मुख्य सुर्खियां
एनडीपीएस अधिनियम के तहत तलाशी के लिए मजिस्ट्रेट की मौजूदगी आवश्यक भले ही आरोपी इससे इंकार क्यों ना करे : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े ]
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को फिर कहा कि मादक द्रव्य और नशीले पदार्थ अधिनियम, 1985 (एनडीपीएस अधिनियम) की धारा 50 के तहत किसी आरोपी की तलाशी किसी मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में होनी चाहिए भले ही आरोपी इस प्रस्ताव से इंकार ही क्यों ना कर दे। निचली अदालत के आदेश से दुखी अपीलकर्ता ने हाईकोर्ट में अपील की और कहा कि तलाशी की अपनाई गई प्रक्रिया दोषपूर्ण थी। आरोपी पर 100 ग्राम गाँजा रखने का आरोप है। प्रतिवादी-अभियोजन ने कहा कि अपीलकर्ता को यह बताया गया था कि मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में तलाशी की माँग करने...
मृत किरायेदार के क़ानूनी प्रतिनिधि को ढहाई गई संरचना के बाद हुए निर्माण में दुबारा प्रवेश का अधिकार है : इलाहाबाद हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
याचिकाकर्ता मकान मालिक की याचिका को ख़ारिज करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज़िला कलक्टर के उस आदेश को सही ठहराया जिसमें उन्होंने प्रतिवादी को मृत किरायेदार के क़ानूनी प्रतिनिधि से उत्तर प्रदेश अधिनियम नम्बर 13, 1972 की धारा 249(2) के तहत बदल दिया। न्यायालय के समक्ष प्रश्न यह था कि क्या मृत किरायेदार के क़ानूनी प्रतिनिधि को यह अधिकार है कि "मूल किरायेदार" द्वारा दायर याचिका को वह आगे बढ़ाए जिसमें अधिनियम की धारा 24(2) के तहत उसने पुनः प्रवेश की अनुमति माँगी थी। मूल किरायेदार को अधिनियम की...
रामजन्मभूमि- बाबरी मस्जिद भूमि विवाद : मध्यस्थता बंद, अब 6 अगस्त से रोजाना सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संविधान पीठ ने कहा कि पैनल की रिपोर्ट हमने देखी है और मध्यस्थता सफल नहीं हो पाई है। इसलिए 6 अगस्त से तब तक रोजाना सुनवाई होगी जब तक बहस पूरी ना हो जाए।
जमानत देते समय कारण बताना आवश्यक है, सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने यह दोहराया है कि बिना कोई कारण बताए और आधार बताए जमानत नहीं दी जा सकती भले ही प्रथम दृष्टया प्रकृति में उसे जमानत देना उचित और सही लगता हो।हत्या के मामले में जमानत देने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे और न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की पीठ ने यह कहा:"हालांकि यह आवश्यक नहीं है कि अभियोजन पक्ष द्वारा दिए गए पूर्ण साक्ष्य के लिए जमानत देते समय या खारिज करते समय श्रेणीबद्ध खोज दी जाए क्योंकि उस स्तर पर बचाव पक्ष द्वारा भी जमानत आवेदन में...
बाॅम्बे हाईकोर्ट ने दी वकीलों को एकसाथ राहत,सीबीआई से कहा न उठाए कोई प्रतिरोधी या अवपीड़क कदम
बाॅम्बे हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को उन वकीलों को एक साथ राहत दे दी है,जो वरिष्ठ वकील इंद्रा जयसिंह और आनंद ग्रोवर के निर्देशन में आए थे। हाईकोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह इन सभी वकीलों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के मामले में कोई 19 अगस्त तक प्रतिरोधी या अवपीड़क कदम न उठाए।जस्टिस रणजीत मोर और जस्टिस भारती डांगरे की पीठ उस अर्जी पर सुनवाई कर रही थी जो इन वकीलों की तरफ से एक साथ दायर की गई थी। इस अर्जी में उस प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की गई है,जो उस एनजीओ के खिलाफ दर्ज की गई है,जो मानव...
