ताज़ा खबरें
नाबालिग के गुप्तांगों को छूना बलात्कार नहीं, POCSO Act के तहत यौन उत्पीड़न का अपराध: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 12 वर्ष से कम आयु की नाबालिग लड़की के गुप्तांगों को छूना मात्र भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375/376एबी के तहत बलात्कार या यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) की धारा 6 के तहत प्रवेशात्मक यौन उत्पीड़न का अपराध नहीं माना जाएगा।अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसा आचरण POCSO Act की धारा 9(एम) के तहत परिभाषित "गंभीर यौन उत्पीड़न" के अपराध के साथ-साथ IPC की धारा 354 के तहत "महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने" के अपराध के समान होगा।बिना किसी प्रवेशात्मक कृत्य के नाबालिग...
सुप्रीम कोर्ट का हिमाचल प्रदेश में अतिक्रमणों को नियमित करने के अधिकार को रद्द करने के फैसले पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया, जिसमें हिमाचल प्रदेश भूमि राजस्व अधिनियम, 1952 की धारा 163-ए को असंवैधानिक घोषित किया गया था।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने मामले में नोटिस जारी किया।अधिनियम की धारा 163-ए राज्य सरकार को सरकारी भूमि पर अतिक्रमणों के नियमितीकरण के लिए नियम बनाने का अधिकार देती है।हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि विवादित प्रावधान 'बेईमान व्यक्तियों के एक वर्ग के लिए...
चीफ जस्टिस ने लंबित मामलों को कम करने के लिए सरकारी अपीलों को दायर करने से पहले फ़िल्टर करने का सुझाव दिया
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) भूषण रामकृष्ण गवई ने शनिवार को एक केंद्रीय एजेंसी का आह्वान किया, जो अदालतों में लंबित मामलों की संख्या को कम करने के लिए यह फ़िल्टर करे कि सरकार किन फैसलों के लिए अपील करती है।वह केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के 10वें अखिल भारतीय सम्मेलन, 2025 को संबोधित कर रहे थे।जस्टिस गवई ने कहा कि वर्तमान में CAT के समक्ष एक लाख से अधिक मामले और राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरणों के समक्ष कई अन्य मामले लंबित हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में सबसे...
मांग नोटिस में चेक की सही राशि का उल्लेख नहीं है तो NI Act की धारा 138 के तहत शिकायत सुनवाई योग्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (NI Act) की धारा 138 के तहत किसी शिकायत को सुनवाई योग्य बनाने के लिए मांग के वैधानिक नोटिस में चेक की राशि का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। यदि मांग नोटिस में उल्लिखित राशि चेक की राशि से भिन्न है, तो शिकायत सुनवाई योग्य नहीं है।अदालत ने कहा,"NI Act की धारा 138 के प्रावधान (बी) के तहत जारी किए जाने वाले नोटिस में उसी राशि का उल्लेख होना चाहिए, जिसके लिए चेक जारी किया गया। यह अनिवार्य है कि वैधानिक नोटिस में मांग चेक की राशि के बराबर ही हो।"चीफ...
"भारतीय फुटबॉल में बदलाव की उम्मीद": सुप्रीम कोर्ट ने AIFF संविधान को अंतिम रूप दिया, 4 हफ्तों में अपनाने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (19 सितंबर) को अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) के संविधान का ड्राफ्ट अंतिम रूप दे दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि महासंघ जल्द से जल्द, अधिमानतः 4 हफ्तों के भीतर, जनरल बॉडी मीटिंग बुलाकर संविधान को अपनाए। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने यह फैसला 2017 के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश (जिसमें तत्कालीन अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल सहित AIFF पदाधिकारियों का चुनाव रद्द किया गया था) के खिलाफ AIFF की याचिका पर दिया।कोर्ट ने कहा कि खेल संवैधानिक आदर्श बंधुत्व से...
आयातित वस्तुओं को विशिष्ट, विपणन योग्य उत्पादों में परिवर्तित करना 'निर्माण' के अंतर्गत आता है, एक्साइज़ ड्यूटी लागू: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आयातित गैस-उत्पादक सेटों (जेनसेट्स) को स्टील के कंटेनरों में रखकर और उनमें आवश्यक पुर्जे लगाकर कंटेनरयुक्त "पावर पैक्स" में परिवर्तित करना केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 के तहत "निर्माण" के अंतर्गत आता है, जिससे अंतिम उत्पाद पर एक्साइज़ ड्यूटी लगता है।अदालत ने कहा,"जेनसेट को स्टील के कंटेनर में रखने और उस कंटेनर में अतिरिक्त अभिन्न पुर्जे लगाने की प्रक्रिया नई, विशिष्ट और विपणन योग्य वस्तु का निर्माण करती है। इस प्रकार, यह प्रक्रिया अधिनियम, 1944 की धारा 2(f)(i) के...
