इलाहाबाद हाईकोट

अगर चाइनीज़ मांझा की बिक्री बिना रोक-टोक जारी रही तो पीड़ितों को मुआवज़ा देने के लिए राज्य ज़िम्मेदार होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट की चेतावनी
अगर 'चाइनीज़ मांझा' की बिक्री बिना रोक-टोक जारी रही तो पीड़ितों को मुआवज़ा देने के लिए राज्य ज़िम्मेदार होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट की चेतावनी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अधिकारियों की जानलेवा सिंथेटिक पतंग मांझे, जिसे आमतौर पर “चाइनीज़ मांझा” कहा जाता है, के बिना रोक-टोक बनाने, बिक्री और इस्तेमाल पर असरदार तरीके से रोक लगाने में नाकामी पर कड़ा संज्ञान लिया।यह देखते हुए कि राज्य के अधिकारी तभी "जागते हैं और कुछ कार्रवाई शुरू करते हैं", जब दुखद चोटें या मौतें अखबारों की सुर्खियों में होती हैं, कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर इस खतरे को तुरंत नहीं रोका गया तो वह राज्य को अपने खजाने से पीड़ितों को मुआवज़ा देने के लिए मजबूर कर सकता...

हाईकोर्ट ने सस्पेंड किए गए मदरसों को ग्रांट-इन-एड चुनिंदा तरीके से जारी रखने का आरोप लगाने वाली याचिका पर यूपी सरकार से जवाब मांगा
हाईकोर्ट ने सस्पेंड किए गए मदरसों को ग्रांट-इन-एड चुनिंदा तरीके से जारी रखने का आरोप लगाने वाली याचिका पर यूपी सरकार से जवाब मांगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने उत्तर प्रदेश सरकार से पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) पर जवाब मांगा, जिसमें आरोप लगाया गया कि मदरसों की मान्यता सस्पेंड होने के बावजूद उन्हें ग्रांट-इन-एड जारी रखने के लिए कोई एक जैसी राज्य पॉलिसी नहीं है।सोशल वर्कर अज़ाज अहमद ने एडवोकेट अशोक पांडे और विंदेश्वरी पांडे के ज़रिए यह PIL दायर की, जिसमें दावा किया गया कि कुछ मान्यता प्राप्त सस्पेंड किए गए संस्थानों को ग्रांट-इन-एड दिया जाता है, लेकिन दूसरों को नहीं दिया जा रहा है।बुधवार को, एडवोकेट पांडे ने कहा कि...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रतिबंधित जगह पर नमाज़ पढ़ने के आरोपी स्टूडेंट्स के खिलाफ क्रिमिनल केस रद्द किया, चेतावनी जारी की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रतिबंधित जगह पर नमाज़ पढ़ने के आरोपी स्टूडेंट्स के खिलाफ क्रिमिनल केस रद्द किया, चेतावनी जारी की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में दो स्टूडेंट्स के खिलाफ पूरी क्रिमिनल कार्रवाई रद्द की, जिन्हें लोकल एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा उस मकसद के लिए तय की गई जगह पर नमाज़ पढ़ने के लिए फंसाया गया।जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की बेंच ने स्टूडेंट्स को भविष्य में लोकल एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा जारी किए गए निर्देशों और खास रोक का पालन करने की भी चेतावनी दी।संक्षेप में मामलादोनों एप्लीकेंट्स पर IPC की धारा 143 और 188 के तहत कथित अपराध करने के लिए एक FIR दर्ज की गई। संत कबीर नगर कोर्ट ने अपराध का संज्ञान लिया और मई 2019 में...

जेल में बंद आरोपी पर भी लगाया जा सकता है रासुका, यदि रिहाई पर सार्वजनिक व्यवस्था भंग होने की आशंका हो: इलाहाबाद हाइकोर्ट
जेल में बंद आरोपी पर भी लगाया जा सकता है रासुका, यदि रिहाई पर सार्वजनिक व्यवस्था भंग होने की आशंका हो: इलाहाबाद हाइकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कहा कि यदि सक्षम प्राधिकारी को यह संतोष हो कि जेल में बंद आरोपी के जमानत पर रिहा होने की वास्तविक संभावना है और रिहाई के बाद वह सार्वजनिक व्यवस्था के प्रतिकूल गतिविधियों में संलग्न हो सकता है तो राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 के तहत निरोधात्मक आदेश पारित किया जा सकता है।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस बबीता रानी की खंडपीठ ने सुनील कुमार गुप्ता द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।याचिका में उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका)...

