सुप्रीम कोर्ट
'उन्हें भी निजता का अधिकार है': सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों/विधायकों की 24x7 डिजिटल निगरानी की मांग वाली याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने आज (1 मार्च) एक जनहित याचिका (पीआईएल) को खारिज कर दिया, जिसमें 'पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार को रोकने' के लिए सांसदों/विधायकों की सभी गतिविधियों की डिजिटल निगरानी करने की मांग की गई थी। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने याचिका के विषय पर असंतोष व्यक्त किया और याद दिलाया कि निर्वाचित प्रतिनिधियों की निरंतर डिजिटल निगरानी की मांग करने का आदेश निजता के अधिकार का घोर उल्लंघन होगा।उन्होंने गुण-दोष के आधार पर सुनवाई करने से पहले याचिकाकर्ता को चेतावनी भी दी कि यदि अदालत ने मामले...
Muzaffarnagar Student Slapping Case : सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने काउंसलिंग पर TISS की सिफारिशों का पालन किया
मुजफ्फरनगर स्टूडेंट थप्पड़ मामले में नवीनतम घटनाक्रम में उत्तर प्रदेश राज्य ने शुक्रवार (1 मार्च) को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि उसने इसमें शामिल अन्य बच्चों की काउंसलिंग पर टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल स्टडीज (TISS) द्वारा की गई सिफारिशों का अनुपालन किया।जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ एक्टिविस्ट तुषार गांधी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें घटना की उचित और समयबद्ध जांच की मांग की गई। मामला उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में प्राथमिक विद्यालय की शिक्षक द्वारा...
सुप्रीम कोर्ट ने डीए मामले में अपने आरोपमुक्ति के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट के स्वत: संज्ञान संशोधन को चुनौती देने वाली तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री पनीरसेल्वम की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और अन्नाद्रमुक नेता ओ पन्नीरसेल्वम की मद्रास हाईकोर्रट के उस आदेश को चुनौती खारिज कर दी, जिसके तहत आपराधिक मामले में उन्हें आरोपमुक्त करने के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए पुनर्विचार शुरू किया गया।जस्टिस हृषिकेश रॉय और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा खंडकी पीठ ने कहा,"एसएलपी खारिज कर दी गई। हालांकि हम यह देख सकते हैं कि जज द्वारा आक्षेपित आदेश में की गई टिप्पणी... उसको केवल नोटिस आदेश के प्रयोजन के लिए माना जाना चाहिए... सू मोटो क्रिमिनल आरसी नंबर 1524/...
सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग से बलात्कार मामले में मेडिकल आधार पर सजा निलंबित करने की आसाराम बापू की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम बापू की राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती खारिज की, जिसने उस मामले में स्वास्थ्य आधार पर सजा को निलंबित करने की उनकी याचिका खारिज कर दी थी। उक्त मामले में उन्हें नाबालिग से बलात्कार के लिए दोषी ठहराया गया था।गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना पुलिस हिरासत में इलाज की अनुमति देने का राज्य का प्रस्ताव स्वीकार करने के मद्देनजर, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आसाराम बापू आयुर्वेदिक अस्पताल में इलाज कराने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्र होंगे।...
शिंदे गुट को अयोग्य ठहराने से महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर के इनकार के खिलाफ शिवसेना यूबीटी की याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट एकनाथ शिंदे गुट के विधायकों को अयोग्य ठहराने से महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर के इनकार को चुनौती देने वाली शिवसेना के सदस्य (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) द्वारा दायर याचिका पर 7 मार्च, 2024 को सुनवाई करने पर सहमत हो गया।याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने तत्काल सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ के समक्ष मामले का उल्लेख किया।सिब्बल ने कहा कि मामले में सुनवाई की जरूरत है और अनुरोध किया कि इसे गैर-विविध दिन पर सूचीबद्ध किया जाए।सीजेआई ने 7 मार्च को...
