मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
चाइनीज मांझे से पतंग उड़ाने पर नाबालिग के अभिभावक भी हो सकते हैं जिम्मेदार: मध्य प्रदेश हाइकोर्ट
मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने चाइनीज मांझे की अवैध बिक्री और उपयोग से जुड़े एक स्वतः संज्ञान जनहित मामले की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। हाइकोर्ट ने कहा कि यदि कोई नाबालिग चाइनीज नायलॉन मांझे से पतंग उड़ाते हुए पाया जाता है और उससे लापरवाही के कारण किसी की मृत्यु होती है, तो उस नाबालिग के अभिभावक को भी भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 106(1) के तहत जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने सोमवार को सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिए।अदालत ने कहा कि...
रिहायशी बिल्डिंग में वकील का ऑफिस 'कमर्शियल एक्टिविटी' नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार (13 जनवरी) को कहा कि रिहायशी बिल्डिंग में मौजूद वकील के ऑफिस को कमर्शियल एक्टिविटी नहीं माना जा सकता।जस्टिस जीएस अहलूवालिया की बेंच ने कहा;"जैसा कि पहले ही बताया गया, विवादित कमरा किसी कमर्शियल बिल्डिंग में नहीं, बल्कि एक रिहायशी बिल्डिंग में है। इसलिए किसी भी तरह से यह नहीं कहा जा सकता कि रिहायशी बिल्डिंग में मौजूद वकील का ऑफिस एक कमर्शियल एक्टिविटी है।"विवादित प्रॉपर्टी के मालिक, अपीलकर्ता ने प्रतिवादी को 500/- रुपये के मासिक किराए पर एक कमरा किराए पर दिया,...
आधार और वोटर आईडी जन्मतिथि का निर्णायक प्रमाण नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 13 जनवरी को एक अहम फैसले में कहा कि आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड किसी व्यक्ति की जन्मतिथि का निर्णायक और अंतिम प्रमाण नहीं माने जा सकते।अदालत ने स्पष्ट किया कि ये दस्तावेज़ स्व-घोषणा के आधार पर तैयार किए जाते हैं और इनका उद्देश्य केवल पहचान सुनिश्चित करना होता है, न कि जन्मतिथि जैसे सेवा संबंधी तथ्यों का निर्धारण करना।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की एकल पीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें धार जिले के अतिरिक्त कलेक्टर द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई...
परीक्षा का पहला चरण पास करने के लिए OBC कोटा का फायदा उठाने वाला उम्मीदवार बाद में अनारक्षित कैटेगरी में शिफ्ट नहीं हो सकता: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि जो उम्मीदवार परीक्षा के पहले चरण के लिए OBC कैटेगरी के तहत आरक्षण का फायदा उठाता है, वह बाद में परीक्षा के दूसरे चरण में अनारक्षित कैटेगरी में जाने की मांग नहीं कर सकता, अगर वह OBC उम्मीदवार के तौर पर दूसरा चरण पास नहीं कर पाता।ऐसा करते हुए कोर्ट ने महिला की याचिका खारिज की, जिसने 2023 पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का पहला चरण OBC कैटेगरी के तहत पास करने के बाद दूसरे चरण में अनारक्षित कैटेगरी में जाने की मांग की थी, क्योंकि वह OBC कैटेगरी का कट-ऑफ पूरा नहीं कर...
अथॉरिटी सिर्फ़ राज्य से निर्देशों का इंतज़ार करते हुए डेवलपमेंट की इजाज़त देने से मना नहीं कर सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि डेवलपमेंट की इजाज़त देने वाली अथॉरिटी सिर्फ़ इस आधार पर मंज़ूरी रोक या मना नहीं कर सकती कि वे राज्य सरकार से निर्देशों का इंतज़ार कर रहे हैं।जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने कहा,"एक कानूनी अथॉरिटी को अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करना चाहिए और निर्देशों का इंतज़ार करने के बहाने काम करने से मना नहीं कर सकती, जब तक कि ऐसे निर्देश कानून द्वारा साफ़ तौर पर अनिवार्य न हों।"MGR डेवलपर्स ने अपनी प्रस्तावित आवासीय कॉलोनी 'विमल श्री शुभांगन' के लिए अथॉरिटी...
