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सीएए प्रोटेस्ट दिल्ली: इलाज कराने के आधार पर दो आरोपियों को सेशन कोर्ट से मिली अंतरिम ज़मानत
दिल्ली के एक सत्र न्यायालय ने सीएए के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा के आरोप में सीलमपुर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए दो व्यक्तियों को आवश्यक चिकित्सा उपचार प्राप्त करने आधार पर तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दी है। कड़कड़डूमा अतिरिक्त सत्र न्यायालय के न्यायाधीश बृजेश कुमार गर्ग ने सीलमपुर पुलिस स्टेशन से दोनों आरोपियों को आवश्यक चिकित्सा उपचार प्राप्त करने के लिए तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दी। कोर्ट ने एसआईटी, क्राइम ब्रांच को इस बीच जमानत अर्जी पर विस्तृत जवाब दाखिल करने का भी निर्देश दिया है। ...
जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट ने नौकरी के उस विज्ञापन को वापस लिया जिसमें बाहरी लोगों के आवेदन भी आमंत्रित किए थे
जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय ने इसके द्वारा जारी एक विज्ञापन को वापस ले लिया है, जिसमें जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के नए बनाए गए केंद्र शासित प्रदेशों के जिला न्यायालयों में रिक्त पदों को भरने के लिए पूरे देश से आवेदन आमंत्रित किए गए थे। "सभी संबंधितों की जानकारी के लिए यह सूचित किया गया है कि विज्ञापन नोटिस संख्या 09/2019 दिनांक 26.12.2019, जिसमें जम्मू और कश्मीर के उच्च न्यायालय में गैर-राजपत्रित श्रेणी में विभिन्न पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे, उन्हें तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया...
इंदिरा जयसिंह ने कहा, सीएए भारत की अवधारणा के खिलाफ
वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम "हिंदू राष्ट्र की आधिकारिक विधायी सूचना" और भारत की अवधारणा के खिलाफ है। वह 28 दिसंबर को कोच्चि में आयोजित अखिल भारतीय वकील संघ (AILU) के 13 वें राष्ट्रीय सम्मेलन में "भारतीय धर्मनिरपेक्षता पर CAA और NRC का प्रभाव" विषय पर बोल रही थीं। उन्होंने अपनी बात यह कहते हुए शुरू की कि "सभी वकीलों को भारत के संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ लेनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि कुछ विरोधाभासों के बावजूद संविधान उनके लिए एक 'पवित्र पुस्तक' है, जैसा...
पढ़िए 2019 में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दिए गए 25 प्रमुख निर्णय
2019 में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दिए गए 25 प्रमुख निर्णय को पढ़िए. 1. मिशनरी गतिविधियों के संचालन का अधिकार दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को यह याद दिलाते हुए कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, कहा कि मिशनरी गतिविधियों को प्रतिबंधित नहीं किया जाता है. धर्म का मौलिक अधिकार नागरिकों तक सीमित नहीं है, यह सभी व्यक्तियों के लिए उपलब्ध है. जस्टिस विभू बाखरू ने कहा कि किसी व्यक्ति को अपनी आस्था और चिकित्सा सेवा प्रदान करने का अधिकार है, भले ही वह यह कार्य अपने धर्म को आगे बढ़ाने के लिए करे, फिर...
जामिया के छात्र और शिक्षक ने पुलिस की बर्बरता के खिलाफ राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में शिकायत की
जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के तीन छात्र (राहुल कपूर, कासिम उस्मानी और अकीब रिजवान) और जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ के सचिव प्रोफेसर माजिद जमील ने सोमवार को राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में छात्रों के प्रति पुलिस की बर्बरता के खिलाफ शिकायत दर्ज की। शिकायत के अनुसार, 15 दिसंबर को, जामिया के छात्रों द्वारा नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के कार्यान्वयन के खिलाफ एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज करके और आंसू गैस के गोले...
