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सुप्रीम कोर्ट ने NDPS मामले में अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की जमानत के खिलाफ पंजाब सरकार की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने NDPS मामले में अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की जमानत के खिलाफ पंजाब सरकार की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने आज (25 अप्रैल) पंजाब राज्य द्वारा शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को ड्रग मामले में दी गई जमानत को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा दी गई नियमित जमानत में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए निर्देश दिया कि न तो विशेष जांच दल और न ही मजीठिया मीडिया को जांच से संबंधित कोई बयान दें।इससे पहले, 4 मार्च को कोर्ट ने मजीठिया को 17 मार्च को पंजाब पुलिस के सामने पेश होने का निर्देश...

मेधा पाटकर ने Delhi LG वीके सक्सेना मानहानि मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ दायर याचिका वापस ली
मेधा पाटकर ने Delhi LG वीके सक्सेना मानहानि मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ दायर याचिका वापस ली

नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता और सोशल एक्टिविस्ट मेधा पाटकर ने शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट से विनय कुमार सक्सेना द्वारा 2001 में उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मानहानि मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ अपनी याचिका वापस ले ली।वीके सक्सेना वर्तमान में दिल्ली के उपराज्यपाल (Delhi LG) हैं।जस्टिस शालिंदर कौर ने पाटकर के वकील की प्रार्थना के अनुसार नई याचिका दायर करने की स्वतंत्रता के साथ याचिका को वापस ले लिया।पाटकर ने मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ उनकी अपील खारिज करने वाले 02 अप्रैल को पारित ट्रायल कोर्ट के फैसले...

पंजाब पुलिस के सीनियर आधिकारी पर सेक्सुअल सर्विस मांगने का आरोप, हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया से रिकॉर्डिंग हटाने के आदेश पर लगाई रोक
पंजाब पुलिस के सीनियर आधिकारी पर सेक्सुअल सर्विस मांगने का आरोप, हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया से रिकॉर्डिंग हटाने के आदेश पर लगाई रोक

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुवार को मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से पंजाब के सीनियर पुलिस अधिकारी की कथित वायरल कॉल रिकॉर्डिंग हटाने के लिए कहा गया। इस रिकॉर्डिंग में एक महिला से यौन सेवा मांगने की बात कही गई थी।जस्टिस मंजरी नेहरू कौल ने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से यूआरएल, लिंक हटाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई के लिए तय की गई।पीठ ने निर्देश दिया इस बीच अगली सुनवाई की तारीख तक...

सावरकर के खिलाफ टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, मानहानि मामले पर रोक लगाई
सावरकर के खिलाफ टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, मानहानि मामले पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने वीडी सावरकर के खिलाफ विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा की गई टिप्पणियों पर मौखिक रूप से असहमति जताई।कोर्ट ने सावरकर के खिलाफ की गई टिप्पणियों को लेकर लखनऊ कोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ लंबित आपराधिक मानहानि की कार्यवाही पर रोक लगा दी लेकिन मौखिक रूप से चेतावनी दी कि अगर उन्होंने भविष्य में ऐसी कोई टिप्पणी की तो उनके खिलाफ स्वतः संज्ञान से कार्रवाई की जाएगी।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।मामले की सुनवाई शुरू होते ही जस्टिस दत्ता ने राहुल...

पुलिस अदालत की तरह काम कर रही है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामलों में कानून की गलत व्याख्या के लिए हरियाणा पुलिस की खिंचाई की, शीर्ष अधिकारियों को तलब किया
पुलिस अदालत की तरह काम कर रही है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामलों में कानून की गलत व्याख्या के लिए हरियाणा पुलिस की खिंचाई की, शीर्ष अधिकारियों को तलब किया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को आपराधिक कानून के सिद्धांतों से भटकने के लिए फटकार लगाते हुए कहा कि यह देखना अजीब है कि पुलिस अधिकारी स्पष्ट रूप से कानून की अदालत की तरह काम कर रहे हैं - मामले की संपत्ति को सुपरदारी पर छोड़ना और साक्ष्य की स्वीकार्यता तय करना। न्यायालय ने इस बात पर प्रकाश डाला कि राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने भारतीय साख्य अधिनियम (बीएसए) की गलत व्याख्या करके इसे जांच के चरण में लागू किया है, जो केवल न्यायिक कार्यवाही पर लागू...

