SC के ताज़ा फैसले
सक्सेशन एक्ट में कोई समय-सीमा न बताए जाने के कारण प्रोबेट रद्द करने का मामला लिमिटेशन एक्ट के आर्टिकल 137 के तहत आएगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1925 में वसीयत के प्रोबेट के लिए या पहले से जारी प्रोबेट को रद्द करने की अर्ज़ी दाखिल करने के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की गई, इसलिए ऐसी कार्यवाही लिमिटेशन एक्ट, 1963 के आर्टिकल 137 के तहत आएगी। यह आर्टिकल उन अर्जियों के लिए तीन साल की समय-सीमा तय करता है, जिनके लिए कोई खास समय-सीमा नहीं बताई गई।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने धीरज दत्ता की अपील को मंज़ूरी देते हुए यह बात कही। उन्होंने माना कि 1995 में जारी प्रोबेट रद्द...
खड़ी गाड़ी पर पेड़ गिरने से लगी चोट 'मोटर दुर्घटना' नहीं; MACT क्लेम नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि भारी बारिश के दौरान सड़क किनारे खड़े ऑटो-रिक्शा पर पेड़ की टहनी गिरने से लगी चोटें, मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 166 के तहत क्लेम के मकसद से "मोटर वाहन के इस्तेमाल" से हुई दुर्घटना नहीं मानी जाएंगी। फिर भी पीड़ित को लगी गंभीर चोटों को देखते हुए कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उसे मिलने वाले मुआवज़े को ₹17.10 लाख से बढ़ाकर ₹25 लाख कर दिया।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच बृहत् बेंगलुरु...
CAPF कर्मी सर्विस से जुड़े विवादों के लिए दिल्ली हाईकोर्ट जा सकते हैं, भले ही मामला दिल्ली के बाहर का हो: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPF) - जिसमें बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) भी शामिल है - के सदस्य सर्विस से जुड़े मामलों में दिल्ली हाईकोर्ट के रिट अधिकार क्षेत्र (writ jurisdiction) का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसा तब भी किया जा सकता है, जब मामले की वजह दिल्ली के बाहर पैदा हुई हो, क्योंकि भारत सरकार और संबंधित फोर्स के हेडक्वार्टर राष्ट्रीय राजधानी में स्थित हैं।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने BSF कॉन्स्टेबल बख्शीश अहमद की अपील को मंज़ूरी देते हुए यह...
S.27 Evidence Act | अगर रिकवरी दूसरे सबूतों से साबित हो जाए तो पंच गवाह का मुकर जाना केस के लिए घातक नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने का फैसला बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि अगर रिकवरी के सबूत दूसरे पुष्टिकारक सबूतों से साबित हो जाते हैं तो सिर्फ़ पंच गवाह के मुकर जाने से अभियोजन पक्ष का केस कमज़ोर नहीं होगा और न ही आरोपी के खुलासे वाले बयानों (एविडेंस एक्ट की धारा 27 के तहत) पर आधारित रिकवरी के सबूतों पर शक पैदा होगा।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और सेशंस कोर्ट के फैसलों पर मुहर लगाई। इन अदालतों ने अपीलकर्ता को हत्या...
S. 138 NI Act | NGO की तरफ़ से चेक पर साइन करने वाले अधिकृत व्यक्ति को 'ड्रॉअर' माना जाएगा, बाउंस होने पर वही ज़िम्मेदार होगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब कोई कंपनी किसी व्यक्ति को अपनी तरफ़ से चेक जारी करने और उन पर साइन करने (जिसमें पेमेंट करने की ज़िम्मेदारी भी शामिल है) के लिए अधिकृत करती है तो ऐसे व्यक्ति को 'ड्रॉअर' माना जाएगा और उस पर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (NI Act) की धारा 138 के तहत ज़िम्मेदारी लागू होगी।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने NGO के ट्रेज़रर की सज़ा बरकरार रखा। उन्हें NGO का अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (Authorized Signatory) नियुक्त किया गया था ताकि वह चेक जारी कर...
