SC के ताज़ा फैसले

विकास के लिए मंज़ूर ज़मीन पर बाद में उगने वाले पेड़ उसे डीम्ड फ़ॉरेस्ट नहीं बना देंगे: सुप्रीम कोर्ट
विकास के लिए मंज़ूर ज़मीन पर बाद में उगने वाले पेड़ उसे 'डीम्ड फ़ॉरेस्ट' नहीं बना देंगे: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि किसी नोटिफ़ाइड मास्टर प्लान के तहत विकास के लिए तय की गई ज़मीन को सिर्फ़ बाद में पेड़-पौधे या पेड़ उग जाने की वजह से "डीम्ड फ़ॉरेस्ट" (माना गया जंगल) नहीं माना जा सकता। इसलिए ऐसे बाद में उगे पेड़ों को काटने के लिए वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत केंद्र सरकार की पहले से मंज़ूरी लेने की ज़रूरत नहीं होगी।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने दिल्ली के बिजवासन रेलवे स्टेशन पर रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट को मंज़ूरी देने वाले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल...

Bihar Special Courts Act | अवैध संपत्ति वाले सरकारी कर्मचारी की मौत के बाद भी पत्नी के खिलाफ ज़ब्ती की कार्रवाई जारी रह सकती है: सुप्रीम कोर्ट
Bihar Special Courts Act | अवैध संपत्ति वाले सरकारी कर्मचारी की मौत के बाद भी पत्नी के खिलाफ ज़ब्ती की कार्रवाई जारी रह सकती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस सरकारी अधिकारी ने अपनी आय से ज़्यादा संपत्ति जमा की हो, उसकी मौत के बाद भी बिहार स्पेशल कोर्ट एक्ट, 2009 के तहत उसकी पत्नी (जो सरकारी कर्मचारी नहीं है) के खिलाफ ज़ब्ती की कार्रवाई जारी रखी जा सकती है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने पटना हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें कहा गया कि आरोपी अधिकारी की मौत के बाद बिहार स्पेशल कोर्ट एक्ट, 2009 के तहत उसकी पत्नी के खिलाफ ज़ब्ती की कार्रवाई खत्म हो गई।हाईकोर्ट की टिप्पणी से असहमति जताते हुए बेंच ने...

कर्ज़ चुकाने के लिए कर्ज़दार को फ़ोन करना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं: सुप्रीम कोर्ट
कर्ज़ चुकाने के लिए कर्ज़दार को फ़ोन करना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कर्ज़दार को अपना पैसा वापस करने के लिए फ़ोन करना, किसी कर्ज़ देने वाले पर आत्महत्या के लिए उकसाने का केस चलाने का आधार नहीं हो सकता।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने एक कर्ज़ देने वाले के ख़िलाफ़ आत्महत्या के लिए उकसाने (IPC की धारा 306) का मामला रद्द करते हुए कहा,"अगर कोई कर्ज़ देने वाला अपना पैसा वापस पाने के लिए कर्ज़दार को फ़ोन करता है तो यह एक क़ानूनी काम है। इसलिए सिर्फ़ इस आधार पर कर्ज़ देने वाले पर केस नहीं चलाया जा सकता।"इस मामले में कर्ज़ देने वाले...

शादी के ऐसे टूटने (Irretrievable Breakdown) के आधार पर विदेशी तलाक़ का फ़ैसला भारत में लागू नहीं: सुप्रीम कोर्ट
'शादी के ऐसे टूटने' (Irretrievable Breakdown) के आधार पर विदेशी तलाक़ का फ़ैसला भारत में लागू नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अमेरिका (USA) की किसी अदालत द्वारा शादी के ऐसे टूटने (जिसे ठीक न किया जा सके) के आधार पर दिया गया तलाक़ का फ़ैसला भारत में लागू नहीं होगा।ऐसा इसलिए है, क्योंकि भारतीय क़ानून के तहत शादी के ऐसे टूटने को तलाक़ का आधार नहीं माना जाता है। इस मामले में दोनों पक्षकारों की शादी हिंदू विवाह अधिनियम (HMA) के तहत हुई।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा,"...अमेरिकी अदालत ने शादी के ऐसे टूटने के आधार पर तलाक़ का फ़ैसला दिया था। यह आधार HMA के तहत मान्य नहीं है, जो...

