मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
क्या AI का उपयोग अपराध स्थल की वीडियोग्राफी का विश्लेषण करने, साइन लैग्वेज की व्याख्या के लिए किया जा सकता है? एमपी हाईकोर्ट ने पूछा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में पूछा कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इनेबल्ड एप्लीकेशन्स का उपयोग विकलांग पीड़ितों/शिकायतकर्ताओं, जो एफआईआर दर्ज करने के लिए पुलिस से संपर्क करते हैं, की साइन लेंग्वेज की व्याख्या करने के लिए किया जा सकता है। ग्वालियर स्थिति जस्टिस आनंद पाठक की पीठ ने यह भी सोचा कि क्या अपराध स्थल का वीडियोग्राफी डेटा, जिसे अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रावधानों के अनुसार अनिवार्य रूप से रिकॉर्ड किया जाता है, का एआई ऐप के उपयोग से बेहतर विश्लेषण किया जा सकता...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 2017 के शुल्क विनियमन नियमों का उल्लंघन करते हुए कथित रूप से अत्यधिक फीस वसूले जाने के आदेश वाले प्राइवेट स्कूलों को अंतरिम राहत प्रदान की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने हाल ही में एक निर्णय में शैक्षणिक वर्ष 2017-18 से प्राइवेट स्कूलों द्वारा एकत्रित स्कूल फीस की वापसी के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई।यह मामला सेंट एलॉयसियस सीनियर सेकेंडरी स्कूल की अपील से संबंधित है, जिसमें जिला अधिकारियों के उन आदेशों को चुनौती दी गई। इसमें उन्हें मध्य प्रदेश प्राइवेट स्कूलों (फीस तथा संबंध विषयों का विनियमन) अधिनियम, 2017 (अधिनियम) के तहत अनुमेय सीमा से अधिक वसूले गए फीस को वापस करने का निर्देश दिया गया।जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ ने...
विदेशी शराब नियमों के तहत रजिस्ट्रेशन से इनकार करने के लिए आबकारी आयुक्त के लिए केवल आपत्ति कोई आधार नहीं: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज लिमिटेड द्वारा दायर रिट याचिका खारिज की। उक्त याचिका में मध्य प्रदेश के आबकारी आयुक्त द्वारा वास्को 60000 एक्स्ट्रा स्ट्रॉन्ग बीयर लेबल के रजिस्ट्रेशन को चुनौती दी गई थी।याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि प्रतिवादी नंबर 3 वास्को ब्रुअरीज का विवादित लेबल उसके अपने पंजीकृत लेबल माउंट 6000 सुपर स्ट्रॉन्ग बीयर से भ्रामक समानता रखता है।जस्टिस प्रणय वर्मा ने कहा कि यद्यपि मध्य प्रदेश विदेशी मदिरा नियम 1996 के नियम 9(4) में यह प्रावधान है कि यदि ऐसे...
प्रारंभिक अधिसूचना में उल्लिखित भूमि का अधिग्रहण न करना भूमि स्वामी के किसी मौलिक या वैधानिक अधिकार का उल्लंघन नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भूमि स्वामी द्वारा दायर रिट याचिका खारिज की, जिसमें कोयला धारक क्षेत्र (अधिग्रहण एवं विकास) अधिनियम 1957 के तहत शुरू की गई अधिग्रहण कार्यवाही में अपनी भूमि को शामिल करने की मांग की गई थी।याचिका मुख्य रूप से इस आधार पर थी कि उसकी भूमि को अधिग्रहण से बाहर रखने से उसके संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन होगा और उसकी संपत्ति बेकार हो जाएगी।जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया की पीठ ने याचिका में कोई योग्यता नहीं पाई। उन्होंने कहा कि भूमि का बहिष्कार वैध कानूनी और तकनीकी आधारों पर आधारित था,...
आरोपी को सुने बिना जमानत रद्द करना नैसर्गिक न्याय सिद्धांतों, मौलिक अधिकारों का उल्लंघन: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
जबलपुर में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जमानत आदेशों में एक स्वचालित रद्दीकरण खंड की वैधता को संबोधित किया है। यह मामला आवेदक की उस याचिका के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसमें पहले के आदेश को वापस लेने की मांग की गई थी, जिसने उसकी जमानत की शर्तों को संशोधित करने के उसके अनुरोध को खारिज कर दिया था।अदालत के समक्ष सवाल यह था कि क्या आरोपी को सुनवाई का अवसर दिए बिना स्वतः जमानत रद्द करने की शर्त भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। न्यायालय ने अपने पिछले आदेश दिनांक...