रिटायर्ड जस्टिस चंद्रू ने सीएए-एनआरसी का किया विरोध, बोले-क्या आप को पूरे देश को जेल बनाना चाहता हैं
मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस के चंद्रू ने नागरिकता संशोधन अधिनियम और राष्ट्रीय स्तर पर नागरिक रजिस्टर तैयार करने के प्रस्ताव की आलोचना व्यक्त की है। उन्होंने कहा, "वे (सरकार) इस देश को धर्म के आधार पर बांटना चाहते हैं। क्या आप (सरकार) इस देश को खुली जेल में बनाना चाहते हैं?" उन्होंने कहा कि वकीलों को सीएए-एनआरसी का विरोध करने के 'लोकतांत्रिक कारण' के बारे में लोगों को जागरूक करना चाहिए। वह 27 दिसंबर को कोच्चि में अखिल भारतीय वकील संघ के 13 वें राष्ट्रीय सम्मेलन में बोल रहे थे। सीएए...
2019 के सुप्रीम कोर्ट के 40 सिविल लॉ जजमेंट
1. हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 30 के अनुसार वसीयत के जरिये संयुक्त परिवार में अविभाजित हिस्से का नियंत्रण स्थानांतरित किया जा सकता है सुप्रीम कोर्ट ने सम्पत्ति के बंटवारे से संबंधित अपील खारिज करते हुए व्यवस्था दी कि हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 की धारा 30 के तहत संयुक्त हिन्दू परिवार की अविभाजित संपत्ति का हस्तांतरण वसीयत के जरिये किया जा सकता है। न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की एक खंडपीठ ने कहा, "मिताक्षरा सहदायिकी संपत्ति के मामले में हिन्दू उत्तराधिकार...
मृत्युदंडः सुप्रीम कोर्ट के 2019 के महत्वपूर्ण फैसले
भारत ने इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 42 वें सत्र में एक प्रस्ताव, जिसमें सजा के रूप में मौत की सजा के प्रावधान पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है, के खिलाफ वोट किया था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मृत्युदंड की पुष्टि हाल के वर्षों की तुलना में अधिक है। सुप्रीम कोर्ट ने पांच मामलों में मौत की सजा की पुष्टि की है। निर्भया केस: SC ने मृत्युदंड के खिलाफ अंतिम पुनर्विचार याचिका खारिज कीअक्षय कुमार सिंह बनाम राज्य सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने, जिसमें जस्टिस आर भानुमती,...
अहमदाबाद शहर में नियमित रूप से धारा 144 लगाने के ख़िलाफ़ याचिका
गुजरात हाईकोर्ट में अहमदाबाद शहर में सीआरपीसी की धारा 144 और गुजरात पुलिस अधिनियम की धारा 37 के तहत बार-बार प्रतिबंध लगाए जाने के ख़िलाफ़ एक याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि ऐसा शहर में शांति और व्यवस्था को किसी तरह का तत्काल ख़तरा नहीं होने के बावजूद किया जा रहा है। "यह आदेश याचिकाकर्ता और अन्य निर्दोष नागरिकों के अधिकार पर ग़ैरआनुपातिक प्रतिबंध है जबकि वे किसी भी तरह से आम जीवन में शांति और व्यवस्था के लिए ख़तरा नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि धारा 144 ग़लत कार्य...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, न्यायिक प्रक्रिया को अनावश्यक उत्पीड़न का औजार नहीं होना चाहिए
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मानहानि के एक मामले में एक समाचार पत्र के संपादकीय कर्मियों के खिलाफ दिए सम्मन के आदेश को रद्द करते हुए अदालतों को अपने विवेकाधिकारों का प्रयोग करने में सावधानी बरतने को कहा है।"प्रेस की ये जिम्मेदारी है कि वह सरकार और उसके पदाधिकारियों को, अगर वे गलत व्यवहार करते हैं या कानून और संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ काम करते हैं तो उन्हें बेनकाब करे। यदि प्रेस को लगता है कि उसे मुकदमे फंसाने की धमकी जी रही है रहा है तो वह अपना कर्तव्य नहीं निभा सकता है, और यह संविधान के अनुच्छेद...
मद्रास हाईकोर्ट ने माना, कंपनी एक्ट की धारा 167 (1) (ए) में शामिल शर्त संवैधानिक
मद्रास हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने निवेशकों के हितों की रक्षा करते हुए कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 167 (1) (ए) की 'शर्त' की वैधता को बरकरार रखा है। मामले में याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि कंपनी अधिनियम, 2013 में शामिल की गई नई शर्त मनमानी है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों अनुरूप नहीं है, क्योंकि डाइरेक्टर्स को डिफॉल्टर कंपनी में अपनी डाइरेक्टरशिप बरककरार रखते हुए अन्य कंपनियों की डायरेक्टरशिप छोड़नी पड़ेगी। बेंच ने इस विवाद को खारिज कर दिया और मामले की विस्तार से जांच की। शर्त की आवश्यकता: ...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने वकीलों की हड़ताल की निंदा की, न्याय के प्रशासन में हस्तक्षेप करने पर पुलिस को दिए कार्रवाई करने के निर्देश
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने वकीलों की हड़ताल पर कड़ी आपत्ति ली और चेतावनी दी कि न्यायाधीशों, पुलिस कर्मियों या अन्य लोक सेवकों को अदालत में प्रवेश करने से किसी भी तरह की बाधा पहुंचाने पर यह संज्ञेय अपराध की श्रेणी का अपराध होगा और आरोपियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे। न्यायमूर्ति जोमाल्य बागची और न्यायमूर्ति सुव्रा घोष ने कहा, "हड़ताल कर रहे वकीलों ने न केवल न्यायपालिका के प्रशासन को एक ठहराव में ला दिया है, बल्कि पुलिसकर्मियों को अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करने से भी रोक दिया है, जो...
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज, जस्टिस एस मोहन का निधन
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और कर्नाटक के पूर्व कार्यवाहक राज्यपाल न्यायमूर्ति शनमुघ सुंदरम मोहन का शुक्रवार को निधन हो गया। न्यायमूर्ति मोहन ने अगस्त, 1954 में मद्रास उच्च न्यायालय में एक वकील के रूप में दाखिला लिया। उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की और उन्हें लक्ष्मीनारसा रेड्डी गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। 1956 और 1966 के बीच उन्होंने लॉ कॉलेज, मद्रास में अंशकालिक व्याख्याता के रूप में कार्य किया। उन्हें सहायक सरकार के रूप में नियुक्त किया गया था। 1966...
अगर कोई व्यक्ति डकैतों को सामान्य रूप से शरण देता है और किसी विशिष्ट डकैती की जानकारी नहीं है तो दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी : कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि यदि कोई व्यक्ति डकैतों को सामान्य रूप से अपने पास रखता है तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती और यह साबित किया जाना चाहिए कि उसने ऐसे डकैतों को शरण दी थी, जो कोई 'विशेष डकैती' डालना चाहते थे।दरअसल ये फैसला ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ एक दोषी द्वारा दायर अपील में पारित किया गया था जिसमें उसे सात साल के लिए कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। अपीलार्थी को मार्च 2015 में एक कॉन्वेंट स्कूल में आईपीसी की धारा 120 बी और 216 ए के तहत एक डकैती करने के...
व्यभिचार का आरोप साबित हो गया हो तो पत्नी को भरण-पोषण का अधिकार नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर पत्नी के खिलाफ व्यभिचार के आरोप साबित हो जाते हैं तो वह भरण-पोषण की हकदार नहीं होगी। जस्टिस एनडब्ल्यू साम्ब्रे ने दो याचिकाओं की सुनवाई की, जिनमें से एक याचिका संजीवनी कोंडलकर ने दायर की थी, जिन्होंने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, सांगली के एक फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें याचिकाकर्ता के पति द्वारा रखरखाव के आदेश को रद्द करने के लिए एक संशोधन आवेदन दायर करने को अनुमति दी गई थी। याचिकाकर्ता और उनके पति रामचंद्र कोंडलकर ने 6 मई, 1980 को शादी की थी। रामचंद्र द्वारा...
"मेरे नाम पर नहीं" वकीलों ने बार काउंसिल के नागरिकता कानून पर प्रस्ताव से दूरी बनाई
बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा नागरिक सुरक्षा (संशोधन) अधिनियम, 2019 के विरोध में वकीलों की भागीदारी की निंदा करने को लेकर जारी 22.12.2019 के प्रस्ताव से देशभर के लगभग एक हजार वकीलों ने खुद को दूर कर लिया है और इस पर प्रतिक्रिया जारी की है। वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल, चंदर उदय सिंह, कॉलिन गोंजाल्विस, डेरियस खंबाटा, डॉ अभिषेक मनु सिंघवी, हुज़ेफ़ा अहमदी, इंदिरा जयसिंह, जनक द्वारकादास, कामिनी जायसवाल, कपिल सिब्बल, मधुकर राव, महालक्ष्मी पावनी, मोहन कटार्की, पीवी सुरेंद्रनाथ, राजीव पाटिल, रेबेका...
बच्चों के खिलाफ यौन अपराध : बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा, दोषी को कठोर सजा दी जानी चाहिए
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिछले शुक्रवार को सागर धुरी नामक युवक द्वारा दायर एक अपील को खारिज कर दिया। इस 23 वर्षीय युवक को एक साढ़े पांच साल की बच्ची का यौन उत्पीड़न करने का दोषी पाया गया था और दस साल की सजा सुनाई गई थी। न्यायमूर्ति पृथ्वीराज के चव्हाण ने निष्कर्ष निकाला कि अपील योग्यता से रहित है और कहा कि- ''यह एक ऐसा मामला है जिसमें अपीलकर्ता में सुधार का कोई सवाल ही नहीं है, क्योंकि वह इतना वयस्क व्यक्ति हो चुका था जो अपने कृत्य के परिणामों को जानता था।'' सागर को पॉक्सो अधिनियम (POCSO...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने रोहिंग्या पति पत्नी के निर्वासन पर रोक लगाई
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार म्यांमार को निर्वासित किए गए एक "रोहिंग्या" जोड़े को राहत दी। न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य ने इस युगल को भारत से बाहर निकालने की रिट याचिका के लंबित रहने तक न केवल निषेधाज्ञा का आदेश जारी किया, बल्कि राज्य के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि दंपति को बुनियादी सुविधाओं के साथ सम्म्मान के साथ जीवन के की सहुलत उपलब्ध करवाई जाएं। न्यायाधीश ने कहा कि मानवता के आधार पर इन्हें सुरक्षा प्रदान की जा रही है। अब्दुर सुकुर और अनवारा बेगम, जो...
छात्रों के साथ यौन संबंध के आरोप में प्रिंसिपल की सेवाएं समाप्त करने के फैसले को मद्रास हाईकोर्ट ने बरकरार रखा
मद्रास हाईकोर्ट ने धर्मपुरी जिला सहकारी चीनी मिल्स पॉलिटेक्निक के प्रिंसिपल की सेवा समाप्ति के फैसले को बरकरार रखा, जिस पर पॉलिटेक्निक के छात्रों के साथ होमो-सेक्शुअल गतिविधियों में लिप्त होने और अन्य प्रशासनिक गलत कामों के अलावा टीचिंग स्टाफ के खिलाफ गंदी बातें करने का आरोप था। न्यायमूर्ति एम दुरायस्वामी ने कहा, "याचिकाकर्ता, जो पॉलिटेक्निक संस्थान के प्रिंसिपल के रूप में काम कर रहा था, वह पॉलिटेक्निक छात्रों के साथ समलैंगिक गतिविधियों में लिप्त था। ऐसे आचरण और चरित्र वाले व्यक्ति को नौकरी...




















