SC के ताज़ा फैसले
S. 307 IPC | चोट की गंभीरता ही हत्या के प्रयास के लिए दोषी ठहराने के लिए काफी नहीं, जब तक कि जान लेने के इरादे का सबूत न हो: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक जान लेने का आपराधिक इरादा (mens rea) साबित नहीं हो जाता, तब तक हत्या के प्रयास के लिए किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, भले ही घायल व्यक्ति को कितनी भी गंभीर चोट क्यों न लगी हो।सुप्रीम कोर्ट ने कहा,"...चोट की गंभीरता अपने आप में IPC की धारा 307 के तहत अपराध को तय करने का आधार नहीं हो सकती, जब तक कि अभियोजन पक्ष उस धारा के तहत ज़रूरी आपराधिक इरादा (mens rea) को साबित न कर दे।" जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमीकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने यह टिप्पणी करते हुए पंजाब...
BNSS S.223(1) का परंतुक अनिवार्य, आरोपी को सुने बिना संज्ञान लेना शुरू से ही अमान्य: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 223(1) का पहला परंतुक—जो किसी शिकायत मामले में संज्ञान लेने से पहले आरोपी को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य बनाता है—अनुच्छेद 21 के तहत निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार से उत्पन्न होने वाला एक मूल सुरक्षा उपाय है। इसका पालन न करने पर संज्ञान लेने का आदेश शुरू से ही अमान्य हो जाएगा।कोर्ट ने आगे स्पष्ट किया कि आरोपी को ऐसे पालन न होने से हुए नुकसान को साबित करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह दोष एक ऐसी अवैधता है जो पूरी...
क्राइम सीन का री-एक्टमेंट हर स्थिति में 'खुद के खिलाफ गवाही देने के अधिकार' का उल्लंघन नहीं करेगा: सुप्रीम कोर्ट
यह देखते हुए कि जघन्य अपराधों की जांच में 'अपराध स्थल के री-एक्टमेंट' की तकनीक को काफी अहमियत मिल रही है, सुप्रीम कोर्ट ने इस तकनीक के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि अपराध स्थल के री-एक्टमेंट को सिर्फ इसलिए असंवैधानिक बताकर पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसमें आरोपी भी शामिल होता है।कोर्ट ने साफ किया कि अपराध स्थल के री-एक्टमेंट में आरोपी की भागीदारी संविधान के अनुच्छेद 20(3) (खुद के खिलाफ गवाही देने के मौलिक अधिकार) का उल्लंघन तभी मानी जाएगी, जब इसके ज़रिए आरोपी को अपनी...
BNSS लागू होने के बाद संज्ञान लिया गया हो तो PMLA शिकायत में आरोपी की सुनवाई पहले होना ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट
एक अहम फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई मजिस्ट्रेट, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के लागू होने के बाद मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, 2002 (PMLA) के तहत किसी कथित अपराध का संज्ञान लेता है तो BNSS की धारा 223(1) के पहले प्रावधान का पालन न करने पर वह संज्ञान रद्द माना जाएगा। इस प्रावधान के तहत संज्ञान लेने से पहले आरोपी को सुनवाई का मौका देना ज़रूरी है, भले ही शिकायत BNSS के लागू होने से पहले ही दायर की गई हो।जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस नोंगमीकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने...
ज़मीन मालिकों को दूसरे कानूनी फ़ायदे पाने के लिए कानूनी मुआवज़ा छोड़ने पर मजबूर नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (20 मई) को फ़ैसला सुनाया कि मुआवज़े के कानूनी अधिकार को नागरिक अधिकारियों द्वारा लगाई गई अनुबंध की शर्तों के ज़रिए छोड़ा नहीं जा सकता। कोर्ट ने साफ़ किया कि एक बार जब कोई कानून किसी व्यक्ति को मुआवज़े का अधिकार दे देता है तो उस अधिकार को सिर्फ़ इसलिए छोड़ा हुआ नहीं माना जा सकता, क्योंकि ज़मीन मालिक ने किसी दूसरे कानूनी फ़ायदे या सुविधा को पाने की शर्त के तौर पर उसे छोड़ने पर सहमति दी थी।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की बेंच ने बृहन्मुंबई म्युनिसिपल...
