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बजरंग दल से जुड़े विवाद में जिम मालिक मोहम्मद दीपक के खिलाफ FIR पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देहरादून के जिम मालिक 'मोहम्मद' दीपक कुमार के खिलाफ दर्ज FIR से जुड़ी कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी। यह मामला बजरंग दल के सदस्यों और एक मुस्लिम दुकानदार के बीच हुए कथित विवाद से जुड़ा है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने दीपक की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए जवाब के लिए चार सप्ताह का समय दिया।कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश के प्रभाव और संचालन पर भी रोक लगा दी, जिसके तहत दीपक को घटना और मामले से जुड़े सोशल मीडिया संदेश या वीडियो पोस्ट करने से...

राजस्थान के एडिशनल एडवोकेट जनरल बने रहेंगे जस्टिस पीके मिश्रा के बेटे, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की चुनौती

सुप्रीम कोर्ट ने उस SLP (स्पेशल लीव पिटिशन) खारिज की, जिसमें राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसने एडवोकेट पद्मेश मिश्रा की राजस्थान के एडिशनल एडवोकेट जनरल (AAG) के तौर पर नियुक्ति को सही ठहराया था। उन्हें सुप्रीम कोर्ट में राज्य के मामलों की पैरवी के लिए नियुक्त किया गया।मिश्रा, सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा के बेटे हैं।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने एडवोकेट सुनील समदरिया की ओर से दायर SLP को खारिज किया। समदरिया ने मिश्रा की नियुक्ति को...

Art. 226 | ट्रिब्यूनल के बहुत ज़्यादा गलत या मनमाने फ़ैसले रद्द करने के लिए सर्टिओरारी का इस्तेमाल किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (31 अगस्त) को कहा कि हाईकोर्ट संविधान के आर्टिकल 226 के तहत अपनी 'सर्टिओरारी रिट अधिकार क्षेत्र' (certiorari writ jurisdiction) का इस्तेमाल करते हुए ट्रिब्यूनल के उस आदेश में दखल दे सकते हैं जिसमें निष्कर्ष किसी भी ठोस या दस्तावेज़ी सबूत पर आधारित नहीं हैं।जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने कहा,"अगर कोई निष्कर्ष बिना किसी सबूत या बिना किसी सहायक दस्तावेज़ के दर्ज किया जाता है तो दखल देने का मामला बनता है क्योंकि ऐसा निष्कर्ष कानून की गलती (error...

NCDRC के तीसरे सदस्य का रेफरेंस का जवाब देने के बजाय अपील पर फ़ैसला सुनाना ज़रूरी नहीं कि ग़ैर-क़ानूनी हो: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (NCDRC) की बेंच के सदस्यों के बीच मतभेद होने पर तीसरे या "रेफरी" सदस्य की भूमिका की सीमाएं स्पष्ट की। कोर्ट ने कहा कि हालाँकि आम तौर पर रेफरी सदस्य को केवल रेफर किए गए सवालों का जवाब देना चाहिए और मामले को मूल बेंच को वापस भेजना चाहिए, लेकिन किसी असाधारण मामले में अपील पर ख़ुद फ़ैसला करना सही हो सकता है।जब रेफर करने वाली बेंच कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 की धारा 58(3) के तहत मतभेद के सटीक बिंदुओं को बताने के बजाय, शिकायत की जड़ तक जाने...

छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी केंद्र सरकार, अनुच्छेद 142 के तहत मांगी जाएगी राहत

छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कराने के लिए केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। केंद्र सरकार संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट की विशेष शक्ति का इस्तेमाल करते हुए इन मामलों को रद्द करने की मांग करेगी।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले का मौखिक रूप से उल्लेख किया। अदालत की कार्यवाही समाप्त होने वाली थी तभी उन्होंने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत के सामने मामले को तत्काल सुनवाई के लिए उठाया और मंगलवार को सुनवाई की मांग की।चीफ...

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव के नतीजों पर छह उम्मीदवारों ने उठाए सवाल, मतपत्रों की दोबारा गिनती की मांग

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के कार्यकारिणी सदस्य पद के चुनाव परिणाम को छह उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उम्मीदवारों ने मतगणना में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मतपत्रों की दोबारा गिनती कराने की मांग की।यह अंतरिम आवेदन स्मृति कुमारी, श्वेता सिन्हा, शैला चौधरी, सुंदरी, सचिन पाहवा और कृष्ण कुमार गुप्ता की ओर से दाखिल किया गया। आवेदन अधिवक्ता अभिलेख विपिन गुप्ता के माध्यम से दायर किया गया।आवेदन में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का चुनाव तय नियमों के अनुसार कराया...

कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी मामले में मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमे की मंजूरी पर जल्द फैसला, सुप्रीम कोर्ट में एमपी सरकार ने बताया

कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी के मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्य के मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी पर जल्द फैसला होने की उम्मीद है।सरकार की ओर से कहा गया कि विशेष जांच दल अपनी जांच पूरी कर चुका है और मुकदमा चलाने की मंजूरी से जुड़ा प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेज दिया गया।मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। विजय शाह ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस स्वत: संज्ञान आदेश...

फैमिली कोर्ट जज हाईकोर्ट में जज बनने के लिए योग्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने पुराने फैसले पर दोबारा विचार से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के सात फैमिली कोर्ट जजों की उस याचिका पर विचार करने से इनकार किया, जिसमें उन्हें संविधान के अनुच्छेद 217 के तहत हाईकोर्ट में जज नियुक्ति के लिए 'न्यायिक पद' पर कार्यरत माना जाने की मांग की गई थी।कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर पहले ही फैसला दिया जा चुका है और मौजूदा मामले में उस फैसले पर दोबारा विचार करने का आधार नहीं है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि 2011 में एस.डी. जोशी मामले में सुप्रीम कोर्ट साफ कर...

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से एसिड की रिटेल बिक्री पर रोक लगाने पर विचार करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह भारत में एसिड अटैक की घटनाओं को रोकने के लिए एसिड की रिटेल बिक्री पर कड़े प्रतिबंध लगाने पर विचार करे।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच शाहीन मलिक द्वारा दायर PIL (जिसमें उनके मामले में ट्रायल पूरा न होने और जबरन एसिड पिलाए जाने का मुद्दा उठाया गया) में एक इंटरवेनर की अर्जी पर सुनवाई कर रही थी। अर्जी देने वाली महिला ने कहा कि इस मुद्दे पर केंद्र की गाइडलाइंस 2013 की हैं, जिन्हें ठीक से लागू नहीं...

NGT

राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी NGT की तीन क्षेत्रीय पीठों के 8 सितंबर के बाद कामकाज ठप होने की आशंका जताते हुए NGT बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट से मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की।एसोसिएशन ने कहा कि अधिकरण के सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाया नहीं गया या नई नियुक्तियां समय पर नहीं हुईं तो तीन क्षेत्रीय पीठें काम नहीं कर पाएंगी।मामले को सोमवार को भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए उठाया गया।याचिका पहले 15 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध थी लेकिन बार एसोसिएशन...

पटना हाईकोर्ट का फैसला: अब 62 की उम्र में रिटायर होंगे बिहार के ज्यूडिशियल अधिकारी

पटना हाईकोर्ट की फुल कोर्ट ने बिहार में ज्यूडिशियल अधिकारियों की रिटायरमेंट की उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल करने का फ़ैसला किया।यह फ़ैसला ऐसे समय में आया, जब सुप्रीम कोर्ट इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या पूरे देश में डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशियरी के सदस्यों की रिटायरमेंट की उम्र एक समान रूप से बढ़ाकर 62 साल कर दी जानी चाहिए।बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को 31 अगस्त, 2026 को भेजे गए एक पत्र में पटना हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रूपेश देव ने राज्य सरकार को बताया कि फुल कोर्ट...

हाईकोर्ट को आम तौर पर ट्रायल पर रोक नहीं लगानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट ने रिविज़न पावर के बिना सोचे-समझे इस्तेमाल पर चिंता जताई

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम आदेशों (Interlocutory Orders) को चुनौती देने पर सुनवाई करते हुए ट्रायल पर रोक लगाने की आम प्रैक्टिस को गलत बताया। कोर्ट ने चेतावनी दी कि ऐसी रोक तभी दी जानी चाहिए, जब ट्रायल जारी रहने से रिविज़न की कार्यवाही पर गंभीर और कभी न ठीक होने वाला असर पड़े या पार्टियों पर बुरा असर पड़े।कोर्ट ने सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) की धारा 115 के तहत रिविज़न अधिकार क्षेत्र (Revisional Jurisdiction) के बिना सोचे-समझे इस्तेमाल पर भी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट...

गोवा नाइटक्लब अग्निकांड: सुप्रीम कोर्ट ने मालिकों की जमानत रद्द करने का फैसला बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने गोवा के अर्पोरा स्थित बिर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब के सह-मालिक सौरभ लूथरा, गौरव लूथरा और अजय गुप्ता को दी गई जमानत रद्द करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार किया। बता दें, नाइटक्लब में लगी भीषण आग में 25 लोगों की मौत हुई थी।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने तीनों आरोपियों की ओर से दायर याचिकाओं पर संक्षिप्त सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया।आरोपियों की ओर से सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे और श्याम दीवान पेश...

