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सुप्रीम कोर्ट ने  हाईकोर्ट द्वारा न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी करने की प्रैक्टिस को अनुचित ठहराया
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी करने की प्रैक्टिस को अनुचित ठहराया

सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालयों द्वारा न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी करने की प्रैक्टिस को अनुचित ठहराया।एक न्यायिक अधिकारी, जिन्होंने मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता की थी, उन्होंने कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा उनके खिलाफ व्यक्तिगत रूप से की गई कुछ टिप्पणियों के खिलाफ शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। एमएसीटी जज द्वारा पारित एक आदेश के खिलाफ अपील में फैसले में प्रतिकूल टिप्पणी की गई।जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस आर सुभाष रेड्डी ने कहा,"हम अपीलकर्ता के लिए विद्वान वकील...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
सीएमए परीक्षा - 2021 : कथित गड़बड़ियों के चलते आईसीएमएआई की ऑनलाइन परीक्षा रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका

सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की गई है, जिसमें इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया ( आईसीएमएआई) द्वारा जनवरी-फरवरी 2021 में आयोजित किए गए कॉस्ट मैनेजमेंट अकाउंटेंट ( सीएमए) के इंटरमीडिएट और फाइनल स्तर के ऑनलाइन टेस्ट को रद्द करने की मांग की गई है।कॉस्ट मैनेजमेंट अकाउंटिंग (सीएमए) फाइनल कोर्स के एक छात्र द्वारा ये याचिका दायर की गई है, जिसने परीक्षा में व्यापक खराबी का आरोप लगाया जिसकी वजह से इसकी विश्वसनीयता और पवित्रता प्रभावित हुई।याचिकाकर्ता के अनुसार, ऑनलाइन आधारित परीक्षाएं...

यह सरकार कानून को विफल करने के लिए कानून का उपयोग कर रही है, जिसका नतीजा अराजकता के रूप में सामने आ रहा हैः सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह
यह सरकार कानून को विफल करने के लिए कानून का उपयोग कर रही है, जिसका नतीजा अराजकता के रूप में सामने आ रहा हैः सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह

सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने शुक्रवार को कहा, "एक बार जब आप नागरिकता के हकदार हो जाते हैं, तो उन सभी अधिकारों के संरक्षण के हकदार हो जाते हैं, जो संविधान के तहत आप को दिए गए होते हैं। शायद, सीएए का और एनपीआर का तर्क यह है कि कुछ लोगों को नागरिकता के अधिकार से वंचित करना और धर्म के आधार पर कुछ लोगों को सशक्त बनाना।"वह सीनियर एडवोकेट डॉ केएस चौहान की किताब 'नागरिकता, अधिकार और संवैधानिक मर्यादा' के विमोचन समारोह पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रही थी, जिसका विषय था- 'नागरिकता, लोकतंत्र और अधिकार'।...

सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी द्वारा महामारी के दौरान 1.6 लाख से अधिक वकीलों, न्यायाधीशों और कोर्ट के स्टॉफ को ऑनलाइन ट्रेनिंग दी गई
सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी द्वारा महामारी के दौरान 1.6 लाख से अधिक वकीलों, न्यायाधीशों और कोर्ट के स्टॉफ को ऑनलाइन ट्रेनिंग दी गई

सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी, जस्टिस धनंजय वाई चंद्रचूड़ के मार्गदर्शन में मई 2020 से दिसंबर 2020 तक (167735 प्रतिभागियों को शामिल करते हुए) महामारी की अवधि के दौरान 19 ऑनलाइन ई-कमेटी प्रशिक्षण (ईसीटी)/जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी द्वारा इससे संबंधित प्रेस रिलीज जारी की गई है, जिसमें कहा गया है कि कार्यक्रम के प्रतिभागियों में अधिवक्ता, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, जिला न्यायपालिका के न्यायाधीश, न्यायालय कर्मचारी, न्यायाधीशों / डीएसए के साथ मास्टर ट्रेनर और हाईकोर्ट के...

