इलाहाबाद हाईकोट

क्या DM के बिना गैंग चार्ट मंजूर कर सकती है पुलिस? कमिश्नरेट सिस्टम में असीमित विवेकाधिकार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उठाए सवाल, ACS को तलब किया
क्या DM के बिना गैंग चार्ट मंजूर कर सकती है पुलिस? कमिश्नरेट सिस्टम में 'असीमित विवेकाधिकार' पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उठाए सवाल, ACS को तलब किया

उत्तर प्रदेश में यूपी गैंगस्टर्स एवं असामाजिक गतिविधि (निवारण) अधिनियम, 1986 के क्रियान्वयन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए अपर मुख्य सचिव (गृह) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।जस्टिस विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने गृह विभाग के शीर्ष अधिकारी को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली वाले जिलों में गैंग चार्ट को स्वीकृति देने से पहले जिला मजिस्ट्रेट (DM) को संयुक्त बैठक से बाहर क्यों रखा गया, जबकि गैर-कमिश्नरेट जिलों में यह अनिवार्य है।कोर्ट ने तीखी...

जमानत आदेश में कोई यात्रा प्रतिबंध नहीं: हाईकोर्ट ने डांसर सपना चौधरी को पासपोर्ट NOC देने का दिया निर्देश
जमानत आदेश में कोई यात्रा प्रतिबंध नहीं: हाईकोर्ट ने डांसर सपना चौधरी को पासपोर्ट NOC देने का दिया निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने पिछले हफ्ते ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें लोकप्रिय एक्ट्रेस-डांसर और स्टेज परफॉर्मर सपना चौधरी को उनके पासपोर्ट के रिन्यूअल के लिए 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) देने से इनकार कर दिया गया।CrPC की धारा 482 के तहत दायर उनकी याचिका स्वीकार करते हुए जस्टिस पंकज भाटिया की बेंच ने ट्रायल कोर्ट को उन्हें रिन्यूअल के लिए NOC जारी करने का निर्देश दिया।कोर्ट ने कहा कि चौधरी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले में बेल ऑर्डर में देश छोड़ने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया...

रोहिंग्या फंडिंग सिंडिकेट | इलाहाबाद हाइकोर्ट ने कथित मास्टरमाइंड को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार, जांच अधिकारी के लापरवाह रवैये पर जताई कड़ी नाराज़गी
रोहिंग्या फंडिंग सिंडिकेट | इलाहाबाद हाइकोर्ट ने कथित मास्टरमाइंड को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार, जांच अधिकारी के 'लापरवाह' रवैये पर जताई कड़ी नाराज़गी

इलाहाबाद हाइकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने शुक्रवार को ऐसे व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया, जिस पर बांग्लादेशी, रोहिंग्या और अन्य कथित राष्ट्रविरोधी तत्वों को अवैध एवं अनधिकृत सहायता देकर भारत में बसाने तथा अशांति और वैमनस्य फैलाने के लिए सिंडिकेट का “मुख्य सरगना” होने का आरोप है।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता के बावजूद आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए आवश्यक कदम न उठाने पर जांच एजेंसी, विशेषकर जांच अधिकारी (आईओ), के लापरवाह और...

पत्नी की ज़्यादा क्वालिफिकेशन गुज़ारा भत्ता में रुकावट नहीं, सालों तक घरेलू काम के बाद नौकरी पर लौटना मुश्किल: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पत्नी की ज़्यादा क्वालिफिकेशन गुज़ारा भत्ता में रुकावट नहीं, सालों तक घरेलू काम के बाद नौकरी पर लौटना मुश्किल: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी पत्नी को सिर्फ़ इसलिए CrPC की धारा 125 के तहत गुज़ारा भत्ता देने से मना नहीं किया जा सकता, क्योंकि वह बहुत ज़्यादा पढ़ी-लिखी है या उसके पास वोकेशनल स्किल्स हैं, क्योंकि इससे यह नतीजा नहीं निकाला जा सकता कि याचिकाकर्ता नंबर 1/पत्नी पैसे कमाने के लिए काम कर रही है।जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने यह भी कहा कि पति का अपनी पत्नी का कानूनी तौर पर भरण-पोषण करने की ज़िम्मेदारी से बचने के लिए सिर्फ़ उसकी क्वालिफिकेशन पर निर्भर रहना गलत है। कोर्ट ने कहा कि पत्नी...