डाइंग डिक्लेरेशन पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: डॉक्टर की राय पुलिस से अधिक विश्वसनीय
डाइंग डिक्लेरेशन पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: डॉक्टर की राय पुलिस से अधिक विश्वसनीय

सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति की मृत्यु पूर्व दिए गए बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) की विश्वसनीयता तय करते समय डॉक्टर की राय को प्राथमिकता दी जाएगी, न कि पुलिस अधिकारी के आकलन को।अदालत ने इसी आधार पर एक पति की हत्या के मामले में सजा को बरकरार रखा।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस. वी. एन. भट्टी की खंडपीठ ने कर्नाटक हाइकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए आरोपी पति की अपील खारिज कर दी।आरोपी को अपनी पत्नी की हत्या (धारा 302) और क्रूरता (धारा 498ए) के अपराध में दोषी ठहराया गया।मामले...

कंपनी के फंड का धोखाधड़ी से गलत इस्तेमाल बाद में शेयरहोल्डर्स की मंज़ूरी से ठीक नहीं हो सकता: सुप्रीम कोर्ट
कंपनी के फंड का धोखाधड़ी से गलत इस्तेमाल बाद में शेयरहोल्डर्स की मंज़ूरी से ठीक नहीं हो सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाया कि प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के ज़रिए जुटाए गए फंड का इस्तेमाल उन मकसदों के अलावा किसी और मकसद के लिए करना, जिनका खुलासा निवेशकों के सामने किया गया, सिक्योरिटीज़ कानून के तहत धोखाधड़ी माना जाएगा। साथ ही इसे बाद में शेयरहोल्डर्स की मंज़ूरी से भी ठीक नहीं किया जा सकता।भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा दायर अपीलों को मंज़ूर करते हुए जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने सिक्योरिटीज़ अपीलीय ट्रिब्यूनल (SAT) का आदेश रद्द किया,...

BREAKING | तीन महीने से ज़्यादा उम्र के बच्चों को गोद लेने वाली माताओं को मातृत्व लाभ से वंचित करना असंवैधानिक: सुप्रीम कोर्ट
BREAKING | तीन महीने से ज़्यादा उम्र के बच्चों को गोद लेने वाली माताओं को मातृत्व लाभ से वंचित करना असंवैधानिक: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (17 मार्च) को फैसला सुनाया कि सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 60(4), जो किसी गोद लेने वाली माँ को मातृत्व लाभ तभी देती है, जब गोद लिए गए बच्चे की उम्र 3 महीने से कम हो, असंवैधानिक है।कोर्ट ने फैसला सुनाया कि गोद लेने वाली माँ 12 हफ़्ते की मातृत्व छुट्टी की हकदार होनी चाहिए, चाहे गोद लिए गए बच्चे की उम्र कुछ भी हो।कोर्ट ने इस प्रावधान की व्याख्या इस तरह की: "कोई भी महिला जो कानूनी तौर पर किसी बच्चे को गोद लेती है, या कोई कमीशनिंग माँ, उस तारीख से 12 हफ़्ते की अवधि...

एयर फ़ोर्स ग्रुप इंश्योरेंस सोसाइटी संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत राज्य: सुप्रीम कोर्ट
एयर फ़ोर्स ग्रुप इंश्योरेंस सोसाइटी संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत 'राज्य': सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने एयर फ़ोर्स ग्रुप इंश्योरेंस सोसाइटी को संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत 'राज्य' माना है, जिस पर रिट क्षेत्राधिकार लागू होता है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने दिल्ली हाईकोर्ट का फ़ैसला पलट दिया, जिसमें एयर फ़ोर्स ग्रुप इंश्योरेंस सोसाइटी (सोसाइटी) को 'राज्य' मानने से इनकार किया गया। बेंच ने कहा कि चूंकि सोसाइटी एक सार्वजनिक कार्य करती है, जो भारतीय वायु सेना के सदस्यों के प्रति राज्य के दायित्वों से गहराई से जुड़ा है, इसलिए यह 'राज्य' की श्रेणी में आती...

3 साल की प्रैक्टिस शर्त बनी रहेगी, सिर्फ लागू करने का तरीका तय करना है: सुप्रीम कोर्ट
'3 साल की प्रैक्टिस शर्त बनी रहेगी, सिर्फ लागू करने का तरीका तय करना है': सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को निचली न्यायिक सेवा (सिविल जज जूनियर डिवीजन) में नियुक्ति के लिए अनिवार्य 3 वर्ष के प्रैक्टिस नियम की समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सभी हाईकोर्टों को निर्देश दिया कि आवेदन की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 तक बढ़ाई जाए।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने आदेश दिया कि जिन हाईकोर्टों ने पहले ही सिविल जज (जूनियर डिवीजन) पदों के लिए विज्ञापन जारी कर दिया है, वे आवेदन की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 तक बढ़ाएं। साथ ही...