BREAKING | सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देशों में बदलाव से किया इनकार, कहा- 'कुत्तों के काटने का खतरा बढ़ रहा है'
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने पहले के निर्देशों को वापस लेने से इनकार किया। इन निर्देशों में कहा गया कि अस्पतालों, बस स्टैंडों, स्कूलों, रेलवे स्टेशनों जैसी सार्वजनिक जगहों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को वैक्सीनेशन/नसबंदी के बाद उसी जगह पर वापस नहीं छोड़ा जाना चाहिए।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने उन कई अर्जियों को खारिज किया, जिनमें पिछले साल नवंबर में कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों में बदलाव की मांग की गई। दूसरे शब्दों में, सार्वजनिक जगहों के परिसर से...
कुत्तों को संस्थागत परिसरों में रहने का पूर्ण अधिकार नहीं, ABC नियम ऐसे परिसरों में उन्हें छोड़ने को अनिवार्य नहीं बनाते: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि स्कूलों, अस्पतालों, खेल परिसरों, हवाई अड्डों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों जैसे संस्थागत और प्रतिबंधित-पहुंच वाले परिसरों में पाए जाने वाले आवारा कुत्तों को 'पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023' के तहत "सड़क के कुत्ते" या "सामुदायिक कुत्ते" के रूप में नहीं माना जा सकता। इसलिए वे पकड़े जाने और नसबंदी के बाद उसी स्थान पर वापस छोड़े जाने का दावा नहीं कर सकते।कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों के पास सभी श्रेणियों के स्थानों पर रहने का कोई "अखंडनीय या पूर्ण अधिकार" नहीं है, चाहे उन...
BREAKING| सुप्रीम कोर्ट ने पागल और खतरनाक कुत्तों को मारने की इजाज़त दी
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिए गए एक अहम आदेश में अधिकारियों को इंसानी ज़िंदगी पर मंडराते खतरे को रोकने के लिए पागल और खतरनाक कुत्तों को मारने की इजाज़त दी।कोर्ट ने आदेश दिया,"अधिकारी, पशु जन्म नियंत्रण (ABC) नियमों और दूसरे लागू कानूनी प्रोटोकॉल के मुताबिक, कानूनी तौर पर मंज़ूर उपाय कर सकते हैं। इनमें ऐसे मामलों में कुत्तों को मारना भी शामिल है, जो लाइलाज रूप से बीमार हैं, पागल हैं, या साफ तौर पर खतरनाक/आक्रामक हैं, ताकि इंसानी ज़िंदगी और सुरक्षा पर मंडराते खतरे को असरदार तरीके से खत्म किया जा...
UAPA मामलों में 'बेल नियम, जेल अपवाद': सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद को बेल से इनकार करने वाले फैसले पर जताई आपत्ति
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के मामलों में भी “बेल नियम है और जेल अपवाद” का सिद्धांत लागू होता है। अदालत ने जनवरी 2026 में दिए गए उस फैसले पर गंभीर आपत्ति जताई, जिसमें दिल्ली दंगा बड़ी साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को बेल देने से इनकार किया गया था।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की खड़नपीठ ने यह टिप्पणी सैयद इफ्तिखार अंद्राबी की जमानत याचिका मंजूर करते हुए की। अंद्राबी पिछले पांच वर्षों से कथित...
UAPA में भी जमानत नियम, जेल अपवाद: सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बताया सर्वोपरि
सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) जैसे कठोर कानूनों में भी जमानत नियम है और जेल अपवाद। अदालत ने स्पष्ट किया कि UAPA की धारा 43डी(5) के तहत जमानत पर लगी कानूनी पाबंदियां संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 के तहत मिले व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को खत्म नहीं कर सकतीं।जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस बीवी नागरत्ना की खंडपीठ ने जम्मू-कश्मीर के व्यक्ति को नार्को-टेरर मामले में जमानत देते हुए यह टिप्पणी की। मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी कर रही...
