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'उद्योग' की परिभाषा पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने गठित की 9 जजों की बेंच
सुप्रीम कोर्ट ने 9 जजों की संविधान पीठ के गठन की सूचना दी। यह पीठ 1978 के 'बैंगलोर वॉटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड बनाम ए. राजप्पा' मामले में दिए गए फैसले में 'उद्योग' शब्द की विस्तृत व्याख्या की सही होने की जांच करेगी।इस पीठ की अध्यक्षता चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत करेंगे। इसमें जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा, जस्टिस दीपांकर दत्ता, जस्टिस उज्ज्वल भुइयां, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा, जस्टिस जॉयमाल्य बागची, जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस विपुल एम. पंचोली शामिल होंगे।9 जजों की यह...
BREAKING| केंद्र सरकार ने नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत सोनम वांगचुक की हिरासत रद्द की
केंद्र सरकार ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत रद्द की। सरकार ने कहा कि यह फ़ैसला लद्दाख में शांति बहाल करने और बातचीत के लिए माहौल बनाने के मकसद से लिया गया।एक बयान में सरकार ने कहा कि 24 सितंबर, 2025 को लेह में क़ानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति पैदा होने के बाद 26 सितंबर, 2025 को वांगचुक को NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। हिरासत का यह आदेश लेह के ज़िला मजिस्ट्रेट ने इस इलाक़े में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के मकसद से जारी किया था।सरकार ने बताया...
सुप्रीम कोर्ट ने 35 साल पुराने रिश्वत मामले में एक्साइज इंस्पेक्टर की सज़ा बरकरार रखी, दोषी की उम्र 75 साल होने के कारण सज़ा कम की
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के एक पूर्व एक्साइज कांस्टेबल की भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) के तहत रिश्वत के जाल वाले मामले में सज़ा बरकरार रखा। हालांकि, उनकी ज़्यादा उम्र और हिरासत में पहले ही बिताए गए समय को देखते हुए उनकी सज़ा कम की।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने राज बहादुर सिंह द्वारा उत्तराखंड हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ दायर अपील खारिज की। हाईकोर्ट ने राज बहादुर सिंह को अवैध रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोप में दोषी ठहराया। हालांकि, कोर्ट ने ट्रायल...
30% महिला आरक्षण: सुप्रीम कोर्ट ने ज़िला जजों को बार एसोसिएशनों की ECs में सदस्यों को नॉमिनेट करने का अधिकार दिया
सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश के ज़िला जजों को अपने अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाले बार एसोसिएशनों की एग्जीक्यूटिव कमेटियों/गवर्निंग बॉडीज़ में महिला सदस्यों को नॉमिनेट करने का अधिकार दिया, ताकि उनमें 30 प्रतिशत महिलाओं के प्रतिनिधित्व का मानदंड पूरा हो सके।कोर्ट ने ज़िला जजों को यह अधिकार दिया कि यदि किसी विशेष अधिकार क्षेत्र में पर्याप्त महिला सदस्य उपलब्ध हैं, लेकिन वे किसी कारणवश एग्जीक्यूटिव कमेटी/गवर्निंग बॉडी के चुनाव नहीं लड़ सकीं, तो वे उन्हें नॉमिनेट कर सकते हैं।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI)...
नीलामी बिक्री की पुष्टि आरक्षित मूल्य के मूल्यांकन की न्यायिक जांच में बाधा नहीं बनती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (13 मार्च) को यह टिप्पणी की कि नीलामी बिक्री पूरी हो जाने के बाद भी नीलामी वाली संपत्ति के पुनर्मूल्यांकन में कोई बाधा नहीं आएगी; खासकर तब, जब मूल्यांकन की पर्याप्तता या आरक्षित मूल्य तय करने के संबंध में कोई सवाल उठता हो।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की,"हालांकि इस स्थापित सिद्धांत पर कोई विवाद नहीं हो सकता कि एक 'बोना फाइड' (नेक-नीयत) नीलामी खरीदार के अधिकारों को उचित सुरक्षा मिलनी चाहिए और कोर्ट द्वारा पुष्टि की गई बिक्री में...
