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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, डीएसपीई एक्ट की धारा 6ए को रद्द करने वाले 2014 के फैसले का पूर्वव्यापी प्रभाव
सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान पीठ ने सोमवार को घोषणा की कि उनका 2014 का एक फैसला, जिसके तहत दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 की धारा 6ए को असंवैधानिक घोषित किया गया था, पूर्वव्यापी रूप से प्रभावी होगा। इसका मतलब यह है कि धारा 6ए को, उस तारीख से लागू नहीं माना जाएगा, जिस तारीख को इसे शामिल किया गया था।डीपीएसई अधिनियम की धारा 6ए में तय किया गया है कि सीबीआई को संयुक्त सचिव और उससे ऊपर के स्तर के अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने के लिए पूर्व अनुमति लेनी चाहिए। सुब्रमण्यम...
सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों द्वारा एजीआर बकाया भुगतान में ढील देने के केंद्र के फैसले को बरकरार रखा; कहा- आदेशों को संशोधित करने के लिए आवेदन दाखिल करना अधिक उचित था
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उस जनहित याचिका (पीआईएल) को खारिज कर दिया, जिसमें टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स के कारण समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) के भुगतान की शर्तों में ढील देने के सितंबर 2021 के कैबिनेट फैसले को चुनौती दी गई थी।जनहित याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 01.09.2020 के फैसले को लागू करने की भी मांग की गई। इस फैसले में कहा गया था कि जो टेलीकॉम कंपनियां एजीआर बकाया का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी हैं, उन्हें 31 मार्च, 2021 तक बकाया राशि का 10% भुगतान करना होगा। केंद्र द्वारा अपने कैबिनेट निर्णय...
प्रत्येक सीनियर वकील को अपने चैंबर में हाशिए पर रहने वाले समुदाय से कम से कम एक सदस्य की भर्ती कर उसका मार्गदर्शन करना चाहिए: जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने हाशिये पर पड़े समुदायों को आगे बढ़ाने के लिए कानूनी बिरादरी द्वारा आवश्यक प्रयासों के बारे में बात करते हुए सुझाव दिया कि प्रत्येक सीनियर वकील को अपने चैंबर में हाशिए पर रहने वाले समुदाय से कम से कम एक सदस्य को भर्ती करना चाहिए और उसका मार्गदर्शन करना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह कहते हुए चेतावनी दी कि इस तरह के मार्गदर्शन के साथ कुछ धैर्य और गरिमा की आवश्यकता होती है; अन्यथा, इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।उन्होंने आगे कहा कि इसे प्रतीकात्मकता की तरह...
रिटन वर्ज़न दाखिल न करने के बावजूद पार्टी को एनसीडीआरसी के समक्ष अंतिम दलील देने का अधिकार : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की एक खंडपीठ ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को बरकरार रखते हुए राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, नई दिल्ली (एनसीडीआरसी) के फैसले को रद्द कर दिया। न्यायालय ने कहा कि यद्यपि विपरीत पक्ष ने अपना लिखित संस्करण (Written Version) दाखिल नहीं किया है और एनसीडीआरसी के समक्ष कार्यवाही में भाग नहीं लिया है, फिर भी उसे एनसीडीआरसी के समक्ष अंतिम दलील देने का अधिकार है। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने पाया कि शिकायतकर्ता के मामले पर उसकी योग्यता के आधार पर विचार...
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (4 सितंबर 2023 से 8 सितंबर 2023 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।बीएसएफ एक्ट | भले ही अधिकारी कदाचार का दोषी मानता हो, अदालत को संतुष्ट होना होगा कि स्वीकारोक्ति स्वैच्छिक है: सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट ने सीमा सुरक्षा बल के एक कांस्टेबल (प्रतिवादी) के खिलाफ नहाते समय एक महिला डॉक्टर की तस्वीरें खींचने के आरोपों से जुड़े मामले में दोषी याचिका के आधार पर सजा पर...
फैक्ट चेक: क्या सुप्रीम कोर्ट ने सच में वकीलों को अपने चैंबर में शादियां कराने की इजाजत दी है?
