मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

शादी का झांसा देकर मुवक्किल से दुष्कर्म का आरोप: वकील को अग्रिम जमानत से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का इनकार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर अपनी मुवक्किल से दुष्कर्म करने के आरोपी वकील को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया। जस्टिस गजेंद्र सिंह की पीठ ने जांच के दौरान सामने आए होटल के अभिलेख, पीड़िता के माता-पिता और दोस्तों के बयान तथा FIR समेत अन्य सामग्री को देखते हुए राहत देने से इनकार किया।अभियोजन के अनुसार पीड़िता कानूनी सलाह लेने के लिए आरोपी वकील के संपर्क में आई थी। आरोप है कि वकील ने खुद को अविवाहित बताते हुए उससे शादी का प्रस्ताव रखा। शुरुआत में पीड़िता ने प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया...

SI-ASI पर विभागीय कार्रवाई और वेतनवृद्धि रोकने का अधिकार एसपी के पास: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि पुलिस अधीक्षक को सब इंस्पेक्टर और असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने, संयुक्त जांच कराने और वेतनवृद्धि रोकने जैसी सजा देने का अधिकार है।जस्टिस दीपक खोट की पीठ ने कहा कि मध्य प्रदेश पुलिस विनियम के विनियम 221 के तहत पुलिस अधीक्षक को यह अधिकार प्राप्त है।यह मामला पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर के पद पर वर्ष 1983 में सेवा शुरू करने वाले लज्जा शंकर मिश्रा से जुड़ा था। वह आगे चलकर इंस्पेक्टर और फिर डिप्टी पुलिस अधीक्षक के...

26 साल का कानूनी विवाद: अगर पहले का फैसला अधूरा रहा हो तो रेस ज्यूडिकाटा लागू नहीं होगा- एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि CPC की धारा 11 के तहत 'रेस ज्यूडिकाटा' का सिद्धांत वहां लागू नहीं होगा जहां विचार के लिए भेजी गई कार्यवाही बिना फैसले के रह गई और मामले का निपटारा अधूरा रहा। [2026 LiveLaw (MP) 339]अपीलकर्ता को नगर निगम के राजस्व विभाग में दिहाड़ी कर्मचारी के तौर पर नियुक्त किया गया, लेकिन उसकी सेवाएं 'गैर-कानूनी' तरीके से खत्म कर दी गईं। 1999 में हाईकोर्ट में दायर उसकी रिट याचिका पर मामले को विचार के लिए कलेक्टर के पास वापस भेजा गया, लेकिन उन्होंने आज तक मामले का निपटारा नहीं...

फर्जी दस्तावेज के जरिए मिली सरकारी नौकरी पर नियुक्ति का कोई पक्का अधिकार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ग्राम रोजगार सहायक की नियुक्ति रद्द करने का आदेश बरकरार रखते हुए कहा कि फर्जी या जालसाजी किए गए सरकारी अभिलेखों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले व्यक्ति को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। अदालत ने कहा कि नियुक्ति की नींव ही धोखाधड़ी पर आधारित हो तो उस पर कोई वैध अधिकार कायम नहीं हो सकता।जस्टिस विवेक कुमार सिंह की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने निर्धारित अंतिम तारीख के बाद आवेदन स्वीकार कराने के लिए ग्राम पंचायत के रजिस्टर में हेरफेर किया था। ऐसे में उसकी...

बैंक अकाउंट में ठगी की रकम आना भर अपराध में संलिप्तता साबित नहीं करता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के बैंक खाते में कथित ठगी की रकम जमा हो जाना, अपने आप में यह निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त नहीं है कि वह व्यक्ति अपराध में जानबूझकर शामिल था।कोर्ट ने 78 वर्षीय रिटायर्ड IFS अधिकारी और पूर्व सैनिक को ठगी तथा जालसाजी के मामले में अग्रिम जमानत दी।जस्टिस अजय कुमार निरंकारी ने कहा कि आरोपी ने बैंक खाते में रकम जमा होने के संबंध में स्पष्ट स्पष्टीकरण दिया और उसके फरार होने, सबूतों से छेड़छाड़ करने या गवाहों को प्रभावित करने की आशंका का कोई ठोस आधार...

