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लाॅकडाउन की आड़ में कोई गैरकानूनी सजा नहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने चेताया, जनहित याचिका मेंं लाॅकडाउन का उल्लंघन करने वालों को अपमानित करने का आरोप
"लाॅकडाउन की आड़ में कोई गैरकानूनी सजा नहीं", बॉम्बे हाईकोर्ट ने चेताया, जनहित याचिका मेंं लाॅकडाउन का उल्लंघन करने वालों को अपमानित करने का आरोप

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि लाॅकडाउन को लागू कराने की आड़ में पुलिस गैर कानूनी तरीकों व दंडों का सहारा नहीं ले सकती है। इस मामले में दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ पुलिस कर्मी मानवाधिकारों का पूरी तरह से उल्लंघन करने के दोषी हैं क्योंकि उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों सहित लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों के साथ 'अमानवीय व्यवहार' किया है। नागपुर पीठ के न्यायमूर्ति रोहित बी. देव की पीठ इस मामले में एक संदीप मधु नायर की तरफ से दायर जनहित याचिका पर...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने होमगार्ड से मास्क पहनने को लेकर बहस करने के आरोपी को ज़मानत दी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने होमगार्ड से मास्क पहनने को लेकर बहस करने के आरोपी को ज़मानत दी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को उस डॉक्टर को ज़मानत दे दी जिस पर होमगार्ड पर हमले का आरोप था। आरोप था कि इस डॉक्टर ने उस होमगार्ड को अपना काम करने से रोका जिसने उसे मास्क लगाने को कहा था। न्यायमूर्ति भारती डांगरे ने शेखर सनादी को ज़मानत दे दी जिस पर शाहपुर पुलिस स्टेशन के शैलेश माली नामक होमगार्ड ने अपना काम नहीं करने देने का आरोप लगाया था। आरोपी ने मास्क नहीं पहना था और होमगार्ड ने उसे मास्क पहनने को कहा क्योंकि यह ज़रूरी था, लेकिन आरोपी ने उसके और दो अन्य लोगों के साथ बहस की। 27 मार्च को...

रिपोर्टिंग में सिर्फ़ कोई त्रुटि होने की वजह से कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती : मद्रास हाईकोर्ट ने ईटी के पत्रकार और संपादक के ख़िलाफ़ आपराधिक मानहानि का मामला ख़ारिज किया
'रिपोर्टिंग में सिर्फ़ कोई त्रुटि होने की वजह से कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती' : मद्रास हाईकोर्ट ने ईटी के पत्रकार और संपादक के ख़िलाफ़ आपराधिक मानहानि का मामला ख़ारिज किया

मद्रास हाईकोर्ट ने को इकोनोमिक टाइम्स की पत्रकार संध्या रविशंकर और उनके पति जो इस अख़बार में संपादक और शिकायत निवारण अधिकारी हैं, उनके ख़िलाफ़ आपराधिक मानहानि के मामले को समाप्त कर दिया। यह मामला तमिलनाडु के समुद्र तट से बालू की तस्करी के बारे में 2015 में ईटी मैगज़ीन में एक आलेख के प्रकाशन से जुड़ा है। न्यायमूर्ति जीआर स्वामिनाथन की पीठ ने कहा, "मेरा स्पष्ट विचार है कि सिर्फ़ प्रेस की स्वतंत्रता का गुणगान करने का कोई मतलब नहीं है, अगर कोई उस समय बचाने के लिए नहीं आता जब इस अधिकार पर हमले...

दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस के साथ झगड़ा करने वाले और मास्क नहीं पहनने वाले व्यक्ति के ख़िलाफ़ एफआईआर निरस्त करने से इनकार किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस के साथ झगड़ा करने वाले और मास्क नहीं पहनने वाले व्यक्ति के ख़िलाफ़ एफआईआर निरस्त करने से इनकार किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने उस व्यक्ति के ख़िलाफ़ दायर एफआईआर को ख़ारिज करने से इनकार कर दिया है जिस पर पुलिस के साथ बदतमीज़ी करने और मास्क पहने बिना घूमने का आरोप है। अदालत ने कहा कि एफआईआर निरस्त करने का कोई आधार नहीं है। न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की एकल पीठ ने कहा कि सरकार ने लॉकडाउन के प्रतिबंध लगाए हैं अगर उनका पालन नहीं किया गया तो इससे लाखों लोगों की जान जा सकती है और इसलिए इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। अदालत में सीआरपीसी की धारा 482 के तहत आवेदन देकर आईपीसी की धारा 188, 186, 269, 353, 332...

