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'अदालत द्वारा निर्दिष्ट तारीख पर मामले को सूचीबद्ध नहीं करने पर रजिस्ट्री के खिलाफ अवमानना याचिका दायर नहीं की जा सकती': सुप्रीम कोर्ट ने वकील की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड द्वारा सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल और रजिस्ट्रार न्यायिक प्रशासन के खिलाफ दायर अवमानना याचिका खारिज कर दिया, क्योंकि कोर्ट के निर्देश के बावजूद कथित तौर पर मामले को सूचीबद्ध नहीं किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की और इसे 'धौंस जमाने की रणनीति' और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया।जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए इस प्रथा को बहुत गलत प्रवृत्ति बताया और शुरुआत में...
यहां तक कि जम्मू- कश्मीर संविधान सभा भंग होने के बाद भी अनुच्छेद 370 लागू रहेगा : सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा [ दिन 7]
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के समक्ष अनुच्छेद 370 की सुनवाई के सातवें दिन, सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे, शेखर नाफड़े और दिनेश द्विवेदी ने सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकान्त की पीठ के समक्ष अपनी दलीलें रखीं।सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ और सीनियर एडवोकेट दवे के बीच कार्यवाही के दौरान इस बात पर चर्चा हुई कि क्या अनुच्छेद 370(3) का अस्तित्व समाप्त हो गया है या नहीं। दवे द्वारा उठाया गया तर्क यह था कि अनुच्छेद 370(3) का अस्तित्व समाप्त हो...
सुप्रीम कोर्ट ने एमपी हाईकोर्ट से जज पद के उस उम्मीदवार के मामले को फिर से देखने को कहा, जिसका चयन कुत्ते के काटने के 'झूठे' मामले में रद्द कर दिया गया
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से उस न्यायिक अभ्यर्थी के मामले पर फिर से विचार करने को कहा, जिसका नाम "झूठी" आपराधिक शिकायत के कारण मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा परीक्षा, 2019 (परीक्षा) की मेरिट सूची से हटा दिया गया। याचिकाकर्ता ने कहा कि हाईकोर्ट ने उसे आपराधिक मामले से बरी करने पर विचार नहीं किया।जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की खंडपीठ ने अपने आदेश में प्रथम दृष्टया टिप्पणी की कि इस मामले पर प्रशासनिक पक्ष से हाईकोर्ट द्वारा फिर से विचार करने की आवश्यकता है।वर्तमान...
बिलकिस बानो केस | गुजरात सरकार ने कहा, दोषी सुधार के मौके के हकदार तो सुप्रीम कोर्ट ने पूछा ' सजा में छूट की नीति चुनिंदा क्यों लागू की गई ? '
बिलकिस बानो के बलात्कारियों को मिली सजा में छूट के खिलाफ चुनौती पर गुरुवार की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि समयपूर्व रिहाई की नीति चुनिंदा तरीके से क्यों लागू की जा रही है। यह सवाल गुजरात सरकार की उस दलील के जवाब में था जिसमें कहा गया था कि जघन्य अपराधों के दोषी कैदियों को समय से पहले जेल से रिहा कर, पछतावा दिखाने पर और सजा पूरी करने के बाद सुधार का मौका दिया जाए।जस्टिस बीवी नागरत्ना ने पूछा, “छूट की नीति को चयनात्मक रूप से क्यों लागू किया जा रहा है और यह कानून जेल में कैदियों पर...
नूंह हिंसा : दिल्ली हाईकोर्ट वुमन लॉयर फोरम ने सीजेआई को पत्र लिखकर कुछ समुदायों के 'आर्थिक बहिष्कार' का आह्वान करने वाले वीडियो के खिलाफ कार्रवाई की मांग की
दिल्ली हाईकोर्ट वुमन लॉयर फोरम ने गुरुवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को एक पत्र याचिका भेजी, जिसमें हरियाणा में नूंह हिंसा के बाद कुछ समुदायों के आर्थिक बहिष्कार का आह्वान करने वाले सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। कुल 101 महिला वकीलों द्वारा हस्ताक्षरित पत्र याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि वह हरियाणा सरकार को नफरत भरे भाषण की घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाने, कानून के अनुसार ऐसे भाषण के वीडियो पर प्रतिबंध लगाने और इसके लिए...
