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लगभग शून्य कट-ऑफ पर राजस्थान हाइकोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- भर्ती में न्यूनतम योग्यता सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी
लगभग शून्य कट-ऑफ पर राजस्थान हाइकोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- भर्ती में न्यूनतम योग्यता सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी

राजस्थान हाइकोर्ट ने सरकारी भर्ती प्रक्रिया में बेहद कम कट-ऑफ अंक को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक रोजगार में चयन के लिए राज्य को न्यूनतम मानक सुनिश्चित करना जरूरी है ताकि चयनित उम्मीदवार बुनियादी जिम्मेदारियों को संतोषजनक ढंग से निभा सकें।जस्टिस आनंद शर्मा की पीठ एक अभ्यर्थी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने चतुर्थ श्रेणी शिक्षक भर्ती में अपनी उम्मीदवारी खारिज किए जाने को चुनौती दी। याचिकाकर्ता को परीक्षा में नकारात्मक अंक मिलने के कारण अयोग्य ठहराया गया, जबकि राज्य...

अनुसूचित जनजाति का व्यक्ति चाहे तो हिंदू विवाह अधिनियम के तहत अदालत आ सकता है: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट
अनुसूचित जनजाति का व्यक्ति चाहे तो हिंदू विवाह अधिनियम के तहत अदालत आ सकता है: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि यदि अनुसूचित जनजाति (एसटी) का कोई व्यक्ति स्वेच्छा से हिंदू रीति-रिवाज, परंपराएं और संस्कार अपनाता है तथा हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत अदालत के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार करता है, तो उसे केवल इस आधार पर अधिनियम के दायरे से बाहर नहीं किया जा सकता कि इस कानून की धारा 2(2) सामान्यतः एसटी समुदाय पर लागू नहीं होती।जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने यह स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि जनजातीय समुदाय का कोई सदस्य स्वयं...

जो लोग फैसले से नाराज़ नहीं हैं, वे रिव्यू की मांग कर सकते हैं या उसे चुनौती दे सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट
जो लोग फैसले से नाराज़ नहीं हैं, वे रिव्यू की मांग कर सकते हैं या उसे चुनौती दे सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फिर कहा कि जो लोग किसी केस में पक्षकार नहीं थे, लेकिन फैसले से उन पर बुरा असर पड़ा है, उनके पास भी उपाय है और वे सही फोरम के सामने फैसले का रिव्यू कर सकते हैं या उसे चुनौती दे सकते हैं।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच ने केरल टेक्निकल एजुकेशन सर्विस में प्रमोशन को लेकर हुए विवाद से जुड़ी अपील पर फैसला सुनाते हुए यह बात कही।कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सर्विस मामलों में कभी-कभी अदालती फैसले उन कर्मचारियों पर भी असर डाल सकते हैं, जो कार्रवाई में पक्षकार नहीं...

प्रॉपर्टी डील में सिविल स्कोर सेटल करने के लिए क्रिमिनल प्रोसीडिंग्स का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने FIR रद्द की
'प्रॉपर्टी डील में सिविल स्कोर सेटल करने के लिए क्रिमिनल प्रोसीडिंग्स का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता': पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने FIR रद्द की

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक लैंड एग्रीमेंट विवाद से जुड़ी धोखाधड़ी और जालसाजी की FIR यह मानते हुए रद्द की कि क्रिमिनल केस सिविल लायबिलिटी से बचने के लिए दर्ज किया गया और यह क्रिमिनल प्रोसेस का गलत इस्तेमाल था।जस्टिस एच.एस. ग्रेवाल ने कहा,"पहली नज़र में पिटीशनर्स के खिलाफ आरोप नहीं बनते, क्योंकि जिस एग्रीमेंट टू सेल की बात हो रही है, वह एक असली डॉक्यूमेंट है, जो एक रजिस्टर्ड एग्रीमेंट है। कटिंग या ओवरराइटिंग का कोई आरोप नहीं है, जो रिकॉर्ड में साफ दिख सकता है और यह आरोप कि "Rs.1.25 करोड़" के...

मात्र वकील की मदद से दायर की गई FIR को संदिग्ध या कमज़ोर नहीं माना जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
मात्र वकील की मदद से दायर की गई FIR को संदिग्ध या कमज़ोर नहीं माना जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि FIR को सिर्फ़ इसलिए संदिग्ध या कमज़ोर नहीं माना जा सकता, क्योंकि इसे वकील की मदद से दर्ज किया गया।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस अबधेश कुमार चौधरी की डिवीज़न बेंच ने कहा कि क्रिमिनल कार्रवाई के सभी स्टेज पर सभी को कानूनी मदद मिलती है। FIR दर्ज करने के स्टेज पर भी इसका फ़ायदा उठाया जा सकता है।कोर्ट ने कहा,"सिर्फ़ इस आधार पर कि FIR एक वकील की मदद से लिखी गई, यह नहीं माना जा सकता कि इन्फॉर्मेंट ने अपीलेंट के ख़िलाफ़ झूठी FIR दर्ज कराई। इसके अलावा, एक वकील की मदद से...

