मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
शिकायतकर्ता की गैरमौजूदगी में पुलिस जब्त किए गए गहनों को अनिश्चित काल तक अपने पास नहीं रख सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार (18 नवंबर) को कहा कि चोरी के आरोपी एक व्यक्ति से जब्त किए गए गहने, जिनके बिल पहली नज़र में वेरिफाइड हैं, उन्हें इस उम्मीद में पुलिस की कस्टडी में अनिश्चित काल तक नहीं रखा जा सकता कि कोई अनजान शिकायतकर्ता आकर उन पर अपना हक जताएगा।यह याचिका चोरी के आरोपी व्यक्ति ने दायर की थी, जिसमें उसने जब्त किए गए गहनों को छोड़ने के लिए उसकी अर्जी खारिज करने वाले सेशंस कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।तथ्यों के अनुसार सब इंस्पेक्टर ने बोडा पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट किया कि...
'पक्षपात एडमिनिस्ट्रेटिव कार्रवाई को खराब करता': MP हाईकोर्ट ने सीनियरिटी न देने का आदेश रद्द किया, जूनियर्स के बराबर रेगुलराइज़ेशन का निर्देश दिया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एडमिनिस्ट्रेटिव आदेश रद्द किया, जिसमें एक डेली रेट कर्मचारी को सीनियरिटी और रेगुलराइज़ेशन से मना कर दिया गया। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों ने गलत और भेदभावपूर्ण तरीके से काम किया, जो बराबरी (आर्टिकल 14) और सरकारी नौकरी में बराबर मौके (आर्टिकल 16) के संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ है।पिटीशनर श्याम वर्मा को 9 अप्रैल, 1990 को डेली रेट कर्मचारी के तौर पर नियुक्त किया गया, जबकि दो प्राइवेट रेस्पोंडेंट्स को भी 24 जुलाई, 1991 को डेली वेजर्स के तौर पर नियुक्त किया गया।जूनियर होने के...
सामान्य श्रेणी के यात्रियों को प्रीमियम श्रेणी में यात्रा करने वालों के समान सुरक्षा मानकों का अधिकार: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रेलवे से कहा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रत्येक यात्री, चाहे वह किसी भी श्रेणी में यात्रा कर रहा हो, रेल प्रशासन से सुरक्षा, देखभाल और सतर्कता के समान मानकों का हकदार है।जस्टिस हिमांशु जोशी की पीठ ने एक यात्री के भीड़भाड़ वाली ट्रेन से गिरने के कारण अपने दोनों पैर गंवाने के बाद सुरक्षित यात्रा की स्थिति सुनिश्चित करने में विफल रहने के लिए रेलवे को उत्तरदायी ठहराया।पीठ ने कहा,"यह न्यायालय यह टिप्पणी करने के लिए बाध्य है कि रेल प्रशासन को सामान्य श्रेणी में यात्रा करने वाले यात्रियों के...
संरक्षित वन्यजीवों के शिकार से पारिस्थितिक संतुलन पर गंभीर असर, सख्ती से निपटना ज़रूरी: एमपी हाईकोर्ट ने आरोपी की ज़मानत याचिका खारिज की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार, 14 नवंबर को सोन चिड़िया अभयारण्य, घटियागांव में अवैध शिकार के आरोप में गिरफ्तार एक व्यक्ति की ज़मानत याचिका खारिज की। अदालत ने कहा कि संरक्षित वन्यजीवों का शिकार न केवल कानून का गंभीर उल्लंघन है बल्कि जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन पर भी गहरा प्रभाव डालता है। इसलिए ऐसे अपराधों से कठोरता से निपटना आवश्यक है।जस्टिस मिलिंद रमेश फडके की सिंगल बेंच ने टिप्पणी की कि आरोपित कृत्य संरक्षण कानूनों के तहत संरक्षित प्रजाति के अवैध शिकार से संबंधित हैं। इस तरह के अपराध...
बिना ठोस सबूत के निर्वासन व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने डीएम का आदेश रद्द किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि मध्य प्रदेश राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 के तहत निर्वासन आदेश यंत्रवत् पारित नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह किसी भी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर गंभीर प्रतिबंध लगाता है।ऐसा करते हुए चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने निर्वासन आदेश यह देखते हुए रद्द कर दिया कि अपराध में अपराधी की तत्काल संलिप्तता दर्शाने वाले कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं।खंडपीठ ने कहा;"अभिलेख में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे, जो यह दर्शाते हों कि अपराध...