Specific Relief Act | खरीदार द्वारा विक्रेता को कानूनी नोटिस भेजने में देरी 'स्पेसिफिक परफॉर्मेंस' से इनकार करने का आधार नहीं हो सकती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी (डिफेंडेंट) को बाकी रकम लेने और सेल डीड (बिक्री विलेख) निष्पादित करने के लिए कानूनी नोटिस भेजने में केवल देरी होने को वादी (प्लांटिफ) की अनुबंध पूरा करने की तत्परता और इच्छा की कमी नहीं माना जा सकता।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। इसमें अपीलकर्ता-वादी ने प्रतिवादी-डिफेंडेंट को बिक्री की कुल रकम का 93% भुगतान कर दिया था और बार-बार सेल डीड निष्पादित करने और बाकी रकम लेने के लिए कहा था। फिर भी उसे अनुबंध पूरा करने के...
MMDR Act के तहत रॉयल्टी में बढ़ोतरी कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों से ऊपर: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (4 जून) को कहा कि माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1957 (MMDR Act) के तहत खनिजों पर रॉयल्टी का भुगतान उसी दर पर किया जाना चाहिए, जो खदान से उनके असल डिस्पैच या हटाने की तारीख पर लागू हो, चाहे पार्टियों के बीच हुए कॉन्ट्रैक्ट में कोई भी दर तय की गई हो।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा,"...भुगतान खनिजों की आवाजाही (मूवमेंट) की तारीख पर किया जाना है। अगर आवाजाही की तारीख रॉयल्टी में बढ़ोतरी के बाद की तो कानूनी बदलाव से पहले...
S.35L Central Excise Act | एक्साइज़ेबिलिटी के सवाल पर अपील का फ़ैसला सिर्फ़ सुप्रीम कोर्ट कर सकता है, हाईकोर्ट नहीं: एससी
सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला दिया कि सामान की एक्साइज़ेबिलिटी से जुड़े विवाद उसके खास अपीलीय अधिकार क्षेत्र में आते हैं और सेंट्रल एक्साइज़ एक्ट, 1944 की धारा 35G के तहत हाईकोर्ट उनका फ़ैसला नहीं कर सकते।कोर्ट ने फ़ैसला दिया,"एक्साइज़ ड्यूटी की दर या असेसमेंट के मकसद से सामान की कीमत से जुड़े किसी भी सवाल के निर्धारण के संबंध में अपीलीय ट्रिब्यूनल द्वारा पारित आदेश के खिलाफ़ अपील इस कोर्ट में की जा सकती है, हाईकोर्ट में नहीं। हालांकि, यह रोक ड्यूटी की दर या सामान की कीमत से जुड़े हर सवाल पर लागू नहीं...
ज़्यादा क्वालिफिकेशन वाले व्यक्ति को कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए तय पद के लिए उपयुक्त नहीं माना जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी ऐसी नौकरी के लिए अपनी ज़्यादा क्वालिफिकेशन छिपाना, जो खास तौर पर कम क्वालिफिकेशन वाले लोगों के लिए रिज़र्व है, असल में काबिल और हकदार उम्मीदवारों को नौकरी से वंचित करने जैसा है।जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा,"...जब कोई पद खास तौर पर कम क्वालिफिकेशन वाले उम्मीदवारों के लिए तय किया गया हो तो ज़्यादा क्वालिफिकेशन वाले किसी व्यक्ति को वह नौकरी पाने की इजाज़त देने का नतीजा यह होगा कि कोई असल में काबिल और हकदार उम्मीदवार उस मौके से वंचित...
लंबे समय तक वैवाहिक अलगाव 'मानसिक क्रूरता' माना जा सकता है; खत्म हो चुके रिश्ते को बनाए रखना ज़रूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति को दी गई तलाक की डिक्री सही ठहराई। उस व्यक्ति की पत्नी पिछले 15 सालों से उससे अलग रह रही थी। कोर्ट ने कहा कि जब पति-पत्नी अलग-अलग पेशेवर और भौगोलिक रास्ते चुन लेते हैं और बिना दूरी कम करने की कोई कोशिश किए सालों तक एक-दूसरे से अलग रहते हैं तो वैवाहिक ढांचा ही खत्म माना जाता है।कोर्ट ने कहा,"ऐसी परिस्थितियों में अलगाव सिर्फ़ व्यक्तिगत द्वेष या एकतरफ़ा गलती का मामला नहीं रह जाता, बल्कि यह वैवाहिक बंधन को दोनों पक्षों द्वारा असल में छोड़ देने का रूप ले लेता...
