इलाहाबाद हाईकोट

वकालतनामे पर हस्ताक्षर विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फॉरेंसिक जांच के दिए आदेश
वकालतनामे पर हस्ताक्षर विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फॉरेंसिक जांच के दिए आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजीपुर स्थित नेहरू विद्यापीठ इंटर कॉलेज के प्रबंधन से जुड़े मामले में विवादित वकालतनामे पर किए गए हस्ताक्षरों की फॉरेंसिक जांच कराने का आदेश दिया है। अदालत के समक्ष एक पक्षकार ने दावा किया कि उसने न तो वकालतनामे पर हस्ताक्षर किए और न ही संबंधित अधिवक्ता को अपनी ओर से पेश होने के लिए अधिकृत किया था।जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की एकलपीठ के समक्ष यह विवाद पुनर्विचार याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ता शिव शंकर सिंह ने कहा कि उन्होंने संबंधित अधिवक्ता को कभी नियुक्त नहीं...

चुनाव याचिका में जाति प्रमाणपत्र की वैधता की जांच नहीं कर सकता चुनाव न्यायाधिकरण: इलाहाबाद हाईकोर्ट
चुनाव याचिका में जाति प्रमाणपत्र की वैधता की जांच नहीं कर सकता चुनाव न्यायाधिकरण: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि चुनाव याचिका की सुनवाई के दौरान चुनाव न्यायाधिकरण किसी जाति प्रमाणपत्र की वैधता की जांच नहीं कर सकता और न ही उसे फर्जी घोषित करने का अधिकार रखता है।जस्टिस नीरज तिवारी ने स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाणपत्र की वैधता तय करने या उसे निरस्त करने का अधिकार केवल राज्य सरकार द्वारा गठित जिला, मंडलीय और राज्य स्तरीय जांच समितियों को है। चुनाव न्यायाधिकरण इस विषय पर निर्णय देने का अधिकार नहीं रखता।कोर्ट ने कहा,"अब यह पूरी तरह...

IPC की धारा 307 के तहत जुर्माना न लगाना सज़ा सुनाने में गलती, दोषी की अपील पर इसे सुधारा नहीं जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
IPC की धारा 307 के तहत जुर्माना न लगाना सज़ा सुनाने में गलती, दोषी की अपील पर इसे सुधारा नहीं जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 307 (हत्या की कोशिश) के तहत दोषी ठहराए जाने पर ट्रायल कोर्ट के लिए जेल की सज़ा के साथ जुर्माना लगाना ज़रूरी है और ऐसा न करना सज़ा सुनाने में एक गलती है।हालांकि, जस्टिस संतोष राय की बेंच ने साफ़ किया कि अगर राज्य या शिकायतकर्ता ने जुर्माना लगाकर सज़ा बढ़ाने की अपील नहीं की है, तो हाई कोर्ट सिर्फ़ दोषी की अपील पर इस कमी को ठीक नहीं कर सकता।बेंच ने कहा,"CrPC की धारा 374 के तहत सिर्फ़ दोषी की अपील पर CrPC की धारा 386 के तहत अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए, यह कोर्ट...

बच्चे की कस्टडी आर्थिक रूप से सक्षम होने का दावा कर दी, तो पूरा भरण-पोषण पिता पर नहीं डाला जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
बच्चे की कस्टडी आर्थिक रूप से सक्षम होने का दावा कर दी, तो पूरा भरण-पोषण पिता पर नहीं डाला जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई कामकाजी मां अपनी आर्थिक क्षमता का दावा करते हुए नाबालिग बच्चे की कस्टडी प्राप्त करती है तो बाद में वह बच्चे के भरण-पोषण का पूरा वित्तीय बोझ केवल पिता पर नहीं डाल सकती। यदि मां भी पर्याप्त आय अर्जित कर रही है, तो बच्चे के खर्च दोनों माता-पिता अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार वहन करेंगे।जस्टिस लक्ष्मी कांत शुक्ला ने यह टिप्पणी करते हुए एक महिला और उसकी नाबालिग बेटी की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज की। याचिका में फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें महिला...

