इलाहाबाद हाईकोट
NDPS एक्ट मामलों में अग्रिम जमानत याचिका विचारणीय; धारा 482 BNSS 'सीआरपीसी (यूपी संशोधन) अधिनियम 2018' पर प्रभावी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 के लागू होने के साथ ही उत्तर प्रदेश राज्य में NDPS एक्ट के मामलों में अग्रिम जमानत याचिका अब स्वीकार्य होगी, क्योंकि राज्य के CrPC संशोधन के तहत पिछले प्रतिबंध को BNSS द्वारा प्रभावी रूप से निरस्त कर दिया गया है। जस्टिस मनीष माथुर की पीठ ने फैसला सुनाया कि BNSS के अधिनियमित होने के साथ ही दंड प्रक्रिया संहिता (यूपी संशोधन) अधिनियम, 2018 द्वारा लगाया गया प्रतिबंध, विशेष रूप से धारा 438 (6), जो...
'सपने में भी नहीं सोचाा था कि सम्मान हो ठेस पहुंचाऊंगी': इलाहाबाद हाईकोर्ट को कानूनी प्रावधान की 'याद दिलाने' पर आलोचना के बाद डीएम ने मांगी माफ़ी
बिजनौर में जिला मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात आईएएस अधिकारी जसजीत कौर ने हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट से 'बिना शर्त' माफ़ी मांगी। दरअसल हाईकोर्ट ने उनकी ओर से दायर एक हलफ़नामे पर कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसे कानून के बारे में हाईकोर्ट की समझ का "अपमान करने का प्रयास" माना गया था। यह मुद्दा तब उठा जब डीएम ने अपने हलफ़नामे में यूपी-राजस्व संहिता नियम, 2016 के तहत एक प्रावधान का उल्लेख किया, जिसे न्यायालय ने कानूनी प्रावधान को अनावश्यक और अनुचित रूप से याद दिलाने के रूप में व्याख्या की।मुख्यतः जस्टिस...
बहराइच मजार विध्वंस मामला: यूपी सरकार के 4 हफ्ते तक कोई सख्त कार्रवाई न करने के आश्वासन पर हाईकोर्ट ने यथास्थिति का आदेश दिया
उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया कि उसने बहराइच में लक्कड़ शाह और 3 अन्य मजारों में विध्वंस अभियान को रोक दिया है, और आश्वासन दिया कि अगले 4 सप्ताह तक कोई दंडात्मक उपाय नहीं किया जाएगा।संदर्भ के लिए, हजरत सैयद हाशिम शाह उर्फ लक्कड़ शाह मजार सहित चार मजार, जहां 16 वीं शताब्दी से उर्स मनाया जाता है, कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के मुर्तिहा रेंज जंगल में स्थित है, को वन विभाग द्वारा ध्वस्त किया जा रहा था, जिसने इस क्षेत्र को संरक्षित माना और संरचनाओं को...
लखनऊ फैमिली कोर्ट भवन गिराने के विरोध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई: हाईकोर्ट ने केंद्र और हाईकोर्ट से मांगा जवाब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ में फैमिली कोर्ट की मुख्य इमारत को गिराने के लिए नीलामी को चुनौती देने वाली जनहित याचिका के जवाब में हाईकोर्ट प्रशासन के साथ-साथ केंद्र सरकार से संक्षिप्त जवाब मांगा है।सामाजिक कार्यकर्ता गौतम भारती द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि फैमिली कोर्ट बिल्डिंग, जिसे "चंडी वाली बारादरी" के नाम से भी जाना जाता है, ऐतिहासिक महत्व की एक पुरानी विरासत संरचना है, जो अवध/लखनऊ की समृद्ध सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत के जीवंत उदाहरण के रूप में कार्य करती है। याचिका में...
पुलिस अपनी बड़ी छवि दिखाती है, लेकिन अपहरण के मामलों में उदासीनता दिखाई: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पिछले हफ्ते पारित एक कड़े शब्दों वाले आदेश में, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारी अक्सर अपने लिए जीवन से बड़ी छवि बनाते हैं, लेकिन वे सार्वजनिक शिकायतों को प्राप्त करने और संबोधित करने से खुद को ढाल लेते हैं।जस्टिस जे जे मुनीर और जस्टिस अनिल कुमार एक्स की खंडपीठ ने कहा कि पुलिस आमतौर पर अपहरण/अपहरण के मामलों में उदासीनता दिखाती है क्योंकि अधिकारियों पर कोई व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय नहीं की जाती है। खंडपीठ ने कहा कि जवाबदेही की कमी के कारण अक्सर उनकी निष्क्रियता के कारण अपहरण दुखद रूप से...