'रियासती शासकों को मिलने वाले 'प्रिवी पर्स' विशेषाधिकारों पर कानूनी अधिकार के तौर पर दावा नहीं किया जा सकता': सुप्रीम कोर्ट ने मिज़ो सरदारों का दावा खारिज किया
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (11 मार्च) को मिजो चीफ काउंसिल द्वारा दायर एक रिट याचिका को खारिज कर दिया जिसमें दावा किया गया था कि भारत संघ ने पूर्व लुशाई हिल्स जिले (वर्तमान मिजोरम राज्य) के आदिवासी सरदारों की भूमि का अधिग्रहण बिना उचित मुआवजे का भुगतान किए किया था।जबकि अदालत ने माना कि उनके दावे तब उत्पन्न हुए जब संपत्ति का अधिकार अनुच्छेद 19 (1) (एफ) और अनुच्छेद 31 के तहत एक मौलिक अधिकार था, प्रमुख अपने अधिकारों के किसी भी उल्लंघन को स्थापित करने में विफल रहे।उन्होंने यह भी दावा किया था कि वे...
'3 साल की प्रैक्टिस शर्त बनी रहेगी, सिर्फ लागू करने का तरीका तय करना है': सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को निचली न्यायिक सेवा (सिविल जज जूनियर डिवीजन) में नियुक्ति के लिए अनिवार्य 3 वर्ष के प्रैक्टिस नियम की समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सभी हाईकोर्टों को निर्देश दिया कि आवेदन की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 तक बढ़ाई जाए।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने आदेश दिया कि जिन हाईकोर्टों ने पहले ही सिविल जज (जूनियर डिवीजन) पदों के लिए विज्ञापन जारी कर दिया है, वे आवेदन की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 तक बढ़ाएं। साथ ही...
ममता बनर्जी की निजी ज़िंदगी पर लिखी किताब के अंश पोस्ट करने का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने वकील के ख़िलाफ़ मानहानि केस पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने वकील कौस्तव बागची की याचिका पर नोटिस जारी किया और यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। बागची ने अपनी याचिका में अपने ख़िलाफ़ दायर मानहानि की शिकायत को रद्द करने की मांग की थी। यह शिकायत तब दायर की गई, जब उन्होंने एक किताब का अंश पोस्ट किया, जिसमें कथित तौर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की निजी ज़िंदगी के बारे में कुछ टिप्पणियां की गई थीं।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के 31 अक्टूबर, 2025 के आदेश के ख़िलाफ़ दायर एक विशेष...
ज्यूडिशिलय सर्विस के लिए 3 साल की प्रैक्टिस के नियम का विरोध कोचिंग सेंटर करवा रहे हैं: जस्टिस के. विनोद चंद्रन
जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने शुक्रवार को टिप्पणी की कि न्यायिक सेवा भर्ती के लिए कोचिंग सेंटर ही शुरुआती स्तर के न्यायिक पदों के लिए बार में तीन साल की प्रैक्टिस की अनिवार्य शर्त का विरोध करवा रहे हैं।जस्टिस चंद्रन सीनियर एडवोकेट पिंकी आनंद की बात का जवाब दे रहे थे, जिन्होंने तर्क दिया कि प्रैक्टिस की यह शर्त उम्मीदवारों के लिए एक रुकावट बन सकती है और ज्यूडिशिलय सर्विस में उनके प्रवेश में देरी कर सकती है, क्योंकि परीक्षाओं की तैयारी के लिए कुछ अतिरिक्त साल चाहिए होते हैं।जस्टिस चंद्रन ने टिप्पणी...
