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COVID-19 की दूसरी लहर के कारण सीमा अवधि विस्तार को बहाल करें : SCAoRA सुप्रीम कोर्ट पहुंची

LiveLaw News Network
17 April 2021 6:08 AM GMT
COVID-19 की दूसरी लहर के कारण सीमा अवधि विस्तार को बहाल करें : SCAoRA सुप्रीम कोर्ट पहुंची
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मुकदमों और वकीलों को COVID-19 की दूसरी लहर से उत्पन्न खतरे का हवाला देते हुए, सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन ने अदालतों और ट्रिब्यूनलों में केस दायर करने के लिए सीमा अवधि विस्तार की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

एसोसिएशन ने 23 मार्च, 2020 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित स्वत: संज्ञान आदेश की बहाली की मांग की है, जिसमें अगले आदेशों तक सीमा की अवधि 15 मार्च, 2020 से प्रभावी कर दी थी।

पिछले महीने, 8 मार्च 2021 को, सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान मामले को बंद करके 14.03.2021 से प्रभाव के साथ सीमा अवधि का विस्तार समाप्त कर दिया, यह देखते हुए कि COVID ​​-19 की स्थिति में सुधार हुआ है।

यह कहते हुए कि तब से COVID-19 की स्थिति में भारी बढ़ोतरी आई है, SCAoRA सीमा अवधि विस्तार को फिर से लागू कराना चाहता है।

आवेदन में कहा गया है,

"... उपरोक्त आदेश के पारित होने के बाद (8 मार्च को) कोविड मामलों के संबंध में देश भर की परिस्थितियों में काफी महत्वपूर्ण और अहम परिवर्तन हुआ है और इसने एक गंभीर मोड़ ले लिया है और इसका असर बड़े पैमाने पर आम जनता की आवाजाही भी हुआ है।"

पिछले साल 23 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने सभी अदालतों और ट्रिब्यूनलों में अपील दाखिल करने की सीमा अवधि 15 मार्च, 2020 से आगे के आदेशों तक लागू कर दी थी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस आदेश को COVID-19 महामारी द्वारा उत्पन्न कठिनाइयों पर ध्यान देते हुए पारित किया।

6 मई को, न्यायालय ने आदेश के आवेदन को मध्यस्थता अधिनियम के तहत और निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट अधिनियम की धारा 138 के तहत बढ़ा दिया।

बाद में, जुलाई 2020 में, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 29A और 23 (4) और वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम, 2015 की धारा 12A पर भी लागू होगा।

पीठ ने पिछले साल जुलाई में स्वत: संज्ञान कार्यवाही में एक आदेश पारित किया था जिसमें व्हाट्सएप और अन्य ऑनलाइन मैसेंजर सेवाओं के माध्यम से नोटिस की सेवा की अनुमति दी गई थी।

इस वर्ष 8 मार्च को सीमा अवधि के विस्तार को बढ़ाते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने कहा किसी भी सूट, अपील, आवेदन या कार्यवाही के लिए सीमा की अवधि की गणना करते हुए, 15.03.2020 से 14.03.2021 तक की अवधि को बाहर रखा जाएगा। इसके अलावा, 15.03.2020 से सीमा की शेष अवधि, यदि कोई हो, 15.03.2021 से प्रभावी हो जाएगी। ऐसे मामलों में जहां सीमा 15.03.2020 से 14.03.2021 के बीच की अवधि के दौरान समाप्त हो जानी थी, सीमा की वास्तविक शेष अवधि के बावजूद, सभी व्यक्तियों के पास 15.03.2021 से 90 दिनों की सीमा अवधि होगी। सीमा की स्थिति में, शेष अवधि 15.03.2021 से प्रभावी होगी, या 90 दिनों से अधिक है, तो जो लंबी अवधि है, वो लागू होगी।15.03.2020 से 14.03.2021 तक की अवधि, मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 के खंड 23 (4) और 29A , वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम, 2015 की धारा 12 और निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के प्रोविज़ो ( बी) और (सी) के तहत निर्धारित अवधि और किसी भी अन्य कानून, जो कार्यवाही, बाहरी सीमा (जिसमें अदालत या ट्रिब्यूनल देरी माफ कर सकते हैं) को विलंबित करने और कार्यवाही की समाप्ति के लिए सीमा की अवधि निर्धारित करते हैं, गणना में शामिल नहीं होगी।

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