मुख्य सुर्खियां
आम लोगों और पर्यावरण के हित में प्लास्टिक के थैलों पर पूर्ण पाबंदी; मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस बारे में क़ानून में संशोधन को जायज ठहराया [आर्डर पढ़े]
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में प्लास्टिक के कैरी बैबैग्स पर राज्य सरकार की पूर्ण पाबंदी को सही ठहराया है।मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला ने मध्य प्रदेश जैव अनाश्य अपशिष्ट (नियंत्रण) संशोधन अधिनियम, 2017 द्वारा प्लास्टिक के कैरी बैग्स पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबन्ध के खिलाफ याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला दिया। हाईकोर्ट ने इस बात को भी खारिज कर दिया कि इस तरह का संशोधन करना राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार के बाहर है।पीठ ने कहा कि राज्य सरकार का क़ानून केंद्र...
पासपोर्ट अधिनियम के तहत बिना कारण बताए पासपोर्ट देने से इनकार करना मौलिक अधिकारों पर पाबंदी है : दिल्ली हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले दिनों अपने एक फैसले में कहा कि बिना कोई कारण बताए पासपोर्ट जारी करने से इनकार करना या इसका नवीनीकरण नहीं करना संविधान के तहत प्राप्त मौलिक अधिकारों पर पाबंदी लगाना है। न्यायमूर्ति विभु बखरू ने जसविंदर सिंह चौहान की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह फैसला दिया। चौहान अपने पासपोर्ट का नवीनीकरण चाहते हैं। चौहान कनाडा में ट्रक चलाते हैं और ऐसा करने का उनके पास वैध कार्यानुमति है। सितम्बर 2016 में उनको कनाडा की ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत ने स्थाई निवासी बनाने का फैसला किया। इसलिए...
कुष्ठ रोगियों के कल्याण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए दिशानिर्देश [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कुष्ठ रोगियों के इलाज और उनके पुनर्वास के लिए कई तरह के दिशानिर्देश जारी किये ताकि इस रोग से ग्रस्त लोगों और उनके परिवार के सदस्यों के साथ होने वाले भेदभाव समाप्त किये जा सकें।ये निर्देश मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने ने जारी किये।इस मामले को लेकर याचिका पंकज सिन्हा ने दायर की थी। याचिका में कोर्ट से मांग की गई थी कि वह केंद्र और राज्यों को नए कुष्ठ रोगियों का पता लगाने के लिए समय समय पर राष्ट्रीय सर्वेक्षण कराने का...
तापी सहित सभी नदियों में मूर्ति विसर्जन पर गुजरात हाईकोर्ट का रोक [निर्णय पढ़ें]
गुजरात हाईकोर्ट ने तापी और अन्य प्राकृतिक नदियों में मूर्तियों के विसर्जन पर रोक लगा दी है। तापी नदी सूरत से गुजरती है। हाईकोर्ट ने अथॉरिटीज को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि सिर्फ गणेश विसर्जन के दौरान ही नहीं बल्कि इसी तरह के अन्य मौकों जैसे दुर्गा पूजा, जन्माष्टमी के दौरान भी इन नदियों में मूर्तियों का विसर्जन नहीं किया जाए। यह आदेश पास करते हुए मुख्य न्यायाधीश आर सुभाष रेड्डी और विपुल एम पंचोली की पीठ ने इससे पहले सूरत नगर निगम की इस अपील को सही ठहराया जिसमें लोगों से पर्यावरण को...
सड़क दुर्घटना में शामिल वाहन का बीमा न हो तो वाहन को बेचकर पीड़ित को मुआवजा दिया जाए : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि सड़क दुर्घटना में शामिल वाहन का अगर बीमा न हो तो उस वाहन को बेचकर पीड़ित को मुआवजा दिया जाना चाहिए।चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने देश के सभी राज्यों को 12 हफ्ते में मोटर वाहन अधिनियम में जरूरी बदलाव इस प्रावधान को शामिल करने का निर्देश दिया है। हालांकि दिल्ली में यह प्रावधान पहले से ही है।पीठ ने कहा कि अगर किसी सड़क दुर्घटना में शामिल वाहन का बीमा न हो तो उस वाहन की नीलामी की जाए और नीलामी से मिली रकम को मोटर वाहन...
केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने कहा, दुबारा शादी कर लेने के बाद भी विधवा को पेंशन प्राप्त करने का हक [आर्डर पढ़े]
केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण (सीएटी-कैट) ने फैसला दिया है कि अगर किसी मृत सरकारी कर्मचारी की विधवा दुबारा शादी कर लेती है तो भी वह पेंशन की हकदार है। यह आदेश अधिकरण के सदस्य प्रवीण महाजन ने सुनाया। कैट ने रेणु गुप्ता की अपील पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। रेणु गुप्ता को 1998 में उनके पति की मृत्यु के बाद स्टोर कीपर के रूप में नियुक्ति दी गई थी। उनको केन्द्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 के तहत पारिवारिक पेंशन और रिटायरमेंट के लाभ भी दिए गए। उन्होंने बाद में शादी कर ली और उनके कहने पर...
