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उपभोक्ता संरक्षण अधिनयम हंगामा खड़ा करने के लिए नहीं है; एनसीडीआरसी ने रोजगार एक्सचेंज से 87 करोड़ हर्जाने की मांग करने वाले बेरोजगार युवक को जुर्माने के रूप में 100 रुपए दान में देने का आदेश दिया

LiveLaw News Network
4 Sep 2018 5:15 AM GMT
उपभोक्ता संरक्षण अधिनयम हंगामा खड़ा करने के लिए नहीं है; एनसीडीआरसी ने रोजगार एक्सचेंज से 87 करोड़ हर्जाने की मांग करने वाले बेरोजगार युवक को जुर्माने के रूप में 100 रुपए दान में देने का आदेश दिया
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अपने तरह के एक अनोखे मामले में मैट्रिक पास एक युवक ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग में एक मामला दायर कर रोजगार एक्सचेंज से 87 करोड़ रुपए का हर्जाना माँगा। इस युवक का आरोप था की एक्सचेंज ने उसे आरटीआई अधिनियम के तहत बेरोजगारी भत्ते के बारे में जानकारी नहीं दी। पर यह मामला उसके लिए उलटा पड़ गया।

 पीठासीन सदस्य डॉ. एसएम कानितकर और सदस्य दिनेश सिंह ने इस युवक का समीक्षा आवेदन खारिज कर दिया और यह समझकर कि युवक बेरोजगार और कम पढ़ा लिखा है, उस पर भारी जुर्माना नहीं लगाया। उसे सिर्फ 100 रुपए चुकाने को कहा गया और वह भी उसकी पसंद की किसी धर्मार्थ संस्था को।

 इस मामले से जुड़े आवेदनकर्ता ने जिला उपभोक्ता फोरम में एक मामला दायर किया कि उसने रोजगार एक्सचेंज के अधिकारी से बेरोजगारी भत्ते के बारे में जानकारी चाही और इसके लिए 26 दिसंबर 2012 को उसने आरटीआई अधिनियम के तहत आवेदन किया। उसने बताया की एक्सचेंज के उच्च अधिकारी से सूचना प्राप्त करने के बारे में भी उसने 2013 में आवेदन किया पर इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

 उसने कहा की इस पूरे मामले में उसके 865 रुपए खर्च हुए और पोस्टल आर्डर का खर्च इसके अलावा है। उसने कहा की उसको सूचना नहीं देना सेवा में कमी है।

 रोजगार एक्सचेंज ने कहा कि शिकायतकर्ता उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के तहत ‘उपभोक्ता’ नहीं है क्योंकि रोजगार एक्सचेंज मुफ्त सेवाएं देता है और आरटीआई अधिनियम के तहत सूचना प्राप्त करने के लिए तहत शिकायतकर्ता ने किन्हीं विपक्षी दलों को कोई आवेदन नहीं किया था।

 उसने यह भी कहा कि बेरोजगारी भत्ता के लिए न्यूनतम योग्यता 10+2 है जबकि शिकायतकर्ता मैट्रिक पास है और एक्सचेंज ने उसे सेवा देने में कोई कमी नहीं की है।

जिला फोरम ने अपीलकर्ता की शिकायत इस आधार पर खारिज कर दी कि रोजगार एक्सचेंज ने कहा की उसे इस तरह का कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। राज्य आयोग में उसकी अपील का भी यही हश्र हुआ।

 पर शिकायतकर्ता ने एनसीडीआरसी में अपील की और वहाँ समीक्षा के लिए आवेदन दायर किया। पर एनसीडीआरसी ने कहा की पहले के दोनों फोरमों के निर्णय में कोई गड़बड़ी नहीं थी।

 “अपनी समीक्षा याचिका में अपीलकर्ता ने रोजगार एक्सचेंज से 87 करोड़ रुपए हर्जाने की मांग की और अन्य बातों के अलावा यह भी कहा कि उसने उनके कार्यालय के 200-240 चक्कर लगाए। इस सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के साथ साथ जिला रोजगार कार्यालय का अधिकारी भी खुद मौजूद था,” आयोग ने कहा।

 “यह स्पष्ट है की शिकायतकर्ता उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए फोरम का बेजा इस्तेमाल करना चाहता है और वह महज हंगामा खड़ा करना चाहता है...” पीठ ने कहा।

 पीठ अपीलकर्ता के खिलाफ अधिनियम की धारा 26 के तहत 10 हजार रुपए जुर्माना लगाने वाला था पर उसके बेरोजगार होने के कारण उसने ऐसा नहीं किया।

 बाद में पीठ ने अपीलकर्ता को आदेश दिया की वह अपनी पसंद के किसी भी पंजीकृत धर्मार्थ संस्था में 100 रुपए जमा करा दे और आयोग की रजिस्ट्री में इसकी रसीद जमा करा दे।


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