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यदि न्यायालय केवल निर्णयों को रद्द कर सकते हैं और उनमें संशोधन नहीं कर सकते, तो पक्षकारों को नए दौर की मध्यस्थता से गुजरना पड़ेगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में माना कि विवाद समाधान को प्रभावी बनाने और मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम 1996 के उद्देश्यों को बनाए रखने के लिए, न्यायालय को पंचाट को संशोधित करने की अनुमति दी जानी चाहिए, जब पक्ष न्यायाधिकरण के निर्णय को चुनौती देते हैं। यह निर्णय चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली संवैधानिक पीठ द्वारा दिया गया, जिसमें जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस संजय कुमार, जस्टिस एजी मसीह और जस्टिस केवी विश्वनाथन शामिल थे। जस्टिस केवी विश्वनाथन ने हालांकि इस मुद्दे पर असहमति जताई कि क्या...
SC/ST Act का विस्तार क्षेत्र
एक मामले में यह तर्क किया गया था कि किसी व्यक्ति को उसकी उपस्थिति के बिना बोर्ड पर यह प्रदर्शित करके भी अपमानित किया जा सकता है कि अनुसूचित जाति अथवा अनुसूचित जनजाति से सम्बन्धित लोगों को किसी स्थान में प्रवेश करने के लिए अनुज्ञात नहीं किया जायेगा, को भी स्वीकार नहीं किया जा सकता है, इसके कारण कोई कृत्य सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम की धारा 7 (1) (घ) को आकर्षित करते हुए अस्पृश्यता के आधार पर अपमान, न कि वर्ष 1989 को अधिनियम संख्यांक 33 की धारा 3 (x) के अधीन यथा अनुचिंतित अपमान हो सकता है।अधिनियम...
SC/ST Act में Proportionality of Sentence
Proportionality of Sentence के पक्ष पर उसे अभियुक्त के दाण्डिक आचरण की आपराधिकता के अनुसार विहित किया जाना है। दण्डादेशित करने की प्रणाली को ऐसी रीति में प्रवर्तित होना है, जो समाज की सामूहिक अन्तरात्मा को प्रदर्शित कर सके और उसे तथ्यों से इस तरह से उद्भूत होना चाहिए, जैसे दिया गया मामला मांग करता है। किस प्रकार के मामलों में मृत्युदण्ड प्रदान किया जाना चाहिए, विभिन्न न्यायिक निर्णयों में विचार-विमर्श की विषयवस्तु रही है। इसी तरह से ये दिशानिर्देश, जो भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302, (जो मृत्यु...
सुप्रीम कोर्ट ने 31 जनवरी 2025 से पहले सुरक्षित रखे गए मामलों में लंबित फैसलों पर सभी हाईकोर्ट से रिपोर्ट मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (5 मई) निर्णय सुनाने में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की। शीर्ष न्यायालय ने इस संबंध में सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरलों को उन मामलों पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिनमें 31 जनवरी, 2025 को या उससे पहले निर्णय सुरक्षित रखने के बावजूद अभी तक निर्णय नहीं सुनाए गए हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एनके सिंह की पीठ ने आदेश पारित किया,"सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल उन सभी मामलों के संबंध में एक रिपोर्ट प्रस्तुत करें, जिनमें 31.01.2025 को या उससे...
खुद को मुग़ल सम्राट बहादुर शाह ज़फर की वारिस बताकर लाल किले पर दावा करने वाली महिला की याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (5 मई) को महिला द्वारा दायर वह याचिका खारिज की, जिसमें उसने खुद को अंतिम मुग़ल सम्राट बहादुर शाह ज़फर द्वितीय के परपोते की विधवा बताते हुए लाल किले के स्वामित्व का दावा किया था।चीफ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की खंडपीठ ने सुल्ताना बेगम द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी।चीफ जस्टिस खन्ना ने व्यंग्य करते हुए पूछा,"सिर्फ लाल किला क्यों? फतेहपुर सीकरी को क्यों छोड़ा?"खंडपीठ ने टिप्पणी की कि यह रिट याचिका पूरी...