कोर्ट में वकील का बिना इजाज़त वाला बयान क्लाइंट को कंटेम्प्ट के लिए ज़िम्मेदार नहीं बना सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
कोर्ट में वकील का बिना इजाज़त वाला बयान क्लाइंट को कंटेम्प्ट के लिए ज़िम्मेदार नहीं बना सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने हाल ही में कहा कि क्लाइंट के खास निर्देशों के बिना वकील का दिया गया बयान कंटेम्प्ट की कार्रवाई के लिए ज़रूरी अंडरटेकिंग नहीं माना जा सकता।इस तरह जस्टिस मनीष कुमार की बेंच ने प्रतिवादी के खिलाफ कोर्ट के आदेश की जानबूझकर नाफ़रमानी के आरोप वापस ले लिए।सिंगल जज ने हिमालयन कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी बनाम बलवान सिंह और अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2015 के फैसले पर बहुत ज़्यादा भरोसा किया, जिसमें यह कहा गया कि वकीलों को उनके क्लाइंट का एजेंट माना जाता है,...

MACT मुआवज़े पर विचार करते समय मृतक के वारिसों को मिलने वाली फ़ैमिली पेंशन का कोई असर नहीं होता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
MACT मुआवज़े पर विचार करते समय मृतक के वारिसों को मिलने वाली फ़ैमिली पेंशन का कोई असर नहीं होता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 (MV Act) के तहत मुआवज़े की गणना करते समय दावेदार को मिल रही पेंशन और मोटर व्हीकल दुर्घटना में मृतक के कानूनी वारिसों को मिल रही फ़ैमिली पेंशन पर विचार नहीं किया जाना चाहिए।सेबेस्टियानी लाकड़ा और अन्य बनाम नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और अन्य और हनुमंतराजू बी. एलआर बनाम एम. अकरम पाशा और अन्य में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का ज़िक्र करते हुए जस्टिस संदीप जैन ने कहा,“सुप्रीम कोर्ट के ऊपर दिए गए फ़ैसलों से यह साफ़ है कि दावेदार को दी जाने वाली पेंशन...

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का अधिकार: DM का प्रमाणपत्र जेंडर की अंतिम पुष्टि, पासपोर्ट प्राधिकरण मेडिकल जांच की मांग नहीं कर सकता : इलाहाबाद हाइकोर्ट
ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का अधिकार: DM का प्रमाणपत्र जेंडर की अंतिम पुष्टि, पासपोर्ट प्राधिकरण मेडिकल जांच की मांग नहीं कर सकता : इलाहाबाद हाइकोर्ट

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 2019 की धारा 7 के तहत जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किया गया प्रमाणपत्र जेंडर/पहचान का अंतिम और निर्णायक प्रमाण है। पासपोर्ट प्राधिकरण ऐसे मामले में दोबारा मेडिकल जांच या जन्म प्रमाणपत्र में बदलाव की शर्त नहीं रख सकता।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने खुश आर गोयल की याचिका का निस्तारण करते हुए यह टिप्पणी की।याचिका में पासपोर्ट अधिकारियों की उस कार्रवाई को चुनौती दी गई,...