S.48 UP Municipality Act | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नगरपालिका अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया बताते हुए जारी किए दिशा-निर्देश
S.48 UP Municipality Act | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'नगरपालिका' अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया बताते हुए जारी किए दिशा-निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने खास प्रक्रिया के दिशा-निर्देश दिए , जिनका पालन राज्य सरकार को उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 की धारा 48 के तहत नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष को हटाने से पहले करना होगा।कोर्ट ने फैसला सुनाया कि ऐसा हटाना सिर्फ शुरुआती जांच और कारण बताओ नोटिस के आधार पर नहीं किया जा सकता, बल्कि आरोपों को तय करने और गवाहों से जिरह सहित एक "पूरी जांच" ज़रूरी है।जस्टिस शेखर बी. सर्राफ और जस्टिस मनजीव शुक्ला की बेंच ने निम्नलिखित सिद्धांत बताए, जिनका पालन राज्य को धारा 48(2-A) के...

एडवोकेट की अनुपस्थिति में आपराधिक अपील खारिज नहीं की जा सकती, एमिकस क्यूरी नियुक्त करना अनिवार्य: इलाहाबाद हाइकोर्ट
एडवोकेट की अनुपस्थिति में आपराधिक अपील खारिज नहीं की जा सकती, एमिकस क्यूरी नियुक्त करना अनिवार्य: इलाहाबाद हाइकोर्ट

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया कि किसी आपराधिक अपील को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि अभियुक्त की ओर से वकील उपस्थित नहीं हुआ। हाइकोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में अपीलीय न्यायालय का कर्तव्य है कि वह अभियुक्त के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त करे और अपील का निर्णय मामले के गुण-दोष के आधार पर करे, न कि अनुपस्थिति के कारण।जस्टिस अब्दुल शाहिद की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि अभियुक्त के वकील की गैर-हाजिरी के कारण आपराधिक अपील को डिफॉल्ट में खारिज करना भारतीय नागरिक सुरक्षा...

व्यापक भ्रष्टाचार परेशान करने वाला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिकारियों के खिलाफ DOB में 11 साल की हेरफेर के लिए FIR का आदेश दिया
'व्यापक भ्रष्टाचार परेशान करने वाला': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिकारियों के खिलाफ DOB में 11 साल की 'हेरफेर' के लिए FIR का आदेश दिया

एक व्यक्ति द्वारा जन्मतिथि में हेरफेर से जुड़े कथित जालसाजी और धोखाधड़ी पर सख्त कार्रवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को प्रयागराज पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि वह उस व्यक्ति और संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज करें।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की बेंच ने इस स्थिति को 'चौंकाने वाला' बताया और टिप्पणी की कि दस्तावेजों में हेरफेर की हद "व्यापक भ्रष्टाचार" का सीधा नतीजा है।संक्षेप में मामलायाचिकाकर्ता (शिव शंकर पाल) ने पासपोर्ट अथॉरिटी को अपने...

CCTV फुटेज सिर्फ 2 महीने रखने वाला यूपी डीजीपी का आदेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की प्रथम दृष्टया अवमानना: हाईकोर्ट
CCTV फुटेज सिर्फ 2 महीने रखने वाला यूपी डीजीपी का आदेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की 'प्रथम दृष्टया अवमानना': हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) द्वारा जारी उस परिपत्र पर गंभीर सवाल उठाए, जिसमें राज्य के सभी थानों में CCTV फुटेज केवल 2 से 2.5 महीने तक सुरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है। अदालत ने इसे अत्यंत अजीब बताते हुए कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले Paramvir Singh Saini बनाम बलजीत सिंह (2020) के प्रथमदृष्टया अवमानना जैसा प्रतीत होता है, जिसमें कम से कम 6 महीने से 18 महीने तक फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस...

तबादला नीति केवल मार्गदर्शक, कानूनन लागू नहीं; राज्य को किसी कर्मचारी का तबादला करने का निर्देश नहीं दे सकती अदालत: इलाहाबाद हाईकोर्ट
तबादला नीति केवल मार्गदर्शक, कानूनन लागू नहीं; राज्य को किसी कर्मचारी का तबादला करने का निर्देश नहीं दे सकती अदालत: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा जारी की गई तबादला नीति केवल मार्गदर्शन के लिए होती है। इसे अदालत के माध्यम से लागू नहीं कराया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी का स्थानांतरण और पदस्थापना पूरी तरह से राज्य सरकार के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में आता है। न्यायालय राज्य को किसी विशेष कर्मचारी को किसी विशेष स्थान पर स्थानांतरित करने का निर्देश नहीं दे सकता।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस मंजिव शुक्ला की खंडपीठ ने बुधवार को एक रिट याचिका खारिज करते हुए...