Arbitration | आर्बिट्रेशन की कार्यवाही में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने के बाद अधिकार क्षेत्र को लेकर देर से की गई चुनौती स्वीकार्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट
Arbitration | आर्बिट्रेशन की कार्यवाही में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने के बाद अधिकार क्षेत्र को लेकर देर से की गई चुनौती स्वीकार्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि कोई भी पक्ष, जो आर्बिट्रेशन की कार्यवाही में सही समय पर अधिकार क्षेत्र को लेकर कोई आपत्ति उठाए बिना हिस्सा लेता है। वह बाद में जब उसके खिलाफ कोई प्रतिकूल फैसला (Award) आता है तो आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र को लेकर कोई तकनीकी दलील नहीं दे सकता।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने कहा,"कोई भी पक्ष अपने पास 'अधिकार क्षेत्र का तुरुप का पत्ता' (Jurisdictional Ace) छिपाकर नहीं रख सकता। फिर यह दावा नहीं कर सकता कि धारा 16 के तहत...

सीधी भर्ती वालों की सीनियरिटी शुरुआती नियुक्ति से गिनी जाएगी, प्रोबेशन पूरा होने से नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सीधी भर्ती वालों की सीनियरिटी शुरुआती नियुक्ति से गिनी जाएगी, प्रोबेशन पूरा होने से नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि तमिलनाडु बिजली बोर्ड (TNEB) में सीधी भर्ती से नियुक्त असिस्टेंट इंजीनियरों की सीनियरिटी उनकी शुरुआती नियुक्ति की तारीख से गिनी जानी चाहिए - जिसमें ट्रेनिंग की अवधि भी शामिल है - न कि उस तारीख से जब उन्होंने ट्रेनिंग पूरी करने के बाद प्रोबेशन शुरू किया।जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने मद्रास हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच का फैसला रद्द किया, जिसमें कर्मचारी की सीनियरिटी प्रोबेशन पूरा होने के बाद सेवा में शामिल होने की तारीख से गिनी गई।कोर्ट ने टिप्पणी...

रेलवे यात्रा बीमा सिर्फ़ ऑनलाइन टिकट तक सीमित नहीं हो सकता, यह काउंटर टिकट वाले यात्रियों के लिए भी उपलब्ध होना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
रेलवे यात्रा बीमा सिर्फ़ ऑनलाइन टिकट तक सीमित नहीं हो सकता, यह काउंटर टिकट वाले यात्रियों के लिए भी उपलब्ध होना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो यात्री रेलवे टिकट काउंटर से खरीदते हैं, उन्हें यात्रा बीमा का फ़ायदा देने से मना नहीं किया जा सकता, जबकि यही सुविधा उन लोगों के लिए उपलब्ध है जो टिकट ऑनलाइन बुक करते हैं।जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि जो यात्री रेलवे टिकट ऑनलाइन बुक करते हैं, वे बहुत कम अतिरिक्त कीमत पर बीमा का विकल्प चुन सकते हैं, जबकि यही विकल्प अभी उन यात्रियों के लिए उपलब्ध नहीं है जो रेलवे काउंटर पर जाकर टिकट खरीदते हैं।एमिक्स क्यूरी (अदालत के सलाहकार) सीनियर...

रिश्वतखोरी के दोषी सरकारी कर्मचारी को सिर्फ इसलिए बरी नहीं किया जा सकता कि सह-आरोपी को साज़िश साबित न होने पर बरी किया गया: सुप्रीम कोर्ट
रिश्वतखोरी के दोषी सरकारी कर्मचारी को सिर्फ इसलिए बरी नहीं किया जा सकता कि सह-आरोपी को साज़िश साबित न होने पर बरी किया गया: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जो सरकारी कर्मचारी खुद रिश्वत मांगता है और स्वीकार करता है, उसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (PC Act) के तहत दोषी ठहराया जा सकता है, भले ही आपराधिक साज़िश का आरोप साबित न हो और सह-आरोपी बरी हो जाए।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने एक इनकम टैक्स इंस्पेक्टर की रिहाई का आदेश रद्द किया। राजस्थान हाईकोर्ट ने उसे सिर्फ इसलिए बरी किया, क्योंकि सह-आरोपी बरी हो गया और IPC की धारा 120B के तहत साज़िश के आरोप हटा दिए गए।कोर्ट ने कहा कि भले ही साज़िश...