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बच्चों के लापता होने के मामलों में अपहरण की आशंका मानकर आगे बढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों की तस्करी से निपटने के लिए निर्देश जारी किए
देश भर में लापता बच्चों की चिंताजनक संख्या का गंभीर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (22 मई) को लापता बच्चों का पता लगाने में व्यवस्थागत कमियों को दूर करने और राज्यों के बीच सक्रिय तस्करी के नेटवर्क से निपटने के लिए कई निर्देश जारी किए।जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने लापता बच्चों के लगातार बढ़ते मामलों पर नाराजगी व्यक्त की, जब उन्हें पता चला कि पूरे भारत में लगभग 47,000 बच्चों का अभी भी कोई पता नहीं चल पाया है, और हर साल हजारों नए मामले इसमें जुड़ रहे...
BREAKING| मुकदमे में देरी होने पर UAPA के तहत जमानत संबंधी फैसलों में मतभेद: सुप्रीम कोर्ट ने मामला सीनियर बेंच को भेजा
संघ भारत बनाम के.ए. नजीब मामले में तीन जजों की पीठ के फैसले को लेकर विभिन्न पीठों के बीच मतभेद को देखते हुए, जिसमें कहा गया था कि गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत मामलों में लंबी कैद को जमानत का आधार माना जा सकता है, चाहे कानून में कितनी भी सख्ती क्यों न हो, सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने मामले को सीनियर बेंच के पास भेज दिया।मामला सीनियर बेंच के पास भेजते हुए न्यायालय ने दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश के मामले में तस्लीम अहमद और खालिद सैफी को छह महीने की अंतरिम जमानत भी दी।...
बांग्लादेश भेजे गए लोगों को वापस लाएगी केंद्र सरकार, नागरिकता की जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई : सुप्रीम कोर्ट में आश्वासन
सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को केंद्र सरकार ने कहा कि जिन कुछ लोगों को भारतीय नागरिकता पर संदेह के आधार पर बांग्लादेश भेजा गया था, उन्हें वापस भारत लाया जाएगा और उनकी नागरिकता की जांच की जाएगी। जांच के बाद ही उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह आश्वासन चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ के समक्ष दिया। अदालत केंद्र सरकार की उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें कुछ...
4.5 साल हिरासत में रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के 'बड़ी साज़िश' मामले में UAPA आरोपी को ज़मानत दी
अन्य बातों के अलावा, साढ़े चार साल से ज़्यादा समय तक हिरासत में रहने की बात को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज जम्मू-कश्मीर के "बड़ी साज़िश" मामले में UAPA आरोपी सुहैल अहमद ठोकर को ज़मानत दी। यह मामला संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद सामने आया था।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने यह आदेश पारित किया। बेंच ने यह भी कहा कि अगर अपीलकर्ता चल रहे ट्रायल में सहयोग करने में कोई भी कोताही बरतता है, तो इसे दी गई राहत का...
सुप्रीम कोर्ट ने टेंडर डॉक्यूमेंट में 'May' शब्द की HC की व्याख्या को 'Shall' मानने पर गलती बताई, ठेकेदार को राहत दी
यह देखते हुए कि टेंडर डॉक्यूमेंट में इस्तेमाल किए गए शब्द "may" (सकता है) की व्याख्या "shall" (होना ही चाहिए) के रूप में नहीं की जा सकती, सुप्रीम कोर्ट ने एक ठेकेदार को राहत दी। इस ठेकेदार की बोली (bid) को इसलिए खारिज कर दिया गया, क्योंकि उसने अर्नेस्ट मनी डिपॉज़िट (EMD) डिमांड ड्राफ्ट के बजाय फिक्स्ड डिपॉज़िट के ज़रिए जमा किया था, जबकि टेंडर की शर्तों में EMD सिर्फ़ DD के ज़रिए जमा करने की कोई अनिवार्यता नहीं थी।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा,"क्लॉज़ 2.15 में भी...
