मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

परिवार की मर्ज़ी के बिना शादी करने वाली बालिग़ महिला को बयान के लिए यात्रा करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती पुलिस: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे किसी बालिग़ महिला को सिर्फ़ उसका बयान दर्ज करने के लिए ग़ाज़ीपुर की यात्रा करने के लिए मजबूर न करें, क्योंकि उसने परिवार की मर्ज़ी के बिना शादी करने के बाद अपनी जान और आज़ादी को ख़तरा होने की आशंका जताई थी। [2026 LiveLaw (MP) 364]याचिकाकर्ता को "पूछताछ/जांच में सहयोग करने" का निर्देश देते हुए जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने निर्देश दिया:"मौजूदा मामले के तथ्यों को देखते हुए याचिकाकर्ता ने साफ़ तौर पर आशंका जताई है कि अगर उसे ग़ाज़ीपुर...

महाकाल मंदिर के पास से शाही मस्जिद का हिस्सा हटाने का रास्ता साफ, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सड़क चौड़ीकरण को दी मंजूरी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास स्थित शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाकर सड़क चौड़ी करने के नगर निगम के फैसले को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि नगर निगम ने संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन करते हुए और मस्जिद का प्रबंधन करने वाले लोगों को सुनवाई का पर्याप्त अवसर देने के बाद कार्रवाई की।जस्टिस संदीप एन. भट्ट की पीठ ने कहा कि प्रस्तावित कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 300-ए का उल्लंघन नहीं करती। कोर्ट ने 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ,...

दमोह स्कूल हिजाब विवाद: हाईकोर्ट ने स्टाफ और पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ धर्म परिवर्तन की FIR बरकरार रखी, कहा- आरोप बेतुके नहीं
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दमोह के स्कूल के पूर्व पदाधिकारियों, टीचर और चपरासी के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार किया। इन पर स्कूल के छात्रों पर अनिवार्य हिजाब और कुछ धार्मिक रीति-रिवाजों को थोपने का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि इन आरोपों को बेतुका या अपराध न मानने लायक नहीं कहा जा सकता। [2026 LiveLaw (MP) 361]कोर्ट ने कहा कि आरोपों की सच्चाई सबूतों की जांच पर निर्भर करेगी और जांच के दौरान इकट्ठा किए गए बयानों और अन्य सामग्री को नजरअंदाज करके सिर्फ FIR को चुन-चुनकर पढ़ने से इसका फैसला नहीं किया जा...

रेप के आरोपी ने पीड़िता के ससुराल वालों को वीडियो भेजे, अपने पक्ष में बयान देने का दबाव बनाया: एमपी हाईकोर्ट ने ज़मानत रद्द की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रेप के आरोपी की ज़मानत रद्द की। कोर्ट ने पाया कि आरोपी ने पीड़िता पर अपने पक्ष में बयान देने का दबाव बनाने के लिए उसके ससुराल वालों को वीडियो भेजे थे। [2026 LiveLaw (MP) 358]रेप के मामलों में पीड़िता की गरिमा और पहचान की सुरक्षा को सबसे ज़रूरी बताते हुए जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की बेंच ने कहा:"IPC की धारा 376 और 506 के तहत मामले में पीड़िता की पहचान और गरिमा की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। ज़मानत पर रिहा हुए व्यक्ति को कोर्ट द्वारा लगाई गई शर्तों का सख्ती से पालन...

माता-पिता की आपत्ति के बावजूद वयस्क महिला जैन साध्वी बनने के लिए स्वतंत्र: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 20 वर्षीय महिला को राहत देते हुए कहा कि वयस्क होने के नाते वह अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार जीवन जीने के लिए स्वतंत्र है।कोर्ट ने कहा कि भारत की नागरिक और 18 वर्ष से अधिक उम्र की महिला को अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धर्म का पालन करने का अधिकार है और उसके इस फैसले में किसी को भी जबरन हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जा सकती। जस्टिस संदीप एन. भट्ट ने यह आदेश उस याचिका पर दिया, जिसमें महिला ने अपने माता-पिता और रिश्तेदारों की कथित दबावपूर्ण कार्रवाई से सुरक्षा मांगी थी।...

