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शिक्षक की बर्खास्तगी के खिलाफ निजी स्कूल की प्रबंधन समिति की रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं : SC ने पटना हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा [आर्डर पढ़े]
शिक्षक की बर्खास्तगी के खिलाफ निजी स्कूल की प्रबंधन समिति की रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं : SC ने पटना हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने पटना उच्च न्यायालय के उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें यह कहा गया है कि एक निजी स्कूल की प्रबंधन समिति भारत के संविधान के अनुच्छेद 12 के अर्थ के भीतर "राज्य" नहीं है और उसकी रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।क्या था यह पूरा मामला ?दरअसल एक निजी स्कूल में कार्यरत संस्कृत शिक्षक त्रिगुण चंद ठाकुर को स्वतंत्रता दिवस और शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर अनुपस्थित रहने के लिए प्रबंधन द्वारा बर्खास्त दिया गया था। इसके खिलाफ चुनौती को पटना उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। एकल पीठ ने कहा कि...

एनजीटी ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से जैव-कचरा प्रबंधन के नियमों का पालन नहीं करने पर हर महीने एक करोड़ का जुर्माना भरने को कहा [आर्डर पढ़े]
एनजीटी ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से जैव-कचरा प्रबंधन के नियमों का पालन नहीं करने पर हर महीने एक करोड़ का जुर्माना भरने को कहा [आर्डर पढ़े]

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रिपोर्ट के सुझावों को मानते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे या तो अपने जैव-स्वास्थ्य कचरे की निगरानी करें या फिर हर महीने इसके बदले एक करोड़ रुपए का जुर्माना उस समय तक भरें जब तक कि वे इस नियम का पालन नहीं शुरू कर देते हैं। सीपीसीबी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अगर स्वास्थ्य सेवा से जुड़ा कोई संस्थान जैव- स्वास्थ्य कचरा से संबंधित नियमों का उल्लंघन करता है तो उससे ₹1200 प्रतिदिन...

वादी को उन पक्षकारों को जोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता जिनके खिलाफ वो लड़ना नहीं चाहता : SC [निर्णय पढ़े]
वादी को उन पक्षकारों को जोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता जिनके खिलाफ वो लड़ना नहीं चाहता : SC [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने यह दोहराया है कि किसी वादी को एक वाद में उन पक्षकारों को जोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता जिनके खिलाफ वो लड़ना ही नहीं चाहता जब तक कि ऐसा करना कानून के शासन की मजबूरी न हो।Specific performance से जुड़ा क्या था यह पूरा मामला१विशिष्ट प्रदर्शन (specific performance) के लिए दायर सूट में, सूट की लंबितता के दौरान सूट की संपत्ति खरीदने वाले खरीदार ने मुकदमे में प्रतिवादी के रूप में निहितार्थ के लिए सीपीसी के आदेश 1 नियम 10 के तहत लंबित मुकदमे में एक आवेदन दायर किया। आवेदक का मामला...

आपराधिक ट्रायल में बरी होने का ये मतलब ये नहीं कि अनुशासनात्मक कार्यवाही से निकले कदाचार से भी छोड़ दिया जाए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
आपराधिक ट्रायल में बरी होने का ये मतलब ये नहीं कि अनुशासनात्मक कार्यवाही से निकले कदाचार से भी छोड़ दिया जाए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने यह दोहराया है कि आपराधिक मुकदमे के दौरान बरी होने का ये आधार नहीं है कि किसी को अनुशासनात्मक कार्यवाही के दौरान सामने आए कदाचार से भी मुक्त कर दिया जाए।क्या था यह पूरा मामला ?दरअसल CRPF के एक कांस्टेबल पर यह आरोप लगाया गया था कि उसके द्वारा हथियार को संभालने के दौरान सह कर्मचारी की मौत हुई थी। अनुशासनात्मक जांच में यह पाया गया कि रिकॉर्ड पर सबूतों के आधार पर उसके खिलाफ कदाचार का आरोप जारी रह सकता है जबकि उसके खिलाफ IPC की धारा 304 के तहत अपराध का ट्रायल चला था जिसमें उसे बरी कर...

धार्मिक स्थलों पर महिलाओं से यौन उत्पीड़न के लिए विशाखा गाइडलाइन लागू कराने संबंधी PIL सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की
धार्मिक स्थलों पर महिलाओं से यौन उत्पीड़न के लिए विशाखा गाइडलाइन लागू कराने संबंधी PIL सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें यह मांग की गई थी कि देशभर के आश्रमों, मदरसों व कैथोलिक संस्थाओं जैसे धार्मिक स्थलों पर महिलाओं से यौन उत्पीड़न के लिए विशाखा गाइडलाइन लागू करने के निर्देश जारी किए जाएं।"दिशानिर्देश को धार्मिक स्थलों तक नहीं बढ़ाया जा सकता"याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की पीठ ने यह कहा कि विशाखा गाइडलाइन को धार्मिक स्थलों तक नहीं बढ़ाया जा सकता है। याचिकाकर्ता इसे लेकर संबंधित प्राधिकरण के पास जा सकते हैं। याचिका में सामने रखी...