यूपी सरकार ने किया स्वीकार- SRN हॉस्पिटल में गलत ब्लड ट्रांसफ्यूजन से हुई महिला की मौत, हाई-कोर्ट ने गलतियों को ठीक करने और मुआवज़े पर विचार करने के लिए पैनल बनाया
यूपी सरकार ने किया स्वीकार- SRN हॉस्पिटल में गलत ब्लड ट्रांसफ्यूजन से हुई महिला की मौत, हाई-कोर्ट ने गलतियों को ठीक करने और मुआवज़े पर विचार करने के लिए पैनल बनाया

उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने माना कि पिछले साल प्रयागराज के स्वरूप रानी हॉस्पिटल में भर्ती महिला मरीज़ की मौत गलत ब्लड ग्रुप चढ़ाने से हुई थी।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की बेंच ने राज्य की बात रिकॉर्ड की और ऐसी घटनाओं को रोकने और मामले में जवाबदेही तय करने के लिए तुरंत एक हाई-लेवल कमेटी बनाने का निर्देश दिया।बेंच ने एडिशनल एडवोकेट जनरल (AAG) राहुल अग्रवाल और याचिकाकर्ता के वकीलों से उन पैरामीटर के बारे में भी मदद मांगी, जिनके अंदर एक...

निजी परिसर में नमाज रोकने का आरोप: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने बरेली के DM और SSP को अवमानना नोटिस जारी किया
निजी परिसर में नमाज रोकने का आरोप: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने बरेली के DM और SSP को अवमानना नोटिस जारी किया

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने बरेली के जिलाधिकारी (DM) रवींद्र कुमार और सीनियर पुलिस अधीक्षक (SSP) अनुराग आर्य को अवमानना का नोटिस जारी किया। अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने याचिकाकर्ता और अन्य लोगों को निजी घर के अंदर नमाज अदा करने से रोका, जो कि हाइकोर्ट के पिछले आदेशों का सीधा उल्लंघन प्रतीत होता है।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अधिकारियों का यह कदम हाइकोर्ट द्वारा 27 जनवरी को 'मरानाथ फुल गॉस्पेल मिनिस्ट्रीज बनाम उत्तर प्रदेश राज्य' मामले में...

मजिस्ट्रेट शुरुआती चार्जशीट पर कॉग्निजेंस लेने के बाद भी बाद की क्लोजर रिपोर्ट पर विचार करने के लिए मजबूर: इलाहाबाद हाईकोर्ट
मजिस्ट्रेट शुरुआती चार्जशीट पर कॉग्निजेंस लेने के बाद भी बाद की 'क्लोजर रिपोर्ट' पर विचार करने के लिए मजबूर: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि मजिस्ट्रेट पुलिस द्वारा फाइल की गई फाइनल रिपोर्ट (क्लोजर रिपोर्ट) पर विचार करने और ऑर्डर पास करने के लिए कानूनी रूप से मजबूर है, उन मामलों में भी जहां उसने पहले की चार्जशीट के आधार पर अपराध का कॉग्निजेंस लिया।जस्टिस अनिल कुमार-X की बेंच ने कहा कि अगर मजिस्ट्रेट फाइनल रिपोर्ट पर विचार किए बिना मामले में आगे बढ़ता है तो ऐसी कोई कार्रवाई न करना "प्रोसिजरल गैर-कानूनी" माना जाएगा।कोर्ट ने आगे फैसला सुनाया कि वास्तव में मजिस्ट्रेट को प्राइमरी रिपोर्ट (शुरुआती...

कोडीन तय सीमा से अधिक होने पर NDPS Act लागू, मिलावटी कफ सिरप मामले में दो आरोपियों को जमानत से इनकार: इलाहाबाद हाइकोर्ट
कोडीन तय सीमा से अधिक होने पर NDPS Act लागू, मिलावटी कफ सिरप मामले में दो आरोपियों को जमानत से इनकार: इलाहाबाद हाइकोर्ट

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने कोडीन आधारित कफ सिरप की अवैध खेप बरामद होने के मामले में दो आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज की। अदालत ने कहा कि अधिसूचना में दी गई छूट का लाभ तभी मिलेगा जब उसकी शर्तों का कड़ाई से पालन किया जाए।जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की पीठ ने कहा,“अदालत की राय में छूट संबंधी प्रावधानों का सख्ती और शाब्दिक रूप से पालन किया जाना आवश्यक है तथा जिन शर्तों के अधीन छूट दी गई, उनका कठोरता से अनुपालन होना चाहिए, किसी भी शर्त का उल्लंघन दावेदार को छूट के लाभ से वंचित कर देगा। वर्तमान मामले में अवैध...