आदेश XXI के नियम 95 सीपीसी के तहत परिसीमा अवधि क्या होगी ? सुप्रीम कोर्ट ने मामला बड़ी बेंच में भेजा, 1996 की मिसाल पर संदेह जताया
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कानून के एक प्रासंगिक प्रश्न को बड़ी पीठ के पास पुनर्विचार के लिए भेजा है। अदालत सीपीसी, 1908 के आदेश XXI के नियम 95 के तहत एक आवेदन दायर करने के लिए परिसीमा के शुरुआती बिंदु को निर्धारित करने के सवाल से जूझ रही है। ये प्रावधान उस स्थिति से संबंधित हैं जहां अदालत द्वारा पारित डिक्री को पूरा करने के लिए किसी व्यक्ति की संपत्ति सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से बेची जाती है ।वर्तमान मामले भास्कर एवं अन्य बनाम अयोध्या ज्वैलर्स में न्यायालय ने पट्टम खादर खान बनाम पट्टम...
RERA: सुप्रीम कोर्ट ने उन राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों से जवाब मांगा, जिन्होंने अब तक रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण, अपीलीय न्यायाधिकरण की स्थापना नहीं की
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 के तहत नियामक प्राधिकरणों के साथ-साथ अपीलीय न्यायाधिकरण स्थापित करने में विफलता के संबंध में मेघालय और सिक्किम की राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख प्रशासन के मुख्य सचिवों से जवाब मांगा था। रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण स्थापित नहीं करने के लिए अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और पश्चिम बंगाल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर से भी प्रतिक्रिया मांगी गई है। इन राज्यों ने रेरा के तहत नियमों को अधिसूचित...
पार्टिशन समझौते या मौखिक समझौते के तहत भी हो सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पार्टिशन समझौते या मौखिक समझौते के तहत भी किया जा सकता है।जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस एसवी भट्टी की खंडपीठ ने कहा कि कानून की आवश्यकता का अनुपालन करते हुए लिखित दस्तावेज के अलावा किसी अन्य तरीके से विभाजन करने पर कोई रोक नहीं है।इस मामले में वादी महिला ने यह घोषणा करने के लिए मुकदमा दायर किया कि वह हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की संशोधित धारा 29 ए द्वारा सहदायिक है। उसने वादी अनुसूची में एक तिहाई के पार्टिशन और अलग कब्जे के लिए भी प्रार्थना की।ट्रायल कोर्ट ने मुकदमा...
सुप्रीम कोर्ट ने अनिवार्य प्री-लिटिगेशन मीडिएशन की मांग करने वाली जनहित याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (14 अगस्त) को उस जनहित याचिका (पीआईएल) खारिज कर दी, जिसमें वाणिज्यिक मामलों, विभाजन मुकदमों, परिवीक्षा याचिकाओं जैसे कुछ मामलों में अनिवार्य प्री-लिटिगेशन मीडिएशन के लिए निर्देश देने की मांग की गई।जनहित याचिका में प्री-लिटिगेशन मीडिएशन को प्रभावी बनाने के लिए दिशानिर्देश या मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की भी मांग की गई। न्यायालय ने पाया कि कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के तहत मुकदमे-पूर्व सुलह और निपटान के प्रावधान पहले से ही मौजूद हैं। वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम...
सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल लापरवाही मामले में शीर्ष हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ उपेंद्र कौल के खिलाफ एनसीडीआरसी की प्रतिकूल टिप्पणियां रद्द कीं
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (16 अगस्त) को एक मरीज के संबंध में शीर्ष हृदय रोग विशेषज्ञ और पद्मश्री पुरस्कार विजेता डॉ उपेंद्र कौल के खिलाफ राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) द्वारा की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को रद्द कर दिया। मरीज की एम्स में एंजियोप्लास्टी प्रक्रिया के बाद दिल का दौरा पड़ने के बाद मृत्यु हो गई थी । मामला 1994 की एक घटना से जुड़ा है।जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ एनसीडीआरसी के फैसले के खिलाफ एक अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसने राज्य आयोग के...
अनुच्छेद 370 केस | विशेष प्रावधान जम्मू-कश्मीर के लिए अनूठा नहीं, कई दूसरे राज्यों के पास ये है : सीनियर एडवोकेट राजीव धवन
भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 को कमजोर करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं के समूह पर सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत की सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ को संबोधित करते हुए सीनियर एडवोकेट डॉ. राजीव धवन ने कहा, "राज्यों की स्वायत्तता हमारे संविधान के लिए मौलिक है।"इन सुनवाई के छठे दिन की शुरुआत करते हुए, सीनियर एडवोकेट धवन ने भारतीय संविधान की विविधता को उजागर करने के लिए भारतीय संविधान के विभिन्न प्रावधानों के माध्यम से...
