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रेलवे यात्रा बीमा सिर्फ़ ऑनलाइन टिकट तक सीमित नहीं हो सकता, यह काउंटर टिकट वाले यात्रियों के लिए भी उपलब्ध होना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो यात्री रेलवे टिकट काउंटर से खरीदते हैं, उन्हें यात्रा बीमा का फ़ायदा देने से मना नहीं किया जा सकता, जबकि यही सुविधा उन लोगों के लिए उपलब्ध है जो टिकट ऑनलाइन बुक करते हैं।जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि जो यात्री रेलवे टिकट ऑनलाइन बुक करते हैं, वे बहुत कम अतिरिक्त कीमत पर बीमा का विकल्प चुन सकते हैं, जबकि यही विकल्प अभी उन यात्रियों के लिए उपलब्ध नहीं है जो रेलवे काउंटर पर जाकर टिकट खरीदते हैं।एमिक्स क्यूरी (अदालत के सलाहकार) सीनियर...
सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे द्वारा सुरक्षा पर किए गए निवेश को ठीक से न समझाने पर कड़ी नाराज़गी ज़ाहिर की
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में रेलवे सुरक्षा और नीतिगत प्राथमिकताओं से जुड़े एक मामले में रेलवे द्वारा कोर्ट की मदद करने के तरीके पर कड़ी नाराज़गी ज़ाहिर की। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर रखे गए दस्तावेज़ों में यह साफ़ तौर पर नहीं बताया गया कि फंड का बंटवारा और इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है।इससे पहले, कोर्ट ने रेलवे के लिए बजट में अपर्याप्त आवंटन का मुद्दा उठाया था और सुरक्षा उपायों के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी थी।इसके बाद रेलवे सुरक्षा के मुख्य आयुक्त, जनक कुमार गर्ग, जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह...
YS Vivekananda Reddy Murder | सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों की जमानत को चुनौती देने और CBI जांच की मांग वाली याचिकाएं खारिज कीं
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सांसद वाई एस विवेकानंद रेड्डी की बेटी डॉ. सुनीता नर्रेड्डी द्वारा दायर याचिकाओं के एक समूह को खारिज किया। इन याचिकाओं में उन्होंने अपने पिता की हत्या की CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) से आगे की जांच कराने का निर्देश देने और YSR कांग्रेस पार्टी के सांसद वाईएस अविनाश रेड्डी को दी गई अग्रिम जमानत, साथ ही अन्य आरोपियों को मिली जमानत को चुनौती दी थी।जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने इन याचिकाओं को तब खारिज कर दिया, जब CBI ने यह बताया कि मंगलवार को एक पूरक...
हिंदी-भाषी क्षेत्रों से बाहर नवोदय स्कूलों में क्षेत्रीय भाषा या अंग्रेज़ी का इस्तेमाल: तमिलनाडु के विरोध पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हिंदी न बोलने वाले क्षेत्रों में जवाहर नवोदय विद्यालयों (JNV) में पढ़ाई का माध्यम मुख्य रूप से क्षेत्रीय भाषा या अंग्रेज़ी होता है। यह जवाब तमिलनाडु की उन चिंताओं के संदर्भ में दिया गया, जिनमें कहा गया कि यह योजना उसकी वैधानिक 'दो-भाषा नीति' के अनुरूप नहीं है।नवोदय स्कूलों में अपनाए जाने वाले भाषा पैटर्न को स्पष्ट करते हुए केंद्र सरकार ने कहा कि हिंदी न बोलने वाले क्षेत्रों में कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाई का माध्यम क्षेत्रीय भाषा या अंग्रेज़ी होता है। उच्च...
