इलाहाबाद हाईकोट

काम के बोझ की आड़ नहीं ले सकते: रिमांड में मजिस्ट्रेट की लापरवाही पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, ट्रेनिंग मॉड्यूल तैयार करने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिमांड की अर्जियों की उचित जांच किए बिना आरोपियों को नियमित रूप से पुलिस या न्यायिक हिरासत में भेजने की घटनाओं पर चिंता जताते हुए ज्यूडिशियल ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (JTRI) लखनऊ को मजिस्ट्रेटों के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने और जल्द-से-जल्द उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट रिमांड की कार्यवाही के दौरान न्यायिक काम के अत्यधिक बोझ का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते, क्योंकि ऐसे मामलों का सीधा संबंध संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 के...

रिटायरमेंट के समय लिया गया इंडेंनिटी बॉन्ड राज्य को गलत तरीके से तय किए गए वेतन की वसूली करने का अधिकार नहीं देता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी से उसके रिटायरमेंट के समय लिया गया कोई 'अंडरटेकिंग' या 'इंडेंनिटी बॉन्ड' राज्य को इस बात का अधिकार नहीं देता कि वह वेतनमान गलत तरीके से तय होने के कारण दिए गए अतिरिक्त वेतन की वसूली कर सके। ऐसी वसूली केवल तभी की जा सकती है, जब वह 'अंडरटेकिंग' वेतन तय करते समय ही दी गई हो, जिसे बाद में गलत पाया गया हो।'पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट बनाम जगदेव सिंह' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता ने कहा:"जगदेव सिंह मामले में...

Public Tender| सड़क बनाने के अनुभव की तुलना टाउनशिप के आंतरिक विकास कार्यों से नहीं की जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सड़क बनाने और उसके रखरखाव का अनुभव टाउनशिप के आंतरिक विकास कार्यों के अनुभव के बराबर नहीं हो सकता। साथ ही यह अनुभव टेंडर की एक अनिवार्य शर्त थी, जिसमें किसी भी तरह की छूट नहीं दी जा सकती।जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने कहा:"यदि प्राधिकरण सड़क बनाने के कार्य अनुभव को टाउनशिप के आंतरिक विकास कार्यों के अनुभव के बराबर मान लेता है तो पात्रता की शर्त का कोई अर्थ ही नहीं रह जाएगा। ऐसा इसलिए है, क्योंकि टाउनशिप विकसित करने के लिए जिस विशेष प्रकार...

स्वीकार किए गए अनुबंध संबंधी बकाया का भुगतान न करना मनमाना, इसकी वसूली के लिए रिट याचिका दायर की जा सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अनुबंध संबंधी उन बकायों को रोक कर रखना, जिन्हें राज्य प्राधिकरण स्वयं स्वीकार करता है, मनमाना कदम है। ऐसे बकायों की वसूली के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर की जा सकती है।न्यायालय ने स्पष्ट किया कि रिट अधिकार क्षेत्र (Writ Jurisdiction) में धन संबंधी दावों पर विचार न करने का नियम कोई कठोर या पूर्ण नियम नहीं है; यह उन मामलों में लागू नहीं होता, जहां प्राधिकरण स्वयं बकाया राशि स्वीकार करता है। जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की...

अवैध संबंध के आरोप से किसी महिला का विधवा के रूप में कानूनी दर्जा खत्म नहीं होता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी महिला की शादी और उसके पति की मौत की बात मान ली गई तो उसका 'विधवा' होना एक कानूनी परिणाम है। यह दर्जा सिर्फ इसलिए खत्म नहीं हो जाता, क्योंकि उस पर पति की मौत के बाद किसी दूसरे पुरुष के साथ संबंध रखने का आरोप है।जस्टिस अनिल कुमार-X ने कहा:"विधवा का दर्जा, शादी और पति की मौत से मिलने वाला एक कानूनी दर्जा है। इसे सिर्फ इसलिए खत्म नहीं किया जा सकता, क्योंकि कोई व्यक्ति या समाज अपनी निजी मान्यताओं, आचरण या सुविधा के आधार पर इस दर्जे को मानने से इनकार कर दे। किसी...

वाराणसी के धार्मिक संस्थान से ₹4 करोड़ से अधिक के गबन का आरोप, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अकाउंटेंट की जमानत खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी स्थित एक धार्मिक संस्थान के ₹4 करोड़ से अधिक के कथित गबन के मामले में आरोपी अकाउंटेंट विवेक कुमार की दोनों जमानत अर्जियां खारिज कर दी हैं। आरोपी पर कथित तौर पर बैंक की फर्जी जमा रसीदें तैयार करके और धार्मिक चढ़ावे की रकम का गबन करके संस्थान को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है।जस्टिस कृष्ण पहल की पीठ ने आरोपों की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि यदि कोई कानूनी बाधा नहीं...