सवाल पूछने पर छात्रों को सज़ा नहीं दी जा सकती, असहिष्णुता संविधान के खिलाफ: जस्टिस उज्ज्वल भुइयां

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए छात्रों को धमकाया या उन पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती, क्योंकि उनकी राय अधिकारियों की राय से अलग है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सवाल पूछने का अधिकार लोकतांत्रिक नागरिकता का अहम हिस्सा है।नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली के LLM दीक्षांत समारोह में बोलते हुए जस्टिस भुइयां ने कहा,"लोकतंत्र में सवाल पूछने का अधिकार बगावत नहीं है। यह नागरिकता, आज़ादी और संवैधानिक ज़िम्मेदारी का ज़रूरी इज़हार है।" उन्होंने कहा,"इसलिए जब छात्र अलग राय...

अफ़सोस की बात है कि लीगल एकेडमी के क्षेत्र से किसी को भी सुप्रीम कोर्ट का जज नहीं बनाया गया: जस्टिस उज्ज्वल भुइयां

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने एक कार्यक्रम में कहा कि संविधान में इजाज़त होने के बावजूद, पिछले 76 सालों में किसी भी कानून के जानकार (ज्यूरिस्ट) को सुप्रीम कोर्ट का जज नहीं बनाया गया।NLU दिल्ली में LLM प्रोग्राम के दीक्षांत समारोह में बोलते हुए जज ने कहा,"हालांकि हमारे संविधान में सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर किसी कानून के जानकार की नियुक्ति का प्रावधान है, लेकिन संविधान के 76 साल से ज़्यादा समय बीत जाने के बाद भी अब तक सुप्रीम कोर्ट में किसी कानून के जानकार को नियुक्त नहीं किया...

हमें न्यायपालिका के प्रति ज़रूरत से ज़्यादा सम्मान का भाव छोड़ना होगा: जस्टिस उज्ज्वल भुइयां

NLU दिल्ली में दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने संवैधानिक लोकतंत्र में लॉ यूनिवर्सिटीज़ की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि ये ऐसी जगहें हैं जहाँ छात्र पहली बार अपने विचारों से अलग विचारों के संपर्क में आते हैं।जज ने यह भी कहा कि हमें अथॉरिटी (अधिकार-प्राप्त संस्थाओं), जिसमें न्यायपालिका भी शामिल है, उसके प्रति "ज़रूरत से ज़्यादा सम्मान का भाव" छोड़ना होगा।जस्टिस भुइयां ने कहा, "शुरू में मैंने यह बात कहने के बारे में सोचा था, लेकिन फिर...

डिग्री मामले में वकील ने किया सरकारी दस्तावेज़ों में हेरफेर: सुप्रीम कोर्ट ने दर्ज किया- CBI को B.Com डिग्री पहली नज़र में नकली लगी

सुप्रीम कोर्ट ने दर्ज किया कि सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को एक वकील द्वारा पेश की गई B.Com डिग्री के मामले में जालसाज़ी और सरकारी दस्तावेज़ों में हेराफेरी जैसे गंभीर अपराधों के शुरुआती सबूत मिले हैं।जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने 17 अगस्त, 2026 को पारित आदेश में दर्ज किया कि CBI ने कोर्ट के 15 सितंबर, 2025 के निर्देश के बाद स्टेटस रिपोर्ट सौंपी थी। यह निर्देश नरेश दिलावरी द्वारा इस्तेमाल की गई डिग्री के असली या नकली होने की जांच के लिए दिया गया।कोर्ट ने...

स्टाम्प ड्यूटी का मूल्यांकन ज़मीन के इस्तेमाल के आधार पर होगा, न कि मास्टर प्लान में उसके वर्गीकरण के आधार पर: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि मास्टर प्लान के तहत प्रॉपर्टी का वर्गीकरण स्टाम्प ड्यूटी की देनदारी तय करने के लिए निर्णायक नहीं है, क्योंकि मूल्यांकन करते समय प्रॉपर्टी का असल इस्तेमाल ही मुख्य बात होती है।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने स्टाम्प मूल्यांकन के मकसद से प्रॉपर्टी को कमर्शियल माना था, सिर्फ़ इसलिए कि मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी के अलावा, प्रॉपर्टी का इस्तेमाल बने हुए उत्पादों को बेचने के लिए भी किया...