परिवार के सदस्य की सिर्फ़ बीमारी, जब हालत में सुधार हो रहा हो, तो अंतरिम ज़मानत देने का असाधारण आधार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार (12 जनवरी) को अस्थायी/अंतरिम ज़मानत मांगने वाली अर्ज़ी यह देखते हुए खारिज की कि परिवार के किसी सदस्य की सिर्फ़ बीमारी, खासकर जब हालत कंट्रोल में हो और उसमें सुधार हो रहा हो, तो अस्थायी/अंतरिम ज़मानत देने के लिए यह काफ़ी आधार नहीं है।जस्टिस मिलिंद रमेश फडके की बेंच ने कहा,"परिवार के किसी सदस्य की सिर्फ़ बीमारी, खासकर जब हालत कंट्रोल में हो और उसमें सुधार हो रहा हो, तो यह कोई असाधारण परिस्थिति नहीं है जिसके आधार पर गंभीर अपराधों वाले मामले में अस्थायी/अंतरिम ज़मानत...
Autonomous Medical PG Admission Rules | इन-सर्विस डॉक्टरों को ग्रामीण सेवा के लिए बॉन्ड देने की आवश्यकता नहीं : मध्य प्रदेश हाइकोर्ट
मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की सेवा में कार्यरत (इन-सर्विस) डॉक्टरों को मेडिकल पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स पूरा करने के बाद ग्रामीण सेवा के लिए बॉन्ड भरने की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने कहा कि मध्य प्रदेश स्वायत्त मेडिकल एवं दंत स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम (डिग्री/डिप्लोमा) प्रवेश नियम, 2017 का नियम 11 इन-सर्विस डॉक्टरों पर लागू नहीं होता।जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने यह टिप्पणी डॉ. दीपाली बैरवा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की। याचिकाकर्ता ने भोपाल के...
कोर्ट लाइव-स्ट्रीम का गलत इस्तेमाल: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने YouTube, Instagram को आपत्तिजनक URL ब्लॉक करने का निर्देश दिया
रील्स, क्लिप और मीम्स के ज़रिए लाइव-स्ट्रीम की गई कोर्ट की कार्यवाही के गलत इस्तेमाल के आरोप वाली PIL पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार (12 जनवरी) को संबंधित प्लेटफॉर्म, YouTube और Instagram को 48 घंटे के अंदर आपत्तिजनक URL तक पहुंच ब्लॉक करने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सर्राफ की डिवीजन बेंच ने निर्देश दिया;"IA 24384/2025 के ज़रिए, याचिकाकर्ता ने Instagram और YouTube के आपत्तिजनक वीडियो के URL रिकॉर्ड पर रखे हैं। संबंधित प्रतिवादियों को आज से 48 घंटे...
पीड़िता के सहमति से वयस्क होने पर MP हाईकोर्ट ने POCSO सजा रद्द की, जज व अभियोजक से जवाब तलब
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने POCSO अधिनियम के तहत एक व्यक्ति की सजा को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि ट्रायल कोर्ट ने इस तथ्य को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया कि पीड़िता एक सहमति से संबंध में रहने वाली वयस्क (कंसेंटिंग एडल्ट) थी। इस मामले में न्यायालय ने यह भी पाया कि विशेष न्यायाधीश द्वारा की गई गंभीर चूक के कारण अभियुक्त को तीन वर्षों से अधिक समय तक जेल में रखा गया, जो न्याय के साथ अन्याय है।यह मामला जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रामकुमार चौबे की खंडपीठ के समक्ष आया। कोर्ट ने विशेष न्यायाधीश और लोक...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बिना लोकस स्टैंडी के लगाए गए अवैध खनन के आरोपों पर सुनवाई करने से किया इनकार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अवैध रेत खनन और खनन लीज के आवंटन का आरोप लगाने वाली याचिका यह देखते हुए खारिज की कि याचिका एक ऐसे याचिकाकर्ता ने दायर की थी, जिसने अपना लोकस नहीं बताया। ऐसा लग रहा था कि यह याचिका किसी एक व्यक्ति से निजी दुश्मनी निकालने के लिए दायर की गई।जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने कहा;"याचिकाकर्ता के अनुसार, प्रतिवादी नंबर 3 से 5 अवैध रेत खनन में लगी फर्में हैं और कथित तौर पर प्रतिवादी नंबर 6 और 7, जो सरकारी अधिकारी हैं, उसके साथ मिलकर काम कर रही हैं। यह...
