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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुद्वारे और मंदिर से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सार्वजनिक प्रवेश और कामर्शियल बाजार के लिए बाहरी सड़क पर निर्मित अनधिकृत मंदिर और गुरुद्वारे को हटाने का आदेश दिया है, और सभी धार्मिक अनुष्ठानों के उचित पालन के बाद संरचनाओं से पवित्र ग्रंथों/पुस्तकों/मूर्तियों को हटाने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है।जस्टिस हर्ष बंगर ने दस्तावेजों का अवलोकन करते हुए पाया कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि मंदिर के साथ-साथ गुरुद्वारे का निर्माण बिना किसी स्वीकृत भवन योजना/लेआउट योजना के किया गया है। यह भी नहीं दिखाया गया है कि इस तरह के...
केवल रिश्वत की राशि मिलने से नहीं होगा दोष सिद्ध, घूस की मांग का सबूत जरूरी: सुप्रीम कोर्ट
स्टाम्प विक्रेताओं को उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की कार्यवाही लागू करने के लिए 'लोक सेवक' के रूप में योग्य ठहराते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल दागी धन की वसूली अधिनियम के तहत अपराध स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं है जब तक कि इस तरह के धन की मांग भी साबित न हो।कोर्ट ने कहा कि रिश्वत देने वाले द्वारा प्रस्ताव के सबूत के बिना केवल अवैध परितोषण स्वीकार करना और लोक सेवक द्वारा मांग करना भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध नहीं होगा। जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस आर...
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (28 अप्रैल, 2025 से 02 मई, 2025 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।सौदा रद्द होने पर बयाना राशि जब्त करना दंड नहीं: सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने आज (2 मई) क्रेता द्वारा शेष प्रतिफल राशि का भुगतान करने में विफल रहने पर विक्रेता के साथ अग्रिम बिक्री समझौते के हिस्से के रूप में जमा किए गए बयाना धन की जब्ती को बरकरार रखा।कोर्ट ने क्रेता के इस तर्क को खारिज कर दिया कि...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (27 अप्रैल, 2025 से 02 मई, 2025) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।अधिकारियों की गलती के कारण नियुक्ति में देरी होने पर “काम नहीं तो वेतन नहीं” नियम लागू नहीं होता: कलकत्ता हाईकोर्ट कलकत्ता हाईकोर्ट की जस्टिस हरीश टंडन और जस्टिस प्रसेनजीत बिस्वास की खंडपीठ ने माना कि नियुक्ति में देरी अधिकारियों की गलती के कारण होने पर “काम नहीं तो वेतन नहीं” का सिद्धांत लागू नहीं...
मध्यस्थता न्याय का एक छोटा रूप नहीं, बल्कि एक बुद्धिमानी भरा रूप है: सीजेआई संजीव खन्ना
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) संजीव खन्ना ने शनिवार को इस बात पर जोर दिया कि मध्यस्थता न्याय का एक छोटा रूप नहीं, बल्कि एक बुद्धिमानी भरा रूप है, उन्होंने सामाजिक न्याय प्राप्त करने में इसकी भूमिका को रेखांकित किया।भारतीय मध्यस्थता संघ के शुभारंभ पर बोलते हुए सीजेआई खन्ना ने मध्यस्थता अधिनियम की धारा 43 के महत्व पर प्रकाश डाला, जो सामुदायिक मध्यस्थता का प्रावधान करती है। उन्होंने कहा कि इस प्रावधान के माध्यम से स्थानीय विवादों को प्रभावी ढंग से सुलझाया जा सकता है।उल्लेखनीय रूप से, संभल जामा...
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने COVID-19 प्रभाव के कारण अतिरिक्त UPSC प्रयास की याचिका खारिज की
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में अतिरिक्त प्रयास की मांग करने वाली रिट याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ता का अंतिम प्रयास COVID-19 महामारी से प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुआ था।जस्टिस अजय मोहन गोयल ने कहा:"यह कोई बहाना नहीं है कि चूंकि वह COVID-19 महामारी के कारण कुशलता से तैयारी नहीं कर सका, इसलिए उसे एक और मौका मिलना चाहिए।"मामले की पृष्ठभूमियाचिकाकर्ता ने सिविल सेवा परीक्षा 2020 में अपना अंतिम प्रयास दिया था, उसने COVID-19 महामारी और राष्ट्रीय लॉकडाउन के कारण...