सिर्फ इसलिए रेगुलराइज़ेशन से मना नहीं किया जा सकता कि शुरुआती नियुक्ति स्वीकृत पद के खिलाफ नहीं थी: सुप्रीम कोर्ट
एक बड़े घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (21 मई) को फैसला सुनाया कि सिर्फ इस बात से कि कर्मचारियों को शुरू में अस्थायी आधार पर नियुक्त किया गया था और स्वीकृत पदों के खिलाफ नहीं, वे 'स्टेट ऑफ़ कर्नाटक बनाम उमा देवी' मामले में तय किए गए सिद्धांतों के तहत रेगुलराइज़ेशन की मांग करने के हकदार नहीं रह जाएंगे।कोर्ट ने टिप्पणी की कि जहां कर्मचारियों ने उन विभागों में दशकों तक लगातार सेवा दी, जो नियमित सरकारी कार्य करते हैं, वहां वे अभी भी रेगुलराइज़ेशन पर विचार किए जाने के हकदार होंगे, भले ही उनकी...
भगवंत मान समेत AAP नेताओं को राहत देने वाले फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा चंडीगढ़ प्रशासन
चंडीगढ़ प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान समेत आम आदमी पार्टी (AAP) के कई नेताओं के खिलाफ दर्ज दंगा मामला रद्द कर दिया गया।यह मामला वर्ष 2020 में चंडीगढ़ में बिजली दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ हुए प्रदर्शन से जुड़ा है।शुक्रवार को यह मामला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध हुआ। हालांकि केंद्र सरकार ने अन्य आरोपियों से...
क्या ट्रायल में देरी के आधार पर अजमल कसाब या हाफिज सईद को भी मिल सकती है जमानत? दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 2020 दिल्ली दंगा “बड़ी साजिश” मामले में UAPA के तहत जेल में बंद तस्लीम अहमद और खालिद सैफी को अंतरिम जमानत देने के संकेत दिए। दोनों आरोपी वर्ष 2020 से न्यायिक हिरासत में हैं।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने दोनों की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के पिछले साल के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अंतरिम...
कक्षा 9 और 10 में तीसरी भाषा अनिवार्य करने के CBSE फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल कर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसके तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों के लिए तीसरी भाषा पढ़ना अनिवार्य किया गया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने मामले को अगले सप्ताह सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। यह अनुरोध सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने अदालत के समक्ष मौखिक उल्लेख के जरिए किया।सुनवाई के दौरान मुकुल रोहतगी ने कहा कि यह याचिका देशभर के विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों की ओर से दायर की...
कानूनी पेशे में महिलाओं के लिए 'सिस्टरहुड' बेहद जरूरी: जस्टिस बीवी नागरत्ना
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि कानूनी पेशे में महिलाओं के लिए सिस्टरहुड यानी आपसी सहयोग और एकजुटता बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह व्यवस्था अब भी काफी हद तक पुरुष प्रधान बनी हुई है।सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह की पुस्तक 'कांस्टीट्यूशन इज़ माई होम' के विमोचन समारोह में बोलते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि पुरुषों को पेशेवर दुनिया में स्वाभाविक सहजता और नेटवर्क का लाभ मिलता रहा है जबकि महिलाओं को अपनी जगह खुद बनानी पड़ी है।उन्होंने कहा,“कानूनी पेशा बेहद प्रतिस्पर्धी हो सकता है लेकिन...