लंबे समय तक पति-पत्नी के तौर पर साथ रहने से कानूनी अनुमान उनकी शादी के वैध होने के पक्ष में होगा, न कि अवैध होने के: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा कि जब कोई पुरुष और महिला लंबे समय तक पति-पत्नी के तौर पर साथ रहते हैं, तो कानूनी अनुमान उनकी शादी के वैध होने के पक्ष में होगा, न कि अवैध होने के। [2026 LiveLaw (MP) 353]जस्टिस प्रणय वर्मा की बेंच ने कहा:"गाँव में प्रतिवादी नंबर 2 के अलावा कोई भी ऐसा नहीं है, जो प्रतिवादी नंबर 1 और 3 को पति-पत्नी न मानता हो। अनुमान हमेशा शादी के वैध होने के पक्ष में होगा, न कि अवैध होने के। पिछले मुक़दमे में, प्रतिवादी नंबर 2 ने प्रतिवादी नंबर 3 को प्रतिवादी नंबर 1 की अवैध पत्नी कहा...

'प्रथम दृष्टया आत्महत्या' से मामला खत्म नहीं होता, पुलिस को आत्महत्या के लिए उकसाने के सबूतों की जांच करनी चाहिए: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि आत्महत्या के मामले को सिर्फ़ इस शुरुआती आकलन के आधार पर बंद नहीं किया जा सकता कि मरने वाले ने आत्महत्या की थी। कोर्ट ने कहा कि जांच पूरी करने से पहले पुलिस को उन सबूतों की जांच करनी चाहिए जिनसे आत्महत्या के लिए उकसाने की संभावना का पता चलता हो।जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने कहा:"सिर्फ़ इस बात से कि मौत प्रथम दृष्टया फांसी लगाने से हुई आत्महत्या का मामला है, मामला खत्म नहीं हो जाता। जब पुलिस के सामने ऐसे सबूत आते हैं, जिनसे पता चलता है कि मरने वाले के साथ ऐसा...

Sagar Bar Election: हाईकोर्ट ने चुने गए प्रेसिडेंट की बात सुने बिना वोट दोबारा गिनने का आदेश रद्द किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल की स्पेशल कमेटी का वह आदेश रद्द किया, जिसमें सागर के डिस्ट्रिक्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट पद के लिए वोटों की दोबारा गिनती का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि यह आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। [2026 LiveLaw (MP) 356]मामले को स्पेशल कमेटी के पास वापस भेजते हुए जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने कमेटी को निर्देश दिया कि वह संबंधित पक्षों की बात सुने और कानून के अनुसार तर्कपूर्ण आदेश पारित...

हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 के तहत स्थायी गुजारा भत्ता के दावे पर तलाक के आदेश से रोक नहीं लगती: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि तलाक का आदेश (डिक्री) पहले ही पारित हो चुका है तो भी यह बात किसी जीवनसाथी को हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 के तहत स्थायी गुजारा भत्ता मांगने से नहीं रोकती। [2026 LiveLaw (MP) 357]कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक मामलों की सुनवाई करने वाली अदालत तलाक के आदेश के बाद भी स्थायी गुजारा भत्ते की अर्जी पर विचार करने के लिए सक्षम है।जस्टिस रामकुमार चौबे की बेंच ने कहा:"ऊपर बताई गई कानूनी स्थिति को देखते हुए तलाक का आदेश पहले ही पारित हो चुका है, तो भी यह बात अपीलकर्ता को हिंदू...

वकील-क्लाइंट के रिश्ते का मतलब यह नहीं कि क्लाइंट यौन उत्पीड़न का आरोप नहीं लगा सकता: हाईकोर्ट का FIR रद्द करने से इनकार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रैक्टिसिंग वकील के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार किया। वकील पर अपनी पूर्व क्लाइंट के साथ रेप का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि वकील-क्लाइंट का रिश्ता होने का मतलब यह नहीं है कि FIR दर्ज होने के शुरुआती चरण में ही इन आरोपों को पूरी तरह असंभव मान लिया जाए। [2026 LiveLaw (MP) 354]यह देखते हुए कि "FIR खुद इसी रिश्ते के आधार पर दर्ज की गई और आरोप है कि कथित आपराधिक घटनाएं बाद में हुईं", जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने कहा:"...यह तथ्य कि याचिकाकर्ता और प्रतिवादी नंबर 4 के बीच...