बलात्कार पीड़िता पर शारीरिक चोट लगने की उम्मीद करना हास्यास्पद: इलाहाबाद हाईकोर्ट
2016 में 18 वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार करने वाले आरोपी को बरी करने का आदेश रद्द करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि भले ही एक महिला संभोग करने की आदी हो, फिर भी उसके साथ बलात्कार नहीं किया जा सकता।खंडपीठ ने यह भी कहा कि यह स्वीकार करना 'हास्यास्पद' होगा कि बलात्कार पीड़िता, जिसे मानसिक, मनोवैज्ञानिक और शारीरिक रूप से 'दबाया' गया, उसको उसके बयान को विश्वसनीय बनाने के लिए आंतरिक और बाहरी चोटों का सामना करना पड़ा।इन महत्वपूर्ण टिप्पणियों के साथ जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस संदीप...
अधिकारियों की गलती के कारण नियुक्ति में देरी होने पर “काम नहीं तो वेतन नहीं” नियम लागू नहीं होता: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट की जस्टिस हरीश टंडन और जस्टिस प्रसेनजीत बिस्वास की खंडपीठ ने माना कि नियुक्ति में देरी अधिकारियों की गलती के कारण होने पर “काम नहीं तो वेतन नहीं” का सिद्धांत लागू नहीं होता। इस प्रकार प्रभावित व्यक्ति को मौद्रिक लाभ का हकदार माना जाता है।पृष्ठभूमि तथ्यअपीलकर्ता ने राज्य के विभिन्न सरकारी प्रायोजित विद्यालयों में सहायक शिक्षक के पद के लिए 12वीं क्षेत्रीय स्तरीय चयन परीक्षा (RLST) दी थी। उसने कुछ प्रश्नों के उत्तरों की सत्यता पर सवाल उठाने के लिए रिट याचिका दायर की। न्यायालय ने...
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य कारणों से ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले CAPF कांस्टेबल की बर्खास्तगी बरकरार रखी, कहा- सर्जरी के बाद छुट्टी मांगना उसका कर्तव्य था
दिल्ली हाईकोर्ट ने CAPF के कर्मी की बर्खास्तगी बरकरार रखी, क्योंकि वह अपनी स्वास्थ्य स्थिति के कारण ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के बारे में बल को सूचित करने में विफल रहा था।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शालिंदर कौर की खंडपीठ का मानना था कि अनुशासनात्मक बल में होने के कारण कर्मी से उच्च स्तर की जवाबदेही की अपेक्षा की जाती है। "सर्जरी के बाद प्रतिवादियों को अपनी चिकित्सा स्थिति से अवगत कराना और उनसे छुट्टी मांगना उसका कर्तव्य था।"खंडपीठ ने कहा कि यह एक अनुशासित बल का कर्मचारी होने के नाते उस पर लगाए...
राजस्थान कोर्ट फीस मूल्यांकन अधिनियम, 1961 की धाराएं 52 और 53 : वसीयत या उत्तराधिकार पत्र के लिए आवश्यक शुल्क
राजस्थान कोर्ट फीस और मुकदमों का मूल्यांकन अधिनियम, 1961 के अध्याय VI में वसीयत (प्रोबेट) और उत्तराधिकार पत्र (लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन) से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। इस अध्याय की धाराएं 50 से 58 तक हैं, जो इन दस्तावेजों के लिए आवेदन, शुल्क निर्धारण, और अन्य संबंधित प्रक्रियाओं को स्पष्ट करती हैं। विशेष रूप से, धाराएं 52 और 53 इन प्रक्रियाओं में न्यायालय की भूमिका और शुल्क के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रदान करती हैं।धारा 52: वसीयत या उत्तराधिकार पत्र की अनुमति धारा 52 के...
क्या किसी फैसले को केवल इस आधार पर दोबारा परखा जा सकता है कि बाद के फैसले में पहले के निर्णय को गलत बताया गया है?