ज़िला जजों की नियुक्तियां: 'रेजनिस बनाम दीपा' फ़ैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बहाली और सीनियरिटी के लिए निर्देश जारी किए
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ज़िला जजों की नियुक्ति और सीनियरिटी के संबंध में कई निर्देश जारी किए। ये निर्देश पिछले साल के संविधान पीठ के फ़ैसले 'रेजनिस केवी बनाम के दीपा' के आधार पर दिए गए, जिसमें यह तय किया गया कि जिन सिविल जजों के पास बार (वकालत) में सात साल का अनुभव है, वे ज़िला जज के तौर पर सीधी भर्ती के लिए योग्य हैं।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की तीन-जजों की पीठ ने ये निर्देश जारी किए।कुछ सिविल जज, जिन्हें सीधे ज़िला जज के तौर पर भर्ती...
बहुत ज़्यादा जोश में की गई जांच अभियोजन पक्ष के लिए घातक, जनता की सोच पर बना केस अक्सर गड़बड़ हो जाता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि बहुत ज़्यादा जोश में की गई जांच अभियोजन पक्ष के लिए उतनी ही नुकसानदायक हो सकती है, जितनी कि सुस्त जांच। कोर्ट ने कहा कि जनता की सोच और जांच अधिकारियों की अपनी पसंद-नापसंद पर बने केस अक्सर ढह जाते हैं, जिससे बेकसूर लोगों के फँसने का खतरा रहता है, जबकि असली अपराधी बच निकलता है।कोर्ट ने यह टिप्पणी एक ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें घर में आग लगने से एक दंपति की दर्दनाक मौत हो गई। इस मामले में उनके बेटे और बहू पर हत्या का आरोप लगाया गया, जिसका मुख्य आधार कथित...
रिश्वतखोरी के दोषी सरकारी कर्मचारी को सिर्फ इसलिए बरी नहीं किया जा सकता कि सह-आरोपी को साज़िश साबित न होने पर बरी किया गया: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जो सरकारी कर्मचारी खुद रिश्वत मांगता है और स्वीकार करता है, उसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (PC Act) के तहत दोषी ठहराया जा सकता है, भले ही आपराधिक साज़िश का आरोप साबित न हो और सह-आरोपी बरी हो जाए।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने एक इनकम टैक्स इंस्पेक्टर की रिहाई का आदेश रद्द किया। राजस्थान हाईकोर्ट ने उसे सिर्फ इसलिए बरी किया, क्योंकि सह-आरोपी बरी हो गया और IPC की धारा 120B के तहत साज़िश के आरोप हटा दिए गए।कोर्ट ने कहा कि भले ही साज़िश...
दलित युवती की मौत पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, CBI को प्रारंभिक जांच का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश की 20 वर्षीय दलित युवती की संदिग्ध मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से प्रारंभिक जांच कराने का आदेश दिया। युवती ने कथित तौर पर पूर्व गृह मंत्री के करीबी सहयोगी द्वारा छेड़छाड़ की शिकायत की थी। अदालत ने कहा कि यदि जांच में प्रथम दृष्टया मामला बनता है तो CBI, FIR दर्ज कर आगे की जांच करेगी।जस्टिस एम. एम. सुंदरश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह आदेश युवती की मां द्वारा दायर याचिका पर दिया। अदालत ने कहा कि मामले में कई आरोप और प्रत्यारोप लगाए गए हैं तथा...
साक्ष्य अधिनियम की धारा 65 के सर्टिफिकेट के बिना कॉल डिटेल रिकॉर्ड मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक मामले में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को बरी किया। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) को सबूत के तौर पर तब तक नहीं माना जा सकता, जब तक उनके साथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 65-B के तहत अनिवार्य सर्टिफिकेट न हो।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा,"...साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-B [BSA की धारा 63] के तहत सर्टिफिकेट को अभियोजन पक्ष साबित नहीं कर पाया। साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-B [BSA की धारा 63]...
5 साल की बच्ची से दुष्कर्म-हत्या मामले में दोषी की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में 5 वर्ष की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए अतुल निहाले की फांसी की सजा पर फिलहाल रोक लगाई। अदालत ने मामले की पूरी सुनवाई के लिए रिकॉर्ड तलब करते हुए कई अतिरिक्त रिपोर्टें भी मांगी।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने यह आदेश उस अपील पर दिया, जिसमें दोषी ने मध्य प्रदेश हाइकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। हाइकोर्ट ने स्पेशल कोर्ट द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा बरकरार रखते हुए कहा था कि इस...