1981 हत्या मामला: 12 लोगों पर एक साथ गोली चलाने का आरोप, लेकिन शव पर मिलीं सिर्फ 3 गोली की चोटें, हाईकोर्ट ने 3 दोषियों को किया बरी
1981 हत्या मामला: 12 लोगों पर एक साथ गोली चलाने का आरोप, लेकिन शव पर मिलीं सिर्फ 3 गोली की चोटें, हाईकोर्ट ने 3 दोषियों को किया बरी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्ष 1981 के चर्चित हत्या मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन जीवित अपीलकर्ताओं को सभी आरोपों से बरी किया। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन का दावा था कि 12 आरोपियों ने एक साथ मृतक पर गोलियां चलाई थीं जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर केवल तीन प्रवेश घाव और एक निकास घाव मिला। कोर्ट ने इसे अभियोजन के प्रत्यक्षदर्शी बयान और चिकित्सकीय साक्ष्य के बीच गंभीर विरोधाभास मानते हुए दोषसिद्धि को टिकाऊ नहीं माना।जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने वर्ष 1984...

1981 में पिता पर एसिड अटैक |ट्रायल जज के हत्या के आरोप को नज़रअंदाज़ करने और बेटे को सिर्फ़ 3 साल की सज़ा सुनाने पर हाईकोर्ट ने जताई नाराज़गी
1981 में पिता पर एसिड अटैक |ट्रायल जज के हत्या के आरोप को नज़रअंदाज़ करने और बेटे को सिर्फ़ 3 साल की सज़ा सुनाने पर हाईकोर्ट ने जताई नाराज़गी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को गोरखपुर की ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले पर "गहरा दुख" जताया। इस फ़ैसले में एक व्यक्ति को IPC की धारा 326 के तहत दोषी ठहराया गया और अपने ही पिता पर एसिड डालकर उनकी जान लेने के लिए सिर्फ़ 3 साल की सज़ा सुनाई गई।जस्टिस संतोष राय की बेंच ने कहा,"...ट्रायल जज ने सबूतों को गलत तरीके से समझा और हत्या/गैर-इरादतन हत्या के अपराध से जुड़े तय सिद्धांतों को लागू करने में पूरी तरह नाकाम रहे। उन्होंने सिर्फ़ IPC की धारा 326 के तहत दोषी ठहराया और सिर्फ़ तीन साल की कठोर सज़ा सुनाई।" ...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ₹2,161 करोड़ के कथित शराब घोटाले से जुड़ी FIR में छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त को ज़मानत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ₹2,161 करोड़ के कथित शराब घोटाले से जुड़ी FIR में छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त को ज़मानत दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ₹2,161 करोड़ के कथित छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़ी उत्तर प्रदेश की FIR में छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को ज़मानत दी।जस्टिस विक्रम डी. चौहान ने कहा:"अगर आरोपी ज़मानत का हकदार है तो उसे सिर्फ़ आपराधिक इतिहास के आधार पर ज़मानत देने से मना नहीं किया जा सकता। आरोपी को ज़मानत देने से मना करने के लिए आपराधिक इतिहास के आधार पर कोई खास वजह नहीं बताई गई। इसलिए कोर्ट को यह सही नहीं लगता कि सिर्फ़ इस आधार पर कि उनका आपराधिक इतिहास रहा है, आवेदक को ज़मानत देने से मना...

नाबालिग के साथ गैंग-रेप के 47 साल बाद दोषी ठहराए जाने का फ़ैसला बरकरार: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 71 साल के व्यक्ति की जेल की सज़ा कम की
नाबालिग के साथ गैंग-रेप के 47 साल बाद दोषी ठहराए जाने का फ़ैसला बरकरार: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 71 साल के व्यक्ति की जेल की सज़ा कम की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को 1979 के नाबालिग के साथ गैंग-रेप के मामले में एक व्यक्ति को दोषी ठहराए जाने का फ़ैसला बरकरार रखा, लेकिन उसकी मुख्य सज़ा को 7.5 साल से घटाकर 4 साल की कठोर कारावास (RI) कर दिया।जस्टिस संतोष राय की बेंच ने आपराधिक अपील के 43 साल से लंबित रहने और जीवित दोषी की उम्र (71 साल) को ध्यान में रखते हुए सज़ा में बदलाव किया।इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपी-अपीलकर्ता द्वारा दायर आपराधिक अपील को आंशिक रूप से मंज़ूरी दे दी। उसे सरेंडर करने और बाकी बची सज़ा काटने का निर्देश दिया...