महाराष्ट्र सहकारी सोसायटी अधिनियम सीआरपीसी के तहत पुलिस जांच की शक्ति को कम नहीं करता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने एक अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि सीआरपीसी के तहत पुलिस के पास एक स्वतंत्र शक्ति और यहां तक कि कर्तव्य भी है कि वह किसी अपराध की जांच तब कर सकती है जब किसी अपराध के घटित होने का संकेत देने वाली जानकारी उनके ध्यान में आ जाए। यह शक्ति 1960 अधिनियम (महाराष्ट्र सहकारी सोसायटी अधिनियम) के प्रावधानों द्वारा कम नहीं की गई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश धनंजय वाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा पीठ में शामिल थे।संक्षिप्त पृष्ठभूमिमहाराष्ट्र...
केंद्र ने अदालतों, अवमानना मामलों में सरकारी अधिकारियों की उपस्थिति के संबंध में एसओपी तैयार की, कहा- 'इसका मकसद सरकार और न्यायपालिका के बीच अधिक अनुकूल माहौल बनाना'
केंद्र सरकार ने खुद से जुड़े मुकदमे में अदालतों के समक्ष सरकारी अधिकारियों की उपस्थिति के संबंध में एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का मसौदा पेश किया है। एसओपी में सुझाव दिया गया है कि अदालतों में सरकारी अधिकारियों की उपस्थिति केवल 'असाधारण मामलों' में ही आवश्यक होनी चाहिए, न कि नियमित अभ्यास के रूप में। केंद्र ने अपने एसओपी में कहा है कि अगर अधिकारियों को अदालतों द्वारा तलब किया जाता है, तो अग्रिम सूचना दी जानी चाहिए, जिससे उनकी उपस्थिति के लिए पर्याप्त समय मिल सके। साथ ही अधिकारी को पहला...
'नहीं मतलब नहीं; महिलाओं के कपड़े निमंत्रण का संकेत नहीं देते': सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार की रूढ़ियों को दूर करने के लिए हैंडबुक जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 'हैंडबुक ऑन कॉम्बैटिंग जेंडर स्टीरियोटाइप्स' जारी किया है। कानूनी चर्चा में प्रयुक्त लिंग संबंधी अनुचित शब्दों की इस कानूनी शब्दावली की योजना पर कई वर्षों से काम हो रहा है, हालांकि इस साल की शुरुआत में महिला दिवस समारोह में पहली बार इसकी घोषणा की गई। कलकत्ता हाईकोर्ट की जज मौसमी भट्टाचार्य की अध्यक्षता वाली एक समिति द्वारा तैयार की गई यह पुस्तिका न केवल लैंगिक रूढ़िवादिता को बढ़ावा देने वाली भाषा की पहचान करती है और उपयुक्त विकल्प पेश करती है, बल्कि लैंगिक...
अदालत की भाषा में 'गृहिणी', 'व्यभिचारिणी', 'छेड़छाड़' जैसे कोई और शब्द नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने 'लैंगिक रूप से अनुचित शब्दों के लिए विकल्प दिए
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में जारी 'हैंडबुक ऑन कॉम्बैटिंग जेंडर स्टीरियोटाइप्स' में पूर्वाग्रही शब्दों की एक सूची की पहचान की है जो विशेष रूप से महिलाओं के बारे में हानिकारक लैंगिक रूढ़िवादिता को बढ़ावा देते हैं। कुछ मामलों में अदालत ने उन पुरानी धारणाओं के कारण ऐसे शब्दों के इस्तेमाल के खिलाफ सलाह दी है जिनका वे प्रतिनिधित्व करते हैं और अन्य में वैकल्पिक शब्दों या वाक्यांशों का सुझाव दिया गया, जिनका उपयोग वकीलों द्वारा दलीलों का मसौदा तैयार करते समय और न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों द्वारा...
सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन में चुनाव सुधार पर सुझाव मांगे
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (14 अगस्त) को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के अध्यक्ष और सीनियर एडवोकेट आदीश सी अग्रवाल सहित सदस्यों को एससीबीए की चुनाव प्रक्रिया में और सुधारों के संबंध में सुझाव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड प्रवीर चौधरी के माध्यम से बार एसोसिएशन के एक सदस्य की ओर से दायर आवेदन पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मतदाता पात्रता निर्धारित करने के लिए मानदंडों में छूट की मांग की गई थी। एससीबीए के पूर्व अध्यक्ष विकास...
'सीनियर डेजिग्नेशन दिए जाने में उदारता बरती जाए': एससीबीए प्रेसिडेंट ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के प्रेसिडेंट, सीनियर एडवोकेट डॉ. आदिश सी अग्रवाल ने बुधवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) को लिखे पत्र में सुप्रीम कोर्ट से चयन के आगामी दौर में आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के लिए सीनियर एडवोकेट उपाधि प्रदान करने के अपने दृष्टिकोण में "उदार" होने का आग्रह किया, क्योंकि यह पिछले 8 वर्षों में होने वाली केवल दूसरी चयन प्रक्रिया है।यह इंगित करते हुए कि सीनियर एडवोकेट के लिए आगामी चयन 4 साल के अंतराल के बाद हो रहा है, एससीबीए ने सुप्रीम कोर्ट से 'मेधावी और योग्य...
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय और राज्य जांच एजेंसियों की निगरानी के लिए आंतरिक सुरक्षा परिषद की स्थापना की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस जनहित याचिका (पीआईएल) को खारिज कर दिया, जिसमें देश में तस्करी, अंतरराज्यीय तस्करी, साइबर अपराध और बड़े पैमाने पर राजनीतिक हिंसा जैसे संगठित अपराध से निपटने के लिए राष्ट्रीय आंतरिक सुरक्षा परिषद की स्थापना की मांग की गई।जनहित याचिका में सभी राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय जांच एजेंसियों को ऐसे निकाय के नियंत्रण में लाने की भी मांग की गई। सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका इस आधार पर खारिज कर दी कि मांगी गई राहत नीति की प्रकृति और विधायिका के क्षेत्र में है। इसलिए इसके लिए अदालत...
'कार्यकाल वाले पद और कार्यकाल आधार पर की गई नियमित नियुक्ति के बीच अंतर' : सुप्रीम कोर्ट ने लेक्चरर को वेतन संरक्षण का लाभ देने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कश्मीर विश्वविद्यालय के तहत आने वाले इस्लामिया कॉलेज ऑफ साइंस एंड कॉमर्स, श्रीनगर को एक लेक्चरर को वेतन संरक्षण का लाभ देने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच का यह मानना गलत है कि उनकी नियुक्ति एक अल्पकालिक रिक्ति के विरुद्ध की गई थी न कि किसी वास्तविक पद के विरुद्ध।उक्त मामले में अपीलकर्ता ने विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित एक विज्ञापन के आधार पर कश्मीर विश्वविद्यालय के अकादमिक स्टाफ कॉलेज (छठे प्रतिवादी) में...
गलत जाति प्रमाण पत्र के आधार पर आरक्षित पदों पर नौकरी पाने वालों को बर्खास्त किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दोहराया कि झूठे जाति प्रमाण पत्र के माध्यम से सार्वजनिक रोजगार हासिल करने वाले व्यक्तियों को कोई संरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए।न्यायालय ने उड़ीसा हाईकोर्टके उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें सार्वजनिक प्राधिकारी को एक कर्मचारी को बहाल करने पर विचार करने का निर्देश दिया गया था, जो गलत प्रमाण पत्र के आधार पर आरक्षित पद पर रोजगार प्राप्त करने के लिए दोषी पाया गया था।(भुवनेश्वर विकास प्राधिकरण बनाम मधुमिता दास और अन्य) न्यायालय ने कहा कि यह मायने नहीं रखता कि जाति...


![यहां तक कि जम्मू- कश्मीर संविधान सभा भंग होने के बाद भी अनुच्छेद 370 लागू रहेगा : सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा [ दिन 7] यहां तक कि जम्मू- कश्मीर संविधान सभा भंग होने के बाद भी अनुच्छेद 370 लागू रहेगा : सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा [ दिन 7]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2023/08/18/500x300_487241-justicebrgavaijusticeskkaulcjidychandrachud.jpg)













