इलाहाबाद हाईकोट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 69,000 सहायक शिक्षकों को EWS आरक्षण देने से इनकार करने का फैसला बरकरार रखा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2020 में आयोजित सहायक अध्यापकों के पद पर भर्ती के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ देने से इनकार करने वाले एकल जज का आदेश बरकरार रखा है। एकल जज ने 2020 में आयोजित भर्ती के उम्मीदवारों को लाभ देने से इनकार कर दिया था, क्योंकि यह प्रक्रिया उत्तर प्रदेश लोक सेवा (EWS के लिए आरक्षण) अधिनियम, 2020 के अधिनियमन से पहले शुरू की गई।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने माना था कि यद्यपि भर्ती की प्रक्रिया 103वें संविधान संशोधन के बाद शुरू हुई थी, लेकिन उत्तर प्रदेश लोक...
बिना सोचे-समझे एक ही तरह के आदेश पारित करने वाले DRT अधिकारी को 'ट्रेनिंग देने पर विचार करे' वित्त मंत्रालय: इलाहाबाद हाईकोर्ट
ऋण वसूली न्यायाधिकरण, (DRT) लखनऊ द्वारा बिना सोचे-समझे मामलों में पारित किए जा रहे इसी तरह के आदेशों को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि वित्त मंत्रालय को अधिकारियों को ट्रेनिंग देने पर विचार करना चाहिए, जिससे DRT सुचारू रूप से काम कर सके।याचिकाकर्ताओं ने अंतरिम राहत के लिए उनका आवेदन खारिज करने वाले DRT के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हालांकि आदेश के खिलाफ अपील स्वीकार्य थी, लेकिन यह तर्क दिया गया कि हालांकि अंतरिम राहत देने के समर्थन में कारण दिए गए, लेकिन उन्हें गलत तरीके से...
महिला और उसके वकील द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुरक्षा के लिए रिट दायर करने से इनकार करने के बाद जांच के आदेश, तलाक के मामले में पति द्वारा गड़बड़ी का आरोप
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में ऐसे मामले में जांच के निर्देश दिए, जिसमें याचिकाकर्ता नंबर 1 महिला ने रिट याचिका दायर करने से इनकार किया और संदेह जताया कि उसके पति ने तलाक की कार्यवाही में मदद के लिए किसी और से उसकी शादी का आरोप लगाते हुए रिट याचिका दायर की होगी।चूंकि याचिका में याचिकाकर्ता के वकील के रूप में जिस वकील का नाम उल्लेखित किया गया, उसने भी उक्त रिट याचिका दायर करने से इनकार कर दिया। इसलिए जस्टिस विनोद दिवाकर ने प्रयागराज के पुलिस आयुक्त को प्रारंभिक जांच करने का निर्देश...
Narsinghanand Case | 'जुबैर के ट्वीट नहीं करते अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन, जांच से पता चलेगा कि अपराध हुआ या नहीं': इलाहाबाद हाईकोर्ट
यति नरसिंहानंद के 'विवादास्पद' भाषणों पर उनके ट्वीट ('X' पोस्ट) को लेकर ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि जुबैर के पोस्ट अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं करते हैं, लेकिन केवल जांच के माध्यम से ही यह निर्धारित किया जा सकता है कि उनके खिलाफ कोई अपराध, जैसा कि आरोप लगाया गया, बनता है या नहीं।जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने कहा,न्यायालय ने पाया कि "भीड़ भरे...
निष्पक्ष जांच आवश्यक : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोहम्मद जुबैर के खिलाफ FIR रद्द करने से किया इनकार, गिरफ्तारी पर रोक बरकरार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने Alt News के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ उनके 'X' (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट्स को लेकर दर्ज FIR रद्द करने से इनकार कर दिया। ये पोस्ट्स यति नरसिंहानंद के आपत्तिजनक भाषण से संबंधित थे।हालांकि कोर्ट ने जांच के दौरान जुबैर की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक को बरकरार रखा है।जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया और कहा कि मामले में निष्पक्ष जांच आवश्यक है।कोर्ट ने जुबैर को निर्देश दिया कि जांच पूरी होने तक वह देश छोड़कर न...
