AI से तैयार फर्जी केस साइटेशन पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता
Praveen Mishra
17 Feb 2026 5:42 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने आज वकीलों द्वारा AI की मदद से तैयार याचिकाओं में फर्जी केस संदर्भ (साइटेशन) शामिल किए जाने पर गंभीर चिंता जताई। चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की खंडपीठ के समक्ष यह मुद्दा उठा।
चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कुछ वकील अब याचिकाएँ तैयार करने के लिए एआई का उपयोग कर रहे हैं, जो पूरी तरह अनुचित है। जस्टिस नागरत्ना ने बताया कि हाल ही में उन्हें “Mercy v. Mankind” नामक एक ऐसे निर्णय का हवाला मिला, जो अस्तित्व में ही नहीं है। सीजेआई ने भी जस्टीस दीपांकर दत्ता की अदालत में हुई ऐसी ही घटना का उल्लेख किया, जहाँ कई गैर-मौजूद फैसलों का हवाला दिया गया था।
जस्टिस नागरत्ना ने एक और चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कई बार केस का संदर्भ सही होता है, लेकिन उसमें फैसले से जुड़े कथन (quotes) गलत या मनगढ़ंत होते हैं, जिससे न्यायाधीशों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह भी उन्होंने इस तरह की प्रवृत्ति पर चिंता जताई थी।
जस्टिस बागची ने कहा कि हाल के वर्षों में विधिक ड्राफ्टिंग की गुणवत्ता प्रभावित हुई है और आजकल विशेष अनुमति याचिकाएँ (SLP) अक्सर केवल पुराने निर्णयों के उद्धरणों तक सीमित रह जाती हैं। उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक कुमार सेन जैसे पूर्व पीढ़ी के वकीलों का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी ड्राफ्टिंग सटीक, संक्षिप्त और मौलिक होती थी।
गौरतलब है कि हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी AI द्वारा तैयार किए गए फर्जी साइटेशन का हवाला देने पर एक पक्षकार पर लागत (जुर्माना) लगाई थी।

