SC के ताज़ा फैसले
अनुच्छेद 227 के तहत हाईकोर्ट वाद (Plaint) खारिज नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत हाईकोर्ट अपने पर्यवेक्षणीय अधिकारों का प्रयोग करते हुए किसी वाद (plaint) को खारिज नहीं कर सकता, जब इसके लिए सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) में विशेष प्रावधान मौजूद हो।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की खंडपीठ ने कहा कि“जब Order VII Rule 11 CPC के तहत वाद खारिज करने का स्पष्ट प्रावधान उपलब्ध है, तब हाईकोर्ट अनुच्छेद 227 के अंतर्गत शक्तियों का प्रयोग कर plaint को खारिज या strike off नहीं कर सकता।”मामले की पृष्ठभूमि यह...
DGP नियुक्ति में देरी पर सख्त सुप्रीम कोर्ट: समय पर प्रस्ताव न भेजने वाले राज्यों के खिलाफ UPSC चला सकेगा अवमानना कार्यवाही
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि राज्य सरकारों को पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को प्रस्ताव भेजने में अनावश्यक देरी नहीं करनी चाहिए।अदालत ने कई राज्यों में 'कार्यवाहक/अध hoc DGP' नियुक्त करने की प्रवृत्ति पर असंतोष जताते हुए UPSC को यह अधिकार दिया कि वह राज्यों को समय पर प्रस्ताव भेजने के लिए रिमाइंडर भेजे। यदि इसके बावजूद राज्य सरकारें डिफॉल्ट करती हैं, तो UPSC को अवमानना कार्यवाही शुरू करने की स्वतंत्रता होगी।अदालत ने याद दिलाया कि प्रकाश सिंह बनाम...
7 साल तक की सज़ा वाले अपराधों में गिरफ्तारी नियम नहीं, बल्कि अपवाद; ऐसे मामलों में BNSS की धारा 35(3) के तहत नोटिस अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 35(3) के तहत 7 वर्ष तक की सज़ा वाले अपराधों में पुलिस द्वारा नोटिस देना अनिवार्य है, और नोटिस दिए बिना गिरफ्तारी नहीं की जा सकती।जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने कहा कि ऐसे अपराधों में गिरफ्तारी नियम नहीं, बल्कि अपवाद है। जब तक धारा 35(3) के तहत नोटिस देकर अभियुक्त को उपस्थित होने का अवसर न दिया जाए और वह उसका पालन करे, तब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकती।गिरफ्तारी “विवेकाधीन”, अनिवार्य...
RTE Act | केंद्र से फंड न मिलने का हवाला देकर राज्य शिक्षकों को कम मानदेय नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार द्वारा धनराशि जारी न किए जाने का हवाला देकर राज्य सरकार शिक्षकों को बेहद कम मानदेय देने का औचित्य नहीं ठहरा सकती। कोर्ट ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) के क्रियान्वयन की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकार की है, और उसे पहले शिक्षकों को भुगतान करना होगा; केंद्र का हिस्सा बाद में वसूला जा सकता है।जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि सर्व शिक्षा अभियान/समग्र शिक्षा योजना के तहत...
'सख्त राजनीतिक पोस्ट के लिए कोई मैकेनिकल FIR नहीं': सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े मामलों के लिए जारी दिशानिर्देश बरकरार रखें
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े मामलों में FIR दर्ज करने को रेगुलेट करने के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा बनाए गए दिशानिर्देश बरकरार रखें और पुलिस को "सख्त, आपत्तिजनक या आलोचनात्मक राजनीतिक भाषणों" पर बिना सोचे-समझे FIR दर्ज न करने का निर्देश दिया।हाईकोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में दुश्मनी को बढ़ावा देने, सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा या देशद्रोह के लिए FIR तभी दर्ज की जा सकती है, जब प्रथम दृष्टया मामला बनता हो।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई...