पक्षकारों के बीच न्याय करने के लिए प्रारंभिक डिक्री में संशोधन करने का अधिकार ट्रायल कोर्ट को: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि पक्षकारों के बीच न्याय करने के लिए प्रारंभिक डिक्री में संशोधन करने का अधिकार ट्रायल कोर्ट को है।बलिराम आत्माराम केलापुरे बनाम इंदिराबाई और एस. सतनाम सिंह एवं अन्य बनाम सुरेंदर कौर एवं अन्य में सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने कहा,“CPC की धारा 97 का प्रावधान या माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा उक्त प्रावधान की व्याख्या पक्षकारों के बीच न्याय करने के लिए आवश्यक होने पर प्रारंभिक डिक्री में संशोधन करने की ट्रायल कोर्ट की शक्ति को...
एक बार अभ्यर्थियों को नियमित पदों पर समाहित कर लिया जाए तो प्रारंभिक नियुक्तियों में अनियमितता को ठीक मान लिया जाएगाः इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि एक बार अपीलकर्ता-कर्मचारियों को नियमित पदों पर रिक्तियों के विरुद्ध समाहित कर लिया जाए तो उनकी प्रारंभिक नियुक्ति के समय जो भी अनियमितता रही होगी उसे ठीक मान लिया जाएगा।अस्वीकृत पदों पर नियुक्तियों के कारण कर्मचारियों की बाद में बर्खास्तगी के मामले में जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने कहा कि अपीलकर्ताओं की कोई गलती नहीं थी, भले ही उनकी प्रारंभिक नियुक्तियों में अनियमितता थी।अपीलकर्ता-याचिकाकर्ताओं को क्रमशः 1987 और 1989 में...
मस्जिद विध्वंस की रिपोर्टिंग से जुड़े मामले में पासपोर्ट NOC से वंचित BBC पत्रकार को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली राहत
बाराबंकी में रामसनेहीघाट मस्जिद के विध्वंस पर 2021 की अपनी रिपोर्ट को लेकर FIR का सामना कर रहे BBC से जुड़े पत्रकार मोहम्मद सेराज अली को राहत देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को बाराबंकी की अदालतों के दो आदेशों को रद्द कर दिया, जिसमें उन्हें पासपोर्ट के नवीनीकरण/जारी करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) देने से इनकार कर दिया गया था।अली ने पत्रकार मुकुल चौहान के साथ जून, 2021 में द वायर के लिए काम करते हुए एक वीडियो रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इस पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने आईपीसी की विभिन्न...
'बिना सोचे-समझे जारी किए गए नोटिस': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने श्रावस्ती में 27 मदरसों को गिराने पर लगाई रोक
उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में 27 मदरसों को बड़ी राहत देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनके गिराए जाने पर रोक लगा दी है और राज्य के अधिकारियों को उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने से रोक दिया।यह आदेश गुरुवार को जस्टिस जसप्रीत सिंह की पीठ ने मदरसों द्वारा दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पारित किया।याचिकाकर्ताओं ने सरकार के उस नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें धार्मिक शिक्षा देने से मना किया गया था और चेतावनी दी थी कि अगर निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो उनके खिलाफ उचित कार्रवाई...
मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति की इच्छा तय नहीं हो पाने पर कोर्ट बनाएगा प्रतिनिधि: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की है कि मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम में एक कानूनी खालीपन है, क्योंकि यह यह स्पष्ट नहीं करता कि किसी मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति की “इच्छा और प्राथमिकताओं” को कैसे निर्धारित किया जाए, जब उसके लिए प्रतिनिधि नियुक्त किया जाना हो। ऐसे मामलों में अदालतें "परेंस पैट्राए" के रूप में करती हैं और मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के सर्वोत्तम हितों को ध्यान में रखते हुए प्रतिनिधि नियुक्त करती हैं। मानसिक रूप से विकलांग मौसी के लिए उनके भतीजे को प्रतिनिधि नियुक्त...