सिर्फ ₹1 मुआवज़े पर संपत्ति अधिग्रहण मनमाना: सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक लाइब्रेरी अधिग्रहण वाला बिहार कानून रद्द किया
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (10 मार्च) को बिहार के उस कानून को रद्द कर दिया, जिसके तहत राज्य सरकार को एक ऐतिहासिक पुस्तकालय को केवल एक रुपये के प्रतीकात्मक मुआवज़े पर अपने नियंत्रण में लेने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने कहा कि ऐसा प्रावधान “जब्ती जैसा (confiscatory)” है और संविधान की कसौटी पर खरा नहीं उतरता।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 300A के तहत राज्य कानून के आधार पर संपत्ति से वंचित कर सकता है, लेकिन ऐसा कानून न्यायसंगत, निष्पक्ष और तर्कसंगत...
NCERT चैप्टर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 'शरारती तत्वों' के खिलाफ कार्रवाई के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कक्षा 8 की एनसीईआरटी सामाजिक विज्ञान की किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' वाले अध्याय को लेकर सोशल मीडिया पर की गई गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियों पर कड़ी नाराज़गी जताई।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह उन वेबसाइट्स और उनके संचालकों की पहचान करे, जिन्होंने इस विवाद से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री प्रकाशित की है, ताकि उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके।चीफ़ जस्टिस ने आदेश देते हुए कहा,“कुछ...
परिवार ने कभी साथ नहीं छोड़ा: सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा के माता-पिता की सराहना की, कहा- सच्चा प्रेम सबसे कठिन समय में साथ निभाना
सुप्रीम कोर्ट ने देश के पहले निष्क्रिय इच्छामृत्यु मामले में 13 वर्षों से स्थायी वनस्पति अवस्था में पड़े हरीश राणा के जीवनरक्षक उपचार हटाने की अनुमति देते हुए उनके माता-पिता और परिवार की संवेदनशीलता व समर्पण की सराहना की। अदालत ने कहा कि सच्चा प्रेम वही है जो जीवन के सबसे कठिन और दुखद समय में भी साथ निभाए।जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने हरीश राणा के जीवनरक्षक उपचार हटाने की अनुमति दी। हरीश वर्ष 2012 में एक इमारत से गिरने के बाद गंभीर मस्तिष्क चोट का शिकार हो गए और...
सरकारी आंकड़ों में COVID वैक्सीन के बाद कुछ मौतों का जिक्र; राज्य जिम्मेदारी से नहीं बच सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब कोई टीकाकरण कार्यक्रम राज्य द्वारा संचालित सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल के रूप में चलाया जाता है, तो सरकार उन परिवारों के प्रति अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती जो टीकाकरण के बाद मौत या गंभीर दुष्प्रभावों का आरोप लगाते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि सरकारी आंकड़े स्वयं यह स्वीकार करते हैं कि कोविड-19 टीकाकरण के बाद कुछ मौतें हुई हैं, इसलिए प्रभावित परिवारों को बिना किसी राहत व्यवस्था के नहीं छोड़ा जा सकता।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा कि संविधान के...
जवाहर नवोदय विद्यालय योजना दो-भाषा नीति के खिलाफ: तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) योजना राज्य की दो-भाषा नीति के साथ असंगत है, इसलिए इसे वर्तमान स्वरूप में राज्य में लागू नहीं किया जा सकता।राज्य सरकार ने अदालत में दायर अपने हलफनामे में कहा कि नवोदय विद्यालय योजना तीन-भाषा फार्मूले पर आधारित है, जबकि तमिलनाडु में दो-भाषा नीति लागू है। इस कारण यदि JNV योजना को वर्तमान रूप में लागू किया जाता है तो तमिलनाडु तमिल लर्निंग एक्ट, 2006 के प्रावधानों से विचलन होगा, जो कानूनन स्वीकार्य नहीं है।राज्य का पक्षहलफनामे...
