सुप्रीम कोर्ट

कोई मामला नहीं बनता: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में जमानत की मांग करने वाली मनीष सिसोदिया की सुधारात्मक याचिकाएं खारिज कीं
'कोई मामला नहीं बनता': सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में जमानत की मांग करने वाली मनीष सिसोदिया की सुधारात्मक याचिकाएं खारिज कीं

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (13 मार्च) को दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में जमानत की मांग करने वाली आम आदमी पार्टी (AAP) नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा दायर सुधारात्मक याचिकाओं को खारिज कर दिया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने सुधारात्मक याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि कोई मामला नहीं बनता।पीठ ने कहा,"हमारी राय में, रूपा अशोक हुर्रा बनाम अशोक हुर्रा मामले में इस न्यायालय के फैसले...

क्या खनन पट्टों पर रॉयल्टी को कर माना जाए ? क्या राज्यों के पास खनिज अधिकारों पर कर लगाने की शक्ति है? सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की पीठ ने फैसला सुरक्षित रखा
क्या खनन पट्टों पर रॉयल्टी को कर माना जाए ? क्या राज्यों के पास खनिज अधिकारों पर कर लगाने की शक्ति है? सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की पीठ ने फैसला सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ ने गुरुवार (14 मार्च) को इस मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया कि क्या खनन पट्टों पर रॉयल्टी को कर माना जाए और क्या राज्यों के पास खनिज अधिकारों पर रॉयल्टी/कर लगाने की शक्ति है। 8 दिनों तक चली सुनवाई में खनिज-युक्त भूमि के बहुमुखी कराधान मामले पर विचार-विमर्श किया गया। वर्तमान मामले में शामिल मुख्य संदर्भ प्रश्न खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (एमएमडीआर अधिनियम) की धारा 9 के तहत निर्धारित रॉयल्टी की प्रकृति और दायरे की जांच करना है और ये कि...

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से संविदा के आधार पर काम कर रहे Special Teacher को नियमित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से संविदा के आधार पर काम कर रहे Special Teacher को नियमित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा

कार्यकाल की सुरक्षा के बिना अनुबंध के आधार पर रखे जाने वाले विशेष शिक्षकों (Special Teachers) से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों से हलफनामे मांगे हैं, जिसमें उनके अधीन अनुबंध के आधार पर काम करने वाले ऐसे शिक्षकों की संख्या निर्दिष्ट की गई, जो भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआई)-प्रशिक्षित और नियुक्त होने के योग्य हैं।जस्टिस सीटी रविकुमार और जस्टिस राजेश बिंदल की खंडपीठ ने राज्यों से इन शिक्षकों की सेवा शर्तों के बारे में हलफनामे में जानकारी का खुलासा करने के लिए कहा, जिसमें...

क्या MMDR Act राज्य की खनिज पर टैक्स लगाने की शक्ति को बाहर करता है? सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की बेंच ने दलीलें सुनीं [ दिन- 7 ]
क्या MMDR Act राज्य की खनिज पर टैक्स लगाने की शक्ति को बाहर करता है? सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की बेंच ने दलीलें सुनीं [ दिन- 7 ]

सुनवाई के 7वें दिन, सुप्रीम कोर्ट की 9 न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने प्रविष्टि 50 सूची II (खनिज अधिकारों पर करों पर राज्य की शक्तियां) के तहत लगाई गई सीमाओं और खानों और खनिजों के विनियमन और विकास पर संघ की शक्तियां और प्रविष्टि 97 सूची I के तहत संघ को दी गई अवशिष्ट शक्तियों की प्रकृति के बीच परस्पर क्रिया पर ध्यान दिया। सीनियर एडवोकेट डॉ एएम सिंघवी ने पीठ से एक ओर खनिजों पर करों और दूसरी ओर 'खनिज अधिकार' कर लगाने की अवधारणा के बीच अंतर की जांच करने का आग्रह किया।डॉ एएम सिंघवी ने अपने...

सुप्रीम कोर्ट का अजित पवार गुट को पोस्टरों में शरद पवार के नाम और फोटो का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट का अजित पवार गुट को पोस्टरों में शरद पवार के नाम और फोटो का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (14 मार्च) को अजीत पवार गुट से पूछा कि वे प्रचार सामग्री में पूर्व NCP सुप्रीमो शरद पवार की तस्वीरों का उपयोग क्यों कर रहे हैं।अजित पवार गुट को ही भारत के चुनाव आयोग (ECI) द्वारा आधिकारिक तौर पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के रूप में मान्यता दी गई है।कोर्ट ने अजित पवार समूह से यह हलफनामा दायर करने को कहा कि वे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शरद पवार के नाम का इस्तेमाल नहीं करेंगे। कोर्ट ने मौखिक रूप से यह भी सुझाव दिया कि अजीत पवार गुट चुनाव के लिए 'घड़ी' चुनाव...

