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'कौशल वाले खेलों पर सट्टेबाजी के लिए कोई संवैधानिक सुरक्षा नहीं': सुप्रीम कोर्ट ने दांव वाले ऑनलाइन गेम्स पर रोक वाले कानूनों को सही ठहराया
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में तमिलनाडु और कर्नाटक के उन कानूनों की संवैधानिक वैधता को सही ठहराया, जो खेलों पर ऑनलाइन सट्टेबाजी और दांव लगाने पर रोक लगाते हैं। कोर्ट ने कहा कि राज्य की विधायिकाएं सट्टेबाजी पर कानून बनाने में सक्षम हैं, भले ही वह खेल कौशल पर आधारित हो।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने फैसला सुनाया कि राज्यों के पास संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची II की प्रविष्टि 34 के तहत कौशल वाले खेलों पर सट्टेबाजी को विनियमित करने और उस पर रोक लगाने की शक्ति है। यह प्रविष्टि...
जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं तो नागरिक असहाय हो जाता है: सुप्रीम कोर्ट ने वसूली मामले में तीन पुलिसकर्मियों की अग्रिम जमानत रद्द की
सुप्रीम कोर्ट ने कथित तौर पर एक जौहरी से जबरन वसूली के मामले में आरोपित तीन पुलिसकर्मियों को मिली अग्रिम जमानत रद्द की। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि जब कानून लागू करने वाले ही वसूली करने लगें तो नागरिकों के सामने गहरा संकट खड़ा हो जाता है।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने कहा,"जब कानून के रक्षक ही वसूली करने वाले बन जाएं, तब नागरिक संदेह और असमंजस में पड़ जाता है। विरोध करने पर तत्काल प्रतिशोध का खतरा होता है और उसके पास वर्दीधारी सत्ता के सामने चुपचाप झुक...
अरावली पहाड़ियों की परिभाषा का फिर से होगा आकलन: सुप्रीम कोर्ट ने गठित की उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की परिभाषा और सीमांकन से जुड़े मुद्दों की व्यापक समीक्षा करने के लिए पांच सदस्यों वाली उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया। कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि दूरगामी पर्यावरणीय परिणामों वाले निर्णय विशेषज्ञों के मूल्यांकन के बिना नहीं लिए जाने चाहिए।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI), जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की परिभाषा से संबंधित स्वतः संज्ञान (suo motu) कार्यवाही में यह आदेश पारित किया।...
जितना ज़्यादा जज अदालतों के जवाबदेही लागू करने के कर्तव्य को समझेंगे, हमारा देश उतना ही बेहतर होगा: सीनियर एडवोकेट एस. मुरलीधर
सीनियर एडवोकेट और ओडिशा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस डॉ. एस. मुरलीधर ने कहा कि न्यायपालिका की जवाबदेही लागू करने की प्रतिबद्धता जितनी मज़बूत होगी, देश के लिए उतना ही बेहतर होगा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि संवैधानिक अदालतें यह सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाती हैं कि सत्ता में बैठे लोग नागरिकों द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब दें।2 जून को बेंगलुरु में एक किताब लॉन्च कार्यक्रम में बोलते हुए मुरलीधर ने कहा कि लोकतांत्रिक जवाबदेही न्यायपालिका की संस्थागत जवाबदेही पर बहुत ज़्यादा निर्भर करती...
जब देश पर ड्रग्स के व्यापार से खतरा हो तो व्यक्तिगत आज़ादी से ऊपर देश की संप्रभुता होती है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हेरोइन की तस्करी के एक मामले में आरोपी को दी गई रेगुलर ज़मानत रद्द की। कोर्ट ने कहा कि देश की संप्रभुता निजी आज़ादी से ऊपर होनी चाहिए, खासकर उन मामलों में जिनमें ड्रग्स की सप्लाई शामिल हो, क्योंकि इससे लोगों की सेहत और देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ता है।कोर्ट ने कहा,"अगर देश की संप्रभुता और निजी आज़ादी के बीच कोई टकराव होता है तो बिना किसी शक के, देश की संप्रभुता ही ऊपर मानी जाएगी। खासकर तब, जब देश के खिलाफ कोई जंग छेड़ी गई हो - चाहे वह ड्रग्स की सप्लाई के रूप...