हाल ही में कई वायरल खबरों में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए वकीलों को हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत अपने चैंबर में विवाह कराने की अनुमति दी है, जिसमें ऐसे विवाहों को अमान्य माना गया था।हालांकि, ऐसे दावे के विपरीत सुप्रीम कोर्ट ने वास्तव में अपने हालिया फैसले में कहा है कि लायर्स को काउंसल या एडवोकेट के रूप में कार्य करते समय विवाह संपन्न कराने का दायित्व नहीं लेना चाहिए। शीर्ष अदालत ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि दोस्त या रिश्तेदार के रूप में उनकी निजी...
नौकरी के लिए अनुपयुक्त पाए जाने वाले कर्मचारी को प्रोबेशन अवधि के दौरान बिना सूचना के बर्खास्त किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सरल सेवा समाप्ति (simpliciter termination) और सज़ा के रूप में सेवा समाप्ति (punitive termination) के बीच अंतर को दोहराया। यह अंतर महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि समाप्ति का आदेश दंडात्मक प्रकृति का है तो प्रक्रिया का पालन करते हुए जांच करना अनिवार्य हो जाता है और सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए। ऐसा करने में विफल रहने पर ऐसी सेवा समाप्ति को अवैध और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन माना जा सकता है। न्यायालय ने पंजाब राज्य बनाम बलबीर सिंह , (2004) पर भरोसा किया, जिसमें...
'राज्य ने आरोपियों की मदद की, निष्पक्ष रूप से मुकदमा चलाने में विफल': सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को 1995 के दोहरे हत्याकांड में पीड़ितों को मुआवजा देने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते पूर्व सांसद और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता प्रभुनाथ सिंह को 1995 के दोहरे हत्याकांड मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सजा सुनाते हुए शीर्ष अदालत ने घटना में दोनों मृतकों को 10-10 लाख रुपए और घायलों के लिए 5-5 लाख रुपये बिहार सरकार और दोषी को अलग-अलग देने का निर्देश दिया। अदालत ने सिंह को आईपीसी की धारा 307 के तहत हत्या के प्रयास के अपराध में सात साल कैद की सजा भी सुनाई। जस्टिस संजय किशन कौल , जस्टिस अभय एस. ओक और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने सजा सुनाते हुए...
बीएसएफ एक्ट | भले ही अधिकारी कदाचार का दोषी मानता हो, अदालत को संतुष्ट होना होगा कि स्वीकारोक्ति स्वैच्छिक है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सीमा सुरक्षा बल के एक कांस्टेबल (प्रतिवादी) के खिलाफ नहाते समय एक महिला डॉक्टर की तस्वीरें खींचने के आरोपों से जुड़े मामले में दोषी याचिका के आधार पर सजा पर गंभीर संदेह जताया है। कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण कारकों पर प्रकाश डाला, जिन्होंने स्वीकारोक्ति की विश्वसनीयता के बारे में चिंताएं पैदा कीं, जिनमें एक चश्मदीद गवाह की अनुपस्थिति, किसी अन्य व्यक्ति के घर से कैमरे की बरामदगी और गवाहों के बयानों में विसंगतियां शामिल हैं।अदालत ने सवाल किया कि जब प्रतिवादी के खिलाफ न्यूनतम सबूत थे...
ओल्ड गोवा हेरिटेज जोन: ढांचे गिराने का हाईकोर्ट का आदेश रद्द करने के बजाय मामले को एएसआई को सौंप देना चाहिए- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सेव ओल्ड गोवा एक्शन कमेटी द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका पर नोटिस जारी किया। इसमें बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश की आलोचना की गई है। अपने विवादित आदेश से हाईकोर्ट (गोवा बेंच) ने प्राकृतिक न्याय सिद्धांतों के उल्लंघन का हवाला देते हुए पुराने गोवा शहर में यूनेस्को विरासत क्षेत्र में आवासीय घर को ध्वस्त करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा पारित आदेश को रद्द कर दिया था।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ ने नोटिस जारी करते हुए...
