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यूरोपीय संसद की समिति ने भारत में मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति पर चिंता व्यक्त की
यूरोपीय संसद की एक समिति ने एक रिपोर्ट को स्वीकृति दी है, जिसमें "भारत में बिगड़ती मानव अधिकारों की स्थिति" पर चिंता व्यक्त की गई है। विदेश मामलों की समिति द्वारा अपनाई गई रिपोर्ट में भारत में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के असुरक्षित कामकाजी माहौल, महिलाओं और अल्पसंख्यक समूहों को पेश आने वाली कठिन स्थितियों और जाति-आधारित भेदभाव पर कई टिप्पणियां की गई हैं।रिपोर्ट में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पर भी चिंता व्यक्त की गई, जिसे "मुसलमानों के खिलाफ प्रकृति में भेदभावपूर्ण और खतरनाक स्तर...
"मैं यहां तक कि पानी की एक बूंद के बिना पूरे दिन उपवास करने की क्षमता की प्रशंसा करता हूं" : जस्टिस चंद्रचूड़ ने उस वकील से कहा जिसने मामले को रमज़ान के बाद सूचीबद्ध करने का आग्रह किया
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने शुक्रवार को एक वकील से कहा,"मैं यहां तक कि पानी की एक बूंद के बिना पूरे दिन उपवास करने की क्षमता की प्रशंसा करता हूं।"दरअसल न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 29 नवंबर, 2019 के फैसले के खिलाफ दाखिल एसएलपी पर सुनवाई कर रही थी जिसमें याचिकाकर्ता को हत्या के लिए दोषी ठहराए जाने और उम्रकैद की सजा की पुष्टि की गई थी।इस याचिकाकर्ता के वकील ने कुछ दस्तावेज दाखिल करने के लिए समय मांगा और प्रार्थना की कि रमज़ान के पवित्र महीने...
'कुंभ मेला में भाग लेने वाले COVID-19 प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर रहे हैंः' सुप्रीम कोर्ट में हरिद्वार में बड़े पमाने पर जमा हो रही भीड़ को रोकने के लिए याचिका दायर
सुप्रीम कोर्ट में हरिद्वार शहर में चल रहे कुंभ मेले के लिए सामूहिक समारोहों को रोकने के लिए दिशा-निर्देश दिए जाने की मांगे करती हुई एक जनहित याचिका (पीआईएल) याचिका दायर की गई है।याचिका में पश्चिम बंगाल जैसे चुनाव प्रचार वाले राज्यों में बड़े पैमाने पर चुनावी रैलियों से उत्पन्न खतरे पर प्रकाश डाला गया है और सुधारात्मक कदम उठाने के लिए भारत के चुनाव आयोग को निर्देश दिए जाने की मांग की गई है।नोएडा निवासी संजय कुमार पाठक द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि लाखों लोग COVID-19 प्रोटोकॉल का पालन किए...
COVID-19 की दूसरी लहर के कारण सीमा अवधि विस्तार को बहाल करें : SCAoRA सुप्रीम कोर्ट पहुंची
मुकदमों और वकीलों को COVID-19 की दूसरी लहर से उत्पन्न खतरे का हवाला देते हुए, सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन ने अदालतों और ट्रिब्यूनलों में केस दायर करने के लिए सीमा अवधि विस्तार की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।एसोसिएशन ने 23 मार्च, 2020 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित स्वत: संज्ञान आदेश की बहाली की मांग की है, जिसमें अगले आदेशों तक सीमा की अवधि 15 मार्च, 2020 से प्रभावी कर दी थी।पिछले महीने, 8 मार्च 2021 को, सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान मामले को बंद करके...
एक निजी वाहन एनडीपीएस एक्ट की धारा 43 में दी गई व्याख्या के अनुसार "सार्वजनिक स्थान" नहीं है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक निजी वाहन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंस एक्ट, 1985 की धारा 43 में दी गई व्याख्या के अनुसार "सार्वजनिक स्थान" की अभिव्यक्ति में नहीं आएगा।जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने कहा कि धारा 42 का पूरा गैर-अनुपालन असंभव है, हालांकि इसकी कठोरता कुछ स्थितियों में कम हो सकती है।इस मामले में, आरोपियों से वसूली प्रभावित हुई, जब वे एक सार्वजनिक स्थान पर एक जीप में सड़क पर बैठे थे। आरोपियों की सजा को बरकरार रखते हुए, उच्च न्यायालय ने कहा कि आरोपी के...