न्यायपालिका के बहाने देरी की रणनीति को पुरस्कृत नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा है कि वादियों द्वारा न्यायपालिका के बहाने देरी की रणनीति को पुरस्कृत नहीं किया जा सकता।भारतीय स्टेट बैंक बनाम अतींद्र नाथ भट्टाचार्य के मामले में कर्मचारी ने अपने खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने नियोक्ता को निर्देश दिया कि वह सजा के आदेश के साथ-साथ जुर्माना लगाने के आदेश को लागू करने से पहले कर्मचारी को नोटिस भेजे। यद्यपि नियोक्ता ने कर्मचारी को कई नोटिस दिए लेकिन उसने सुनवाई के अवसर का लाभ नहीं उठाया और...
दोषी का प्रतिनिधित्व ना होने पर हाई कोर्ट मेरिट के आधार पर दोषसिद्धी के खिलाफ अपील नहीं निपटा सकता : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा है कि किसी अभियुक्त द्वारा दोषसिद्धी के खिलाफ दायर अपील को अपीलकर्ता या उसके वकील की सुनवाई के बाद ही मेरिट के आधार पर निपटाया जा सकता है।"मामले में दोषी का प्रतिनिधित्व नहीं तो मेरिट पर फैसला भी नहीं"न्यायमूर्ति आर. बनुमथी और न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना की पीठ ने कहा कि जब अपीलकर्ता-दोषी के लिए कोई प्रतिनिधित्व ना हो तो उच्च न्यायालय को चाहिए कि वह मामले को मेरिट के आधार पर ना निपटाए।अदालत द्वारा सुनाया गया हाल का ऐसा ही एक निर्णयहाल ही में इसी पीठ ने एक अन्य मामले में इस...
गैर-यौगिक या समझौते के अयोग्य मामलों में नहीं दी जा सकती है पक्षकारों के बीच समझौते की अनुमति,लेकिन सजा तय करते समय हो सकता है यह एक विचारयोग्य कारक-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा है कि गैर-यौगिक या समझौते के अयोग्य मामलों में पक्षकारों के बीच समझौता दर्ज करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।जस्टिस आर. भानुमथि और जस्टिस ए. एस. बोपन्ना की पीठ ने हालांकि यह भी नोट किया कि समझौते के अयोग्य मामलों में आरोपी को सजा देते समय दोनों पक्षकारों के बीच हुए समझौते को एक जरूरी परिस्थितिजन्य कारक के तौर पर कोर्ट अपने दिमाग में रख सकती है या उस पर विचार कर सकती है।क्या था यह मामला?दरअसल इस मामले में मंजीत सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 व 324 के तहत दोषी करार...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने माँ, पत्नी और बेटी की हत्या करने वाले आरोपी की मौत की सज़ा को जायज़ ठहराया [निर्णय पढ़े]
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 25 वर्षीय आरोपी विश्वजीत मासलकर को आईपीसी की धारा 302 के तहत मौत की सज़ा की पुष्टि की है। मासलकर पर किसी और महिला से शादी करने के लिए अपनी माँ, पत्नी और बेटी की हत्या का आरोप सिद्ध हुआ है।न्यायमूर्ति बीपी धर्माधिकारी और एसएस जोशी की पीठ ने मासलकर को मिली मौत की सज़ा की पुष्टि की और कहा,"…यह विरलों में विरल मामला है और आरोपी ने एक जघन्य कृत्य को अंजाम दिया है…और इससे न्यायिक चेतना आहत हुई है। पूरे परिवार का सफ़ाया करके आरोपी ने समाज की बुनियाद पर आघात करने की कोशिश की...
किसी बाल गवाह की क्षमता का निर्धारण कैसे हो : सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने यह माना है कि एक आपराधिक मामले में बाल गवाहों को केवल इसलिए अक्षम नहीं कहा जा सकता क्योंकि वे उस व्यक्ति की पहचान करने में असमर्थ हैं जिसके सामने वो गवाही दे रहे हैं यानी वो जज और वकीलों को नहीं जानते हैं।क्या था यह पूरा मामला ?दरसअल पी. रमेश बनाम राज्य मामले में हत्या के एक मामले में अभियोजन पक्ष के 2 गवाह आरोपी और मृतका के नाबालिग बच्चे थे। ट्रायल जज ने इस आधार पर उनके सबूतों को दर्ज नहीं किया कि वे उस व्यक्ति की पहचान करने में असमर्थ थे, जिसके सामने वो बयान दे रहे थे। वो जज...
