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क्या IBC मोरेटोरियम कंपनी डायरेक्टर के खिलाफ चेक बाउंस केस को पूरी तरह से रोकता है? सुप्रीम कोर्ट ने बड़े बेंच को भेजा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़े बेंच को यह सवाल भेजा कि क्या नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NI Act) की धारा 138 के तहत चेक बाउंस की कार्यवाही को इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के भाग III के तहत मोरेटोरियम अवधि के दौरान रोका जा सकता है। साथ ही कोर्ट ने यह भी माना कि ऐसी कार्यवाही मुख्य रूप से आपराधिक प्रकृति की होती है, न कि केवल कर्ज वसूली की कार्रवाई।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने टिप्पणी की कि NI Act की धारा 138 के तहत कार्यवाही को केवल पैसे की वसूली के लिए कानूनी...
बस ड्राइवर से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह पीछे मुड़कर देखे कि यात्री उतर गए या नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने लापरवाही से हुई मौत के मामले में सज़ा रद्द की
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (27 मई) को कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) के एक बस ड्राइवर को बरी किया। इस ड्राइवर को एक यात्री की मौत का दोषी ठहराया गया था, जो बस से उतरते समय गिर गया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कंडक्टर के इशारे पर गाड़ी आगे बढ़ाने वाले ड्राइवर को अपने आप आपराधिक रूप से लापरवाह नहीं माना जा सकता।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 279 और 304A के तहत अपील करने वाले ड्राइवर की सज़ा रद्द की। कोर्ट ने कहा कि...
इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के लिए 'हैश वैल्यू' बताना ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट ने BSA की धारा 63(4) को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA) की धारा 63(4) की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी। कोर्ट ने पुणे बार एसोसिएशन द्वारा इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को स्वीकार करने के लिए बनाए गए सख्त नियमों के खिलाफ दायर चुनौती खारिज की। इस प्रावधान में दखल देने से इनकार करते हुए कोर्ट ने यह भी साफ किया कि मद्रास हाईकोर्ट का यह विचार कि ऐसे रिकॉर्ड को सिर्फ़ सरकार द्वारा नोटिफ़ाई किए गए इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के जांचकर्ता ही सर्टिफ़ाई कर सकते हैं, उसे एक बाध्यकारी मिसाल (binding precedent) के तौर पर नहीं माना...
Amazon-Future डील की मंज़ूरी वापस लेने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द, कहा - निवेश बढ़ाने के लिए रेगुलेटरी निष्पक्षता ज़रूरी
भारत के रेगुलेटरी माहौल और विदेशी निवेश के नज़रिए पर असर डालने वाले अहम फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने 2019 की Amazon-Future Coupons निवेश डील की मंज़ूरी रद्द करके अपनी कानूनी शक्तियों का उल्लंघन किया। कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि मर्जर से जुड़े नियम सख़्त तो होने चाहिए, लेकिन साथ ही वे पहले से पता चलने वाले, निष्पक्ष और कानून के दायरे में होने चाहिए।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने NCLAT के उस फ़ैसले के ख़िलाफ़ Amazon की अपील मंज़ूर...
BREAKING| ECI को अपनी शक्तियों के तहत वोटर लिस्ट का SIR करने का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने भारत के चुनाव आयोग (ECI) द्वारा की गई मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) की वैधता को सही ठहराया और टिप्पणी की कि मतदाता SIR, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की संवैधानिक अनिवार्यता को आगे बढ़ाता है।कोर्ट ने फैसला दिया कि चुनाव आयोग के पास संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत SIR करने की शक्ति है, जिसे 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' और उसके तहत बनाए गए नियमों के साथ पढ़ा जाना चाहिए।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने उन रिट याचिकाओं पर यह...
'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' को मद्रास हाईकोर्ट ने किया स्वीकार, कहा- जजों को 'पवित्र गाय' की तरह नहीं माना जाना चाहिए
तमिल फ़िल्म "करुप्पु" पर बैन लगाने की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए, जिसमें आरोप लगाया गया कि फ़िल्म में न्यायपालिका को गलत रोशनी में दिखाया गया, मद्रास हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है और जजों को 'पवित्र गाय' की तरह नहीं माना जाना चाहिए।अपने आदेश में जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायणन की बेंच ने कहा कि उन्हें न्यायिक भ्रष्टाचार के मामले देखने को मिले हैं। ऐसे "काली भेड़ें" (भ्रष्ट लोग) मद्रास हाईकोर्ट की फुल कोर्ट द्वारा नियमित रूप से बाहर का रास्ता दिखा...