फर्जी शादियां | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को 2017 के नियमों में संशोधन करने का निर्देश दिया, कहा- सत्यापन योग्य पंजीकरण प्रणाली जरूरी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सूओ मोटो रिट ज्युरिसडिक्शन (Suo Moto Writ Jurisdiction) के तहत, एक महत्वपूर्ण आदेश में राज्य सरकार को उत्तर प्रदेश विवाह पंजीकरण नियम, 2017 (Uttar Pradesh Marriage Registration Rules, 2017) में 6 महीने के भीतर संशोधन करने का निर्देश दिया, ताकि विवाह की वैधता और पवित्रता सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत और सत्यापन योग्य विवाह पंजीकरण तंत्र अस्तित्व में आ सके। जस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ ने यह निर्देश दलालों के एक संगठित रैकेट के उभरने के मद्देनज़र जारी किया, जो जाली...
नाबालिग की किशोरावस्था पर फैसला न होने से एक साल तक सामान्य जेल में रखने पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में इस बात पर चिंता व्यक्त की थी कि नाबालिग होने का दावा करने वाली 16 वर्षीय एक नाबालिग लड़की की अर्जी पर फैसला नहीं कर पाने के कारण वह विचाराधीन कैदियों और दोषियों के साथ नियमित जेल में बंद है.जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने कहा कि यदि निचली अदालत अंतत: इस नतीजे पर पहुंचती है कि आवेदक कानून का उल्लंघन करने वाला किशोर है तो विचाराधीन कैदियों और दोषियों के साथ नियमित जेल में एक साल से अधिक समय बिताने के कारण उसे हुए नुकसान की किसी भी तरह से भरपाई नहीं की जा सकती। ...
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज ने न्यायिक रिक्तियों को शीघ्र भरने की मांग वाली जनहित याचिका की सुनवाई से खुद को अलग किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज, जस्टिस महेश चंद्र तृप्ताही ने आज एक जनहित याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, जिसमें हाईकोर्ट में सभी मौजूदा न्यायिक रिक्तियों को समयबद्ध तरीके से समय पर और तेजी से भरने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी।इस साल मार्च में दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट "अपने इतिहास में सबसे गंभीर संकट का सामना कर रहा है", पीआईएल याचिका में एमओपी के तहत निर्धारित समयसीमा का सख्त पालन करने सहित इस न्यायालय में न्यायिक नियुक्तियों की...
मानव शर्मा आत्महत्या | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्नी की मां और बहन को जमानत दी
25 वर्षीय TCS मैनेजर मानव शर्मा को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को उनकी सास और साली को जमानत दी।जस्टिस समीर जैन की पीठ ने कहा कि उनके खिलाफ केवल सामान्य आरोप लगाए गए और आवेदकों की दलील में दम है कि उनके खिलाफ रिकॉर्ड में उकसाने का कोई ठोस सबूत नहीं है।एकल जज ने यह भी माना कि आवेदक महिलाएं हैं, जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वर्तमान मामले में वे 15 मार्च से जेल में हैं।शर्मा ने इस साल फरवरी में वैवाहिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए आत्महत्या कर ली थी। खुद को...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नीलामी क्रेता को उसकी 'मनमानी' कार्रवाई पर क्षतिपूर्ति करने के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा को दिया निर्देश वापस लिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह सफल बोलीदाता (नीलामी क्रेता) को क्षतिपूर्ति करने के लिए दिए गए अपने निर्देश को वापस ले लिया, जिसमें बोलीदाता से बयाना राशि स्वीकार करने के बावजूद, नीलामी की गई संपत्ति को चूककर्ता उधारकर्ता (मूल उधारकर्ता) को वापस करने की कथित 'मनमानी' कार्रवाई की गई थी।बता दें, 9 अप्रैल को न्यायालय ने सौरभ सिंह चौहान द्वारा दायर एक रिट याचिका पर विचार करते हुए यह आदेश पारित किया, जिन्होंने दावा किया था कि उन्होंने SARFAESI Act के तहत विचाराधीन संपत्ति के लिए सफलतापूर्वक बोली...