Prevention Of Corruption Act | अधीनस्थों के लिए रिश्वत मांगने वाला सरकारी कर्मचारी भी दोषी माना जाएगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention Of Corruption Act) की धारा 7 के तहत दोषी ठहराए जाने के लिए किसी सरकारी कर्मचारी का रिश्वत की मांग करना या उसे खुद स्वीकार करना ज़रूरी नहीं है। यह मानते हुए कि यह प्रावधान तीसरे पक्षों के माध्यम से और किसी अन्य व्यक्ति के लाभ के लिए अनुचित लाभ प्राप्त करने के प्रयासों को भी शामिल करता है, कोर्ट ने कर्नाटक पुलिस के सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ भ्रष्टाचार की FIR को बहाल किया। इस सब-इंस्पेक्टर पर अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से...
शादीशुदा बेटी को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित करना असंवैधानिक: सुप्रीम कोर्ट ने पलटा इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला
देश की सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि केवल विवाह हो जाने के आधार पर किसी बेटी को अनुकंपा नियुक्ति या उससे जुड़े लाभों से बाहर नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उन फैसलों को निरस्त कर दिया, जिनमें विवाहित बेटियों को परिवार की परिभाषा से बाहर मानते हुए अनुकंपा नियुक्ति का लाभ देने से इनकार किया गया था।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि वैवाहिक स्थिति किसी पात्र बेटी को कल्याणकारी योजना से वंचित...
कोऑर्डिनेट बेंच दूसरी बेंच द्वारा दी गई ज़मानत रद्द कर सकती है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि हाईकोर्ट की एक कोऑर्डिनेट बेंच, किसी आरोपी को दूसरी बेंच द्वारा दी गई ज़मानत रद्द कर सकती है, अगर वह ज़मानत गलत तथ्य पेश करके हासिल की गई हो।इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट आरोपी सूरज महानंदा की ज़मानत अर्जी पर सुनवाई कर रहा था। सूरज पर नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेस एक्ट, 1985 (NDPS Act) की धारा 21(c) (निर्मित दवाओं और तैयारियों के संबंध में उल्लंघन के लिए सज़ा) और 29 (दुष्प्रेरण और आपराधिक साज़िश के लिए सज़ा) के तहत आरोप लगाए गए हैं। आरोपी ने...
Hindu Succession Act | बिना वसीयत उत्तराधिकार के बाद कोई भी सह-उत्तराधिकारी 'कर्ता' के तौर पर काम करते हुए दूसरों के हिस्से नहीं बेच सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (1 जून) को यह फैसला सुनाया कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 (Hindu Succession Act) के तहत बिना वसीयत वाली संपत्ति का उत्तराधिकार पाने वाले लोग उस संपत्ति को 'टेनेंट्स-इन-कॉमन' (साझा हिस्सेदार) के तौर पर रखते हैं, जिसमें उनके हिस्से तय होते हैं, न कि 'संयुक्त पारिवारिक संपत्ति' के तौर पर। नतीजतन, कोई भी सह-उत्तराधिकारी दूसरों की ओर से संपत्ति का निपटारा (बेच या हस्तांतरित) नहीं कर सकता, क्योंकि ऐसे मामलों में 'कर्ता' की अवधारणा लागू नहीं होती।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस...