''दोनों पक्षकार वैवाहिक जीवन में खुश हैं;एफआईआर गलतफहमी के कारण दर्ज हुई थी'': सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार के मामले को रद्द किया
सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार के एक मामले को आरोपी और शिकायतकर्ता की तरफ से किए गए संयुक्त अनुरोध के बाद रद्द कर दिया है। दोनों पक्षकारों ने बताया था कि उन्होंने शादी कर ली है और वे अपने शादीशुदा जीवन में खुश हैं। न्यायमूर्ति एएम खानविल्कर और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने आरोपी की तरफ से दायर रिट याचिका को अनुमति देते हुए अवलोकन किया कि उक्त एफआईआर के आधार पर उठाए गए सभी कदमों को कानून में रिकॉर्ड से समाप्त माना जाए। इस मामले में, शिकायतकर्ता ने यह आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज की थी कि...
सुप्रीम कोर्ट ने ईडी के कोयला घोटाला केस के लिए वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह और वकील राजेश बत्रा को विशेष सरकारी वकील नियुक्त किया
सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दायर करोडों रुपये के कोयला घोटाला मामलों की सुनवाई के लिए पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह और अधिवक्ता राजेश बत्रा को विशेष सरकारी वकील (एसपीपी) नियुक्त किया है।शीर्ष अदालत द्वारा 2014 में एसपीपी नियुक्त किए गए वरिष्ठ अधिवक्ता आर एस चीमा के अनुरोध पर अदालत ने यह आदेश पारित किया था जिन्होंने अपनी उम्र का हवाला देते हुए और उनकी सहायता करने वाले विधि अधिकारियों की कमी के चलते जिम्मेदारी से मुक्त करने की अनुमति मांगी थी।केंद्र सरकार ने पूर्व एएसजी...
'एक ही लेनदेन से उत्पन्न कई मामलों के लिए एक ही ट्रायल की मंज़ूरी के लिए एनआई अधिनियम को संशोधित करें ' : सुप्रीम कोर्ट ने चेक बाउंस केसों में शीघ्र ट्रायल के लिए दिशानिर्देश जारी किए
सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान पीठ ने शुक्रवार को निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत चेक अनादर के मामलों की सुनवाई में तेज़ी लाने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए।निर्देश इस प्रकार हैं:1. उच्च न्यायालय मुकदमे की सुनवाई के लिए समरी ट्रायल को समन ट्रायल में रूपांतरण के संबंध में मजिस्ट्रेटों को अभ्यास निर्देश जारी करेंगे।2. मजिस्ट्रेट न्यायालय के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र से परे रहने वाले अभियुक्त को समन जारी करने से पहले धारा 202 सीआरपीसी के तहत जांच करेंगे।3. आपराधिक प्रक्रिया संहिता...
वाणिज्यिक वाद में एक पक्ष की कार्यात्मक सुविधा सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 25 के तहत ट्रांसफर करने का आधार नहीं हो सकती : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वाणिज्यिक वाद में एक पक्ष की कार्यात्मक सुविधा सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 25 के तहत ट्रांसफर करने का आधार नहीं हो सकती है।न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस ने कहा,व्यवसाय-संबंधी विवादों को एक क्षेत्राधिकार से दूसरे में ट्रांसफर करने की मांग करने वाले याचिकाकर्ता को गंभीर कठिनाई या अभिजोन में पूर्वाग्रह स्थापित करना होगा अन्यथा उस मंच में मुकदमे का बचाव करना स्थापित करना होगा जिसमें मामले को तय करने की शक्ति नहीं है।इस मामले में, याचिकाकर्ता कंपनी ने उनके खिलाफ उत्तरदाताओं...
COVID-19 की दूसरी लहर को देखते हुए डॉक्टर्स ने NEET PG परीक्षा स्थगित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
Doctors Move Supreme Court To Postpone NEET PG Exam Citing COVID19 Second Wave एमबीबीएस डॉक्टरों के एक समूह ने COVID-19 महामारी की दूसरी लहर के बीच संक्रमण की गंभीर आशंकाओं का हवाला देते हुए 18 अप्रैल से होने वाली NEET-PG परीक्षाओं को स्थगित करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।दलील में कहा गया है कि एक फिजिकल परीक्षा में शामिल होने के लिए दैनिक आधार पर COVID-19 रोगियों का इलाज करने वाले डॉक्टरों को मजबूर करना हजारों लोगों के जीवन को संकट में डालने के बराबर होगा।पल्लवी...