धारा 498A : जब ट्रायल कोर्ट ने दहेज के लिए दोषी नहीं ठहराया तो हाई कोर्ट बिना सबूतों पर विचार किए इस अपराध के लिए दोषी नहीं ठहरा सकता : SC [निर्णय पढ़े ]
धारा 498A : जब ट्रायल कोर्ट ने दहेज के लिए दोषी नहीं ठहराया तो हाई कोर्ट बिना सबूतों पर विचार किए इस अपराध के लिए दोषी नहीं ठहरा सकता : SC [निर्णय पढ़े ]

सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा है कि जब भारतीय दंड संहिता की धारा 498A के तहत ट्रायल कोर्ट ने किसी को दहेज की मांग के लिए दोषी नहीं ठहराया है तो उच्च न्यायालय रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों पर विस्तृत विचार के बिना दहेज की मांग के लिए आरोपी को उसी के तहत दोषी नहीं ठहरा सकता।क्या था यह मामला ?इस मामले में वसीम को आईपीसी की धारा 306 और 498 ए के तहत ट्रायल कोर्ट द्वारा दोषी ठहराया गया था। धारा 498 ए के तहत अारोप दहेज की मांग के लिए नहीं था बल्कि यह पता लगाने के लिए था कि अभियुक्त ने एक अतिरिक्त वैवाहिक संबंध...

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक बेरोजगार आदमी को दी पत्नी को रख-रखाव के रूप में  चावल,घी और कपड़े देने की अनुमति
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक बेरोजगार आदमी को दी पत्नी को रख-रखाव के रूप में चावल,घी और कपड़े देने की अनुमति

गुजारा भत्ता या रख-रखाव कानून में इसे एक दिलचस्प विकास कहा जा सकता है,पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अमित मेहरा बनाम मंजू के मामले में बेरोजगार पति(जिसकी नौकरी छूट गई है) को इस बात की अनुमति दे दी है कि वह अपनी पत्नी को गुजारे भत्ते के मौर पर मूलभूत जरूरत का सामान जैसे चावल,घी, और पहनने के कपड़े आदि उपलब्ध कराए।अमित,पंजाब का रहने वाला है। उसने हाईकोर्ट को बताया कि वह अपनी पूर्व पत्नी को आर्थिक सहायता नहीं दे सकता है,परंतु वह उसको मासिक राशन का सामान दे सकता है। उसके वकील ने कोर्ट को बताया कि अमित...

मध्यस्थता फ़ैसले के स्थगन आवेदन पर ग़ौर करने के दौरान सरकार को विशिष्ट तरजीह नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
मध्यस्थता फ़ैसले के स्थगन आवेदन पर ग़ौर करने के दौरान सरकार को विशिष्ट तरजीह नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मध्यस्थता अधिनियम की धारा 34 के तहत फ़ैसले पर धारा 36 के तहत अगर सरकार ने स्थगन के लिए आवेदन किया है तो उसको इस मामले में विशेष तरजीह नहीं दिया जा सकता।न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन और न्यायमूर्ति विनीत सरन की पीठ ने इस संबंध में कलकत्ता हाईकोर्ट के एक आदेश को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने सरकार के ख़िलाफ़ दिए गए फ़ैसले को बिनाशर्त अनिश्चित काल तक लिए स्थगित कर दिया था। कलकत्ता हाईकोर्ट ने इसके लिए CPC के आदेश XXVII के नियम 8A पर भरोसा किया।धारा 36 कहता है कि अगर इसके तहत स्थगन...

नियोक्ता देरी से अपना हिस्सा देता है या रिटर्न भरता है इस आधार पर ईएसआईसी किसी योग्य बीमित व्यक्ति को डब्ल्यूआईपी प्रमाणपत्र देने से मना नहीं कर सकता : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
नियोक्ता देरी से अपना हिस्सा देता है या रिटर्न भरता है इस आधार पर ईएसआईसी किसी योग्य बीमित व्यक्ति को डब्ल्यूआईपी प्रमाणपत्र देने से मना नहीं कर सकता : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

दिल्ली हाईकोर्ट ने शिवानी बनाम ईएसआईसी मामले में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता की बेटी आशी को "बीमित व्यक्ति की बेटी" का प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया है ताकि वह ऐसे संस्थान में अकादमिक सत्र 2019-20 men एमबीबीएस में प्रवेश ले सके जो ईएसआईसी से अंगीभूत है। इस मामले की सुनवाई के लंबित रहने के दौरान आशी 2018-19 सत्र में प्रवेश नहीं ले पाई थी और उसका एक सत्र बेकार चला गया था। न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने यह आदेश देते हुए कहा कि ईएसआईसी किसी और को...