नाबालिग को बिना लाइसेंस वाहन चलाने देना बीमा पॉलिसी का मूल उल्लंघन: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि वाहन मालिक लापरवाही बरतते हुए किसी नाबालिग को बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाने की अनुमति देता है या ऐसा होने देता है तो यह बीमा पॉलिसी की मूल शर्तों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।जस्टिस हिमांशु जोशी की एकल पीठ ने कहा कि यह बड़ों का दायित्व है कि नाबालिगों को उन रास्तों पर जाने से रोका जाए, जो उनकी उम्र के अनुकूल नहीं हैं विशेष रूप से वाहन चलाने जैसे कार्य जिसके लिए परिपक्वता और कानूनी अनुमति दोनों आवश्यक हैं।यह टिप्पणी उस अपील की सुनवाई के दौरान की...
हत्या के प्रयास का अपराध दर्ज करने के लिए चोट का होना ज़रूरी नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार (11 नवंबर) को कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 307/BNS की धारा 109(1) के तहत हत्या के प्रयास का अपराध दर्ज करने के लिए चोट का होना ज़रूरी नहीं है।अदालत ने आगे स्पष्ट किया कि यदि कोई भी कार्य इस इरादे या ज्ञान के साथ किया जाता है कि इससे मृत्यु हो सकती है तो हमलावर हत्या के प्रयास का दोषी होगा।जस्टिस गजेंद्र सिंह की पीठ ने कहा;"यह स्पष्ट है कि चोट का होना IPC की धारा 307 के तहत अपराध बनाने के लिए अनिवार्य शर्त नहीं है। यदि कोई कार्य इस आशय या ज्ञान के साथ...
'नई सड़कें कुछ ही दिनों में टूट जाती हैं, जान को खतरा': इस्तेमाल की गई सामग्री की गुणवत्ता जांच को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका, नोटिस जारी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार (10 नवंबर) को जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें राज्य भर में सड़कों की भयावह स्थिति पर प्रकाश डाला गया। सड़कों में गड्ढे, दरारें और संरचनात्मक खामियां हैं, जिससे नागरिकों के लिए "नियमित यात्रा जानलेवा कष्टदायक" हो गई।राजेंद्र सिंह द्वारा दायर याचिका में संबंधित अधिकारियों को राज्य भर में सड़कों के निर्माण और मरम्मत में ठेकेदारों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री की गुणवत्ता, परीक्षण और प्रमाणन के संबंध में सख्त दिशानिर्देश बनाने और लागू करने के निर्देश...
इंदौर ट्रक हादसा मामला: एमपी हाईकोर्ट ने पुलिस आयुक्त को तलब किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार (10 अक्टूबर) को इंदौर के पुलिस आयुक्त को 19 नवंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने का निर्देश दिया। अदालत ने यह कदम तब उठाया, जब उसने पाया कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद इंदौर में नशे में वाहन चलाने और पुलिस की निष्क्रियता के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।यह मामला स्वतः संज्ञान याचिका से संबंधित है, जिसमें अदालत ने स्वतः संज्ञान लिया था। इंदौर में एक ट्रक ने व्यस्त ट्रैफिक समय के दौरान आवासीय इलाके में प्रवेश कर कई वाहनों को टक्कर मार दी...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने Congress MLA के डिफेक्शन मामले में स्पीकर को नोटिस जारी किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार (7 नवंबर) को कांग्रेस विधायक (Congress MLA) उमंग सिंघार की उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने बीजेपी विधायक निर्मला सपरे को दलबदल के आधार पर अयोग्य घोषित करने की मांग की।याचिका में आरोप लगाया गया कि 2023 विधानसभा चुनाव में बीना से विधायक चुने जाने के बाद निर्मला सपरे ने स्वेच्छा से कांग्रेस पार्टी की सदस्यता छोड़ दी और बीजेपी में शामिल हो गईं, जो संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत स्पष्ट रूप से 'डिफेक्शन' की श्रेणी में आता है। सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपील दाखिल करने में राज्य सरकार के 'सुस्त रवैये' पर फटकार लगाई, 400 दिनों की देरी माफ करने से इनकार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की वह अपील खारिज कर दी जिसमें 400 से अधिक दिनों की देरी को माफ (condone) करने की मांग की गई थी। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार अपने अधिकारियों के सुस्त और गैर-जिम्मेदार रवैये के प्रति बिल्कुल भी गंभीर नहीं है और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही।जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की खंडपीठ ने कहा — “वर्तमान देरी माफी आवेदन में भी राज्य सरकार की ओर से ऐसा कोई संकेत नहीं है जिससे लगे कि वे अपने अधिकारियों के सुस्त और लापरवाह रवैये के प्रति गंभीर...