सुप्रीम कोर्ट ने सात पूर्व हाईकोर्ट जजों को दिया सीनियर एडवोकेट का दर्जा
सुप्रीम कोर्ट ने देश के विभिन्न हाईकोर्टों के सात पूर्व जजों को सीनियर एडवोकेट के रूप में डेजिग्नेशन किया। इस संबंध में 21 मई को अधिसूचना जारी की गई।अधिसूचना के अनुसार 20 मई को हुई फुल कोर्ट बैठक में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) और सुप्रीम कोर्ट के जजों ने इन नामों को मंजूरी दी। सीनियर एडवोकेट का दर्जा 20 मई 2026 से प्रभावी माना गया।जिन पूर्व जजों को सीनियर एडवोकेट डेजिग्नेट किया गया, उनमें शामिल हैं—1. जस्टिस बाबू के., पूर्व जज, केरल हाईकोर्ट।2. जस्टिस देबब्रत दास, पूर्व जज, ओडिशा हाईकोर्ट।2....
भोजशाला-कमाल मौला विवाद: स्थल को 'मंदिर' घोषित करने के हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
लंबे समय से चले आ रहे भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इस मामले में एक मुस्लिम पक्ष ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के हालिया फैसले को चुनौती दी, जिसमें धार स्थित विवादित जगह को मंदिर घोषित किया गया और वहां नमाज़ पढ़ने पर रोक लगा दी गई।यह विशेष अनुमति याचिका (SLP) काज़ी मोइनुद्दीन ने दायर की, जो मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चल रही कार्यवाही में हस्तक्षेपकर्ता (Intervener) थे। इस याचिका में उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 15 मई के उस आदेश को चुनौती दी, जो 'हिंदू...
संविधान सभी नागरिकों का है, न कि कुछ खास लोगों का: CJI सूर्यकांत
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने गुरुवार को कहा कि संविधान हर नागरिक का समान रूप से है और यह कुछ ऐसे खास लोगों के लिए आरक्षित विशेषाधिकार नहीं है, जो महंगी कानूनी प्रक्रियाओं और बेहतरीन कानूनी प्रतिनिधित्व का खर्च उठा सकते हैं।सीनियर वकील इंदिरा जयसिंह की संस्मरण 'द कॉन्स्टिट्यूशन इज़ माई होम: कन्वर्सेशन्स ऑन अ लाइफ इन लॉ' के विमोचन समारोह में मुख्य भाषण देते हुए CJI ने संवैधानिकवाद, अधिकारों के न्यायशास्त्र के विकास और भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को आकार देने में बेंच (न्यायालय) और बार...
'ज़मानत के अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल आम निर्देश जारी करने के लिए नहीं किया जा सकता': सुप्रीम कोर्ट ने समन तामील पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों को रद्द किया
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा ज़मानत की कार्यवाही में जारी किए गए उन निर्देशों को रद्द कर दिया, जिनमें ट्रायल कोर्ट को समन और ज़बरदस्ती की प्रक्रियाओं की तामील के लिए खास कदम उठाने को कहा गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 483 के तहत ज़मानत के अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए इतने दूरगामी निर्देश जारी नहीं किए जा सकते।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने आरोपी रामबालक द्वारा दायर अपील पर यह फ़ैसला सुनाया। रामबालक ने...
सुप्रीम कोर्ट ने 2002 के हरियाणा सिविल सर्विस भर्ती में जालसाजी के आरोपों पर चार्जशीट रद्द करने वाले आदेश पर उठाया सवाल
2002 में भर्ती को लेकर हरियाणा सिविल सेवा के 8 अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश की आलोचना की, जिसमें आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट रद्द कर दी गई थी।कोर्ट ने हाईकोर्ट के जांच एजेंसियों की भूमिका निभाने पर सवाल उठाया, क्योंकि उसने राज्य के अतिरिक्त एडवोकेट जनरल द्वारा उसके सामने रखे गए एक हलफनामे की सच्चाई परखने के लिए उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की थी। कोर्ट ने आगे यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने उत्तर पुस्तिकाओं को...
