इलाहाबाद हाईकोट

आयूष मलिक धर्मांतरण मामला: हाईकोर्ट की पिता को फटकार, कहा- उसने अपनी मर्ज़ी से इस्लाम अपनाया
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 31 साल के आयुष मलिक को आज़ाद किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उन्होंने अपनी मर्ज़ी से इस्लाम अपनाया और आरोप लगाया कि इसके बाद उनके पिता ने उन्हें धमकाया और गैर-कानूनी तरीके से नज़रबंद करके रखा।जस्टिस संदीप जैन की बेंच ने 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि बालिग़ व्यक्ति को आम तौर पर अपनी अंतरात्मा के अनुसार अपना धर्म चुनने का अधिकार है। इस पसंद को "सिर्फ़ इसलिए नहीं बदला जा सकता क्योंकि यह उसके परिवार वालों को मंज़ूर नहीं है"।कोर्ट ने यह...

पत्रकार सत्यम वर्मा की NSA हिरासत को चुनौती, हाईकोर्ट का केंद्र-यूपी सरकार और नोएडा DM को नोटिस
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्रकार सत्यम वर्मा की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी को नोटिस जारी किया है। वर्मा ने अप्रैल 2026 के नोएडा वर्कर्स प्रोटेस्ट के संबंध में National Security Act, 1980 (NSA) के तहत अपनी निवारक हिरासत को चुनौती दी है।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ ने जवाब मांगा और मामले को 7 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।वर्मा ने 12 मई 2026 के जिलाधिकारी के हिरासत आदेश के साथ राज्य सरकार के 20 मई के...

'गुंडा एक्ट' का इस्तेमाल 'दमन के हथियार' के तौर पर कर रहे हैं यूपी अधिकारी, इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट के लगातार फैसलों के बावजूद, उत्तर प्रदेश के अधिकारी और राज्य सरकार 'UP गुंडा एक्ट' का इस्तेमाल दमन के हथियार के तौर पर कर रहे हैं।जस्टिस संदीप जैन की बेंच ने कहा कि नौकरशाही को गैर-कानूनी और मनमाने आदेश जारी करना बंद करना होगा, वरना उन्हें हर्जाना भरना पड़ सकता है।बेंच ने कहा,"अब तक यह कोर्ट उन अधिकारियों पर हर्जाना लगाने से बचता रहा है, जो 1970 के एक्ट के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए लगातार मनमाने आदेश जारी कर रहे हैं, लेकिन अब समय आ गया कि नौकरशाही...

Noida Protest | ज़मानत का संकेत देने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य की आपत्तियां सुनने के लिए पत्रकार सत्यम वर्मा की याचिका पर की सुनवाई स्थगित
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज पत्रकार सत्यम वर्मा की ज़मानत याचिका पर सुनवाई स्थगित। यह याचिका अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए मज़दूरों के विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में उनके ख़िलाफ़ दर्ज 11 आपराधिक मामलों में से एक से जुड़ी है। राज्य सरकार ने समानता के आधार पर उनकी ज़मानत याचिका का विरोध करने के लिए समय मांगा।कोर्ट ने पहले ओपन कोर्ट में संकेत दिया कि वर्मा को उसी मामले में ज़मानत पाने वाले एक सह-आरोपी की तरह समानता के आधार पर ज़मानत दी जाएगी। हालांकि, बाद में राज्य के वकील ने समानता के आधार पर ज़मानत का...

समय से पहले रिहाई का फैसला सिर्फ जेल के आचरण से नहीं हो सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार को दिया समग्र दृष्टिकोण अपनाने का निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी उम्रकैद की सजा पाए कैदी की समय से पहले रिहाई पर विचार करते समय सरकार केवल अपराध की प्रकृति और जेल में उसके आचरण तक अपना निर्णय सीमित नहीं कर सकती। सरकार को कैदी के सुधार, उसके सामाजिक पुनर्वास और समाज में दोबारा शामिल होने की संभावनाओं से जुड़े व्यापक पहलुओं पर समग्र रूप से विचार करना होगा।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस मामले में की, जिसमें दो दशक से अधिक समय जेल में बिता चुके उम्रकैद के कैदी की समय से पहले रिहाई की अर्जी...

