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FSSAI मौजूद है: खाद्य सुरक्षा के लिए कोर्ट निगरानी समिति बनाने की मांग वाली PIL सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की
'FSSAI मौजूद है': खाद्य सुरक्षा के लिए कोर्ट निगरानी समिति बनाने की मांग वाली PIL सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में खाद्य सुरक्षा नियमों के प्रभावी पालन के लिए नेशनल टास्क फोर्स गठित करने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें नागरिकों को असुरक्षित और अस्वच्छ भोजन दिए जाने का मुद्दा उठाया गया था। याचिकाकर्ता डॉ. के.ए. पॉल ने अपने दावों के समर्थन में विभिन्न अखबारों की रिपोर्ट्स का हवाला दिया था।कोर्ट की टिप्पणीसुप्रीम कोर्ट ने कहा कि—याचिका में पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य का अभाव...

ईसाई धर्म को एकमात्र सच्चा बताने पर पादरी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
ईसाई धर्म को 'एकमात्र सच्चा' बताने पर पादरी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

सुप्रीम कोर्ट ने आज (10 अप्रैल) एक ईसाई पादरी की याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें कहा गया था कि किसी धर्म को “एकमात्र सच्चा धर्म” बताना भारतीय दंड संहिता की धारा 295A के तहत अपराध हो सकता है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करते हुए पादरी रेवरेन्ड फादर विनीत विन्सेंट परेरा के खिलाफ आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी।मामला क्या है?यह मामला उस FIR से जुड़ा है जिसमें आरोप लगाया गया कि पादरी...

रूस में फंसे 26 भारतीयों की सुरक्षित वापसी पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
रूस में फंसे 26 भारतीयों की सुरक्षित वापसी पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रूस में कथित रूप से फंसे 26 भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी से जुड़ी हैबियस कॉर्पस याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन भारतीयों को जबरन यूक्रेन के खिलाफ चल रहे युद्ध में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ ने केंद्र को नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले में निर्देश लेने के...

पश्चिम बंगाल SIR: लंबित अपीलों पर फ्रीज़िंग डेट मुद्दे पर 13 अप्रैल को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
पश्चिम बंगाल SIR: लंबित अपीलों पर 'फ्रीज़िंग डेट' मुद्दे पर 13 अप्रैल को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ा मामला शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठाया गया। याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 9 अप्रैल को मतदाता सूची फ्रीज़ कर दी है, जबकि इस मामले से जुड़ी कई अपीलें अभी लंबित हैं।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ के समक्ष वकील ने कहा कि अपीलीय ट्रिब्यूनल, जिसकी अध्यक्षता पूर्व कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टी.एस. शिवगणनम कर रहे हैं, ने हाल ही में दो अपीलों को...

जाति जनगणना रोकने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की, बदतमीज़ी भरी भाषा पर जताई नाराज़गी
जाति जनगणना रोकने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की, 'बदतमीज़ी भरी भाषा' पर जताई नाराज़गी

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें केंद्र सरकार को प्रस्तावित जाति जनगणना (Caste Census) रोकने, संसाधनों के वितरण को जनसंख्या जिम्मेदारी से जोड़ने और एक बच्चे वाले परिवारों को आर्थिक प्रोत्साहन देने के लिए नीतियां बनाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ ने स्वयं पेश हुए याचिकाकर्ता की इस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिका में इस्तेमाल की गई भाषा पर कड़ी...

ऐसे मंदिर हैं, जहां सिर्फ़ महिलाएं ही जा सकती हैं: सबरीमाला मामले में केंद्र सरकार की सुप्रीम कोर्ट में दलील
ऐसे मंदिर हैं, जहां सिर्फ़ महिलाएं ही जा सकती हैं: सबरीमाला मामले में केंद्र सरकार की सुप्रीम कोर्ट में दलील

केंद्र सरकार ने यह तर्क दिया कि धर्मों द्वारा पुरुषों या महिलाओं पर आधारित कुछ पाबंदियां लगाई जा सकती हैं। इसका लैंगिक रूढ़ियों या पितृसत्ता से कोई लेना-देना नहीं है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (केंद्र की ओर से) ने गुरुवार को सबरीमाला मामले पर अपनी दलीलें पूरी कीं। इस मामले की सुनवाई नौ जजों की संविधान पीठ धार्मिक स्वतंत्रता के व्यापक मुद्दों पर कर रही है।मेहता ने कोर्ट को बताया कि 2018 का सबरीमाला फ़ैसला—जिसमें सभी उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई—गलत है, क्योंकि यह इस धारणा...