फाइनल रिपोर्ट दाखिल करने के बाद आगे की जांच के लिए कोर्ट की इजाज़त ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस खुद से आगे की जांच नहीं कर सकती। साथ ही CrPC की धारा 173(8)/BNSS की धारा 193(9) के तहत आगे की जांच करने से पहले कोर्ट की इजाज़त लेना ज़रूरी है।जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने आरोपियों द्वारा दायर अपील मंज़ूरी की और 2023 का इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया, जिसमें एक दशक पुराने रेप केस में पुलिस अधिकारियों को "आगे की जांच" जारी रखने की इजाज़त दी गई।कोर्ट के सामने सवाल यह था कि क्या CrPC की धारा 173(2) के तहत फाइनल रिपोर्ट जमा करने के बाद...
तलाक के बाद पति का अपनी पूर्व पत्नी का भरण-पोषण करने का कर्तव्य सिर्फ इसलिए खत्म नहीं होगा कि वह पढ़ी-लिखी है या उसे माता-पिता का सहारा है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक पति तलाक के बाद अपनी पूर्व पत्नी का भरण-पोषण करने के कर्तव्य से इस आधार पर बच नहीं सकता कि वह पढ़ी-लिखी या उसे माता-पिता का सहारा है।जस्टिस एसवीएन भट्टी और आर महादेवन की बेंच ने यह टिप्पणी की,"हमारे समाज में शादी एक ऐसी संस्था है, जो भावनात्मक जुड़ाव, साथ और आपसी सहारे पर आधारित है, जिसे सिर्फ पैसे के हिसाब से नहीं आंका जा सकता। एक महिला अक्सर एक स्थिर और सम्मानजनक जीवन की सही उम्मीदों के साथ शादी करती है। जब ऐसी शादी टूट जाती है तो पति का यह कर्तव्य कि पत्नी सम्मान के...
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A अवैध रिश्वत की मांग के मामलों पर लागू नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17-A का संरक्षण लोक सेवकों द्वारा अवैध रिश्वत की मांग के मामलों में लागू नहीं होता। कोर्ट ने कहा कि यह प्रावधान केवल उन मामलों तक सीमित है, जहाँ अपराध सरकारी कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान लिए गए निर्णय या दी गई सिफारिशों से संबंधित हो।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस एस.सी. शर्मा की खंडपीठ ने कहा—“धारा 17-A एक विशेष उद्देश्य से लाई गई है। यह उन अपराधों पर लागू होती है जो लोक सेवक द्वारा अपने आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन...
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 10 मार्च तक एसिड अटैक पीड़ितों को बकाया मुआवजा जारी करने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एसिड अटैक पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए फंड जारी करने का निर्देश दिया, जिनके आवेदन पहले ही मंजूर हो चुके हैं। कोर्ट को बताया गया कि सरकारों द्वारा फंड जारी न करने के कारण मुआवजे की अनुमति देने वाले कोर्ट के आदेश अप्रभावी बने हुए।कोर्ट ने आदेश दिया,"जहां भी एसिड अटैक पीड़ितों को मुआवजा देने की मंजूरी दी गई और जिला/राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण या केंद्र शासित प्रदेश कानूनी सेवा प्राधिकरण द्वारा राज्य सरकार के संबंधित विभागों को सूचना दी गई, वहां...
आर्बिट्रेटर का कार्यकाल खत्म होने के बाद दिया गया अवार्ड तब तक अमान्य नहीं होगा, जब तक कोर्ट समय बढ़ा दे: सुप्रीम कोर्ट
एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (3 फरवरी) को कहा कि जहां धारा 29A के तहत तय कानूनी अवधि के बाद कोई आर्बिट्रल अवार्ड दिया जाता है तो ऐसा अवार्ड भले ही ट्रिब्यूनल का कार्यकाल तकनीकी रूप से खत्म होने के बाद दिया गया हो, उसे लागू किया जा सकता है, अगर धारा 29A के तहत सक्षम कोर्ट में आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल के कार्यकाल को बढ़ाने के लिए आवेदन किया गया हो।जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने कहा,"...हमारी राय है कि एक्ट के प्रावधानों, खासकर धारा 29A की व्याख्या इस...
