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विश्वसनीय होने पर बिना स्वतंत्र पुष्टि के भी सहयोगी गवाह की गवाही के आधार पर हो सकती है दोषसिद्धि: सुप्रीम कोर्ट
विश्वसनीय होने पर बिना स्वतंत्र पुष्टि के भी सहयोगी गवाह की गवाही के आधार पर हो सकती है दोषसिद्धि: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि किसी सहयोगी गवाह (Approver) की गवाही विश्वसनीय, भरोसेमंद और अपराध से जुड़ी घटनाओं का पूर्ण एवं सत्य विवरण प्रस्तुत करती है, तो केवल इस आधार पर उसे खारिज नहीं किया जा सकता कि उसकी गवाही की स्वतंत्र रूप से पुष्टि (corroboration) नहीं हुई है।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 133 के तहत सहयोगी गवाह की अपुष्ट गवाही भी दोषसिद्धि का आधार बन सकती है। हालांकि, अदालतों द्वारा सावधानी और न्यायिक विवेक के तौर पर आमतौर...

साकेत भवन हादसा: MCD की लापरवाही से गई 6 लोगों की जान, सुप्रीम कोर्ट के अमीकस क्यूरी ने उठाए सवाल
साकेत भवन हादसा: MCD की लापरवाही से गई 6 लोगों की जान, सुप्रीम कोर्ट के अमीकस क्यूरी ने उठाए सवाल

नई दिल्ली के सैद-उल-अजैब स्थित एक इमारत के ढहने से छह लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त अमीकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट अजीत कुमार सिन्हा ने दिल्ली नगर निगम (MCD) की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हस्तक्षेप आवेदन में आरोप लगाया कि MCD ने वर्षों से चल रहे अवैध निर्माण को रोकने के बजाय उस पर आंखें मूंदे रखीं, जिसके कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ।सिन्हा ने कहा कि प्लॉट नंबर 261, वेस्टर्न मार्ग, सैद-उल-अजैब में वर्ष 2015 से...

एक ही मामले में सिविल और क्रिमिनल कानूनी उपाय अपनाए जा सकते हैं, लेकिन उनके बीच बहुत ज़्यादा समय का अंतर नहीं होना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
एक ही मामले में सिविल और क्रिमिनल कानूनी उपाय अपनाए जा सकते हैं, लेकिन उनके बीच बहुत ज़्यादा समय का अंतर नहीं होना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि एक ही घटना या हालात पर सिविल केस शुरू होने के बाद FIR दर्ज करने में बेमतलब और बहुत ज़्यादा देरी होने पर क्रिमिनल केस को रद्द किया जा सकता है।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा,"...यह बताना ज़रूरी है कि अब यह कोई नया मुद्दा नहीं है कि एक ही वजह और एक ही घटना या हालात के आधार पर सिविल और क्रिमिनल दोनों तरह की कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, अगर पीड़ित व्यक्ति सिविल और क्रिमिनल दोनों तरह की कानूनी कार्रवाई करना चाहता है तो दोनों के...

S.27 Evidence Act | अगर रिकवरी दूसरे सबूतों से साबित हो जाए तो पंच गवाह का मुकर जाना केस के लिए घातक नहीं: सुप्रीम कोर्ट
S.27 Evidence Act | अगर रिकवरी दूसरे सबूतों से साबित हो जाए तो पंच गवाह का मुकर जाना केस के लिए घातक नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने का फैसला बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि अगर रिकवरी के सबूत दूसरे पुष्टिकारक सबूतों से साबित हो जाते हैं तो सिर्फ़ पंच गवाह के मुकर जाने से अभियोजन पक्ष का केस कमज़ोर नहीं होगा और न ही आरोपी के खुलासे वाले बयानों (एविडेंस एक्ट की धारा 27 के तहत) पर आधारित रिकवरी के सबूतों पर शक पैदा होगा।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और सेशंस कोर्ट के फैसलों पर मुहर लगाई। इन अदालतों ने अपीलकर्ता को हत्या...

