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तंजावुर में लड़की की आत्महत्या का मामाल: डीजीपी, तमिलनाडु ने मद्रास हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के निर्देश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

LiveLaw News Network
4 Feb 2022 6:00 AM GMT
तंजावुर में लड़की की आत्महत्या का मामाल: डीजीपी, तमिलनाडु ने मद्रास हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के निर्देश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
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तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक ने मद्रास हाईकोर्ट (मदुरै बेंच) के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने तंजावुर में एक लड़की की आत्महत्या से संबंधित मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को स्थानांतरित कर दी है।

हाईकोर्ट ने अपने 31 जनवरी के आदेश में स्थानीय पुलिस द्वारा उठाए गए रुख की आलोचनात्मक राय लेने के बाद सीबीआई जांच का आदेश दिया कि इस आरोप का कोई आधार नहीं कि ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के लिए मिशनरी द्वारा लकड़ी के साथ जबरन प्रयास करने के कारण उसने आत्महत्या की थी।

जस्टिस जीआर स्वामीनाथन की एकल पीठ द्वारा पारित आदेश पर रोक लगाने की मांग करते हुए डीजीपी ने तर्क दिया कि राज्य पुलिस से जांच को स्थानांतरित करने के लिए कोई परिस्थिति नहीं है।

विशेष अनुमति याचिका में डीजीपी ने राज्य पुलिस जांच के खिलाफ हाईकोर्ट द्वारा की गई कुछ प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने की भी मांग की।

राज्य सरकार ने 21, 22, 24 जनवरी, 2022 के आदेशों सहित सभी अंतरिम आदेशों को इस आधार पर चुनौती दी कि उन्होंने जांच में हस्तक्षेप किया।

22 जनवरी को अपने आदेश में हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को उन परिस्थितियों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा जिनके कारण लड़की ने आत्महत्या की और जिला कलेक्टर को मृत बच्ची के मूल स्थान पर शव को स्थानांतरित करने के लिए आवश्यक व्यवस्था करने का निर्देश दिया। अदालत ने पुलिस को यह भी सख्त आदेश दिया कि वह बच्ची का वीडियो बनाने वाले व्यक्ति को परेशान न करे।

हाईकोर्ट ने 24 जनवरी को वायरल वीडियो के फोरेंसिक विश्लेषण का आदेश दिया। इसमें मृतक ने कथित तौर पर स्कूल के अधिकारियों द्वारा उसे ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के जबरन प्रयासों के बारे में बात की थी।

सेक्रेड हार्ट हायर सेकेंडरी स्कूल माइकलपट्टी की 12वीं कक्षा की छात्रा की 19 जनवरी को आत्महत्या में मौत हो गई थी। उसकी मृत्यु के बाद मुथुवेल नाम के एक तीसरे पक्ष द्वारा रिकॉर्ड की गई उसकी कुछ वीडियो क्लिप सोशल मीडिया में सामने आईं। उक्त वीडियो में लड़की ने कथित तौर पर जबरन धर्मांतरण के प्रयासों के बारे में बयान दिया है।

मद्रास हाईकोर्ट ने 31 जनवरी, 2022 के अपने आदेश में तमिलनाडु पुलिस द्वारा उसके स्कूल से ईसाई धर्म में धर्म परिवर्तन के कथित प्रयासों के कोण को खारिज करने के लिए की गई जांच की कड़ी आलोचना की थी।

हाईकोर्ट ने तंजावुर के पुलिस अधीक्षक की आलोचना की कि उन्होंने एक प्रारंभिक चरण में धर्मांतरण के कोण को रद्द करने के लिए मीडिया में बयान दिया।

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि राज्य के शिक्षा मंत्री और दो अन्य उच्च रैंकिंग मंत्रियों ने स्कूल प्रबंधन को दोषमुक्त करने के लिए सार्वजनिक बयान जारी किए। शिक्षा विभाग ने स्कूल को खाली करने की रिपोर्ट भी जारी की।