किसी विशेष उद्देश्य के लिए मुक़दमा दायर करने में देरी राहत से इंकार का आधार नहीं हो सकता अगर इसे निर्धारित समय सीमा के अंदर दायर किया गया : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी विशेष उद्देश्य के लिए मुक़दमा दायर करने में अगर देरी होती है तो इसे आधार बनाकर उस व्यक्ति को राहत देने से इंकार नहीं किया जा सकता बशर्ते मुक़दमा तय समय सीमा के अंदर दायर किया गया है। आलोचय मामले में समझौते की अवधि 22.09.2002 है और मुक़दमा दायर किया गया 11.02.2005 को। इस मामले को ख़ारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा था : "वादी ने बताया है कि उसे 11.02.2005 तक क्यों प्रतीक्षा करनी है क्योंकि प्रतिवादी ने नोटिस को Ex. A7 मार्क करके भेजे जाने के बावजूद इसका कोई ख़याल...
विशेष अदालत बिना प्रतिबद्ध या कमिटल के भी ले सकती है अपराध पर संज्ञान,यदि विशेष अधिनियम ऐसा करने का देता है अधिकार-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने यह माना है कि जब विशेष अधिनियम के स्पष्ट प्रावधान विशेष कोर्ट को यह अधिकार देते हैं कि अभियुक्त के बिना, अपराध पर संज्ञान ले सकती है तो ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता है कि विशेष कोर्ट द्वारा अपराध पर लिया गया संज्ञान दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 193 का उल्लंघन है।इस मामले में (ए. एम. सी. एस स्वामी, एडीई/डीपीई/एचवाईडी (केंद्रीय) बनाम मेहदी आगा करबलाई) हाईकोर्ट ने विद्युत अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले की कार्यवाही को इस आधार पर रद्द कर दिया था कि विशेष कोर्ट ने दंड...
बच्चों से बलात्कार सिर्फ वासना नहीं बल्कि शक्ति का अपराध : दिल्ली हाई कोर्ट ने बच्ची से रेप की दोषसिद्धी बरकरार रखी [निर्णय पढ़े]
दिल्ली उच्च न्यायालय ने बच्ची से बलात्कार के लिए सजा को बरकरार रखते हुए बाल गवाहों द्वारा दिए गए सबूतों की विश्वसनीयता पर कानून की स्थिति को भी दोहराया है। न्यायमूर्ति हरि शंकर की पीठ ने POCSO की धारा 3 के तहत 'भेदन कार्य' की सीमा को भी समझाया और ऐसे स्वभाव के अपराधों के जघन्य चरित्र पर टिप्पणी भी की।क्या था मौजूदा मामला ?वर्तमान मामले में अपीलकर्ता ने पीड़िता को उसकी मां से ले लिया और उसके लिए कपड़े खरीदने के बहाने पकड़ लिया।इसके बाद वह उसे अपने साथ एक घर में ले गया जहां उसने उसके साथ बार-बार...
फर्जी जनहित याचिकाओं के खिलाफ कार्रवाई-बाॅम्बे हाईकोर्ट ने 'क्रमिक या सिलसिलेवार याचिकाकर्ता' को किया आदिवासी क्षेत्र में छात्रों से आंकड़े एकत्रित करने के लिए अर्ध कानूनी स्वयंसेवक नियुक्त [आर्डर पढ़े]
बाॅम्बे हाईकोर्ट ने एक सपन श्रीवास्तव के द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद एक अद्भुत आदेश दिया है। गौरतलब है कि सपन हाईकोर्ट के समक्ष 40 से ज्यादा जनहित याचिकाएं दायर कर चुके हैं।मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंदराजोग और जस्टिस एन. एम. नामदार की पीठ ने यह कहा कि-''हमने पाया है कि जनहित याचिकाएं दायर करने के अलावा याचिकाकर्ता बतौर अर्ध कानूनी स्वयंसेवक के तौर पर सेवाएं देकर समाज की सहायता नहीं कर रहा है। कोर्ट का मानना है कि किसी भी जनहित याचिका को दायर करने से पहले या जो पहले दायर हो चुकी हैं,...