दूसरी शादी में भरण-पोषण पर फैसला देने में पहली शादी का तथ्य महत्वहीन: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया कि किसी पति या पत्नी की पहली शादी जीवित होने के कारण दूसरी शादी अमान्य है या नहीं, यह तथ्य हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 24 के तहत मुकदमा लंबित रहने के दौरान भरण-पोषण के आवेदन पर निर्णय लेते समय प्रासंगिक नहीं है।जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस अवनीश सक्सेना की खंडपीठ ने कहा, "महत्वपूर्ण यह है कि अदालत यह देखे कि भरण-पोषण और खर्च मांगने वाला पक्ष वास्तव में इसकी आवश्यकता रखता है या नहीं, ताकि यह तय किया जा सके कि दूसरा पक्ष उसे भुगतान करे या नहीं, जब तक...
'अपमानजनक भाषा': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'कायर-पीएम मोदी' और 'नरेंद्र-सरेंडर' टिप्पणी मामले में आरोपी को राहत देने से किया इनकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को 24 वर्षीय व्यक्ति द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित सोशल मीडिया पोस्ट के लिए उसके खिलाफ दर्ज FIR के खिलाफ दायर याचिका खारिज किया। यह पोस्ट चार दिनों तक चले सैन्य टकराव के बाद 10 मई, 2025 को भारत-पाकिस्तान युद्ध विराम समझौते के बाद की गई थी।हालांकि याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि कथित पोस्ट भावनाओं में बहकर की गई, लेकिन जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस अनिल कुमार-एक्स की खंडपीठ ने इस दलील को खारिज करते हुए इस प्रकार टिप्पणी की:"याचिकाकर्ता द्वारा प्रधानमंत्री...
महाकुंभ भगदड़ मामला | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुआवजे में देरी पर यूपी सरकार की उदासीनता को लेकर फटकार लगाई, मृतकों का ब्यौरा मांगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट की अवकाश खंडपीठ ने कड़े शब्दों में आदेश देते हुए प्रयागराज में कुंभ मेले में मौनी अमावस्या के शाही स्नान की रात (29 जनवरी) को मारे गए लोगों के परिवारों को अनुग्रह राशि वितरित करने में देरी के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई।राज्य के आचरण को 'अस्थिर' और 'नागरिकों की दुर्दशा के प्रति उदासीनता' को दर्शाते हुए न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि एक बार जब सरकार ने मुआवजे की घोषणा कर दी तो समय पर और सम्मानजनक भुगतान सुनिश्चित करना उसका 'बाध्य कर्तव्य' है।अदालत ने कुंभ मेले...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वयस्क विवाहित जोड़े को दी सुरक्षा, कहा- अगर कोई नुकसान हुआ तो एसएसपी जवाबदेह होंगे
व्यक्तिगत स्वायत्तता और संवैधानिक स्वतंत्रता को मजबूत करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को 23 वर्षीय महिला के परिवार के सदस्यों को उसे और उसके वयस्क पति को परेशान करने से रोक दिया, जिसके साथ उसने आर्य समाज मंदिर में स्वेच्छा से विवाह किया था।महिला ने अपने पति के साथ कोर्ट में सुरक्षा की मांग की थी, क्योंकि महिला के पिता ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 87 बीएनएस [अपहरण, अपहरण या महिला को शादी के लिए मजबूर करना, आदि] के तहत पति के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी।ऑनर किलिंग की धमकी सहित गंभीर हिंसा...
यौन उत्पीड़न मामले में विभागाध्यक्ष के निलंबन से कर्मचारियों में विश्वास पैदा होता है, शक्ति का दुरुपयोग रुकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि यौन उत्पीड़न के आरोपी विभागाध्यक्ष के निलंबन से उनके विभाग की महिला कर्मचारियों में विश्वास पैदा होता है और आरोपी द्वारा शक्ति का दुरुपयोग रुकता है।जस्टिस अजीत कुमार ने कहा,"स्वाभाविक रूप से यदि कर्मचारी नियमित रूप से विभाग में अपने पद पर कार्यरत है और यौन उत्पीड़न की शिकायत के मामलों में जहां प्राधिकरण द्वारा अंतिम रूप से निर्णय लिया जाना बाकी है तो प्राधिकरण उक्त कर्मचारी को निलंबित कर सकता है, सबसे पहले विभाग में कार्यरत महिलाओं के बीच विश्वास निर्माण के उपाय के...