ट्रायल के दौरान रिकॉर्ड साक्ष्य के आधार पर ही जोड़े जा सकते हैं अतिरिक्त आरोपी, केस डायरी सामग्री अप्रासंगिक: इलाहाबाद हाईकोर्ट
ट्रायल के दौरान रिकॉर्ड साक्ष्य के आधार पर ही जोड़े जा सकते हैं अतिरिक्त आरोपी, केस डायरी सामग्री अप्रासंगिक: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 319 के तहत किसी अतिरिक्त आरोपी को तलब करने का आधार केवल वही साक्ष्य हो सकता है, जो मुकदमे के दौरान न्यायालय के समक्ष रिकॉर्ड किया गया हो। चार्जशीट या केस डायरी में उपलब्ध सामग्री को साक्ष्य नहीं माना जा सकता। इनके आधार पर किसी व्यक्ति को अतिरिक्त आरोपी के रूप में समन नहीं किया जा सकता।यह टिप्पणी जस्टिस चवन प्रकाश की एकलपीठ ने दहेज मृत्यु के एक मामले में दाखिल आपराधिक पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए की। याचिका के माध्यम से...

अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील निजी पक्ष की ओर से पेश हो सकता है या नहीं: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने विधि सचिव से मांगी रिपोर्ट
अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील निजी पक्ष की ओर से पेश हो सकता है या नहीं: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने विधि सचिव से मांगी रिपोर्ट

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण सवाल पर राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा कि क्या अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील किसी ऐसे मामले में निजी पक्ष की ओर से पैरवी कर सकता है, जिसमें उत्तर प्रदेश राज्य स्वयं एक पक्षकार हो। इस संबंध में अदालत ने प्रमुख सचिव (विधि) एवं विधिक स्मरणकर्ता से विस्तृत रिपोर्ट तलब की।जस्टिस दिवेश चंद्र समंत की एकल पीठ ने यह निर्देश उस समय दिया, जब वर्ष 2018 से लंबित एक आपराधिक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई हो रही थी। यह याचिका पत्नी द्वारा फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए...

हठधर्मिता पर सख्त इलाहाबाद हाइकोर्ट, पेड़ों की भू-अंकन विफलता पर शीर्ष वन व उद्यान अधिकारियों को तलब 40 हजार रुपये का जुर्माना
हठधर्मिता' पर सख्त इलाहाबाद हाइकोर्ट, पेड़ों की भू-अंकन विफलता पर शीर्ष वन व उद्यान अधिकारियों को तलब 40 हजार रुपये का जुर्माना

इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ पीठ ने वर्ष 2013 में दायर एक जनहित याचिका में राज्य अधिकारियों की उदासीनता और हठधर्मिता पर कड़ा रुख अपनाते हुए वन और उद्यान विभाग के शीर्ष अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया।न्यायालय ने पेड़ों के वैज्ञानिक भू-अंकन से संबंधित पूर्व आदेशों के पालन में विफल रहने पर कुल 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस अब्धेश कुमार चौधरी की पीठ ने वन विभाग के अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के प्रमुख सचिव सहित अन्य...

रोजी-रोटी कमाने का उसका अधिकार कम नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग बेटी के रेप केस में सरकारी कर्मचारी की सज़ा और उम्रकैद पर रोक लगाई
'रोजी-रोटी कमाने का उसका अधिकार कम नहीं किया जा सकता': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग बेटी के रेप केस में सरकारी कर्मचारी की सज़ा और उम्रकैद पर रोक लगाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक सरकारी कर्मचारी (लेखपाल) की सज़ा और उम्रकैद पर रोक लगाई, जिस पर अपनी 16 साल की बेटी का यौन उत्पीड़न करने का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ इस मामले में शामिल होने की वजह से उसकी ज़िंदगी जीने के लिए रोजी-रोटी कमाने के अधिकार को कम नहीं किया जा सकता।जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस प्रशांत मिश्रा-I की बेंच ने यह भी कहा कि यह अपील 2024 की है और केसों के भारी बैकलॉग के कारण निकट भविष्य में इसकी सुनवाई की बहुत कम संभावना है।ट्रायल कोर्ट ने पिछले साल मई में पिता-आरोपी...

S. 105 BNSS | पुलिस को तलाशी और ज़ब्ती की वीडियोग्राफी करनी होगी, वरना अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
S. 105 BNSS | पुलिस को तलाशी और ज़ब्ती की वीडियोग्राफी करनी होगी, वरना अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया कि वह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 105 के तहत निर्धारित तलाशी और ज़ब्ती की अनिवार्य ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी करें।40 मोटरसाइकिलों की कथित बरामदगी से जुड़े चोरी के मामले में आरोपी को जमानत देते हुए जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने कहा कि BNSS की धारा 105 के अनिवार्य प्रावधान का पालन न करने से पूरी अभियोजन कहानी पर संदेह पैदा होता...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध रूप से बेदखल की गई महिला को ₹1 लाख क्षतिपूर्ति का आदेश दिया; सिविल जज के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध रूप से बेदखल की गई महिला को ₹1 लाख क्षतिपूर्ति का आदेश दिया; सिविल जज के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को एक महिला और उसके तीन नाबालिग बच्चों को अवैध रूप से घर से बेदखल किए जाने के मामले में बड़ी राहत देते हुए रु. 1 लाख का मुआवज़ा देने का आदेश दिया। साथ ही, अदालत ने संबंधित संपत्ति का कब्ज़ा पुनः बहाल करने का निर्देश भी जारी किया।इसके साथ ही, कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए आदेश की प्रति मुख्य न्यायाधीश को भेजने का निर्देश दिया, ताकि उस सिविल जज (कनिष्ठ प्रभाग) के खिलाफ उचित प्रशासनिक कार्रवाई पर विचार किया जा सके, जिसने प्रतिवादी के पक्ष में एकतरफा अंतरिम रोक आदेश...