सुप्रीम कोर्ट ने Government of NCT of Delhi v. K.L. Rathi Steels Ltd. (2023) के मामले में एक अहम सवाल पर विचार किया क्या किसी अदालत के फैसले की समीक्षा (Review) केवल इसलिए की जा सकती है क्योंकि किसी बाद के फैसले में पहले के निर्णय (Precedent) को पलट दिया गया है? यह सवाल न केवल सिविल कानून बल्कि संवैधानिक कानून से भी जुड़ा हुआ है, और यह Code of Civil Procedure, 1908 की Order XLVII Rule 1 के तहत Review की सीमाओं को लेकर बेहद महत्वपूर्ण है। इस मामले में दो जजों की बेंच — जस्टिस एम.आर. शाह और जस्टिस...
BNSS 2023 की धारा 444 और 445: पुनरीक्षण के दौरान पक्षकारों की सुनवाई और आदेशों का प्रमाणन
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के अध्याय 32 में पुनरीक्षण (Revision) से संबंधित विस्तृत प्रावधान दिए गए हैं। इस अध्याय की धारा 444 और धारा 445 दो ऐसे महत्वपूर्ण प्रावधान हैं जो पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पक्षकारों की सुनवाई और हाईकोर्ट या सत्र न्यायालय के निर्णयों के अमल से संबंधित हैं। ये धाराएं प्रक्रिया की पारदर्शिता, न्यायिक व्यवस्था की कार्यकुशलता और न्याय के निष्पादन की दिशा में अत्यंत उपयोगी भूमिका निभाती हैं।इस लेख में हम धारा 444 और 445 को क्रमशः विस्तारपूर्वक और सरल हिंदी में...
राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 40-ए से 44 : लम्बरदारों की सेवा समाप्ति और ग्राम सेवकों की नियुक्ति
राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, 1956 में ग्राम स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था और राजस्व संग्रहण के सुचारु संचालन के लिए अनेक प्रावधान किए गए हैं। इस अधिनियम की धारा 40-ए से लेकर धारा 44 तक विशेष रूप से लम्बरदार व्यवस्था को समाप्त कर ग्राम सेवकों की नई व्यवस्था को लागू करने की दिशा में बनाई गई हैं। इन धाराओं में स्पष्ट रूप से यह बताया गया है कि ग्राम सेवकों की नियुक्ति कैसे होगी, उनकी सूची कैसे बनाई जाएगी, खाली पदों को कैसे भरा जाएगा और उन्हें कितना पारिश्रमिक दिया जाएगा। यह लेख इन सभी धाराओं को सरल भाषा...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रशासनिक कानून की कक्षाएं IAS प्रशिक्षुओं के लिए अनिवार्य करने हेतु केंद्र को निर्देश दिए
प्रशासनिक जवाबदेही को मज़बूत करने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रशासनिक अधिकारियों में क़ानूनी शिक्षा और प्रशिक्षण की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया, जिससे यह प्रवृत्ति कम हो सके कि अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बचकर न्यायालय पर निर्भर हो जाते हैं।जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी ने टिप्पणी की कि जब प्रशासनिक अधिकारी अपने कर्तव्यों से बचते हैं। निर्णय का बोझ न्यायालय पर डाल देते हैं तो यह कोर्ट तय करे प्रवृत्ति को जन्म देता है। इसे रोकने के लिए क़ानूनी शिक्षा, प्रशिक्षण और...
40% से अधिक विकलांगता वाले व्यक्ति को आदिवासी/दुर्गम क्षेत्र में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक दृष्टिबाधित सरकारी कर्मचारी, जिसकी विकलांगता 40% से अधिक है, उसको दुर्गम क्षेत्र में ट्रांसफर करने के आदेश पर रोक लगाई है। (दुर्गम/आदिवासी क्षेत्र उन इलाकों को कहा जाता है जो भौगोलिक रूप से दूरस्थ, कठिन भू-प्राकृतिक स्थितियों वाले और सीमित संसाधनों तक पहुंच वाले होते हैं।)जस्टिस संदीप शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार की स्थानांतरण नीति उन कर्मचारियों के लिए है, जो 40% या उससे अधिक की विकलांगता रखते हैं ताकि उन्हें समान रोजगार अवसर मिल सकें और उनके सामने आने वाली...
