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जिन दोषियों को सिर्फ़ जुर्माने की सज़ा मिली, वे भी अपराधी परिवीक्षा अधिनियम के फ़ायदे के हकदार: सुप्रीम कोर्ट
जिन दोषियों को सिर्फ़ जुर्माने की सज़ा मिली, वे भी 'अपराधी परिवीक्षा अधिनियम' के फ़ायदे के हकदार: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि जिन अपराधियों को सिर्फ़ जुर्माना भरने की सज़ा दी गई, उन्हें भी 'अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958' की धारा 4 के तहत परिवीक्षा (प्रोबेशन) का फ़ायदा दिया जा सकता है।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की बेंच ने उन दोषियों को रिहा करने का आदेश दिया, जिन्हें मारपीट के आरोप में IPC की धारा 34 के साथ पढ़ी जाने वाली धाराओं 323 और 324 के तहत दोषी ठहराया गया। साथ ही उन्हें बिना किसी ठोस सज़ा के, सिर्फ़ 500 से 2,000 रुपये का जुर्माना भरने की सज़ा दी गई।कोर्ट...

डीपफेक से महिलाओं को ज़्यादा निशाना बनाया जाता है, नुकसान होने के बाद ही उन्हें हटाया जाता है: जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा
'डीपफेक से महिलाओं को ज़्यादा निशाना बनाया जाता है, नुकसान होने के बाद ही उन्हें हटाया जाता है': जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा

एक कार्यक्रम में बोलते हुए सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा ने डीपफेक का इस्तेमाल करके महिलाओं को ज़्यादा निशाना बनाए जाने पर चिंता जताई और दुख जताया कि जब तक उन्हें हटाने की कार्रवाई की जाती है, तब तक नुकसान हो चुका होता है।जज ने कहा,"आइए हम उस समस्या के बारे में बात करें, जिसका हम सभी सामना कर रहे हैं, जो डीपफेक से जुड़ी है... बिना सहमति के बनाई गई नकली तस्वीरें, जो महिलाओं को ज़्यादा निशाना बनाती हैं, जेंडर-बेस्ड हिंसा को बढ़ावा देती हैं और उन्हें गहरा मानसिक नुकसान पहुंचाती हैं। हमारा...

कानून आलसियों का साथ नहीं देता: सुप्रीम कोर्ट ने 21 साल की देरी के बाद शुरू की गई मध्यस्थता प्रक्रिया रद्द की
कानून आलसियों का साथ नहीं देता: सुप्रीम कोर्ट ने 21 साल की देरी के बाद शुरू की गई मध्यस्थता प्रक्रिया रद्द की

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पश्चिम बंगाल राज्य और एक ठेकेदार के बीच चल रही मध्यस्थता (Arbitration) की कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने माना कि यह दावा पहली नज़र में ही समय-सीमा से बाहर (Time Barred) था, क्योंकि मध्यस्थता शुरू करने का नोटिस काम पूरा होने के 21 साल बाद जारी किया गया।कोर्ट ने कहा,"हालांकि मध्यस्थता विवादों को सुलझाने का वैकल्पिक तरीका है, जिसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए, लेकिन यह उस मूल सिद्धांत से भटक नहीं सकता कि कानून मेहनती लोगों का साथ देता है, न कि आलसियों का।" जस्टिस संजय कुमार और...

तुगलकाबाद किला सर्वे निजी एजेंसी को देने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, कहा— विभाग जिम्मेदारी से नहीं बच सकते
तुगलकाबाद किला सर्वे निजी एजेंसी को देने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, कहा— विभाग जिम्मेदारी से नहीं बच सकते

सुप्रीम कोर्ट ने तुगलकाबाद किले में अतिक्रमण से जुड़े सर्वे को निजी एजेंसी को आउटसोर्स करने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे “ब्यूरोक्रेटिक रेड-टेपिज़्म” करार दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह के कार्यों को विभाग स्वयं कर सकता है और जिम्मेदारी से बचने के लिए निजी एजेंसियों को देना उचित नहीं है।यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित 2001 की जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें तुगलकाबाद किले में अवैध अतिक्रमण और बस्तियों के विस्तार का मुद्दा उठाया गया था। हाईकोर्ट ने सर्वे के लिए एक समिति गठित की थी,...

प्री-प्राइमरी शिक्षा को भी मुफ्त बनाने की मांग: सुप्रीम कोर्ट ने कहा—हम करेंगे जांच, NEP 2020 पर अहम सुनवाई
प्री-प्राइमरी शिक्षा को भी मुफ्त बनाने की मांग: सुप्रीम कोर्ट ने कहा—'हम करेंगे जांच', NEP 2020 पर अहम सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने प्री-प्राइमरी स्तर (3-6 वर्ष) पर मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा सुनिश्चित करने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा, “हम इस मुद्दे की जांच करना चाहते हैं।”क्या है मामला?वर्तमान में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) के तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए ही मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान है और इसमें प्री-प्राइमरी शिक्षा शामिल नहीं है। वहीं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) का उद्देश्य 3 वर्ष...