मुंबई की आर्थर रोड जेल में COVID-19 का संक्रमण फैलने के बाद कई कैदियों ने ज़मानत की मांग की, बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा, कैदियों को भी जीवन का अधिकार
मुंबई की आर्थर रोड जेल में COVID-19 का संक्रमण फैलने के बाद कई कैदियों ने ज़मानत की मांग की, बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा, कैदियों को भी जीवन का अधिकार

मुंबई की आर्थर रोड जेल के 100 से अधिक कैदियों और स्टाफ सदस्यों का COVID -19 टेस्ट पॉज़िटिव आने के बाद कैदियों में डर का माहौल पैदा हो गया है, विशेष रूप से उन लोगों में जो हाइपर-टेंशन, मधुमेह जैसे अन्य रोग से पीड़ित हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति भारती डांगरे ने शुक्रवार को मेडिकल ग्राउंड पर जमानत की मांग कर रहे कई कैदियों की याचिका पर सुनवाई की। मेडिकल ग्राउंड पर रिहाई की मांग करने वाले आरोपियों में से एक 66 वर्षीय हेमंत भट्ट हैं, जिनका COVID -19 टेस्ट पॉज़िटिव आया है और वर्तमान में...

मेरे ख़िलाफ़ दुर्भावनापूर्ण शिकायत मुझे डराने और परेशान करने के लिए दायर की गई: दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग प्रमुख ने दिल्ली हाईकोर्ट से अग्रिम ज़मानत मांगी
'मेरे ख़िलाफ़ दुर्भावनापूर्ण शिकायत मुझे डराने और परेशान करने के लिए दायर की गई': दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग प्रमुख ने दिल्ली हाईकोर्ट से अग्रिम ज़मानत मांगी

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के प्रमुख जफरुल इस्लाम ने दिल्ली हाईकोर्ट में अग्रिम ज़मानत कि लिए याचिका दायर की है। उन्होंने अपने आवेदन में कहा है कि उन्हें दिल की बीमारी है और हाइपर टेंशन की वजह से उन्हें COVID-19 से संक्रमित होने का ख़तरा ज़्यादा है। एडवोकेट वृंदा ग्रोवर के माध्यम से दायर याचिका में झूठे, जानबूझकर और अपुष्ट मामले से बचाव के लिए ज़मानत देने का आग्रह किया गया है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस ने खान के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 124A और 153A के तहत मामला दायर किया है जो...

धारा 167 (2) के तहत डिफॉल्ट जमानत का अधिकार सुप्रीम कोर्ट की सीमा अवधि में की गई बढ़ोतरी के आदेश से प्रभावित नहीं होताः मद्रास हाईकोर्ट
धारा 167 (2) के तहत डिफॉल्ट जमानत का अधिकार सुप्रीम कोर्ट की सीमा अवधि में की गई बढ़ोतरी के आदेश से प्रभावित नहीं होताः मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में माना है कि COVID-19 के मद्देनजर मामलों को दायर करने की सीमा अवधि में बढ़ोतरी का सुप्रीम कोर्ट का सामान्य फैसला, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 167 (2) के तहत किसी अभियुक्त के डिफॉल्ट जमानत के अधिकार को प्रभावित नहीं करेगा। ज‌स्टिस जीआर स्वामीनाथन की एकल पीठ ने कहा कि पुलिस अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का फायदा उठाकर अतिरिक्त अवधि का दावा नहीं कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की व्याख्या की अनुमति देना भारत के संविधान के...

केंद्र और राज्य स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठा रहे हैं सकारात्मक क़दम : केरल हाईकोर्ट ने COVID 19 प्रभावित नर्सों को राज्य में वापस लाने के अनुरोध की याचिका ख़ारिज की
'केंद्र और राज्य स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठा रहे हैं सकारात्मक क़दम' : केरल हाईकोर्ट ने COVID 19 प्रभावित नर्सों को राज्य में वापस लाने के अनुरोध की याचिका ख़ारिज की

केरल हाईकोर्ट ने COVID 19 संक्रमण से ग्रस्त नर्सों को उचित इलाज के लिए राज्य में वापस लाने को लेकर यूनाइटेड नर्सेस एसोशिएशन की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। एसोसिएशन ने ऐसी नर्सों को विदेश से वापस लाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी जिन्हें या तो COVID 19 संक्रमण हो गया है या हो सकता है। इनका कहना था कि नर्सों को राज्यों में उचित इलाज नहीं हो रहा है और उन्हें न तो दवा दी जा रही हैं, न उनकी जांच हो रही है, और न खाना आदि मिल रहा है। याचिका में कहा गया था कि केरल राज्य में नर्सों का...