कलकत्ता हाईकोर्ट ने उस दंडाधिकारी को किया बहाल,जो अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त थे,खुद पर लगाया एक लाख रुपए हर्जाना [निर्णय पढ़े]
कलकत्ता हाईकोर्ट ने उस दंडाधिकारी को किया बहाल,जो अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त थे,खुद पर लगाया एक लाख रुपए हर्जाना [निर्णय पढ़े]

अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त एक न्यायिक अधिकारी को फिर से नौकरी पर रखते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट को यह निर्देश दिया है कि वह इस अधिकारी को 1 लाख रुपए मुआवजे के तौर पर दे।क्या था यह पूरा मामला?दरअसल मिंटू मलिक के पास न्यायिक दंडाधिकारी और रेलवे दंडाधिकारी, सियालदाह के 2 पद थे। 7 मई 2007 को वह जब ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। तभी स्थानीय लोगों ने उनको बताया कि ट्रेन अक्सर देरी से चलती है। उन्हें बताया गया था कि इस तरह से ट्रेन के देर से चलने का कारण, ट्रेन का न्यू अलीपुर स्टेशन के बाद कहीं...

आश्रय का अधिकार है एक मौलिक अधिकार,राज्य का संवैधानिक कर्त्तव्य है कि वह गरीबों को घर की जगह उपलब्ध कराएं-इलाहाबाद हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
आश्रय का अधिकार है एक मौलिक अधिकार,राज्य का संवैधानिक कर्त्तव्य है कि वह गरीबों को घर की जगह उपलब्ध कराएं-इलाहाबाद हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह माना है कि आश्रय का अधिकार एक मौलिक अधिकार है और यह राज्य का संवैधानिक कर्तव्य बनता है कि वह गरीबों को घर की जगह उपलब्ध कराए।सरकारी जमीन पर अतिक्रमण से जुड़ा मामलाजस्टिस सूर्या प्रकाश केशरवानी ने यह टिप्पणी एक जनहित याचिका को खारिज करते हुए की है। इस जनहित याचिका में यह मांग की गई थी कि सरकारी जमीन पर रह रहे 4-4 अलग-अलग लोगों को वहां से निकाला जाए क्योंकि इन सभी ने अतिक्रमण किया है।कोर्ट ने निकाला मजदूरों के पक्ष में निष्कर्षकोर्ट ने यह निष्कर्ष निकाला कि यह सभी लोग गरीब...

देखभाल का कर्त्तव्य सर्जरी के साथ समाप्त नहीं होता है-एनसीडीआरसी ने दिया बाॅम्बे के अस्पताल व डाॅक्टरों को मृतक मरीज के परिवार को 31 लाख रुपए का भुगतान करने का आदेश [आर्डर पढ़े]
देखभाल का कर्त्तव्य सर्जरी के साथ समाप्त नहीं होता है-एनसीडीआरसी ने दिया बाॅम्बे के अस्पताल व डाॅक्टरों को मृतक मरीज के परिवार को 31 लाख रुपए का भुगतान करने का आदेश [आर्डर पढ़े]

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने दक्षिण मुम्बई में स्थित बाॅम्बे के एक अस्पताल को यह निर्देश दिया है कि अस्पताल द्वारा बरती गई लापरवाही के लिए एक मृतक मरीज के परिजनों को 30 लाख रुपए बतौर मुआवजा दिया जाए।पलटा गया राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का फैसलावहीं अस्पताल के डाॅक्टरों को यह निर्देश दिया गया है कि वह संयुक्त रूप से 1 लाख रुपए का भुगतान करे। अध्यक्ष आर. के. अग्रवाल और सदस्य एम. श्रीसा इस मामले में मृतक रणजीत तोरपानी के परिजनों की तरफ से अपील पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें राज्य...

अनैतिक व्यापार रोकथाम अधिनियम के तहत वयस्क पीड़िता को उसकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ सुधार गृह में नहीं भेजा जा सकता : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
अनैतिक व्यापार रोकथाम अधिनियम के तहत वयस्क पीड़िता को उसकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ सुधार गृह में नहीं भेजा जा सकता : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

एक महत्त्वपूर्ण फ़ैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि अनैतिक व्यापार रोकथाम अधिनियम के तहत किसी बालिग़ पीड़िता को उसकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ सुधार गृह में नहीं भेजा जा सकता।न्यायमूर्ति एसएस शिंदे ने पुणे की रहने वाली 34 वर्षीया असिया शेख़ की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। असिया ने दावा किया था कि उसने पीड़िता का उस समय से पालन-पोषण किया है जब वह एक बच्ची थी हालाँकि वह उसकी अपनी बेटी नहीं है।पृष्ठभूमिपीड़िता को पंढरपुर के नज़दीक एक लॉज से एक छापे के दौरान छुड़ाया गया था। इसके बाद पंढरपुर के...

