SC के ताज़ा फैसले

Hindu Succession Act | बिना वसीयत उत्तराधिकार के बाद कोई भी सह-उत्तराधिकारी कर्ता के तौर पर काम करते हुए दूसरों के हिस्से नहीं बेच सकता: सुप्रीम कोर्ट
Hindu Succession Act | बिना वसीयत उत्तराधिकार के बाद कोई भी सह-उत्तराधिकारी 'कर्ता' के तौर पर काम करते हुए दूसरों के हिस्से नहीं बेच सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (1 जून) को यह फैसला सुनाया कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 (Hindu Succession Act) के तहत बिना वसीयत वाली संपत्ति का उत्तराधिकार पाने वाले लोग उस संपत्ति को 'टेनेंट्स-इन-कॉमन' (साझा हिस्सेदार) के तौर पर रखते हैं, जिसमें उनके हिस्से तय होते हैं, न कि 'संयुक्त पारिवारिक संपत्ति' के तौर पर। नतीजतन, कोई भी सह-उत्तराधिकारी दूसरों की ओर से संपत्ति का निपटारा (बेच या हस्तांतरित) नहीं कर सकता, क्योंकि ऐसे मामलों में 'कर्ता' की अवधारणा लागू नहीं होती।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस...

राज्य की अनुग्रह राशि के लिए अयोग्य आश्रित माँ मोटर दुर्घटना मुआवज़े में अलग हिस्से की हकदार: सुप्रीम कोर्ट
राज्य की अनुग्रह राशि के लिए अयोग्य आश्रित माँ मोटर दुर्घटना मुआवज़े में अलग हिस्से की हकदार: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि हालांकि किसी मृत सरकारी कर्मचारी के परिवार को 'हरियाणा मृत सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा सहायता नियम, 2006' के तहत मिलने वाली अनुग्रह वित्तीय सहायता को लाभों की दोहरी गिनती रोकने के लिए 'मोटर वाहन अधिनियम' के तहत दिए गए मुआवज़े से घटाया जाना चाहिए; लेकिन यह कटौती उस आश्रित माँ के स्वतंत्र अधिकार को खत्म नहीं कर सकती, जो राज्य की योजना के तहत सहायता पाने के लिए पात्र नहीं है।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की तीन-जजों की...

आरक्षित फैसलों में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, हाईकोर्टों के लिए जारी की बाध्यकारी गाइडलाइन
आरक्षित फैसलों में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, हाईकोर्टों के लिए जारी की बाध्यकारी गाइडलाइन

सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षित फैसलों को सुनाने में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए देश के सभी हाईकोर्टों के लिए नई बाध्यकारी गाइडलाइन जारी की।अदालत ने स्पष्ट किया कि फैसला सुरक्षित रखने के बाद अधिकतम तीन महीने के भीतर निर्णय सुनाना होगा।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि जमानत मामलों में आदेश उसी दिन सुनाया और अपलोड किया जाना चाहिए। यदि आदेश सुरक्षित रखा जाता है तो उसे अगले दिन सुनाना और वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई...

पूर्व राजघरानों की निजी संपत्ति पर लागू नहीं होगा ज्येष्ठाधिकार का नियम : सुप्रीम कोर्ट
पूर्व राजघरानों की निजी संपत्ति पर लागू नहीं होगा ज्येष्ठाधिकार का नियम : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि पूर्व रियासतों के शासकों की निजी संपत्तियों के उत्तराधिकार पर ज्येष्ठाधिकार यानी केवल सबसे बड़े पुरुष उत्तराधिकारी को संपत्ति मिलने का नियम लागू नहीं होगा। ऐसी संपत्तियों का बंटवारा संबंधित परिवार के व्यक्तिगत उत्तराधिकार कानून के अनुसार किया जाएगा।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की खंडपीठ ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें कपूरथला राजघराने की निजी संपत्तियों पर ब्रिगेडियर सुखजीत सिंह को एकमात्र...