गैर-वाणिज्यिक मात्रा, कोई न्यूनतम सजा निर्धारित नहीं: एमपी हाईकोर्ट ने 2 साल से अधिक समय से जेल में बंद NDPS आरोपी को रिहा किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट इंदौर ने आरोपी को रिहा किया, जिस पर 2016 में 6 किलोग्राम गांजा रखने का मामला दर्ज किया गया और उसे तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी।अदालत ने पाया कि आरोपी ने 2 साल से अधिक कारावास की सजा काटी है। निचली अदालत द्वारा लगाए गए जुर्माने की राशि को बढ़ाते हुए उसे हिरासत से रिहा किया।जस्टिस प्रेम नारायण सिंह की पीठ ने अपीलकर्ता द्वारा दायर अपील आंशिक रूप से स्वीकार की, जिसे मूल रूप से इंदौर में विशेष न्यायाधीश (NDPS Act) द्वारा तीन साल के कठोर कारावास और 10,000 के जुर्माने...
क्रूरता के कारण 18 साल से अलग रह रही पत्नी: एमपी हाईकोर्ट ने पति की गुमशुदगी शिकायत 10 हजार रुपए जुर्माने के साथ खारिज की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया, जो अपनी लापता पत्नी और बच्चों का पता लगाने के लिए निर्देश मांग रहा था उसकी पत्नी कथित तौर पर 2006 से लापता हैं।जस्टिस विशाल धगत ने पाया कि याचिकाकर्ता को पूरी तरह से पता था कि उसकी पत्नी ने उसके अपमानजनक व्यवहार के कारण उसे छोड़ दिया था।उन्होने टिप्पणी की,"याचिकाकर्ता की पत्नी ने इस अदालत को बताया कि उसका पति उसे और उसके बेटों को बेरहमी से पीटता था, इसलिए उसने वर्ष 2006 में उसका घर छोड़ दिया। याचिकाकर्ता उक्त तथ्यों...
सामाजिक वानिकी के लिए निर्धारित भूमि पर किसी भी निर्माण या उत्खनन गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सामाजिक वानिकी के लिए कथित रूप से निर्धारित भूमि पर पत्थर काटने वाले संयंत्र के संचालन के लिए दिया गया अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) रद्द करने को चुनौती देने वाली रिट याचिका खारिज की।जस्टिस आनंद पाठक की पीठ ने घाटीगांव के उप-विभागीय अधिकारी (SDO) वन का NOC रद्द करने का फैसला बरकरार रखा। इस बात पर जोर दिया कि विचाराधीन भूमि को वृक्षारोपण उद्देश्यों के लिए वन भूमि के रूप में नामित किया गया था।मामला ग्वालियर जिले के घाटीगांव तहसील के मोहना में 0.209 हेक्टेयर भूमि के भूखंड के...
योजनाबद्ध तरीके से जंगली जानवरों का शिकार करना प्रकृति और जंगलों के लिए खतरा: एमपी हाईकोर्ट ने बाघिन के शिकार के लिए आरोपी लोगों को जमानत देने से इनकार किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बिजली के तार लगाकर मादा बाघ का शिकार करने के आरोपी व्यक्तियों द्वारा दायर जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने इस कृत्य को प्रकृति और वनों के लिए गंभीर खतरा बताया है। राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स, जबलपुर द्वारा वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (संशोधन) 2022 की धारा 9, 39, 44, 48(ए), 49(बी), 51, 52 और 57 के तहत उन पर आरोप लगाए गए थे।अपने फैसले में जस्टिस दिनेश कुमार पालीवाल ने इस बात पर जोर दिया कि बाघ जैसे अनुसूची-I के जंगली जानवर का शिकार करना मामूली अपराध नहीं माना...
इंदौर के स्कूल में नाबालिग लड़कियों के साथ कथित दुर्व्यवहार: हाईकोर्ट ने गंभीर आरोपों को चिन्हित किया, राज्य से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी
इंदौर के सरकारी स्कूल में नाबालिग लड़कियों के साथ गंभीर दुर्व्यवहार के आरोपों से जुड़े हालिया मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया, जिसमें शिकायत दर्ज होने और प्रवेश तथा अंतरिम राहत के सवाल पर सुनवाई के बाद की गई कार्रवाई पर तत्काल रिपोर्ट मांगी गई।यह मामला ऐसी घटना के इर्द-गिर्द केंद्रित है, जिसमें शिक्षक ने कथित तौर पर नाबालिग लड़कियों को मोबाइल फोन की तलाश में अपने कपड़े उतारने के लिए मजबूर किया, जिससे लोगों में आक्रोश फैल गया और कानूनी जांच शुरू हो गई।इंदौर के...
