इलाहाबाद हाईकोट

बलात्कार की कोशिश के बीच हुई हत्या: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सजा बदली, उम्रकैद हटाकर दी राहत
बलात्कार की कोशिश के बीच हुई हत्या: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सजा बदली, उम्रकैद हटाकर दी राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसले में चार आरोपियों की सजा में बदलाव करते हुए हत्या के अपराध को कम गंभीर अपराध में बदल दिया। अदालत ने कहा कि घटना अचानक हुई थी और पूर्व नियोजित नहीं थी, इसलिए इसे हत्या नहीं बल्कि गैर इरादतन हत्या माना जाएगा।जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने पाया कि मृतक द्वारा आरोपियों की बेटी/बहन के साथ बलात्कार का प्रयास किए जाने के दौरान यह घटना हुई थी। इस आधार पर अदालत ने उम्रकैद की सजा को घटाकर उतनी अवधि तक सीमित कर दिया जितनी सजा आरोपी पहले ही काट...

चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के आदेश के खिलाफ हेबियस कॉर्पस याचिका नहीं चलेगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के आदेश के खिलाफ हेबियस कॉर्पस याचिका नहीं चलेगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के आदेश के तहत रखा गया तो उसके खिलाफ हेबियस कॉर्पस याचिका दाखिल नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में विधि के तहत अलग से अपील और पुनरीक्षण का प्रावधान मौजूद है।जस्टिस संदीप जैन ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब किसी व्यक्ति की हिरासत किसी सक्षम प्राधिकरण या चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के वैध आदेश के आधार पर होती है तो उसे हेबियस कॉर्पस याचिका के माध्यम से चुनौती नहीं दी जा सकती।अदालत ने अपने फैसले में कहा,“यदि किसी...

बिना टिकट 59 यात्रियों को ले जाना भारी पड़ा, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बस कंडक्टर की बर्खास्तगी बरकरार रखी
बिना टिकट 59 यात्रियों को ले जाना भारी पड़ा, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बस कंडक्टर की बर्खास्तगी बरकरार रखी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बस कंडक्टर की बर्खास्तगी को सही ठहराते हुए कहा है कि बिना टिकट यात्रियों को ले जाना गंभीर कदाचार है और ऐसे कर्मचारी को सेवा में बनाए रखना उचित नहीं है।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि कंडक्टर के खिलाफ विभागीय कार्यवाही पूरी प्रक्रिया के अनुसार की गई और उसे अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया। इसलिए अदालत हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं देखती।मामले के अनुसार याचिकाकर्ता फैजाबाद से अकबरपुर के बीच चलने वाली बस में कंडक्टर था। निरीक्षण के दौरान पाया...

48 साल पुरानी अपील खारिज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- बिना महत्वपूर्ण विधिक प्रश्न के साक्ष्य दोबारा नहीं परखे जा सकते
48 साल पुरानी अपील खारिज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- बिना महत्वपूर्ण विधिक प्रश्न के साक्ष्य दोबारा नहीं परखे जा सकते

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 48 वर्ष पुरानी दूसरी अपील खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यदि किसी मामले में कोई महत्वपूर्ण विधिक प्रश्न नहीं उठता तो अदालत साक्ष्यों का पुनर्मूल्यांकन नहीं कर सकती।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने अपने फैसले में कहा कि दूसरी अपील केवल उन्हीं मामलों में स्वीकार की जा सकती है जहां कोई ठोस विधिक प्रश्न मौजूद हो।अदालत ने कहा,“जब इस न्यायालय को यह स्पष्ट हो गया कि इस अपील में कोई महत्वपूर्ण विधिक प्रश्न नहीं है तब साक्ष्यों का दोबारा परीक्षण करने का कोई औचित्य नहीं बनता।”यह अपील वर्ष...

स्कूल बस परमिट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त: केवल अभिभावकों से समझौता नहीं, स्कूल से अनुबंध जरूरी
स्कूल बस परमिट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त: केवल अभिभावकों से समझौता नहीं, स्कूल से अनुबंध जरूरी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल बसों के संचालन को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि बच्चों के परिवहन के लिए निजी बस संचालकों को स्कूल से औपचारिक समझौता करना अनिवार्य है। केवल अभिभावकों के साथ किया गया समझौता परमिट पाने के लिए पर्याप्त नहीं माना जाएगा।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है।अदालत ने कहा,“बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसे ध्यान में रखते हुए बनाए...