समान काम के लिए समान वेतन का दावा करने वाले संविदा कर्मचारियों को काम की समानता साबित करनी होगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि संविदा कर्मचारी समान काम के लिए समान वेतन का दावा कर सकते हैं, बशर्ते वे यह साबित करें कि वे नियमित रूप से नियुक्त कर्मचारियों के समान काम कर रहे थे। हालांकि, काम की प्रकृति, गुणवत्ता, जिम्मेदारियों और संवेदनशीलता में समानता साबित करने का दायित्व कर्मचारियों पर ही होगा।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL), झांसी के संविदा कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के बराबर वेतन और भत्ते देने के श्रम आयुक्त के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा...

फैमिली पेंशन का अधिकार सेवा नियमों से तय होगा, उत्तराधिकार कानून से नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 372 के तहत उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी करने की अर्जी पर सुनवाई करने वाली अदालत यह अंतिम रूप से तय नहीं कर सकती कि किसी मृत कर्मचारी की पारिवारिक पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य रिटायरमेंट लाभ पाने का हकदार कौन है। ये अधिकार संबंधित सेवा नियमों से तय होते हैं और इन पर फैसला सक्षम प्राधिकारी को लागू नियमों के आधार पर करना होगा, न कि उत्तराधिकार के सामान्य कानून के आधार पर।जस्टिस अनिल कुमार-X ने स्पष्ट किया कि मृत व्यक्ति का कानूनी वारिस कौन...

छह साल का बच्चा मां से दूर रहकर नहीं दे सकता समझदारी भरी पसंद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नानी नहीं, मां को सौंपी कस्टडी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कम उम्र के ऐसे बच्चे, जिसे लंबे समय तक उसकी मां से दूर रखा गया हो, की पसंद को अभिरक्षा तय करने का निर्णायक आधार नहीं बनाया जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि छह साल का बच्चा अपने भावनात्मक और शारीरिक हितों को समझते हुए स्वतंत्र रूप से उचित निर्णय लेने में सक्षम नहीं होता। केवल इसलिए कि दादी ने बच्चे की देखभाल की है, उन्हें मां से बेहतर अभिरक्षा का अधिकार नहीं मिल जाता। जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने आगरा की फैमिली कोर्ट का फैसला रद्द करते...

बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन के शिक्षकों की नियुक्ति में UGC के विशेष नियम होंगे लागू, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द किया कुलाधिपति का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन और प्रबंधन विषयों के शिक्षकों की नियुक्ति के लिए निर्धारित विशेष शैक्षणिक योग्यताएं ही लागू होंगी। विश्वविद्यालय के सामान्य पात्रता नियमों के आधार पर इन विशेष योग्यताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।हाईकोर्ट ने इस आधार पर लखनऊ विश्वविद्यालय में दो एसोसिएट प्रोफेसरों की नियुक्तियां रद्द करने के कुलाधिपति का आदेश निरस्त किया। जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने डॉ. हिमांशु मोहन और डॉ. संगीता साहू की याचिकाओं को स्वीकार करते...

घटना के समय 2 दोषी थे नाबालिग: हत्या के मामले में सजा मिलने के 45 साल बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट को चला पता, मामला JJB को भेजा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को 1980 के एक हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 2 लोगों की सजा रद्द की। कोर्ट ने पाया कि अपराध के समय वे नाबालिग थे। ट्रायल कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने के लगभग 45 साल बाद यह बात सामने आई है।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की बेंच ने उनके दोषसिद्धि (Conviction) को तो बरकरार रखा, लेकिन सजा तय करने का मामला संबंधित किशोर न्याय बोर्ड (JJB) को सौंप दिया, ताकि कानून के अनुसार उन्हें उचित सजा दी जा सके।कोर्ट ने कहा कि यह घटना उस समय हुई, जब...

पहले की अपील वापस लेने के बाद उसी स्टाम्प ड्यूटी आदेश के खिलाफ दूसरी अपील स्वीकार्य नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 56(1-A) के तहत दायर कोई अपील इसलिए खारिज कर दी गई हो क्योंकि अपीलकर्ता ने उसे आगे न बढ़ाने का फैसला किया था, तो कलेक्टर के उसी आदेश के खिलाफ दोबारा अपील दायर नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि ऐसी अपील का कोई कानूनी अस्तित्व नहीं है, और इसके तहत राज्य की स्टाम्प निपटान योजना (स्टाम्प सेटलमेंट स्कीम) का लाभ भी नहीं लिया जा सकता।जस्टिस सैयद कमर हसन रिज़वी ने कहा,"यह स्पष्ट है कि भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 56(1-A) के तहत...

S. 125 CrPC | भरण-पोषण मामले में कथित व्यभिचारी को नोटिस भेजा जा सकता है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चीफ जस्टिस से विचार करने का आग्रह किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को चीफ जस्टिस से आग्रह किया कि वह ऐसे व्यक्ति को नोटिस भेजने के लिए नियम बनाने पर विचार करें। कोर्ट ने कहा कि CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की कार्यवाही में, यदि किसी व्यक्ति का नाम लेकर उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया जाता है, तो उसके खिलाफ कोई भी प्रतिकूल फैसला सुनाने से पहले उसे अपनी बात रखने का मौका दिया जाना चाहिए।जस्टिस लक्ष्मी कांत शुक्ला की पीठ ने कहा कि किसी व्यक्ति को विशेष रूप से व्यभिचारी ठहराने वाले न्यायिक फैसले के परिणाम केवल भरण-पोषण के दावे तक सीमित...