ईवीएम से छेड़छाड़ संभव नहीं, 100% वीवीपैट सत्यापन की मांग 'प्रतिगामी': चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) का बचाव किया है। आयोग ने ईवीएम को 'छेड़छाड़ रहित' बताया है।हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में आयोग ने कहा है-“इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में तकनीकी उपायों के कारण और ईसीआई की ओर से निर्धारित सख्त प्रशासनिक और सुरक्षा प्रक्रियाओं के कारण छेड़छाड़ संभव नहीं हैं...। इसलिए, ये किसी भी छेड़छाड़ या हेरफेर से सुरक्षित हैं..।चुनाव आयोग ने हलफनामे में ईवीएम डेटा के पूर्ण सत्यापन वीवीपीएटी रिकॉर्ड के जरिए करने का विरोध किया...
सुप्रीम कोर्ट ने 12 साल से जेल में बंद व्यक्ति को यह पता चलने के बाद रिहा किया कि अपराध के समय वह किशोर था
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति को रिहा करने का निर्देश दिया, जो 12 साल की कैद काट चुका था। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश यह पता चलने के बाद दिया कि वह अपराध के समय किशोर था और दोहराया कि किशोर न्याय अधिनियम, 2000 के तहत अधिकतम सजा 3 साल है।याचिकाकर्ता ने अपने किशोर होने के दावे के वैरिफिकेशन की मांग करते हुए संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत एक रिट याचिका दायर करते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने तदनुसार अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश से रिपोर्ट मांगी थी, जिन्होंने पुष्टि की थी कि...
निवारक हिरासत कानून असाधारण उपाय, जब साधारण आपराधिक कानून के तहत उपचार उपलब्ध हों तो इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि प्रिवेंटिव डिटेंशन लॉ यानि निवारक हिरासत कानून'आपातकालीन स्थितियों से निपटने के आरक्षित एक असाधारण उपाय' है और इसे 'कानून और व्यवस्था' लागू करने के लिए एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने भारत के संविधान के तहत लोगों को दी गई स्वतंत्रता की गारंटी पर विचार किए बिना, बिना सोचे-समझे निवारक हिरासत के आदेश पारित करने की तेलंगाना राज्य में बढ़ती प्रवृत्ति की कड़ी निंदा की।इस संदर्भ में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता की खंडपीठ ने...
'एक राष्ट्र, एक चुनाव' से लोकतांत्रिक जवाबदेही कम होगी: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने हाल ही लाइवलॉ के साथ "एक राष्ट्र, एक चुनाव" की अवधारणा पर बातचीत की। उन्होंने कहा, लोकसभा, विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के लिए एक साथ चुनाव कराने से लोकतांत्रिक जवाबदेही कमजोर हो सकती है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव की व्यवहार्यता की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।कुरैशी ने कहा कि विशुद्ध रूप से प्रशासनिक सुविधा के नजरिए से देखा जाए तो यह विचार ठीक है; हालांकि, लोकतंत्र के लिए इसके गंभीर निहितार्थ हैं। उन्होंने...
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम | स्व-रोज़गार के माध्यम से आजीविका कमाने के उद्देश्य से व्यावसायिक वस्तुओं की खरीदारी करने वाला 'उपभोक्ता' की श्रेणी में : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि कोई व्यक्ति पुनर्विक्रय के लिए या बड़े पैमाने पर लाभ कमाने वाली गतिविधि में उपयोग के लिए सामान खरीदता है, तो वह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के संरक्षण का हकदार 'उपभोक्ता' नहीं होगा। हालांकि, यदि क्रेताओं द्वारा स्व-रोज़गार के माध्यम से अपनी आजीविका कमाने के उद्देश्य से व्यावसायिक उपयोग होता है तो वस्तुओं के ऐसे क्रेता 'उपभोक्ता' बने रहेंगे।अधिनियम के तहत अभिव्यक्ति "व्यावसायिक उद्देश्य" की व्याख्या करते हुए, जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस अरविंद कुमार की...
विेधायिका सीधे किसी फैसले को पलट नहीं सकती, लेकिन अदालती आदेश के आधार में बदलाव के लिए कानून बना सकती है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया, जैसा कि एक संवैधानिक अदालत ने न्यायिक समीक्षा की अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए बताया है, विधायिका के द्वारा पहले के कानून में किसी दोष को दूर करना स्वीकार्य है, अदालत ने कहा कि दोष को विधायी प्रक्रिया द्वारा भविष्य में संभावित (prospectively) या अतीत में बीत चुकी चीजों का फिर से अवलोकन कर के (retrospectively) दूर किया जा सकता है और इनसे पिछले कार्यों को भी मान्यता दी जा सकती है. जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा,“हालांकि, जहां एक...