नागरिकता संशोधन कानून असंवैधानिक, क्योंकि यह धर्म के आधार पर व्यक्तियों के बीच अंतर करता हैः जस्टिस गोपाल गौड़ा
नागरिकता संशोधन कानून असंवैधानिक, क्योंकि यह धर्म के आधार पर व्यक्तियों के बीच अंतर करता हैः जस्टिस गोपाल गौड़ा

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज, जस्टिस वी गोपाल गौड़ा ने शुक्रवार को कहा, "एसआर बोम्मई मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 1994 में दिए फैसले में कहा था कि संसद या राज्यों की विधायिका धर्म के आधार कोई भी कानून लागू नहीं कर सकती हैं। मेरा मानना है कि सीएए, जो व्यक्तियों को धर्म के आधार पर अलग करता है, बोम्मई के अनुसार, असंवैधानिक है।"वह सीनियर एडवोकेट डॉ केएस चौहान की किताब 'नागरिकता, अधिकार और संवैधानिक मर्यादा' के विमोचन समरोह में बोल रहे थे। किताब को मोहन लॉ हाउस ने छापा है। कार्यक्रम में...

आपराधिक मुकदमे विवादित बकाये की वसूली के लिए नहीं होते : सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया
आपराधिक मुकदमे विवादित बकाये की वसूली के लिए नहीं होते : सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कहा कि आपराधिक मुकदमे विवादित बकाये की वसूली के लिए नहीं होते हैं।न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की खंडपीठ ने कहा कि जमानत / अग्रिम जमानत देने के लिए अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल कर रही आपराधिक अदालत से शिकायतकर्ता के बकाए वसूली के लिए रिकवरी एजेंट के तौर पर कार्य करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती और वह भी बगैर किसी ट्रायल के।इस मामले में, झारखंड हाईकोर्ट ने एक अभियुक्त को जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया था, लेकिन इसके लिए उसे ट्रायल कोर्ट में 53...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
किशोर होने के दावे को पेश करने में की गई देरी, इस तरह के दावे को खारिज करने के लिए कोई आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किशोर होने के दावे को पेश करने में की गई देरी, इस तरह के दावे को खारिज करने के लिए कोई आधार नहीं है।इस तरह के दावे को किसी भी स्तर पर उठाया जा सकता है, यहां तक कि मामले के अंतिम निस्तारण के बाद भी। यह अवलोकन जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बेंच ने किया।अदालत ईशा चरण की ओर से दायर एक आवेदन पर विचार कर रही थी, जिसे भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत अन्य आरोपियों के साथ 30-11-1982 को हुई एक घटना के संबंध में दोषी ठहराया गया है और आजीवन कारावास की सजा...

National Uniform Public Holiday Policy
परिसीमा अवधि अधिनियम की धारा 5 का आवेदन वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम की योजना से बाहर नहीं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि परिसीमा अवधि अधिनियम की धारा 5 के आवेदन को वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम की योजना से बाहर नहीं किया गया है।इसका मतलब यह है कि वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम की धारा 13 के तहत अपील दायर करने में देरी को परिसीमा अवधि अधिनियम की धारा 5 के अनुसार पर्याप्त कारण दिखा कर माफ किया जा सकता है।जस्टिस आरएफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने मैसर्स एनवी इंटरनेशनल बनाम असम राज्य के मामले में अपना 2019 का फैसला पलटते हुए ये कहा, जिसमें सख्ती से कहा गया था कि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम 1996 की...

सुप्रीम कोर्ट ने एनवी इंटरनेशनल फैसले को पलटा कि धारा 37 के तहत मध्यस्थता अपील दायर करने में 120 दिन से अधिक की देरी माफ नहीं हो सकती
सुप्रीम कोर्ट ने 'एनवी इंटरनेशनल' फैसले को पलटा कि धारा 37 के तहत मध्यस्थता अपील दायर करने में 120 दिन से अधिक की देरी माफ नहीं हो सकती

एक महत्वपूर्ण फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मैसर्स एनवी इंटरनेशनल बनाम असम राज्य के मामले में अपना 2019 का फैसला पलट दिया, जिसमें सख्ती से कहा गया था कि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम 1996 की धारा 37 के तहत अपील दायर करने में 120 दिन से अधिक की देरी को माफ नहीं किया जा सकता है।शीर्ष अदालत ने अब कहा है कि मंच के आधार पर धारा 37 के तहत अपील दायर करने के लिए 90, 60 या 30 दिनों से अधिक देरी को माफ किया जा सकता है। लेकिन न्यायालय ने एक शर्त लगाते हुए कहा कि देरी की ऐसी माफी अपवाद होने चाहिए और...