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रत्यारोपित 253 पेड़ों की जीपीएस-टैग वाली तस्वीरें मांगी, कहा- तस्वीरें दिखाती हैं कि पेड़ 'पूरी तरह काटे गए, लगाए नहीं गए
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कथित रूप से 'प्रत्यारोपित किए गए 253 पेड़ों की जीपीएस लोकेशन के साथ तस्वीरें पेश करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। न्यायालय ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद मौजूदा तस्वीरों से पता चलता है कि इनमें से किसी भी पेड़ को प्रत्यारोपित नहीं किया गया है,बल्कि उन्हें पूरी तरह से काट दिया गया है।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने यह आदेश तब पारित किया जब वह एक समाचार रिपोर्ट पर लिए गए स्वत: संज्ञान के मामले की सुनवाई कर रही थी। इस...
"फिल्म काल्पनिक है": शाह बानो की बेटी की फिल्म 'हक' की रिलीज़ पर रोक लगाने वाली याचिका मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने खारिज की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शाह बानो की बेटी द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने फिल्म “हक” (Haq) की रिलीज़ पर रोक लगाने की मांग की थी। अदालत ने कहा कि यह फिल्म स्पष्ट रूप से काल्पनिक और नाटकीय रूपांतरण (fictional and dramatized adaptation) है, जो किताब “Bano: Bharat Ki Beti” पर आधारित है और 1985 के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले “Mohd. Ahmad Khan v. Shah Bano Begum” से प्रेरित है। जस्टिस प्रणय वर्मा ने कहा कि फिल्म के डिस्क्लेमर में यह साफ लिखा है कि यह एक काल्पनिक रचना है और...
वकीलों के सामूहिक बहिष्कार पर मद्रास हाईकोर्ट का कड़ा रुख: कहा- बार एसोसिएशन ट्रेड यूनियन नहीं, किसी के प्रतिनिधित्व पर रोक असंवैधानिक
मद्रास हाईकोर्ट ने बार एसोसिएशनों द्वारा सामूहिक बहिष्कार और किसी पक्ष को कानूनी प्रतिनिधित्व से वंचित करने की प्रथा पर सख्त टिप्पणी की। जस्टिस बी. पुगालेंधी ने स्पष्ट किया कि कोई भी बार एसोसिएशन या वकीलों का समूह यह तय नहीं कर सकता कि अदालत में किसे बचाया या पेश किया जाए। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को न्यायालय में प्रतिनिधित्व का अधिकार कोई विशेष अनुग्रह नहीं बल्कि यह संविधान द्वारा प्रदत्त एक मौलिक गारंटी है और इस अधिकार में हस्तक्षेप कानून के शासन की जड़ पर प्रहार है।जस्टिस पुगालेंधी ने...
शिकार के आरोप में व्यक्ति को अग्रिम जमानत, हाईकोर्ट ने कहा- भागने की संभावना नही
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत प्रदान की, जिस पर वन्यजीवों का कथित रूप से शिकार करने और उनके शरीर के अंगों को बिना किसी वैध अनुमति के रखने का आरोप है। यह FIR वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत दर्ज की गई थी जिसमें आरोपी पर एक मोर और खरगोश सहित वन्यजीवों का शिकार करने का आरोप है।जस्टिस मिलिंद रमेश फाडके की एकल पीठ ने मंगलवार (4 नवंबर) को इस मामले में आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले के समग्र तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के साथ ही, रिकॉर्ड पर...