नोएडा श्रमिक प्रदर्शन मामला: पत्रकार सत्यम वर्मा को एक केस में सह-आरोपी की जमानत के आधार पर हाईकोर्ट से राहत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अप्रैल 2026 के नोएडा श्रमिक प्रदर्शन से जुड़े 11 आपराधिक मामलों में से एक मामले में पत्रकार सत्यम वर्मा को जमानत दी।जस्टिस कृष्ण पहल की पीठ ने यह राहत उसी मामले में पहले जमानत पा चुके सह-आरोपी के साथ समानता के आधार पर दी। हालांकि, अन्य मामलों में हिरासत और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत अलग से निरुद्ध होने के कारण सत्यम वर्मा के फिलहाल जेल से बाहर आने की संभावना नहीं है। हाईकोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर के एक थाने में दर्ज केस क्राइम नंबर 164/2026 में जमानत मंजूर की। इस मामले में...

क्या धर्म बदलने से अपने आप 'अनुसूचित जनजाति' का दर्जा खत्म हो जाता है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया जवाब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी दूसरे धर्म में धर्म परिवर्तन करने से ही किसी व्यक्ति का 'अनुसूचित जनजाति' (ST) का दर्जा अपने आप खत्म नहीं हो जाता।कोर्ट ने कहा कि कोई व्यक्ति ST का सदस्य बना रहता है या नहीं, यह तथ्यों पर निर्भर करता है। इसका फैसला आदिवासी पहचान की ज़रूरी विशेषताओं की जांच करके किया जाएगा, जिसमें पारंपरिक रीति-रिवाज, सामाजिक संगठन, सामुदायिक जीवन और संबंधित आदिवासी समुदाय द्वारा स्वीकार्यता शामिल है।जस्टिस अरुण कुमार की बेंच ने यह बात 'चिंथडा आनंद बनाम आंध्र प्रदेश राज्य और अन्य'...

छात्रों से धार्मिक प्रार्थना कराने के आरोप में निलंबित शिक्षक को हाईकोर्ट से राहत, 15 दिन में जांच पूरी करने का निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल में छात्रों से इस्लामी प्रार्थना कराने और उन्हें एक विशेष समुदाय से संबंधित दिखाने वाली वर्दी पहनाने के आरोप में निलंबित शिक्षक को राहत दी।हाईकोर्ट ने विभागीय जांच जल्द पूरी करने का निर्देश देते हुए कहा कि जांच पूरी होने तक शिक्षक का निलंबन आदेश प्रभावी नहीं रहेगा। जस्टिस मंजू रानी चौहान की पीठ ने शिक्षक मोहम्मद अनजर अहमद की याचिका पर सुनवाई करते हुए विभागीय जांच को कानून के अनुसार जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया।कोर्ट ने कहा कि जांच को प्राथमिकता के आधार पर,...

UP Municipalities Act | निजी ज़मीन पर भी मवेशी बाज़ार के लिए लाइसेंस देने का अधिकार नगर पंचायत के पास: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि नगर पंचायत के पास उत्तर प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1916 के तहत अपनी स्थानीय सीमा के भीतर मवेशी बाज़ारों को लाइसेंस देने और उन्हें रेगुलेट करने का अधिकार है। कोर्ट ने मवेशी बाज़ार लगाने के लिए दिए गए लाइसेंस को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए यह बात कही।जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दिसंबर 2025 और मार्च 2026 के आदेशों को चुनौती दी गई। इन आदेशों में प्रतिवादी नंबर 7 को मथुरा ज़िले के महावन शहर में एक जगह...

CPC की धारा 10 के तहत मुकदमा रोकने से 'स्मॉल कॉज़ कोर्ट' के इनकार के खिलाफ अनुच्छेद 227 के तहत याचिका स्वीकार्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 'स्मॉल कॉज़ कोर्ट' (छोटी अदालतों) में लंबित मुकदमे को रोकने के लिए CPC की धारा 10 और धारा 151 के तहत दी गई अर्ज़ी को खारिज करने का आदेश, 'प्रोविंशियल स्मॉल कॉज़ कोर्ट्स एक्ट, 1887' की धारा 25 के अर्थ में "तय किया गया मामला" (केस डिसाइडेड) नहीं माना जाएगा।कोर्ट ने कहा कि चूंकि धारा 25 के तहत रिविज़न (पुनरीक्षण) का उपाय उपलब्ध नहीं था, इसलिए ऐसे आदेश के खिलाफ संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत याचिका स्वीकार्य है।'प्रोविंशियल स्मॉल कॉज़ कोर्ट्स एक्ट, 1887' की धारा 25...