पुलिस कांस्टेबलों के लिए म्यूजिक बैंड की ट्रेनिंग वैकल्पिक, लिखित सहमति के बिना उन्हें बैंड अभ्यास के लिए नहीं भेजा जा सकता: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में मंडलेश्वर, मऊगंज और पंधुमा के कई पुलिस कांस्टेबलों की याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें उनकी सहमति के बिना उन्हें पुलिस बैंड की डमी टीम में शामिल करने के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। जस्टिस विवेक जैन की एकल पीठ ने कहा कि कांस्टेबलों को उनकी लिखित सहमति के बिना पुलिस बैंड टीम में भागीदारी और प्रशिक्षण के लिए नहीं भेजा जा सकता।न्यायालय ने WP नंबर 3374/2024 में राज्य के पहले के इस कथन पर गौर किया कि यदि पुलिस कर्मी अपनी सहमति देने के लिए तैयार नहीं हैं, तो वे...
क्या आप 30 रुपये भी देने की स्थिति में नहीं हैं? मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 12 साल पुरानी अपील को 'निर्धन के रूप में चलाने के लिए गृहिणी की अर्जी खारिज की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अजीबोगरीब मामले में गृहिणी द्वारा रेलवे दावा ट्रिब्यूनल द्वारा 2010 में पारित आदेश के खिलाफ निर्धन व्यक्ति के रूप में अपील चलाने के लिए दायर अर्जी खारिज की। कोर्ट ने कहा कि अपील के ज्ञापन पर देय कोर्ट फीस मात्र 30 रुपये है।जस्टिस विवेक जैन की एकल पीठ ने पाया कि अपीलकर्ता-आवेदक ने हाईकोर्ट के नियमों और कोर्ट फीस एक्ट के अनुसार लागू 30 रुपये की कोर्ट फीस का भुगतान करने में भी अपनी असमर्थता प्रदर्शित नहीं की है।एकल जज पीठ ने टिप्पणी की,“कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार अपील के...
भोपाल गैस त्रासदी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पीड़ितों के उपचार के लिए केंद्र सरकार से निधि के बारे में पूछा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से भोपाल मेमोरियल अस्पताल और अनुसंधान केंद्र को निधि देने के बारे में पूछा, जिसे भोपाल गैस त्रासदी (1984) के पीड़ितों को उन्नत तृतीयक स्तर की सुपर-स्पेशलिटी देखभाल प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया।एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन और अन्य संगठनों द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें वर्ष 2012 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा...
सहदायिक हिंदू संयुक्त परिवार की संपत्ति से संबंधित भूमि के किसी भी विशिष्ट हिस्से को अपने हिस्से के अलावा किसी और को ट्रांसफर नहीं कर सकते: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हिंदू संयुक्त परिवार की संपत्ति से संबंधित भूमि के एक हिस्से की बिक्री के मुद्दे पर चर्चा की। न्यायालय ने इस सवाल पर फैसला सुनाया कि क्या सहदायिक के हिस्से के अलावा किसी खास भूमि के टुकड़े को ट्रांसफर किया जा सकता है। इस सवाल का नकारात्मक जवाब देते हुए जस्टिस गुरपाल सिंह अहलूवालिया ने कहा,“हालांकि सहदायिक या सह-हिस्सेदार अपने हिस्से की सीमा तक हस्तांतरित कर सकता है लेकिन वह किसी खास भूमि के टुकड़े को हस्तांतरित नहीं कर सकता। इसलिए अधिक से अधिक यह कहा जा सकता है कि...
कानूनी पेशा कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं, वकील मुवक्किल से फीस वसूलने के लिए अनुकूल आदेश पारित करने के लिए अदालत पर दबाव नहीं बना सकते: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने वकील की अनुचित टिप्पणी करने और अपने मुवक्किलों से कानूनी फीस वसूलने के लिए अदालत पर अनुकूल आदेश पारित करने के लिए दबाव डालने के लिए निंदा की।जस्टिस गुरपाल सिंह अहलूवालिया की एकल पीठ ने कहा,“वकील का पेशा कोई व्यवसाय या व्यावसायिक गतिविधि नहीं है। उन्हें अपने पेशेवर कौशल का उपयोग करके अपने मुवक्किल का मामला आगे बढ़ाना चाहिए, लेकिन उन्हें पेशे को व्यावसायिक गतिविधि बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। वे अदालत पर अनुकूल आदेश पारित करने के लिए दबाव नहीं डाल सकते, जिससे वे अपने...