सरकारी कर्मचारी का ट्रांसफर सिर्फ इसलिए गलत नहीं, कि यह विधायक के कहने पर जारी किया गया: सुप्रीम कोर्ट
सरकारी कर्मचारी का ट्रांसफर सिर्फ इसलिए गलत नहीं, कि यह विधायक के कहने पर जारी किया गया: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (13 मार्च) को कहा कि किसी भी वैधानिक प्रावधान के उल्लंघन के बिना ट्रांसफर योग्य पद पर बैठे राज्य कर्मचारी के कहने पर स्थानांतरण के आदेश में अदालत द्वारा हस्तक्षेप अस्वीकार्य है।हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के निष्कर्षों को पलटते हुए जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश के निष्कर्षों को बहाल करते हुए कहा कि राज्य कर्मचारी का ट्रांसफर आदेश एक सार्वजनिक प्रतिनिधि जैसे विधानसभा के सदस्य (एमएलए) के कहने पर जनहित में जारी किया गया। तब तक...

Farmers Protest | प्रदर्शनकारी किसान की मौत की न्यायिक जांच के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची हरियाणा सरकार
Farmers Protest | प्रदर्शनकारी किसान की मौत की न्यायिक जांच के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची हरियाणा सरकार

हरियाणा सरकार ने पंजाब-हरियाणा सीमा पर 21 फरवरी को जान गंवाने वाले प्रदर्शनकारी किसान शुभकरण सिंह की मौत की न्यायिक जांच के हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए एक विशेष अनुमति याचिका दायर की।सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध मामले के विवरण के अनुसार, वर्तमान अपील 11 मार्च को दायर की गई। हालांकि, यह अभी भी दोष सूची में है। दूसरे शब्दों में रजिस्ट्री ने इसे लिस्टिंग के लिए मंजूरी नहीं दी।पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश में एक्टिंग चीफ जस्टिस (एसीजे) जीएस संधावालिया और जस्टिस लपीता...

भुगतान न करने पर अवमानना मामले का सामना कर रहे व्यक्ति ने जवाब में और भी अपमानजनक टिप्पणियां कीं; सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत बढ़ाई
भुगतान न करने पर अवमानना मामले का सामना कर रहे व्यक्ति ने जवाब में और भी अपमानजनक टिप्पणियां कीं; सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत बढ़ाई

सुप्रीम कोर्ट ने उपेन्द्र नाथ दलाई को निर्देश दिया, जिनके खिलाफ अदालत द्वारा लगाए गए जुर्माने का भुगतान न करने के साथ-साथ अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए अवमानना ​​कार्यवाही चल रही है, उन्हें सोमवार तक वापस हिरासत में लिया जाए।जस्टिस सीटी रविकुमार और जस्टिस राजेश बिंदल की खंडपीठ के समक्ष मामले की उत्पत्ति दलाई द्वारा सत्संग के संस्थापक श्री श्री ठाकुर अनुकुलचंद्र को "परमात्मा" घोषित करने के लिए जनहित याचिका दायर करने में निहित है। इस जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाते...

महिला अफसरों को समुद्री मिशन पर भेजने से पहले जहाजों के मौजूदा ढांचे में बदलाव जरूरी : तटरक्षक बल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
महिला अफसरों को समुद्री मिशन पर भेजने से पहले जहाजों के मौजूदा ढांचे में बदलाव जरूरी : तटरक्षक बल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

स्थायी कमीशन की मांग करने वाली एक महिला अधिकारी की याचिका का जवाब देते हुए, भारतीय तटरक्षक बल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि महिला अधिकारियों को समुद्री मिशनों पर भेजने के लिए कई बुनियादी ढांचे में बदलाव किए जाने हैं।प्रधान निदेशक, तटरक्षक मुख्यालय द्वारा पुष्टि किए गए हलफनामे में कहा गया है कि आईसीजी, मुख्य रूप से एक समुद्री सेवा है, अपने 66% बिलेट्स को तैरती इकाइयों के प्रबंधन के लिए आवंटित करता है, और तट समर्थन इकाइयों के लिए केवल 33% छोड़ता है। सीमित तटीय रिक्तियों के परिणामस्वरूप...