पत्नी से भरण-पोषण मांगने वाले पति पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, झूठे हलफनामे देने पर लगाया 15 लाख रुपये का जुर्माना
पत्नी से भरण-पोषण मांगने वाले पति पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, झूठे हलफनामे देने पर लगाया 15 लाख रुपये का जुर्माना

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में पत्नी से भरण-पोषण मांगने वाले पति पर 15 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया। अदालत ने पाया कि पति ने अपनी आय छिपाने और खुद को बेरोजगार बताने के लिए झूठे हलफनामे दाखिल किए।जस्टिस विनोद दिवाकर ने कहा कि पति की याचिका में कोई सच्चाई नहीं है और वह अदालत की निगरानी अधिकार का लाभ पाने के योग्य नहीं है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि याचिका को खारिज किया जाता है और 15 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि छह सप्ताह के भीतर पत्नी को दी जाए।मामले में पति ने दावा किया था कि वह...

सिर्फ़ FIR के आधार पर हथियार का लाइसेंस रद्द नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
सिर्फ़ FIR के आधार पर हथियार का लाइसेंस रद्द नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि हथियार का लाइसेंस सिर्फ़ FIR के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता, जब तक कि उसमें हथियार के गलत इस्तेमाल या उसे चलाने का कोई ज़िक्र न हो।इलाहाबाद हाईकोर्ट के पिछले फ़ैसले राजीव कुमार @ मोनू शुक्ला बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (प्रधान सचिव, गृह और अन्य के ज़रिए) पर भरोसा करते हुए जस्टिस इरशाद अली ने कहा:“यह बिल्कुल साफ़ है कि सिर्फ़ FIR के आधार पर—जहां साफ़ तौर पर हथियार का कभी इस्तेमाल नहीं हुआ और हथियार के गलत इस्तेमाल के कोई आरोप नहीं हैं—लाइसेंस रद्द नहीं किया जा...

लेटर ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन जारी करने के लिए पूरी कोर्ट फीस तभी देनी होगी, जब अर्जी मंजूर हो जाए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
लेटर ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन जारी करने के लिए पूरी कोर्ट फीस तभी देनी होगी, जब अर्जी मंजूर हो जाए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि जब लेटर ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन जारी करने के लिए अर्जी दी जाती है तो सिर्फ़ 25 रुपये की कोर्ट फीस देनी होती है। कोर्ट ने कहा कि पूरी कोर्ट फीस तभी देनी होगी, जब कोर्ट उस अर्जी को मंजूर कर ले।जस्टिस संदीप जैन ने फैसला दिया:“इंडियन सक्सेशन एक्ट की धारा 276 के तहत लेटर ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन मांगने वाली अर्जी देते समय 25 रुपये की टोकन राशि देनी होती है, और जब कोर्ट उस अर्जी को मंजूर कर लेता है, तभी याचिकाकर्ता को लेटर ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन असल में जारी करवाने के लिए पूरी...

ससुर से वसूली पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक, विधवा बहू के भरण-पोषण बकाया विवाद में अंतरिम राहत
ससुर से वसूली पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक, विधवा बहू के भरण-पोषण बकाया विवाद में अंतरिम राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण मामले में ससुर के खिलाफ जारी वसूली वारंट पर रोक लगाई। यह मामला मृत पति के जीवनकाल के दौरान बकाया भरण-पोषण राशि को लेकर विधवा बहू द्वारा की गई वसूली से जुड़ा है।जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की सिंगल बेंच ने यह अंतरिम आदेश पारित करते हुए ससुर को राहत दी। हालांकि अदालत ने शर्त रखी कि वह विवादित राशि का आधा हिस्सा निचली अदालत में जमा करेंगे, तभी यह रोक प्रभावी रहेगी।मामले के अनुसार, वर्ष 2016 में विधवा बहू ने अपने पति के जीवित रहते हुए दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की...

पत्रकारिता करने से शिक्षक की नौकरी पर रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला
पत्रकारिता करने से शिक्षक की नौकरी पर रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा संस्थानों में शिक्षक नियुक्ति या सेवा के लिए पत्रकारिता में संलिप्त होना कोई बाधा नहीं है। अदालत ने कहा कि लागू नियमों में ऐसी कोई मनाही नहीं है।जस्टिस इरशाद अली ने अपने फैसले में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1956 बेसिक शिक्षा के शिक्षकों पर लागू नहीं होती। उनके सेवा नियम उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियम 1981 द्वारा संचालित होते हैं, जिनमें पत्रकारिता करने पर कोई प्रतिबंध नहीं है।मामला एक सहायक शिक्षक...