बड़े पैमाने पर चलने वाले बूचड़खाने के लिए रेगुलर FSSAI लाइसेंस ज़रूरी, सिर्फ़ रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट काफ़ी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 'छोटे फ़ूड बिज़नेस' (Petty Food Business) के लिए तय क्षमता से ज़्यादा क्षमता पर चलने वाले बड़े पैमाने के बूचड़खाने के लिए 'फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006' (FSSAI) के तहत रेगुलर लाइसेंस की ज़रूरत होती है और सिर्फ़ रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट से ऐसी गतिविधि की इजाज़त नहीं मिल सकती।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने कहा कि संविधान के आर्टिकल 19(1)(g) के तहत व्यापार या कारोबार करने का मौलिक अधिकार, फ़ूड सेफ़्टी और पब्लिक हेल्थ के हित में लागू वैध...

लखनऊ जिला कोर्ट के आसपास बचे अवैध कब्जे भी हटेंगे, हाईकोर्ट ने पांच हफ्ते में कार्रवाई के दिए निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ जिला एवं सेशन कोर्ट के आसपास बचे सभी अवैध कब्जे हटाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने बताया कि उसके पहले के आदेशों के अनुपालन में 57 और अवैध कब्जे हटाए जा चुके हैं। इससे पहले 14 अवैध निर्माण हटाए गए।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राजीव भारती की पीठ ने लखनऊ में जिला एवं सेशन कोर्ट परिसर तथा आसपास के सार्वजनिक क्षेत्रों में कथित अवैध कब्जों से संबंधित दो याचिकाओं की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया।लखनऊ नगर निगम के जोन-1 के जोनल अधिकारी ने 8 सितंबर 2026 के निर्देशों के साथ हटाए...

RTE Act | नियुक्ति के समय TET नहीं था 31 मार्च 2015 से पहले पास किया तो नहीं जाएगी नौकरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE Act) के तहत महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि नियुक्ति के समय शिक्षक के पास शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की योग्यता नहीं थी लेकिन उसने कानून में दी गई समय-सीमा के भीतर TET पास कर लिया तो उसकी नियुक्ति को केवल इस आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने कहा कि RTE Act 2009 की धारा 23 में दी गई सुरक्षा को नजरअंदाज करके राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की अधिसूचना के आधार पर शिक्षक की सेवा समाप्त नहीं की...

यूपी सरकार 'दमन के हथियार' के तौर पर इस्तेमाल कर रही है 'गुंडा एक्ट': इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 'गुंडा एक्ट' के इस्तेमाल की कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि उसके सामने आए कई मामलों से पता चलता है कि राज्य सरकार 'गुंडा एक्ट' का इस्तेमाल 'दमन के हथियार' के तौर पर करने की अपनी नीति पर अड़ी हुई।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने गोंडा के निवासी के खिलाफ जारी आदेशों को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। इन आदेशों में उसे 'यूपी कंट्रोल ऑफ़ गुंडाज़ एक्ट, 1970' के तहत 'गुंडा' घोषित किया गया और छह महीने के लिए गोंडा जिले से बाहर रहने का आदेश दिया गया।कोर्ट ने...

बार एसोसिएशन की सदस्यता का विवाद निजी मामला, रिट क्षेत्राधिकार में नहीं आता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बार एसोसिएशन की सदस्यता, निलंबन या किसी सदस्य को संगठन से बाहर करने से जुड़े विवाद मूल रूप से निजी प्रकृति के होते हैं और ऐसे मामलों में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दाखिल नहीं की जा सकती।हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बार एसोसिएशन और उसके सदस्यों के बीच ऐसे विवाद में कोई सार्वजनिक कानून का तत्व शामिल नहीं होता। जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अब्देश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी लखीमपुर खीरी जिले की तहसील गोला गोकर्णनाथ स्थित सेंट्रल बार एसोसिएशन के एक...