एकनाथ शिंदे पर टिप्पणी मामले में कुणाल कामरा को गिरफ्तार न करें पुलिस: बॉम्बे हाईकोर्ट
एकनाथ शिंदे पर टिप्पणी मामले में कुणाल कामरा को गिरफ्तार न करें पुलिस: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस को निर्देश दिया कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर कथित रूप से की गई व्यंग्यात्मक टिप्पणी और गद्दार शब्द के इस्तेमाल को लेकर दर्ज (FIR) में कॉमेडियन कुणाल कामरा को गिरफ्तार न किया जाए।जस्टिस सरंग कोतवाल और जस्टिस श्रीराम मोडक की खंडपीठ ने कहा कि यदि पुलिस को कामरा का बयान दर्ज करना है तो उसे चेन्नई (विलुपुरम के पास, जहां कामरा रहते हैं) जाकर स्थानीय पुलिस की मदद लेनी चाहिए।कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि याचिका के लंबित रहने के दौरान चार्जशीट दायर की जाती है...

केरल बार एसोसिएशन ने इतिहास रचा, पदाधिकारियों के रूप में केवल महिलाओं का चुनाव
केरल बार एसोसिएशन ने इतिहास रचा, पदाधिकारियों के रूप में केवल महिलाओं का चुनाव

केरल में पाला बार एसोसिएशन ने ऐतिहासिक रूप से पहली बार एक महिला पैनल का चुनाव किया, जो पदाधिकारियों और अपनी कार्यकारी समिति के सदस्यों के रूप में काम करेगा।15 पदों पर नियुक्ति के लिए यह चुनाव ऐसे समय में हुआ, जब पूरे देश में बार एसोसिएशन में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की मांग जोर पकड़ रही है।उल्लेखनीय है कि बार एसोसिएशन के पदों पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में मामले लंबित हैं। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन में कम से...

बच्चा पैदा न कर पाने पर ताना मारना क्रूरता नहीं: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने शादीशुदा ननदों के खिलाफ 498A व दहेज एक्ट के तहत कार्यवाही रद्द की
बच्चा पैदा न कर पाने पर ताना मारना क्रूरता नहीं: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने शादीशुदा ननदों के खिलाफ 498A व दहेज एक्ट के तहत कार्यवाही रद्द की

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने यह फैसला सुनाया कि यदि पति की शादीशुदा बहनें (ननदें) अपने भाई की पत्नी को बच्चा पैदा न कर पाने को लेकर ताना मारती हैं तो इसे आईपीसी की धारा 498A या दहेज निषेध अधिनियम 1961 की धारा 3 और 4 के अंतर्गत कार्यवाही जारी रखने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता।जस्टिस हरिनाथ एन की एकल पीठ ने पति (प्रथम आरोपी) की बहनों के खिलाफ कार्यवाही रद्द करते हुए कहा,“याचिकाकर्ता 3 और 4 अपनी शादी के बाद 1वें आरोपी और तीसरे प्रतिवादी (पत्नी) के वैवाहिक घर से दूर रह रही थीं। शिकायत के...

जजों के लिए आवासीय फ्लैट निर्माण में प्रगति न होने पर हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार और DDA को फटकार लगाई
जजों के लिए आवासीय फ्लैट निर्माण में प्रगति न होने पर हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार और DDA को फटकार लगाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी में न्यायिक अधिकारियों के लिए फ्लैट और आधिकारिक आवासों के निर्माण में कोई प्रगति न होने पर दिल्ली सरकार और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को फटकार लगाई।चीफ जस्टिस डी. के. उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेदेला की खंडपीठ ने कहा कि कोर्ट ने इस मामले में DDA से अनुरोध किया लेकिन वह अनसुना कर दिया गया।कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह अपेक्षित है कि सरकारी अधिकारी जजों की गरिमामयी रहने की आवश्यकता को समझें और इसे संवेदनशीलता के साथ देखें।कोर्ट ने कहा,“हमें लगभग भीख...