अप्रमाणित उपचार की मांग मरीज अधिकार के रूप में नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्पष्ट किया कि ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के इलाज के रूप में स्टेम सेल ट्रीटमेंट (SCT) को मरीज अधिकार के रूप में दावा नहीं कर सकते। अदालत ने इस तरह के उपचार को नियमित क्लिनिकल ट्रीटमेंट के तौर पर अपनाने को अवैज्ञानिक बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की और कहा कि ऐसा करने वाले डॉक्टरों व क्लीनिकों की गतिविधियां मेडिकल कदाचार (malpractice) के दायरे में आती हैं।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने यह भी विचार किया कि क्या मरीज की स्वायत्तता (patient...
यूनिवर्सिटी वीसी की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी पर UGC नियम राज्य कानून से ऊपर: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर की नियुक्ति के लिए सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटी का गठन उच्च शिक्षा को नियंत्रित करने वाले मानकों का हिस्सा है, जो यूनियन लिस्ट के तहत संसद के विशेष विधायी अधिकार क्षेत्र में आता है और यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन रेगुलेशन, 2018 से कोई भी विचलन नियुक्ति प्रक्रिया को अवैध बना देता है।इसी तर्क के साथ कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा, जिसमें पुडुचेरी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी एक्ट, 2019 की धारा 14(5) को रद्द कर दिया गया। साथ ही यह माना गया...
राज्य सही प्रक्रिया से स्वीकृत पद पर नियुक्त लंबे समय से काम कर रहे कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को रेगुलर करने से मना नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (30 जनवरी) को कहा कि राज्य मॉडल एम्प्लॉयर होने के नाते कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को सिर्फ इसलिए रेगुलर करने से मना नहीं कर सकता, क्योंकि उन्हें कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर नियुक्त किया गया था। कोर्ट ने कहा कि जिन कर्मचारियों को कुछ सालों तक बार-बार सालाना एक्सटेंशन दिया गया, वे वैध उम्मीद के सिद्धांत के तहत रेगुलराइजेशन की मांग करने के हकदार हैं।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा,“हम प्रतिवादी-राज्य की इस दलील को मानने के लिए खुद को मना नहीं कर पा रहे हैं...
BREAKING| मासिक धर्म स्वास्थ्य अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- स्कूलों में लड़कियों को मुफ्त सैनिटरी पैड मिलें
संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मासिक धर्म स्वास्थ्य के अधिकार को जीवन के अधिकार का हिस्सा घोषित करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कई निर्देश जारी किए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर स्कूल किशोर लड़कियों को मुफ्त में बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए।कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि स्कूलों में काम करने वाले और स्वच्छ लिंग-विभाजित शौचालय हों।कोर्ट ने कक्षा 6-12 तक की किशोर लड़कियों के लिए स्कूलों में केंद्र सरकार की राष्ट्रीय नीति 'स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता...
सिर्फ़ ओरिजिनल ज्यूरिस्डिक्शन वाली सिविल कोर्ट ही आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल का मैंडेट बढ़ा सकती है, रेफरल कोर्ट नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (29 जनवरी) को कहा कि आर्बिट्रेशन एंड कॉन्सिलिएशन एक्ट, 1996 (A&C Act) की धारा 29A (4) के तहत आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल का मैंडेट बढ़ाने के लिए एप्लीकेशन सिर्फ़ धारा 2(1)(e) में बताई गई 'कोर्ट' यानी ओरिजिनल ज्यूरिस्डिक्शन वाली प्रिंसिपल सिविल कोर्ट में ही फाइल की जानी चाहिए, भले ही आर्बिट्रेटर को किसी भी अथॉरिटी ने नियुक्त किया हो।जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया, जिसने धारा 29A (4) के तहत समय-सीमा बढ़ाने के...
