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इंदिरा जयसिंह ने कहा, सीएए भारत की अवधारणा के खिलाफ

LiveLaw News Network
31 Dec 2019 11:19 AM GMT
इंदिरा जयसिंह ने कहा, सीएए भारत की अवधारणा के खिलाफ
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वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम "हिंदू राष्ट्र की आधिकारिक विधायी सूचना" और भारत की अवधारणा के खिलाफ है। वह 28 दिसंबर को कोच्चि में आयोजित अखिल भारतीय वकील संघ (AILU) के 13 वें राष्ट्रीय सम्मेलन में "भारतीय धर्मनिरपेक्षता पर CAA और NRC का प्रभाव" विषय पर बोल रही थीं।

उन्होंने अपनी बात यह कहते हुए शुरू की कि "सभी वकीलों को भारत के संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ लेनी चाहिए।"

उन्होंने कहा कि कुछ विरोधाभासों के बावजूद संविधान उनके लिए एक 'पवित्र पुस्तक' है, जैसा कि जस्टिस नरीमन ने हाल ही में सबरीमाला के समीक्षा आदेश में कहा था। उन्होंने वकील समुदाय से लॉ कॉलेजों और छात्रों के बीच प्रचार करने और उन्हें इस मुद्दे के बारे में शिक्षित करने का आग्रह किया।

इंदिरा जयसिंह खुद पाकिस्तान के एक प्रवासी की बेटी थीं। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम और NRC ने उन्हे एक बार फिर प्रवासी होने के बारे में याद दिलाया।

उन्होंने कहा कि भारत में रहने और इतने लंबे समय तक भारत की सेवा करने के बावजूद, उन्हें इस कठोर कानून द्वारा एक बार फिर प्रवासी माना जा सकता है क्योंकि उनके माता-पिता एक ऐसे हिस्‍से से आए थे जो अब पाकिस्तानी क्षेत्र में है। उन्होंने कहा कि किसी को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कहने का उद्देश्य केवल उसे धर्म के आधार पर निशाना बनाना है।

"हम में से प्रत्येक को यह साबित करने के लिए कहा जा रहा है कि हम भारतीय हैं। हम एक सर्विलांस स्टेट में रह रहे हैं।"

उन्होंने कहा कि धर्म और राजनीति को अलग रखा जाना चाहिए जैसा कि डॉ बीआर अम्बेडकर ने कहा था जब उन्होंने सभी से "मनुस्मृति" को अस्वीकार करने का आग्रह किया था क्योंकि यह जाति व्यवस्था को वैध बनाती है।

उन्होंने एनपीआर में बदलाव के बारे में बात की और लोगों को "संदिग्ध नागरिक" के रूप में टैग किए जाने पर चिंता व्यक्त की। किसी को नहीं पता कि इन लोगों का क्या होगा, जिन लोगों को सूची से बाहर रखा गया है, उन्हें ‌डिटेंशन सेंटर में भेजे जाने के बाद निर्वासित किया जाएगा।

उन्होंने कहाकि एक मानवतावादी के रूप में, उन्हें लगता है कि भारत को सभी उत्पीड़ितों को शरण देनी चाहिए न कि धर्म के आधार पर अंतर करना चाहिए।

उन्होंने कहा "मुझे परवाह नहीं है कि यह सरकार मुझे नागरिक के रूप में पहचानती है या नहीं। मैं भारत की गौरवशाली नागरिक हूं। मैं खुद को भारत के एक ऐसे नागरिक के रूप में पहचानती हूं जो धर्मनिरपेक्षता और संवैधानिक मूल्यों प्रति प्रतिबद्ध है।"

कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और पूर्व संसद सदस्य पी राजीव ने भी संगोष्ठी में विचार व्यक्त किए। तीस्ता ने उत्तर प्रदेश में सीएए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की बर्बरता के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि सीएए के केवल विभाजन के घावों को दोबारा हरा कर देगा।

पी राजीव कहा कि उत्तर पूर्वी भारत के कई क्षेत्रों में इनर लाइन परमिट के प्रस्ताव ने सरकार के "एक देश एक संविधान" के प्रचार को झुठला दिया है। एडवोकेट एन मनोज कुमार ने स्वागत भाषण दिया और एडवोकेट केके नासर ने वोट ऑफ थैंक्स पेश किया।

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