Top
Begin typing your search above and press return to search.
ताजा खबरें

यह सरकार कानून को विफल करने के लिए कानून का उपयोग कर रही है, जिसका नतीजा अराजकता के रूप में सामने आ रहा हैः सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह

LiveLaw News Network
22 March 2021 5:38 AM GMT
यह सरकार कानून को विफल करने के लिए कानून का उपयोग कर रही है, जिसका नतीजा अराजकता के रूप में सामने आ रहा हैः सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह
x

सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने शुक्रवार को कहा, "एक बार जब आप नागरिकता के हकदार हो जाते हैं, तो उन सभी अधिकारों के संरक्षण के हकदार हो जाते हैं, जो संविधान के तहत आप को दिए गए होते हैं। शायद, सीएए का और एनपीआर का तर्क यह है कि कुछ लोगों को नागरिकता के अधिकार से वंचित करना और धर्म के आधार पर कुछ लोगों को सशक्त बनाना।"

वह सीनियर एडवोकेट डॉ केएस चौहान की किताब 'नागरिकता, अधिकार और संवैधानिक मर्यादा' के विमोचन समारोह पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रही थी, जिसका विषय था- 'नागरिकता, लोकतंत्र और अधिकार'। किताब का प्रकाशन मोहन लॉ हाउस ने किया है। कार्यक्रम में भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी भी मौजूदा थे।

जयसिंह ने कहा, "देश में विभाजन के इतिहास को देखते हुए, नागरिकता ब्रिटिश भारत के अविभाजित क्षेत्र में नागरिकता एक व्यक्ति के जन्म से जुड़ी हुई है, जो धर्म को पूरी तरह अप्रासंगिक बनाती है।"

उन्होंने कहा, नागरिकता अधिनियम, 1955 में 2004 के संशोधन के बाद, नागरिकता तभी प्राप्त की जा सकती है, जब माता-पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक हो- " और यही 2004 के संशोधन की गंभीर शरारत है, कि यह भारत की धरती पर जन्म के आधार पर नागरिकता देने से इनकार करती है, इस शर्त के अलावा कि आपके माता-पिता में से कोई एक भारत में पैदा हुआ हो। ऐसा प्रतीत होता है कि सीएए यहीं से पैदा होता है।"

"अमेरिका में, आज उन्होंने ड्रीम एक्ट की शुरुआत की है, जो ऐसे दस्तावेजों से बाहर रह गए प्रवासियों को नागरिकता प्रदान करता है, जिनके माता-पिता काम करने संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए थे। यह हमारे सीएए और एनपीए से बिलकुल अलग है।"

एनपीआर प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए, उन्होंने कहा कि यह एक गैर-दस्तावेजी व्यक्ति पर प्रूफ ऑफ बर्डेन डालता है कि वह अपनी नागरिकता साबित करे, जब कि यह कानून के खिलाफ है। उन्होंने बताया कि मौजूदा कानून के अनुसार, अगर सरकार कहती है कि आप नागरिक नहीं है, तो सरकार को अदालत या विदेशी ट्रिब्यूनल जाना होगा और यह साबित करना होगा कि आप नागरिक नहीं हैं।

"हमें दोषी साबित होने तक निर्दोष होने के सिद्धांत के क्रमिक क्षरण के खिलाफ और सबूत के बोझ के सामान्य सिद्धांतों की रक्षा करने की आवश्यकता है, जो हमेशा एक राज्य पर है जो कहता है कि आप और मैं नागरिक नहीं हैं"।

उन्होंने कहा, "संविधान में अधिकारों को होना, उन्हें इस्तेमाल करने की गारंटी नहीं देता है। भारत का संविधान एक राजनीतिक प्रक्रिया का परिणाम था और इस प्रकार, अधिकारों के कार्यान्वयन की एकमात्र गारंटी हमारी खुद की राजनीतिक प्रक्रिया है। यह हमें ही बोलना चाहिए। यह वह है, जिस पर हमें असंतोष व्यक्त करना चाहिए, यह वह है, जिसे वास्तव में अधिकारों को हासिल करने के लिए एक अन्यायपूर्ण सरकार का विरोध करना चाहिए।"