VVPAT स्लिप पर वोटिंग का सटीक समय दर्ज करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला ECI पर छोड़ा
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस जनहित याचिका का निपटारा कर दिया, जिसमें VVPAT स्लिप पर वोट डाले जाने का सटीक समय दर्ज करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि यह चुनावी पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा जरूर है, लेकिन इसकी तकनीकी व्यवहार्यता तय करना चुनाव आयोग (ECI) के अधिकार क्षेत्र का विषय है।चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिका को किसी ठोस निर्देश के बिना निपटा दिया और रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि याचिका को चुनाव आयोग के पास एक प्रतिनिधित्व (representation) के रूप में भेजा...
“सोशल मीडिया पर क्यों गईं?”: फ्लाइट यौन उत्पीड़न पोस्ट हटाने के HC आदेश में दखल से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस पत्रकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी, जिसने दिल्ली हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे सोशल मीडिया से वह पोस्ट हटाने का निर्देश दिया गया था, जिसमें उसने फ्लाइट के दौरान एक सह-यात्री पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने दिल्ली हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।सुनवाई के दौरान पत्रकार की ओर से कहा गया कि वह 24 वर्षीय पत्रकार और यौन हिंसा की पीड़िता है। उसके वकील...
ऑल इंडिया सर्विसेज़ ऑफिसर का VRS खारिज करने से पहले केंद्र सरकार को राज्य के विचारों पर गौर करना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भले ही ऑल इंडिया सर्विसेज़ से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए केंद्र सरकार की अनिवार्य मंज़ूरी ज़रूरी होती है, लेकिन सिर्फ़ इस आधार पर केंद्र सरकार को यह अधिकार नहीं मिल जाता कि वह राज्य सरकार की सिफ़ारिश पर विचार किए बिना ही VRS आवेदन खारिज कर दे।महाराष्ट्र कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी की VRS याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पामिडीघंतम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के फ़ैसलों को रद्द...
मतदाता सूची में शामिल करने के लिए नागरिकता की जांच सकता है ECI, लेकिन उसका फैसला अंतिम नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट
चुनाव आयोग की शक्तियों के दायरे पर अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत का चुनाव आयोग (ECI) किसी व्यक्ति की नागरिकता की सीमित जांच करने के लिए अधिकृत है, ताकि यह तय किया जा सके कि वह चुनावी रोल में शामिल होने के योग्य है या नहीं; लेकिन कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस तरह के फैसले को नागरिकता के सवाल पर अंतिम नहीं माना जा सकता।यह फैसला बिहार में चुनावी रोल के चुनाव आयोग के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) को सही ठहराते हुए आया।इस प्रक्रिया के दौरान नागरिकता की स्थिति की जांच करने के आयोग के फैसले को...
BREAKING| ऑनलाइन गेमिंग पर लगा GST, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह 'सट्टेबाजी और जुए' के तौर पर टैक्सेबल
सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग गतिविधियों पर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) लगाने को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया। साथ ही सट्टेबाजी और जुए के लेन-देन से पैदा होने वाले 'एक्शनेबल क्लेम' (दावों) पर CGST लगाने के खिलाफ दायर संवैधानिक और कानूनी चुनौती खारिज की।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने फैसला सुनाया कि संगठित ऑनलाइन गेमिंग गतिविधियां 'एक्शनेबल क्लेम' को जन्म देती हैं। इन गतिविधियों में पूल किए गए दांव और संभावित इनाम वाली फैंटेसी गेम्स शामिल हैं। सट्टेबाजी और जुए के लेन-देन...
बिहार मतदाता सूची पुनर्विचार पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: संदिग्ध नागरिकता वाले नाम केंद्र को भेजने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान की वैधता को बरकरार रखते हुए चुनाव आयोग को बड़ा निर्देश दिया।अदालत ने कहा कि वर्ष 2003 की बिहार मतदाता सूची से जिन लोगों के नाम संदिग्ध नागरिकता के आधार पर हटाए गए, उनके मामलों को चार सप्ताह के भीतर केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकारी के पास भेजा जाए ताकि उनकी नागरिकता पर अंतिम फैसला हो सके।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने यह फैसला बिहार में विशेष गहन पुनर्विचार अभियान को चुनौती देने...
वकीलों को केवल वर्चुअल सुनवाई के लिए मजबूर नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह वकीलों को केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में शामिल होने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।अदालत ने कहा कि वह केवल बार के सदस्यों से अपील कर सकती है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण पैदा हुए ईंधन संकट को देखते हुए अधिक से अधिक वर्चुअल माध्यम अपनाएं।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिका में मांग की गई थी कि ईंधन संकट को देखते हुए तीन महीने तक विविध मामलों की सुनवाई वर्चुअल...
“क्या भ्रष्टाचार चल रहा है वहां?”: NSEL केस की सुनवाई में MPID कोर्ट्स पर CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी
NSEL घोटाले से जुड़ी हरियाणा की एक ज़मीन की नीलामी मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने MPID कोर्ट्स के कामकाज पर कड़ी नाराज़गी जताई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कुछ MPID कोर्ट्स का रवैया बेहद “दुस्साहसी” रहा है और वहां हो रहे भ्रष्टाचार पर हाईकोर्ट को ध्यान देना चाहिए।चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच क्विकर रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कंपनी ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें हरियाणा की 35 एकड़ ज़मीन की नीलामी रद्द करते...