अभियुक्त के अपराध निर्धारण के लिए अप्रासंगिक कारकों को सजा सुनाये जाने के समय विचार किया जा सकता है : सुप्रीम कोर्ट
अभियुक्त के अपराध निर्धारण के लिए अप्रासंगिक कारकों को सजा सुनाये जाने के समय विचार किया जा सकता है : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वैसे कारक जो अभियुक्त के जुर्म के निर्धारण के लिए प्रांसगिक नहीं हो सकते, उन पर सजा निर्धारण के स्तर पर विचार किया जा सकता है।इस मामले में अभियुक्त को एक नाबालिग लड़की के अपहरण के लिए अन्य अभियुक्तों के साथ साजिश रचने के आरोप में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 344 और 366 के तहत दोषी ठहराया गया था। उन सभी को आईपीसी की धारा 344 के तहत अपराध के लिए एक वर्ष की साधारण कारावास की सजा सुनायी गयी थी तथा दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था। साथ ही, आईपीसी की धारा 366 के...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा, क्या मध्यस्थता को लेकर कानून बना रहे हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र की प्रतिक्रिया मांगी कि क्या वह मध्यस्थता को शासित करने के लिए कानून बनाने के बारे में विचार कर रहा है।सीजेआई बोबडे, जस्टिस बोपन्ना और जस्टिस रामासुब्रमण्यन की तीन जजों की बेंच यूथ बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया ( वाईबीएआई) की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें देश भर में अनिवार्य पूर्व- मुकदमेबाजी मध्यस्थता के लिए निर्देश या दिशा-निर्देश मांगे गए थे।शुक्रवार को सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि वह निर्धारित याचिका पर केंद्र प्रतिक्रिया जानना चाहती है। बेंच ने आगे कहा कि...

सुप्रीम कोर्ट ने 102 वें संवैधानिक संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने 102 वें संवैधानिक संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया

मराठा आरक्षण के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 102 वें संवैधानिक संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है।ये नोटिस महाराष्ट्र के राजनीतिक दल शिव संग्रामऔर उसके नेता विनायकराव टी मेटे के द्वारा दायर इस रिट याचिका पर जारी हुआ है और इसे मराठा कोटा मामलों के साथ टैग किया गया है।जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली बेंच ने आदेश में कहा,इस तथ्य के मद्देनज़र, 102 वें संवैधानिक संशोधन को देखते हुए विद्वान अटॉर्नी जनरल को औपचारिक नोटिस भी जारी किया...

ईवीएम में चिन्ह की जगह उम्मीदवारों का विवरण देने की याचिका : सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को एजी को याचिका की प्रति देने को कहा
ईवीएम में चिन्ह की जगह उम्मीदवारों का विवरण देने की याचिका : सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को एजी को याचिका की प्रति देने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिकाकर्ता से कहा कि वह भारत के लिए अटॉर्नी जनरल को याचिका की प्रति देने को कहा जिन्होंने जगह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में चिन्ह की जगह उम्मीदवारों की तस्वीर, उम्र और योग्यता शामिल करने के लिए निर्देश मांगे हैं।सीजेआई एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यन की पीठ बीजेपी नेता एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर याचिका पर विचार कर रही थी कि ईवीएम में राजनीतिक चिन्ह को उम्मीदवारों के विवरण और चित्रों के साथ प्रतिस्थापित किया जाए।जब इस मामले को...

क्या उनको एक राय व्यक्त करने का अधिकार नहीं है : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय कानूनों के खिलाफ राज्यों द्वारा प्रस्ताव पास करने पर याचिकाकर्ता को और शोध करने को कहा
"क्या उनको एक राय व्यक्त करने का अधिकार नहीं है" : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय कानूनों के खिलाफ राज्यों द्वारा प्रस्ताव पास करने पर याचिकाकर्ता को और शोध करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को संसद द्वारा पारित कानूनों को खिलाफ प्रस्ताव पास करने की राज्य विधान सभाओं की क्षमता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई को ये कहते हुए टाल दिया कि इस मामले में याचिकाकर्ता और अधिक शोध करे।भारत के मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सौम्या चक्रवर्ती को बताया,"आप अधिक शोध करें। हम हल करने की तुलना में अधिक समस्याएं पैदा नहीं करना चाहते हैं।"यह याचिका "समता आंदोलन समिति" नामक एक गैर सरकारी संगठन द्वारा दायर की गई है , जिसमें केंद्रीय...