नगर परिषद अध्यक्ष से आपत्तिजनक वीडियो के जरिए शोषण के आरोपी को एमपी हाईकोर्ट से जमानत
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को जमानत दे दी है, जिस पर एक नगर परिषद अध्यक्ष महिला के साथ बलात्कार, जबरन वसूली (extortion) और आपत्तिजनक वीडियो व फोटो के जरिए धमकाने (criminal intimidation) का आरोप है। अदालत ने कहा कि दोनों पक्ष एक-दूसरे से भलीभांति परिचित थे।जस्टिस देवनारायण मिश्रा की एकल पीठ ने कहा — “रिकॉर्ड पर लाए गए तथ्यों और परिस्थितियों तथा आवेदक के वकील द्वारा प्रस्तुत सामग्री को देखने से स्पष्ट है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते थे। इसलिए, मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बिना मुद्दे तय किए और साक्ष्य दर्ज किए मुस्लिम दंपत्ति के बीच तलाक की घोषणा करने पर फैमिली कोर्ट की आलोचना की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश पर आश्चर्य और हैरानी व्यक्त की, जिसमें बिना मुद्दे तय किए और साक्ष्य दर्ज किए मुस्लिम महिला को उसके पति से तलाक की घोषणा कर दी गई।जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने कहा;"हम इस बात से आश्चर्यचकित और स्तब्ध हैं कि फैमिली कोर्ट ने सीपीसी के आदेश VII नियम 11 के तहत मामले को कैसे लिया। प्रतिवादी/वादी (पति) को राहत दी, जो मुद्दे तय करने और साक्ष्य दर्ज करने के बाद ही दी जानी चाहिए थी। तलाक की घोषणा प्राप्त करके मुकदमा दायर...
'हक़' फ़िल्म की रिलीज के खिलाफ दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला
शाह बानो की बेटी ने मंगलवार (4 नवंबर) को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में कहा कि यामी गौतम धर और इमरान हाशमी अभिनीत फिल्म 'हक़' उनकी माँ के व्यक्तित्व अधिकारों को प्रभावित करती है, उनकी छवि को अपमानजनक तरीके से दर्शाती है और इसे रिलीज़ नहीं किया जाना चाहिए।निर्माताओं और सेंसर बोर्ड सहित सभी पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस प्रणय वर्मा ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।यह फिल्म 7 नवंबर को रिलीज़ होने वाली है और कथित तौर पर अहमद खान बनाम शाह बानो बेगम (1985) के ऐतिहासिक फैसले से प्रेरित है। इस फैसले...
आपसी विश्वास सुनहरा धागा: एमपी हाईकोर्ट ने झूठे आरोपों को क्रूरता मानते हुए पति को दी तलाक की अनुमति
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने वैवाहिक संबंध में आपसी विश्वास (Mutual Trust) को सुनहरा धागा (Golden Thread) बताते हुए टिप्पणी की कि जब एक जीवनसाथी दूसरे पर बेबुनियाद और मानहानिकारक आरोप लगाता है तो यह विश्वास टूट जाता है। कोर्ट ने पत्नी द्वारा लगाए गए झूठे आरोपों को क्रूरता मानते हुए और लंबे समय तक परित्याग (Desertion) के आधार पर पति को तलाक की मंजूरी दी।कोर्ट ने कहा,"वैवाहिक संबंध में आपसी विश्वास वह सुनहरा धागा है, जो विवाहित जोड़ों के जीवन में स्नेह और प्रशंसा बुनता है। जब एक पक्ष दूसरे पर बेबुनियाद...
झूठे आरोपों से टूटता है वैवाहिक विश्वास: एमपी हाईकोर्ट ने दिया पति को तलाक की मंजूरी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पति को क्रूरता और परित्याग (Cruelty and Desertion) के आधार पर तलाक देने की अनुमति दी है। अदालत ने यह टिप्पणी की कि वैवाहिक संबंधों में पारस्परिक विश्वास एक “स्वर्ण सूत्र” (golden thread) की तरह होता है, जो तब कमजोर पड़ जाता है जब एक जीवनसाथी दूसरे पर झूठे और मानहानिकारक आरोप लगाता है।जस्टिस विशाल धगत और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने कहा— “वैवाहिक संबंधों में पारस्परिक विश्वास वह स्वर्ण सूत्र है जो पति-पत्नी के जीवन में स्नेह और सम्मान को बुनता है, और जब एक पक्ष...
