जज पर झूठे आरोप लगाने के आरोपी के खिलाफ केस रद्द, हाईकोर्ट ने DGP से BNSS की धारा 215 पर पुलिस अवेयरनेस प्रोग्राम चलाने को कहा
जज पर झूठे आरोप लगाने के आरोपी के खिलाफ केस रद्द, हाईकोर्ट ने DGP से BNSS की धारा 215 पर पुलिस अवेयरनेस प्रोग्राम चलाने को कहा

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने ज्यूडिशियल ऑफिसर के खिलाफ झूठे आरोप लगाने के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ शुरू की गई क्रिमिनल कार्रवाई यह मानते हुए रद्द की कि मुकदमा कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर (CrPC) की धारा 195 के तहत ज़रूरी प्रोसीजरल सेफगार्ड्स का उल्लंघन करके शुरू किया गया।जस्टिस सुमीत गोयल ने कहा कि स्टेशन हाउस ऑफिसर द्वारा फाइल किया गया कलंद्रा मेंटेनेबल नहीं था, जहां ओरिजिनल कंप्लेंट एक बड़े पुलिस अथॉरिटी को की गई। कार्रवाई रद्द करते हुए कोर्ट ने पंजाब के डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस को भारतीय नागरिक...

S. 202 CrPC | मजिस्ट्रेट अपने इलाके के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहने वाले आरोपी को समन जारी करने से पहले पूछताछ करने के लिए मजबूर: उत्तराखंड हाईकोर्ट
S. 202 CrPC | मजिस्ट्रेट अपने इलाके के अधिकार क्षेत्र से बाहर रहने वाले आरोपी को समन जारी करने से पहले पूछताछ करने के लिए मजबूर: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फिर कहा कि क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) की धारा 202 के तहत मजिस्ट्रेट के लिए यह ज़रूरी है कि वह प्रोसेस जारी करने को टाल दे और यह पता लगाने के लिए कि आरोपी के खिलाफ समन जारी करने के लिए कार्रवाई करने का काफ़ी आधार है या नहीं, या तो पूछताछ करे या जांच का निर्देश दे।जस्टिस आशीष नैथानी की बेंच का मानना ​​था कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NI Act) की धारा 138 के तहत चेक बाउंस होने के मामलों में भी ऊपर बताया गया प्रोसीजरल सेफगार्ड ज़रूरी है। इसलिए मजिस्ट्रेट के इलाके के अधिकार...

आरोपी दोषी को जांच रिपोर्ट न देना सज़ा का आदेश रद्द करता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
'आरोपी दोषी को जांच रिपोर्ट न देना सज़ा का आदेश रद्द करता है': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी कॉलेज के इंचार्ज प्रिंसिपल के सज़ा के आदेश को यह कहते हुए रद्द किया कि डिसिप्लिनरी अथॉरिटी कर्मचारी को जांच रिपोर्ट देने में नाकाम रही, जिससे सज़ा का आदेश रद्द हो गया।जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की बेंच ने कहा;"क्योंकि जांच रिपोर्ट की कॉपी याचिकाकर्ता को नहीं दी गई और जांच ऑफिसर द्वारा दर्ज किए गए नतीजों पर जवाब दाखिल करने के लिए याचिकाकर्ता को सुनवाई का मौका नहीं दिया गया, इसलिए जांच ऑफिसर द्वारा दर्ज किए गए नतीजों के आधार पर सज़ा का आदेश पास किया गया। इसलिए इस कोर्ट...

ट्रैक के पास बिजली का खंभा: हिमचाल प्रदेश हाईकोर्ट ने रेलवे एक्ट के तहत शिमला के पार्षद के खिलाफ FIR रद्द की
ट्रैक के पास बिजली का खंभा: हिमचाल प्रदेश हाईकोर्ट ने रेलवे एक्ट के तहत शिमला के पार्षद के खिलाफ FIR रद्द की

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने रेलवे एक्ट, 1989 की धारा 153 (जानबूझकर या गलती से रेलवे से यात्रा करने वाले लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालना) के तहत दर्ज FIR रद्द की।कोर्ट ने माना कि रिकॉर्ड में याचिकाकर्ता के किसी भी गैर-कानूनी या जानबूझकर किए गए काम का खुलासा नहीं हुआ, जिसके बारे में कहा जा सके कि उसने रेलवे यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डाला हो।कोर्ट ने आगे कहा कि याचिकाकर्ता की कोई सीधी भागीदारी नहीं थी। साथ ही कोई भी रिकॉर्ड यह नहीं दिखाता कि सक्षम अधिकारी से मंजूरी मिलने के बाद वह काम करने...