ट्रॉमा केयर जीवन के अधिकार का हिस्सा: सुप्रीम कोर्ट ने इमरजेंसी हेल्पलाइन को 112 में जोड़ने, PM RAHAT और Good Samaritan योजना लागू करने का निर्देश दिया
'ट्रॉमा केयर जीवन के अधिकार का हिस्सा': सुप्रीम कोर्ट ने इमरजेंसी हेल्पलाइन को 112 में जोड़ने, PM RAHAT और Good Samaritan योजना लागू करने का निर्देश दिया

यह मानते हुए कि नागरिकों की ट्रॉमा केयर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग है, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अंतरिम निर्देश जारी किए, जिसमें पूरे देश में इमरजेंसी रिस्पॉन्स के लिए एक साझा हेल्पलाइन नंबर '112' को चालू करना भी शामिल है।कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पूरे देश में एक समान और मज़बूत ट्रॉमा केयर सिस्टम बनाने के लिए कई अंतरिम निर्देश जारी किए। इनमें सभी इमरजेंसी हेल्पलाइन को 112 में जोड़ना, PM RAHAT कैशलेस इलाज योजना को चालू करना और Good...

मतदाता सूची में शामिल करने के लिए नागरिकता की जांच सकता है ECI, लेकिन उसका फैसला अंतिम नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट
मतदाता सूची में शामिल करने के लिए नागरिकता की जांच सकता है ECI, लेकिन उसका फैसला अंतिम नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट

चुनाव आयोग की शक्तियों के दायरे पर अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत का चुनाव आयोग (ECI) किसी व्यक्ति की नागरिकता की सीमित जांच करने के लिए अधिकृत है, ताकि यह तय किया जा सके कि वह चुनावी रोल में शामिल होने के योग्य है या नहीं; लेकिन कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस तरह के फैसले को नागरिकता के सवाल पर अंतिम नहीं माना जा सकता।यह फैसला बिहार में चुनावी रोल के चुनाव आयोग के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) को सही ठहराते हुए आया।इस प्रक्रिया के दौरान नागरिकता की स्थिति की जांच करने के आयोग के फैसले को...

BREAKING| ऑनलाइन गेमिंग पर लगा GST, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह सट्टेबाजी और जुए के ​​तौर पर टैक्सेबल
BREAKING| ऑनलाइन गेमिंग पर लगा GST, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह 'सट्टेबाजी और जुए' के ​​तौर पर टैक्सेबल

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग गतिविधियों पर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) लगाने को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया। साथ ही सट्टेबाजी और जुए के लेन-देन से पैदा होने वाले 'एक्शनेबल क्लेम' (दावों) पर CGST लगाने के खिलाफ दायर संवैधानिक और कानूनी चुनौती खारिज की।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने फैसला सुनाया कि संगठित ऑनलाइन गेमिंग गतिविधियां 'एक्शनेबल क्लेम' को जन्म देती हैं। इन गतिविधियों में पूल किए गए दांव और संभावित इनाम वाली फैंटेसी गेम्स शामिल हैं। सट्टेबाजी और जुए के लेन-देन...

S. 307 IPC | चोट की गंभीरता ही हत्या के प्रयास के लिए दोषी ठहराने के लिए काफी नहीं, जब तक कि जान लेने के इरादे का सबूत न हो: सुप्रीम कोर्ट
S. 307 IPC | चोट की गंभीरता ही हत्या के प्रयास के लिए दोषी ठहराने के लिए काफी नहीं, जब तक कि जान लेने के इरादे का सबूत न हो: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक जान लेने का आपराधिक इरादा (mens rea) साबित नहीं हो जाता, तब तक हत्या के प्रयास के लिए किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, भले ही घायल व्यक्ति को कितनी भी गंभीर चोट क्यों न लगी हो।सुप्रीम कोर्ट ने कहा,"...चोट की गंभीरता अपने आप में IPC की धारा 307 के तहत अपराध को तय करने का आधार नहीं हो सकती, जब तक कि अभियोजन पक्ष उस धारा के तहत ज़रूरी आपराधिक इरादा (mens rea) को साबित न कर दे।" जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमीकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने यह टिप्पणी करते हुए पंजाब...