मुस्लिम पिता द्वारा बेटे को दी गई संपत्ति के उपहार (हिबा) में वास्तविक कब्जा देना जरूरी नहीं, पिता उसी संपत्ति में रह सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट
मुस्लिम पिता द्वारा बेटे को दी गई संपत्ति के उपहार (हिबा) में वास्तविक कब्जा देना जरूरी नहीं, पिता उसी संपत्ति में रह सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने हाल ही में कहा कि एक मुस्लिम पिता जो इस्लामी कानून के तहत हिबा के रूप में अपने बेटे को संपत्ति उपहार में देना है, वह उस संपत्ति में अपने बेटे के साथ रह सकता है। उसे वह निवास स्थान छोड़ने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि कानून वास्तविक और भौतिक कब्जे की डिलीवरी को अनिवार्य नहीं मानता, बल्कि केवल संरचनात्मक कब्जे (Constructive Possession) की आवश्यकता होती है।जस्टिस रोहित जोशी की एकल बेंच ने मोहम्मद शेख द्वारा अपने बेटे रहमान शेख को 11 जून 2005 को हिबा के रूप में...

अगर स्मोक कैनिस्टर का इस्तेमाल आतंकवादी कृत्य है तो हर होली और IPL मैच पर भी UAPA लगेगा: दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस से कहा
अगर स्मोक कैनिस्टर का इस्तेमाल आतंकवादी कृत्य है तो हर होली और IPL मैच पर भी UAPA लगेगा: दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस से कहा

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को मौखिक रूप से टिप्पणी की कि अगर स्मोक कैनिस्टर का उपयोग आतंकवादी कृत्य माना जाए तो फिर हर होली और हर IPL मैच में भी UAPA के तहत अपराध बन जाएगा।यह टिप्पणी जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ द्वारा की गई, जो 2023 संसद सुरक्षा उल्लंघन मामले में आरोपी नीलम आज़ाद की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि क्या धुएं वाला कैनिस्टर जो घातक नहीं है, उसका इस्तेमाल करना या साथ रखना UAPA के तहत आतंकवादी कृत्य की परिभाषा में...

CGST Act की धारा 107(6) अदालत को अपील दायर करते समय प्री-डिपॉजिट माफ करने का विवेकाधिकार नहीं देती: दिल्ली हाईकोर्ट
CGST Act की धारा 107(6) अदालत को अपील दायर करते समय प्री-डिपॉजिट माफ करने का विवेकाधिकार नहीं देती: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके पास केंद्रीय माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (CGST Act) की धारा 107(6) के तहत अपील दायर करने के लिए निर्धारित प्री-डिपॉजिट शर्त को माफ करने का कोई विवेकाधिकार नहीं है।अधिनियम की धारा 107(6) के अनुसार, जहां तक स्वीकार की गई कर, ब्याज या जुर्माने की बात है तो पूरी राशि जमा करना अनिवार्य है। जहां तक विवादित राशि का सवाल है, वहां अपील के साथ कर की 10% राशि प्री-डिपॉजिट के रूप में जमा करनी होगी।इस मामले में याचिकाकर्ता ने इस आधार पर प्री-डिपॉजिट से छूट मांगी कि उसे...

किरायेदार की बेदखली के लिए मकान मालिक के परिवार की जरूरतें भी वास्तविक आवश्यकता मानी जाएंगी : सुप्रीम कोर्ट
किरायेदार की बेदखली के लिए मकान मालिक के परिवार की जरूरतें भी 'वास्तविक आवश्यकता' मानी जाएंगी : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बेदखली सिर्फ़ मकान मालिक की सच्ची ज़रूरत तक सीमित नहीं है, यहां तक कि मकान मालिक के परिवार की ज़रूरत भी किरायेदार को बेदखल करने के लिए सच्ची ज़रूरत मानी जाएगी।अदालत ने कहा,"यह तय है कि मकान मालिक के कब्जे के लिए सच्ची ज़रूरत को उदारता से समझा जाना चाहिए। इस तरह परिवार के सदस्यों की ज़रूरत को भी इसमें शामिल किया जाएगा।"इस तरह से फैसला सुनाते हुए जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने अपीलकर्ता/मकान मालिक और प्रतिवादी/किराएदार के बीच लंबे समय से चली आ रही...

