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प्राधिकरणों को केंद्र की नीति का अनुसरण करना चाहिए कि कोविड वैक्सीनेशन के लिए आधार अनिवार्य नहीं है : सुप्रीम कोर्ट
प्राधिकरणों को केंद्र की नीति का अनुसरण करना चाहिए कि कोविड वैक्सीनेशन के लिए आधार अनिवार्य नहीं है : सुप्रीम कोर्ट

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्टीकरण दिया है कि आधार कार्ड न तो COWIN पोर्टल पर पंजीकरण के लिए अनिवार्य है और न ही किसी कोविड वैक्सीनेशन सेंटर में वैक्सीनेशन सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए पूर्व शर्त है, और नौ पहचान दस्तावेजों में से किसी एक को प्रस्तुत किया जा सकता है। केंद्र के इस स्पष्टीकरण को रिकॉर्ड करते हुए हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सभी संबंधित प्राधिकरण इस घोषित नीति के अनुसरण में कार्य करेंगे।जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्य कांत की पीठ सिद्धार्थशंकर शर्मा की उस रिट...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
उपभोक्ता शिकायतों को हाईकोर्ट में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट ने यस बैंक की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि उपभोक्ता शिकायतों को हाईकोर्ट में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है।न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम की खंडपीठ ने उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और नई दिल्ली में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोगों में दायर कुछ उपभोक्ता शिकायतों को ट्रांसफर करने के लिए यस बैंक द्वारा दायर स्थानांतरण याचिकाओं को खारिज किया।अदालत ने कहा,"उपभोक्ता शिकायतें उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत दायर की जाती हैं, इसलिए, ऐसी उपभोक्ता शिकायतों को भारत के संविधान के अनुच्छेद...

लोगों को परेशान न करें, हमारे आदेशों के प्रति सम्मान दिखाएं : सुप्रीम कोर्ट ने हिंसा पर पोस्ट के खिलाफ त्रिपुरा पुलिस को चेतावनी दी
"लोगों को परेशान न करें, हमारे आदेशों के प्रति सम्मान दिखाएं" : सुप्रीम कोर्ट ने हिंसा पर पोस्ट के खिलाफ त्रिपुरा पुलिस को चेतावनी दी

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पहले अंतरिम आदेश जारी करने के बावजूद सांप्रदायिक हिंसा के बारे में सोशल मीडिया पोस्ट करने पर एक्टिविस्टों को नोटिस भेजे जाने पर त्रिपुरा पुलिस को फटकार लगाई। अदालत ने चेतावनी दी कि अगर राज्य पुलिस हिंसा पर लोगों को उनके सोशल मीडिया पोस्ट पर परेशान करने से परहेज नहीं करती है, तो अदालत पुलिस अधीक्षक और यहां तक ​​कि राज्य के गृह सचिव सहित अन्य लोगों की व्यक्तिगत उपस्थिति का निर्देश देगी।जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ त्रिपुरा पुलिस द्वारा आपराधिक...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
डिक्री के अनुसरण में नीलामी खरीदारों को सरफेसी कानून के तहत गिरवी संपत्ति के लिए अधिमान्य अधिकार होगा या नहीं? सुप्रीम कोर्ट विचार करेगा

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इस बात पर विचार करने के लिए सहमति व्यक्त की है कि किसी डिक्री के अनुसरण में नीलामी खरीदारों को गिरवी संपत्ति के लिए अधिमान्य अधिकार होगा या नहीं।न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमण्यम की पीठ ने मद्रास हाईकोर्ट से 15 अप्रैल, 2021 के आदेश का विरोध करने वाली एसएलपी से निपटने के दौरान इस मुद्दे पर विचार करने पर सहमति व्यक्त की।याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के वी विश्वनाथन ने प्रस्तुत किया था कि एक डिक्री के अनुसरण में नीलामी खरीदार के पास गिरवी...