दो साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या में मौत की सजा उम्रकैद में बदली, एमपी हाईकोर्ट ने कहा- मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर नहीं
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दो साल की बच्ची से गंभीर यौन हमला और हत्या के दोषी व्यक्ति की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। अदालत ने कहा कि आरोपी के सुधार और पुनर्वास की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने उसे कम से कम 25 वर्ष की वास्तविक उम्रकैद की सजा दी है, जिसमें कोई छूट नहीं मिलेगी।जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की बेंच ने कहा कि मानव जीवन ईश्वर का अनमोल उपहार है और किसी व्यक्ति का जीवन आसानी से नहीं छीना जाना चाहिए। अदालत ने आरोपी की उम्र, उसका कोई...

हत्या की सजा रद्द करते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जज की कार्यक्षमता पर उठाए सवाल, मामला एक्टिंग चीफ जस्टिस के समक्ष भेजा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में दोषसिद्धि रद्द करते हुए विशेष जज के फैसले में गंभीर त्रुटियां पाईं। अदालत ने साक्ष्यों के मूल्यांकन के तरीके पर चिंता जताते हुए विशेष जज, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) दमोह की संवेदनशील मामलों की सुनवाई के लिए उपयुक्तता पर गंभीर सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने मामले को उचित निर्णय के लिए कार्यवाहक चीफ जस्टिस के समक्ष रखने का निर्देश दिया।जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने FSL...

'ज़रूरी तथ्य छिपाए': एमपी हाईकोर्ट ने विध्वंस नोटिस के ख़िलाफ़ याचिका खारिज की, जुर्माना लगाया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आनंद कुमार केडिया की रिट याचिका खारिज की। केडिया 'एसोसिएटेड अल्कोहल्स एंड ब्रुअरीज' को मैनेज करने वाले प्रमोटर ग्रुप के सदस्य हैं। उन्होंने इंदौर नगर निगम द्वारा उनके घर के पास 30 मीटर चौड़ी सड़क बनाने के लिए जारी किए गए गिराने के नोटिस को चुनौती दी थी। [2026 LiveLaw (MP) 349]यह देखते हुए कि केडिया ने ज़रूरी तथ्य छिपाए, जस्टिस संदीप एन भट्ट की बेंच ने उन पर ₹20,000 का जुर्माना लगाया।कोर्ट ने कहा,"हालांकि, इस बात को ध्यान में रखते हुए कि याचिकाकर्ता ने ज़रूरी तथ्य छिपाए...

बिना किसी नुकसान वाली गलती से हुई फायरिंग पर बड़ी सज़ा नहीं दी जा सकती: एमपी हाईकोर्ट ने CISF कॉन्स्टेबल की सज़ा रद्द की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने CISF कॉन्स्टेबल पर लगाई गई बड़ी सज़ा का आदेश रद्द किया। यह सज़ा तब दी गई थी, जब कॉन्स्टेबल ने अपने हथियार की जांच करते समय गलती से गोली चला दी थी। कोर्ट ने मामले को नए सिरे से विचार करने के लिए वापस भेज दिया। [2026 LiveLaw (MP) 350]जस्टिस विवेक कुमार सिंह की बेंच ने कहा कि अभियोजन पक्ष के गवाहों के स्पष्ट बयानों के बावजूद कि फायरिंग गलती से हुई, जांच अधिकारी ने निष्कर्ष निकाला कि यह सुरक्षा नियमों का जानबूझकर किया गया उल्लंघन था, जो घोर लापरवाही के बराबर है।कोर्ट ने...

मंदिर पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी वाले वीडियो को हटाने का ब्लैंकेट आदेश नहीं दे सकता हाईकोर्ट: जांच एजेंसी पहले करे वीडियो की सत्यता और संदर्भ की पड़ताल
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्य सचिव ए.वी. सिंह की बहू को लेकर वायरल हुए उस वीडियो को सोशल मीडिया से हटाने के लिए व्यापक आदेश देने से इनकार किया, जिसमें भोपाल की एक आवासीय सोसायटी के निवासियों के साथ विवाद के दौरान मंदिर को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का आरोप है।जस्टिस हिमांशु जोशी ने कहा कि वीडियो की वास्तविकता, उसकी पूर्णता और पूरे घटनाक्रम के संदर्भ की जांच सक्षम जांच एजेंसी द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और उससे जुड़े नियमों के तहत की जानी चाहिए।अदालत ने कहा कि इस स्तर पर यह...