बड़े निगमों और छोटे व्यवसायों के बीच मध्यस्थता में समान अवसर आवश्यक: चीफ जस्टिस बीआर गवई
दिल्ली मध्यस्थता सप्ताहांत 3.0 में बोलते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई ने हाल ही में इस बात पर ज़ोर दिया कि मध्यस्थता को वास्तव में व्यावसायिक दक्षता का साधन बनाने के लिए बड़े निगमों और छोटे व्यवसायों के बीच समान अवसर होना आवश्यक है। उन्होंने विधायी और नीतिगत पहलों के कार्यान्वयन पर ज़ोर दिया, जो सभी संबंधित हितधारकों को लाभ प्रदान कर सकें ताकि समान अवसर बनाए रखा जा सके।उन्होंने कहा,"हालांकि, हमने खुद को प्रमुख व्यावसायिक और कानूनी केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण...
Chhattisgarh NAN Scam | सुप्रीम कोर्ट ने अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला की अग्रिम ज़मानत रद्द की
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में भ्रष्टाचार से संबंधित 2015 के नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) घोटाले में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा और सह-आरोपी आलोक शुक्ला को दी गई अग्रिम ज़मानत रद्द कर दी।जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा 2020 में दी गई अग्रिम ज़मानत को चुनौती देने वाली प्रवर्तन निदेशालय (ED) की अपीलों पर यह आदेश पारित किया।ED ने दलील दी थी कि टुटेजा और शुक्ला को दी गई अग्रिम ज़मानत के कारण वह PMLA...
ऑस्ट्रेलियाई चीफ जस्टिस का सुप्रीम कोर्ट का दौरा, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के साथ शेयर की पीठ
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया (सीजेआई) ने ऑस्ट्रेलियाई हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस स्टीफन गैगेलर का स्वागत किया। उन्होंने विशेष आमंत्रित के रूप में कोर्ट की कार्यवाही देखी।सुबह के सत्र में जस्टिस गैगेलर ने चीफ जस्टिस बीआर गवई जस्टिस, विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ में एक पर्यवेक्षक जज के रूप में हिस्सा लिया।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस गैगेलर का स्वागत करते हुए कहा कि भारत जैसे खूबसूरत देश को देखने के लिए उनकी यह यात्रा बहुत छोटी है।सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने भी बताया कि 2015 में जब...
'कार्यवाही को अंतिम रूप दिया जाना चाहिए': AGR बकाया पर वोडाफोन की नई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (19 सितंबर) को पूछा कि क्या वह समायोजित सकल राजस्व (AGR) बकाया के मुद्दे पर वोडाफोन इंडिया द्वारा दायर नई याचिका पर विचार कर सकता है, जबकि कोर्ट ने अपने पिछले आदेश को नज़रअंदाज़ कर दिया था, जिसमें कंपनी द्वारा इसी मुद्दे पर दायर पिछली याचिका को खारिज कर दिया गया था।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ वोडाफोन इंडिया द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दूरसंचार विभाग द्वारा 2016-17 की अवधि के AGR...
हाईकोर्ट परिसर में हाइनमर्स मकबरा, सुप्रीम कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट परिसर के भीतर लॉ कॉलेज परिसर में स्थित डेविड येल और जोसेफ हाइनमर्स के मकबरे के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने सीनियर एडवोकेट टी. मोहन की उस याचिका पर नोटिस जारी करते हुए यह आदेश पारित किया, जिसमें मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें इस ढांचे को "प्राचीन स्मारक" न मानते हुए इसे स्थानांतरित करने का आदेश दिया गया।सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान याचिकाकर्ता की ओर से उपस्थित हुए और तर्क दिया कि...
BREAKING| बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक को दशहरा उत्सव में आमंत्रित करने का फैसला बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने 'तीन बार' खारिज की याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की, जिसमें मैसूर के चामुंडी मंदिर में दशहरा उत्सव के उद्घाटन समारोह में बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के राज्य सरकार के फैसले को मंजूरी दी गई थी।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद मामला खारिज कर दिया।याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट पीबी सुरेश ने दलील दी कि किसी गैर-हिंदू व्यक्ति को पूजा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।जस्टिस नाथ ने...
भीमा कोरेगांव मामला: वरवरा राव की जमानत शर्तों में संशोधन की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार
वरवरा राव की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार किया। भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी, 85 वर्षीय राव ने अपनी मेडिकल जमानत की शर्त में संशोधन की मांग की थी। यह शर्त उन्हें ग्रेटर मुंबई क्षेत्र छोड़ने के लिए ट्रायल कोर्ट से अनुमति लेने के लिए बाध्य करती है।जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की खंडपीठ ने राव के वकील सीनियर एडवोकेट आनंद ग्रोवर की दलीलें सुनने के बाद याचिका को वापस ले लिया। ग्रोवर ने कहा कि राव चार साल से जमानत पर हैं लेकिन उनका स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। उन्होंने...
सुप्रीम कोर्ट ने अभियोजकों और सरकारी वकीलों को छत्तीसगढ़ सिविल जज परीक्षा में बिना नामांकन की शर्त के अस्थायी रूप से शामिल होने की अनुमति दी
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अंतरिम आदेश पारित किया, जिसमें सरकारी अभियोजकों और सरकारी वकीलों के रूप में कार्यरत उम्मीदवारों को रविवार को होने वाली छत्तीसगढ़ न्यायिक सेवा की सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के पद के लिए प्रारंभिक परीक्षा में अस्थायी रूप से शामिल होने की अनुमति दी गई।अदालत ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) से कहा कि वह उन याचिकाकर्ताओं को, जिनके पास अपेक्षित योग्यता है, इस शर्त पर ज़ोर दिए बिना परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे कि वे विज्ञापन की तिथि तक वकील के रूप में नामांकित...