BNSS S.223(1) का परंतुक अनिवार्य, आरोपी को सुने बिना संज्ञान लेना शुरू से ही अमान्य: सुप्रीम कोर्ट
BNSS S.223(1) का परंतुक अनिवार्य, आरोपी को सुने बिना संज्ञान लेना शुरू से ही अमान्य: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 223(1) का पहला परंतुक—जो किसी शिकायत मामले में संज्ञान लेने से पहले आरोपी को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य बनाता है—अनुच्छेद 21 के तहत निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार से उत्पन्न होने वाला एक मूल सुरक्षा उपाय है। इसका पालन न करने पर संज्ञान लेने का आदेश शुरू से ही अमान्य हो जाएगा।कोर्ट ने आगे स्पष्ट किया कि आरोपी को ऐसे पालन न होने से हुए नुकसान को साबित करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह दोष एक ऐसी अवैधता है जो पूरी...

क्राइम सीन का री-एक्टमेंट हर स्थिति में खुद के खिलाफ गवाही देने के अधिकार का उल्लंघन नहीं करेगा: सुप्रीम कोर्ट
क्राइम सीन का री-एक्टमेंट हर स्थिति में 'खुद के खिलाफ गवाही देने के अधिकार' का उल्लंघन नहीं करेगा: सुप्रीम कोर्ट

यह देखते हुए कि जघन्य अपराधों की जांच में 'अपराध स्थल के री-एक्टमेंट' की तकनीक को काफी अहमियत मिल रही है, सुप्रीम कोर्ट ने इस तकनीक के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि अपराध स्थल के री-एक्टमेंट को सिर्फ इसलिए असंवैधानिक बताकर पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसमें आरोपी भी शामिल होता है।कोर्ट ने साफ किया कि अपराध स्थल के री-एक्टमेंट में आरोपी की भागीदारी संविधान के अनुच्छेद 20(3) (खुद के खिलाफ गवाही देने के मौलिक अधिकार) का उल्लंघन तभी मानी जाएगी, जब इसके ज़रिए आरोपी को अपनी...

BNSS लागू होने के बाद संज्ञान लिया गया हो तो PMLA शिकायत में आरोपी की सुनवाई पहले होना ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट
BNSS लागू होने के बाद संज्ञान लिया गया हो तो PMLA शिकायत में आरोपी की सुनवाई पहले होना ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट

एक अहम फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई मजिस्ट्रेट, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के लागू होने के बाद मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, 2002 (PMLA) के तहत किसी कथित अपराध का संज्ञान लेता है तो BNSS की धारा 223(1) के पहले प्रावधान का पालन न करने पर वह संज्ञान रद्द माना जाएगा। इस प्रावधान के तहत संज्ञान लेने से पहले आरोपी को सुनवाई का मौका देना ज़रूरी है, भले ही शिकायत BNSS के लागू होने से पहले ही दायर की गई हो।जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस नोंगमीकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने...

ज़मीन मालिकों को दूसरे कानूनी फ़ायदे पाने के लिए कानूनी मुआवज़ा छोड़ने पर मजबूर नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
ज़मीन मालिकों को दूसरे कानूनी फ़ायदे पाने के लिए कानूनी मुआवज़ा छोड़ने पर मजबूर नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (20 मई) को फ़ैसला सुनाया कि मुआवज़े के कानूनी अधिकार को नागरिक अधिकारियों द्वारा लगाई गई अनुबंध की शर्तों के ज़रिए छोड़ा नहीं जा सकता। कोर्ट ने साफ़ किया कि एक बार जब कोई कानून किसी व्यक्ति को मुआवज़े का अधिकार दे देता है तो उस अधिकार को सिर्फ़ इसलिए छोड़ा हुआ नहीं माना जा सकता, क्योंकि ज़मीन मालिक ने किसी दूसरे कानूनी फ़ायदे या सुविधा को पाने की शर्त के तौर पर उसे छोड़ने पर सहमति दी थी।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की बेंच ने बृहन्मुंबई म्युनिसिपल...