सरकारी भूमि पर बिना स्वामित्व लंबे समय तक कब्जा होने से निषेधाज्ञा का अधिकार नहीं मिलता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार (9 जनवरी) को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के एक अधिकारी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने सरकारी जमीन पर अपने कब्जे का दावा किया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भूमि पर लंबे समय तक कब्जा मात्र से, बिना किसी वैध अधिकार के, कोई कानूनी हक या संरक्षण नहीं मिलता।जस्टिस हिर्देश की पीठ ने कहा कि—“जिस व्यक्ति के पास विवादित संपत्ति पर कोई वैधानिक अधिकार या स्वामित्व नहीं है, वह अनधिकृत कब्जेदार या अतिक्रमणकारी होता है। ऐसे व्यक्ति को उस भूमि के संबंध में...
'चौंकाने वाली बात' कि नाबालिग लड़कियां 10 से ज़्यादा सालों से लापता हैं, फिर भी पुलिस को कोई सुराग नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (7 जनवरी) को पुलिस अधिकारियों को पिछले दस सालों में लापता हुई नाबालिग लड़कियों की संख्या बताते हुए एक डिटेल में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने अधिकारियों को यह भी बताने का निर्देश दिया कि पुलिस की कोशिशों से कितनी लड़कियों का पता चला और कितनी लड़कियां खुद वापस लौटीं।ये निर्देश इंसानी तस्करी की शिकार महिला द्वारा दायर जनहित याचिका पर दिए गए, जिसने ऐसी नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा के लिए न्यायिक दखल की मांग की थी, जो इसी तरह के शोषण का शिकार हो सकती...
पति द्वारा जबरदस्ती अप्राकृतिक सेक्स करना IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता, मगर वैवाहिक अपवाद के कारण बलात्कार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने FIR रद्द करने की मांग वाली पति की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पति द्वारा अपनी बालिग पत्नी के साथ जबरन अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने को धारा 376 के तहत बलात्कार के रूप में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, लेकिन यह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A के तहत क्रूरता माना जाएगा।जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता की बेंच ने कहा,"हालांकि, इस कोर्ट की भी राय है कि पति द्वारा अपनी पत्नी के साथ जबरन अप्राकृतिक यौन संबंध बनाना IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता है। साथ ही IPC की धारा 376 के तहत...
सुलभ न्याय की मांग वाली जनहित याचिका में दिव्यांग व्यक्ति को हस्तक्षेप की अनुमति, राज्य सरकार और हाइकोर्ट प्रशासन से जवाब तलब
मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने दिव्यांगजनों, दीर्घकालिक रोगों से पीड़ित व्यक्तियों, महिलाओं और सीनियर सिटीजन के लिए न्यायालय परिसरों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और हाइकोर्ट प्रशासन को जवाब दाखिल करने के लिए समय प्रदान किया। साथ ही अदालत ने एक दिव्यांग व्यक्ति को इस याचिका में हस्तक्षेप करने की अनुमति भी दी।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने दिव्यांग नरेंद्र कुमार मिश्रा द्वारा दायर हस्तक्षेप आवेदन स्वीकार करते...
ग्वालियर में अंबेडकर प्रतिमा स्थापना के विरोध से जुड़े मामले में पूर्व बार अध्यक्ष को जमानत, गिरफ्तारी अवैध: हाइकोर्ट
मध्य प्रदेश हाइकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने बुधवार को हाईकोर्ट परिसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना के विरोध में हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में गिरफ्तार किए गए हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल मिश्रा को जमानत दी। अदालत ने पुलिस की कार्रवाई को अवैध ठहराते हुए कहा कि गिरफ्तारी के दौरान कानून द्वारा अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस आशीष श्रोती की खंडपीठ ने कहा कि पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 47 के तहत गिरफ्तारी के...