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से ड्यूटी के दौरान मारे गए डॉक्टर की विधवा को 1.90 करोड़ रुपए देने को कहा [निर्णय पढ़ें]
कोर्ट ने कहा : सिर्फ पुलिस अधिकारी की ही ड्यूटी पर मौत नहीं होती है उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करते हुए डॉक्टरों को भी अपनी जान की बाजी लगानी पड़ती है। बुधवार को कोर्ट ने राज्य सरकार को ड्यूटी के दौरान मारे गए डॉक्टर की विधवा को 1.90 करोड़ रुपए देने का आदेश दिया है। इस डॉक्टर को जसपुर में 20 अप्रैल 2016 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर उस समय गोली मार दी गई थी, जब वह मरीज का इलाज कर रहे थे। न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की पीठ ने मृत डॉक्टर...
मध्यस्थता के फैसले से प्रभावित होने की स्थिति में मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल तीसरे पक्ष को अपील का अधिकार : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
एक अहम फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है की अगर तीसरे पक्ष पर मध्यस्थता के किसी फैसले से प्रभाव पड़ सकता है तो उसे मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 37 के तहत अपील करने का अधिकार है।न्यायमूर्ति आरडी धानुका ने मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 37 के तहत के तहत 13 याचिकाओं पर सुनवाई की। इन याचिकाओं में याचिकाकर्ताओं ने एकमात्र मध्यस्थ के 27 दिसंबर 2016 के आदेश और हाईकोर्ट के 17 नवम्बर 2017 के आदेश के खिलाफ अपील की विशेष अनुमति की मांग की थी। मध्यस्थता की यह प्रक्रिया एक्सेल मेटल...
मिलावटयुक्त लाल मिर्च पाउडर के कारण होटल मालिक को जेल; सुप्रीम कोर्ट ने कहा, निचली अदालत की सजा को जायज बताया [आर्डर पढ़े]
“ऐसी खाद्य सामग्रियों की बिक्री जिसका प्रयोग किसी भोजनालय में भोजन/सब्जी पकाने में होता है, खाद्य निरीक्षक के लिए यह खाद्य अपमिश्रण अधिनियम की धारा 2(xiii) के तहत ‘बिक्री’ माना जाता है।”सुप्रीम कोर्ट ने उस होटल मालिक की सजा को बरकरार रखा है जिसके भोजनालय से खाद्य निरीक्षक ने मिलावटयुक्त मिर्च पाउडर बरामद किया था जिसे खाना बनाने में प्रयोग करने के लिए रखा गया था।हाईकोर्ट ने आरोपी को निचली अदालत ने जो सजा सुनाई थी, उसे यह कहते हुए उलट दिया था की बरामद लाल मिर्च पाउडर आम लोगों को बेचे जाने के लिए...
एसबीआई का 53.46 करोड़ रुपए बकाया रखने वाली याचिकाकर्ता कंपनी पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने क़ानून की प्रक्रिया का बेजा इस्तेमाल के लिए लगाया 50 हजार रुपए का जुर्माना [निर्णय पढ़ें]
विभिन्न मंचों पर एक ही आधार पर एक से अधिक मामले दायर करने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट ने विबग्योर टेक्सोटेक पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने कहा कि एक से अधिक मामले दायर करके उसने क़ानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग किया है। इस कंपनी पर सरकारी क्षेत्र के स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया का 53.46 करोड़ रुपए बकाया है।न्यायमूर्ति केके तातेड और एसके शिंदे की पीठ ने विबग्योर की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें वित्तीय परिसंपत्तियों के प्रतिभूतिकरण एवं पुनर्संरचना एवं सिक्योरिटीज इंटरेस्ट एक्ट, 2002 की धारा...
सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों की वरिष्ठता निर्धारण के बारे में कलकत्ता हाईकोर्ट के दिशानिर्देश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की; याचिकाकर्ता से हाईकोर्ट जाने को कहा [आर्डर पढ़े]
“…निचली अदालत में प्रैक्टिस करने वाला अधिवक्ता को भी वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा दिया जा सकता है अगर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की राय में अधिवक्ता अधिनियम की धारा 16(2) के तहत निर्धारित शर्तों को पूरा करता है,” याचिकाकर्ता ने कहा”।सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अधिवक्ताओं को वरिष्ठ का दर्जा देने के बारे में कलकत्ता हाईकोर्ट के दिशानिर्देशों को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से मना कर दिया और अपीलकर्ता को इस बारे में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने को कहा।यह याचिका अधिवक्ता देबाशीष रॉय ने दायर किया था...