ऑनलाइन बिक रहा है चाइनीज मांझा? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से मांगी जांच रिपोर्ट
ऑनलाइन बिक रहा है चाइनीज मांझा? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से मांगी जांच रिपोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को यह जांच करने का निर्देश दिया कि प्रतिबंध के बावजूद क्या चाइनीज मांझा अब भी ऑनलाइन मंचों के माध्यम से बेचा जा रहा है।जस्टिस राजन राय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ वर्ष 2018 से लंबित जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।इन याचिकाओं में उत्तर प्रदेश में चाइनीज मांझे के आयात, बिक्री और उपयोग पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की गई।सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि चाइनीज मांझा ऑनलाइन उपलब्ध है और इस संबंध में एक समाचार पत्र में भी रिपोर्ट प्रकाशित हुई।इस...

सगा बेटा भरण-पोषण दे रहा है तो सौतेले बेटे से दोबारा गुजारा भत्ता नहीं मांग सकती मां: इलाहाबाद हाईकोर्ट
सगा बेटा भरण-पोषण दे रहा है तो सौतेले बेटे से दोबारा गुजारा भत्ता नहीं मांग सकती मां: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी मां को दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत उसके सगे बेटे से भरण-पोषण मिल रहा है, तो वह उसी उद्देश्य के लिए बाद में अपने सौतेले बेटे से अलग से भरण-पोषण की मांग नहीं कर सकती।जस्टिस लक्ष्मी कांत शुक्ला ने एक महिला की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।बता दें महिला ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश में संशोधन की मांग की थी जिसमें उसके सगे बेटे को 8,000 रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया जबकि सौतेले बेटे पर कोई जिम्मेदारी नहीं...

RWA के रोजमर्रा के विवादों पर सीधे याचिका नहीं चलेगी: हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से शिकायत निवारण व्यवस्था बनाने को कहा
RWA के रोजमर्रा के विवादों पर सीधे याचिका नहीं चलेगी: हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से शिकायत निवारण व्यवस्था बनाने को कहा

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के रोजमर्रा के प्रबंधन से जुड़े विवादों को लेकर सीधे संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर नहीं की जा सकती।कोर्ट ने साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट (निर्माण संवर्धन, स्वामित्व एवं अनुरक्षण) अधिनियम, 2010 के तहत ऐसे विवादों के निपटारे के लिए सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से औपचारिक शिकायत निवारण व्यवस्था विकसित करने पर विचार करे।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस...

जमानत याचिका में 10 दिन की देरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, यूपी सरकार पर लगाया ₹50,000 जुर्माना
जमानत याचिका में 10 दिन की देरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, यूपी सरकार पर लगाया ₹50,000 जुर्माना

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक जमानत याचिका के निस्तारण में पुलिस अधिकारियों की लापरवाही के कारण हुई 10 दिन से अधिक की देरी पर उत्तर प्रदेश सरकार पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया है। अदालत ने निर्देश दिया कि यह राशि याचिकाकर्ताओं को अदा की जाए। साथ ही राज्य सरकार को जांच के बाद संबंधित पुलिस अधिकारियों से यह राशि वसूलने की स्वतंत्रता भी दी।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ दहेज मृत्यु के एक मामले में आरोपी सास-ससुर की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई पर्याप्त साक्ष्य...

विज्ञापन जारी होने के साथ ही भर्ती प्रक्रिया शुरू हो जाती है, बाद में लागू कानून उस पर लागू नहीं होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
विज्ञापन जारी होने के साथ ही भर्ती प्रक्रिया शुरू हो जाती है, बाद में लागू कानून उस पर लागू नहीं होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत नियुक्ति की मंजूरी से नहीं, बल्कि विज्ञापन जारी होने की तारीख से मानी जाएगी। अदालत ने कहा कि यदि भर्ती का विज्ञापन किसी नए कानून के लागू होने से पहले जारी हो चुका है, तो बाद में लागू हुआ कानून उस भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करेगा।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने सुप्रीम कोर्ट के तेज प्रकाश पाठक बनाम राजस्थान हाईकोर्ट फैसले का हवाला देते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया विज्ञापन जारी होने से शुरू होकर अधिसूचित रिक्तियों को भरने तक चलती...