सिर्फ़ इसलिए जालसाज़ी नहीं मानी जाएगी कि किसी व्यक्ति ने प्रॉपर्टी पर अपना मालिकाना हक़ बताते हुए कोई डॉक्यूमेंट बनाया हो: सुप्रीम कोर्ट
सिर्फ़ इसलिए जालसाज़ी नहीं मानी जाएगी कि किसी व्यक्ति ने प्रॉपर्टी पर अपना मालिकाना हक़ बताते हुए कोई डॉक्यूमेंट बनाया हो: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई व्यक्ति सिर्फ़ इसलिए जालसाज़ी (Forgery) का दोषी नहीं माना जाएगा कि उसने किसी प्रॉपर्टी पर अपना मालिकाना हक़ बताते हुए कोई डॉक्यूमेंट बनाया है, भले ही बाद में वह दावा कानूनी रूप से गलत साबित हो जाए।कोर्ट ने मोहम्मद इब्राहिम बनाम बिहार राज्य (2009) 8 SCC 751 मामले का हवाला देते हुए कहा,"...जब कोई व्यक्ति किसी प्रॉपर्टी को अपनी बताते हुए कोई डॉक्यूमेंट बनाता है तो सिर्फ़ इसलिए वह 'गलत डॉक्यूमेंट' (False Document) नहीं बन जाता कि उसका दावा बाद में गलत साबित हो जाता है।" ...

CBSE के त्रि-भाषा नियम के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं पूर्व सांसद फ़ौज़िया खान, दी यह दलील
CBSE के त्रि-भाषा नियम के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं पूर्व सांसद फ़ौज़िया खान, दी यह दलील

सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) के उस फ़ैसले को चुनौती देने वाले मामले में इंटरवेंशन एप्लीकेशन (हस्तक्षेप याचिका) दायर की गई है, जिसके तहत इस साल 1 जुलाई से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीसरी भाषा अनिवार्य कर दी गई।याचिकाकर्ता डॉ. फ़ौज़िया खान एक शिक्षाविद, पूर्व सांसद और महाराष्ट्र की पूर्व मंत्री हैं। उनका तर्क है कि यह सर्कुलर अनुचित है। उनका कहना है कि हालांकि यह नियम देखने में तो भारतीय भाषाओं को अनिवार्य करके भारत की भाषाई विरासत को बढ़ावा देने वाला लग सकता है, लेकिन यह इन भाषाओं की...

यह बच्चे के भविष्य का सवाल है: सुप्रीम कोर्ट ने CBSE से मांगा जवाब, खाड़ी देश के छात्र के परिणाम पर सुनवाई शुक्रवार को
यह बच्चे के भविष्य का सवाल है: सुप्रीम कोर्ट ने CBSE से मांगा जवाब, खाड़ी देश के छात्र के परिणाम पर सुनवाई शुक्रवार को

सुप्रीम कोर्ट ने सऊदी अरब में रहने वाले भारतीय छात्र की याचिका पर CBSE को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। छात्र ने आरोप लगाया कि विशेष मूल्यांकन योजना लागू होने के बावजूद उसका कक्षा 12 सुधार परीक्षा का परिणाम घोषित नहीं किया गया, जिससे उसके उच्च शिक्षा में प्रवेश की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।जस्टिस मनमोहन और जस्टिस विजय बिश्नोई की अवकाशकालीन पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए CBSE और उसके क्षेत्रीय अधिकारी को नोटिस जारी किया।मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।सुनवाई के दौरान CBSE की ओर से कहा गया...

आपसी सहमति से शादी से पहले बने शारीरिक संबंध को अकेले खराब चरित्र का सबूत नहीं माना जा सकता: सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस में नियुक्ति की मंज़ूरी दी
आपसी सहमति से शादी से पहले बने शारीरिक संबंध को अकेले खराब चरित्र का सबूत नहीं माना जा सकता: सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस में नियुक्ति की मंज़ूरी दी

सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड को ऐसे उम्मीदवार को नियुक्त करने का निर्देश दिया, जिसे पुलिस कॉन्स्टेबल के तौर पर चुने जाने के बाद भी इसलिए हटा दिया गया, क्योंकि वह एक असफल प्रेम संबंध से जुड़े आपराधिक मामले में शामिल था। कोर्ट ने कहा कि दो अविवाहित बालिगों के बीच आपसी सहमति से शादी से पहले बने संबंधों को अकेले खराब नैतिक चरित्र का सबूत नहीं माना जा सकता।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने गजुल थिरुपति की अपील को मंज़ूरी दी और तेलंगाना हाईकोर्ट के सिंगल जज का...