12 साल की बच्ची के शोर नहीं मचाने को हाईकोर्ट ने माना अस्वाभाविक, दुष्कर्म के प्रयास के आरोपी की बरी बरकरार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 12 साल की बच्ची से गलत हरकत करने के प्रयास के मामले में आरोपी की बरी किए जाने का फैसला बरकरार रखा। जस्टिस जय कुमार पिल्लई की पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ अपराध साबित करने में सफल नहीं रहा।अदालत ने घटना के दौरान बच्ची के शोर नहीं मचाने, उसके शरीर पर चोट के निशान नहीं होने और किसी स्वतंत्र गवाह की जांच नहीं किए जाने सहित कई परिस्थितियों को अभियोजन की कहानी के खिलाफ माना।पीठ ने कहा कि यदि किसी बच्ची को जबरन गलत हरकत के लिए खींचा जा रहा हो और वह मदद के लिए...

न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर 'संवैधानिक कर्तव्य', पैसों की कमी कोई बहाना नहीं: एमपी हाईकोर्ट ने राज्य से कोर्ट के रुके हुए प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता देने को कहा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अनुच्छेद 21 के तहत पर्याप्त न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने के उसके संवैधानिक कर्तव्य की याद दिलाई। कोर्ट ने कहा कि ज़िला और हाई कोर्ट में कई न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स सरकारी मंज़ूरी के इंतज़ार में रुके हुए हैं।अनूपपुर ज़िला कोर्ट बिल्डिंग में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से जुड़ी जनहित याचिका (PIL) का दायरा बढ़ाते हुए, एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की बेंच ने कहा,"हमें सरकार को याद दिलाने की ज़रूरत है कि न्यायपालिका...

विभागों को शोक-संतप्त परिवारों का मार्गदर्शन करना चाहिए कि पात्र आश्रित अनुकंपा नियुक्ति का दावा कैसे कर सकते हैं: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का निर्णय लेने वाले सक्षम अधिकारी को तकनीकी और कठोर दृष्टिकोण के बजाय सहानुभूतिपूर्ण और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। [2026 LiveLaw (MP) 344]इस बात पर जोर देते हुए कि अक्सर मृतक के परिवार को गलत सलाह मिलती है, एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने कहा;"अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति से संबंधित मामलों में सक्षम अधिकारी को कठोर और तकनीकी रवैये के बजाय वास्तविक सहानुभूति और संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। अक्सर मृतक के...

17 साल पुराने सिविल मुकदमे पर MP हाईकोर्ट सख्त, 90 दिनों में निपटाने का निर्देश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर जिला अदालत में वर्ष 2009 से लंबित एक सिविल मुकदमे को प्राथमिकता के आधार पर सुनने और जल्द निपटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि मामला “priority basis” पर सुना जाना जरूरी है।जस्टिस संदीप एन. भट्ट की पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मुकदमे को उस अदालत में वापस भेजने की मांग की गई थी, जहां मामले में अंतिम बहस लगभग पूरी हो चुकी थी।क्या है मामला?याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि 31वें जिला एवं अतिरिक्त न्यायाधीश के समक्ष मामले में मौखिक और लिखित अंतिम दलीलें...

लेह जैसे ऊंचे पहाड़ी इलाके में 'एक्लिमेटाइज़ेशन' सैनिक की ड्यूटी का हिस्सा है, इस दौरान लगी चोट को सर्विस से जुड़ी चोट माना जाएगा: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक सैनिक को विकलांगता पेंशन देने के आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि वह ऊंचे पहाड़ी इलाके में 'एक्लिमेटाइज़ेशन' (ऊंचाई के माहौल में ढलने की प्रक्रिया) पर था, जो उसकी ड्यूटी का हिस्सा है। इस दौरान लगी कोई भी चोट उसकी सर्विस से जुड़ी मानी जाएगी। [2026 LiveLaw (MP) 342]केंद्र सरकार की अपील खारिज करते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस आनंद पाठक की डिवीजन बेंच ने कहा:"प्रतिवादी (रेस्पॉन्डेंट) यह साबित करने में नाकाम रहे कि विकलांगता किसी...