अगर बैंक ने चेक खोया तो वो ग्राहक को मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी : NCDRC [आर्डर पढ़े]
बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने बैंक को एक ग्राहक का चेक खोने का दोषी पाया और चेक के बराबर की राशि का भुगतान करने के लिए बैंक को उत्तरदायी ठहराया है।मामले की पृष्ठभूमिबैंक का मामला यह था कि चितरोदिया (उत्तरदाता) द्वारा जमा किया गया चेक अस्वीकृत कर दिया गया था और रजिस्टर्ड डाक द्वारा चेक रिटर्न मेमो के साथ उनके पंजीकृत पते पर भेज दिया गया था। लेकिन बाद में इस चेक को बैंक को वापस लौटा दिया गया था। इस प्रकार उसे...
सारांश कोर्ट मार्शल को केवल उसी स्थिति में आदेश देना चाहिए,जहां यह पूरी तरह से अनिवार्य हो कि तत्काल कार्यवाही आवश्यक है- सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने यह फिर से दोहराया है कि एससीएम का आदेश देने की शक्ति एक कठोर शक्ति है, ऐसे में इस शक्ति का प्रयोग उसी स्थिति में किया जाना चाहिए जहां यह पूरी तरह से अनिवार्य हो कि तत्काल कार्यवाही आवश्यक है।लांस दफादार के खिलाफ आरोपतत्कालीन कार्यवाहक लांस दफादार के खिलाफ यह आरोप था कि सुबह के समय जब वह सर्विस एरिया को साफ करने की ड्यूटी पर था, उसी समय वह एक साथी के घर में घुस गया। उस समय उसके साथी की पत्नी अपने बेटे को नहला रही थी और उसने जाकर उसके कंधे पर हाथ रख दिया।एससीएम ने ठहराया दोषीइसके...
'काम नहीं तो वेतन नहीं' का सिद्धांत तब लागू होगा जब नियोक्ता के किसी आदेश से कर्मचारी को काम से दूर नहीं रखा गया है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 'काम नहीं तो वेतन नहीं' का सिद्धांत तब लागू होता है जब किसी आदेश द्वारा नियोक्ता ने उसे काम से दूर रखा है। न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने इस स्थापित सिद्धांत को दुहराया है कि कोई भी व्यक्ति अगर अपने काम से बिना छुट्टी के और बिना किसी कारण के अनुपस्थित रहता है तो वह उस अवधि के लिए वेतन का दावा नहीं कर सकता।वर्तमान मामले में 14.5.2009 को अनुशासनात्मक अथॉरिटी ने कर्मचारी को अनधिकृत अनुपस्थिति का दोषी पाया और जेनरल इंश्योरेंस (आचरण, अनुशासन और...
दूरदर्शन नहीं कर सकता है अपनी डीटीएच सेवा के लिए 'डिश' शब्द का प्रयोगःहाईकोर्ट ने दिया डिश टीवी के पक्ष में आदेश [आर्डर पढ़े]
दिल्ली हाईकोर्ट ने दूरदर्शन के खिलाफ डिश टीवी को निषेधाज्ञा या आदेश प्रदान करते हुए दूरदर्शन को उसकी सेवाओं के लिए 'डिश' शब्द का प्रयोग करने से रोक दिया है। जस्टिस सहाय एंडलाॅ की 1 सदस्यीय पीठ ने हालांकि प्रतिवादी के सार्वजनिक क्षेत्राधिकारी के दावे को स्वीकार करने से इंकार करते हुए यह कहा कि इस तरह के शब्द का प्रयोग प्रथम दृष्टया उल्लंघन का केस बनता है।दलील दी गयी कि 'डिश' शब्द है डिश टीवी का ट्रेडमार्कइस मामले में वादी ने स्थाई निषेधाज्ञा (permanent injunction) के लिए सूट या केस दायर किया था...
शादी से इनकार के बावजूद सहमति से यौन संबंध बनाना बलात्कार नहीं : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक आदमी के खिलाफ 'बलात्कार' का मामला इस आधार पर खारिज कर दिया है कि 'पीड़िता' द्वारा यौन संबंध बनाने की सहमति ये अच्छी तरह से जानने के बाद भी दी गई थी कि आरोपी उससे शादी नहीं करेगा।"शिकायतकर्ता स्वयं आरोपी के साथ बने रहना चाहती थी"अदालत ने यह भी पाया कि शिकायतकर्ता 'आरोपी' के साथ 'गहराई से प्यार' कर रही थी और उसके साथ बने रहना चाहती थी। इसलिए शिकायतकर्ता अब अपनी बात से पलट नहीं सकती है और यह दावा नहीं कर सकती कि ये सहमति तथ्यों की गलत धारणा पर आधारित थी,...