रुकावट दूर करने के लिए प्रमोशन देने वाली सरकारी नीति को समान रूप से लागू किया जाना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
रुकावट दूर करने के लिए प्रमोशन देने वाली सरकारी नीति को समान रूप से लागू किया जाना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

रेवेन्यू बोर्ड में काम करने वाले टेलीफ़ोन ऑपरेटरों को सिविल सेक्रेटेरिएट में लोअर डिवीज़न असिस्टेंट के पद पर प्रमोट करने के मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि रुकावट दूर करने के लिए प्रमोशन देने वाली सरकारी नीति को एक समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।यूपी रेवेन्यू बोर्ड मिनिस्टीरियल सर्विस रूल्स, 1983 रेवेन्यू बोर्ड में काम करने वाले कर्मचारियों की सेवा शर्तों को नियंत्रित करते हैं। हालांकि, इनमें टेलीफ़ोन ऑपरेटरों का पद शामिल नहीं है, जिसे 1986 में मंज़ूरी दी गई। चूंकि...

माँ की मृत्यु के बाद पिता ही स्वाभाविक अभिभावक होता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार की
माँ की मृत्यु के बाद पिता ही स्वाभाविक अभिभावक होता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि माँ की मृत्यु के बाद पिता ही स्वाभाविक अभिभावक होता है और आमतौर पर नाबालिग के कल्याण की देखभाल करने के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति होता है।जस्टिस संदीप जैन की पीठ ने इस प्रकार एक पिता द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas corpus) याचिका स्वीकार की और 13 महीने के बच्चे के ननिहाल पक्ष के रिश्तेदारों को निर्देश दिया कि वे बच्चे की कस्टडी याचिकाकर्ता को सौंप दें।याचिकाकर्ता-पिता का पक्ष यह था कि उसकी पत्नी (बच्चे की माँ) की मृत्यु पिछले साल फरवरी में हो गई, और तब...

पहली मैटरनिटी लीव के 2 साल के अंदर दूसरी मैटरनिटी लीव पर कोई रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पहली मैटरनिटी लीव के 2 साल के अंदर दूसरी मैटरनिटी लीव पर कोई रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि पहली मैटरनिटी लीव के 2 साल के अंदर किसी महिला द्वारा दूसरी मैटरनिटी लीव मांगने पर कोई रोक नहीं है।इलाहाबाद हाईकोर्ट के पिछले फैसले, 'अनुपम यादव और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य' पर भरोसा करते हुए जस्टिस करुणेश सिंह पवार ने कहा,"अनुपम यादव (उपर्युक्त) मामले में जैसा कि फैसले को पढ़ने से साफ पता चलता है, किसी कर्मचारी के लिए पहली मैटरनिटी लीव मिलने के दो साल के अंदर दूसरी मैटरनिटी लीव का लाभ मांगने पर कोई रोक नहीं है।"याचिकाकर्ता ने अपनी दूसरी मैटरनिटी लीव...

UP Goonda Act: सिर्फ दो मुकदमों से किसी को गुंडा नहीं कहा जा सकता- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश रद्द किया
UP Goonda Act: सिर्फ दो मुकदमों से किसी को गुंडा नहीं कहा जा सकता- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश रद्द किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल एक या दो आपराधिक मामलों के आधार पर किसी व्यक्ति को 'गुंडा' घोषित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि ऐसा करना व्यक्ति और उसके परिवार की प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंचाता है।जस्टिस संदीप जैन की एकल पीठ ने यह टिप्पणी याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें छह महीने के बाहरीकरण आदेश को चुनौती दी गई। यह आदेश बुलंदशहर के एडिशनल जिला मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व) द्वारा पारित किया गया, जिसे मेरठ मंडल के आयुक्त ने भी बरकरार रखा था।प्रशासन ने...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने थारू समुदाय को दी राहत, कहा- वन अधिकार अधिनियम मौजूदा अधिकारों को मान्यता देता है, पिछले अदालती आदेशों को रद्द करता है
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने थारू समुदाय को दी राहत, कहा- वन अधिकार अधिनियम मौजूदा अधिकारों को मान्यता देता है, पिछले अदालती आदेशों को रद्द करता है

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अधिकारी वन अधिकार अधिनियम, 2006 के लागू होने से पहले जारी किए गए अदालती आदेशों पर आँख मूंदकर भरोसा करके जंगल में रहने वालों के मौजूदा कानूनी अधिकारों को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने इस तरह लखीमपुर की ज़िला स्तरीय समिति द्वारा 2021 में पारित आदेश रद्द किया। इस आदेश में समिति ने 'थारू' समुदाय के 107 सदस्यों के वन अधिकारों - विशेष रूप से अपनी आजीविका के लिए छोटे वन उत्पादों को इकट्ठा करने और उनका उपयोग...