वैवाहिक घर में पत्नी की मौत की वजह न बता पाने पर पति के खिलाफ़ धारा 106 के तहत प्रतिकूल निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट ने सज़ा सही ठहराई
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (21 मई) को एक पति को अपनी पत्नी का गला घोंटकर हत्या करने के मामले में दी गई सज़ा को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि एक बार जब अभियोजन पक्ष यह साबित कर देता है कि कुछ ऐसे तथ्य जो आरोपी को फंसा सकते हैं, वे विशेष रूप से आरोपी के निजी संज्ञान में थे, तो भारतीय सबूत अधिनियम, 1872 की धारा 106 के तहत यह ज़िम्मेदारी आरोपी पर आ जाती है कि वह उन तथ्यों के बारे में कोई विश्वसनीय स्पष्टीकरण दे।कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक घर के भीतर हुई मौत के कारणों और परिस्थितियों के बारे में पति का कोई...
BNSS S.223(1) का परंतुक अनिवार्य, आरोपी को सुने बिना संज्ञान लेना शुरू से ही अमान्य: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 223(1) का पहला परंतुक—जो किसी शिकायत मामले में संज्ञान लेने से पहले आरोपी को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य बनाता है—अनुच्छेद 21 के तहत निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार से उत्पन्न होने वाला एक मूल सुरक्षा उपाय है। इसका पालन न करने पर संज्ञान लेने का आदेश शुरू से ही अमान्य हो जाएगा।कोर्ट ने आगे स्पष्ट किया कि आरोपी को ऐसे पालन न होने से हुए नुकसान को साबित करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह दोष एक ऐसी अवैधता है जो पूरी...
सुप्रीम कोर्ट ने घोषित क्षमता साबित न कर पाने पर बिजली उत्पादक पर ₹162 करोड़ का जुर्माना बहाल किया
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (20 मई) को फैसला सुनाया कि किसी बिजली उत्पादन केंद्र का अपनी घोषित बिजली उत्पादन क्षमता को साबित न कर पाना 'सख्त दायित्व' (Strict Liability) के दायरे में आता है। इसके लिए 'मेन्स रिया' (गलत इरादा) या जानबूझकर की गई गलती का सबूत होना ज़रूरी नहीं है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि चूंकि उत्पादन केंद्रों को उनकी घोषित क्षमता के आधार पर 'निश्चित शुल्क' (Fixed Charges) मिलते हैं, इसलिए तय समय सीमा के भीतर उस घोषित क्षमता को साबित न कर पाने पर अपने आप ही दंडात्मक कार्रवाई होगी।जस्टिस...
अलकनंदा-भागीरथी बेसिन में नए जलविद्युत प्रोजेक्ट्स के खिलाफ केंद्र, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा
उत्तराखंड में वर्ष 2013 की भीषण बाढ़ त्रासदी से जुड़े मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक महत्वपूर्ण हलफनामा दाखिल कर कहा है कि गंगा नदी के ऊपरी बेसिन क्षेत्र में अब कोई नया जलविद्युत परियोजना (Hydro Electric Project) शुरू नहीं किया जाना चाहिए। केंद्र ने केवल सात मौजूदा या प्रगति पर चल रही परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की अनुमति देने का समर्थन किया है।केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि अलकनंदा और भागीरथी नदी बेसिन के ऊपरी क्षेत्रों की पारिस्थितिकी अत्यंत संवेदनशील और आपदा-प्रवण है। ऐसे...
सिर्फ 'श्री' नाम समान होने पर श्रीलंकाई नागरिक को ठहराया आरोपी: सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की UAPA के तहत दोषसिद्धि
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम [UAPA] के तहत दोषी ठहराए गए एक श्रीलंकाई नागरिक की सजा रद्द कर दी। अदालत ने पाया कि आरोपी की पहचान गलत तरीके से एक फरार मुख्य आरोपी के रूप में कर दी गई थी, केवल इसलिए क्योंकि दोनों के नाम में “श्री” शब्द समान था।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की खंडपीठ ने मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ और ट्रायल कोर्ट के फैसलों को रद्द करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी की पहचान विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित...




