'मुकदमे पूजा स्थल अधिनियम द्वारा वर्जित नहीं', कहने वाले हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ ज्ञानवापी मस्जिद समिति ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
ज्ञानवापी विवाद में नवीनतम घटनाक्रम में मस्जिद समिति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसमें कहा गया कि वाराणसी सिविल कोर्ट के समक्ष लंबित हिंदू पक्षों द्वारा सिविल मुकदमों का बैच पूजा स्थल अधिनियम, 1991 द्वारा वर्जित नहीं है। 1991 में हिंदू उपासकों और देवताओं की ओर से दायर यह मुकदमा ज्ञानवापी मस्जिद में पूजा करने का अधिकार और विवादित स्थल पर मंदिर की बहाली की मांग करता है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस...
'अंतरिम राहत रद्द करने के आवेदनों को लंबे समय तक लंबित नहीं रखा जा सकता': सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक देने और हटाने पर हाईकोर्ट के लिए दिशानिर्देश जारी किए
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (29 फरवरी) को कार्यवाही पर रोक के अंतरिम आदेश पारित करने और ऐसे रोक को हटाने के लिए आवेदनों से निपटने में हाईकोर्ट द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए।मुख्य निर्णय लिखने वाले जस्टिस अभय एस ओक के माध्यम से बोलते हुए सुप्रीम कोर्ट ने माना कि प्रभावित पक्षों को सुने बिना एकपक्षीय अंतरिम राहत देते समय हाईकोर्ट को आम तौर पर सीमित अवधि के लिए ऐसी राहत देनी चाहिए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत अंतरिम आदेश की पुष्टि कर सकती है या उसे रद्द कर...
'डिस्ट्रीब्यूटर एजेंट नहीं, स्वतंत्र ठेकेदार': सुप्रीम कोर्ट
इनकम टैक्स एक्ट, 1961 (Income Tax Act) की धारा 194-एच के तहत स्रोत पर टैक्स कटौती करने के लिए सेलुलर मोबाइल सेवा प्रदाताओं के दायित्व के सवाल पर निर्णय लेते समय सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उन पहलुओं का सारांश दिया, जिन्हें प्रिंसिपल-एजेंट संबंध की जांच करते समय अदालतों को ध्यान में रखना चाहिए।जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एसवीएन भट्टी की खंडपीठ द्वारा अनुबंध अधिनियम, 1872 की धारा 182 का संदर्भ देने के बाद बताए गए कारक/पहलू इस प्रकार हैं:“(1) एजेंट की आवश्यक विशेषता एजेंट के पास निहित कानूनी शक्ति...
लखनऊ अकबर नगर तोड़फोड़ : सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले तक तोड़फोड़ पर रोक लगाई, कहा- ये गरीब लोग हैं
लखनऊ के अकबर नगर में वाणिज्यिक स्थानों के हालिया विध्वंस की त्वरित प्रतिक्रिया में, तोड़फोड़ आदेशों की वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं। यह कदम इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा 24 कब्जाधारियों की याचिकाओं को खारिज करने के बाद आया है, जिससे लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के लिए क्षेत्र में कथित तौर पर अवैध प्रतिष्ठानों को ध्वस्त करने का रास्ता साफ हो गया है।जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ के समक्ष गुरुवार को पहली बार याचिकाओं का उल्लेख किया गया था,...
'गंभीर उल्लंघन' : सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्टरलाइट तांबा गलाने वाले संयंत्र को फिर से खोलने की याचिका खारिज की
वेदांता की ओर से 'बार-बार उल्लंघन' और 'गंभीर उल्लंघन' का हवाला देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (29 फरवरी) को तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्टरलाइट तांबा गलाने वाले संयंत्र को फिर से खोलने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने अगस्त 2020 के मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ वेदांता लिमिटेड द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया। इस विस्तृत फैसले के द्वारा, हाईकोर्ट ने तूतीकोरिन में उसके तांबा...
अपने मुव्वकिल के लिए कोर्ट में पेश हो रहे वकील उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत ' सेवा प्रदाता ' नहीं : एमिकस ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (29 फरवरी) को इस मुद्दे पर फैसला सुरक्षित रख लिया कि क्या सेवाओं में कमी के लिए वकीलों को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उत्तरदायी ठहराया जा सकता है।जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस पंकज मित्तल की बेंच ने मामले की सुनवाई की। अंतिम दिन, मामले में न्याय मित्र, सीनियर एडवोकेट वी गिरी ने पीठ को संबोधित किया।यह मुद्दा, जो बार के सदस्यों के लिए प्रासंगिक है, 2007 में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग द्वारा दिए गए एक फैसले से उभरा। आयोग ने फैसला सुनाया था कि वकीलों द्वारा...