अतिरिक्त अपराध जोड़ने के बाद आरोपी को गिरफतार करने के लिए जांच अधिकारी या प्राधिकरण को उस कोर्ट से आदेश लेना होगा,जिसने जमानत दी थी-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
अतिरिक्त अपराध जोड़ने के बाद आरोपी को गिरफतार करने के लिए जांच अधिकारी या प्राधिकरण को उस कोर्ट से आदेश लेना होगा,जिसने जमानत दी थी-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने यह माना है कि जिस मामले में आरोपी को पहले ही जमानत मिल चुकी है, अगर उसमें कुछ और अपराध जोड़े जाते है तो जांच अधिकारी या जांच करने वाले प्राधिकरण को उस कोर्ट से आरोपी को गिरफ्तार करने की अनुमति लेनी होगी, जिसने आरोपी को जमानत दी थी।दरअसल जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस के. एम. जोसफ की पीठ इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर एक अपील पर सुनवाई कर रही थी। हाईकोर्ट के आदेश में यह मुद्दा निकलकर आया था कि एक आपराधिक मामले में जब आरोपी को जमानत दी जा चुकी है और उसके बाद उसमें...

दिल्ली हाईकोर्ट ने दुहराया, अदालत मध्यस्थता समझौते की शर्तों को बदल नहीं सकती है [निर्णय पढ़े]
दिल्ली हाईकोर्ट ने दुहराया, अदालत मध्यस्थता समझौते की शर्तों को बदल नहीं सकती है [निर्णय पढ़े]

दिल्ली हाईकोर्ट ने दुहराया है कि अदालत विभिन्न पक्षों के बीच मध्यस्थता समझौते की शर्तों को नहीं बदल सकती है और इसके बदले उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी पक्ष इस समझौते को मानें। न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने अपने फ़ैसले में कहा, "मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 11 के तहत क़रार की शर्तों को अदालत बदल नहीं सकती और पक्षकारों को मिश्रित मध्यस्थता की बात नहीं कह सकती है जिसका प्रावधान ज़िला मध्यस्थता समझौते में है"। पीठ ने लिब्रा ऑटोमोटिव्स प्राइवेट लिमिटेड की याचिका को ख़ारिज...

ई-काॅमर्स प्लेटफार्म को प्रत्यक्ष बिक्री में संलग्र कंपनियों के उत्पाद बेचने से किया वर्जित-दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
ई-काॅमर्स प्लेटफार्म को प्रत्यक्ष बिक्री में संलग्र कंपनियों के उत्पाद बेचने से किया वर्जित-दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

दिल्ली उच्च न्यायालय ने ई-कॉमर्स वेबसाइटों को उन कंपनियों के उत्पादों को बेचने से रोक दिया है जो प्रत्यक्ष बिक्री में लगे हुए हैं। अदालत ने यह कहा कि उत्पादों को अनधिकृत चैनलों के माध्यम से प्राप्त किया जा रहा है और उनसे छेड़छाड़ की जा रही व उन्हें खराब किया जा रहा है। जिससे ट्रेडमार्क अधिनियम के तहत याचिकाकर्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा हैन्यायालय को निम्नलिखित मुद्दों पर फैसला देना था1. क्या डायरेक्ट सेलिंग गाइडलाइंस, 2016 या प्रत्यक्ष बिक्री दिशा-निर्देश वैध हैं और क्या ये प्रतिवादियों के...

मध्यस्थता समझौते को तुरंत प्रभावी करना चाहिए : SC ने एक साल की देरी से मामला सूचीबद्ध करने पर रजिस्ट्री की खिंचाई की [आर्डर पढ़े]
मध्यस्थता समझौते को तुरंत प्रभावी करना चाहिए : SC ने एक साल की देरी से मामला सूचीबद्ध करने पर रजिस्ट्री की खिंचाई की [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में समझौता होने के 1 साल बाद एक सुलझे हुए मामले को सूचीबद्ध करने के लिए रजिस्ट्री की जमकर खिंचाई की।दरअसल अदालत पिछले साल मध्यस्थता के लिए एक वैवाहिक मामले का उल्लेख कर रही थी। यह समझौता 10 मई, 2018 को दर्ज किया गया था और 1 सप्ताह बाद 16.5.2018 को अदालत ने गर्मियों छुट्टी के बाद मामले को सूचीबद्ध करने के लिए निर्देश जारी किया था।जब सोमवार को कोर्ट में मामला आया तो न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ की पीठ ने केस निपटारे को दर्ज किया और पक्षों को...