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दूसरे संभावित अपराधियों को सबक सिखाने के लिए मौत की सजा एक सामाजिक जरुरत : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बच्ची से रेप और हत्या में मौत की सजा बरकरार रखी [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
11 May 2018 6:53 AM GMT
दूसरे संभावित अपराधियों को सबक  सिखाने के लिए मौत की सजा एक सामाजिक जरुरत : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बच्ची से रेप और हत्या में मौत की सजा बरकरार रखी [निर्णय पढ़ें]
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 खंडपीठ ने कहा कि आरोपी व्यक्ति अपनी वासना को पूरा करने के लिए निर्दोष बच्चे की ग़लत और भयानक हत्या करने के लिए एकमात्र सजा के पात्र हैं, वो मौत की सजा है।

11 वर्षीय लड़की के बलात्कार और हत्या के आरोपी दो लोगों को मौत की सजा की पुष्टि करते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा है कि हाल ही में बच्चियों से बलात्कार की घटनाओं में खतरनाक वृद्धि के बारे में वो बेहद चिंतित है और  देश भर में बच्चों से बलात्कार की घटनाओं पर समाज के क्रोध से परिचित है, इसलिए, वो मौत की सजा को सामाजिक आवश्यकता के उपाय के रूप में और अन्य संभावित अपराधियों को रोकने का साधन भी मानता है।

न्यायमूर्ति एसके सेठ और न्यायमूर्ति नंदिता दुबे की एक खंडपीठ ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखने वाले फैसले के खिलाफ आरोपी द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया।

अपील में मुख्य विवादों में से एक सीआरपीसी की धारा 313 के तहत आरोपी द्वारा बचाव में दिए गए बयान के बारे में था। खंडपीठ ने कहा कि इस तरह के एक बयान का इस्तेमाल अभियोजन पक्ष के गवाहों द्वारा दिए गए सबूत के रूप में उनके अपराध को साबित करने के लिए किया जा सकता है। अदालत ने यह भी देखा कि आरोपी द्वारा वकील की अप्रभावी सहायता का आरोप साबित किया  जाना चाहिए कि वकील की अप्रभावी सहायता और गैर-व्यावसायिक त्रुटियों के कारण ट्रायल का  नतीजा अलग होता। मौत की सजा की पुष्टि करते हुए खंडपीठ ने कहा कि वासना को पूरा करने के लिए निर्दोष बच्चे की ग़लत और भयानक हत्या करने वाले आरोपी व्यक्तियों की एकमात्र सजा मृत्यु के अलावा कुछ भी नहीं है।

 न्यायमूर्ति नंदिता दुबे, जिन्होंने इस फैसले को लिखा था, ने कहा: "11 साल के एक असहाय बच्ची, जो आरोपी सतीश के घर में अपना सामान रखने के लिए गया था और बाद में उससे बलात्कार किया गया था। उसे शारीरिक कष्ट के अधीन भी किया गया और उसे अनजान दर्द और पीड़ा का सामना करना पड़ा था।

अभियुक्त वहां नहीं रुका लेकिन उसने बच्ची का गला घोंट दिया और सड़क के पास उसके  अर्ध-नग्न शरीर को फेंक दिया जो सभ्यता की पूरी अवहेलना है और मृत महिला के प्रति घोर असम्मान।

यह मानते हुए कि मृतक एक निर्दोष बच्ची थी, जो किसी भी बहाना प्रदान नहीं कर सकता था और ना ही इस तरह के जघन्य कृत्य करने के लिए उत्तेजना पैदा कर सकता था।

मृतक के अर्धनग्न शरीर को अपमानजनक आचरण को प्रदर्शित करने के बाद फेंकने के साथ-साथ, अपराध के बाद सामान्य कार्य करना, जयपाल से शराब मांगना उनके हिस्से पर किसी भी तरह की पछतावे की कमी दिखाता है।"

यह निर्णय 12 साल से कम उम्र की लड़कियों के  बलात्कार के लिए अन्य कड़े दंड प्रावधानों के साथ साथ हाल ही में मृत्युदंड प्रदान करने वाले अध्यादेश के प्रावधान का भी उदाहरण देता है।


 
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