मालिकाना हक की घोषणा के लिए बाद में दायर किया गया कोई भी मुकदमा CPC की धारा 11 के स्पष्टीकरण IV के तहत वर्जित होगा: सुप्रीम कोर्ट
मालिकाना हक की घोषणा के लिए बाद में दायर किया गया कोई भी मुकदमा CPC की धारा 11 के स्पष्टीकरण IV के तहत वर्जित होगा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (9 अप्रैल) को यह स्पष्ट किया कि मालिकाना हक की घोषणा के लिए बाद में दायर किया गया कोई भी मुकदमा CPC की धारा 11 के स्पष्टीकरण IV (रचनात्मक रेस ज्यूडिकाटा) के तहत वर्जित होगा, यदि वादी ने स्थायी निषेधाज्ञा के लिए दायर पहले के मुकदमे में, जहां मालिकाना हक विवादित था, मालिकाना हक की घोषणा की मांग करना छोड़ दिया था।कोर्ट ने यह माना कि चूंकि मालिकाना हक का दावा प्राथमिक मुकदमे में उठाया जा सकता था और उठाया जाना भी चाहिए था, इसलिए संबंधित पक्ष को नए मुकदमे में उस मुद्दे...

कोर्ट अथॉरिटी के विवेक की जगह अपना फ़ैसला नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट ने गवर्नर को दिए निर्देश रद्द किए
कोर्ट अथॉरिटी के विवेक की जगह अपना फ़ैसला नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट ने गवर्नर को दिए निर्देश रद्द किए

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (9 अप्रैल) को कहा कि उत्तर प्रदेश सिविल सर्विसेज़ (एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन) रूल्स, 1981 के तहत एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन देना गवर्नर के विवेक पर निर्भर है।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की बेंच ने उत्तराखंड हाईकोर्ट का फ़ैसला रद्द किया। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह दिवंगत डॉक्टर की विधवा को एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन दे, जिनकी ड्यूटी के दौरान मौत हो गई। कोर्ट ने कहा कि जब गवर्नर ने एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन देने के मामले की जांच ही नहीं की थी...

सबरीमाला रेफरेंस सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा: मंदिरों से दूसरे संप्रदायों को बाहर रखने से हिंदू धर्म पर असर पड़ेगा
सबरीमाला रेफरेंस सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा: मंदिरों से दूसरे संप्रदायों को बाहर रखने से हिंदू धर्म पर असर पड़ेगा

सबरीमाला रेफरेंस की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को टिप्पणी की कि किसी खास संप्रदाय के मंदिरों से दूसरे संप्रदायों को बाहर रखने से हिंदू धर्म पर असर पड़ेगा।यह टिप्पणी जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने की, जो 9 जजों की उस बेंच का हिस्सा हैं, जो सबरीमाला रिव्यू मामले में उठाए गए संवैधानिक मुद्दों की सुनवाई कर रही है।जस्टिस नागरत्ना ने यह टिप्पणी तब की, जब सीनियर एडवोकेट सी.एस. वैद्यनाथन, जो नायर सर्विस सोसाइटी और केरल के धार्मिक संगठनों की ओर से पेश हो रहे थे, अपनी दलीलें दे रहे थे। वैद्यनाथन...

मंदिर जाते समय उससे जुड़ी परंपराओं का पालन करना ज़रूरी: सबरीमाला मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट
मंदिर जाते समय उससे जुड़ी परंपराओं का पालन करना ज़रूरी: सबरीमाला मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट

सबरीमाला मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि भले ही हिंदू धर्म में कोई कठोर सांप्रदायिक ढांचा नहीं है, लेकिन किसी खास मंदिर में जाने वाले भक्तों को उस मंदिर से जुड़ी परंपराओं या रीति-रिवाजों का पालन करना ज़रूरी है।इस मामले की सुनवाई 9 जजों की एक बेंच कर रही है, जिसमें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, जस्टिस एम.एम. सुंदरेश, जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह, जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले, जस्टिस आर....