इस पृष्ठभूमि में न्यायालय ने कहा:

"पुलिस या राजनेताओं का निष्कर्ष पर पहुंचना बहुत जल्दी है। लेकिन उन्होंने ऐसा किया है। इसलिए, याचिकाकर्ता आशंकित है कि अगर जांच राज्य पुलिस के पास रहती है तो उसे न्याय नहीं मिलेगा। उसकी आशंका न्यायोचित है।"

हाईकोर्ट ने आगे कहा,

"बच्ची के आत्महत्या करने के कारण की जांच की जानी चाहिए। जांच अधिकारी के सामने बच्चे की मृत्यु से पहले के बयान उपलब्ध है। उनकी प्रामाणिकता निस्संदेह है। ऐसा किए बिना जिला पुलिस अधीक्षक धर्मांतरण कोण को पूरी तरह खारिज करना चाहते हैं। उपरोक्त परिस्थितियों को वास्तविक अर्थ में लिए जाने पर यह तथ्य सामने आएगा कि जांच सही तर्ज पर आगे नहीं बढ़ रही है। चूंकि एक उच्च पदस्थ माननीय मंत्री ने खुद एक स्टैंड लिया है, इसलिए राज्य पुलिस के साथ जांच जारी नहीं रह सकती।"

अदालत ने कहा कि एक "प्रति-कथा" बनाई जा रही है कि लड़की के साथ उसके पिता और सौतेली मां द्वारा घर पर बुरा व्यवहार किया गया। इसके अलावा, सत्तारूढ़ दल के आईटी विंग ने उक्त परिवार के निजी जीवन के वीडियो के कुछ हिस्सों को जारी किया, जो स्कूल अधिकारियों को दोषमुक्त करते प्रतीत होते हैं। यह फिर से राज्य पुलिस द्वारा की गई जांच की विश्वसनीयता और निष्पक्षता के बारे में काफी संदेह पैदा करता है।

मृतक, थिरुकट्टुपल्ली के थूया इरुधाया हायर सेकेंडरी स्कूल में 12वीं कक्षा का छात्रा स्कूल के हॉस्टल में ही रह रही थी। कथित तौर पर उसने नौ जनवरी को छात्रावास परिसर के अंदर जहर (कीटनाशक) का सेवन किया। पुलिस ने 16 जनवरी को उसका बयान लिया। इसके आधार पर हॉस्टल वार्डन पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 305, 511 और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75 और 82 (1) के तहत अपराध के लिए मामला दर्ज किया गया। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि स्कूल प्रबंधन ने उसे ईसाई धर्म में परिवर्तित नहीं होने के लिए प्रताड़ित किया।

अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि कुछ निहित स्वार्थों द्वारा मामले का राजनीतिकरण और सांप्रदायिकरण किया जा रहा। साथ ही कहा कि जांच सही रास्ते पर चल रही है। कोर्ट को बताया गया कि वीडियो लेने वाला मुथुवेल जांच में सहयोग नहीं कर रहा।

इस मामले में हस्तक्षेप करने वाले स्कूल प्रबंधन ने "द रोमन कैथोलिक कॉन्ग्रिगेशन ऑफ द ऑर्डर ऑफ इमैक्युलेट हार्ट ऑफ मैरी, पांडिचेरी" द्वारा गठित द इमैक्युलेट हार्ट ऑफ मैरी सोसाइटी ने धर्मांतरण के आरोपों को खारिज कर दिया। प्रबंधन ने कहा कि उसके अधिकांश छात्र हिंदू हैं और स्कूल के खिलाफ धर्मांतरण की कोई शिकायत नहीं मिली है। प्रबंधन ने आरोप लगाया कि असली दोषियों को बचाने के लिए "धर्मांतरण का दलदल" उछाला गया और कहा कि लड़की अपने घर में समस्याओं का सामना कर रही थी।

केस शीर्षक: पुलिस महानिदेशक बनाम मुरुगनाथम | डायरी संख्या 3688/2022

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