परीक्षा के माध्यम से सीधी भर्ती में वरिष्ठता अंकों के आधार पर होनी चाहिए, न कि पिछली सेवा के आधार पर: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के उस आदेश को अमान्य कर दिया, जिसमें सेवारत उम्मीदवारों को ओपन मार्केट भर्ती में शामिल उम्मीदवारों की तुलना में वरिष्ठता दी गई थी, जबकि चयन परीक्षा में उम्मीदवारों ने उच्च अंक प्राप्त किए थे। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि वरिष्ठता परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर होनी चाहिए न कि असंबंधित कारकों जैसे कि पिछले सेवा अनुभव के आधार पर।कोर्ट ने दोहराया कि एक बार जब किसी प्रतियोगी परीक्षा के आधार पर सेवा में नियुक्ति हो जाती है, तो वरिष्ठता परीक्षा में प्रदर्शन के आधार...
सुप्रीम कोर्ट ने '4PM' को ब्लॉक करने को चुनौती देने वाली याचिका पर जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार संजय शर्मा द्वारा 'राष्ट्रीय सुरक्षा' और 'सार्वजनिक व्यवस्था' के कथित आधार पर उनके यूट्यूब चैनल '4PM न्यूज' को ब्लॉक करने के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया।जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई अगले सप्ताह के लिए टाल दी।याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि चैनल को ब्लॉक करने से पहले याचिकाकर्ता को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया। शुरुआत में खंडपीठ ने संकेत दिया कि वह इस याचिका को ब्लॉकिंग नियमों को...
वक्फ पंजीकरण की आवश्यकता हानिरहित नहीं है, जैसा कि केंद्र ने दावा किया है; AIMPLB ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि यह प्रभावी रूप से वक्फ-बाय-यूजर की मान्यता को रद्द करता है
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड (AIMPLB) ने महासचिव मोहम्मद फजलुर्रहीम के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के संबंध में अपने जवाबी हलफनामे में किए गए दावों का जवाब देते हुए एक जवाबी हलफनामा दायर किया है। वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 को चुनौती देने वाली याचिका में हलफनामा दायर किया गया है, जिसे 5 मई को CJI संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है। AIMPLB का आरोप है कि उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ की कानूनी स्थिति को मान्यता देने...
"लैंगिक संवेदनशीलता" पर दो दिवसीय वर्कशॉप का सफल आयोजन
"लैंगिक संवेदनशीलता" पर दिनांक 26 व 27 अप्रैल, 2025 तक दो दिवसीय वर्कशॉप में फ़ैमिली कोर्ट विषयों के प्रति संवेदनशीलता हेतु गठित इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, उ.प्र., लखनऊ में आयोजित की गई। यह वर्कशॉप आगरा क्लस्टर के पारिवारिक न्यायालयों के न्यायिक अधिकारियों के लिए आयोजित की गई, जिसमें आगरा, अलीगढ़, औरैया, बदायूं, एटा, इटावा, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद, हाथरस, कन्नौज, कासगंज, मैनपुरी एवं मथुरा जनपदों के न्यायिक अधिकारियों ने भाग लिया।इस वर्कशॉप का उद्देश्य न्यायिक...
2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए मध्यस्थता एक महत्वपूर्ण साधन: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार (03 मई) आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि मध्यस्थता न केवल न्याय प्रदान करने में तेजी लाती है, बल्कि न्यायालयों पर बोझ भी कम करती है। उन्होंने कहा कि यह सामंजस्यपूर्ण तरीके से रहने के लिए आवश्यक मूल्यों को बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा,"मध्यस्थता संवाद, समझ और सहयोग को बढ़ावा देती है। ये मूल्य सामंजस्यपूर्ण और प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए आवश्यक हैं और इससे संघर्ष-प्रतिरोधी और समावेशी और सामंजस्यपूर्ण समाज का उदय होगा। मुझे यकीन है कि वह दिन दूर नहीं...