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को आमतौर पर अन्य अदालतों में मामले के निपटारे के लिए समयबद्ध कार्यक्रम तय करने से बचना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में गुरुवार (29 फरवरी) को अपने 2018 एशियन रिसर्फेसिंग फैसले को पलट दिया, जिसमें दृढ़ता से कहा गया कि एक निर्धारित अवधि के बाद अंतरिम आदेशों की स्वचालित समाप्ति को अनिवार्य करने वाले निर्देश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शीर्ष अदालत द्वारा जारी नहीं किए जा सकते हैं। नवीनतम फैसला गुरुवार को चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अभय एस ओका, जस्टिस जेबी पारदीवाला, जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस मनोज मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने सुनाया।...
लखनऊ अकबर नगर विध्वंस: सुप्रीम कोर्ट ने एलडीए को हाईकोर्ट के फैसले तक मकान तोड़ने से रोका, कहा-कई गरीब हैं
लखनऊ स्थित अकबर नगर में वाणिज्यिक स्थानों के हालिया विध्वंस के मामले में विध्वंस आदेशों की वैधता के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं। यह कदम इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा 24 कब्जाधारियों की याचिकाओं को खारिज करने के बाद आया है, जिससे लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के लिए क्षेत्र में कथित तौर पर अवैध प्रतिष्ठानों को ध्वस्त करने का रास्ता साफ हो गया है। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ के समक्ष कल पहली बार याचिकाओं का उल्लेख किया गया था, जिसमें सीनियर एडवोकेट एस...
BREAKING | 'गंभीर उल्लंघन': सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के तूतीकोरिन में तांबा गलाने की इकाई को फिर से खोलने की वेदांता की याचिका खारिज की
वेदांता की ओर से "बार-बार उल्लंघन" और "गंभीर उल्लंघन" का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (29 फरवरी) को तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्टरलाइट कॉपर स्मेल्टिंग प्लांट को फिर से खोलने की अनुमति देने से इनकार किया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने अगस्त 2020 के मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ वेदांता लिमिटेड द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी। उक्त फैसले में कंपनी द्वारा तूतीकोरिन और अन्य में अपने तांबा संयंत्र को बंद...
दो से अधिक बच्चे वाले उम्मीदवार को सरकारी नौकरी से अयोग्य ठहराने का नियम संविधान का उल्लंघन नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दो से अधिक बच्चे होने पर उम्मीदवार को पुलिस कांस्टेबल पद पर आवेदन करने से अयोग्य घोषित करने के राजस्थान सरकार का फैसला बरकरार रखा।न्यायालय ने माना कि राजस्थान पुलिस अधीनस्थ सेवा नियम, 1989 का नियम 24(4), जो यह प्रावधान करता है कि "कोई भी उम्मीदवार सेवा में नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा, जिसके 01.06.2002 को या उसके बाद दो से अधिक बच्चे हैं" गैर-भेदभावपूर्ण है और संविधान का उल्लंघन नहीं करता।जस्टिस सूर्या कांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने जावेद और...
'क्या राज्य की एमएमडीआर अधिनियम के तहत खनिज पर कर लगाने की शक्ति सीमित है?' सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की बेंच ने चर्चा की [ दिन-2]
सुप्रीम कोर्ट की 9-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने खनिज-भूमि से संबंधित जटिल कराधान मामले पर शक्तियों के संवैधानिक वितरण के बारे में प्रमुख सवालों की खोज करते हुए अपनी सुनवाई जारी रखी। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने सत्र के दौरान एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया, जिसमें सवाल किया गया कि क्या खनिज युक्त भूमि पर कर, जबकि तकनीकी रूप से भूमि कर है, खनिज विकास को प्रभावित कर सकता है। यह प्रश्न इस बात से संबंधित है कि क्या संसद सूची I की प्रविष्टि 23 के तहत तब भी सीमाएं लगा सकती है, जब कोई राज्य...