डॉक्टर का विकलांगता प्रमाणपत्र पढ़ने लायक नहीं होने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी संभल जाने की चेतावनी, स्पष्टीकरण माँगा [आर्डर पढ़े]
डॉक्टरों के हाथ की लिखाई का स्पष्ट नहीं होना आम लोगों के लिए हमेशा ही एक समस्या रही है और लोग सोचते रहे हैं क्यों डॉक्टरों के हाथ की लिखावट इतनी खराब होती है। पर कोई अदालत इस पर गौर करेगा और डॉक्टर से इसके लिए स्पष्टीकरण मांगेगा ऐसा, बहुत कम होता है।इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नियमित रूप से विकलांगता प्रमाणपत्र जारी करने वाले डॉक्टर को इस बारे में सावधान रहने की चेतावनी दी है क्योंकि उसने जो विकलांगता के डायग्नोसिस में लिखा है वह हमेशा ही पढ़ने लायक नहीं होता और यह स्पष्ट नहीं होता की कामगार मुआवजा...
सुप्रीम कोर्ट ने शहरी बेघरों की चिंता नहीं करने के लिए सरकार की खिंचाई की; कहा, बेघरों को उनके भाग्य पर नहीं छोड़ा जा सकता [आर्डर पढ़े]
‘आवास हर व्यक्ति की आवश्यक जरूरत है और जब भारत सरकार ने इसके बारे में नीति और योजना बनाई है, तो सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इसे पूर्णतया लागू करना चाहिए”शहरी बेघरों की समस्याओं पर गौर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत एक कमिटी गठित करने का मामला जिस गति से चल रहा है उस पर सुप्रीम कोर्ट ने दुःख प्रकट किया है।शहरी बेघरों के बारे में एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने कहा की 11 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में...
रेलवे को अपने कर्मचारियों की सेवा शर्तों को तैयार करने का अधिकार : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
“हमारा यह भी मानना है कि आईआरईएम को वैधानिक अधिकार है और इसे संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत जारी किया गया है”सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि रेलवे कार्मिक प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा जारी मेमोरेंडम नहीं है और वह अपने कर्मचारियों की सेवा संबंधित नियम बनाने लिए स्वतंत्र है।न्यायमूर्ति एमबी लोकुर, एस अब्दुल नज़ीर और दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि भारतीय रेलवे एस्टेब्लिशमेंट मैनुअल (आईआरईएम) वैधानिक निकाय है और इसे संविधान अनुच्छेद 309 तहत उपलब्ध अधिकारों का प्रयोग करते हुए जारी किया गया...
पोस्टिंग को चुनौती वाली याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सभी सैनिक शपथ के तहत वहाँ अपनी सेवा देने के लिए बाध्य जहां उनको भेजा जाता है [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने नॉन-ऑपरेशनल आर्मी सर्विसेज कोर (एएससी) के तीन सैनिकों की उस याचिका को ख़ारिज कर दिया जिसमें उन्होंने नॉन-ऑपरेशनल यूनिट से ऑपरेशनल यूनिट में अपने स्थानांतरण को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा की उनको दिए गए आदेश में मौलिक अधिकारों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है। कोर्ट ने कहा की सभी सैनिक सेवा में आने से पहले जो शपथ लेते हैं उसके हिसाब से वह कहीं भी सेवा देने के लिए बाध्य हैं भले ही उनकी नियुक्ति किसी भी सेवा में क्यों न हुई हो।न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन की पीठ ने...
जांच दल ने सरकारी मदद से चलने वाले स्कूल को असुरक्षित पाया; दिल्ली हाईकोर्ट ने उसे गिराने का आदेश दिया
दिल्ली हाईकोट ने गुरूवार को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में पूर्णतया सरकारी मदद से चलने वाले एक स्कूल के भवन को गिराने का आदेश दिया है। पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस स्कूल का भवन काफी बदहाल स्थिति में है और यह असुरक्षित है। रिपोर्ट में इस स्कूल के बच्चों को दूसरे किसी उपयुक्त स्कूल में भेजे जाने की बात कही गई है। न्यायमूर्ति राजेन्द्र मेनन और न्यायमूर्ति वीके राव की पीठ ने दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग के उप निदेशक के रिपोर्ट पर गौर करने के बाद करावल नगर के आलोक पुंज माध्यमिक...
धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला : पीठ के किस जज ने क्या कहा [निर्णय पढ़ें]
वृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट ने आईपीसी की धारा 377 को समाप्त करने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इस मामले में पांच-सदस्यीय संविधान पीठ के जजों के विचार इस तरह से थे - मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा और एएम खानविलकरइन दोनों ही न्यायाधीशों ने मानवाधिकार और संवैधानिक गारंटी के बीच संबंध को रेखांकित करने के लिए नालसा (एनएएलएसए) के फैसले पर भरोसा किया। पहचान की महत्ता पर जिस तरह से नालसा मामले में प्रकाश डाला गया है उससे वह मानवाधिकार और गरिमापूर्ण जीवन और स्वतन्त्रता के अधिकार को भी जोड़ता है। इसी भावना को...
वसुंधरा राजे की गौरव यात्रा के दौरान राज्य प्रायोजित कोई समारोह नहीं होनी चाहिए : राजस्थान हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
राजस्थान हाईकोर्ट ने बुधार को वसुंधरा राजे सरकार को निर्देश दिया कि गौरव यात्रा के दौरान राज्य प्रायोजित कोई भी समारोह आयोजित नहीं किये जाएं। मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंदराजोग और जीआर मूलचंदानी ने अपने आदेश में कहा, “...हम घोषित करते हैं की राजस्थान में भाजपा द्वारा चालाई जा रही गौरव यात्रा के दौरान राज्य प्रायोजित या राज्य की वित्तीय मदद से कोई भी समारोह आयोजित नहीं होंगे। इसका अर्थ यह हुआ, की गौरव यात्रा के दिन किसी भी तरह के सरकारी कार्यक्रम उस रास्ते में आयोजित नहीं होंगे जिस रास्ते में भाजपा...
सुप्रीम कोर्ट का ‘Democratic Policing’ की परिकल्पना को विकसित करने पर जोर; कहा, हिरासत में मौत के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों की सजा बढाई [निर्णय पढ़ें]
“यह बताना सन्दर्भ के बाहर नहीं होगा कि महाराष्ट्र पुलिस का उद्देश्य “सद्रक्षणाय खलनिग्रहणाय” और इसका आदर जरूरी है। जिन लोगों पर आपराधिक क़ानून लागू करने की जिम्मेदारी है, उन्हें यह अवश्य ही ध्यान रखना चाहिए कि सिर्फ उनके सामने जो अपराधी एक व्यक्ति के रूप में मौजूद है उसी के प्रति उनकी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि राज्य और समुदाय के प्रति भी वे जिम्मेदार हैं।”हिरासत में एक व्यक्ति की मौत के लिए जिम्मेदार कुछ पुलिस अधिकारियों को सुनाई गई सजा को सही ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट नेdemocratic policing की...
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अगर मजिस्ट्रेट के आदेश पर पुलिस हिरासत दी गई है तो बंदी प्रत्यक्षीकरण का आदेश जारी नहीं किया जा सकता [निर्णय पढ़ें]
“यह गैर-कानूनी रूप से लगातार हिरासत में रखने का मामला नहीं था बल्कि संबंधित व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के आदेश पर न्यायिक हिरासत में रखा गया था और उसी दौरान आपराधिक जांच के क्रम में उसे पुलिस हिरासत में सौंपा गया था।”सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कहा है कि अगर किसी व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के आदेश पर आपराधिक मामले की जांच के क्रम में पुलिस हिरासत में भेजा गया है तो उस स्थिति में बंदी प्रत्यक्षीकरण का आदेश जारी नहीं किया जा सकता।महाराष्ट्र ने हाईकोर्ट के उस आदेश की आलोचना की थी जिसमें एक महिला की याचिका को...

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![धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला : पीठ के किस जज ने क्या कहा [निर्णय पढ़ें] धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला : पीठ के किस जज ने क्या कहा [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/09/Constitution-Bench-section-377.jpg)
![वसुंधरा राजे की गौरव यात्रा के दौरान राज्य प्रायोजित कोई समारोह नहीं होनी चाहिए : राजस्थान हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें] वसुंधरा राजे की गौरव यात्रा के दौरान राज्य प्रायोजित कोई समारोह नहीं होनी चाहिए : राजस्थान हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/09/Gaurav-Yatra.jpg)
![सुप्रीम कोर्ट का ‘Democratic Policing’ की परिकल्पना को विकसित करने पर जोर; कहा, हिरासत में मौत के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों की सजा बढाई [निर्णय पढ़ें] सुप्रीम कोर्ट का ‘Democratic Policing’ की परिकल्पना को विकसित करने पर जोर; कहा, हिरासत में मौत के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों की सजा बढाई [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/09/custody-torture.jpg)
![सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अगर मजिस्ट्रेट के आदेश पर पुलिस हिरासत दी गई है तो बंदी प्रत्यक्षीकरण का आदेश जारी नहीं किया जा सकता [निर्णय पढ़ें] सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अगर मजिस्ट्रेट के आदेश पर पुलिस हिरासत दी गई है तो बंदी प्रत्यक्षीकरण का आदेश जारी नहीं किया जा सकता [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2017/09/Jails.jpg)