शादी के बाद बेटी अपने मायके से रिश्ते नहीं तोड़ती, ऐसी लैंगिक रूढ़िवादिता संविधान के खिलाफ है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मानना कि शादीशुदा बेटी अपने माता-पिता के परिवार की सदस्य नहीं रहती, लैंगिक रूढ़िवादिता पर आधारित है और समानता के संवैधानिक सिद्धांत के अनुसार इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।यह टिप्पणी जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने एक ऐसे मामले में की, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादीशुदा बेटी को उसकी माँ की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति देने से यह कहते हुए मना कर दिया था कि उत्तर प्रदेश सरकार के 2019 के एक आदेश के अनुसार, 'शादीशुदा बेटी' को परिवार की परिभाषा से...
Prevention Of Corruption Act | अधीनस्थों के लिए रिश्वत मांगने वाला सरकारी कर्मचारी भी दोषी माना जाएगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention Of Corruption Act) की धारा 7 के तहत दोषी ठहराए जाने के लिए किसी सरकारी कर्मचारी का रिश्वत की मांग करना या उसे खुद स्वीकार करना ज़रूरी नहीं है। यह मानते हुए कि यह प्रावधान तीसरे पक्षों के माध्यम से और किसी अन्य व्यक्ति के लाभ के लिए अनुचित लाभ प्राप्त करने के प्रयासों को भी शामिल करता है, कोर्ट ने कर्नाटक पुलिस के सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ भ्रष्टाचार की FIR को बहाल किया। इस सब-इंस्पेक्टर पर अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से...
शादीशुदा बेटी को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित करना असंवैधानिक: सुप्रीम कोर्ट ने पलटा इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला
देश की सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि केवल विवाह हो जाने के आधार पर किसी बेटी को अनुकंपा नियुक्ति या उससे जुड़े लाभों से बाहर नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उन फैसलों को निरस्त कर दिया, जिनमें विवाहित बेटियों को परिवार की परिभाषा से बाहर मानते हुए अनुकंपा नियुक्ति का लाभ देने से इनकार किया गया था।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि वैवाहिक स्थिति किसी पात्र बेटी को कल्याणकारी योजना से वंचित...
कोऑर्डिनेट बेंच दूसरी बेंच द्वारा दी गई ज़मानत रद्द कर सकती है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि हाईकोर्ट की एक कोऑर्डिनेट बेंच, किसी आरोपी को दूसरी बेंच द्वारा दी गई ज़मानत रद्द कर सकती है, अगर वह ज़मानत गलत तथ्य पेश करके हासिल की गई हो।इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट आरोपी सूरज महानंदा की ज़मानत अर्जी पर सुनवाई कर रहा था। सूरज पर नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेस एक्ट, 1985 (NDPS Act) की धारा 21(c) (निर्मित दवाओं और तैयारियों के संबंध में उल्लंघन के लिए सज़ा) और 29 (दुष्प्रेरण और आपराधिक साज़िश के लिए सज़ा) के तहत आरोप लगाए गए हैं। आरोपी ने...
S.138 NI Act | चेक बाउंस मामले में मिली सज़ा पक्षकारों के बीच समझौते के आधार पर रद्द की जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NI Act) की धारा 147 (अपराधों का समझौता योग्य होना) के तहत अपराधों के कंपाउंडिंग (समझौते) की अनुमति दी, जब पार्टियों के बीच एक समझौता हो गया। इसके परिणामस्वरूप, कोर्ट ने NI Act की धारा 138 के तहत चेक बाउंस होने (खाते में पर्याप्त पैसे न होने के कारण) के अपराध के लिए दी गई सज़ा और दोषसिद्धि रद्द की।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच ने यह आदेश दिया। उन्होंने अपने पहले के फैसले 'ज्ञान चंद गर्ग बनाम हरपाल सिंह (2025)' पर...