'सिख- चमार' और ' रविदासिया मोची ' पर्यायवाची हैं ? सुप्रीम कोर्ट ने सांसद नवनीत कौर राणा के जाति प्रमाण पत्र मामले में फैसला सुरक्षित रखा
अमरावती से सांसद नवनीत कौर राणा का 'मोची' जाति प्रमाणपत्र रद्द करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस संजय करोल की पीठ 2021 के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को राणा की चुनौती पर सुनवाई कर रही थी, जहां यह कहा गया कि उन्होंने धोखाधड़ी से 'मोची' जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया, भले ही रिकॉर्ड से संकेत मिलता है कि वह 'सिख-चमार' जाति से संबंधित हैं। '' विशेष रूप से, इसके कारण महाराष्ट्र मे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट से उनका चुनाव अमान्य...
BREAKING | दीवानी और फौजदारी ट्रायल पर हाईकोर्ट के स्थगन आदेश स्वत: निरस्त नहीं होते: सुप्रीम कोर्ट ने 'एशियन रिसरफेसिंग' फैसला रद्द किया
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (29 फरवरी) को अपने 2018 एशियन रिसरफेसिंग फैसला रद्द कर दिया। उक्त फैसले में हाईकोर्ट द्वारा नागरिक और आपराधिक मामलों में सुनवाई पर रोक लगाने वाले अंतरिम आदेशों को आदेश की तारीख से छह महीने के बाद स्वचालित रूप से समाप्त कर दिया जाएगा, जब तक कि हाईकोर्ट द्वारा स्पष्ट रूप से बढ़ाया गया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अभय एस ओक, जस्टिस जेबी पारदीवाला, जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस मनोज मिश्रा की पांच-जजों की पीठ द्वारा नवीनतम फैसला, पहले के फैसले को रद्द...
हॉस्पिटल सर्विस के लिए दरों की सीमा निर्दिष्ट क्यों नहीं की गई? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को चेतावनी देते हुए कहा- कोर्ट सीजीएचएस दरें लागू कर सकता है
सुप्रीम कोर्ट ने उन दरों की सीमा निर्दिष्ट करने में केंद्र सरकार की विफलता की आलोचना की, जिनके भीतर निजी अस्पताल और नैदानिक प्रतिष्ठान अपनी उपचार सेवाओं के लिए शुल्क ले सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में एक नियम बारह साल पहले बनाया गया, लेकिन कोर्ट ने कहा कि इसे अभी तक लागू नहीं किया गया।जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ एनजीओ 'वेटरन्स फोरम फॉर ट्रांसपेरेंसी इन पब्लिक लाइफ' द्वारा संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड दानिश जुबैर खान...
जंगलों के भीतर चिड़ियाघरों/सफारियों को प्रतिबंधित करने वाला अंतरिम आदेश केवल समन्वय पीठ के अंतिम फैसले तक ही संचालित होगा: सुप्रीम कोर्ट
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) की अगुवाई वाली पीठ द्वारा वन क्षेत्रों के भीतर चिड़ियाघरों/सफारियों की स्थापना को प्रतिबंधित करने वाला अंतरिम आदेश केवल तब तक लागू रहेगा, जब तक कि उसी मुद्दे पर अन्य समन्वय पीठ द्वारा अंतिम निर्णय नहीं सुनाया जाता।सीजेआई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली 3-न्यायाधीशों की पीठ ने 19 फरवरी को वन संरक्षण (संशोधन) अधिनियम 2023 को चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं के बैच में अंतरिम आदेश पारित किया था।हालांकि, जस्टिस बीआर गवई की अगुवाई वाली अन्य पीठ ने इस पर आदेश सुरक्षित रख लिया था।...
















![क्या राज्य की एमएमडीआर अधिनियम के तहत खनिज पर कर लगाने की शक्ति सीमित है? सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की बेंच ने चर्चा की [ दिन-2] क्या राज्य की एमएमडीआर अधिनियम के तहत खनिज पर कर लगाने की शक्ति सीमित है? सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की बेंच ने चर्चा की [ दिन-2]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2024/02/29/500x300_525167-supremecourt9judgebenchsc.jpg)



