवश्यकता नहीं होती है।केंद्र सरकार ने कहा,“रिकॉर्ड को नष्ट करना वैधानिक आवश्यकता है...कैबिनेट सचिव...

कानून लागू करना मैथमेटिक्स थ्योरम को हल करने के समान नहीं है, कानूनी निर्णय लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं: दिल्ली हाईकोर्ट
कानून लागू करना मैथमेटिक्स थ्योरम को हल करने के समान नहीं है, कानूनी निर्णय लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि कानून लागू करना गणितीय प्रमेय (Maths Theorem) को हल करने के समान नहीं है, इसे अलग से नहीं किया जा सकता है। जस्टिस रजनीश भटनागर ने कहा,“ चूंकि राज्य के लोग इन कानूनी निर्णयों से प्रभावित होते हैं, इसलिए कानून के कठोर और गणितीय अनुप्रयोग (mathematical application) से विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति अपने परिवार का एकमात्र भरण-पोषण करने वाला है और घर के मुखिया के रूप में कार्य करता है तो उसे जेल भेजने से उसके आश्रितों के लिए गंभीर कठिनाई हो...

इंटरसेक्स बच्चों पर सेक्स-सेलेक्टिव सर्जरी: हाईकोर्ट ने मसौदा नीति पर दिल्ली सरकार से अप-टू-डेट स्टेटस रिपोर्ट मांगी
इंटरसेक्स बच्चों पर सेक्स-सेलेक्टिव सर्जरी: हाईकोर्ट ने मसौदा नीति पर दिल्ली सरकार से 'अप-टू-डेट' स्टेटस रिपोर्ट मांगी

दिल्ली हाईकोर्ट ने इंटरसेक्स शिशुओं और बच्चों पर सेक्स-सेलेक्टिव सर्जरी (Sex-Selective Surgeries) के संबंध में मसौदा नीति की स्थिति पर दिल्ली सरकार से अप-टू-डेट हलफनामा मांगा है।जस्टिस जसमीत सिंह सृष्टि मदुरै एजुकेशनल रिसर्च फाउंडेशन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस याचिका में पिछले साल जुलाई में खंडपीठ द्वारा पारित आदेश का अनुपालन न करने के लिए अधिकारियों के खिलाफ अवमानना ​​कार्रवाई की मांग की गई थी।उक्त आदेश के तहत दिल्ली सरकार को जीवन के मामलों को छोड़कर इंटरसेक्स शिशुओं और बच्चों...

उम्र कैद के दोषियों को समय से पहले रिहाई का दावा करने का कोई अंतर्निहित अधिकार नहीं है : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
उम्र कैद के दोषियों को समय से पहले रिहाई का दावा करने का कोई अंतर्निहित अधिकार नहीं है : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि उम्रकैद की सजा काट रहे किसी कैदी को समय से पहले रिहाई का दावा करने का कोई अंतर्निहित अधिकार नहीं है, क्योंकि यह महज एक रियायत है, जो दोषी के जेल में आचरण, कैदी की गंभीरता और अपराध की प्रकृति आदि जैसे विभिन्न कारकों को देखने के बाद राज्य सरकार के विवेक पर दी जाती है। जस्टिस जसजीत सिंह बेदी की बेंच ने कहा,“ एक दोषी को समय से पहले रिहाई का दावा करने का कोई अंतर्निहित अधिकार नहीं है क्योंकि आजीवन कारावास का मतलब जेल में दोषी को पूरा जीवन गुज़ारना...

एमवी अधिनियम की धारा 2(21) के तहत लाइट मोटर वाहन के रूप में अर्हता प्राप्त वाणिज्यिक वाहन के लिए चालक को परिवहन समर्थन की आवश्यकता नहीं: गुवाहाटी हाईकोर्ट
एमवी अधिनियम की धारा 2(21) के तहत 'लाइट मोटर वाहन' के रूप में अर्हता प्राप्त वाणिज्यिक वाहन के लिए चालक को "परिवहन" समर्थन की आवश्यकता नहीं: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एक वाणिज्यिक वाहन मालिक को सड़क दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को दिए गए मुआवजे के लिए अपने बीमाकर्ता को क्षतिपूर्ति देने से इस आधार पर छूट दे दी है कि पॉलिसी की शर्तों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है, क्योंकि चालक के पास 'परिवहन' समर्थन वाला लाइसेंस नहीं था। यह नोट किया गया कि संबंधित वाहन 7500 किलोग्राम से कम का था और इसलिए, एक हल्का मोटर वाहन है, जिसके लिए अलग से 'परिवहन' समर्थन की आवश्यकता नहीं है।जस्टिस पार्थिव ज्योति सैकिया की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा, “बीमा पॉलिसी में...

दूसरों को दिखाए बिना निजी तौर पर अश्लील वीडियो देखना आईपीसी की धारा 292 के तहत अश्लीलता का अपराध नहीं होगा: केरल हाईकोर्ट
दूसरों को दिखाए बिना निजी तौर पर अश्लील वीडियो देखना आईपीसी की धारा 292 के तहत अश्लीलता का अपराध नहीं होगा: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह एक व्यक्ति के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया, जिसे पुलिस ने अपने मोबाइल फोन पर पोर्न (pornography) देखने के आरोप में सड़क किनारे से गिरफ्तार किया था। जस्टिस पीवी कुन्हिकृष्णन ने कहा कि निजी तौर पर किसी के फोन पर अश्लील तस्वीरें या वीडियो को डिस्ट्रिब्यूट या सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए बिना देखना आईपीसी के तहत अश्लीलता के अपराध को आकर्षित नहीं करेगा। इसमें कहा गया है कि ऐसी सामग्री देखना किसी व्यक्ति की निजी पसंद है और अदालत उसकी निजता में दखल...