अगर ट्रायल के दौरान पीड़ित पक्ष बदल ले तो सिर्फ़ CrPC की धारा 164 के तहत दिए गए बयान के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
अगर ट्रायल के दौरान पीड़ित पक्ष बदल ले तो सिर्फ़ CrPC की धारा 164 के तहत दिए गए बयान के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने कहा कि अगर ट्रायल के दौरान पीड़ित और अभियोजन पक्ष के अन्य गवाह अपनी बात से मुकर जाते हैं (होस्टाइल हो जाते हैं) तो आरोपी को सिर्फ़ CrPC की धारा 164 के तहत दर्ज बयान के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता।अपहरण के मामले में 2011 में ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सज़ा रद्द करते हुए जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने कहा कि चूंकि CrPC की धारा 164 के तहत बयान आरोपी की मौजूदगी में दर्ज नहीं किया जाता है, इसलिए उसे गवाह से जिरह (क्रॉस-एग्जामिनेशन) करने का मौका नहीं मिलता...

हाईकोर्ट का यूपी कोर्ट्स को निर्देश: अगर दहेज हत्या का मामला हत्या जैसा लगे तो मुख्य आरोप हत्या का और वैकल्पिक आरोप दहेज हत्या का तय करें
हाईकोर्ट का यूपी कोर्ट्स को निर्देश: अगर 'दहेज हत्या' का मामला हत्या जैसा लगे तो मुख्य आरोप हत्या का और वैकल्पिक आरोप दहेज हत्या का तय करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश की सभी निचली अदालतों (ट्रायल कोर्ट) को एक ज़रूरी निर्देश जारी किया। निर्देश के मुताबिक, अगर जांच के दौरान मिले सबूतों से पता चलता है कि ससुराल में हुई मौत 'हत्या' (homicidal) थी, तो मुख्य आरोप IPC की धारा 302 (हत्या) के तहत और वैकल्पिक आरोप IPC की धारा 304-B ​​(दहेज हत्या) के तहत तय किया जाना चाहिए।जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस डॉ. अजय कुमार-II की बेंच ने यह निर्देश ऐसे मामले पर नाराज़गी जताते हुए जारी किया, जिसमें जांच अधिकारी और ट्रायल कोर्ट के जज दोनों ने...

पति की नेट इनकम का 25% गुज़ारा-भत्ता तय करना ज़रूरी नहीं; कोर्ट कम या ज़्यादा भी दे सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पति की नेट इनकम का 25% गुज़ारा-भत्ता तय करना ज़रूरी नहीं; कोर्ट कम या ज़्यादा भी दे सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी को पति की नेट सैलरी का 25% गुज़ारा-भत्ता देने का जो पैमाना (बेंचमार्क) अक्सर इस्तेमाल किया जाता है, वह सिर्फ़ एक "सामान्य गाइडलाइन" है, न कि कोई अनिवार्य नियम।जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने साफ़ किया कि हर मामले के तथ्यों के आधार पर कोर्ट के पास कम या ज़्यादा भत्ता तय करने का अधिकार है।कोर्ट ने यह भी साफ़ किया कि गुज़ारा-भत्ता तय करने के लिए "नेट इनकम" का मतलब आम तौर पर ज़रूरी कटौतियों और टैक्स के बाद बची हुई इनकम से होता है, न कि ग्रॉस सैलरी से।कोर्ट असल में दो...

इलेक्ट्रोहोम्योपैथी का सर्टिफिकेट लेकर एलोपैथी नहीं कर सकते, बिना मान्यता इलाज करना झोलाछाप डॉक्टरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलेक्ट्रोहोम्योपैथी का सर्टिफिकेट लेकर एलोपैथी नहीं कर सकते, बिना मान्यता इलाज करना झोलाछाप डॉक्टरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल इलेक्ट्रोहोम्योपैथी का सर्टिफिकेट रखने वाला व्यक्ति एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति से मरीजों का इलाज नहीं कर सकता।अदालत ने कहा कि मान्यता प्राप्त मेडिकल योग्यता के बिना एलोपैथी करना झोलाछाप डॉक्टरी है और ऐसे लोगों को मरीजों का इलाज करने की अनुमति देना जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने एटा के चीफ मेडिकल ऑफिसर द्वारा एक प्राइवेट अस्पताल को सील किए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए यह...