सहारनपुर मस्जिद विध्वंस | हाईकोर्ट ने बेदखली के खिलाफ याचिका पर यूपी सरकार से जवाब मांगा, ₹6.41 करोड़ के हर्जाने की वसूली पर रोक लगाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारनपुर में मस्जिद को गिराने और वहां से बेदखल करने के खिलाफ दायर याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा। साथ ही कोर्ट ने सहारनपुर के सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा लगाए गए ₹6.41 करोड़ के हर्जाने की वसूली पर रोक लगाई।जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की बेंच ने राज्य सरकार को 3 हफ़्ते के अंदर अपना जवाब (काउंटर-एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता को जवाब का जवाब (रिज़ॉइंडर) दाखिल करने के लिए 1 हफ़्ते का समय दिया गया।मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर, 2026 को होगी। यह...

किराएदार के खिलाफ बेदखली मुकदमे में स्वतंत्र मालिकाना हक जताने वाला तीसरा व्यक्ति जरूरी पक्षकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किराए की संपत्ति पर स्वतंत्र मालिकाना हक का दावा करने वाला तीसरा व्यक्ति केवल इसलिए स्मॉल कॉज कोर्ट में बेदखली के मुकदमे का जरूरी या उचित पक्षकार नहीं बन जाता, क्योंकि उसका दावा मकान मालिक के मालिकाना हक से टकराता है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 1 नियम 10 के तहत किसी तीसरे व्यक्ति को पक्षकार बनाने की प्रक्रिया का इस्तेमाल सीमित अधिकार क्षेत्र वाली बेदखली कार्यवाही में अलग मालिकाना विवाद लाने के लिए नहीं किया जा सकता। जस्टिस डॉ. योगेंद्र...

अक्ल दांत और शरीर पर बाल से नाबालिग साबित नहीं होती लड़की, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपहरण मामले में दोषी को किया बरी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2011 के अपहरण मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 366 के तहत दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बरी करते हुए कहा कि केवल अक्ल दांत का न निकलना या बगल और जननांगों पर बाल होने के आधार पर किसी लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम नहीं मानी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन यह साबित करने में विफल रहा कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने कहा कि तीसरी दात यानी अक्ल दांत का न निकलना इस निष्कर्ष का आधार नहीं हो सकता कि संबंधित व्यक्ति ने 18 वर्ष की उम्र पूरी नहीं की...

S. 197 CrPC | कस्टडी में हिंसा पुलिस की आधिकारिक ड्यूटी नहीं, यह अपराध है: इलाहाबाद हाईकोर्ट का पुलिसकर्मियों को राहत देने से इनकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस कस्टडी में लोगों को बार-बार पीटने और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करने के आरोपी पुलिसकर्मियों की डिस्चार्ज (आरोप से बरी करने) की अर्जी खारिज करने का फैसला सही ठहराया।कोर्ट ने कहा कि ऐसी हिंसा को पुलिस की ड्यूटी का हिस्सा नहीं माना जा सकता और इसे केवल अपराध ही कहा जा सकता है।जस्टिस मदन पाल सिंह की बेंच ने पाया कि कस्टडी में लोगों के हाथ-पैर रस्सी से बांधकर और उन्हें उल्टा लिटाकर बार-बार पीटा गया था।कोर्ट पुलिसकर्मियों (जिनमें एक महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थी) की दो जुड़ी हुई...

लिखित बयान में दिए गए बचाव को CPC ऑर्डर 7 नियम 11 के तहत शिकायत खारिज करने का आधार नहीं बनाया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कोई ऐसा बचाव जो, अगर साबित हो जाए तो वादी के दावे को खारिज कर सकता है, उसे आम तौर पर सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के ऑर्डर VII नियम 11(a) के तहत शिकायत खारिज करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।कोर्ट ने कहा कि जांच केवल शिकायत में कही गई बातों पर निर्भर करती है और प्रतिवादी द्वारा अपने लिखित बयान में उठाए गए तर्क यह तय करने के लिए प्रासंगिक नहीं हैं कि शिकायत में कार्रवाई का कारण (cause of action) बताया गया है या नहीं।जस्टिस डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा,“कार्रवाई...