किसी महिला के लिए जो क्रूरता है, वह किसी पुरुष के लिए क्रूरता शायद न हो, जब पत्नी तलाक चाहती है तो अधिक व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (06.09.2023) को एक अलग रह रही पत्नी द्वारा तलाक की मांग को लेकर दायर याचिका को अनुमति देते हुए कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम अधिनियम की धारा 13(1)(ia) के तहत 'क्रूरता' शब्द अदालतों को इसे उदारतापूर्वक और प्रासंगिक रूप से लागू करने के लिए व्यापक विवेक देता है। न्यायालय ने क्रूरता के अर्थ की व्याख्या करते हुए कहा कि जो एक व्यक्ति के लिए क्रूरता है, वह दूसरे के लिए क्रूरता नहीं हो सकती और इसका अर्थ इसके संदर्भ में सुनिश्चित किया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा, ''इसे मौजूद...
चेक बाउंस मामले को धारा 482 के तहत केवल तभी रद्द किया जा सकता है, जब राशि पूरी तरह से वसूली योग्य ना हो; कर्ज टाइम बार्ड है या नहीं, यह साक्ष्य का प्रश्न: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह सवाल कि क्या क्या चेक को टाइम बार्ड डेट (ऋण) के लिए जारी किया गया, का निर्धारण साक्ष्य के आधार पर किया जाना चाहिए।जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा,"यह केवल उन मामलों में है, जहां वह राशि, जिसके लिए चेक जारी किया गया है और वह बाउंस हो गया है और वह राशि बिल्कुल भी वसूली योग्य नहीं है, और उसकी वसूली के लिए आपराधिक कार्रवाई शुरू की गई है, सीमा क्षेत्राधिकार (threshold jurisdiction) का सवाल उठेगा।ऐसे मामलों में, सीआरपीसी की धारा 482 के तहत...
हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट के किसी फैसले का पालन करने से इस आधार पर इनकार नहीं कर सकते कि उस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार लंबित है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट इस आधार पर उसके किसी बाध्यकारी फैसले का पालन करने से इनकार नहीं कर सकते कि उस फैसले को या तो बड़ी बेंच को भेजा गया है, या उसके खिलाफ पुनर्विचार लंबित है।इसमें कहा गया,“हम अपने सामने हाईकोर्ट के निर्णयों और आदेशों को देख रहे हैं, जो इस आधार पर मामलों का निर्णय नहीं कर रहे हैं कि इस विषय पर इस न्यायालय का प्रमुख निर्णय या तो बड़ी बेंच को भेजा गया है, या उससे संबंधित पुनर्विचार याचिका लंबित है। हमने ऐसे उदाहरण भी देखे हैं कि हाईकोर्ट ने इस न्यायालय के...
सरकारी सेवकों का 'ग्रहणाधिकार' तभी समाप्त होता है, जब उन्हें किसी अन्य पद पर 'मौलिक' रूप से नियुक्त किया जाता है/पुष्ट किया जाता है या स्थायी रूप से शामिल किया जाता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी का 'ग्रहणाधिकार' (Lien) केवल तभी समाप्त होता है, जब उसे किसी अन्य पद पर 'मौलिक रूप से' नियुक्त किया जाता है/पुष्टि की जाती है या स्थायी रूप से शाामिल किया जाता है, अन्यथा, उनका ग्रहणाधिकार पिछले पद पर जारी रहेगा। जस्टिस जेके माहेश्वरी और केवी विश्वनाथन की पीठ मामले पर सुनवाई कर रही थी।मामले में दायर अपील में उठाए गए सवाल इस प्रकार थे-(1) क्या कर्नाटक सिविल सेवा नियमों के नियम 252 (बी) के अनुसार गुलबर्गा यूनिवर्सिटी की ओर से...