पत्नी का सिर्फ़ नौकरी करना गुज़ारा भत्ता देने से मना करने का कोई आधार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पत्नी का सिर्फ़ नौकरी करना गुज़ारा भत्ता देने से मना करने का कोई आधार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में पति की क्रिमिनल रिवीजन याचिका खारिज की, जिसमें उसने CrPC की धारा 125 के तहत पत्नी की अर्जी पर पास हुए आदेश को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों की कमाई की क्षमता और फाइनेंशियल स्थिति में काफी अंतर है।बेंच ने कहा कि पत्नी को दी जाने वाली इनकम को इतना काफ़ी नहीं कहा जा सकता कि वह अपनी शादीशुदा ज़िंदगी के दौरान जिस तरह की ज़िंदगी जीती थी, उसे बनाए रख सके।कोर्ट ने कहा,"CrPC की धारा 125 का मकसद सिर्फ़ गरीबी को रोकना नहीं है, बल्कि यह पक्का करना है कि पत्नी पति...

क्या अरेस्ट मेमो में रेफरेंस न होने पर अलग पेपर पर आधार देना वैलिड है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया जवाब
क्या अरेस्ट मेमो में रेफरेंस न होने पर अलग पेपर पर आधार देना वैलिड है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया जवाब

हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हेबियस कॉर्पस रिट के लिए याचिका में यह देखते हुए राहत दी कि आरोपी को अलग पेपर पर अरेस्ट के आधार देना तब इनवैलिड है, जब उसका रेफरेंस अरेस्ट मेमो में न हो और उसमें विटनेस अटेस्टेशन न हो।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस बबीता रानी की बेंच ने कहा:"BNSS, 2023 की धारा 36 के अनुसार, जिसके तहत अरेस्ट मेमो जारी किया जाना है, यह साफ तौर पर प्रोविजन किया गया कि अरेस्ट मेमो को कम-से-कम विटनेस द्वारा अटेस्टेड किया जाएगा, जो अरेस्ट किए गए व्यक्ति के परिवार का मेंबर हो या उस इलाके...

POCSO पीड़िताओं के गर्भसमापन मामलों में देरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट चिंतित; 24 हफ्ते से पहले बेहतर व्यवस्था बनाने की जरूरत बताई
POCSO पीड़िताओं के गर्भसमापन मामलों में देरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट चिंतित; 24 हफ्ते से पहले बेहतर व्यवस्था बनाने की जरूरत बताई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक स्वतः संज्ञान जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि यद्यपि 24 सप्ताह तक गर्भसमापन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) मौजूद है, फिर भी बलात्कार पीड़िताएं अक्सर गर्भ का पता देर से चलने के कारण समयसीमा के अंतिम चरण में अदालत का दरवाजा खटखटाती हैं।जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस इन्द्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि कानून 20 से 24 सप्ताह तक, विशेष परिस्थितियों—जैसे दुष्कर्म—में गर्भसमापन की अनुमति देता है, लेकिन जानकारी की कमी, सामाजिक दबाव और...

पंचायत चुनाव 2026 | OBC आयोग के गठन की प्रक्रिया जारी, इलाहाबाद हाइकोर्ट ने PIL निस्तारित की
पंचायत चुनाव 2026 | OBC आयोग के गठन की प्रक्रिया जारी, इलाहाबाद हाइकोर्ट ने PIL निस्तारित की

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यह जानकारी दिए जाने के बाद कि पंचायत चुनाव कानून के अनुसार कराने के उद्देश्य से ओबीसी आयोग के गठन की प्रक्रिया चल रही है, इलाहाबाद हाइकोर्ट ने इस मुद्दे से जुड़ी जनहित याचिका (PIL) निस्तारित की।यह मामला जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस अभदेश कुमार चौधरी की खंडपीठ के समक्ष आया था। याचिका वकील मोती लाल यादव द्वारा दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि छह सदस्यीय समर्पित OBC आयोग के गठन का प्रस्ताव पिछले पांच महीने से अधिक समय से राज्य मंत्रिमंडल, यानी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के...

हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस को NBW के बार-बार निष्पादन में विफलता पर फटकार लगाई, कहा- हमसे खेल मत खेलिए
हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस को NBW के बार-बार निष्पादन में विफलता पर फटकार लगाई, कहा- हमसे खेल मत खेलिए

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर और हापुड़ ज़िलों में कार्यरत उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा कोर्ट द्वारा जारी किए गए गैर-जमानती वारंट (NBW) के बार-बार निष्पादन न किए जाने पर कड़ी नाराज़गी जताई।जस्टिस सलील कुमार राय और जस्टिस सत्यवीर सिंह की खंडपीठ 2019 की आपराधिक अपील से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें एक हत्या के दोषी के विरुद्ध जारी NBW लंबे समय से निष्पादित नहीं किया गया। कोर्ट ने पुलिस के अधीनस्थ अधिकारियों और आरोपी के बीच मिलीभगत की आशंका भी जताई।खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए...

इंडियन स्टेट टिप्पणी पर राहुल गांधी के खिलाफ FIR से इनकार को चुनौती, इलाहाबाद हाइकोर्ट में याचिका
'इंडियन स्टेट' टिप्पणी पर राहुल गांधी के खिलाफ FIR से इनकार को चुनौती, इलाहाबाद हाइकोर्ट में याचिका

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कथित इंडियन स्टेट संबंधी टिप्पणी को लेकर एक बार फिर मामला अदालत पहुंच गया। संभल कोर्ट द्वारा राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने से इनकार किए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाइकोर्ट में याचिका दाखिल की गई।यह याचिका भारतीय संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत हिंदू शक्ति दल से जुड़े सिमरन गुप्ता की ओर से दाखिल की गई। याचिका में दावा किया गया कि राहुल गांधी की टिप्पणी से देशभर में लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं।विवाद उस कथित बयान से जुड़ा है, जो राहुल...

घर से भागे जोड़ों के लिए सेफ़ हाउस समेत सुरक्षा उपायों पर 2019 के GO को मानना ​​अधिकारियों का फ़र्ज़: इलाहाबाद हाईकोर्ट
घर से भागे जोड़ों के लिए सेफ़ हाउस समेत सुरक्षा उपायों पर 2019 के GO को मानना ​​अधिकारियों का फ़र्ज़: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में परिवार की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ शादी करने वाले जोड़ों की जान और आज़ादी की रक्षा करने की राज्य की ज़िम्मेदारी को दोहराया। कोर्ट ने यूपी सरकार के 2019 के ऑर्डर का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया, जिसमें ऐसे जोड़ों के लिए ज़रूरी बचाव और सुधार के उपाय बताए गए।एक जोड़े की सुरक्षा याचिका का निपटारा करते हुए जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने कहा कि पुलिस अधिकारी हर मामले में खतरे का अंदाज़ा लगाने और स्थिति की गंभीरता के आधार पर सुरक्षित रहने की जगह और सुरक्षा सहित ज़रूरी...

अनुकंपा नियुक्ति | पीड़ित की भावना को महसूस करें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आर्टिकल 51A (g) का इस्तेमाल किया, PNB के बिना बोले आदेश रद्द किया
अनुकंपा नियुक्ति | 'पीड़ित की भावना को महसूस करें': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आर्टिकल 51A (g) का इस्तेमाल किया, PNB के बिना बोले आदेश रद्द किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने हाल ही में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के एक लाइन के आदेश को रद्द किया, जिसमें एक मृत कर्मचारी के बेटे के दया के आधार पर नियुक्ति का दावा खारिज कर दिया गया।अभिषेक जायसवाल की याचिका स्वीकार करते हुए जस्टिस श्री प्रकाश सिंह की बेंच ने कहा कि 'दया' शब्द पर सिर्फ एक शब्द में विचार नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह सहानुभूति, दया और इंसानी भावना की कोमल भावना को दिखाता है।इस संबंध में बेंच ने भारत के संविधान के आर्टिकल 51-A(g) का हवाला देते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि...