SC के ताज़ा फैसले

रिश्वत मांगने के मामले में PC Act की धारा 17A लागू नहीं होती, क्योंकि इसका सरकारी कर्तव्यों से कोई लेना-देना नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' (Prevention of Corruption Act), 1988 की धारा 17A, जिसके तहत सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ किसी जांच या पूछताछ से पहले पूर्व अनुमति लेना जरूरी होता है, वह रिश्वत मांगने के मामलों में लागू नहीं होगी। ऐसा इसलिए है, क्योंकि रिश्वत मांगना सरकारी कर्तव्यों के पालन से जुड़ा हुआ काम नहीं है।जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि यह प्रावधान केवल तब लागू होता है, जब कथित अपराध किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा अपने आधिकारिक कार्यों या...

राज्य मंदिर की ज़मीन का उपहार स्वीकार नहीं कर सकता; HR&CE Act के तहत सरकार मंदिर की संपत्तियों की केवल संरक्षक, मालिक नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार मंदिर की संपत्तियों की संरक्षक और नियामक (रेगुलेटर) है, न कि उनकी मालिक। इसलिए वह किसी ट्रस्टी से ऐसी संपत्ति का उपहार स्वीकार नहीं कर सकती, भले ही यह हस्तांतरण किसी सार्वजनिक उद्देश्य के लिए ही क्यों न किया जा रहा हो।मद्रास हाईकोर्ट का फैसला पलटते हुए जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने एक 'गिफ्ट डीड' (उपहार विलेख) को अमान्य घोषित किया। इस डीड के ज़रिए, तमिलनाडु के इरोड ज़िले में स्थित 'नागापालयम मरियम्मन-पोन्नाचियम्मन मंदिर' के अस्थायी...

आर्बिट्रेशन क्लॉज़ होने से आपराधिक मामला दर्ज करने पर रोक नहीं लगती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी समझौते में 'आर्बिट्रेशन क्लॉज़' (मध्यस्थता खंड) होने का मतलब यह नहीं है कि आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि अदालतों को सबसे पहले यह देखना चाहिए कि क्या लगाए गए आरोपों में अपराध के ज़रूरी तत्व मौजूद हैं या नहीं।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह टिप्पणी तब की, जब वह गुवाहाटी हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रहे थे। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने चाय कंपनी के CEO के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला रद्द करने से इनकार...

BREAKING | ग़ैर-हिंदू धर्म अपनाने वाले लोग केवल धर्म परिवर्तन से पहले की अपनी स्थिति के आधार पर पिछड़े वर्ग के कोटे का दावा नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट का वह फैसला बरकरार रखा, जिसमें कहा गया कि इस्लाम अपनाने वाला कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन से पहले की अपनी स्थिति के आधार पर पिछड़े वर्ग के आरक्षण का हकदार नहीं है।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने तमिलनाडु सरकार द्वारा हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर चुनौती को खारिज कर दिया। कोर्ट ने आदेश दिया:"कोई व्यक्ति जो इस्लाम अपनाता है, केवल इस कार्य से वह राज्य में अधिसूचित सात पिछड़े सामाजिक समुदायों में से किसी एक का सदस्य नहीं बन जाता। उसकी...

सुप्रीम कोर्ट का रेलवे को निर्देश: ऑनलाइन टिकटों की तरह काउंटर से खरीदे गए टिकटों पर भी इंश्योरेंस कवर दें

एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रेलवे को आदेश दिया कि वह 27 अक्टूबर से दो हफ़्ते के अंदर रेलवे रिज़र्वेशन काउंटर से खरीदे गए टिकटों पर भी इंश्योरेंस कवर दे। कोर्ट ने कहा कि इंश्योरेंस कवर वैसा ही होना चाहिए जैसा ऑनलाइन टिकट खरीदने पर मिलता है।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने आम लोगों की सुरक्षा और ट्रेन यात्रा के दौरान होने वाली अप्रिय घटनाओं को रोकने से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। इस मामले में उठाए गए मुद्दों में से एक इंश्योरेंस कवर का...

पेंशन के लिए एड-हॉक सर्विस गिनी जा सकती है, लेकिन सीधे भर्ती हुए कर्मचारियों के मुकाबले सीनियरिटी का दावा नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अस्थायी या एड-हॉक (कामचलाऊ) तौर पर नियुक्त कर्मचारी, सीधे भर्ती हुए कर्मचारियों के साथ सीनियरिटी तय करने के मामले में बराबरी का दावा नहीं कर सकते। असल में, एड-हॉक या अस्थायी कर्मचारियों की सीनियरिटी उनकी शुरुआती नियुक्ति की तारीख से नहीं, बल्कि सर्विस में पक्के (कन्फर्म) होने की तारीख से तय होगी।जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने कहा कि हालांकि एड-हॉक सर्विस को पेंशन के मकसद से ध्यान में रखा जा सकता है, लेकिन सीनियरिटी तय करने के लिए इसे नहीं गिना जा...

CEC Protest: सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में न लिया जाए; मेट्रो, ट्रेन और इंटरनेट सेवाएं बिना रुकावट जारी रहें

रविवार को एक विशेष सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि किसी भी व्यक्ति को कानून द्वारा तय प्रक्रिया के बिना हिरासत में नहीं लिया जाएगा। यह निर्देश खासकर उन शांतिपूर्ण और निहत्थे लोगों के जमावड़े के संबंध में है, जो उन इलाकों से बाहर हैं जहाँ निषेधाज्ञा (Prohibitory Orders) लागू है।जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे सुप्रीम कोर्ट के आसपास के इलाके में BNSS की धारा 163 लागू करने से संबंधित बोर्ड को हटा दें (यदि पहले से नहीं हटाया...

1956 के उत्तराधिकार कानून के तहत हिंदू विधवा का सीमित अधिकार पूर्ण अधिकार बन गया: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 14(1) के तहत कृषि भूमि में हिंदू विधवा का सीमित अधिकार पूर्ण स्वामित्व में बदल सकता है। उत्तराधिकार का निर्धारण उसकी मृत्यु के समय लागू व्यक्तिगत कानून को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने लगभग 45 बीघा कृषि भूमि को लेकर हुए विवाद पर सुनवाई की। यह विवाद एक महिला के पहले पति के परिवार के वारिसों और उसकी दूसरी शादी से हुए दो बेटों के बीच है।मुख्य मुद्दा यह था कि क्या महिला का...

ज्यूडिशियल सर्विस के लिए बेंच क्लर्क का अनुभव लॉ क्लर्क के अनुभव के बराबर नहीं माना जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (6 अक्टूबर) को एक रिट याचिका खारिज की। इस याचिका में मांग की गई थी कि न्यायिक सेवा परीक्षा में शामिल होने के लिए ज़रूरी एक साल की कानूनी प्रैक्टिस की शर्त को पूरा करने के मकसद से, ज़िला न्यायपालिका में बेंच क्लर्क के अनुभव को लॉ क्लर्क के अनुभव के बराबर माना जाए।कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि बेंच क्लर्क का अनुभव "प्रशासनिक" (मिनिस्टीरियल) प्रकृति का होता है और लॉ क्लर्क के अनुभव से अलग होता है, इसलिए कोर्ट ने मामला खारिज किया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस...

23,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का ट्रैफिक जुर्माना बकाया: सुप्रीम कोर्ट का बिना भुगतान ई-चालान वाले वाहनों को ज़ब्त करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ट्रैफिक का बकाया जुर्माना वसूलने के लिए कड़े कदम उठाने का निर्देश दिया। इन कदमों में रैंडम चेकिंग के दौरान बिना भुगतान वाले ई-चालान वाले वाहनों को ज़ब्त करना और बकाया राशि का भुगतान होने तक वाहनों से जुड़ी ऑनलाइन सेवाओं को रोकना शामिल है।कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ हज़ारों ई-चालान जारी करने से कोई खास फ़ायदा नहीं होगा, जब तक कि अधिकारी जुर्माने की वसूली सुनिश्चित न करें। कोर्ट को बताया गया कि देश भर में जारी ई-चालान के तहत लगभग 49,194.05 करोड़...

S. 138 NI Act | चेक बाउंस होने पर ड्रॉअर के पते पर भेजा गया नोटिस, परिवार के सदस्य को मिलने पर भी वैध माना जाएगा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (30 सितंबर) को कहा कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (NI Act) के तहत कानूनी डिमांड नोटिस को सिर्फ़ इसलिए अमान्य नहीं माना जा सकता कि वह ड्रॉअर के परिवार के किसी सदस्य को मिला था, जबकि नोटिस ड्रॉअर के सही पते पर रजिस्टर्ड पोस्ट से भेजा गया।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने केरल हाईकोर्ट का वह फ़ैसला पलट दिया, जिसमें ड्रॉअर की सज़ा को सिर्फ़ इस आधार पर रद्द कर दिया गया कि कानूनी डिमांड नोटिस उसे व्यक्तिगत रूप से नहीं, बल्कि उसकी माँ को मिला था,...

सिर्फ़ कस्टडी में दिए गए कबूलनामे के आधार पर प्रिवेंटिव डिटेंशन नहीं हो सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिकारी सिर्फ़ आरोपी के कबूलनामे के आधार पर प्रिवेंटिव डिटेंशन (एहतियाती हिरासत) का आदेश जारी नहीं कर सकते। कोर्ट ने नेशनल सिक्योरिटी एक्ट, 1980 के तहत मुल्ला अफ़रोज़ की हिरासत रद्द की, जिस पर 2024 की संभल हिंसा का मास्टरमाइंड होने का आरोप है।"इसलिए हमारी राय है कि पुलिस अधिकारी के सामने दिया गया कबूलनामा, अकेले और किसी स्वतंत्र सबूत के समर्थन के बिना प्रिवेंटिव डिटेंशन के आदेश को बनाए रखने के लिए ज़रूरी 'व्यक्तिगत संतुष्टि' (Subjective Satisfaction) का आधार नहीं बन सकता।...

एक ही पद पर काम करने वाले सीनियर अधिकारी को जूनियर से कम वेतन नहीं दिया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक ही पद पर काम करने वाले सीनियर कर्मचारी को जूनियर से कम वेतन नहीं दिया जा सकता, जब तक कि इस अंतर के पीछे कोई ठोस और साबित करने लायक कारण न हों।कोर्ट ने कहा,"यह एक बुनियादी बात है कि एक ही पद पर काम करने वाले सीनियर अधिकारी को जूनियर अधिकारी से कम वेतन नहीं दिया जा सकता... अगर किसी जूनियर को सीनियर से ज़्यादा वेतन मिल रहा है तो इसके लिए ठोस कारण होने चाहिए।" जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने अलीगढ़ के धर्म समाज कॉलेज के रीडर (एसोसिएट प्रोफेसर) की अपील...

कर्मचारी को हटाने वाला अधिकारी नियुक्ति करने वाले अधिकारी के बराबर पद का है तो आर्टिकल 311 के तहत रोक लागू नहीं होती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के आर्टिकल 311(1) के तहत संवैधानिक सुरक्षा तभी लागू होती है, जब हटाने वाला अधिकारी, नियुक्ति करने वाले अधिकारी से निचले पद का हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि कानूनी नियमों के तहत किसी निचले अधिकारी को अनुशासनात्मक शक्तियां सौंपने (डेलिगेशन) से संवैधानिक रोक लागू नहीं होती।बता दें, आर्टिकल 311(1) किसी सिविल सेवक को उस अधिकारी द्वारा बर्खास्त या हटाने से रोकता है, जो उसकी नियुक्ति करने वाले अधिकारी से निचले पद का हो। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच...

BREAKING | स्टूडेंट की NSA हिरासत रद्द करने और नोएडा DM की आलोचना वाले हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें गौतम बुद्ध नगर जिले (नोएडा) की मजिस्ट्रेट मेधा रूपम को नोएडा में मज़दूरों के विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में छात्रा आकृति चौधरी को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत में रखने के लिए अपनी सैलरी से 5 लाख रुपये का मुआवज़ा देने का निर्देश दिया गया था।कोर्ट ने उस फ़ैसले के अमल पर भी रोक लगाई, जिसमें छात्रा की हिरासत रद्द की गई थी।जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने DM और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर दो अलग-अलग...

Hindu Succession Act | बिना बंटवारे के भी S14(1) के तहत विधवा का सीमित अधिकार पूर्ण अधिकार बन जाता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक हिंदू विधवा, जिसे 'हिंदू महिला संपत्ति अधिकार अधिनियम, 1937' के तहत अपने मृत पति की संपत्ति में अधिकार मिला है, वह 'हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956' की धारा 14(1) के तहत उस अधिकार की पूर्ण मालिक बन सकती है, भले ही संपत्ति का कोई बंटवारा न हुआ हो।कोर्ट ने कहा कि भले ही संपत्ति का बंटवारा न हुआ हो, लेकिन 1956 से पहले पति की मृत्यु पर विरासत में मिली संपत्ति में विधवा का सीमित अधिकार सिर्फ़ इसलिए खत्म नहीं हो जाता कि उसने औपचारिक बंटवारे की मांग नहीं की या उसे हासिल नहीं...