'महज पुलिस के बयान पर आधारित होने के कारण ही FIR पर शक नहीं किया जा सकता': सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST मामले में अग्रिम ज़मानत रद्द की
सुप्रीम कोर्ट ने उन लोगों की अग्रिम ज़मानत रद्द की, जिन पर कथित तौर पर अनुसूचित जाति वर्ग के सदस्यों के साथ जाति-आधारित गाली-गलौज करने का आरोप था। कोर्ट ने कहा कि किसी FIR की प्रामाणिकता पर सिर्फ इसलिए शक नहीं किया जा सकता कि वह किसी शिकायतकर्ता के बजाय पुलिस के बयान के आधार पर दर्ज की गई।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें SC/ST मामले में अग्रिम ज़मानत दी गई। हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारी के बयान के आधार पर दर्ज FIR की असलियत...
सुप्रीम कोर्ट ने ब्लड बैंकों में NAT टेस्ट अनिवार्य करने की याचिका पर सुनवाई से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रिट याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया जिसमें ब्लड बैंकों में खून डोनेट करते समय न्यूक्लिक एसिड टेस्ट (NAT) को अनिवार्य बनाने की मांग की गई।यह देखते हुए कि NAT एक ज़्यादा महंगा प्रोसेस है, जैसा कि याचिकाकर्ता ने खुद माना, कोर्ट ने कहा कि वह इसे अनिवार्य बनाने का निर्देश जारी नहीं कर सकता, क्योंकि इससे राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाया गया मुद्दा एक नई...
पीरियड लीव अनिवार्य करने से महिलाओं के रोजगार पर पड़ सकता है नकारात्मक प्रभाव: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सभी कार्यस्थलों में महिलाओं के लिए पेड मेंस्ट्रुअल लीव (मासिक धर्म अवकाश) की मांग करने वाली एक याचिका का निस्तारण करते हुए केंद्र सरकार से कहा कि वह याचिकाकर्ता की ओर से दिए गए प्रतिनिधित्व पर सभी हितधारकों से परामर्श करके नीति बनाने पर विचार करे।सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी चिंता जताई कि यदि कानून बनाकर मासिक धर्म अवकाश को अनिवार्य कर दिया गया तो इसका महिलाओं के रोजगार पर उल्टा असर पड़ सकता है। कोर्ट ने कहा कि इससे नियोक्ता महिलाओं को नौकरी देने से हिचक सकते हैं,...
S. 149 IPC | गैर-कानूनी जमाव के हर सदस्य के खास कामों को साबित न कर पाना अभियोजन पक्ष के लिए घातक नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने चार लोगों की हत्या की सज़ा और उम्रकैद बरकरार रखते हुए कहा कि अगर आरोपी भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) की धारा 149 के तहत एक ही मकसद वाले गैर-कानूनी जमाव के सदस्यों के तौर पर काम करते हैं तो आरोपी द्वारा मृतक पर गोली चलाने का कोई खास चश्मदीद गवाह न होना अभियोजन पक्ष के मामले के लिए घातक नहीं है।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस. वी. एन. भट्टी की बेंच ने दोषी लोगों द्वारा दायर अपीलें सुनीं। इन लोगों ने दूसरे आधारों के अलावा, अपनी सज़ा को इस तर्क पर चुनौती दी कि घटना के स्वतंत्र गवाह...
बिना विभागीय जांच सरकारी कर्मचारी को बर्खास्त नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (12 मार्च) को कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी को बिना विभागीय जांच (Departmental Enquiry) के सेवा से बर्खास्त करने की शक्ति केवल इस आधार पर इस्तेमाल नहीं की जा सकती कि जांच करना “व्यावहारिक रूप से संभव नहीं” है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच को टालने का निर्णय केवल अनुमान या आशंका के आधार पर नहीं, बल्कि ठोस सामग्री (relevant material) के आधार पर होना चाहिए।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की खंडपीठ दिल्ली पुलिस के एक कांस्टेबल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी,...
