इलाहाबाद हाईकोट

शादी में दिए गए उपहार आमतौर पर दहेज के रूप में नहीं लिए जाते: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्मांतरण और दहेज मामले में रिश्तेदारों को राहत दी
'शादी में दिए गए उपहार आमतौर पर दहेज के रूप में नहीं लिए जाते': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्मांतरण और दहेज मामले में रिश्तेदारों को राहत दी

यह देखते हुए कि विवाह समारोहों में दिए गए उपहारों को आमतौर पर दहेज के रूप में नहीं लिया जाता है, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दहेज निषेध अधिनियम और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत दर्ज तीन व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी। यह देखते हुए कि यह मामला बाद में विचाराधीन हो सकता है और इसलिए इसकी विस्तृत जांच आवश्यक है, जस्टिस विक्रम डी चौहान की पीठ ने राज्य और सूचना देने वाले पक्ष से इस मामले में प्रति-शपथपत्र मांगा।सह-आरोपी फ़राज़ अथर, जो धर्म से मुस्लिम...

2016 फोर्स्ड एविक्‍शन केस | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आजम खान के खिलाफ मुकदमे में अंतिम आदेश पारित करने पर रोक 28 जुलाई तक बढ़ाई
2016 फोर्स्ड एविक्‍शन केस | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आजम खान के खिलाफ मुकदमे में अंतिम आदेश पारित करने पर रोक 28 जुलाई तक बढ़ाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार (15 जुलाई) को उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और सांसद मोहम्मद आज़म खान और अन्य से जुड़े 2016 के जबरन बेदखली मामले की समेकित सुनवाई में अंतिम आदेश पारित करने पर लगी रोक (28 जुलाई तक) बढ़ा दी। ज‌स्टिस समीर जैन की पीठ ने रोक इसलिए बढ़ा दी क्योंकि राज्य सरकार ने निर्देश प्राप्त करने और संबंधित संकलन प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था।पीठ ने आवेदकों को अपनी याचिकाओं में 'पूरी कार्यवाही' रद्द करने के अनुरोध को हटाने के लिए एक संशोधन आवेदन दायर करने का भी निर्देश...

MACT अवॉर्ड का 43 साल से भुगतान नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीएम को आपत्तिजनक औचित्य के लिए फटकार लगाई, अधिकारियों पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने पर विचार
MACT अवॉर्ड का 43 साल से भुगतान नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीएम को 'आपत्तिजनक' औचित्य के लिए फटकार लगाई, अधिकारियों पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने पर विचार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते, लगभग 43 साल पहले, अगस्त 1982 में पारित मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) के एक आदेश के तहत 2011 में जारी किए गए वसूली प्रमाणपत्र का निष्पादन न करने पर सुल्तानपुर प्रशासन की कड़ी आलोचना की। मामले की सुनवाई के दौरान, जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने सुल्तानपुर के ज़िला मजिस्ट्रेट के रुख़ पर आपत्ति जताई, जिन्होंने यह तर्क देकर मुआवजे का भुगतान न करने को उचित ठहराने की कोशिश की कि वसूली पुलिस अधीक्षक से की जानी थी, क्योंकि दुर्घटना में...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के तहत दिव्यांगजनों के अधिकारों के प्रति UPSRTC अधिकारियों को संवेदनशील बनाने का निर्देश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के तहत दिव्यांगजनों के अधिकारों के प्रति UPSRTC अधिकारियों को संवेदनशील बनाने का निर्देश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक को निर्देश दिया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि सभी अधिकारी दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत गारंटीकृत दिव्यांगजनों के अधिकारों के प्रति संवेदनशील हों। निगम में कार्यरत एक कर्मचारी, जिसे दिव्यांगता से पीड़ित होने के कारण कोई भी पद देने से मना कर दिया गया था, के मामले की सुनवाई करते हुए, जस्टिस अजय भनोट ने कहा, “उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम, लखनऊ के प्रबंध निदेशक यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी अधिकारी...

मुरादाबाद मॉब लिंचिंग | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को सुप्रीम कोर्ट के तहसीन पूनावाला निर्देशों के अनुपालन पर बेहतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया
मुरादाबाद मॉब लिंचिंग | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को सुप्रीम कोर्ट के 'तहसीन पूनावाला' निर्देशों के अनुपालन पर बेहतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश सरकार को तहसीन एस. पूनावाला बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2018) मामले में सु्प्रीक कोर्ट द्वारा मॉब लिंचिंग और भीड़ हिंसा की घटनाओं को रोकने और उनका समाधान करने के संबंध में दिए गए दिशानिर्देशों/निर्देशों, विशेष रूप से निर्णय के पैराग्राफ 40.13 से 40.21 में दिए गए निर्देशों के अनुपालन के संबंध में एक बेहतर प्रति-हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस अवनीश सक्सेना की पीठ ने उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में गोकशी के संदेह में मारे...