अपनी काबिलियत दिखाने के लिए कोर्ट का समय बर्बाद न करें: सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों को पहले से तय मिसालों के खिलाफ बहस करने पर चेताया
'अपनी काबिलियत दिखाने के लिए कोर्ट का समय बर्बाद न करें': सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों को पहले से तय मिसालों के खिलाफ बहस करने पर चेताया

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (9 अप्रैल) को वकीलों को चेतावनी दी कि वे सिर्फ अपनी बहस करने की काबिलियत दिखाने के लिए ऐसे मामलों में बहस करके कोर्ट का कीमती समय बर्बाद न करें, जो पहले से तय कानूनी स्थितियों के खिलाफ हों।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा,"चूंकि कोर्ट मिसालों के कानून से बंधे होते हैं और संविधान बेंच के बाध्यकारी फैसलों में तय कानून का पालन करने के लिए मजबूर होते हैं, इसलिए वकीलों से भी यह उम्मीद की जाती है कि वे उन मजबूत मिसालों का सम्मान करें, जो...

अंतरिम आदेश से प्रभावित कोई बाहरी व्यक्ति रिट कार्यवाही में पक्षकार बनने का हकदार: सुप्रीम कोर्ट
अंतरिम आदेश से प्रभावित कोई बाहरी व्यक्ति रिट कार्यवाही में पक्षकार बनने का हकदार: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि कार्यवाही में शामिल न होने वाले किसी बाहरी व्यक्ति को, जो मूल रिट कार्यवाही का पक्षकार नहीं है, पक्षकार बनने से मना नहीं किया जा सकता, यदि उस कार्यवाही में पारित आदेश का उस बाहरी व्यक्ति पर सीधा प्रभाव पड़ता हो।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने टिप्पणी की,"रिट कार्यवाही में जहां कोर्ट से पहले से पारित किसी अंतरिम आदेश के दायरे और प्रभाव की व्याख्या करने के लिए कहा जाता है, वहां किसी ऐसे व्यक्ति को, जो उस आदेश से सीधे और स्पष्ट रूप से प्रभावित...

सर्विस छोड़ना स्वैच्छिक रिटायरमेंट नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने SBI क्लर्क को पेंशन के फ़ायदे देने से मना किया
'सर्विस छोड़ना स्वैच्छिक रिटायरमेंट नहीं': सुप्रीम कोर्ट ने SBI क्लर्क को पेंशन के फ़ायदे देने से मना किया

सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला दिया कि कोई कर्मचारी जो रिटायरमेंट से कुछ समय पहले ही सेवा छोड़ देता है, वह इसे स्वैच्छिक रिटायरमेंट बताकर पेंशन के फ़ायदे नहीं मांग सकता।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने टिप्पणी की,"...हमने पाया कि यह मामला स्वैच्छिक रिटायरमेंट का नहीं है, बल्कि सेवाओं को अपनी मर्ज़ी से छोड़ने का है, जिसमें 24.01.1998 से 11.12.1998 तक, अपीलकर्ता ने बिना किसी को बताए और बिना छुट्टी लिए, लंबे समय तक अनुपस्थित रहना शुरू कर दिया था..." बेंच ने यह टिप्पणी करते...

घुसपैठियों को मिल रहा आधार: सुप्रीम कोर्ट में याचिका, 6 साल से कम बच्चों तक ही आधार बनाने की मांग
'घुसपैठियों को मिल रहा आधार': सुप्रीम कोर्ट में याचिका, 6 साल से कम बच्चों तक ही आधार बनाने की मांग

सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें मांग की गई है कि आधार कार्ड केवल 6 वर्ष तक के बच्चों को ही जारी किया जाए और इसके बाद आधार बनवाने की प्रक्रिया उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या तहसीलदार कार्यालय के माध्यम से कराई जाए।यह याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर की गई है, जिसमें केंद्र सरकार, राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) को पक्षकार बनाया गया है। याचिका में मांग की गई है कि आधार केवल बच्चों के लिए जारी किया जाए और किशोरों व...

रेत माफिया का कहर: चंबल अभयारण्य में वन रक्षक को ट्रैक्टर से कुचला, सुप्रीम कोर्ट में उठा मामला
रेत माफिया का कहर: चंबल अभयारण्य में वन रक्षक को ट्रैक्टर से कुचला, सुप्रीम कोर्ट में उठा मामला

मध्य प्रदेश के चंबल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध रेत खनन रोकने की कोशिश कर रहे वन रक्षक की ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। इस गंभीर घटना पर अदालत ने तत्काल संज्ञान लेते हुए अगले सप्ताह सुनवाई तय की।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख एमिक्स क्यूरी द्वारा किया गया। यह मामला पहले से चल रही अवैध रेत खनन पर स्वतः संज्ञान याचिका से जुड़ा हुआ है।रिपोर्ट के अनुसार, 33 वर्षीय वन रक्षक हरकेश गुर्जर गश्त के दौरान एक ट्रैक्टर को रोकने का...