बैलेंस शीट में ऋण की प्रविष्टियां परिसीमन अधिनियम धारा 18 में ऋण की पावती के समान हो सकती हैं : सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलएटी पूर्ण पीठ का फैसला रद्द किया
सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि बैलेंस शीट में ऋण की प्रविष्टियां परिसीमन अधिनियम की धारा 18 के तहत सीमा अवधि का विस्तार करने के उद्देश्य से ऋण की पावती के समान हो सकती हैं।न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने वी पद्मकुमार बनाम स्ट्रेस्ड एसेट्स स्टेबलाइजेशन फंड के मामले में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल की पूर्ण पीठ के एक फैसले को रद्द कर दिया जिसने अलग विचार दिए थे।मुद्देअपील में सर्वोच्च न्यायालय की पीठ के समक्ष उठाया गया मुद्दा यह था कि क्या कॉरपोरेट देनदार की बैलेंस शीट में की गई...
18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों के लिए COVID-19 टीका लगे : वकील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की
COVID-19 महामारी की दूसरी लहर के मद्देनज़र, एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका ( पीआईएल) याचिका दायर की है जिसमें 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों के लिए COVID-19 के टीकाकरण की मांग की गई है।यह कहते हुए कि सभी युवा और कामकाजी आबादी का व्यापक टीकाकरण दूसरी लहर में कोरोनोवायरस के घातक उछाल को रोकने के लिए आवश्यक है, एडवोकेट रश्मि सिंह ने जनहित याचिका दायर की है।जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस आर सुभाष रेड्डी की पीठ सोमवार 19 अप्रैल को याचिका के मंजूर करने के लिए याचिका पर विचार करेगी।केंद्र...
'लॉ स्कूल में प्रवेश लेने से पहले ही भेदभाव शुरू हो जाता है'- जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा- लॉ एंट्रेंस एग्जाम केवल अंग्रेजी में ही क्यों होती है?
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने बुधवार को कहा कि,"लॉ स्कूल में प्रवेश लेने से पहले ही भेदभाव शुरू हो जाता है। अधिकांश शीर्ष लॉ स्कूल पांच साल के इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स के लिए एक प्रतियोगी परीक्षा का आयोजन करते हैं, इसी के आधार पर स्टूडेंट्स को लॉ स्कूल में प्रवेश मिलता है। हालांकि यह परीक्षा केवल अंग्रेजी होती है इसके अलावा अंग्रेजी भाषा का भी एक अलग से टेस्ट लिया जाता है।" जस्टिस चंद्रचूड़ ने आगे कहा कि,"इसका परिणाम यह होता है कि केवल उच्च-गुणवत्ता वाली अंग्रेजी...
"अनुच्छेद 224 ए एक वैधानिक प्रावधान है " : सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालयों में एडहॉक न्यायाधीशों की नियुक्ति की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भारत के संविधान के अनुच्छेद 224 ए का उपयोग करते हुए उच्च न्यायालयों में एडहॉक न्यायाधीशों की नियुक्ति की मांग वाली याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा।भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मामले को खत्म नहीं किया जाएगा और निर्देशों की प्रकृति में अंतरिम आदेश पारित किया जाएगा।पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति सूर्यकांत भी शामिल थे, उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए अनुच्छेद 224 ए के आह्वान की मांग...
प्रत्यक्ष भेदभाव अब अधिक प्रणालिगत हो गया है; जातिवादी, ताकतवर और पितृसत्तात्मक, लिंगवादी पदानुक्रम समाज में गहराई तक धंसी संरचनाएं हैंः जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने बुधवार को कहा, "यह दलील दी जा सकता है कि भारत के संविधान के 70 वर्षों बाद, जाति-आधारित भेदभाव अब मौजूद नहीं है क्योंकि अस्पृश्यता और अन्य जातिगत अत्याचारों को गैरकानूनी बना दिया गया है।हालांकि, अब अपरोक्ष भेदभाव अधिक प्रणालिगत हो गया है! जातिवादी, सक्षम और पितृसत्तात्मक, लिंगवादी पदानुक्रम हमारे समाज में गहराई तक धंसी संरचनाएं हैं।"जस्टिस चंद्रचूड़ CEDE नामक एक संगठन के वर्चुअल लॉन्च इवेंट में बोल रहे थे। यह संगठन वकीलों, कानूनी फर्मों, जजों और अन्य संगठनों और...