राज्य की अनुग्रह राशि के लिए अयोग्य आश्रित माँ मोटर दुर्घटना मुआवज़े में अलग हिस्से की हकदार: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि हालांकि किसी मृत सरकारी कर्मचारी के परिवार को 'हरियाणा मृत सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा सहायता नियम, 2006' के तहत मिलने वाली अनुग्रह वित्तीय सहायता को लाभों की दोहरी गिनती रोकने के लिए 'मोटर वाहन अधिनियम' के तहत दिए गए मुआवज़े से घटाया जाना चाहिए; लेकिन यह कटौती उस आश्रित माँ के स्वतंत्र अधिकार को खत्म नहीं कर सकती, जो राज्य की योजना के तहत सहायता पाने के लिए पात्र नहीं है।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की तीन-जजों की...
आरक्षित फैसलों में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, हाईकोर्टों के लिए जारी की बाध्यकारी गाइडलाइन
सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षित फैसलों को सुनाने में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए देश के सभी हाईकोर्टों के लिए नई बाध्यकारी गाइडलाइन जारी की।अदालत ने स्पष्ट किया कि फैसला सुरक्षित रखने के बाद अधिकतम तीन महीने के भीतर निर्णय सुनाना होगा।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि जमानत मामलों में आदेश उसी दिन सुनाया और अपलोड किया जाना चाहिए। यदि आदेश सुरक्षित रखा जाता है तो उसे अगले दिन सुनाना और वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई...
एशियन गेम्स ट्रायल्स में हिस्सा लेंगी विनेश फोगाट: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पहलवान विनेश फोगाट को 30 मई से शुरू होने वाले एशियन गेम्स चयन ट्रायल्स में भाग लेने की अनुमति दे दी। अदालत ने Wrestling Federation of India (WFI) की उस याचिका पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने स्पष्ट किया कि फिलहाल विनेश फोगाट को ट्रायल्स में हिस्सा लेने दिया जाएगा, हालांकि WFI की याचिका पर नोटिस जारी कर मामले की विस्तृत सुनवाई बाद में की जाएगी।सुनवाई के दौरान...
पूर्व राजघरानों की निजी संपत्ति पर लागू नहीं होगा ज्येष्ठाधिकार का नियम : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि पूर्व रियासतों के शासकों की निजी संपत्तियों के उत्तराधिकार पर ज्येष्ठाधिकार यानी केवल सबसे बड़े पुरुष उत्तराधिकारी को संपत्ति मिलने का नियम लागू नहीं होगा। ऐसी संपत्तियों का बंटवारा संबंधित परिवार के व्यक्तिगत उत्तराधिकार कानून के अनुसार किया जाएगा।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की खंडपीठ ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें कपूरथला राजघराने की निजी संपत्तियों पर ब्रिगेडियर सुखजीत सिंह को एकमात्र...
'ट्रॉमा केयर जीवन के अधिकार का हिस्सा': सुप्रीम कोर्ट ने इमरजेंसी हेल्पलाइन को 112 में जोड़ने, PM RAHAT और Good Samaritan योजना लागू करने का निर्देश दिया
यह मानते हुए कि नागरिकों की ट्रॉमा केयर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग है, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अंतरिम निर्देश जारी किए, जिसमें पूरे देश में इमरजेंसी रिस्पॉन्स के लिए एक साझा हेल्पलाइन नंबर '112' को चालू करना भी शामिल है।कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पूरे देश में एक समान और मज़बूत ट्रॉमा केयर सिस्टम बनाने के लिए कई अंतरिम निर्देश जारी किए। इनमें सभी इमरजेंसी हेल्पलाइन को 112 में जोड़ना, PM RAHAT कैशलेस इलाज योजना को चालू करना और Good...
BREAKING| ECI को अपनी शक्तियों के तहत वोटर लिस्ट का SIR करने का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने भारत के चुनाव आयोग (ECI) द्वारा की गई मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) की वैधता को सही ठहराया और टिप्पणी की कि मतदाता SIR, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की संवैधानिक अनिवार्यता को आगे बढ़ाता है।कोर्ट ने फैसला दिया कि चुनाव आयोग के पास संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत SIR करने की शक्ति है, जिसे 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' और उसके तहत बनाए गए नियमों के साथ पढ़ा जाना चाहिए।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने उन रिट याचिकाओं पर यह...




