अपराध में शामिल हथियार की बरामदगी के समय कोई आम गवाह उपलब्ध नहीं है तो इस वजह से पुलिस गवाह के बयान की सत्यता पर शक नहीं किया जा सकता : दिल्ली हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि सिर्फ़ इस वजह से कि हथियार की बरामदगी के समय कोई आम गवाह नहीं था, पुलिस गवाह के बयान की सत्यता पर शक नहीं किया जा सकता या उसकी गवाही को परे नहीं रखा जा सकता। एक लंबित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति हिमा कोहली और मनोज कुमार ओहरी की पीठ ने यह कहा। याचिका में सत्र अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी जिसने आईपीसी की धारा 302/34 के तहत अपीलकर्ता को दोषी ठहराया था। पीठ ने कहा कि यह मामला आईपीसी की धारा 302 और आईपीसी की धारा 304 भाग II तक इसमें नरमी...

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![मृत किरायेदार के क़ानूनी प्रतिनिधि को ढहाई गई संरचना के बाद हुए निर्माण में दुबारा प्रवेश का अधिकार है : इलाहाबाद हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े] मृत किरायेदार के क़ानूनी प्रतिनिधि को ढहाई गई संरचना के बाद हुए निर्माण में दुबारा प्रवेश का अधिकार है : इलाहाबाद हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/08/03/500x300_362821-362683-allahabad-high-court-11.jpg)

![जमानत देते समय कारण बताना आवश्यक है, सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया [निर्णय पढ़े] जमानत देते समय कारण बताना आवश्यक है, सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356985-am-sapre-indu-malhotra.jpg)

![न्यायपालिका के बहाने देरी की रणनीति को पुरस्कृत नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] न्यायपालिका के बहाने देरी की रणनीति को पुरस्कृत नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/07/22/500x300_362447-362313-justice-l-nageswara-rao-and-justice-hemant-gupta-22.jpg)
![दोषी का प्रतिनिधित्व ना होने पर हाई कोर्ट मेरिट के आधार पर दोषसिद्धी के खिलाफ अपील नहीं निपटा सकता : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े] दोषी का प्रतिनिधित्व ना होने पर हाई कोर्ट मेरिट के आधार पर दोषसिद्धी के खिलाफ अपील नहीं निपटा सकता : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/07/31/500x300_362709-362310-justice-r-bhanumati-and-justice-as-bopanna.jpg)
![गैर-यौगिक या समझौते के अयोग्य मामलों में नहीं दी जा सकती है पक्षकारों के बीच समझौते की अनुमति,लेकिन सजा तय करते समय हो सकता है यह एक विचारयोग्य कारक-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] गैर-यौगिक या समझौते के अयोग्य मामलों में नहीं दी जा सकती है पक्षकारों के बीच समझौते की अनुमति,लेकिन सजा तय करते समय हो सकता है यह एक विचारयोग्य कारक-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/07/26/500x300_362554-362400-justice-r-bhanumathi-and-justice-as-bopanna-1.jpg)
![बॉम्बे हाईकोर्ट ने माँ, पत्नी और बेटी की हत्या करने वाले आरोपी की मौत की सज़ा को जायज़ ठहराया [निर्णय पढ़े] बॉम्बे हाईकोर्ट ने माँ, पत्नी और बेटी की हत्या करने वाले आरोपी की मौत की सज़ा को जायज़ ठहराया [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356673-death-penalty-livelaw.jpg)
![किसी बाल गवाह की क्षमता का निर्धारण कैसे हो : सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया [निर्णय पढ़े] किसी बाल गवाह की क्षमता का निर्धारण कैसे हो : सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/07/28/500x300_362625-362375-justice-dy-chandrachud-and-justice-indira-banerjee.jpg)