TIP के बिना कोर्ट में पहली बार आरोपी की पहचान हमेशा अभियोजन पक्ष के लिए नुकसानदायक नहीं होती: सुप्रीम कोर्ट
TIP के बिना कोर्ट में पहली बार आरोपी की पहचान हमेशा अभियोजन पक्ष के लिए नुकसानदायक नहीं होती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर शिकायत में आरोपी का ठीक से वर्णन किया गया या अपराध होने के तुरंत बाद उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया, तो टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड (TIP) के बिना कोर्ट में आरोपी की पहचान (डॉक आइडेंटिफिकेशन) अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर नहीं करेगी।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने फिरौती के लिए अपहरण का अपराध करने के आरोपी दो व्यक्तियों की सजा बरकरार रखी।आरोपी ने सजा के खिलाफ तर्क दिया कि घटना के कई साल बाद बिना किसी TIP के गवाह द्वारा कोर्ट में पहली बार...

S. 138 NI Act | NGO की तरफ़ से चेक पर साइन करने वाले अधिकृत व्यक्ति को ड्रॉअर माना जाएगा, बाउंस होने पर वही ज़िम्मेदार होगा: सुप्रीम कोर्ट
S. 138 NI Act | NGO की तरफ़ से चेक पर साइन करने वाले अधिकृत व्यक्ति को 'ड्रॉअर' माना जाएगा, बाउंस होने पर वही ज़िम्मेदार होगा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब कोई कंपनी किसी व्यक्ति को अपनी तरफ़ से चेक जारी करने और उन पर साइन करने (जिसमें पेमेंट करने की ज़िम्मेदारी भी शामिल है) के लिए अधिकृत करती है तो ऐसे व्यक्ति को 'ड्रॉअर' माना जाएगा और उस पर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (NI Act) की धारा 138 के तहत ज़िम्मेदारी लागू होगी।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने NGO के ट्रेज़रर की सज़ा बरकरार रखा। उन्हें NGO का अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (Authorized Signatory) नियुक्त किया गया था ताकि वह चेक जारी कर...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्यों कहा- विहान कुमार और अन्य मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों ने बाढ़ के दरवाजे खोल दिए और अराजक स्थिति पैदा की?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्यों कहा- 'विहान कुमार' और अन्य मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों ने 'बाढ़ के दरवाजे' खोल दिए और 'अराजक स्थिति' पैदा की?

एक अहम टिप्पणी में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि गैर-कानूनी गिरफ्तारियों पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया विहान कुमार (2025) का फैसला ने आरोपी व्यक्तियों के लिए अपनी हिरासत या रिमांड के आदेशों को चुनौती देने का एक "नया सिलसिला" (यानी 'पेंडोरा बॉक्स') शुरू कर दिया है, और वे ऐसा 'काफी देर से' भी कर सकते हैं।जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की बेंच ने कहा कि इन फैसलों ने एक 'अराजक स्थिति' पैदा कर दी है, क्योंकि ये आरोपी को जांच या ट्रायल के किसी भी चरण में अपने मौलिक अधिकारों का...

भारत में मेडिकल सुविधाएं किसी भी विदेशी देश के बराबर: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को इलाज के लिए USA जाने से रोका
'भारत में मेडिकल सुविधाएं किसी भी विदेशी देश के बराबर': सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को इलाज के लिए USA जाने से रोका

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक आरोपी को विदेश यात्रा की अनुमति देने से इनकार किया, जो USA में अपनी बीमारी का इलाज कराना चाहता था। कोर्ट ने कहा कि उसकी बीमारी का इलाज भारत में उपलब्ध मेडिकल सुविधाओं से हो सकता है।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने तेलंगाना हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें आरोपी (प्रतिवादी नंबर 2) को अपनी बीमारी के इलाज के लिए USA जाने की अनुमति दी गई थी।कोर्ट ने पाया कि आरोपी पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का...