Delhi Riots: हाशिम अली हत्याकांड में शामिल 12 लोग हुए बरी
दिल्ली कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान हाशिम अली नामक व्यक्ति की हत्या से जुड़े सभी आरोपों से 12 लोगों को बरी कर दिया।एडिशनल सेशन जज पुलस्त्य प्रमाचला ने लोकेश कुमार सोलंकी, पंकज शर्मा, अंकित चौधरी, प्रिंस, जतिन शर्मा, हिमांशु ठाकुर, विवेक पंचाल, ऋषभ चौधरी, सुमित चौधरी, टिंकू अरोड़ा, संदीप और साहिल को बरी कर दिया।जज ने कहा,"मुझे लगता है कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य के नाम पर कुछ ऐसे टुकड़े और साक्ष्य हैं, जो किसी भी आरोपी व्यक्ति को अपराधी भीड़ का सदस्य होने की ओर इशारा करने के...
राष्ट्रपति और राज्यपालों के लिए विधेयकों पर निर्णय लेने की समयसीमा तय कर सुप्रीम कोर्ट ने कुछ भी गलत नहीं किया: जस्टिस केएम जोसेफ
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस केएम जोसेफ ने सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसले की सराहना की, जिसमें राष्ट्रपति और राज्यपालों के लिए राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर सहमति देने के लिए समयसीमा तय की गई।जस्टिस जोसेफ ने कहा,"जहां तक समय तय करने का सवाल है, मेरा विनम्र निवेदन है कि भारत के सुप्रीम कोर्ट ने कुछ भी गलत नहीं किया। दूसरी ओर, मैं इसे उचित ठहराऊंगा, क्योंकि इससे लोकतंत्र और संघवाद को बढ़ावा मिलेगा।"वह शनिवार को कोच्चि में अखिल भारतीय एडवोकेट संघ की राज्य समिति द्वारा आयोजित...
एडवोकेट प्रोटेक्शन बिल लागू करने के लिए शीघ्र कदम उठाएं सरकार: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में दिल्ली सरकार को एडवोकेट प्रोटेक्शन बिल, 2024 (Advocates Protection Bill) को लागू करने के लिए शीघ्र कदम उठाने का निर्देश दिया।जस्टिस सचिन दत्ता ने दिल्ली सरकार को याचिका में ताजा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें दावा किया गया कि दिल्ली में विभिन्न जिला कोर्ट के कोर्ट कैंपस के अंदर हिंसा की घटनाओं में "खतरनाक वृद्धि" हुई है।हाल ही में दिल्ली के सभी जिला कोर्ट बार संघों की समन्वय समिति द्वारा आवेदन दायर किया गया। इस आवेदन में मांग की गई कि Advocates...
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: तीखी बहस के बाद जस्टिस ओक की बेंच ने राज्य का मामला दूसरी बेंच को सौंपने की अनुमति दी
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अभय ओक और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने शुक्रवार को पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा और दो अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, जिसमें छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से संबंधित उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले को रद्द करने की मांग की गई थी।बेंच ने यह फैसला छत्तीसगढ़ राज्य के सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी के साथ तीखी बहस के बाद लिया, जिन्होंने स्थगन का विरोध किया और टुटेजा और अन्य को गिरफ्तारी से संरक्षण देने वाला अंतरिम आदेश रद्द करने की मांग की।कोर्ट ने कहा,"जेठमलानी...
अब श्री नारायण गुरु ट्रस्ट ने दी वक्फ संशोधन अधिनियम को चुनौती
श्री नारायण गुरु के मूल्यों और शिक्षाओं का अध्ययन और प्रसार करने के लिए स्थापित संगठन श्री नारायण मानव धर्मम ट्रस्ट ने वक्फ (संशोधन) 2025 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह में हस्तक्षेप की मांग की है। 3 अप्रैल, 2025 को सुप्रीम कोर्ट में दायर हस्तक्षेप आवेदन, 2025 संशोधनों की संवैधानिकता के खिलाफ चुनौती का समर्थन करता है।भारत की सुधारवादी परंपरा में प्रमुख व्यक्ति श्री नारायण गुरु का योगदान 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में फैला था, विशेष रूप से केरल में जाति...