हाईकोर्ट का यूपी में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का आदेश, मौजूदा 27% OBC आरक्षण रहेगा लागू

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के तहत ही कराए जाएंगे, जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण भी शामिल है। पिछड़ा वर्ग आरक्षण तय करने के लिए गठित समर्पित आयोग की जांच, रिपोर्ट या उसकी सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया के नाम पर पंचायत चुनाव अनिश्चितकाल तक नहीं टाले जा सकते।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने कहा कि आयोग की...

मृत संयुक्त डिक्रीधारक का नाम निष्पादन अर्जी में होने से पूरी कार्यवाही शून्य नहीं हो जाती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि संयुक्त डिक्रीधारकों में से किसी एक की मृत्यु निष्पादन की अर्जी दाखिल होने से पहले हो गई हो, लेकिन जीवित संयुक्त डिक्रीधारक पूरी डिक्री के निष्पादन का कानूनी अधिकार रखता हो, तो केवल मृत व्यक्ति का नाम अर्जी में बने रहने से पूरी निष्पादन कार्यवाही शून्य नहीं हो जाती। ऐसी स्थिति में मृत डिक्रीधारक का नाम हटाना या पक्षकारों के विवरण को दुरुस्त करना प्रक्रियात्मक सुधार माना जा सकता है।जस्टिस डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि इस सवाल का फैसला केवल यह...

यूपी पुलिस खुद को कानून से ऊपर समझ रही है: हाईकोर्ट ने हिरासत को अवैध ठहराया, व्यक्ति की तत्काल रिहाई का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि पुलिस खुद को कानून से ऊपर समझकर काम करती दिखाई दे रही है। अदालत ने FIR दर्ज होने से पहले एक व्यक्ति को हिरासत में रखने और गिरफ्तारी की प्रक्रिया में गंभीर खामियां पाए जाने पर उसकी हिरासत अवैध घोषित की। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि यदि व्यक्ति किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार करते हुए उत्तर प्रदेश...

न्यायिक समीक्षा के सीमित आधार और 20 साल की देरी: हाईकोर्ट ने अंबेडकर नगर निर्वाचन क्षेत्र के परिसीमन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन (जिसमें अलापुर निर्वाचन क्षेत्र को अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित करना भी शामिल है) को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की।बेंच ने कहा कि याचिका न्यायिक हस्तक्षेप के लिए आधार स्थापित करने में विफल रही और इसे परिसीमन आदेश पारित होने के लगभग दो दशक बाद दायर किया गया।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने स्पष्ट किया कि परिसीमन आयोग द्वारा पारित आदेश की न्यायिक समीक्षा केवल दो सीमित...

फर्जी दस्तावेज दाखिल करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाया 25 हजार रुपये का जुर्माना, याचिका वापस लेने की अनुमति देने से इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि फर्जी दस्तावेजों के साथ रिट याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता को कार्यवाही के परिणामों से बचने के लिए याचिका वापस लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने याचिका को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने कहा,“याचिकाकर्ता द्वारा पहले मौका आजमाने और सफल नहीं होने पर रिट याचिका वापस लेने की मांग करने की पूरी प्रक्रिया की यह कोर्ट निंदा करती है। इस...

68 वर्षीय विधवा मां को छोड़ने के लिए इकलौते बेटे पर दबाव बनाना मानसिक क्रूरता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी द्वारा अपने पति पर बार-बार इस बात का दबाव बनाना कि वह अपनी 68 वर्षीय विधवा मां को छोड़कर अलग घर में रहे, मानसिक क्रूरता है। ऐसी स्थिति में पति हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत तलाक पाने का हकदार है।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने कहा,“अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में पहुंच चुकी अपीलकर्ता की मां को उसके बेटे के साथ से वंचित करने का प्रयास प्रतिवादी की ओर से किया गया क्रूर कृत्य है।”मामले में पति और पत्नी का विवाह 17 फरवरी, 2000...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भोजपुरी एक्ट्रेस आकांक्षा दुबे की मौत की CBI जांच की मांग करने वाली याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 अक्टूबर को भोजपुरी एक्ट्रेस और मॉडल आकांक्षा दुबे की मां मधु दुबे की याचिका को रिकॉर्ड पर लिया। मधु दुबे ने मार्च 2023 में वाराणसी के एक होटल के कमरे में अपनी बेटी की मौत की सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) से जांच कराने की मांग की थी।जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस डॉ. अजय कुमार-II की बेंच ने कहा कि यह तर्क कि एक्ट्रेस की मौत आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या थी, गलतफहमी पर आधारित है।बेंच ने आगे कहा कि मृतक का शव न होने की स्थिति में घटना के तरीके या मौत के कारण की आगे जांच...