आईपीसी की धारा 302 : कौन सी परिस्थितियों से मौत का कारण बनने की मंशा निर्धारित की जा सकती है, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया
आईपीसी की धारा 302 : कौन सी परिस्थितियों से मौत का कारण बनने की मंशा निर्धारित की जा सकती है, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया

सुप्रीम कोर्ट ने हाल के एक फैसले में उन परिस्थितियों पर चर्चा की, जिनका उपयोग यह निष्कर्ष निकालने के लिए किया जा सकता है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या के मामले में मौत का इरादा था या नहीं। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना की एक खंडपीठ उत्तराखंड राज्य की उस अपील पर विचार कर रही थी, जिसमें हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें आईपीसी की धारा 302 के तहत अपराध के लिए आरोपी की दोषसिद्धि को खारिज कर दिया गया था और आरोपी को ट्रायल कोर्ट द्वारा आईपीसी की धारा 302 को दोषी...

समय से पहले सेवानिवृत्ति के आदेश के लिए पूरे सेवा रिकॉर्ड पर विचार किया जाएगा, यद्यपि हाल के एसीआर का भी वजूद होगा: सुप्रीम कोर्ट
समय से पहले सेवानिवृत्ति के आदेश के लिए पूरे सेवा रिकॉर्ड पर विचार किया जाएगा, यद्यपि हाल के एसीआर का भी वजूद होगा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि समय से पहले सेवानिवृत्ति का आदेश संपूर्ण सेवा रिकॉर्ड के आधार पर पारित करना आवश्यक है।न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम की पीठ ने आगे कहा कि हालिया रिपोर्टों में अपना वजूद होगा। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति के इस तरह के आदेश को कोर्ट द्वारा केवल इस कारण रद्द करने के लिए उत्तरदायी नहीं है कि बगैर पत्राचार वाली प्रतिकूल टिप्पणियों को ध्यान में रखा गया था।सीसीएस (पेंशन) नियम, 1972 के नियम 48(1)(बी) के साथ पठित मौलिक नियमों के...

COVID-19 मृत्यु मुआवजा: सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि केवल ऑफलाइन दायर करने पर दावों को खारिज न करें
COVID-19 मृत्यु मुआवजा: सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि केवल ऑफलाइन दायर करने पर दावों को खारिज न करें

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राज्य सरकारों को सभी आवेदनों को स्वीकार करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भले ही वे दावे ऑनलाइन दायर किए गए हों या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी आवेदन को इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि उन्हें ऑफ़लाइन दायर किया गया। कोर्ट ने राज्य सरकारों को ऑफलाइन दायर दावों को खारिज करने के फैसले की समीक्षा के लिए एक सप्ताह का समय दिया।सुप्रीम कोर्ट ने कहा,"सभी राज्यों को योग्यता के आधार पर आवेदन स्वीकार करना होगा। वह आदेवन ऑनलाइन किया गया हो...

अनुच्छेद 142 को लागू करते हुए आपसी सहमति पर विवाह को रद्द करने की याचिका को सुप्रीम कोर्ट के एकल न्यायाधीश ने बड़ी बेंच को भेजा
अनुच्छेद 142 को लागू करते हुए आपसी सहमति पर विवाह को रद्द करने की याचिका को सुप्रीम कोर्ट के एकल न्यायाधीश ने बड़ी बेंच को भेजा