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस शेखर कुमार यादव कल होंगे रिटायर, महाभियोग प्रस्ताव अब भी लंबित
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस शेखर कुमार यादव कल होंगे रिटायर, महाभियोग प्रस्ताव अब भी लंबित

जस्टिस शेखर कुमार यादव, जो इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश हैं, बुधवार (15 अप्रैल) को सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं, जबकि उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पिछले एक साल से अधिक समय से लंबित है।जस्टिस यादव ने 12 दिसंबर 2019 को हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी और 26 मार्च 2021 को उन्हें स्थायी न्यायाधीश बनाया गया।8 दिसंबर 2024 को प्रयागराज में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के विधिक प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में “समान नागरिक संहिता की संवैधानिक आवश्यकता” विषय पर व्याख्यान देते हुए...

भेदभाव ही अन्याय का दूसरा नाम: सुप्रीम कोर्ट ने योग्यता में छूट से वंचित कर्मचारी को पदोन्नति राहत दी
भेदभाव ही अन्याय का दूसरा नाम: सुप्रीम कोर्ट ने योग्यता में छूट से वंचित कर्मचारी को पदोन्नति राहत दी

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें एक सहकारी समिति के कर्मचारी को पदोन्नति से वंचित कर दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि जब अन्य समान परिस्थितियों वाले कर्मचारियों को शैक्षणिक योग्यता में छूट देकर पदोन्नति दी गई है, तो किसी एक कर्मचारी को यह लाभ न देना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की खंडपीठ ने कहा कि “भेदभाव ही अन्याय का दूसरा नाम है” और यह रेखांकित किया कि वास्तविक न्याय के लिए सार्वजनिक...

S.156(3) CrPC/S.175(3) BNSS | आरोपी के बचाव पर भरोसा करके मजिस्ट्रेट के जांच का आदेश रद्द नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
S.156(3) CrPC/S.175(3) BNSS | आरोपी के बचाव पर भरोसा करके मजिस्ट्रेट के जांच का आदेश रद्द नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट अपनी अंतर्निहित विवेकाधीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए मजिस्ट्रेट द्वारा निर्देशित पुलिस जांच को तब तक नहीं रोक सकते, जब तक कि शिकायत में पहली नज़र में कोई संज्ञेय अपराध सामने न आता हो।कोर्ट ने कहा कि इस चरण पर कोर्ट को शिकायत में लगाए गए आरोपों और शिकायतकर्ता द्वारा पेश की गई सामग्री तक ही सीमित रहना चाहिए। साथ ही आरोपी द्वारा पेश किए गए बचावों की जांच करने के लिए उनसे आगे नहीं जाना चाहिए।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा,"...हाईकोर्ट को...

NCAHP द्वारा 2026-27 के लिए दिशानिर्देश जारी करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एलाइड हेल्थ कोर्स पर रोक के खिलाफ याचिका खारिज की
NCAHP द्वारा 2026-27 के लिए दिशानिर्देश जारी करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एलाइड हेल्थ कोर्स पर रोक के खिलाफ याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने 9 अप्रैल को उन विशेष अनुमति याचिकाओं को खारिज किया, जिनमें अतिरिक्त एलाइड और हेल्थकेयर कोर्स शुरू करने की अनुमति देने पर लगाई गई रोक को चुनौती दी गई। कोर्ट ने यह फैसला नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स (NCAHP) द्वारा जारी किए गए एक नए फ्रेमवर्क पर संज्ञान लेने के बाद लिया, जिसका उद्देश्य शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए मंजूरियों की प्रक्रिया को आसान बनाना है।जस्टिस पामिडीघंतम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने अपने आदेश में यह दर्ज किया कि 'नेशनल कमीशन फॉर...

यह डरावना है कि 7.95 लाख से ज़्यादा एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं 6 महीने से ज़्यादा समय से लंबित हैं: सुप्रीम कोर्ट ने जल्द निपटारे के लिए व्यवस्था मांगी
यह डरावना है कि 7.95 लाख से ज़्यादा एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं 6 महीने से ज़्यादा समय से लंबित हैं: सुप्रीम कोर्ट ने जल्द निपटारे के लिए व्यवस्था मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पाया कि पूरे देश में लगभग 8 लाख एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं (Execution Petitions) लंबित हैं, जो छह महीने से ज़्यादा पुरानी हैं। इस स्थिति को "बहुत डरावना और निराशाजनक" बताया।कोर्ट ने कहा,"आज की तारीख़ में स्थिति बहुत डरावनी और निराशाजनक लगती है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि आज की तारीख़ में पूरे देश में 7,95,981 एग्ज़ीक्यूशन याचिकाएं लंबित हैं, जो छह महीने पुरानी हैं।" जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस पंकज मित्तल की बेंच ने सभी हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वे...