सूचीबद्ध मामलों में वकील की गैर-हाजिरी पेशेवर कदाचार के बराबर: इलाहाबाद हाईकोर्ट
सूचीबद्ध मामलों में वकील की गैर-हाजिरी पेशेवर कदाचार के बराबर: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह सूचीबद्ध अधिकांश मामलों में, वह भी कई तारीखों पर, वकीलों के उपस्थित न होने पर आपत्ति जताते हुए उनके आचरण को 'पेशेवर कदाचार' करार दिया, जो न्यायालय के अनुसार 'बेंच हंटिंग' या 'फोरम शॉपिंग' के समान है। जस्टिस कृष्ण पहल की पीठ ने एक ज़मानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें बार-बार सूचीबद्ध होने [पिछले 7 महीनों में 5 बार] के बावजूद, आवेदक की ओर से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ।3 जुलाई को भी, सूची संशोधित होने के बाद मामले की सुनवाई होने के बावजूद, आवेदक के...

मुख्य व्यावसायिक स्थल पर गतिविधि न होने का मतलब यह नहीं कि करदाता को जारी किए गए चालान फर्जी हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
मुख्य व्यावसायिक स्थल पर गतिविधि न होने का मतलब यह नहीं कि करदाता को जारी किए गए चालान फर्जी हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इसलिए कि करदाता के मुख्य व्यावसायिक स्थल पर कोई गतिविधि नहीं थी, यह नहीं माना जा सकता कि ऐसे करदाता के पक्ष में जारी किए गए चालान फर्जी हैं।याचिकाकर्ता ने CGST Act की धारा 129(3) का तहत दंड आदेश रद्द करने और सहायक आयुक्त, वाणिज्यिक कर मोबाइल यूनिट, खतौल, मुजफ्फरनगर द्वारा धारा 129(1)(ए) के तहत जब्त किए गए माल को वापस लेने की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि प्राधिकारी ने यह मानकर धारा 129(1)(बी) के तहत जुर्माना लगाया कि...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अदालत के आदेश को ही लिखित FIR मानने पर बलिया के पुलिस अधीक्षक को फटकार लगाई, स्पष्टीकरण मांगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अदालत के आदेश को ही लिखित FIR मानने पर बलिया के पुलिस अधीक्षक को फटकार लगाई, स्पष्टीकरण मांगा

इस महीने की शुरुआत में पारित एक कड़े आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बलिया के पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह को कड़ी फटकार लगाई, क्योंकि उन्होंने अदालत के पहले के आदेश को ही लिखित FIR मान लिया था।न्यायालय ने आश्चर्य व्यक्त किया कि 29 मई, 2025 के उसके आदेश को सीधे FIR के रूप में दर्ज कर लिया गया, बजाय इसके कि स्थापित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाए, जिसके तहत या तो शिकायतकर्ता या कोई नामित अधिकारी सूचना को लिखित रूप में दर्ज करता है और औपचारिक पंजीकरण के लिए पुलिस को प्रस्तुत करता है।न्यायालय ने...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अभियोजन एजेंसियों द्वारा वकीलों को निशाना बनाने की प्रवृत्ति की निंदा की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अभियोजन एजेंसियों द्वारा वकीलों को निशाना बनाने की प्रवृत्ति की निंदा की

कड़े शब्दों में लिखे गए कई आदेशों में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में उन आरोपों को गंभीरता से लिया, जिनमें कहा गया कि उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारियों ने 90 वर्षीय याचिकाकर्ता को धमकाया और अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए दायर लंबित जनहित याचिका (PIL) के संबंध में उसके वकील को धमकाने का प्रयास किया।जस्टिस जेजे मुनीर की पीठ ने वकीलों द्वारा अपने पेशेवर कर्तव्यों का पालन करने के लिए उनकी जांच करने की प्रवृत्ति की निंदा की और चेतावनी दी कि ऐसा आचरण न्यायिक व्यवस्था की नींव पर प्रहार करता है। यदि यह साबित...

संत रामपाल की किताबों में हिंदू देवी-देवताओं के अभद्र चित्रण को लेकर हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब
संत रामपाल की किताबों में हिंदू देवी-देवताओं के अभद्र चित्रण को लेकर हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है कि क्या वह स्वयंभू संत रामपाल महाराज के इशारे पर कथित रूप से प्रकाशित पुस्तकों, पर्चों और अन्य साहित्य को जब्त करने की मांग करने वाले एक ज्ञापन पर कोई कार्रवाई करने का प्रस्ताव रखती है, जिसमें कथित तौर पर हिंदू देवी-देवताओं के अभद्र चित्रण शामिल हैं।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने ट्रस्ट हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और इसके 17 सदस्यों और पदाधिकारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ताओं ने कथित...