वाईजैग गैस लीकः एनजीटी ने एलजी पॉलिमर्स को 50 करोड़ रुपए जमा करने का निर्देश दिया, जांच के ‌लिए 5 सदस्यीय कमेटी का गठन
वाईजैग गैस लीकः एनजीटी ने एलजी पॉलिमर्स को 50 करोड़ रुपए जमा करने का निर्देश दिया, जांच के ‌लिए 5 सदस्यीय कमेटी का गठन

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने वाईजैग की रासायनिक गैस रिसाव की घटना के खिलाफ दर्ज एक सू मोटो मामले में, घटनास्‍थल के निरीक्षण के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति को दस दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को निर्देश दिया गया है। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसके सदस्य जस्टिस श्यो कुमार सिंह (न्यायिक सदस्य) और डॉ नागिन नंदा (विशेषज्ञ सदस्य) हैं, ने एलजी पॉलीमर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को जिलाधिकारी, विशाखापट्टनम के पास 50 करोड़ रुपए की राश‌ि जमा करने का निर्देश दिया...

एड हॉक सहायक प्रोफेसर की कॉलेज प्रबंधन ने कर दी थी सेवा समाप्त, दिल्ली हाईकोर्ट ने राहत दी, कॉलेज पर जुर्माना भी लगाया
एड हॉक सहायक प्रोफेसर की कॉलेज प्रबंधन ने कर दी थी सेवा समाप्त, दिल्ली हाईकोर्ट ने राहत दी, कॉलेज पर जुर्माना भी लगाया

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक एड हॉक (तदर्थ) प्रोफेसर को कॉलेज प्रबंधन द्वारा जारी सेवा समाप्ति पत्र (Termination Letter) को रद्द कर दिया है। इस महिला प्रोफेसर का अनुबंध कॉलेज द्वारा नवीनीकृत नहीं किया गया था क्योंकि उसने मातृत्व अवकाश लिया था, जिसे उक्त कॉलेज ने मंज़ूर नहीं किया था। न्यायमूर्ति हेमा कोहली और न्यायमूर्ति आशा मेनन की खंडपीठ ने एक सप्ताह के भीतर अपीलार्थी प्रोफेसर को सेवा में बहाल करने के लिए कॉलेज को निर्देश देते हुए अपीलकर्ता के कार्यकाल को मनमाने और अनपेक्षित कारणों से नवीनीकृत नहीं...

वकीलों ने ट्रेन रद्द करने की कर्नाटक सरकार की कार्रवाई की निंदा की कहा, श्रमिकों को रोक कर रखना गुलामी के समान, पढ़िए बयान
वकीलों ने ट्रेन रद्द करने की कर्नाटक सरकार की कार्रवाई की निंदा की कहा, श्रमिकों को रोक कर रखना गुलामी के समान, पढ़िए बयान

बेंगलुरु, दिल्ली और महाराष्ट्र के लगभग 69 अधिवक्ताओं ने गुरुवार को एक बयान जारी कर प्रवासी श्रमिकों के लिए सभी विशेष ट्रेन रद्द करने की कर्नाटक सरकार की कार्रवाई की निंदा की। बयान में कहा गया, "हम, अधिवक्ताओं, बिल्डरों के कुछ प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद प्रवासी श्रमिकों के लिए सभी विशेष रेलगाड़ियों को रद्द करने की कर्नाटक सरकार की कार्रवाई की निंदा करते हैं। हमारा मानना ​​है कि इस तरह का कृत्य बिल्कुल भीषण और बंधुआ मजदूरी के रूप में है। यह संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत निषिद्ध है। " ...

दिल्ली की एक अदालत ने लॉकडाउन का उल्लंघन करने और सांप्रदायिक अपशब्द के लिए महिलाओं के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए
दिल्ली की एक अदालत ने लॉकडाउन का उल्लंघन करने और सांप्रदायिक अपशब्द के लिए महिलाओं के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए

दिल्ली की एक अदालत ने दो महिलाओं के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करने को कहा है जिन पर लॉकडाउन का उल्लंघन करने और मुहल्ले के मुस्लिम लोगों के ख़िलाफ़ सांप्रदायिक अपशब्द कहने के आरोप हैं। इस बारे में सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत एक आवेदन पर ग़ौर करते हुए तीस हज़ारी अदालत में ड्यूटी एमएम ऋषभ कपूर ने कहा कि इन महिलाओं के पास लॉकडाउन के दौरान बाहर जाने का पास भी नहीं था। अदालत ने ग़ौर करते हुए कहा कि महिलाओं ने आईपीसी की धारा 188, 153A और 295A का उल्लंघन किया है। इस आवेदन में आवेदनकर्ता ने एफआईआर...

