मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
OBC आरक्षण कोटा में बढ़ोतरी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 27 अप्रैल से सुनवाई शुरू करेगा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि 2019 के उस अध्यादेश से जुड़े सभी मामलों को, जिसमें OBC आरक्षण कोटा बढ़ाया गया, 27 अप्रैल, 2026 से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।यह विवाद राज्य सरकार द्वारा मार्च 2019 में पारित एक अध्यादेश से शुरू हुआ, जिसमें पोस्टग्रेजुएट मेडिकल दाखिलों में OBC आरक्षण को बढ़ाया गया। इससे पहले, OBC श्रेणी के लिए आरक्षण 14% था, जिसे बढ़ाकर 27% कर दिया गया।इस बढ़ोतरी के परिणामस्वरूप, कुल आरक्षण 50% की उस सीमा से अधिक हो गया, जो सुप्रीम कोर्ट ने 'इंद्रा...
रिश्वत में दोषी कर्मचारी पर विभागीय जांच जरूरी नहीं, बर्खास्तगी बरकरार: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि रिश्वत के मामले में दोषसिद्ध सरकारी कर्मचारी के खिलाफ विस्तृत विभागीय जांच की आवश्यकता नहीं होती। अदालत ने एक पूर्व सरकारी कर्मचारी की सेवा से बर्खास्तगी के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया।जस्टिस विशाल धगत की पीठ ने कहा कि जब किसी कर्मचारी को आपराधिक मामले में पूरा अवसर मिल चुका हो और उसे दोषी ठहराया जा चुका हो, तो उसी तथ्यों पर दोबारा विभागीय जांच कराना सार्वजनिक हित और प्रशासनिक दक्षता के विपरीत होगा।मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता को...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने Congress MLA के खिलाफ 9 आपराधिक मामले 'छिपाने' वाली याचिका खारिज करने से इनकार किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने BJP नेता कृष्ण पति त्रिपाठी द्वारा दायर चुनावी याचिका खारिज करने से इनकार किया। यह याचिका रीवा की सेमरिया सीट से कांग्रेस के अभय कुमार मिश्रा के चुनाव के खिलाफ दायर की गई, जिसमें उन पर पहली नज़र में नौ आपराधिक मामले छिपाने का आरोप लगाया गया।जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने टिप्पणी की,"इस तरह की जानकारी छिपाने और दबाने से वोटर एक सोच-समझकर और सही चुनाव करने से वंचित रह जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप, यह उम्मीदवार की ओर से मतदाताओं के चुनाव करने के अधिकार में प्रत्यक्ष या...
बसों में एक ही दरवाजा यात्रियों की जान के लिए खतरा: हाईकोर्ट ने दो दरवाजे अनिवार्य करने का आदेश दिया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यात्री सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य की सभी स्टेज कैरिज और टूरिस्ट बसों में अलग-अलग प्रवेश और निकास द्वार अनिवार्य करने का निर्देश दिया।अदालत ने क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण को 45 दिनों के भीतर नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।जस्टिस विवेक जैन की पीठ ने कहा कि बसों में एक ही दरवाजा होना यात्रियों की सुरक्षा के साथ गंभीर समझौता है। खासकर आग या दुर्घटना की स्थिति में।अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा,“यह अत्यंत खेदजनक स्थिति है कि अनेक वातानुकूलित...
'गृहणी परिवार को कई तरह की सेवाएं देती है, वह अकुशल मज़दूर नहीं': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दुर्घटना में महिला की मौत के बाद मुआवज़ा बढ़ाया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दुर्घटना में जान गंवाने वाली महिला के परिजनों को दिए गए मुआवज़े की राशि बढ़ाई। कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि गृहणी के योगदान को किसी अकुशल मज़दूर के काम के बराबर नहीं माना जा सकता, क्योंकि वह बिना किसी तय समय या छुट्टी के परिवार के लिए कई तरह की सेवाएं करती है।कोर्ट ने कहा कि उचित मुआवज़ा तय करते समय इस बात को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने मुआवज़े की राशि बढ़ाकर 12 लाख रुपये से ज़्यादा कर दी।जस्टिस हिरदेश की बेंच ने यह फ़ैसला सुनाया:"आय के आकलन के संबंध...