हाईकोर्ट ने UP PCS(J) Exam प्रक्रिया में सुधार का सुझाव देने वाली जस्टिस माथुर आयोग की रिपोर्ट पर पक्षकारों से जवाब मांगा
हाईकोर्ट ने UP PCS(J) Exam प्रक्रिया में सुधार का सुझाव देने वाली जस्टिस माथुर आयोग की रिपोर्ट पर पक्षकारों से जवाब मांगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को जस्टिस गोविंद माथुर (हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस) की अध्यक्षता वाले सदस्यीय आयोग द्वारा प्रस्तुत प्रारंभिक रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लिया, जिसमें उत्तर प्रदेश पीसीएस (जे) प्रतियोगी परीक्षाओं (UP PCS(J) Exam) के संचालन में तत्काल सुधार और प्रक्रियात्मक संशोधनों की सिफारिश की गई।जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने दर्ज किया कि प्रारंभिक रिपोर्ट (भाग-I) 14 सेटों में प्रस्तुत की गई। इसके साथ संलग्न एक कवर लेटर में निर्दिष्ट किया गया कि...

दिल्ली भवन को लेकर किरायेदार नहीं कर सकते विरोध, जीवन की सुरक्षा किरायेदारी अधिकारों से अधिक महत्वपूर्ण: इलाहाबाद हाईकोर्ट
दिल्ली भवन को लेकर किरायेदार नहीं कर सकते विरोध, जीवन की सुरक्षा किरायेदारी अधिकारों से अधिक महत्वपूर्ण: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि जर्जर भवन में रह रहे किरायेदारों के जीवन को खतरे से बचाना उत्तर प्रदेश नगरीय परिसरों का किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 के तहत उनके किरायेदारी अधिकारों की तुलना में अधिक प्राथमिकता रखता है।जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने कहा,“किरायेदार उस भवन के शीघ्र ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) का विरोध नहीं कर सकते, विशेष रूप से तब जब संबंधित प्राधिकरणों ने स्थल का निरीक्षण कर यह पाया हो कि भवन को गिराना अनिवार्य है। वर्ष 1959 के अधिनियम के तहत...

भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले अपराध को लागू करने से पहले उचित सावधानी बरतनी चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले अपराध को लागू करने से पहले उचित सावधानी बरतनी चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 को लागू करने से पहले उचित सावधानी और एक समझदार व्यक्ति के मानकों का पालन किया जाना चाहिए, जो भारत की संप्रभुता एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कथित कृत्यों को आपराधिक बनाती है।न्यायालय ने आगे कहा कि सोशल मीडिया पर बोले गए शब्द या पोस्ट भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्गत आते हैं, इसलिए इन्हें संकीर्ण रूप से नहीं समझा जाना चाहिए, जब तक कि वे ऐसी प्रकृति के न हों, जो किसी देश की संप्रभुता और अखंडता को प्रभावित करते हों या...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में अपराध स्थल जांच की SOP की समीक्षा हेतु स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में अपराध स्थल जांच की SOP की समीक्षा हेतु स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्त्वपूर्ण आदेश में उत्तर प्रदेश में अपराध स्थलों की जांच के लिए अपनाई जा रही मानक प्रक्रियाओं (Standard Operating Procedure - SOP) की समीक्षा और सुधार हेतु एक अलग आपराधिक जनहित याचिका (Criminal PIL) दायर करने का निर्देश दिया।जस्टिस संगीता चंद्रा और जस्टिस बृजराज सिंह की खंडपीठ ने आदेश में कहा,"हम इस मत पर हैं कि उत्तर प्रदेश राज्य में अपराध स्थल जांच के लिए जो मानक संचालन प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, उसके संदर्भ में, ताकि अभियोजन की प्रक्रिया बार-बार विफल न हो, एक अलग...

किसी घटना या भारत का उल्लेख किए बिना केवल पाकिस्तान का समर्थन करना BNS की धारा 152 के अंतर्गत नहीं आता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
किसी घटना या भारत का उल्लेख किए बिना केवल पाकिस्तान का समर्थन करना BNS की धारा 152 के अंतर्गत नहीं आता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि किसी घटना का उल्लेख किए बिना या भारत का नाम लिए बिना केवल पाकिस्तान का समर्थन करना, प्रथम दृष्टया, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 के तहत अपराध नहीं बनता है, जो भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों को दंडित करती है।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने यह टिप्पणी एक 18 वर्षीय लड़के [रियाज़] को ज़मानत देते हुए की। रियाज़ पर BNS की धारा 152 और धारा 196 के तहत कथित तौर पर एक इंस्टाग्राम स्टोरी पोस्ट करने का आरोप है।इस स्टोरी...