संभल मस्जिद संरक्षित स्मारक; हिंदू वादी केवल प्रवेश की मांग कर रहे हैं, धार्मिक चरित्र में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
संभल की शाही जामा मस्जिद का सर्वेक्षण करने के लिए एडवोकेट कमिश्नर को निर्देश देने वाले ट्रायल कोर्ट के नवंबर 2024 के आदेश के खिलाफ मस्जिद समिति की याचिका खारिज करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश बरकरार रखा।इसके साथ ही जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया हिंदू वादियों द्वारा दायर मुकदमा - जिसमें दावा किया गया कि मस्जिद का निर्माण 1526 में वहां मौजूद हिंदू मंदिर को ध्वस्त करने के बाद किया गया था - पूजा स्थल अधिनियम 1991 के तहत प्रतिबंधित नहीं है, क्योंकि वे...
BREAKING | संभल मस्जिद विवाद: हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का सर्वे ऑर्डर रखा बरकरार, कहा- हिंदू वादियों का मुकदमा 'वर्जित नहीं'
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मस्जिद समिति की याचिका खारिज कर दी, जिसमें 19 नवंबर को पारित ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। इस आदेश में एडवोकेट आयुक्त को मस्जिद का सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि मस्जिद का निर्माण मंदिर को नष्ट करने के बाद किया गया।इसके साथ ही जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने ट्रायल कोर्ट का सर्वेक्षण आदेश बरकरार रखा। इसने यह भी कहा कि हिंदू वादियों पर प्रथम दृष्टया कोई प्रतिबंध नहीं है।ट्रायल कोर्ट का आदेश महंत ऋषिराज गिरि सहित आठ...
बहराइच दरगाह मेला: हाईकोर्ट ने अनुष्ठानों और श्रद्धालुओं के प्रवेश की दी अनुमति, मेला आयोजित न करने का आदेश रखा बरकरार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शनिवार को विशेष सुनवाई में बहराइच जिले में सैयद सालार मसूद गाजी दरगाह में सदियों पुराने वार्षिक 'जेठ मेला' के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अनुमति देने से इनकार करने के मामले में हस्तक्षेप करने से (अभी के लिए) इनकार कर दिया।जस्टिस अताउ रहमान मसूदी और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने अंतरिम उपाय के रूप में दरगाह शरीफ में अनुष्ठानिक प्रथाओं को पूरा करने के लिए नियमित गतिविधियों की अनुमति दी।इस संबंध में राज्य को दरगाह शरीफ के प्रबंधन को प्रशासित करने वाली समिति के साथ...
आरोपी को चोटों का स्पष्टीकरण न देना प्रथम दृष्टया उसकी आत्मरक्षा याचिका का समर्थन करता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि जब एक ही घटना में आरोपी और शिकायतकर्ता दोनों को चोटें आती हैं, और अभियोजन पक्ष द्वारा अभियुक्त को चोटों के बारे में नहीं बताया जाता है, तो यह संदेह पैदा करता है कि क्या घटना की वास्तविक उत्पत्ति और प्रकृति को पूरी तरह से और ईमानदारी से प्रस्तुत किया गया है।जस्टिस विवेक कुमार बिड़ला और जस्टिस नंद प्रभा शुक्ला की खंडपीठ ने 48 साल पुराने हत्या के मामले में दो दोषियों की दोषसिद्धि को खारिज करते हुए कहा कि इस तरह की चूक अभियोजन पक्ष के मामले की विश्वसनीयता को...
धर्म परिवर्तन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: धर्म की श्रेष्ठता का दावा सेक्युलरिज़्म के खिलाफ, संविधान जबरन धर्म परिवर्तन की इजाज़त नहीं देता
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को स्वतंत्र रूप से धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार देता है लेकिन यह जबरन या धोखे से किए गए धर्म परिवर्तन का समर्थन नहीं करता।जस्टिस विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने कहा,"अनुच्छेद 25(1) अंतरात्मा की स्वतंत्रता और धर्म को स्वतंत्र रूप से मानने, पालन करने और प्रचार करने का अधिकार देता है। लेकिन यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है।"अदालत ने कहा कि यह सीमाएं इसलिए जरूरी...