रेलवे के 4.47 लाख रुपये के गबन के आरोप में महिला अधिकारी को अग्रिम जमानत नहीं, हाईकोर्ट ने कहा- जांच में हिरासत में पूछताछ जरूरी हो सकती है

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रेलवे की मुख्य बुकिंग पर्यवेक्षक के पद पर कार्यरत महिला कर्मचारी को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया। महिला पर अन्य रेलवे कर्मचारियों के साथ मिलकर टिकट बिक्री से प्राप्त 4.47 लाख रुपये के रेलवे राजस्व के कथित गबन का आरोप है।जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की पीठ ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और आरोपी की सटीक भूमिका का पता लगाया जाना बाकी है। ऐसे में हिरासत में लेकर पूछताछ की आवश्यकता से इनकार नहीं किया जा सकता।मामला रेलवे के एक बुकिंग कार्यालय में टिकट बिक्री से प्राप्त...

पैकेज/कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस पॉलिसी में अनलिमिटेड पैसेंजर लायबिलिटी तब तक कवर नहीं होती, जब तक पॉलिसी में ऐसा प्रावधान न हो: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि पैकेज या कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस पॉलिसी अपने आप में अनलिमिटेड लायबिलिटी (असीमित दायित्व) को कवर नहीं करती है, जिसमें वाहन में सवार यात्रियों के लिए अनलिमिटेड रिस्क (असीमित जोखिम) भी शामिल है, जब तक कि पॉलिसी में ऐसा प्रावधान न किया गया हो। [2026 LiveLaw (MP) 334]यह देखते हुए कि मालिक ने अनलिमिटेड रिस्क को कवर करने के लिए ज़्यादा प्रीमियम का भुगतान नहीं किया, जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने कहा:"आज की कानूनी स्थिति यह है कि इंश्योरेंस कंपनी की लायबिलिटी इंश्योरेंस...

पीड़िता के मुकरने से ही जमानत का आधार नहीं बनता: मेडिकल रिपोर्ट में यौन अपराध की पुष्टि तो एमपी हाईकोर्ट ने जमानत ठुकराई

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की के अपहरण और दुष्कर्म के आरोपी की नियमित जमानत याचिका खारिज की।अदालत ने कहा कि केवल पीड़िता के मुकदमे के दौरान अपने बयान से मुकर जाने से आरोपी को जमानत का अधिकार नहीं मिल जाता, खासकर तब जब मेडिकल साक्ष्य दुष्कर्म की पुष्टि करते हों।जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की पीठ ने कहा कि आपराधिक मुकदमा सत्य की तलाश की प्रक्रिया है। आरोपी या पीड़िता में से किसी को भी झूठ या अन्य तरीकों से मुकदमे की प्रक्रिया को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।मामले के अनुसार नाबालिग...

MP हाईकोर्ट: बार एसोसिएशन चुनाव में हार के सदमे में वकील नहीं पहुंचे, कोर्ट ने टाला मामला

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (19 अगस्त) को एक मामले की सुनवाई स्थगित कर दी, जब अदालत ने टिप्पणी की कि मामले में बहस करने वाले अधिवक्ता हाईकोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव में हार के बाद लगे 'सदमे' के कारण आज उपलब्ध नहीं हैं।मामला सुनवाई के लिए आया तो अपीलकर्ता की ओर से मौजूद दूसरे अधिवक्ता ने adjournment की मांग की। इस पर जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की पीठ ने टिप्पणी की:“ऐसा प्रतीत होता है कि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव में हार के कारण सदमे में होने की वजह से बहस करने वाले...

अगर कर्मचारी आरोपों से इनकार करता है तो छोटी सज़ा के मामले में भी विभागीय जांच ज़रूरी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी अपने ऊपर लगे आरोपों (जो तथ्यों पर आधारित हों) से इनकार करता है तो उसके खिलाफ़ नियमित विभागीय जांच होनी चाहिए। ऐसे कर्मचारी को अपनी बात रखने या सुनवाई का मौका दिया जाना चाहिए, भले ही उसे छोटी सज़ा ही क्यों न मिल रही हो। [2026 LiveLaw (MP) 331]जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की बेंच ने कहा:"छोटी सज़ा के मामले में भी आरोपी कर्मचारी को अपनी बात कहने या अपने ऊपर लगे आरोपों के संबंध में अपना स्पष्टीकरण देने का मौका दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, अगर आरोप...

लेबर कोर्ट के फैसले का पालन न करना आपराधिक अपराध: एमपी हाईकोर्ट ने देर से नौकरी पर बहाल करने की अवधि के लिए वेतन का आदेश दिया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि लेबर कोर्ट के फैसले में तय समय-सीमा का पालन न करना 'इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट, 1947' की धारा 29 के तहत एक आपराधिक अपराध है। [2026 LiveLaw (MP) 332]जस्टिस विवेक जैन की बेंच ने गौर किया कि लेबर कोर्ट ने कर्मचारी को एक महीने के भीतर नौकरी पर बहाल करने का निर्देश दिया, जिसमें एमपी रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन ने देरी की। अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने के बजाय, एग्जीक्यूटिंग कोर्ट ने कार्यवाही बंद की।एग्जीक्यूटिंग कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए बेंच ने...

