रिटायर्ड जस्टिस चंद्रू ने सीएए-एनआरसी का किया विरोध, बोले-क्या आप को पूरे देश को जेल बनाना चाहता हैं

LiveLaw News Network

30 Dec 2019 3:41 PM GMT

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    मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस के चंद्रू ने नागरिकता संशोधन अधिनियम और राष्ट्रीय स्तर पर नागरिक रजिस्टर तैयार करने के प्रस्ताव की आलोचना व्यक्त की है।

    उन्होंने कहा, "वे (सरकार) इस देश को धर्म के आधार पर बांटना चाहते हैं। क्या आप (सरकार) इस देश को खुली जेल में बनाना चाहते हैं?"

    उन्होंने कहा कि वकीलों को सीएए-एनआरसी का विरोध करने के 'लोकतांत्रिक कारण' के बारे में लोगों को जागरूक करना चाहिए। वह 27 दिसंबर को कोच्चि में अखिल भारतीय वकील संघ के 13 वें राष्ट्रीय सम्मेलन में बोल रहे थे।

    सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों पर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई की निंदा करते हुए पूर्व न्यायाधीश ने आपातकाल के दिनों में हुए मानव अधिकार उल्लंघनों को याद दिलाया। उन्होंने कहा कि कश्मीर मुद्दे और सीए विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस अत्याचार की शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट का टालू रवैया "कानून के सार" के विपरीत रहा है।

    उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने कश्मीर की विशेष स्थिति के खत्म कर और सूबे को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटकर कश्मीर के लोगों को अलग-थलग कर दिया है।

    उन्होंने कहा, "हमें कश्मीर के बारे में चर्चा करनी चाहिए। कश्मीर संकेत देता है कि भारतीय संविधान काम कर रहा है या नहीं कर रहा है।"

    उन्होंने लद्दाख की कानूनी और राजनीतिक स्थिति पर अपनी चिंता व्यक्त की। लद्दाख की कोई विधानसभा नहीं है जिसका अर्थ है कि यह जल्द ही सेना द्वारा शासित होगा। उन्होंने कहा कि लद्दाख में लोकतंत्र का न होना पूरे देश के लिए खतरा है।

    उन्होंने न्यायपालिका की आलोचना करते हुए कहा कि "सर्वोच्च न्यायालय की भावना अच्छी नहीं है"। उन्होंने कहा कि अयोध्या मामले में आया फैसला धर्मनिरपेक्षता के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सबरीमाला मामले में संदर्भ आदेश को पारित किए जाने के तरीके पर भी रोष प्रकट किया।

    उन्होंने वकीलों से धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक मुक्ति, आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिकता के लिए लड़ने और भारत के संविधान की रक्षा करने का संकल्प लेने का आग्रह किया।

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