बिहार हिंदू धार्मिक न्यास अधिनियम के तहत आदेश के खिलाफ दायर एलपीए पटना हाईकोर्ट में खारिज
पटना हाईकोर्ट ने बिहार हिंदू धार्मिक न्यास अधिनियम के तहत एक मंदिर के देवता और उसकी संपत्ति के प्रबंधक को हटाने से संबंधित आदेश के खिलाफ दायर लेटर्स पेटेंट अपील (LPA) को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि जब किसी कानून में स्पष्ट रूप से आगे अपील पर रोक लगाई गई है, तो उसे अनदेखा नहीं किया जा सकता और उसका कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए।अदालत ने बताया कि धारा 55(2) के तहत यह स्पष्ट रूप से कहा गया कि धारा 55(1) के अंतर्गत पारित किसी भी आदेश के खिलाफ कोई आगे अपील नहीं की जा सकती।अधिनियम की धारा 55(1) के...
Byju के आरपी ने आकाश की शेयरधारिता पर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट से वापस ली
सुप्रीम कोर्ट ने थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड (एड-टेक प्लेटफॉर्म Byju चलाने वाली कंपनी) के समाधान पेशेवर द्वारा दायर याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। इसमें कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें आकाश एजुकेशनल सर्विसेज लिमिटेड (Byju की सहायक कंपनी) की शेयरधारिता पर यथास्थिति बनाए रखने के NCLT के निर्देश को खारिज कर दिया गया था।हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपील उपाय होने पर राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण के आदेश में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप को मंजूरी नहीं दी, लेकिन उसने हाईकोर्ट...
पीड़िता को अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में क्यों छोड़ा गया? पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने POCSO Cout से पूछा
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक स्पेशल POCSO Court से यह रिपोर्ट देने को कहा है कि बलात्कार के मामले में पीड़िता को अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में क्यों छोड़ा गया।जस्टिस अमरजोत भट्टी ने कहा,"पीड़िता का बयान दर्ज करना मुकदमे के उचित और अंतिम निर्णय के लिए महत्वपूर्ण है। यह अजीब है कि पीड़िता को अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में लोक अभियोजक द्वारा छोड़ दिया गया और यह तथ्य जिम्नी आदेश में शामिल है..."इसके परिणामस्वरूप, न्यायालय ने संबंधित एडिशनल जिला एवं सेशन जज/फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट, (POCSO) से...
परित्याग के लिए केवल अलगाव नहीं, बल्कि इरादे की आवश्यकता होती है: झारखंड हाईकोर्ट ने पति की तलाक की अपील खारिज की
झारखंड हाईकोर्ट ने माना कि तलाक के लिए आधार के रूप में परित्याग को केवल शारीरिक अलगाव के माध्यम से स्थापित नहीं किया जा सकता, जब तक कि यह साबित न हो जाए कि अलग होने वाले पति या पत्नी का वैवाहिक संबंध हमेशा के लिए खत्म करने का इरादा था।न्यायालय ने तलाक से इनकार करने वाला फैमिली कोर्ट का फैसला बरकरार रखते हुए इस बात पर जोर दिया कि परित्याग के लिए अलगाव के तथ्य और हमेशा के लिए सहवास को समाप्त करने के इरादे दोनों की आवश्यकता होती है। कोर्ट ने पाया कि मामले में पति इस कानूनी दायित्व का निर्वहन करने...
राज्य ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों के अधिकारों को सिर्फ़ इसलिए नहीं कुचल सकता कि उनमें साक्षरता की कमी है या उनके पास अदालत जाने का साधन नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि सभ्य समाज में कानून के इस्तेमाल में भेदभाव की कोई जगह नहीं है। किसी नागरिक को सिर्फ़ इसलिए उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता, क्योंकि उसने समय पर अदालत या अधिकारियों से संपर्क नहीं किया।जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस सोमशेखर सुंदरसन की खंडपीठ ने महाराष्ट्र सरकार को कोल्हापुर जिले के कुछ परिवारों को उचित राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया, जिनकी ज़मीनें सितंबर 1990 में दूधगंगा सिंचाई परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थीं।खंडपीठ ने कहा,"कानून के शासन...




