हाईकोर्ट को एक ही आरोपी को बार-बार अंतरिम जमानत नहीं देनी चाहिए; या तो नियमित जमानत दें या फिर अस्वीकार करें: सुप्रीम कोर्ट
हाईकोर्ट को एक ही आरोपी को बार-बार अंतरिम जमानत नहीं देनी चाहिए; या तो नियमित जमानत दें या फिर अस्वीकार करें: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी को जमानत देते समय हाईकोर्ट को एक ही आवेदक को बार-बार अंतरिम जमानत नहीं देनी चाहिए। न्यायालय को या तो नियमित जमानत देनी चाहिए या उसे अस्वीकार करना चाहिए, लेकिन जहां तक ​​अंतरिम जमानत का सवाल है तो राहत केवल अपवाद के रूप में विशिष्ट परिस्थितियों में ही दी जानी चाहिए।जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस के विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने कहा,"हालांकि, कुछ मामलों में विशिष्ट परिस्थितियों का ध्यान रखने के लिए अंतरिम जमानत देना आवश्यक हो सकता है, लेकिन नियमित रूप से अंतरिम...

कर्मचारी को आपराधिक मामले में समान साक्ष्य के आधार पर बरी कर दिया गया हो तो अनुशासनात्मक कार्रवाई बरकरार नहीं रखी जा सकती : सुप्रीम कोर्ट
कर्मचारी को आपराधिक मामले में समान साक्ष्य के आधार पर बरी कर दिया गया हो तो अनुशासनात्मक कार्रवाई बरकरार नहीं रखी जा सकती : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब आपराधिक कार्यवाही और अनुशासनात्मक कार्यवाही में आरोप, साक्ष्य, गवाह और परिस्थितियां समान या काफी हद तक समान हों और जब किसी आरोपी को आपराधिक कार्यवाही में सभी आरोपों से बरी कर दिया जाता है तो अनुशासनात्मक कार्यवाही में निष्कर्षों को बरकरार रखना "अन्यायपूर्ण, अनुचित और दमनकारी" होगा।न्यायालय ने कहा,"जबकि आपराधिक मामले में बरी होने से अभियुक्त को अनुशासनात्मक कार्यवाही के बाद सार्वजनिक सेवा से उसकी बर्खास्तगी को रद्द करने का आदेश स्वतः प्राप्त करने का अधिकार नहीं मिल जाता...

सुप्रीम कोर्ट ने NCR राज्यों और MCD को 100% कचरा संग्रहण और पृथक्करण के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने NCR राज्यों और MCD को 100% कचरा संग्रहण और पृथक्करण के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सरकारों के साथ-साथ दिल्ली नगर निगम (MCD) को NCR में कचरे के 100 प्रतिशत पृथक्करण और ठोस कचरे के 100 प्रतिशत संग्रहण के अनुपालन की निगरानी के लिए उच्च रैंकिंग वाले नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया।कोर्ट ने कहा कि एमिक्स क्यूरी सीनियर एडवोकेट अपराजिता सिंह ने सही ही इस बात पर जोर दिया कि तय समय-सीमा के भीतर कचरे का 100 प्रतिशत पृथक्करण और 31 दिसंबर 2025 तक ठोस कचरे का 100 प्रतिशत संग्रहण करने की आवश्यकता है।कोर्ट ने निर्देश...