BREAKING | सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देशों में बदलाव से किया इनकार, कहा- कुत्तों के काटने का खतरा बढ़ रहा है
BREAKING | सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देशों में बदलाव से किया इनकार, कहा- 'कुत्तों के काटने का खतरा बढ़ रहा है'

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने पहले के निर्देशों को वापस लेने से इनकार किया। इन निर्देशों में कहा गया कि अस्पतालों, बस स्टैंडों, स्कूलों, रेलवे स्टेशनों जैसी सार्वजनिक जगहों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को वैक्सीनेशन/नसबंदी के बाद उसी जगह पर वापस नहीं छोड़ा जाना चाहिए।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने उन कई अर्जियों को खारिज किया, जिनमें पिछले साल नवंबर में कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों में बदलाव की मांग की गई। दूसरे शब्दों में, सार्वजनिक जगहों के परिसर से...

कुत्तों को संस्थागत परिसरों में रहने का पूर्ण अधिकार नहीं, ABC नियम ऐसे परिसरों में उन्हें छोड़ने को अनिवार्य नहीं बनाते: सुप्रीम कोर्ट
कुत्तों को संस्थागत परिसरों में रहने का पूर्ण अधिकार नहीं, ABC नियम ऐसे परिसरों में उन्हें छोड़ने को अनिवार्य नहीं बनाते: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि स्कूलों, अस्पतालों, खेल परिसरों, हवाई अड्डों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों जैसे संस्थागत और प्रतिबंधित-पहुंच वाले परिसरों में पाए जाने वाले आवारा कुत्तों को 'पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023' के तहत "सड़क के कुत्ते" या "सामुदायिक कुत्ते" के रूप में नहीं माना जा सकता। इसलिए वे पकड़े जाने और नसबंदी के बाद उसी स्थान पर वापस छोड़े जाने का दावा नहीं कर सकते।कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों के पास सभी श्रेणियों के स्थानों पर रहने का कोई "अखंडनीय या पूर्ण अधिकार" नहीं है, चाहे उन...

UAPA मामलों में बेल नियम, जेल अपवाद: सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद को बेल से इनकार करने वाले फैसले पर जताई आपत्ति
UAPA मामलों में 'बेल नियम, जेल अपवाद': सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद को बेल से इनकार करने वाले फैसले पर जताई आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के मामलों में भी “बेल नियम है और जेल अपवाद” का सिद्धांत लागू होता है। अदालत ने जनवरी 2026 में दिए गए उस फैसले पर गंभीर आपत्ति जताई, जिसमें दिल्ली दंगा बड़ी साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को बेल देने से इनकार किया गया था।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की खड़नपीठ ने यह टिप्पणी सैयद इफ्तिखार अंद्राबी की जमानत याचिका मंजूर करते हुए की। अंद्राबी पिछले पांच वर्षों से कथित...

सुप्रीम कोर्ट में यूएपीए मामले की सुनवाई
UAPA में भी जमानत नियम, जेल अपवाद: सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बताया सर्वोपरि

सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) जैसे कठोर कानूनों में भी जमानत नियम है और जेल अपवाद। अदालत ने स्पष्ट किया कि UAPA की धारा 43डी(5) के तहत जमानत पर लगी कानूनी पाबंदियां संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 के तहत मिले व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को खत्म नहीं कर सकतीं।जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस बीवी नागरत्ना की खंडपीठ ने जम्मू-कश्मीर के व्यक्ति को नार्को-टेरर मामले में जमानत देते हुए यह टिप्पणी की। मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी कर रही...