क्या BNS की धारा 111 में संगठित अपराध शामिल होने के कारण गैंगस्टर एक्ट निरर्थक नहीं हो गया? हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा
क्या BNS की धारा 111 में 'संगठित अपराध' शामिल होने के कारण गैंगस्टर एक्ट निरर्थक नहीं हो गया? हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 111, जो 'संगठित अपराध' के अपराध को परिभाषित और दंडित करती है, उसके लागू होने के साथ ही उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986 के प्रावधान 'अनावश्यक' हो गए।जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस अवनीश सक्सेना की खंडपीठ ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार से तीन सप्ताह के भीतर जवाब भी मांगा।खंडपीठ ने टिप्पणी की,"इस न्यायालय का मानना ​​है कि BNS की धारा 111 का प्रावधान, उत्तर प्रदेश गैंगस्टर अधिनियम के प्रावधानों...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने PIL याचिकाकर्ताओं को मिल रहीं धमकियों पर जताई चिंता, लिया स्वतः संज्ञान
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने PIL याचिकाकर्ताओं को मिल रहीं धमकियों पर जताई चिंता, लिया स्वतः संज्ञान

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अतिक्रमण की शिकायतें लेकर जनहित याचिका दायर करके अदालत का दरवाजा खटखटाने वाले याचिकाकर्ताओं के सामने 'रोजमर्रा की बीमारी' का न्यायिक नोटिस लिया है।न्यायालय ने कहा कि ऐसे याचिकाकर्ताओं को नियमित रूप से धमकाया जाता है, अक्सर शारीरिक हमले या धमकियों के माध्यम से, अतिक्रमणकारियों द्वारा स्वयं या कभी-कभी, सरकारी अधिकारियों द्वारा भी। जस्टिस जेजे मुनीर की पीठ ने अतिक्रमण के आरोपों से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया, जिसमें याचिकाकर्ता ने दावा किया था...

वादियों को कार्यवाही शुरू करने के लिए अधिक राशि जमा करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता; फोटो-पहचान शुल्क पर 125 रुपये की सीमा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
वादियों को कार्यवाही शुरू करने के लिए अधिक राशि जमा करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता; फोटो-पहचान शुल्क पर 125 रुपये की सीमा: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट में फोटो पहचान पत्र के लिए अत्यधिक शुल्क हटाने संबंधी एकल न्यायाधीश के आदेश को आंशिक रूप से बरकरार रखते हुए, की लखनऊ पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट में मामले या हलफनामा दायर करने के लिए वादियों से 22.11.2024 के कार्यालय ज्ञापन में निर्धारित राशि से अधिक राशि नहीं ली जा सकती।यह देखते हुए कि इलाहाबाद और लखनऊ स्थित फोटो पहचान केंद्रों पर छपी रसीदों में अंतर था, जस्टिस अताउ रहमान मसूदी और जस्टिस श्री प्रकाश सिंह की पीठ ने कहा,“दोनों बार एसोसिएशनों को, जो इस बात पर सहमत हैं, निर्देश दिया...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहलगाम हमले के बाद सरकार पर सवाल उठाने वाले कथित पोस्ट के मामले में अग्रिम जमानत दी; कहा- आरोपी के कृत्य से समाज को नुकसान नहीं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहलगाम हमले के बाद सरकार पर सवाल उठाने वाले कथित पोस्ट के मामले में अग्रिम जमानत दी; कहा- 'आरोपी के कृत्य से समाज को नुकसान नहीं'

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को अज़ाज़ अहमद नामक व्यक्ति को अग्रिम ज़मानत दे दी। उन पर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकवादी हमले के बाद सोशल मीडिया पर सरकार पर सवाल उठाने वाली एक पोस्ट डालने के आरोप में धारा 353(3) और 152 बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया है। ज़मानत याचिका स्वीकार करते हुए, जस्टिस विक्रम डी चौहान की पीठ ने कहा कि एजीए यह साबित नहीं कर पाए कि उन्हें राहत देने से व्यापक समाज पर कोई प्रभाव पड़ेगा, या कि अगर उन्हें ज़मानत दी जाती है, तो स्वतंत्र, निष्पक्ष और पूर्ण जांच...