Land Acquisition | अपील दायर करने में देरी भूमि खोने वालों को उचित मुआवजा देने से इनकार करने का कोई कारण नहीं: सुप्रीम कोर्ट
Land Acquisition | अपील दायर करने में देरी भूमि खोने वालों को उचित मुआवजा देने से इनकार करने का कोई कारण नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भूमि अधिग्रहण मुआवजा अवार्ड के खिलाफ अपील दायर करने में देरी भूमि मालिकों को उचित, निष्पक्ष और उचित मुआवजा देने से इनकार करने का कारण नहीं होगी।अदालत ने कहा,"देरी भूमि खोने वालों को उनके मुआवजे से इनकार करने का कारण नहीं है, जो कि उनके द्वारा खोई गई भूमि के लिए निष्पक्ष और उचित है।"जस्टिस संजय करोल और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ उस मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें अपीलकर्ता ने संदर्भ न्यायालय द्वारा निर्धारित मुआवजे से अधिक मुआवजे की मांग करते हुए हाईकोर्ट के समक्ष 4908...

डीड रद्द करने और कब्जे की वसूली के लिए दायर मुकदमे में 3 वर्ष की सीमा लागू होती है, क्योंकि रद्द करना ही मुख्य राहत है: सुप्रीम कोर्ट
डीड रद्द करने और कब्जे की वसूली के लिए दायर मुकदमे में 3 वर्ष की सीमा लागू होती है, क्योंकि रद्द करना ही मुख्य राहत है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि जहां सेल डीड और कब्जा रद्द करने के लिए समग्र मुकदमा दायर किया गया था, वहां परिसीमा अवधि रद्द करने की प्राथमिक राहत से निर्धारित किया जाना चाहिए, जो 3 (तीन) वर्ष है, न कि कब्जे की सहायक राहत से जो 12 (बारह) वर्ष है।राजपाल सिंह बनाम सरोज (2022) 15 एससीसी 260 का संदर्भ दिया गया, जिसमें कहा गया:"जब सेल डीड रद्द करने के साथ-साथ कब्जे की वसूली के लिए समग्र मुकदमा दायर किया जाता है तो सेल डीड रद्द करने की मूल राहत के संबंध में परिसीमा अवधि पर विचार किया जाना आवश्यक है, जो...

रिटायर जजों की मेडिकल प्रतिपूर्ति का वहन प्रथम नियुक्ति या रिटायरमेंट के समय राज्य द्वारा किया जाएगा : सुप्रीम कोर्ट
रिटायर जजों की मेडिकल प्रतिपूर्ति का वहन प्रथम नियुक्ति या रिटायरमेंट के समय राज्य द्वारा किया जाएगा : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को आगाह किया कि रिटायर हाईकोर्ट जजों, उनके जीवनसाथी और अन्य आश्रितों के लिए मेडिकल सुविधाओं पर उसके आदेशों का पालन न करने पर न्यायालय की अवमानना ​​अधिनियम, 1981 के तहत कार्रवाई हो सकती है।न्यायालय ने कहा,"हम राज्य को सूचित कर रहे हैं कि यदि हम गैर-अनुपालन पाते हैं तो न्यायालय की अवमानना ​​अधिनियम, 1981 के तहत कार्रवाई शुरू की जाएगी।"इन सुविधाओं में मौजूदा जजों के समान मेडिकल लाभ, बिना राज्य की पूर्व स्वीकृति के निजी अस्पतालों में उपचार के लिए प्रतिपूर्ति, हाईकोर्ट...

क्या निर्विरोध उम्मीदवारों को भी जीतने के लिए न्यूनतम वोट शेयर की आवश्यक हो सकती है? केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा
क्या निर्विरोध उम्मीदवारों को भी जीतने के लिए न्यूनतम वोट शेयर की आवश्यक हो सकती है? केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा

सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार से कहा कि वह निर्विरोध उम्मीदवारों को विजेता घोषित किए जाने से पहले न्यूनतम वोट प्रतिशत हासिल करने के लिए सक्षम प्रावधान लाने पर विचार करे।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (RP Act) की धारा 53(2) को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर विचार कर रही थी, जो निर्विरोध चुनावों में उम्मीदवारों के सीधे चुनाव यानी मतदान कराए बिना चुनाव लड़ने का प्रावधान करती है। याचिकाकर्ता का दावा है कि विवादित प्रावधान मतदाताओं को 'इनमें से कोई नहीं'...