COVID 19 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्वारंटीन केंद्रों की अस्वच्छता पर स्वत: संज्ञान लिया
COVID 19 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्वारंटीन केंद्रों की अस्वच्छता पर स्वत: संज्ञान लिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश राज्य के विभिन्न क्वारंटीन केंद्रों की अस्वच्छता और अमानवीय स्थितियों के बारे में संज्ञान लिया। मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की एक खंडपीठ ने क्वारंटीन केंद्रों पर "दयनीय परिस्थितियों" को उजागर करते हुए हाईकोर्ट के अधिवक्ता गौरव के गौर द्वारा भेजे गए ई-मेल के आधार पर एक जनहित याचिका दर्ज की है। गौर ने अदालत को बताया कि पेशे से इंजीनियर वीरेंद्र सिंह ने हाल ही में COVID 19 संक्रमण के कारण दम तोड़ दिया। उन्होंने अपनी...

मद्रास हाईकोर्ट ने टीएएसएमएसी शराब की दुकानों को दी अनुमति, तीन दिन में एक बार हर व्यक्ति को बेच सकेंगे दो बोतल शराब
मद्रास हाईकोर्ट ने टीएएसएमएसी शराब की दुकानों को दी अनुमति, तीन दिन में एक बार हर व्यक्ति को बेच सकेंगे दो बोतल शराब

‘‘शराब खरीदने वालों के आर्डर के डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बुकिंग को प्रोत्साहित करने के लिए, हम यह निर्देश देते हैं कि जो लोग ऑनलाइन बुकिंग करते हैं और बैंकिंग चैनल के माध्यम से ऑनलाइन डिजिटल भुगतान करते हैं, उन्हें एक दिन में एक प्रकार की शराब की दो बोतलें खरीदने की अनुमति है। वहीं जो लोग ऑनलाइन भुगतान नहीं करते हैं और ऑनलाइन ऑर्डर बुक नहीं करते हैं (क्योंकि हो सकता है कि उनके पास ऐसी मोबाइल फोन की सुविधा न हो),उन्हें टोकन जारी किए जाएं और उसके आधार पर एक दिन में केवल 750 एमएल की एक बोतल खरीदने की अनुमति होगी।’’

लॉकडाउन 3 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट और अधीनस्थ कोर्ट द्वारा पारित अंतरिम आदेशों की अवधि 3 जून तक बढ़ाई
लॉकडाउन 3 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट और अधीनस्थ कोर्ट द्वारा पारित अंतरिम आदेशों की अवधि 3 जून तक बढ़ाई

देशव्यापी लॉकडाउन के तीसरे चरण के मद्देनजर मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट और इसके अधीनस्थ कोर्ट द्वारा पारित सभी अंतरिम आदेशों को आगे बढ़ा दिया है, जिनकी अवधि 19 मार्च के बाद, 3 जून तक समाप्त हो गई है। इसके अलावा, बेदखली, विस्तार या विध्वंस के आदेश और 17 मई को या उससे पहले अग्रिम जमानत की अवधि के आदेश भी 3 जून तक बढ़ा दिए गए हैं।ये आदेश स्वत: संज्ञान लेकर पारित किये गए हैं, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि मुकदमों के लिए "कानून के...

मध्यस्‍थता के दौरान आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल के आदेश को रिट याचिका के जरिए चुनौती नहीं दी जा सकती : गुजरात हाईकोर्ट
मध्यस्‍थता के दौरान आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल के आदेश को रिट याचिका के जरिए चुनौती नहीं दी जा सकती : गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह दिए एक फैसले में विचार किया कि क्या 1996 के अधिनियम के तहत मध्यस्थता की कार्यवाही की विचाराध‌ीनता के मध्य पारित आदेश को संविधान के अनुच्छेद 226 और 227 के तहत उत्प्रेषण के जरिए चुनौती दी जा सकती है या नहीं। कोर्ट ने कहा, " मध्यस्थता अधिनियम, 1996 की नीति, उद्देश्य और प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए, आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल द्वारा मध्यस्थता की कार्यवाही के दरमियान पारित आदेश को अनुच्छेद 226 और 227 के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती है क्योंकि 1996 अधिनियम एक विशेष...

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक कैदी को रिहा करने से इसलिए किया इनकार क्योंकि उसका घर कोरोना कंटेंटमेंट एरिया में है
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक कैदी को रिहा करने से इसलिए किया इनकार क्योंकि उसका घर कोरोना कंटेंटमेंट एरिया में है

सज़ा के अंतरिम निलंबन की मांग करने वाले एक आवेदन पर विचार करने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने एक कैदी को रिहा करने से इनकार कर दिया क्योंकि उसका निवास दिल्ली में कोरोना कंटेंटमेंट एरिया में आता है। न्यायमूर्ति विभु बाखरू की एकल पीठ ने राहत देने से इनकार करते हुए उल्लेख किया कि चूंकि आवेदक का निवास एक अधिसूचित क्षेत्र में आता है, जहाँ निवासियों को संक्रमण होने का अधिक खतरा होता है, इसलिए COVID19 छूत के आधार पर कैदी को रिहा करना उचित नहीं होगा। यह आदेश एक आवेदन पर आया है जिसमें...