'गंभीर चिंता का विषय': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ओवरलोडेड गाड़ियों में अवैध रेत परिवहन में बढ़ोतरी पर चिंता जताई, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की, जिसमें अवैध रूप से रेत ले जा रही एक गाड़ी की अंतरिम कस्टडी (अस्थायी हिरासत) देने से इनकार करने के फैसले को चुनौती दी गई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि रेत अक्सर ओवरलोडेड और खराब हालत वाली गाड़ियों में ले जाई जाती है, जिन्हें अधिकारी से बचने के लिए अक्सर तेज़ी से चलाया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं और जान-माल का नुकसान हो रहा है।ऐसा करते हुए कोर्ट ने हाल के दिनों में 'रेत माफिया' के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई और इसे सार्वजनिक चिंता का एक...
सिर्फ एक ही पूर्वज होना पर्याप्त नहीं, संपत्ति को संयुक्त परिवार की नहीं माना जा सकता: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने संपत्ति विवाद से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया कि केवल यह तथ्य कि सभी पक्ष एक ही पूर्वज से संबंधित हैं, अपने आप में यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि संपत्ति संयुक्त परिवार की है।जस्टिस विवेक जैन की पीठ ने कहा कि संयुक्त पारिवारिक संपत्ति होने का दावा करने वाले पक्ष पर यह जिम्मेदारी है कि वह इसका प्रथम दृष्टया प्रमाण प्रस्तुत करे।अदालत ने कहा,“केवल इसलिए कि मूल पूर्वज महादेव थे, यह नहीं माना जा सकता कि उनके वंशजों के नाम दर्ज कोई भी भूमि संयुक्त परिवार की...
Section 166 MV Act | दोषी वाहन के ड्राइवर को पक्षकार न बनाने से दावा दोषपूर्ण और सुनवाई योग्य नहीं रहता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि दोषी वाहन के ड्राइवर को पक्षकार न बनाने से मोटर दुर्घटना दावा याचिका दोषपूर्ण और सुनवाई योग्य नहीं रह जाती है।जस्टिस हिरदेश की बेंच ने यह टिप्पणी की:"...मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत दायर दावा याचिका में दोषी वाहन का ड्राइवर आवश्यक पक्षकार होता है। ड्राइवर को पक्षकार न बनाने से दावा याचिका दोषपूर्ण हो जाती है और सुनवाई योग्य नहीं रहती।"राज्य सरकार ने ग्वालियर के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (Motor Accidents Claims Tribunal) द्वारा दिए गए फैसले को चुनौती...
यूनिवर्सिटी शिक्षक 'पब्लिक ऑफिस' नहीं, क्वो वारंटो याचिका नहीं चलेगी: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यूनिवर्सिटी में शिक्षक, प्रोफेसर या रीडर 'पब्लिक ऑफिस' के दायरे में नहीं आते इसलिए उनके खिलाफ क्वो वारंटो याचिका दायर नहीं की जा सकती।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की।मामला एक यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस के लेक्चरर की नियुक्ति को चुनौती देने से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि नियुक्त व्यक्ति के पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यता नहीं थी और उसने गलत प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए।अदालत ने पहले यह स्पष्ट किया कि...
LPG संकट पर वीडियो डालने पर शिक्षक के निलंबन पर रोक, एमपी हाईकोर्ट ने कहा- बिना सोच-समझ के लिया गया फैसला
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी प्राथमिक शिक्षक के निलंबन पर रोक लगाते हुए कहा कि यह आदेश बिना उचित विचार किए और जल्दबाजी में पारित किया गया प्रतीत होता है।जस्टिस आशीष श्रोति की पीठ ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को निर्देश दिया कि वह पूरे मामले पर नए सिरे से विचार करें और तथ्यों के आधार पर निर्णय लें।मामला उस शिक्षक से जुड़ा है, जिस पर आरोप है कि उसने 13 मार्च, 2026 को फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें एलपीजी गैस की कमी पर चर्चा की गई। प्रशासन का आरोप था कि इस वीडियो से समाज में अशांति फैल...