NCERT किताब विवाद: न्यायिक भ्रष्टाचार अध्याय पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, जुड़े लोगों को परियोजनाओं से बाहर किया
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कक्षा 8 की एनसीईआरटी सामाजिक विज्ञान की किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' से जुड़े अध्याय को फिर से लिखे जाने पर गहरी नाराज़गी जताई। अदालत ने कहा कि वह इस बात से “व्यथित” (disturbed) है कि उसके कड़े आपत्ति जताने के बाद भी एनसीईआरटी ने इस अध्याय को संशोधित रूप में दोबारा पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला किया।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टीस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने यह भी कहा कि बिना विशेषज्ञ समिति की मंजूरी के पुनर्लिखित अध्याय प्रकाशित...
सदस्यों का अलग-अलग राज्यों में होना काफी नहीं, उद्देश्य से तय होगी मल्टी-स्टेट सहकारी संस्था की पहचान: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि किसी सहकारी समिति का मल्टी-स्टेट स्वरूप केवल इस आधार पर तय नहीं किया जा सकता कि उसके सदस्य अलग-अलग राज्यों में रहते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह दर्जा समिति के उद्देश्यों से तय होगा, न कि केवल सदस्यों के भौगोलिक फैलाव से।जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने उत्तराखंड हाइकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें एक राज्य की सहकारी समिति को सिर्फ इसलिए मल्टी-स्टेट सहकारी समिति माना गया था क्योंकि उसके सदस्य दो राज्यों में फैले हुए...
13 साल से कोमा में पड़े युवक को सम्मानजनक मृत्यु की अनुमति: सुप्रीम कोर्ट ने जीवनरक्षक उपचार हटाने की दी इजाजत
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पहली बार निष्क्रिय इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति दी। अदालत ने 13 वर्षों से स्थायी वनस्पति अवस्था में पड़े 32 वर्षीय युवक के जीवनरक्षक उपचार हटाने की इजाजत दी।जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने यह आदेश युवक के पिता की उस याचिका पर दिया, जिसमें उन्होंने अपने बेटे के सभी जीवनरक्षक उपचार बंद करने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने कहा कि गरिमा के साथ मृत्यु भी व्यक्ति का मौलिक अधिकार है।अदालत ने अपने आदेश में...
NCLAT का आदेश सिर्फ इसलिए अमान्य नहीं कि बेंच में तकनीकी सदस्यों की संख्या ज़्यादा है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के किसी आदेश को सिर्फ इसलिए गैर-कानूनी नहीं माना जा सकता कि मामले का फैसला करने वाली बेंच में तकनीकी सदस्यों की संख्या ज़्यादा थी। कोर्ट ने साफ किया कि ट्रिब्यूनल सिस्टम को नियंत्रित करने वाला मौजूदा कानूनी ढांचा यह ज़रूरी नहीं बनाता कि NCLAT बेंचों में न्यायिक सदस्यों की संख्या तकनीकी सदस्यों से ज़्यादा हो।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने यह टिप्पणी तब की, जब उन्होंने भारती टेलीकॉम लिमिटेड द्वारा शुरू...
जेल की कोठरी में दिन में 21 घंटे बंद रखे जाने पर सवाल: सुप्रीम कोर्ट ने UAPA के तहत विचाराधीन कैदी की याचिका की खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने UAPA के आरोपी विजित विजयन द्वारा दायर याचिका खारिज की। इस याचिका में विजयन ने केरल की हाई-सिक्योरिटी जेल की कोठरी में कथित तौर पर दिन में 21 घंटे बंद रखे जाने का विरोध किया था।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच विजयन की उस चुनौती पर सुनवाई कर रही थी, जो उसने केरल हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर की थी। हाईकोर्ट ने स्पेशल कोर्ट के उस निर्देश पर 2 महीने की रोक लगाई, जिसमें कहा गया कि कैदियों को कोठरियों में सिर्फ शाम के समय ही बंद किया जाए (जब तक कि कोई खास वजह न हो)।...




