एडवोकेट वी. मोहना ने रचा इतिहास: पांच साल बाद सुप्रीम कोर्ट को मिली नई महिला जज
देश की सुप्रीम कोर्ट को करीब पांच वर्ष बाद एक नई महिला जज मिली। सीनियर एडवोकेट वी. मोहना के सुप्रीम कोर्ट में जज के रूप में नियुक्त होने के साथ में सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों की संख्या बढ़कर दो हो गई। अब जस्टिस बी.वी. नागरत्ना के साथ जस्टिस वी. मोहना भी सुप्रीम कोर्ट की पीठ का हिस्सा होंगी।सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 27 मई को चार हाइकोर्टों के चीफ जस्टिस और सीनियर एडवोकेट वी. मोहना के नाम सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार को भेजे थे। केंद्र ने 31 मई को इन सिफारिशों को मंजूरी दी,...
सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी: FIR रद्द करते समय अपराध और आरोपों का उल्लेख करें हाईकोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सभी हाईकोर्टों को सलाह दी कि FIR रद्द करने से जुड़े मामलों में आदेश पारित करते समय FIR की सामग्री और उसमें लगाए गए आरोपों की प्रकृति का संक्षिप्त उल्लेख अवश्य किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इससे यह समझने में सुविधा होगी कि हाईकोर्ट ने मामले पर उचित ढंग से विचार किया है या नहीं।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की खंडपीठ ने कहा कि FIR को शब्दशः आदेश में शामिल करना आवश्यक नहीं है लेकिन इतना जरूर होना चाहिए कि आरोपों की प्रकृति और मामले का सार स्पष्ट...
सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायाधीशों ने ली शपथ, महिला प्रतिनिधित्व भी बढ़ा
सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को पांच नए न्यायाधीशों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने जस्टिस शील नागू, श्री चंद्रशेखर, संजीव सचदेवा, अरुण पल्ली और सीनियर एडवोकेट वी. मोहना को शपथ दिलाई।नवनियुक्त जजों में चार विभिन्न हाईकोर्टों के चीफ़ जस्टिस रहे हैं। जस्टिस शील नागू पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, जस्टिस श्री चंद्रशेखर बॉम्बे हाईकोर्ट, जस्टिस संजीव सचदेवा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट तथा जस्टिस अरुण पल्ली जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस के रूप में कार्यरत थे।सीनियर एडवोकेट...
Hindu Succession Act | बिना वसीयत उत्तराधिकार के बाद कोई भी सह-उत्तराधिकारी 'कर्ता' के तौर पर काम करते हुए दूसरों के हिस्से नहीं बेच सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (1 जून) को यह फैसला सुनाया कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 (Hindu Succession Act) के तहत बिना वसीयत वाली संपत्ति का उत्तराधिकार पाने वाले लोग उस संपत्ति को 'टेनेंट्स-इन-कॉमन' (साझा हिस्सेदार) के तौर पर रखते हैं, जिसमें उनके हिस्से तय होते हैं, न कि 'संयुक्त पारिवारिक संपत्ति' के तौर पर। नतीजतन, कोई भी सह-उत्तराधिकारी दूसरों की ओर से संपत्ति का निपटारा (बेच या हस्तांतरित) नहीं कर सकता, क्योंकि ऐसे मामलों में 'कर्ता' की अवधारणा लागू नहीं होती।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस...
हमदर्द मेडिकल इंस्टीट्यूट को सुप्रीम कोर्ट से राहत: 'डीम्ड एफिलिएशन' की अनुमति मिली, 150 MBBS और 49 PG सीटों का रास्ता साफ हुआ
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में हमदर्द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (HIMSR) को शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए 150 MBBS सीटों और 49 पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटों पर एडमिशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दी।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने फैसला सुनाया कि 'डीम्ड एफिलिएशन' (मानित संबद्धता) की सहमति जामिया हमदर्द (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) द्वारा दी गई मानी जाएगी। हालांकि, यह सहमति हमदर्द परिवार की दो शाखाओं के बीच चल रहे विवाद के अंतिम परिणाम पर निर्भर करेगी।कोर्ट ने...
सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांगता आयुक्तों की सिफारिशों को सख्ती से लागू करने की मांग वाली PIL पर केंद्र को नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने उस PIL पर नोटिस जारी किया, जिसमें 'विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016' के तहत शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने और विकलांग व्यक्तियों के लिए मुख्य आयुक्त तथा राज्य आयुक्तों द्वारा की गई सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश देने की मांग की गई।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने इस याचिका को 21 जुलाई, 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।याचिका में दिव्यांगता आयुक्तों द्वारा जारी सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू करने और पूरे देश में...
बार एसोसिएशन पर रिट अधिकार क्षेत्र लागू नहीं होता: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट का फ़ैसला सही ठहराया
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फ़ैसले में दखल देने से इनकार किया, जिसमें कहा गया था कि बार एसोसिएशन संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत "राज्य" या राज्य की कोई संस्था नहीं है, क्योंकि यह वकीलों का एक निजी निकाय है जो सार्वजनिक कार्य नहीं करता।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच ने वकील संगीता राय द्वारा दायर SLP (विशेष अनुमति याचिका) को खारिज कर दिया, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के फ़ैसले को चुनौती दी गई थी।कोर्ट ने 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया और निर्देश दिया कि यह राशि...
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ ट्रिब्यूनल में कोर्ट फीस से छूट के वक्फ संस्थानों के दावे पर सवाल उठाया
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य वक्फ ट्रिब्यूनल के सामने होने वाली कार्यवाही में वक्फ संस्थानों को कोर्ट फीस देने से छूट देने के कानूनी आधार पर सवाल उठाया।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच गुजरात हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस आदेश में हाईकोर्ट ने अपने पिछले फैसले का हवाला देते हुए वक्फ संस्थानों द्वारा कोर्ट फीस न देने के कारण उनके मुकदमों को खारिज करने के फैसले को सही ठहराया था। हाईकोर्ट ने अपने पिछले फैसले में कहा था कि वक्फ संस्थानों को राज्य वक्फ...
जस्टिस संजय करोल ने भी सीनियर वकीलों को कोर्ट के आंशिक कामकाज वाले दिनों में पेश होने से रोक दिया
सुप्रीम कोर्ट के आंशिक कामकाज वाले दिनों के पहले दिन कई बेंचों ने सीनियर वकीलों को पेश होने की इजाज़त नहीं दी। इसके पीछे यह तर्क दिया गया कि छुट्टियों के दौरान युवा वकीलों को मौके मिलने चाहिए।जस्टिस विक्रम नाथ ने सुबह ही यह ऐलान कर दिया था कि सीनियर वकीलों को बहस करने की इजाज़त नहीं होगी। जस्टिस संजय करोल की अगुवाई वाली बेंच ने भी इसी तरह का रुख अपनाया।सुनवाई के दौरान, एक सीनियर वकील ने कोर्ट को बताया कि वह अपने मामले वापस ले लेंगी, क्योंकि आंशिक कामकाज वाले दिनों में सीनियर वकीलों को पेश होने...
NEET-UG 2026: सुप्रीम कोर्ट ने NEET री-एग्जाम के लिए कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट की मांग ठुकराई
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को NTA को यह निर्देश देने से इनकार किया कि नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET)-UG 2026 का री-टेस्ट, जो 21 जून को होना है, मौजूदा पेन-एंड-पेपर फॉर्मेट के बजाय कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड से कराया जाए।यह राहत देने में अनिच्छा जताते हुए जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच ने मामले को जुलाई तक के लिए टाल दिया, जिससे NEET री-टेस्ट के लिए मांगी गई राहत प्रभावी रूप से खारिज हो गई।बेंच RJD सांसद सुधाकर सिंह द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही...




