कई महिला वकीलों ने घरेलू जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए न्यायधीश बनने की पेशकश को अस्वीकार कर दिया: सीजेआई एसए बोबडे
भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने गुरुवार को कहा कि कई महिला वकीलों ने घरेलू जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए न्यायाधीशों की पेशकश को अस्वीकार कर दिया है।सीजेआई ने कहा,"हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों ने कहा है कि कई महिला अधिवक्ताओं को न्यायाधीशों के रूप में आमंत्रित किया गया, लेकिन उन्होंने 12 वीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों के बारे में घरेलू जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।"न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, जो भी पीठ का हिस्सा थे, ने कहा कि उन्होंने सीजेआई की टिप्पणियों...
"ये बहुत मुश्किल समय हैं " : जस्टिस शाह ने कहा कि उनका पूरा स्टॉफ कोरोना पॉज़िटिव, बेंच मे सुनवाई जारी रखी
जस्टिस एम आर शाह ने गुरुवार को घोषणा की कि उनका पूरे स्टाफ COVID- 19 टेस्ट में पॉज़िटिव आया है।जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस शाह की पीठ पश्चिम बंगाल हाउसिंग इंडस्ट्री रेगुलेशन एक्ट, 2017 (HIRA) की संवैधानिकता को केंद्रीय कानून- रेरा की पृष्ठभूमि के आधार पर चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।जब एएसजी ऐश्वर्या भाटी अपनी प्रस्तुतियां दें रही थीं, जस्टिस शाह ने सुनवाई 10-15 मिनट के लिए स्थगित करने की बात करते हुए कहा कि उन्हें सूचित किया गया है कि उनके पूरा स्टाफ COVID पॉज़िटिव आया...
6 महीने से अधिक समय से केंद्र के अधीन लंबित कॉलेजियम की सिफारिशें 3 महीने के भीतर तय हो जाएंगी, एजी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
सुप्रीम कोर्ट में भारत के अटॉर्नी जनरल ने बताया कि 6 महीने से मंत्रालय के पास लंबित सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा की गई सिफारिशों पर केंद्र 3 महीने के भीतर फैसला करेगा।एजी ने कहा कि इन लंबित नामों पर निर्णय लिया जाएगा और तीन महीने की अवधि के भीतर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को सूचित किया जाएगा।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सूर्यकांत की खंडपीठ ने एजी द्वारा दिए गए इस बयान को अपने आदेश में दर्ज किया।पिछली सुनवाई की तारीख, 25 मार्च को पीठ ने एजी से कहा था कि कॉलेजियम की...
नंबी नारायणन के खिलाफ इसरो जासूसी केस : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को डीके जैन आयोग की रिपोर्ट आगे की कार्यवाही के लिए सीबीआई को देने के निर्देश दिए
सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को तीन सदस्यीय समिति, जिसकी अध्यक्षता शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) डी के जैन ने की, की सिफारिश पर केंद्र को यह निर्देश दिया कि वह आगे की कार्रवाई के लिए सीबीआई को ये रिपोर्ट सौंपे।न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ केंद्र सरकार द्वारा जस्टिस जैन आयोग की रिपोर्ट पर आगे कार्यवाही के लिए दाखिल आवेदन पर विचार कर कर रही थी जिसमें 1994 में इसरो जासूसी मामले में केरल के पुलिस अफसरों की भूमिका की आगे जांच की सिफारिश की गई थी। इस मामले...
उच्च न्यायालयों से न्यायाधीशों की 220 रिक्तियों के लिए सिफारिशें प्राप्त नहीं हुई हैं : अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय को अभी भी उच्च न्यायालयों से न्यायाधीशों की 220 रिक्तियों के लिए सिफारिशें प्राप्त नहीं हुई हैं, भारत के अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है।देश भर के उच्च न्यायालयों में 1080 की स्वीकृत शक्ति में से 416 पद खाली हैं। 196 नामों की सिफारिशें केंद्र सरकार या सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के स्तर पर लंबित हैं।एजी ने न्यायिक रिक्तियों को भरने से संबंधित एक मामले में उच्चतम न्यायालय के समक्ष दायर एक बयान में यह जानकारी दी। 25 मार्च को, भारत के मुख्य...



