गौवध जीवन की सामान्य गति को बाधित करता है, स्वतः ही हिंसक प्रतिक्रियाएं भड़काती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NSA के तहत हिरासत को सही ठहराया
गौवध 'जीवन की सामान्य गति' को बाधित करता है, स्वतः ही हिंसक प्रतिक्रियाएं भड़काती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NSA के तहत हिरासत को सही ठहराया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA), 1980 के तहत व्यक्ति की हिरासत को सही ठहराया। इस व्यक्ति पर 2025 में होली के समय के आसपास जंगल में एक गाय और दो बछड़ों की हत्या करने का आरोप है।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस संजीव कुमार की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि गाय की हत्या स्वतः ही तीव्र भावनाएं और हिंसक प्रतिक्रियाएं भड़काती है, क्योंकि इससे समाज के एक बड़े वर्ग की धार्मिक भावनाओं को स्पष्ट रूप से ठेस पहुंचती है।कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसे कृत्य के समाज में तत्काल और व्यापक परिणाम...

अगर आप पत्नी और बच्चों का खर्च नहीं उठा सकते तो शादी ही न करें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खराब आर्थिक हालत का हवाला देकर पति की अर्जी खारिज की
अगर आप पत्नी और बच्चों का खर्च नहीं उठा सकते तो शादी ही न करें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खराब आर्थिक हालत का हवाला देकर पति की अर्जी खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि जो पुरुष यह महसूस करते हैं कि अगर शादीशुदा ज़िंदगी में खटास आ जाए तो वे पत्नी और बच्चों का खर्च नहीं उठा पाएंगे, उन्हें तो शुरू में शादी ही नहीं करनी चाहिए।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सरन की बेंच ने आगे कहा कि कोई भी पुरुष अपनी पत्नी के भरण-पोषण की ज़िम्मेदारी से बचने के लिए अपनी खराब आर्थिक हालत का बहाना नहीं बना सकता।हाईकोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया,"एक बार जब कोई पुरुष किसी महिला से शादी कर लेता है तो कानून के तहत उसका भरण-पोषण करना उसकी...

राहुल गांधी नागरिकता विवाद: अदालत की छवि धूमिल- सोशल मीडिया पोस्ट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार, जज ने खुद को किया अलग
राहुल गांधी नागरिकता विवाद: 'अदालत की छवि धूमिल'- सोशल मीडिया पोस्ट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार, जज ने खुद को किया अलग

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने सोमवार को भाजपा कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर द्वारा दायर उस याचिका की सुनवाई से खुद को अलग (recuse) कर लिया, जिसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ कथित ब्रिटिश नागरिकता को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। यह निर्णय तब आया जब अदालत ने याचिकाकर्ता द्वारा सोशल मीडिया और मीडिया में दिए गए बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई, जिन्हें अदालत ने अपनी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बताया।सुनवाई के दौरान जस्टिस विद्यार्थी ने मौखिक रूप से...

बीमारी की पर्ची विवाद में वकील को राहत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ₹20K का जुर्माना माफ किया, माफी के बाद प्रतिकूल टिप्पणियां हटाईं
'बीमारी की पर्ची' विवाद में वकील को राहत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ₹20K का जुर्माना माफ किया, माफी के बाद प्रतिकूल टिप्पणियां हटाईं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते एक वकील के ख़िलाफ़ पहले की गई अपनी प्रतिकूल टिप्पणियां हटा दीं। इस वकील ने उसी दिन किसी दूसरी कोर्ट में अन्य मामले में पेश होते हुए इस कोर्ट में 'बीमारी की पर्ची' भेजकर कोर्ट को धोखा देने की कोशिश की थी।वकील द्वारा दी गई बिना शर्त मौखिक माफी स्वीकार करते हुए जस्टिस गौतम चौधरी की बेंच ने 24 मार्च, 2026 को पारित आदेश में वकील पर लगाए गए ₹20,000/- के जुर्माने को भी माफ किया।हाईकोर्ट के 17 अप्रैल के आदेश में कहा गया,"वर्तमान संशोधन आवेदन के समर्थन में दायर हलफनामे...