सुप्रीम कोर्ट का आदेश- मेरठ में गिराए जाएं 859 प्रॉपर्टीज़ में बने अवैध सेटबैक, कंपाउंडिंग पर भी लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट का आदेश- मेरठ में गिराए जाएं 859 प्रॉपर्टीज़ में बने अवैध सेटबैक, कंपाउंडिंग पर भी लगाई रोक

उत्तर प्रदेश के मेरठ में बिना इजाज़त और बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध निर्माणों पर अपनी सख़्ती जारी रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (9 अप्रैल) को 859 प्रॉपर्टीज़ में सभी बिना इजाज़त वाले सेटबैक को दो महीने के अंदर गिराने का आदेश दिया। साथ ही कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को भी फटकार लगाई कि उन्होंने स्कूलों, अस्पतालों और यहाँ तक कि सरकारी बैंकों को भी ऐसी इमारतों से चलाने की इजाज़त कैसे दी, जो "पूरी तरह से अवैध और बिना इजाज़त" हैं।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने यह...

S.142 NI Act | बोर्ड प्रस्ताव पर दस्तखत करने का मतलब यह नहीं कि डायरेक्टर को कंपनी के रोज़मर्रा के मामलों की जानकारी थी: सुप्रीम कोर्ट
S.142 NI Act | बोर्ड प्रस्ताव पर दस्तखत करने का मतलब यह नहीं कि डायरेक्टर को कंपनी के रोज़मर्रा के मामलों की जानकारी थी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि सिर्फ़ बोर्ड प्रस्ताव पर दस्तखत करने से यह साबित नहीं होता कि कोई डायरेक्टर कंपनी के रोज़मर्रा के मामलों का इंचार्ज था और उनके लिए ज़िम्मेदार था> इसलिए सिर्फ़ इस आधार पर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NI Act) की धारा 138 के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।कंपनी की डायरेक्टर की अपील मंज़ूर करते हुए जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने चेक बाउंस मामले में उनके खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही रद्द की। बेंच ने कहा कि ऐसा कोई खास आरोप नहीं था...

Motor Accident Claim | केस पार्टी बनाई गई बीमा कंपनी सभी आधार उठा सकती है और मुआवज़े की रकम को चुनौती दे सकती है: सुप्रीम कोर्ट
Motor Accident Claim | केस पार्टी बनाई गई बीमा कंपनी सभी आधार उठा सकती है और मुआवज़े की रकम को चुनौती दे सकती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक बीमा कंपनी की उस अपील को मंज़ूरी दी, जो बॉम्बे हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ थी। हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी को मोटर दुर्घटना मुआवज़े की रकम के बारे में अपनी दलीलें रखने से रोक दिया था।कोर्ट ने कहा कि जब किसी मोटर दुर्घटना मुआवज़े के केस में बीमा कंपनी को एक पार्टी-प्रतिवादी (Respondent) के तौर पर शामिल किया जाता है तो उसे सभी उपलब्ध आधारों पर दावे को चुनौती देने का अधिकार होता है। यानी, उसे सिर्फ़ मोटर वाहन अधिनियम की धारा 149(2) में बताए गए आधारों (जैसे, पॉलिसी की...

महाभारत जैसी वैवाहिक लड़ाई: 10 साल अलग रह रहे दंपत्ति के बीच चल रहे थे 80 से ज़्यादा केस, सुप्रीम कोर्ट ने शादी खत्म करने के साथ किए रद्द
'महाभारत जैसी वैवाहिक लड़ाई': 10 साल अलग रह रहे दंपत्ति के बीच चल रहे थे 80 से ज़्यादा केस, सुप्रीम कोर्ट ने शादी खत्म करने के साथ किए रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (8 अप्रैल) को एक ऐसे जोड़े की शादी खत्म की, जो पिछले 10 सालों से अलग रह रहे थे और जिन्होंने एक-दूसरे, अपने रिश्तेदारों और वकीलों के खिलाफ 80 से ज़्यादा केस दायर किए। कोर्ट ने इसे "महाभारत जैसी वैवाहिक लड़ाई" का अंत बताया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने प्रतिवादी-पति (जो पेशे से वकील है) के रवैये की कड़ी आलोचना की। बेंच ने कहा कि उसने अपनी कानूनी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके जान-बूझकर मुकदमे को लंबा खींचा। कोर्ट ने पाया कि उसने पत्नी के वकीलों को भी...