मध्यस्थता का लंबित होना स्टाम्प अधिकारियों को स्टाम्प अधिनियम के तहत कार्यवाही शुरू करने से नहीं रोकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि मध्यस्थता कार्यवाही के लंबित रहने से स्टाम्प अधिकारियों के भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के तहत कार्यवाही शुरू करने के अधिकार क्षेत्र पर रोक नहीं लगती है। मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 और भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के तहत मध्यस्थता समझौतों के बीच परस्पर क्रिया में, उच्चतम न्यायालय ने एक बिना स्टाम्प वाले समझौते से निपटते हुए माना कि स्टाम्प शुल्क की अपर्याप्तता के परिणामस्वरूप मध्यस्थता कार्यवाही नहीं रुकेगी।यह माना गया कि मध्यस्थ स्टाम्प शुल्क की पर्याप्तता पर...
जमानत याचिका के साथ केस डायरी जोड़ना अब सामान्य प्रक्रिया, इसी आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि न तो किसी व्यक्ति को जमानत से इनकार किया जा सकता है और न ही उसकी जमानत याचिका का विरोध मुख्य रूप से इस आधार पर किया जा सकता है कि केस डायरी के अंश उसकी जमानत याचिका के साथ संलग्न किए गए थे।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने हत्या के आरोपी को समानता के आधार पर जमानत देते हुए कहा, 'नैसर्गिक न्याय का यह बुनियादी सिद्धांत है कि किसी भी व्यक्ति को सुनवाई का पर्याप्त अवसर दिए बिना उसकी निंदा नहीं की जानी चाहिए, जिसमें उसके खिलाफ सामग्री की प्रतियां उपलब्ध...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 गैर-कार्य शनिवारों को हाईकोर्ट कार्य दिवस घोषित करने पर बार से राय मांगी
14 मई 2025 को जारी अपने आधिकारिक पत्र में हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय ने इस मुद्दे पर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन एडवोकेट एसोसिएशन और अवध बार एसोसिएशन (लखनऊ पीठ) के अध्यक्ष और सचिव से राय मांगी।इन दिनों इसका उपयोग 5 वर्ष से अधिक पुराने मामलों की सुनवाई के लिए किया जा सकता है।यह पत्र राष्ट्रीय न्यायालय प्रबंधन प्रणाली (NCMS)-2024 की नीति एवं कार्य योजना के पैरा 49 (ii) में उल्लिखित अनुशंसा के अनुसरण में लिखा गया।इसमें कहा गया,"प्रत्येक माह का एक शनिवार 5 वर्ष से अधिक पुराने मामलों की सुनवाई...
कुरान ने उचित कारण से दी बहुविवाह की अनुमति, लेकिन पुरुष करते हैं इसका गलत इस्तेमाल: UCC के पक्ष में इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि इस्लाम कुछ परिस्थितियों में और कुछ शर्तों के साथ एक से अधिक विवाह (बहुविवाह) की अनुमति देता है, लेकिन इस अनुमति का मुस्लिम कानून के आदेश के विरुद्ध भी 'व्यापक रूप से दुरुपयोग' किया जाता है। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि प्रारंभिक इस्लामी काल में विधवाओं और अनाथों की रक्षा के लिए कुरान के तहत बहुविवाह की सशर्त अनुमति दी गई थी, हालांकि, अब उक्त प्रावधान का पुरुषों द्वारा 'स्वार्थी उद्देश्यों' के लिए दुरुपयोग किया जा रहा हैइस बात पर गौर करते हुए,...
विचाराधीन कैदी को पासपोर्ट जारी करने/पुनः जारी करने/नवीनीकरण के लिए आवेदन करने से पहले विदेश यात्रा के लिए अदालत से अनुमति लेनी होगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कहा है कि विचाराधीन कैदी को पासपोर्ट प्राधिकारी के समक्ष पासपोर्ट जारी करने, पुनः जारी करने या नवीनीकरण के लिए आवेदन करने से पहले संबंधित न्यायालय से विदेश यात्रा की अनुमति लेनी होगी। जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने कहा, "पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के प्रावधानों और अधिनियम, 1967 की धारा 22 के तहत जारी अधिसूचना को सरलता से पढ़ने पर यह एकमात्र तार्किक निष्कर्ष निकलता है कि ऐसे सभी मामलों में, जिनमें आपराधिक कार्यवाही लंबित है और पासपोर्ट अधिनियम,...

