DPDP Act की धारा 44(3) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, उपलब्ध डेटा को छिपाने/हटाने के खिलाफ अंतरिम राहत की मांग; नोटिस जारी
DPDP Act की धारा 44(3) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर, उपलब्ध डेटा को छिपाने/हटाने के खिलाफ अंतरिम राहत की मांग; नोटिस जारी

सुप्रीम कोर्ट में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP Act) की धारा 44(3) के खिलाफ एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई। इस धारा ने सूचना का अधिकार (RTI Act) की धारा 8(1)(j) की जगह ले ली है और किसी भी व्यक्ति की किसी भी तरह की "निजी जानकारी" को सार्वजनिक करने से छूट दी।याचिकाकर्ताओं ने RTI Act या अन्य कल्याणकारी कानूनों के प्रावधानों के पालन में सार्वजनिक पोर्टलों पर पहले से उपलब्ध कराए गए डेटा को हटाने/छिपाने के खिलाफ अंतरिम राहत की भी मांग की। उनका तर्क है कि ऐसा करने से ज़मीनी स्तर के उन...

राज्य सरकारें नाकाम: सुप्रीम कोर्ट ने चंबल अभयारण्य में रेत माफिया के आतंक पर राजस्थान और मध्य प्रदेश को फटकारा
'राज्य सरकारें नाकाम': सुप्रीम कोर्ट ने चंबल अभयारण्य में रेत माफिया के आतंक पर राजस्थान और मध्य प्रदेश को फटकारा

सुप्रीम कोर्ट ने चंबल अभयारण्य में 'रेत खनन माफिया' द्वारा पुल के पास की गई अवैध खुदाई को लेकर राजस्थान और मध्य प्रदेश राज्यों को कड़ी फटकार लगाई।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच नेशनल चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और घड़ियालों सहित लुप्तप्राय जलीय वन्यजीवों पर मंडरा रहे खतरे को लेकर खुद से संज्ञान (suo motu) लिए गए मामले की सुनवाई कर रही थी।सुनवाई के दौरान, बेंच ने हाल ही में आई उस रिपोर्ट का ज़िक्र किया, जिसमें बताया गया कि एक वन रक्षक को एक ट्रैक्टर ने कुचल दिया था; आरोप है कि...

West Bengal SIR | जिन लोगों की अपीलें पेंडिंग, उन्हें 2026 के चुनावों में वोट देने की इजाज़त नहीं दी जा सकती: सुप्रीम कोर्ट
West Bengal SIR | जिन लोगों की अपीलें पेंडिंग, उन्हें 2026 के चुनावों में वोट देने की इजाज़त नहीं दी जा सकती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस बात पर हिचकिचाहट ज़ाहिर की कि जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए , उन्हें आने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में वोट देने की इजाज़त दी जाए, जबकि उनकी अपीलें अभी अपीलीय ट्रिब्यूनलों के सामने पेंडिंग हैं। पिछले हफ़्ते भी कोर्ट ने कुछ ऐसी ही राय ज़ाहिर की थी।हालांकि, कोर्ट ने संकेत दिया कि वह उस अर्ज़ी पर विचार कर सकता है, जिसमें सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी करने की इजाज़त मांगी गई ताकि उन लोगों को शामिल किया जा सके, जिनकी अपीलें विधानसभा चुनावों से पहले मंज़ूर...

पश्चिम बंगाल SIR: जीत का अंतर 2% और 15% वोट नहीं कर पाए तो? जस्टिस बागची की चिंता, बिहार रुख से हटने पर ECI पर सवाल
पश्चिम बंगाल SIR: 'जीत का अंतर 2% और 15% वोट नहीं कर पाए तो?' जस्टिस बागची की चिंता, बिहार रुख से हटने पर ECI पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर सुनवाई के दौरान जस्टीस जॉयमाल्या बागची ने गंभीर चिंताएं जताईं और कहा कि मतदाता सूची से हटाए गए लोगों की अपीलों के लिए एक “मजबूत अपीलीय तंत्र” होना आवश्यक है।जस्टिस बागची ने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने अन्य राज्यों से अलग प्रक्रिया अपनाते हुए 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' की नई श्रेणी जोड़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के SIR मामले में आयोग ने यह रुख अपनाया था कि 2002 की मतदाता सूची में शामिल...

जजों की घेराबंदी पर सख्त सुप्रीम कोर्ट, पूछा- क्या साजिश के पीछे राजनीतिक हैं संबंध?
जजों की घेराबंदी पर सख्त सुप्रीम कोर्ट, पूछा- क्या साजिश के पीछे राजनीतिक हैं संबंध?

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों की घेराबंदी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए यह जानना चाहा है कि घटना के पीछे शामिल लोगों का कोई राजनीतिक संबंध था या नहीं।चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ इस मामले की स्वतः संज्ञान कार्यवाही कर रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह केवल शैक्षणिक सवाल नहीं है बल्कि मामले को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाएगा।सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) इस...