BREAKING | UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, कहा- दुरुपयोग की आशंका, अस्पष्ट भाषा
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की 'उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने' से संबंधित 2026 की नियमावली (UGC Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026) को अगली सुनवाई तक स्थगित (abeyance) रखने का आदेश दिया।अदालत ने इन नियमों को लेकर गंभीर आपत्तियाँ जताते हुए कहा कि ये प्रथम दृष्टया अस्पष्ट (vague) हैं और दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने सुझाव दिया कि इन...
'औकाफ सूची' में स्पेसिफाई या वक्फ एक्ट के तहत रजिस्टर्ड न होने वाली संपत्ति पर दावा नहीं कर सकता ट्रिब्यूनल: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (28 जनवरी) को फैसला सुनाया कि वक्फ ट्रिब्यूनल का अधिकार क्षेत्र केवल उन प्रॉपर्टीज़ पर है, जो "औकाफ की सूची" में नोटिफाई की गई या वक्फ एक्ट के तहत रजिस्टर्ड हैं, न कि अनरजिस्टर्ड प्रॉपर्टीज़ से जुड़े विवादों पर।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने तेलंगाना हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसने वक्फ एक्ट के तहत अनरजिस्टर्ड प्रॉपर्टी के संबंध में वक्फ ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए इंजंक्शन को सही ठहराया था।विवादित फैसले से असहमत होते हुए कोर्ट ने ऑब्ज़र्व...
बिना सबूत के इकबालिया बयान सज़ा का आधार नहीं हो सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (27 जनवरी) को एक मर्डर केस में सज़ा रद्द किया, क्योंकि कोर्ट ने पाया कि सज़ा आरोपी के बिना सबूत वाले इकबालिया बयानों पर आधारित थी, जो मजिस्ट्रेट के सामने कानूनी मदद के बिना दिए गए।आगे कहा गया,"एक इकबालिया बयान सज़ा का कानूनी आधार बन सकता है, अगर कोर्ट संतुष्ट हो कि यह सच था और स्वेच्छा से दिया गया। हालांकि, यह भी माना गया कि कोई भी कोर्ट बिना सबूत के ऐसे इकबालिया बयान के आधार पर सज़ा नहीं देगा।" जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने मेघालय हाईकोर्ट का...
S. 60(5)(c) IBC | NCLT ट्रेडमार्क मालिकाना हक के विवाद पर फैसला नहीं कर सकता, जो दिवालियापन की कार्यवाही से संबंधित न हो: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) की धारा 60(5) के तहत अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए बौद्धिक संपदा के मालिकाना हक के विवादित सवालों पर फैसला नहीं कर सकता, अगर ऐसा निर्धारण स्वीकृत समाधान योजना के दायरे से बाहर जाता है।कोर्ट ने कहा कि NCLT संपत्तियों पर मालिकाना हक के विवादों पर फैसला नहीं कर सकता, जिसमें ट्रेडमार्क जैसे बौद्धिक संपदा अधिकार शामिल हैं, जब तक कि विवाद का दिवालियापन समाधान प्रक्रिया से सीधा और करीबी संबंध न हो।जस्टिस...
FIR रद्द करने से इनकार करते समय हाईकोर्ट पुलिस को CrPC की धारा 41A प्रक्रिया का पालन करने का निर्देश नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि हाईकोर्ट FIR रद्द करने की याचिका खारिज करते समय पुलिस को CrPC की धारा 41A का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश नहीं दे सकते। कोर्ट ने समझाया कि एक बार जब कोई आरोपी धारा 41A के तहत नोटिस के जवाब में नियमित रूप से पेश होता है तो गिरफ्तारी पर रोक लग जाती है। ऐसी सुरक्षा, जो अंतरिम राहत की प्रकृति की है, रद्द करने पर विचार करने के चरण में नहीं दी जा सकती।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा,"एक याचिका में जहां FIR रद्द करने की प्रार्थना की...



















