सबरीमाला संदर्भित मुद्दों पर 7 अप्रैल से सुनवाई करेगी सुप्रीम कोर्ट की 9-जजों की खंडपीठ
Praveen Mishra
16 Feb 2026 1:01 PM IST

सुप्रीम कोर्ट की 9-न्यायाधीशों की संविधान पीठ सबरीमाला मामले की समीक्षा याचिकाओं से जुड़े संदर्भित मुद्दों पर 7 अप्रैल 2026 से सुनवाई शुरू करेगी, जो 22 अप्रैल 2026 तक जारी रहने की संभावना है। खंडपीठ की संरचना मुख्य न्यायाधीश द्वारा अलग से प्रशासनिक आदेश के माध्यम से अधिसूचित की जाएगी।
चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की तीन-न्यायाधीशों की खंडपीठ ने आज यह आदेश पारित किया कि मामले को 9-न्यायाधीशों की बड़ी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए।
सुनवाई का कार्यक्रम
7 से 9 अप्रैल: समीक्षा के समर्थन में पक्षकारों की दलीलें
14 से 16 अप्रैल: समीक्षा के विरोध में पक्षकारों की दलीलें
21 अप्रैल: प्रत्युत्तर (Rejoinder)
22 अप्रैल: सुनवाई समाप्त होने की संभावना
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार सबरीमाला फैसले की समीक्षा का समर्थन कर रही है।
किन मामलों से जुड़ा है विवाद
तीन-न्यायाधीशों की खंडपीठ 2018 के उस ऐतिहासिक फैसले से उत्पन्न समीक्षा और रिट याचिकाओं के समूह पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मासिक धर्म आयु की महिलाओं को केरल स्थित सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई थी।
इसके साथ-साथ अन्य संबंधित मुद्दे भी सूचीबद्ध थे, जिनमें शामिल हैं:
मस्जिदों/दरगाहों में मुस्लिम महिलाओं के प्रवेश का अधिकार
गैर-पारसी से विवाह करने वाली पारसी महिलाओं का अग्नि मंदिरों में प्रवेश
दाऊदी बोहरा समुदाय में बहिष्कार (excommunication) की प्रथा
महिला जननांग विकृति (FGM) की वैधता
2018 का ऐतिहासिक फैसला
सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने 4:1 के बहुमत से सभी आयु वर्ग की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी थी। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति आर. एफ. नरीमन, न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ बहुमत में थे, जबकि न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा ने असहमति व्यक्त की थी।
बहुमत के निर्णय में कहा गया था कि “भक्ति को लैंगिक भेदभाव के अधीन नहीं रखा जा सकता।” साथ ही, केरल हिंदू सार्वजनिक पूजा स्थल (प्रवेश प्राधिकरण) नियम, 1965 के नियम 3(b), जो महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगाता था, को असंवैधानिक घोषित कर दिया गया।
2019 में बड़ी पीठ को संदर्भ
नवंबर 2019 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5-न्यायाधीशों की पीठ ने 3:2 बहुमत से कहा कि सबरीमाला समीक्षा से जुड़े कुछ प्रश्न अन्य मामलों से भी संबंधित हैं, इसलिए इन मुद्दों को बड़ी पीठ द्वारा तय किया जाना चाहिए। अल्पमत में न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति नरीमन थे।
9-जजों की खंडपीठ और प्रमुख प्रश्न
जनवरी 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने 9-न्यायाधीशों की संविधान पीठ गठित की, जिसने यह माना कि समीक्षा में भी कानून के प्रश्न बड़ी पीठ को भेजे जा सकते हैं। पीठ ने सात महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न तय किए, जिनमें प्रमुख हैं:
अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का दायरा
अनुच्छेद 25 और 26 के बीच संबंध
धार्मिक संप्रदायों के अधिकारों की सीमा
“नैतिकता” (Morality) का अर्थ — क्या इसमें संवैधानिक नैतिकता शामिल है?
धार्मिक प्रथाओं पर न्यायिक समीक्षा की सीमा
अनुच्छेद 25(2)(b) में “हिंदुओं के वर्ग” का अर्थ
क्या कोई बाहरी व्यक्ति PIL के माध्यम से धार्मिक प्रथा को चुनौती दे सकता है?
अन्य मुद्दे भी शामिल
फरवरी 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने दाऊदी बोहरा समुदाय में बहिष्कार की प्रथा की वैधता से संबंधित प्रश्न भी इसी 9-जजों की खंडपीठ को भेज दिया।
इस प्रकार, अप्रैल 2026 में होने वाली सुनवाई केवल सबरीमाला तक सीमित नहीं होगी, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता, लैंगिक समानता और संवैधानिक नैतिकता से जुड़े व्यापक संवैधानिक प्रश्नों पर महत्वपूर्ण निर्णय की दिशा तय कर सकती है।