'कानूनी शादी में यौन संबंध के लिए सहमति का कोई महत्व नहीं': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पति के खिलाफ IPC की धारा 377 के तहत आरोप रद्द किए
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक पति की याचिका आंशिक रूप से स्वीकार की, जिसमें उसने यौन शोषण और दहेज उत्पीड़न के आरोप में दर्ज FIR रद्द करने की मांग की। कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि बलात्कार से जुड़े प्रावधानों में दी गई छूटों को देखते हुए एक पति द्वारा अपनी वयस्क पत्नी के साथ किया गया कोई भी यौन संबंध या यौन कृत्य बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता। इसलिए शादी के दायरे में सहमति का पहलू कानूनी तौर पर महत्वहीन है।जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की बेंच ने यह टिप्पणी की:"...IPC की धारा 375 के अपवाद 2 (Exception 2)...
डोमिसाइल में तकनीकी गलती पर उम्मीदवार को नहीं किया जा सकता बाहर: एमपी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एसएससी अभ्यर्थी को राहत देते हुए कहा कि डोमिसाइल से जुड़ी एक मामूली तकनीकी त्रुटि को तथ्यों को छिपाने के समान नहीं माना जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि सख्त नियमों का यांत्रिक तरीके से प्रयोग कर किसी योग्य उम्मीदवार का भविष्य खराब नहीं किया जा सकता।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की पीठ ने कर्मचारी चयन आयोग द्वारा अभ्यर्थी की उम्मीदवारी खारिज करने का आदेश रद्द किया।मामला कांस्टेबल (GD) भर्ती परीक्षा 2018 से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने ऑनलाइन आवेदन भरा था, लेकिन साइबर कियोस्क पर फॉर्म...
22 बार सुनवाई के बावजूद आदेश की अवहेलना, एमपी हाईकोर्ट ने अधिकारियों को दो माह की सजा सुनाई
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालत के आदेश का बार-बार पालन न करने पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराते हुए दो माह की साधारण कारावास की सजा सुनाई।अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि मामला 22 बार सूचीबद्ध हुआ फिर भी आदेश का पालन नहीं किया गया।जस्टिस प्रणय वर्मा की पीठ ने कहा,“याचिका 22वीं बार सूचीबद्ध हुई और अब तक आदेश का पालन नहीं किया गया। 06.02.2026 के आदेश के अनुसार प्रतिवादी अवमानना के दोषी है। उन्हें दो माह के साधारण कारावास की सजा दी जाती है।”हालांकि, अदालत...
शराब का कारोबार मौलिक अधिकार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने डिस्टिलरी के लाइसेंस सस्पेंड करने का फैसले सही ठहराया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोम डिस्टिलरीज़ के कई लाइसेंस सस्पेंड करने के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि शराब का कारोबार कोई मौलिक अधिकार नहीं है और यह सख्त कानूनी नियमों के अधीन है।जस्टिस विवेक अग्रवाल की बेंच ने कहा:"पहली बात तो यह कि शराब का कारोबार कोई मौलिक अधिकार नहीं है। दूसरी बात यह कि जब आनुपातिकता (Proportionality) की कसौटी पर इसे परखा जाता है तो उस आधार पर भी अथॉरिटी का फैसला एक्साइज एक्ट और उसके तहत बनाए गए नियमों के दायरे में है, इसलिए इसमें कोई गलती नहीं निकाली जा...
बार निकायों में 30% महिला प्रतिनिधित्व आदेश का पालन न करने के कारण रीवा जिला बार एसोसिएशन के चुनाव पर रोक
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार (25 मार्च) को अंतरिम आदेश में रीवा जिला बार एसोसिएशन को अगले आदेश तक चुनाव कराने से रोक दिया। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के जनवरी के उस फैसले का पालन न करने का हवाला दिया, जिसमें बार एसोसिएशन की कार्यकारी समिति में 30% महिलाओं के लिए आरक्षण अनिवार्य किया गया।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने निर्देश दिया:"उक्त चुनाव के लिए मतदान 25/3/2026 को होना निर्धारित है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी अनिवार्य निर्देशों को ध्यान में रखते हुए - यह सुनिश्चित करने...
पूरी तरह बेतुका: मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने टाइगर कॉरिडोर में सीमित रास्तों पर उठाए सवाल, अधिकारियों को किया तलब
मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने NH-46 के चौड़ीकरण परियोजना में टाइगर कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित सीमित वन्यजीव मार्गों पर कड़ा सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह बेतुका करार दिया।कोर्ट ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड के सीनियर अधिकारियों को तलब कर विस्तृत जवाब मांगा।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने पाया कि 16 किलोमीटर लंबे महत्वपूर्ण वन्यजीव कॉरिडोर में केवल लगभग 1.2 से 1.5 किलोमीटर हिस्से में ही पशुओं के लिए मार्ग प्रस्तावित किया गया, जबकि पहले से बना एक...
Hindu Marriage Act के तहत जनजातियों को बहुविवाह की खुली छूट नहीं: मध्य प्रदेश हाइकोर्ट का स्पष्ट फैसला
मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act) की धारा 2(2) के तहत अनुसूचित जनजातियों को दी गई छूट का मतलब यह नहीं है कि वे बिना किसी परंपरा के बहुविवाह को उचित ठहरा सकें।जस्टिस विवेक जैन की पीठ ने कहा कि यह प्रावधान केवल जनजातीय परंपराओं और मान्यताओं की रक्षा के लिए है, न कि बहुविवाह जैसे प्रथाओं को मनमाने ढंग से अपनाने की अनुमति देने के लिए।मामला मुन्नी बाई द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था, जिसमें उसने अपने पति की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार...
धारा 41A CrPC के नोटिस का पालन होने पर सामान्यतः गिरफ्तारी नहीं: पुलिस कांस्टेबल भर्ती घोटाले में आरोपी को अग्रिम जमानत—मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में कथित धांधली मामले में एक आरोपी को अग्रिम जमानत प्रदान की है। आरोपी पर अभ्यर्थियों और प्रतिरूप (इम्पर्सोनेटर) व्यक्तियों के बीच बिचौलिये की भूमिका निभाकर अवैध चयन में सहायता करने का आरोप था।जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने कहा कि धारा 41A CrPC (अब BNSS की धारा 35(3)) के तहत जारी नोटिस का पालन करने पर सामान्यतः गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपी जांच में सहयोग करता है, तो उसे गिरफ्तार करना...
पैसे लेकर नौकरी का भरोसा देना धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (18 मार्च) को एक व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी (IPC की धारा 420) के आरोप में दी गई सज़ा बरकरार रखी। इस व्यक्ति ने नीमच के पूर्व कलेक्टर होने का ढोंग किया और नौकरी के इच्छुक लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का झूठा भरोसा देकर उनसे धोखे से 2 लाख रुपये प्रति व्यक्ति ऐंठ लिए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि उसका यह कृत्य धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है, न कि आपराधिक विश्वासघात की।जस्टिस गजेंद्र सिंह की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा,"सरकारी दफ्तरों में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर स्टूडेंट्स...
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने नवोदय विद्यालयों में एडमिशन में EWS कोटे को शामिल न करने की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार (17 मार्च) को एक याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। इस याचिका में दावा किया गया कि जवाहर नवोदय विद्यालयों में एडमिशन की प्रक्रिया से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों के लिए कोटे को बाहर रखा गया।जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने यह टिप्पणी की:"श्री एस. एम. गुरु, डिप्टी सॉलिसिटर जनरल, प्रतिवादियों की ओर से अग्रिम सूचना पर पेश हुए। याचिका की एक प्रति, साथ में संलग्न दस्तावेजों के साथ, उन्हें दी जाए ताकि वे निर्देश प्राप्त कर सकें और याचिका पर अपना जवाब दाखिल...
