Specific Relief Act | खरीदार द्वारा विक्रेता को कानूनी नोटिस भेजने में देरी स्पेसिफिक परफॉर्मेंस से इनकार करने का आधार नहीं हो सकती: सुप्रीम कोर्ट
Specific Relief Act | खरीदार द्वारा विक्रेता को कानूनी नोटिस भेजने में देरी 'स्पेसिफिक परफॉर्मेंस' से इनकार करने का आधार नहीं हो सकती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी (डिफेंडेंट) को बाकी रकम लेने और सेल डीड (बिक्री विलेख) निष्पादित करने के लिए कानूनी नोटिस भेजने में केवल देरी होने को वादी (प्लांटिफ) की अनुबंध पूरा करने की तत्परता और इच्छा की कमी नहीं माना जा सकता।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। इसमें अपीलकर्ता-वादी ने प्रतिवादी-डिफेंडेंट को बिक्री की कुल रकम का 93% भुगतान कर दिया था और बार-बार सेल डीड निष्पादित करने और बाकी रकम लेने के लिए कहा था। फिर भी उसे अनुबंध पूरा करने के...

बिना विधायिका की सदस्यता के दीपक प्रकाश को बिहार का मंत्री बनाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
बिना विधायिका की सदस्यता के दीपक प्रकाश को बिहार का मंत्री बनाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की गई, जिसमें दीपक प्रकाश को बिहार का पंचायती राज मंत्री दोबारा नियुक्त करने को चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया कि प्रकाश राज्य विधायिका के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, इसलिए राज्य सरकार के मंत्रालय में कोई पद नहीं संभाल सकते। इसमें कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, कोई व्यक्ति जो विधायक नहीं है, वह लगातार छह महीने तक मंत्री रह सकता है। इस दौरान उसे राज्य विधायिका की सदस्यता हासिल करनी होती है। यह छूट एक बार मिलने वाला मौका है और सरकार बदलने पर...

ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत आरोपी को चार्जशीट में शामिल दस्तावेज़ देने से मना नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत आरोपी को चार्जशीट में शामिल दस्तावेज़ देने से मना नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट (OSA) के तहत आरोपी व्यक्ति के खिलाफ़ अभियोजन पक्ष (Prosecution) द्वारा इस्तेमाल किए गए दस्तावेज़ों को उसे देने से सिर्फ़ इस आशंका के आधार पर मना नहीं किया जा सकता कि ऐसे गोपनीय या अहम दस्तावेज़ देने से देश की सुरक्षा और संरक्षा को खतरा हो सकता है।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने कहा,"...हमारी पक्की राय है कि अपीलकर्ताओं को दस्तावेज़ देने से सिर्फ़ इस आधार पर मना नहीं किया जा सकता कि उनके खिलाफ़ OSA के प्रावधान...

पाकिस्तान के लिए जासूसी की आरोपी यूट्यूबर ज्योति रानी को राहत नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की ज़मानत याचिका
पाकिस्तान के लिए जासूसी की आरोपी यूट्यूबर ज्योति रानी को राहत नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की ज़मानत याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (5 जून) को यूट्यूबर ज्योति रानी (उर्फ ज्योति मल्होत्रा) की याचिका खारिज की। उन पर जासूसी करने और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों से जुड़े लोगों के साथ संवेदनशील जानकारी साझा करने का आरोप है।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के 7 मार्च के आदेश में दखल देने से इनकार किया। हाईकोर्ट ने उन्हें ज़मानत देने से मना कर दिया था।'ट्रैवल-विद-जो' (Travel-with-Jo) नाम का यूट्यूब चैनल चलाने वाली इस ब्लॉगर को 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद 16...