SC की सख्त टिप्पणी: ₹100 करोड़ की ज़मीन ₹10 करोड़ में बेच दी, NSEL केस में HC आदेश पर रोक से इनकार
NSEL घोटाले से जुड़ी हरियाणा की एक ज़मीन की नीलामी पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि करीब ₹100 करोड़ की ज़मीन को “संदिग्ध प्रक्रिया” के जरिए केवल ₹10 करोड़ में बेचा गया।चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच क्विकर रियल्टी नामक वैल्यूअर कंपनी की याचिका सुन रही थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कंपनी को 5 साल के लिए ब्लैकलिस्ट करने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान CJI ने टिप्पणी की:“₹100 करोड़ की संपत्ति को ₹10...
ट्रांसजेंडर संशोधन अधिनियम 2026 को चुनौती: केंद्र सरकार ने की हाईकोर्ट में लंबित याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग
केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने ट्रांसफर याचिकाएं दायर की, जिनमें मांग की गई कि हाईकोर्ट में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों का संरक्षण (संशोधन) अधिनियम 2026 के खिलाफ लंबित विभिन्न चुनौतियों को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लाया जाए।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया और अनुरोध किया कि ट्रांसफर याचिकाओं को शुक्रवार को सूचीबद्ध किया जाए।मेहता ने कहा,"हमने ट्रांसजेंडर संशोधन अधिनियम को दी गई...
बरी करने का फ़ैसला पलटने वाली अपीलीय अदालत को सज़ा के मामले में दोषी की बात खुद सुननी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (26 मई) को फ़ैसला सुनाया कि अगर कोई अपीलीय अदालत बरी करने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की सुनवाई करते हुए आरोपी को दोषी पाती है तो वह सज़ा सुनाने के लिए मामला ट्रायल कोर्ट को वापस नहीं भेज सकती। अपीलीय अदालत को सज़ा के मामले में दोषी की बात खुद सुननी होगी।जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने कहा,"CrPC की धारा 386(a) से यह साफ़ है कि जहां बरी करने के आदेश के ख़िलाफ़ अपील में अपील सुनने वाली अदालत आरोपी को दोषी पाती है, तो उसे क़ानून के मुताबिक़ उस पर...
तीन जजों के पास फिर से पहुंचा एक सवाल
नवंबर 1941 में दूसरे विश्व युद्ध के दूसरे साल में हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स ने रॉबर्ट लिवरसिज नाम के एक आदमी से जुड़े एक मामले पर फ़ैसला सुनाया। उसे गृह सचिव, सर जॉन एंडरसन ने एक युद्धकालीन नियम के तहत जेल में डाल दिया था। इस नियम के तहत अगर सचिव को "यह मानने का कोई उचित कारण" हो कि हिरासत में लिया गया व्यक्ति किसी दुश्मन गुट से जुड़ा है तो उसे हिरासत में लिया जा सकता था।लिवरसिज ने एक सीधा-सा सवाल पूछा: इसके क्या कारण थे? गृह सचिव ने बताने से मना कर दिया। लॉर्ड्स ने चार के मुकाबले एक वोट से यह फ़ैसला...
9 साल से जेल में बंद विचाराधीन कैदी ज़मानत का हकदार, क्योंकि उसके अनुच्छेद 21 के अधिकार का उल्लंघन हुआ: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक ऐसे विचाराधीन कैदी को ज़मानत दी, जो पिछले 9 सालों से जेल में बंद था। ज़मानत देने का आधार यह था कि उसके अनुच्छेद 21 के अधिकार का उल्लंघन हुआ।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने ज़मानत देते हुए यह दोहराया कि किसी भी विचाराधीन कैदी को अनिश्चित काल तक जेल में बंद नहीं रखा जा सकता।संक्षेप में मामलायाचिकाकर्ता को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले में ज़मानत देने से इनकार किया था। उस पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, 148, 149, 120B और 302...
Judicial Service Recruitment | क्या वाइवा-वोस के लिए कट-ऑफ मनमाना है? सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीदवारों की याचिका पर सुनवाई की
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट से तीन उम्मीदवारों के मामलों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने को कहा। इन उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद, वाइवा-वोस (मौखिक परीक्षा) में न्यूनतम योग्यता अंक हासिल न कर पाने के कारण महाराष्ट्र उच्च न्यायिक सेवा में चयन से बाहर कर दिया गया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने बड़े पैमाने पर खाली पदों को देखते हुए यह आदेश पारित किया। खंडपीठ ने टिप्पणी की कि जहां 42 पद खाली थे, वहीं केवल 13 उम्मीदवारों...




