Air India Crash | प्रारंभिक जांच में पक्षपात का आरोप पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका
एयर इंडिया (Air India) की उड़ान संख्या AI171 के दुर्घटनाग्रस्त होने की स्वतंत्र और अदालत की निगरानी में जांच की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। इस दुर्घटना में 12 जून, 2025 को यात्रियों, चालक दल और ज़मीन पर मौजूद लोगों सहित 260 लोग मारे गए थे।कैप्टन अमित सिंह FRAeS के नेतृत्व वाले विमानन सुरक्षा NGO सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन द्वारा संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई इस याचिका में आरोप लगाया गया कि जिस तरह से जांच की गई, वह जीवन, समानता और सच्ची जानकारी के मौलिक...
दिल्ली दंगों की साजिश मामले में उमर खालिद और अन्य की ज़मानत याचिकाओं पर फिर टली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों की व्यापक साजिश मामले में उमर खालिद, शरजील इमाम, मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा और शिफा उर रहमान द्वारा ज़मानत की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई सोमवार (21 सितंबर) तक के लिए स्थगित कर दी।ये याचिकाएं जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध हैं।यह मामला 12 सितंबर को जस्टिस कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध था। हालांकि, अदालत द्वारा इन मामलों पर सुनवाई में कठिनाई व्यक्त करने के कारण इसे स्थगित कर दिया गया। अदालत ने कहा कि पूरक...
हाईकोर्ट प्रारंभिक खारिज आदेश वापस लेकर अग्रिम ज़मानत नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के उस असामान्य आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत अग्रिम ज़मानत याचिका, जिसे शुरू में खारिज कर दिया गया था, बाद में वापस ले ली गई और अग्रिम ज़मानत दे दी गई।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एसवीएन भट्टी की खंडपीठ के समक्ष शिकायतकर्ता ने तर्क दिया कि एक बार अग्रिम ज़मानत की याचिका खारिज करने वाला विस्तृत आदेश पारित हो जाने के बाद कार्यवाही पूरी तरह समाप्त हो गई और उसे वापस बुलाकर पुनर्जीवित नहीं किया जा सकता था, बहाल करना तो दूर की बात है।याचिकाकर्ता...
Customs Act | ज़ब्त की गई वस्तु की अस्थायी रिहाई से 2018 से पहले के मामलों में कारण बताओ नोटिस जारी करने की समय-सीमा नहीं बढ़ेगी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रखा, जिसमें राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) द्वारा ज़ब्त की गई आयातित मासेराती कार को छोड़ने का निर्देश दिया गया। अदालत ने हाईकोर्ट के इस विचार को बरकरार रखा कि कस्टम एक्ट, 1962 के तहत निर्धारित समय के भीतर कारण बताओ नोटिस जारी न करने पर व्यक्ति ज़ब्त की गई वस्तु को छोड़ने का हकदार हो जाता है।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने आगे कहा कि कस्टम एक्ट की धारा 110ए के तहत ज़ब्त की गई वस्तु की अस्थायी रिहाई धारा 110(2) के...
S. 482 CrPC/S. 528 BNSS | कुछ FIR रद्द करने वाली याचिकाओं में हाईकोर्ट को मामला दायर करने की पृष्ठभूमि भी समझना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (18 सितंबर) को हाईकोर्ट को केवल FIR की विषय-वस्तु के आधार पर याचिकाओं को यंत्रवत् खारिज करने के प्रति आगाह किया। इस बात पर ज़ोर दिया कि कुछ मामलों में FIR दायर करने के परिवेश और परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। न्यायालय ने आगे कहा कि हाईकोर्ट को यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि क्या FIR किसी जवाबी हमले का परिणाम थी या वादी को परेशान करने के किसी अप्रत्यक्ष उद्देश्य से प्रतिशोधात्मक कार्रवाई के रूप में दर्ज की गई।अदालत ने कहा,“हालांकि यह सच है कि इस स्तर पर...
धर्मांतरण के अधिकार से इंकार करने वाला सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुधारा जाए: जस्टिस आर.एफ. नरिमन
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस आर.एफ. नरिमन ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को 1977 के रेव. स्टेनिस्लॉस केस के फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। उस फैसले में कहा गया था कि अनुच्छेद 25 के तहत “धर्म का प्रचार” (propagate) करने का अधिकार, धर्मांतरण का अधिकार शामिल नहीं करता। नरिमन के अनुसार, प्रचार का अर्थ बिना दबाव किसी को अपने धर्म में शामिल करने के लिए राज़ी करना भी है, और 1977 का फैसला इस शब्द को लगभग संविधान से हटा देता है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों के एंटी-कन्वर्ज़न कानून इसी फैसले से समर्थित...




