यह मुद्दा कि क्या सुप्रीम कोर्ट का सिंगल जज संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत आपसी सहमति के आधार पर तलाक की डिक्री पारित करने के लिए शक्तियों का प्रयोग कर सकता है, एक बड़ी पीठ को भेजा गया है।एक फरवरी को जस्टिस कृष्ण मुरारी की सिंगल बेंच ने कहा कि इस मुद्दे को एक बड़ी पीठ के पास भेज दिया गया है।एक मार्च, 2021 को स्थानांतरण याचिका (सिविल) संख्या 908/2019 में जस्टिस अनिरुद्ध बोस द्वारा संदर्भ दिया गया था। जस्टिस बोस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट रूल्स 2013 के आदेश VI नियम (1) के अनुसार एकल पीठ द्वारा निपटाए...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
अदालत सजा के निलंबन की मांग के लिए दोषी पर समय आधारित प्रतिबंध नहीं लगा सकती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि सजा के निष्पादन के निलंबन की राहत और जमानत पर रिहा होना आरोपी का वैधानिक अधिकार है, उस पर न्यायिक आदेशों के जरिए समय विश‌िष्ट प्रतिबंध (time-specific debarment) नहीं लगाया जा सकता है।"... इस प्रकार का समय-विशिष्ट प्रतिबंध कानून द्वारा परिकल्पित नहीं हैं।"जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस विक्रमनाथ की खंडपीठ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के एक आदेश पर विचार कर रही थी, जिसने याचिकाकर्ता की उस प्रार्थना को खारिज कर दिया था जिसमें दिए गए समय पर सजा के निष्पादन को निलंबित...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
एनजीटी के न्यायिक कार्य 'विशेषज्ञ समितियों' को नहीं सौंपे जा सकते: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के न्यायिक कार्यों को प्रशासनिक विशेषज्ञ समितियों को नहीं सौंपा जा सकता है।ज‌स्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने कहा, "एक विशेषज्ञ समिति एनजीटी की सहायता करने में सक्षम हो सकती है, उदाहरण के लिए, फैक्ट फाइंडिंग एक्सरसाइज़ करके, लेकिन निर्णय एनजीटी को करना है। यह एक प्रत्यायोजित कार्य नहीं है।"अदालत ने कहा कि जब पर्यावरण के मुद्दों की बात आती है तो एनजीटी के पास 'विशेषज्ञता' की कमी नहीं है।जुलाई 2014 में, पर्यावरण...

NEET-UG : सुप्रीम कोर्ट ने काउंसलिंग में भाग लेने के लिए प्राइवेट स्टूडेंट्स के रूप में 12वीं पास करने वाले उम्मीदवारों की याचिका पर एनएमसी से जवाब मांगा
NEET-UG : सुप्रीम कोर्ट ने काउंसलिंग में भाग लेने के लिए प्राइवेट स्टूडेंट्स के रूप में 12वीं पास करने वाले उम्मीदवारों की याचिका पर एनएमसी से जवाब मांगा

NEET-UG उम्मीदवारों द्वारा दायर एक याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद से पूछा (" NMC") को अपना काउंटर एफिडेविट दाखिल करके स्थिति स्पष्ट करने को कहा कि क्या ऐसे छात्र काउंसलिंग में उपस्थित हो सकते हैं या नहीं। इन उम्मीदवारों ने 11वीं कक्षा की मार्कशीट जमा करने या अपलोड करने के लिए जोर दिए बिना आवंटित संस्थान के अनुसार एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश पाने के लिए प्रायवेट स्टूडेंट के रूप में 10+2 उत्तीर्ण किया था।जस्टिस एलएन राव और जस्टिस एएस ओका की बेंच ने एनएमसी को...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
सांसदों/विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामले : एमिकस क्यूरी ने ईडी, सीबीआई और एनआईए मामलों के लिए निगरानी समिति के गठन की मांग की

एमिकस क्यूरी ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि दो वर्षों में सांसदों/विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों की संख्या 4122 से बढ़कर 4984 हो गई है, जो दर्शाता है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले अधिक से अधिक व्यक्ति संसद और राज्य विधानसभाओं में सीटों पर कब्जा कर रहे हैं।वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसरिया, जिन्हें सांसद/विधायकों के खिलाफ मामलों के शीघ्र निपटान और विशेष अदालतों के गठन के मामले में अदालत की सहायता के लिए एमिकस क्यूरी के रूप में नियुक्त किया गया है, ने अदालत के समक्ष एक रिपोर्ट के माध्यम से...