सांप के जहर के मामले में एल्विश यादव को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने कहा- आरोपी की लोकप्रियता सुरक्षा देने का आधार नहीं
सांप के जहर के मामले में यूट्यूबर एल्विश यादव को राहत देने से इनकार करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि कानून के समक्ष सभी व्यक्ति समान हैं और आरोपी की लोकप्रियता या स्थिति उसे सुरक्षा प्रदान करने का आधार नहीं हो सकती।जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की पीठ ने पिछले महीने पारित अपने आदेश में टिप्पणी की,"आरोपी की लोकप्रियता या स्थिति सुरक्षा प्रदान करने का आधार नहीं हो सकती और इस देश के कानून के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति, चाहे उसकी लोकप्रियता या व्यक्तित्व कुछ भी हो, कानून की नजर में समान...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ की मस्जिद के पास जबरन 'हनुमान चालीसा' पढ़ने के आरोपी दो युवकों का जमानत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा समिति के एक नेता सहित दो लोगों को जमानत दे दी, जिन्हें इस साल मार्च में यूपी के मेरठ में एक मस्जिद के पास जबरन 'हनुमान चालीसा' पढ़ने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। जस्टिस राजबीर सिंह की पीठ ने सचिन सिरोही और संजय समरवाल को जमानत दे दी, जिन पर मेरठ पुलिस ने धारा 191(2) [दंगा], 196 [विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना और सद्भाव बनाए रखने के लिए हानिकारक कार्य करना], 197 [राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक आरोप, दावे] बीएनएस के...
'भारतीय सेना को बदनाम करने वाले बयान देने की आज़ादी नहीं': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मानहानि मामले में राहुल गांधी को राहत देने से किया इनकार
भारतीय सेना पर कथित टिप्पणी को लेकर विपक्ष के नेता राहुल गांधी को मानहानि मामले में राहत देने से इनकार करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते कहा कि अभिव्यक्ति की आज़ादी में भारतीय सेना को बदनाम करने वाले बयान देने की आज़ादी शामिल नहीं है।इस तरह जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने गांधी की याचिका खारिज कर दी, जिन्होंने मानहानि मामले के साथ-साथ लखनऊ में एमपी एमएलए कोर्ट द्वारा फरवरी 2025 में पारित समन आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था।सिंगल जज ने टिप्पणी की,"इसमें कोई संदेह नहीं...
अगर एक पति या पत्नी एक साल के भीतर दूसरे के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराता है तो आपसी सहमति से विवाह विच्छेद किया जा सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि एक पति या पत्नी द्वारा दूसरे के विरुद्ध आपराधिक मामला दायर करने के पश्चात, पक्षकार आपसी सहमति से तलाक के लिए न्यायालय में जाते हैं, तो हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 14 (1) के प्रावधान को लागू करके तलाक की अनुमति दी जानी चाहिए। हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी आपसी सहमति से तलाक का प्रावधान करती है। अधिनियम की धारा 14 के अनुसार विवाह के एक वर्ष के भीतर किसी भी न्यायालय में तलाक की याचिका प्रस्तुत नहीं की जा सकती। धारा 14 (1) के प्रावधान के अनुसार, यदि जिस...
Chhattisgarh Liquor Scam | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य में दर्ज FIR में दो आरोपियों की गिरफ्तारी 'अवैध' घोषित की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह रायपुर के पूर्व मेयर के भाई और व्यवसायी अनवर ढेबर तथा पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा की गिरफ्तारी को अवैध घोषित किया। ये दोनों ही छत्तीसगढ़ में कथित ₹2,000 करोड़ के शराब घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में आरोपी हैं।जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा तथा जस्टिस मदन पाल सिंह की खंडपीठ ने मेरठ (उत्तर प्रदेश) में उनके खिलाफ दर्ज FIR में उन्हें जमानत दी। खंडपीठ ने कहा कि गिरफ्तारी ज्ञापन में याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी के आधार के बारे में कोई कॉलम नहीं था तथा उन्हें न तो...



