महुआ मोइत्रा मामले में लोकपाल कानून की व्याख्या पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट, नोटिस जारी
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा को नोटिस जारी करते हुए उस याचिका पर सुनवाई करने का फैसला किया, जिसमें लोकपाल ने दिल्ली हाइकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी। इस फैसले में कहा गया था कि लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के तहत आरोपपत्र दाखिल करने और अभियोजन शुरू करने के लिए अलग-अलग मंजूरी का प्रावधान नहीं है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए कहा कि कानून की धारा 20(7)(क) और धारा 20(8)...
BREAKING: चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, घड़ियालों पर खतरे को लेकर स्वतः संज्ञान
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में हो रहे अवैध रेत खनन और उससे संकटग्रस्त जलीय जीवों, खासकर घड़ियालों पर पड़ रहे खतरे को लेकर स्वतः संज्ञान लिया। अदालत ने इस मामले को आगे की कार्रवाई के लिए चीफ जस्टिस सूर्यकांत के समक्ष रखने का निर्देश दिया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस मुद्दे को उठाया।सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने बताया कि हाल ही में प्रकाशित समाचार रिपोर्टों और एक रिपोर्ट में यह सामने आया है कि जिस संरक्षित क्षेत्र में घड़ियाल संरक्षण कार्यक्रम चल रहा...
POP मूर्ति विसर्जन विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को बॉम्बे हाइकोर्ट जाने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) से बनी मूर्तियों के निर्माण और उनके विसर्जन की अनुमति देने वाले आदेशों को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिकाओं का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ताओं को बॉम्बे हाइकोर्ट का रुख करने को कहा।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी दिशानिर्देशों को पहले से ही हाइकोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है और मामला वहां विचाराधीन है। ऐसे में फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं...
पशु कल्याण बोर्डों के गठन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चार सप्ताह में हलफनामा मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्य पशु कल्याण बोर्डों के गठन और उनकी कार्यप्रणाली को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए कई राज्यों से जवाब मांगा। कोर्ट ने कहा कि पर्याप्त समय दिए जाने के बावजूद कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अब तक अपना हलफनामा दाखिल नहीं किया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि 12 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों ने अभी तक अपना...
3 Year Practice Mandate : लॉ कॉलेज विशेष-दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए सुझा रहे विकल्प
कई लॉ यूनिवर्सिटी और संस्थानों ने सुझाव दिया है कि "बार में प्रैक्टिस" के अर्थ का विस्तार किया जाए ताकि इसमें कानूनी अनुभव के वैकल्पिक रूप भी शामिल हो सकें। यह सुझाव उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की उस अपील के जवाब में दिया, जिसमें पूछा गया कि क्या दिव्यांग व्यक्तियों को एंट्री-लेवल की न्यायिक सेवा पदों के लिए ज़रूरी तीन साल की प्रैक्टिस की शर्त से छूट दी जानी चाहिए।उनके सुझावों को एमिक्स क्यूरी (न्याय-मित्र) सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ भटनागर द्वारा दायर एक संकलन के माध्यम से कोर्ट के सामने रखा गया।चीफ...
अरुणा शानबाग से हरीश राणा तक: भारत का पैसिव यूथेनेशिया कानून कैसे विकसित हुआ?
गरिमा के साथ मरने के अधिकार पर भारत की बातचीत धीरे-धीरे, सावधानी से और अक्सर गहरी दुखद मानवीय कहानियों के माध्यम से विकसित हुई है। ऐसी दो कहानियां, जो एक दशक से अधिक समय से अलग हो गईं, इस विकास के आर्क को चिह्नित करती हैं: अरुणा शॉनबाग का मामला, और हरीश राणा में पहली बार निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति देने का निर्णय।जबकि पूर्व ने कानूनी ढांचा स्थापित किया, बाद वाला दर्शाता है कि उस ढांचे को व्यवहार में कैसे लागू किया जा रहा है। ये निर्णय भारत के 'सम्मान के साथ जीवन के अधिकार' से 'सम्मान के साथ...




