बारहमासी/स्थायी प्रकृति के कार्य करने के लिए नियोजित श्रमिकों को संविदा कर्मचारी नहीं माना जा सकता: सुप्रीम कोर्ट ने नियमितीकरण की अनुमति दी
बारहमासी/स्थायी प्रकृति के कार्य करने के लिए नियोजित श्रमिकों को संविदा कर्मचारी नहीं माना जा सकता: सुप्रीम कोर्ट ने नियमितीकरण की अनुमति दी

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (12 मार्च) को कहा कि बारहमासी/स्थायी प्रकृति के काम करने के लिए नियोजित श्रमिकों को अनुबंध श्रम (विनियमन और उन्मूलन) अधिनियम, 1970 के तहत अनुबंध श्रमिकों के रूप में नहीं माना जा सकता, जिससे उन्हें नियमितीकरण के लाभ से वंचित किया जा सके।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा कि स्थायी या बारहमासी प्रकृति का काम अनुबंध कर्मचारी द्वारा नहीं किया जा सकता और इसे नियमित/स्थायी कर्मचारी द्वारा किया जाना चाहिए।इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि गैर-नियमित...

MMDR Act ने राज्यों के खनिज पर कर की शक्ति को बाहर किया, राष्ट्रीय हित में सीमा लागू की : संघ ने सुप्रीम कोर्ट को कहा [ दिन- 6 ]
MMDR Act ने राज्यों के खनिज पर कर की शक्ति को बाहर किया, राष्ट्रीय हित में सीमा लागू की : संघ ने सुप्रीम कोर्ट को कहा [ दिन- 6 ]

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (12 मार्च) को खनन पर रॉयल्टी लगाने से संबंधित मामले पर छठे दिन की सुनवाई फिर से शुरू की। संविधान पीठ ने संविधान सभा की बहस में प्रविष्टि 54 सूची I के विधायी इरादे का विश्लेषण किया, जो संघ को खानों और खनिजों के विनियमन और विकास पर अधिकार देता है। संघ ने प्रस्तुत किया कि 1957 का खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम (एमएमडीआर) प्रविष्टि 54 सूची I के तहत शक्तियों का एक स्पष्ट विस्तार है। इस बात पर प्रकाश डाला गया कि एमएमडीआर अधिनियम को सीमा के प्रमुख ब्लॉक के रूप में देखा...

CAA यह सुनिश्चित करेगा कि NRC से बाहर रखे गए मुसलमानों को ही कार्रवाई का सामना करना पड़े: सुप्रीम कोर्ट में असम कांग्रेस
'CAA यह सुनिश्चित करेगा कि NRC से बाहर रखे गए मुसलमानों को ही कार्रवाई का सामना करना पड़े': सुप्रीम कोर्ट में असम कांग्रेस

असम विधानसभा में विपक्ष के नेता देबब्रत सैका और असम से कांग्रेस सांसद अब्दुल खालिक ने 11 मार्च को अधिसूचित नागरिकता संशोधन नियम 2024 के कार्यान्वयन पर रोक लगाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम आवेदन दायर किया। आवेदन में दलील दी गई कि ये नियम असंवैधानिक हैं और असम समझौते का उल्लंघन करते हैं।यह आवेदन 2019 में दायर उनकी रिट याचिका में दायर किया गया, जिसमें नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 को चुनौती दी गई। इसमें असम राज्य के लिए विशिष्ट मुद्दों पर जोर दिया गया और समानता, धर्मनिरपेक्षता और...

केरल ने शर्तों के साथ 5 हजार करोड़ रुपये उधार लेने की अनुमति देने के केंद्र का प्रस्ताव खारिज किया, सुप्रीम कोर्ट से योग्यता के आधार पर मुकदमे की सुनवाई करने का आग्रह किया
केरल ने शर्तों के साथ 5 हजार करोड़ रुपये उधार लेने की अनुमति देने के केंद्र का प्रस्ताव खारिज किया, सुप्रीम कोर्ट से योग्यता के आधार पर मुकदमे की सुनवाई करने का आग्रह किया

केंद्र सरकार ने बुधवार (13 मार्च) को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि वह एकमुश्त उपाय के रूप में वर्तमान वित्तीय वर्ष में केरल राज्य द्वारा 5000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधार लेने की सहमति दे सकती है। हालांकि, यह अगले वित्तीय वर्ष में लागू होने वाली कड़ी शर्तों के अधीन होगा।एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमन ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ को इस बारे में सूचित किया।एएसजी ने कहा,"...अदालत के सुझाव के मद्देनजर, हम पहले नौ महीनों के लिए शुद्ध उधार सीमा से 5,000 करोड़ रुपये की...

