क्रिकेटर मोहम्मद शमी की पत्नी ने DV Act और भरण-पोषण मामला कोलकाता से दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग की

  • क्रिकेटर मोहम्मद शमी की पत्नी ने DV Act और भरण-पोषण मामला कोलकाता से दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग की

    सुप्रीम कोर्ट ने आज भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी की पत्नी हसीन जहां द्वारा दायर याचिकाओं पर नोटिस जारी किया, जिनमें घरेलू हिंसा अधिनियम और दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत दायर मामलों को कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग की गई है। जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया।

    हसीन जहां ने बताया कि उनकी शादी 7 अप्रैल 2014 को इस्लामी रीति-रिवाजों के अनुसार मोहम्मद शमी से हुई थी और 17 जुलाई 2015 को उनकी एक बेटी का जन्म हुआ। वर्ष 2018 में उन्होंने घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत कार्यवाही शुरू की, जिसमें आरोप लगाया कि विवाह के बाद उन्हें और उनकी नाबालिग बेटी को शमी और उनके परिवार द्वारा शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना दी गई। इसी क्रम में उन्होंने एक लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसे एफआईआर के रूप में दर्ज किया गया और जादवपुर थाने में आईपीसी की विभिन्न धाराओं—498A, 328, 307, 376, 325 और 34—के तहत मामला दर्ज हुआ।

    इसके अतिरिक्त, उन्होंने भरण-पोषण के लिए CrPC की धारा 125 के तहत भी याचिका दायर की। अगस्त 2019 में अलीपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने शमी और उनके परिजनों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था, जिसे बाद में सत्र न्यायालय ने स्थगित कर दिया और यह स्थगन चार वर्षों तक जारी रहा। हाईकोर्ट द्वारा उनकी चुनौती खारिज किए जाने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

    वर्ष 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने सत्र न्यायालय को वारंट से संबंधित कार्यवाही एक महीने के भीतर निपटाने का निर्देश दिया था। पिछले वर्ष कलकत्ता हाईकोर्ट ने शमी को पत्नी और बेटी के लिए प्रति माह ₹4 लाख अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया था, जिसे हसीन जहां ने अपर्याप्त बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में ₹10 लाख प्रतिमाह की मांग के साथ चुनौती दी।

    हसीन जहां ने कहा कि वह अब अपनी बेटी की समग्र परवरिश और विकास के लिए दिल्ली में रह रही हैं, इसलिए मामलों को दिल्ली स्थानांतरित किया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि शमी का परिवार उत्तर प्रदेश के अमरोहा में रहता है और शमी स्वयं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यात्रा करते रहते हैं, इसलिए दिल्ली में मुकदमा चलने से दोनों पक्षों को सुविधा होगी। याचिका में यह भी कहा गया है कि हसीन जहां के पास कोई स्वतंत्र आय नहीं है और वह अकेले अपनी बेटी की देखभाल कर रही हैं, ऐसे में पश्चिम बंगाल में मुकदमा लड़ना उनके लिए अत्यंत कठिन और कष्टकारी होगा।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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