PMLA Review: सुप्रीम कोर्ट ने विजय मदनलाल चौधरी के फैसले के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई के लिए पीठ का पुनर्गठन किया
सुप्रीम कोर्ट 7 मई को विजय मदनलाल चौधरी के फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। इस फैसले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के विभिन्न प्रावधानों को बरकरार रखा गया था।उल्लेखनीय है कि जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस सीटी रविकुमार (रिटायर) और जस्टिस उज्जल भुयान की पीठ इस मामले को देख रही थी। हालांकि, जस्टिस रविकुमार के रिटायरमेंट के बाद पीठ के पुनर्गठन की आवश्यकता उत्पन्न हुई।अब जस्टिस कांत और जस्टिस भुयान के अलावा जस्टिस एन कोटिस्वर सिंह को शामिल करके पीठ का पुनर्गठन किया गया। सुनवाई...
पहले से ही भारतीय घोषित व्यक्ति के खिलाफ विदेशी न्यायाधिकरण में दूसरा मामला शुरू करना प्रक्रिया का दुरुपयोग: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाईकोर्ट का आदेश खारिज कर दिया, जिसमें विदेशी न्यायाधिकरण (Foreigners Tribunal) के समक्ष मामला रद्द करने से इनकार कर दिया गया था। इस मामले में कहा गया था कि अपीलकर्ता के खिलाफ बाद की कार्यवाही रिस जुडिकाटा के सिद्धांत द्वारा वर्जित है, क्योंकि उसे पहले के एक मामले में विदेशी नहीं घोषित किया जा चुका है।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने कहा -“जबकि यह विवाद का विषय नहीं है कि पिछले संदर्भ में न्यायाधिकरण ने दोनों पक्षों को अवसर देने के बाद साक्ष्य...
SC/ST Act के अंतर्गत प्रकरण में की गयी कमियों का विचारण
SC/ST Act से जुड़े एक प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट द्वारा कहा गया है कि मामले के तथ्यों पर बिना किसी हिचकिचाहट के यह कहा जा सकता है कि अभियोजन सशक्त और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करके अभिकथित अपराध को साबित करने में विपन्न रूप में विफल हुआ है। अन्य शब्दों में वर्तमान मामला मुख्य अभियोजन साक्षियों के साक्ष्य अनेक विरोधों के साथ अस्थिर तथा कमजोर चरण पर आधारित है। पुनः अधिकांश अभियोजन साक्षीगण विद्रोही हो गये हैं और अभियोजन मामले का कोई स्वतन्त्र साक्षी समर्थन नहीं किया है। रूचिकर रूप में, कोई पहचान...
SC/ST Act के अपराधों में समय समय पर आए Judgement की महत्वपूर्ण बातें
इस एक्ट में न्यूनतम दण्डादेश पर विधि अधिनियम की धारा 3 (1) ऐसी अवधि के लिए दण्ड का प्रावधान करती है, जो 6 मास से कम की नहीं होगी, परन्तु जो 5 वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने के साथ हो सकेगी। इसलिए, केवल प्रश्न यह है कि क्या उच्च न्यायालय संविधि के द्वारा अनुचिन्तित न्यूनतम दण्ड से कम दण्डादेश प्रदान कर सकता है। जहाँ न्यूनतम दण्डादेश का प्रावधान किया गया हो, वहाँ न्यायालय न्यूनतम दण्डादेश से कम दण्डादेश अधिरोपित नहीं कर सकता है। यह भी अभिनिर्धारित किया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 142 के...
डिमांड नोटिस को पूरे संदर्भ में पढ़ना जरूरी, एक मात्र गलती के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत वैधानिक जनादेश को मजबूत करते हुए, जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 के तहत एक वैधानिक नोटिस में एक अकेली टंकण त्रुटि, नोटिस की समग्र सामग्री और इरादे को ओवरराइड नहीं कर सकती है, इस प्रकार 21 लाख रुपये से जुड़े चेक अस्वीकृति कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया गया है।चेक के अनादरण की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस रजनीश ओसवाल ने कहा, "यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि नोटिस को एक...



