Farmers Protest | दिल्ली की सीमाओं से प्रदर्शनकारियों को हटाने की पूर्व BJP विधायक की याचिका खारिज की
Farmers' Protest | दिल्ली की सीमाओं से प्रदर्शनकारियों को हटाने की पूर्व BJP विधायक की याचिका खारिज की

अपनी फसलों के लिए न्यूनतम मूल्य की गारंटी की मांग को लेकर चल रहे किसानों के विरोध प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (12 मार्च) को जनहित याचिका (पीआईएल) पर विचार करने से इनकार किया। उक्त याचिका में दिल्ली की सीमाओं से किसानों को तत्काल हटाने की मांग की गई थी।सोशल एक्टिविस्ट और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व विधायक नंद किशोर गर्ग ने सीमावर्ती क्षेत्रों को खाली कराने के लिए इस याचिका के साथ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।हालांकि, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने...

हाईकोर्ट को उन आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने में संकोच नहीं करना चाहिए, जो अनिवार्य रूप से सिविल प्रकृति की हैं: सुप्रीम कोर्ट
हाईकोर्ट को उन आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने में संकोच नहीं करना चाहिए, जो अनिवार्य रूप से सिविल प्रकृति की हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि हाईकोर्ट को अपनी अंतर्निहित शक्ति का प्रयोग करके सिविल लेनदेन से उत्पन्न आपराधिक शिकायत के आधार पर अभियोजन रद्द करना चाहिए।न्यायालय ने कहा उदाहरण परमजीत बत्रा बनाम उत्तराखंड राज्य (2013) 11 एससीसी 673 का जिक्र करते हुए,"...यद्यपि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत हाईकोर्ट की अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग संयमित ढंग से किया जाना चाहिए। फिर भी हाईकोर्ट को ऐसी आपराधिक कार्यवाही रद्द करने में संकोच नहीं करना चाहिए, जो अनिवार्य रूप से सिविल प्रकृति की हैं।"जस्टिस...

CPI(M) समर्थक होने के कारण केंद्र ने जज के रूप ने नियुक्ति से किया इनकार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा: जजशिप से इनकार करने के लिए राजनीतिक पृष्ठभूमि पर्याप्त कारण नहीं
CPI(M) समर्थक होने के कारण केंद्र ने जज के रूप ने नियुक्ति से किया इनकार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा: जजशिप से इनकार करने के लिए राजनीतिक पृष्ठभूमि पर्याप्त कारण नहीं

12 मार्च, 2024 को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने बैठक की। उक्त बैठक में कॉलेजियम ने केरल हाईकोर्ट के जज के रूप में नियुक्ति के लिए मनोज पुलम्बी माधवन के नाम की सिफारिश की।मनोज की उपयुक्तता का मूल्यांकन करने में कॉलेजियम ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध सभी सामग्रियों का मूल्यांकन और जांच की। न्याय विभाग ने पाया कि मनोज सीपीआई (एम) समर्थक हैं और उन्हें एलडीएफ सरकार द्वारा 2010 और 2016-2021 में सरकारी वकील के रूप में नियुक्त किया गया।कॉलेजियम ने कहा...

पुलिस अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत आरोपपत्रों में सीआरपीसी की धारा 173(2) के अनुसार सभी आवश्यक विवरण होने चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
पुलिस अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत आरोपपत्रों में सीआरपीसी की धारा 173(2) के अनुसार सभी आवश्यक विवरण होने चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (12 मार्च) को कहा कि राज्य पुलिस मैनुअल के अनुसार मजिस्ट्रेट को पुलिस रिपोर्ट/चार्जशीट सौंपने वाले पुलिस अधिकारियों को धारा 173 (2) के विवरणों का पालन करना होगा और हर पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारियों को निर्देश दिया कि उन्हें सीआरपीसी की धारा 173 (2) की अनिवार्य आवश्यकताओं का सख्ती से पालन करना होगा। ऐसा न करने पर इसे संबंधित अदालतों द्वारा सख्ती से देखा जाएगा, यानी, जहां आरोपपत्र/पुलिस रिपोर्ट दायर की गई।जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी और जस्टिस पंकज मित्तल की खंडपीठ ने...