स्टाम्प शुल्क निर्धारण के लिए यूपी जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम लागू नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
स्टाम्प शुल्क निर्धारण के लिए यूपी जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम लागू नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के तहत भूमि के बाजार मूल्य का निर्धारण करने के लिए उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950 (UPZALR Act) को आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने कहा कि दोनों कानूनों के उद्देश्य अलग-अलग हैं। जमींदारी उन्मूलन अधिनियम स्टांप शुल्क निर्धारण को नियंत्रित नहीं करता।जस्टिस सैयद क़मर हसन रिज़वी ने यह अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि UPZALR Act के तहत धारा 143 की अधिसूचना अधिकतम एक सहायक कारक हो सकती है, लेकिन इसके आधार पर ही...

प्रतीक्षा सूची में नाम होने से नियुक्ति का अटल अधिकार नहीं बनता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
प्रतीक्षा सूची में नाम होने से नियुक्ति का अटल अधिकार नहीं बनता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) में शामिल अभ्यर्थी को नियुक्ति का कोई पूर्ण या अटल अधिकार प्राप्त नहीं होता और न ही किसी चयन प्रक्रिया की प्रतीक्षा सूची को अनिश्चित काल तक जीवित रखा जा सकता है।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने यह टिप्पणी सहायक अध्यापक (एलटी ग्रेड) भर्ती से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की। अदालत ने कहा कि यह स्थापित सिद्धांत है कि प्रतीक्षा सूची केवल सीमित अवधि और सीमित उद्देश्य के लिए होती है और इससे नियुक्ति का स्वतः अधिकार उत्पन्न...

पार्ट-टाइम इंस्ट्रक्टर के तौर पर मिले अनुभव को हेडमास्टर पद के लिए एलिजिबिलिटी में नहीं गिना जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पार्ट-टाइम इंस्ट्रक्टर के तौर पर मिले अनुभव को हेडमास्टर पद के लिए एलिजिबिलिटी में नहीं गिना जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि पार्ट-टाइम इंस्ट्रक्टर के तौर पर मिला अनुभव रेगुलर टीचर के अनुभव के बराबर नहीं है। ऐसी पार्ट-टाइम सर्विस उम्मीदवार को हेडमास्टर के पद पर नियुक्ति के लिए तब तक एलिजिबल नहीं बनाएगी, जब तक कि कानून में खास तौर पर इसका प्रावधान न हो।जस्टिस मंजू रानी चौहान ने कहा,“अगर भर्ती के नियमों में खास तौर पर रेगुलर सर्विस में असिस्टेंट टीचर के तौर पर टीचिंग अनुभव की ज़रूरत है तो सिर्फ़ पार्ट-टाइम इंस्ट्रक्टर के तौर पर हासिल किया गया अनुभव, जिसमें परमानेंट होने, प्रशासनिक...

697 कार्डधारकों का राशन निकालने के लिए 3 आधार कार्ड का अवैध इस्तेमाल: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फेयर प्राइस शॉप के लाइसेंस रद्दीकरण पर पर राहत से किया इनकार
697 कार्डधारकों का राशन निकालने के लिए 3 आधार कार्ड का अवैध इस्तेमाल: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फेयर प्राइस शॉप के लाइसेंस रद्दीकरण पर पर राहत से किया इनकार

पिछले महीने इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक फेयर प्राइस शॉप लाइसेंस धारक को राहत देने से इनकार किया, जो 3 आधार कार्ड का इस्तेमाल करके 697 राशन कार्डधारकों का राशन अवैध रूप से निकाल रहा था, क्योंकि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर पाया कि राशन असल में 697 राशन कार्डधारकों को बांटा जा रहा था।याचिकाकर्ता के फेयर प्राइस शॉप लाइसेंस रद्द करने के फैसले को बरकरार रखते हुए जस्टिस अरुण कुमार ने कहा,“यह साफ है कि 697 कार्डधारकों का राशन निकालने के लिए तीन आधार कार्ड के इस्तेमाल के बारे में याचिकाकर्ता ने कोई सही वजह...