एमपी हाईकोर्ट ने स्कूल को बच्चे के रिकॉर्ड में पिता का नाम शामिल करने का निर्देश दिया, कहा- वैवाहिक विवाद से पिता के माता-पिता के अधिकारों को कम नहीं किया जा सकता
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ग्वालियर के लिटिल एंजल्स हाई स्कूल को एक बच्चे के स्कूल रिकॉर्ड को अपडेट करके उसमें उसके जैविक पिता का नाम शामिल करने का यह देखते हुए निर्देश दिया कि माता-पिता के बीच वैवाहिक विवाद जैविक पिता के माता-पिता के अधिकारों को कम नहीं कर सकता।जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस अनिल वर्मा की डिवीजन बेंच ने कहा;"...स्कूल रिकॉर्ड आखिरकार पासपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाता आदि जैसे अन्य सार्वजनिक दस्तावेजों के रिकॉर्ड का आधार बनेगा और एक जैविक पिता के माता-पिता के अधिकारों को...
2006-2014 के बीच कंप्यूटर ट्रेनिंग लेने वाले कोर्ट स्टेनोग्राफर, रीडर्स एडवांस इंक्रीमेंट के हकदार: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार (5 जनवरी) को कहा कि सभी क्लास III न्यायिक कर्मचारियों को एडवांस इंक्रीमेंट का फायदा मिलना चाहिए, जिन्होंने 6 फरवरी, 2006 से 29 सितंबर, 2014 के बीच कंप्यूटर नॉलेज ट्रेनिंग ली थी, क्योंकि यह उनका अधिकार बन गया।जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने कहा,"जिन लोगों को उस समय नियुक्त किया गया, जब कंप्यूटर नॉलेज के लिए कोई योग्यता तय नहीं थी, उन्हें कंप्यूटर का काम करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए ट्रेनिंग लेने की ज़रूरत थी। ट्रेनिंग सफलतापूर्वक...
युवा लिव-इन जोड़े को संरक्षण, लेकिन कम उम्र में लिए गए जीवन निर्णयों के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर एमपी हाईकोर्ट की चेतावनी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 20-20 वर्ष के एक लिव-इन जोड़े को पुलिस संरक्षण प्रदान करते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि संविधान द्वारा प्रदत्त व्यक्तिगत अधिकारों का अस्तित्व होना और हर परिस्थिति में उनका प्रयोग करना दोनों अलग-अलग बातें हैं।जस्टिस गजेंद्र सिंह की एकलपीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि यद्यपि वयस्क व्यक्तियों को अपनी इच्छा से रहने का अधिकार है, लेकिन कम उम्र में माता-पिता से अलग स्वतंत्र जीवन चुनने के गंभीर सामाजिक और आर्थिक परिणाम हो सकते हैं जिन पर युवाओं को गंभीरता से विचार करना...
मेधावी महिला उम्मीदवारों को उम्र में छूट देने से उन्हें ओपन कैटेगरी में मुकाबला करने से नहीं रोका जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि अगर महिला उम्मीदवार मेधावी हैं तो उन्हें उम्र में छूट देने से वे ओपन अनारक्षित कैटेगरी की पोस्ट के लिए मुकाबला करने से अयोग्य नहीं हो जातीं।जस्टिस दीपक खोट की बेंच ने अधिकारियों को याचिकाकर्ता की आई असिस्टेंट (मिनिस्ट्रियल) के पद पर नियुक्ति पर विचार करने का निर्देश देते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि वर्टिकल या हॉरिजॉन्टल आरक्षण के लिए आवेदन करने वाला उम्मीदवार अनारक्षित ओपन कैटेगरी में मुकाबला कर सकता है, अगर उसके अंक उस कैटेगरी के लिए तय कट-ऑफ मार्क्स से ज़्यादा...
मुस्लिम समुदाय के कब्रिस्तान को लेकर याचिका पर एमपी हाईकोर्ट का यथास्थिति बनाए रखने का आदेश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कटनी जिले के स्लीमनाबाद स्थित एक कब्रिस्तान से जुड़े विवाद में अहम अंतरिम आदेश पारित करते हुए राज्य अधिकारियों को यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए। अदालत मुस्लिम समुदाय के लिए उक्त भूमि को विशेष कब्रिस्तान घोषित किए जाने और दफन के अधिकारों की सुरक्षा से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने नोटिस जारी करते हुए कहा कि अगली सुनवाई 8 जनवरी, 2026 को होगी और तब तक संबंधित भूमि, जो कब्रिस्तान के रूप में उपयोग में है,...

