![किसी विशेष उद्देश्य के लिए मुक़दमा दायर करने में देरी राहत से इंकार का आधार नहीं हो सकता अगर इसे निर्धारित समय सीमा के अंदर दायर किया गया : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] किसी विशेष उद्देश्य के लिए मुक़दमा दायर करने में देरी राहत से इंकार का आधार नहीं हो सकता अगर इसे निर्धारित समय सीमा के अंदर दायर किया गया : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/07/28/500x300_362622-362399-justice-rf-nariman-justice-surya-kant.jpg)
![विशेष अदालत बिना प्रतिबद्ध या कमिटल के भी ले सकती है अपराध पर संज्ञान,यदि विशेष अधिनियम ऐसा करने का देता है अधिकार-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] विशेष अदालत बिना प्रतिबद्ध या कमिटल के भी ले सकती है अपराध पर संज्ञान,यदि विशेष अधिनियम ऐसा करने का देता है अधिकार-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/02/08/500x300_358172-358074-justice-r-banumathi-justice-r-subhash-reddy.jpg)
![बच्चों से बलात्कार सिर्फ वासना नहीं बल्कि शक्ति का अपराध : दिल्ली हाई कोर्ट ने बच्ची से रेप की दोषसिद्धी बरकरार रखी [निर्णय पढ़े] बच्चों से बलात्कार सिर्फ वासना नहीं बल्कि शक्ति का अपराध : दिल्ली हाई कोर्ट ने बच्ची से रेप की दोषसिद्धी बरकरार रखी [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/07/12/500x300_362115-delhi-hc.jpg)
![फर्जी जनहित याचिकाओं के खिलाफ कार्रवाई-बाॅम्बे हाईकोर्ट ने क्रमिक या सिलसिलेवार याचिकाकर्ता को किया आदिवासी क्षेत्र में छात्रों से आंकड़े एकत्रित करने के लिए अर्ध कानूनी स्वयंसेवक नियुक्त [आर्डर पढ़े] फर्जी जनहित याचिकाओं के खिलाफ कार्रवाई-बाॅम्बे हाईकोर्ट ने क्रमिक या सिलसिलेवार याचिकाकर्ता को किया आदिवासी क्षेत्र में छात्रों से आंकड़े एकत्रित करने के लिए अर्ध कानूनी स्वयंसेवक नियुक्त [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/05/31/500x300_361172-360390-bombay-hc-6.jpg)
![अगर बैंक ने चेक खोया तो वो ग्राहक को मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी : NCDRC [आर्डर पढ़े] अगर बैंक ने चेक खोया तो वो ग्राहक को मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी : NCDRC [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356387-cheque-bounce-cases.jpg)
![सारांश कोर्ट मार्शल को केवल उसी स्थिति में आदेश देना चाहिए,जहां यह पूरी तरह से अनिवार्य हो कि तत्काल कार्यवाही आवश्यक है- सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] सारांश कोर्ट मार्शल को केवल उसी स्थिति में आदेश देना चाहिए,जहां यह पूरी तरह से अनिवार्य हो कि तत्काल कार्यवाही आवश्यक है- सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/07/26/500x300_362576-360061-supreme-court.jpg)
![काम नहीं तो वेतन नहीं का सिद्धांत तब लागू होगा जब नियोक्ता के किसी आदेश से कर्मचारी को काम से दूर नहीं रखा गया है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] काम नहीं तो वेतन नहीं का सिद्धांत तब लागू होगा जब नियोक्ता के किसी आदेश से कर्मचारी को काम से दूर नहीं रखा गया है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/07/23/500x300_362460-362308-justice-ashok-bhushan-and-justice-navin-sinha.jpg)
![दूरदर्शन नहीं कर सकता है अपनी डीटीएच सेवा के लिए डिश शब्द का प्रयोगःहाईकोर्ट ने दिया डिश टीवी के पक्ष में आदेश [आर्डर पढ़े] दूरदर्शन नहीं कर सकता है अपनी डीटीएच सेवा के लिए डिश शब्द का प्रयोगःहाईकोर्ट ने दिया डिश टीवी के पक्ष में आदेश [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/07/26/500x300_362572-362283-doordarshan800.jpg)
![शादी से इनकार के बावजूद सहमति से यौन संबंध बनाना बलात्कार नहीं : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े] शादी से इनकार के बावजूद सहमति से यौन संबंध बनाना बलात्कार नहीं : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/05/13/500x300_360838-madhyapradeshhighcourt-mphc.jpg)