Hindu Succession Act | 2005 का संशोधन बेटियों के पहले से मौजूद विरासत के अधिकारों को सीमित नहीं करता: सुप्रीम कोर्ट
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम पर एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (15 मई) को कहा कि 2005 का संशोधन, जो बेटियों को जन्म से ही सह-दायिक (coparcenary) अधिकार देता है, उनके मृत पिता की संपत्ति में 'प्रथम श्रेणी के वारिस' (Class I heirs) के तौर पर विरासत पाने के स्वतंत्र अधिकार को न तो छीनता है और न ही सीमित करता है - खासकर तब, जब पिता की मृत्यु बिना वसीयत किए हुई हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल बेटों के बीच किया गया संपत्ति का बंटवारा, पिता के हिस्से की संपत्ति में बेटियों के...
मोटर दुर्घटना मुआवज़े से मेडिक्लेम रीइम्बर्समेंट नहीं काटा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
एक अहम फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी दुर्घटना पीड़ित को मेडिक्लेम या मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत मिली रकम को मोटर वाहन अधिनियम के तहत दिए गए मुआवज़े से नहीं काटा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ये दोनों फ़ायदे अलग-अलग कानूनी दायरे में आते हैं।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील खारिज की। इस अपील में बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फ़ैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरणों (MACTs) द्वारा दिए गए मुआवज़े...
रिलायंस द्वारा KG Besin से यूपी को गैस की सप्लाई 'इंटर-स्टेट सेल', VAT लागू नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (15 मई) को यह फैसला दिया कि आंध्र प्रदेश के KG-D6 बेसिन से दूसरे राज्य के खरीदारों को प्राकृतिक गैस की बिक्री, सेंट्रल सेल्स टैक्स एक्ट, 1956 की धारा 3(a) के तहत एक 'इंटर-स्टेट सेल' (अंतर-राज्यीय बिक्री) है, और इसलिए इस पर राज्य का वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) लागू नहीं होता।जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर अपीलों का समूह खारिज किया। ये अपीलें रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) द्वारा KG-D6 बेसिन से उत्तर प्रदेश के...
मान्यता खोने के बाद दूसरे प्राइवेट कॉलेजों में ट्रांसफर हुए स्टूडेंट सरकारी फीस का दावा नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि ओडिशा के बंद हो चुके सरदार राजास मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (SRMCH) से दूसरे प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में ट्रांसफर हुए स्टूडेंट, जिनकी मूल संस्था की मान्यता खत्म हो गई, सिर्फ़ रियायती सरकारी मेडिकल कॉलेज फीस देकर "अचानक मिलने वाले फ़ायदे" (Windfall) का दावा नहीं कर सकते। कोर्ट ने SRMCH में लागू फीस दरों पर उनसे बकाया फीस वसूलने की अनुमति दी।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने निर्देश दिया कि SRMCH का प्रबंधन करने वाले सेल्वम एजुकेशनल एंड चैरिटेबल...
नियमित पद के विज्ञापन के बदले संविदा पर नियुक्ति 'स्पष्ट रूप से अवैध': सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (13 मई) को फैसला सुनाया कि नियमित रिक्तियों के लिए जारी विज्ञापन के बदले किसी उम्मीदवार को संविदा के आधार पर नियुक्त करना "स्पष्ट रूप से अवैध और असंवैधानिक" है, खासकर तब जब इस तरह के भेदभावपूर्ण व्यवहार के लिए कोई कारण दर्ज न किया गया हो।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने असिस्टेंट प्रोफेसर द्वारा दायर अपील स्वीकार की। इस प्रोफेसर को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद में शिक्षण पदों के लिए नियमित नौकरी के विज्ञापन के बदले संविदा पर...