किरायेदार की बेदखली पर एमपी हाईकोर्ट का अहम फैसला: मकान मालिक को अपनी पसंद के शहर में रहने की जरूरत साबित करने की आवश्यकता नहीं

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने किरायेदार की बेदखली के खिलाफ दायर अपील खारिज करते हुए कहा है कि यदि मकान मालिक अपनी वास्तविक और bona fide आवश्यकता साबित कर देता है, तो उसे यह बताने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता कि उसने रहने के लिए कोई विशेष शहर क्यों चुना है।जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी की पीठ ने कहा कि मकान मालिक और उसके परिवार के सदस्य अपनी जरूरत के “best judges” हैं और उनकी पसंद को अनावश्यक रूप से चुनौती नहीं दी जा सकती।मामला इंदौर के खजराना स्थित मकान से जुड़ा था। मकान मालिक ने अपने बड़े बेटे की पढ़ाई...

अनुकंपा नियुक्ति पॉलिसी में लड़के-लड़की के बीच फ़र्क नहीं किया जाता, पहला बच्चा का मतलब- सबसे पहले पैदा हुआ बच्चा: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य की अनुकंपा आधार पर नौकरी देने की पॉलिसी में मृतक कर्मचारी के बेटे और बेटी के बीच कोई भेदभाव नहीं किया जाता है और यह सख्ती से 'पहले बच्चे' पर लागू होती है। [2026 LiveLaw (MP) 325]जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की डिवीज़न बेंच ने मृतक कर्मचारी के इकलौते बेटे की हमदर्दी के आधार पर नौकरी की मांग को खारिज करते हुए कहा:"ऊपर बताई गई क्लॉज़ (धारा) लड़कियों और लड़कों के बीच कोई भेदभाव नहीं करती या कोई अलग वर्ग नहीं बनाती; यह सख्ती से 'पहले बच्चे' का...

अपराध का मामला दर्ज होना हथियार लाइसेंस निलंबित करने का आधार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस आशंका के आधार पर किसी व्यक्ति का हथियार लाइसेंस निलंबित नहीं किया जा सकता कि लाइसेंसी हथियार का संभावित रूप से दुरुपयोग कर सकता है। अदालत ने कहा कि लाइसेंस निलंबित करने से पहले सक्षम प्राधिकारी को हथियार अधिनियम, 1959 की धारा 17 के तहत स्वतंत्र और ठोस कारणों के आधार पर संतुष्ट होना आवश्यक है।जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की पीठ ने कहा कि केवल किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने या उसके लंबित होने के आधार पर लाइसेंस निलंबित नहीं किया जा सकता। प्राधिकारी...

बेटे में सौतेला बेटा भी शामिल, मकान मालिक सौतेले बेटे की असली ज़रूरत के आधार पर किरायेदार को बेदखल कर सकता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि एक्ट की धारा 2 के तहत परिवार के सदस्य की परिभाषा में सौतेला बेटा भी शामिल है। इसलिए एमपी अकोमोडेशन कंट्रोल एक्ट, 1961 की धारा 12(1) के तहत बेदखली के मकसद से उसे 'बेटा' ही माना जाएगा। [2026 LiveLaw (MP) 323]किरायेदार के खिलाफ बेदखली के मामले में ट्रायल कोर्ट के आदेश को बहाल करते हुए जस्टिस आशीष श्रोती की बेंच ने कहा कि मकान मालिक खुद के लिए या परिवार के किसी अन्य सदस्य (जिसमें सौतेला बेटा भी शामिल है) की असली ज़रूरत के आधार पर किरायेदार को बेदखल करने की मांग कर सकता...

IPL सट्टेबाजी मामले में FIR रद्द करने से MP हाईकोर्ट का इनकार, कहा- सह-आरोपी को मिली राहत का लाभ अपने आप नहीं मिलेगा

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कथित IPL सट्टेबाजी से जुड़े मामले में एक आरोपी के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि केवल इसलिए आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती क्योंकि सह-आरोपी की FIR पहले रद्द की जा चुकी है।जस्टिस हिमांशु जोशी ने कहा कि Parity के सिद्धांत को यांत्रिक तरीके से लागू नहीं किया जा सकता, जब आरोपियों की भूमिका और उनके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों का अलग-अलग मूल्यांकन जरूरी हो।मामले में पुलिस ने कथित अवैध IPL सट्टेबाजी की सूचना पर छापेमारी की थी। जांच के दौरान करीब ₹21 लाख नकद...