तंजावुर में लड़की की आत्महत्या का मामाल: डीजीपी, तमिलनाडु ने मद्रास हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के निर्देश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
तंजावुर में लड़की की आत्महत्या का मामाल: डीजीपी, तमिलनाडु ने मद्रास हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के निर्देश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक ने मद्रास हाईकोर्ट (मदुरै बेंच) के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने तंजावुर में एक लड़की की आत्महत्या से संबंधित मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को स्थानांतरित कर दी है।हाईकोर्ट ने अपने 31 जनवरी के आदेश में स्थानीय पुलिस द्वारा उठाए गए रुख की आलोचनात्मक राय लेने के बाद सीबीआई जांच का आदेश दिया कि इस आरोप का कोई आधार नहीं कि ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के लिए मिशनरी द्वारा लकड़ी के साथ जबरन प्रयास करने के कारण उसने आत्महत्या की थी।जस्टिस...

किसी अवार्ड को स्पष्ट तौर पर अवैध कहा जा सकता है जहां मध्यस्थ ट्रिब्यूनल अनुबंध के संदर्भ में कार्य करने में विफल रहा है या अनुबंध की विशिष्ट शर्तों की अनदेखी की है: सुप्रीम कोर्ट
किसी अवार्ड को स्पष्ट तौर पर अवैध कहा जा सकता है जहां मध्यस्थ ट्रिब्यूनल अनुबंध के संदर्भ में कार्य करने में विफल रहा है या अनुबंध की विशिष्ट शर्तों की अनदेखी की है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (1 फरवरी 2022) को पारित एक फैसले में कहा कि मध्यस्थ की भूमिका अनुबंध की शर्तों के भीतर मध्यस्थता करने की है,न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति अभय एस ओक की पीठ ने कहा कि एक अवार्ड को स्पष्ट तौर पर अवैध कहा जा सकता है जहां मध्यस्थ ट्रिब्यूनल अनुबंध के संदर्भ में कार्य करने में विफल रहा है या अनुबंध की विशिष्ट शर्तों की अनदेखी की है।इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने मेसर्स श्री गणेश पेट्रोलियम राजगुरुनगर से 29 साल की अवधि के लिए पट्टे पर भूमि का एक भूखंड लिया।...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
लोक अदालत द्वारा पारित अवार्ड भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 28 ए के तहत मुआवजे के पुनर्निर्धारण का आधार नहीं हो सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 20 के तहत लोक अदालत द्वारा पारित अवार्ड भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 28 ए के तहत मुआवजे के पुनर्निर्धारण का आधार नहीं हो सकता है।न्यायमूर्ति केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने कहा , लोक अदालत द्वारा पारित किए गए अवार्ड को भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 के भाग III के तहत पारित एक अवार्ड नहीं कहा जा सकता है, जहां फैसले पर विचार किया जाता है।पृष्ठभूमिइस मामले में, नोएडा द्वारा नियोजित औद्योगिक विकास के लिए...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
"प्रथम दृष्टया टिकाऊ नहीं": सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से प्री-मैच्योर रिलीज के लिए 60 वर्ष की न्यूनतम आयु की नीति की फिर से जांच करने के लिए कहा

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा है कि वह प्री-मेच्योर रिलीज की अपनी नीति की फिर से जांच करे, जिसमें 60 साल की न्यूनतम उम्र निर्धारित की गई है।मौजूदा नीति के अनुसार, ऐसे दोषी "जिन्होंने 60 वर्ष की आयु पूरी कर ली है" और बिना किसी छूट के 20 साल की हिरासत में और छूट के साथ 25 साल की हिरासत में रह चुके हैं, वे समय से पहले रिहाई के लिए विचार करने के पात्र हैं।अदालत ने कहा कि यह नीति टिकाऊ नहीं लगती क्योंकि इसका तात्पर्य है कि 20 साल के युवा अपराधी को छूट के लिए अपने मामले को पेश करने से...