Land Acquisition | आवासीय प्लॉट की सेल डीड का उपयोग औद्योगिक भूमि के मुआवजे को निर्धारित करने के लिए नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि राजमार्ग विस्तार के लिए अधिग्रहित औद्योगिक भूमि के मुआवजे को निर्धारित करने के लिए पास के किसी गांव के आवासीय बिक्री विलेख का उपयोग नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि 'भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013' की धारा 26(1)(b) के तहत 'समान प्रकार की भूमि' की शर्त अनिवार्य है और भूमि अधिग्रहण मुआवजे को निर्धारित करने के लिए इसे सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की...
Article 19(1)(a) के तहत बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा का अधिकार : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मातृभाषा में शिक्षा को बच्चों का मौलिक अधिकार बताते हुए राजस्थान सरकार को बड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को सभी सरकारी और निजी स्कूलों में राजस्थानी भाषा को एक विषय के रूप में शुरू करने और बच्चों को राजस्थानी में शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आदेश दिया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में यह अधिकार भी शामिल है कि बच्चा ऐसी भाषा में शिक्षा प्राप्त करे जिसे वह समझ सके...
S.167 B(2) IT Act | 'एसोसिएशन ऑफ़ पर्सन्स' के सदस्य को मुनाफ़े की परवाह किए बिना दिया गया तय हिस्सा, टैक्स के दायरे में आएगा: सुप्रीम कोर्ट
टैक्स क़ानून पर एक अहम फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (12 मई) को कहा कि 'एसोसिएशन ऑफ़ पर्सन्स' (AOP) से कुल कमाई का एक तय हिस्सा पाने वाला सदस्य, अगर बिज़नेस के ख़र्च या नुक़सान नहीं उठाता है तो वह इस कमाई को "मुनाफ़े का हिस्सा" बताकर इनकम टैक्स से छूट का दावा नहीं कर सकता।यह बताना ज़रूरी है कि 'एसोसिएशन ऑफ़ पर्सन्स' (AOP) या 'बॉडी ऑफ़ इंडिविजुअल्स' (BOI) के सदस्यों पर टैक्स, इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 167B (2) के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 86 के तहत तय होता है। इन प्रावधानों को एक साथ...
कथित जातिगत गाली-गलौज किसी निजी घर के अंदर किए जाने पर SC/ST Act के तहत कोई अपराध नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (11 मई) को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत व्यक्ति के खिलाफ दर्ज मामला रद्द किया। इस व्यक्ति पर आरोप था कि उसने एक घर की चारदीवारी के अंदर, अनुसूचित जाति श्रेणी से ताल्लुक रखने वाले शिकायतकर्ता के साथ जाति-आधारित गाली-गलौज की थी।चूंकि FIR में यह ज़िक्र नहीं था कि अपीलकर्ता नंबर 1 और अन्य अपीलकर्ताओं द्वारा गाली-गलौज और धमकाने की कथित घटना किसी ऐसी जगह पर हुई, जहां आम लोगों की नज़र पड़ सकती हो, इसलिए कोर्ट ने यह माना कि SC/ST...
Order XII Rule 6 CPC | आपराधिक मामले में की गई स्वीकारोक्ति का इस्तेमाल सिविल कार्यवाही में किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश XII नियम 6 के तहत स्वीकारोक्ति पर आधारित फैसला, उन स्वीकारोक्तियों पर भी आधारित हो सकता है, जो लिखित दलीलों (Pleadings) के बाहर की गई हों।ट्रायल कोर्ट, पहली अपीलीय अदालत और हाईकोर्ट के एक जैसे फैसलों में दखल देने से इनकार करते हुए जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने प्रतिवादी (Defendant) की याचिका खारिज की। इस प्रतिवादी को आपराधिक कार्यवाही के दौरान की गई स्वीकारोक्तियों के आधार पर विवादित जगह खाली करने का...




