"हमने अधिकारों के लिए नागरिकों के दो बहुत ही महत्वपूर्ण आंदोलनों को देखा है - सीएए आंदोलन, जो शाहीन बाग में शुरू और समाप्त हुआ, और मौजूदा किसान आंदोलन। संगठित करने का अधिकार, विरोध करने का अधिकार और प्रतिरोध करने का अधिकार स्वाभाविक रूप से हमारे पास आना चाहिए, जैसे ही हम सांस लेते हैं, स्वाभाविक रूप से हम जीवित रहते हैं।"

"लोकतंत्र एक सहभागिता प्रक्रिया है- कानून बनाने में भागीदारी, विधेयकों और कानूनों को इनपुट देने में भागीदारी जो राज्यसभा और लोकसभा में पेश किए जाते हैं, नागरिक के रूप में हमारे अधिकारों में भागीदारी। ये भागीदारी के अधिकार कानूनों द्वारा खत्म किए जा रहे हैं। मनी बिल के रूप में, उन कानूनों द्वारा, जिन्हें राज्यसभा में पेश नहीं किए जाता है, उन कानूनों द्वारा जिन्हें, अध्यादेशों के रूप में पेश किया जाता है और फिर कानून में पारित किया जाता है.."।

"वर्तमान स्थिति का निर्णायक क्षण यह है कि यह सरकार कानून को विफल करने के लिए कानून का उपयोग करती है, जिसका नतीजा अराजकता की स्थिति होती है। जब एक लोकतंत्र विफल होता है, तो हमारी अदालतें भी हमें विफल करती हैं।"

जयसिंह ने आईपीसी में, धारा 124 ए के निरंतर अस्तित्व की चर्चा की।

"नागरिकता का पूरा उद्देश्य स्वतंत्रता, जीवन, खुशी की खोज है। दुर्भाग्य से, हम में से बहुत कम लोग आज कह सकते हैं कि हम खुशहाल जीवन जी रहे हैं। संस्थागत स्वायत्तता नष्ट हो गई है, शक्तियों का अलगाव मिट गया है, स्वतंत्र प्रेस आज दिखाई नहीं दे रहा है। आज मुझे भारत का नागरिक नहीं कहा जा रहा है, बल्कि एक एक 'शहरी नक्सल' कहा जा रहा है! क्या ये एक नागरिक के लिए अभिशाप नहीं हैं?"

"नागरिकता का सबसे महत्वपूर्ण अधिकार, मेरे लिए, मेरे मन की बात कहने का अधिकार है, जिस पर पिछले कई वर्षों से हमला हो रहा है। इस सरकार ने विपक्षी दलों को सफलतापूर्वक हटा दिया है और अब यह नागरिक समाज को खत्म कर देने की कोशिश कर रहा है। आप और मैं चिंतित हैं, एनजीओ चिंतित हैं। वे इस देश में अधिकारों की रक्षा की अंतिम पंक्ति हैं- यही कारण है कि सरकार के लिए एफसीआरए, प्रवर्तन निदेशालय का उपयोग करना महत्वपूर्ण है, हम सभी के खिलाफ धन शोधन के आरोप हैं..।"

जून 2019 में गृह मंत्रालय (MHA) में एक अवर सचिव अनिल कुमार धस्माना की गई शिकायत पर लॉयर्स कलेक्टिव (जयसिंह और वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर द्वारा स्थापित) के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एनजीओ ने विदेशी योगदान को ऐसे कार्य के लिए डायवर्ट किया है, जो एसोसिएशन के उद्देश्य में उल्लिखित गतिविधियां नहीं हैं, और फंड का व्यक्तिगत खर्चों के लिए उपयोग किया गया है।

प्राथमिकी में आरोप लगाया गया कि एनजीओ ने "सामाजिक गतिविधियों के लिए पंजीकृत किया था और 2006-07 से 2014-15 के बीच 32.39 करोड़ रुपये का विदेशी अंशदान प्राप्त किया था, लेकिन धन का उपयोग राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया गया था।"

27 नवंबर, 2011 को एनजीओ का एफसीआरए पंजीकरण रद्द कर दिया गया और उनके सभी बैंक खातों को फ्रीज करने का फैसला लिया गया। एफआईआर दर्ज होने के बाद, सीबीआई ने ग्रोवर और जयसिंह के कार्यालयों और आवासों में छापे मारे थे। सुप्रीम कोर्ट द्वारा लॉयर्स वाइस नाम के एक एनजीओ द्वारा दायर जनहित याचिका में लॉयर्स कलेक्टिव के खिलाफ जांच की मांग के बाद एफआईआर दर्ज की गई थी।


Next Story