समय पर खाना न बनाना, पति से घर के काम करवाना, जैसे मामूली घरेलू मामले आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट इंदौर ने आत्महत्या के लिए उकसाने के हालिया मामले में पाया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ लगाए गए आरोप, जैसे कि समय पर खाना न बनाना, अपने पति से घर के काम करवाना और अपने भाई की शादी में शामिल होना, मामूली घरेलू मुद्दे हैं, जो भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 107 के तहत परिभाषित उकसाने की सीमा को पूरा नहीं करते।जस्टिस हिरदेश ने संगीता को बरी कर दिया, जिस पर अपने पति को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है और आत्महत्या के लिए उकसाने के मामलों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उकसाने...
आरोपी को जांच के तरीके को तय करने के लिए "पूर्व-श्रवण" का अधिकार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने माना कि संदिग्धों या आरोपी व्यक्तियों को उनकी जांच के तरीके या एजेंसी को निर्धारित करने के लिए पूर्व-श्रवण नहीं दिया जा सकता।जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया ने याचिकाकर्ता की याचिका पर यह आदेश पारित किया, जिसमें पुलिस को उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने से पहले ही स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करने के निर्देश देने की मांग की गई।सुनवाई योग्य कानूनी प्रश्न यह है कि क्या किसी संदिग्ध या आरोपी को पूर्व-श्रवण का अधिकार है या किसी विशेष एजेंसी द्वारा या किसी विशिष्ट तरीके से जांच की मांग करने...
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम| रिश्वत देने वाले को प्रभावित करने की आरोपी की क्षमता, उसे फेवर कर पाने की योग्यता से अधिक महत्वपूर्ण: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने माना कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत किसी अभियुक्त को दोषी ठहराने के लिए मुख्य परीक्षण अभियुक्त द्वारा रिश्वत देने वाले को रिश्वत मांग कर अवैध रूप से रिश्वत देने के लिए प्रेरित करने की क्षमता और रिश्वत देने वाले के मन में धारणा है, न कि अभियुक्त द्वारा किसी प्रकार का फेवर करने की उसकी योग्यता। जस्टिस गुरपाल सिंह अहलूवालिया ने कहा,"...अभियुक्त रिश्वत देने वाले को कोई फेवर करने में सक्षम था या नहीं, यह बहुत महत्वपूर्ण नहीं है, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि अभियुक्त ने...
निजता का उल्लंघन: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद में पत्नी की बातचीत की अनधिकृत रिकॉर्डिंग स्वीकार करने से किया इनकार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की पीठ ने वैवाहिक विवादों में अवैध रूप से रिकॉर्ड किए गए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की स्वीकार्यता के मुद्दे को संबोधित किया।जस्टिस गजेंद्र सिंह ने इंदौर के फैमिली कोर्ट के एडिशनल प्रिंसिपल जज का पिछले आदेश खारिज किया, जिसमें अवैध रूप से रिकॉर्ड की गई बातचीत को साक्ष्य के रूप में शामिल करने की अनुमति दी गई थी। यह माना गया कि अनधिकृत रिकॉर्डिंग निजता के अधिकारों का उल्लंघन करती है।याचिकाकर्ता और प्रतिवादी के बीच 24 फरवरी, 2016 को इंदौर में विवाह संपन्न हुआ था।इसके बाद विवाद उत्पन्न...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जमानत देने के लिए रिश्वत लेने के आरोपी जिला जज को हटाने का फैसला बरकरार रखा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में भ्रष्टाचार के आरोपों के संबंध में एडिशनल जिला जज (ADJ) को हटाने का फैसला बरकरार रखा।एक्टिंग चीफ जस्टिस और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ द्वारा दिए गए फैसले में पुष्टि की गई कि विभागीय जांच के निष्कर्षों की न्यायिक पुनर्विचार करने की कोई आवश्यकता नहीं है, जब उचित प्रक्रिया का पालन किया गया हो और कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई हो।ADJ के खिलाफ आरोप 12 अगस्त, 2011 को सामने आए जब जयपाल मेहता नामक व्यक्ति ने उन पर मप्र आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत धन के बदले जमानत आवेदन...