जजों को जेंडर संवेदनशीलता  का प्रशिक्षण दिया जाए; एलएलबी और एआईबीई पाठ्यक्रम में ऐसे विषयों को शामिल करेंः सुप्रीम कोर्ट
जजों को जेंडर संवेदनशीलता का प्रशिक्षण दिया जाए; एलएलबी और एआईबीई पाठ्यक्रम में ऐसे विषयों को शामिल करेंः सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया है कि जजों और पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को जेंडर संवेदनशीलता का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ ने यह भी कहा कि प्रत्येक हाईकोर्ट को न्यायिक सेवा परीक्षा में टेस्ट करने के लिए यौन अपराधों पर न्यायिक संवेदनशीलता के लिए एक मॉड्यूल तैयार करना चाहिए। पीठ ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भी निर्देश दिया है कि वह एलएलबी और एआईबीई पाठ्यक्रम के एक भाग के रूप में ऐसे कोर्स को शामिल करने के लिए कदम उठाएं।सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश उस...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
केंद्र सरकार ने सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के लाइफटाइम मासिक भुगतान को बढ़ाया

विधि और न्याय मंत्रालय ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सहित सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को लाइफटाइम मासिक भुगतान बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जज रूल्स, 1959 में संशोधन को लेकर अधिसूचना जारी की।सुप्रीम कोर्ट जजिज रूल्स, 1959 के नियम 3बी के अनुसार, एक सेवानिवृत्त (सीजेआई) अपने जीवनकाल के दौरान, एक अर्दली, चालक और सुरक्षा गार्ड की सेवाओं के लिए प्रति माह पच्चीस हजार रुपये प्राप्त करने का हकदार है। इस खर्च में कार्यालय का रखरखाव भी अनुबंध के तौर पर शामिल है। सुप्रीम कोर्ट जजिज रूल्स, 1959...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
धारा 482 के तहत गिरफ्तारी पर रोक : हाईकोर्ट को कारण देने चाहिए कि किस भार के चलते वे राहत दे रहे हैं : सुप्रीम कोर्ट

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "अंतरिम चरण में, उच्च न्यायालयों को एक छोटे पैराग्राफ को शामिल करना चाहिए कि किस भार के चलते वो राहत दे रहे हैं। हम यह बिल्कुल नहीं कह रहे हैं कि उच्च न्यायालय इस शक्ति से वंचित हैं! लेकिन क्योंकि यह एक व्यापक शक्ति है, इसलिए उम्मीद है कि इसका जिम्मेदारी से प्रयोग किया जाएगा।"न्यायमूर्ति चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की बेंच धारा 482, सीआरपीसी के तहत रद्द करने की शक्ति और जमानत / अग्रिम जमानत के जरिए जो अंतरिम राहत देने के लिए एक...

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट के लिए नए जजों के नामों पर चर्चा की
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट के लिए नए जजों के नामों पर चर्चा की

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बोबडे की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के लिए हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के नामों पर विचार-विमर्श किया।सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए केंद्र से सिफारिश किए जाने वाले नामों को तय करने के लिए पांच सदस्यीय कॉलेजियम की बैठक की अध्यक्षता सीजेआई कर रहे हैं। हालांकि इस विचार-विमर्श से किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँचा जा सका। इसलिए कॉलेजियम की अगली बैठक अब 23 अप्रैल, 2021 को होगी।इस बैठक में CJI के अलावा, कॉलेजियम में चार अन्य...

यौन उत्पीड़न के आरोपी को पीड़िता से राखी बंधवाने का निर्देश देने वाले एमपी हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द  किया
यौन उत्पीड़न के आरोपी को पीड़िता से राखी बंधवाने का निर्देश देने वाले एमपी हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया है,जिसमें अदालत ने आरोपी व्यक्ति (अपनी पड़ोसी की शालीनता को अपमानित करने का आरोपी) पर जमानत की शर्त लगाते हुए कहा था कि वह पीड़िता से अनुरोध करे कि वह उसकी कलाई पर राखी बांध दे। जस्टिस एएम खानविल्कर और जस्टिस रवींद्र भट की बेंच ने लिंग संवेदनशीलता पर जजों और वकीलों के लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता अपर्णा भट और आठ अन्य महिला वकीलों ने (शीर्ष न्यायालय के समक्ष) 30 जुलाई को मध्य प्रदेश...