नो वर्क नो पे तब लागू नहीं होता, जब अधिकारी कर्मचारी को उसकी गलती के बिना काम से दूर रखते हैं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
'नो वर्क नो पे' तब लागू नहीं होता, जब अधिकारी कर्मचारी को उसकी गलती के बिना काम से दूर रखते हैं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी कर्मचारी को पहले गलत तरीके से प्रमोशन न मिलने के बाद रेट्रोस्पेक्टिव या डीम्ड प्रमोशन दिया जाता है तो एम्प्लॉयर “नो वर्क नो पे” के सिद्धांत का इस्तेमाल करके उसे होने वाले पैसे के फायदे देने से मना नहीं कर सकता।कोर्ट ने एक सरकारी कर्मचारी की उस याचिका को मंज़ूरी दी, जिसमें उसने डिपार्टमेंट के आदेशों के उन क्लॉज़ को चुनौती दी थी, जिनमें उसे रेट्रोस्पेक्टिव प्रमोशन देने के बावजूद सैलरी का बकाया देने से मना कर दिया गया।जस्टिस संदीप मौदगिल ने कहा,"'नो...

सिक्योरिटी सबसे ज़रूरी: हाईकोर्ट ने मुंबई एयरपोर्ट पर नमाज़ पढ़ने की इजाज़त देने से किया इनकार
'सिक्योरिटी सबसे ज़रूरी': हाईकोर्ट ने मुंबई एयरपोर्ट पर नमाज़ पढ़ने की इजाज़त देने से किया इनकार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट (CSMIA) पर मुस्लिम ड्राइवरों और यात्रियों को रमजान के कुछ समय के लिए भी नमाज़ पढ़ने की इजाज़त देने से मना किया। साथ ही यह भी साफ़ किया कि वह किसी भी कीमत पर एयरपोर्ट की सिक्योरिटी से समझौता नहीं कर सकता और चाहे वह धर्म हो या कुछ और, कोर्ट सिर्फ़ सिक्योरिटी का पक्ष लेगा।जस्टिस बर्गेस कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पूनीवाला की डिवीज़न बेंच ने कहा कि एयरपोर्ट पर सभी धर्मों के लोग आते हैं। इसलिए हर यात्री की सिक्योरिटी, चाहे वह...

भरण-पोषण नहीं देने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पति के वेतन से हर महीने 25 हजार काटकर पत्नी के खाते में भेजने का आदेश
भरण-पोषण नहीं देने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पति के वेतन से हर महीने 25 हजार काटकर पत्नी के खाते में भेजने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए पति के नियोक्ता को निर्देश दिया कि वह उसके वेतन से हर महीने 25 हजार रुपये काटकर सीधे उसकी अलग रह रही पत्नी के बैंक खाते में जमा करे। यह राशि पत्नी और उनकी नाबालिग बेटी के भरण-पोषण के लिए दी जाएगी।जस्टिस जे.बी.पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने यह आदेश तब दिया, जब पाया कि पति पहले दिए गए अदालत के आदेशों का पालन नहीं कर रहा था और 2022 से अलग रहने के बावजूद उसने पत्नी और बच्ची के लिए कोई भरण-पोषण राशि नहीं दी।अदालत ने कहा कि दंपति की...

द केरल स्टोरी 2 के खिलाफ नई जनहित याचिका पर सुनवाई से हाइकोर्ट का इनकार, दूसरी पीठ पर टिप्पणी करने पर याचिकाकर्ता को फटकार
'द केरल स्टोरी 2' के खिलाफ नई जनहित याचिका पर सुनवाई से हाइकोर्ट का इनकार, दूसरी पीठ पर टिप्पणी करने पर याचिकाकर्ता को फटकार

केरल हाइकोर्ट ने गुरुवार को फिल्म 'द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड' के टाइटल को बदलने की मांग वाली नई जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार किया। अदालत ने कहा कि इसी मुद्दे से जुड़े मामले पहले से ही एक अन्य समन्वय पीठ के समक्ष लंबित हैं, इसलिए इस चरण में हस्तक्षेप करना न्यायिक अनुशासन के खिलाफ होगा।चीफ जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस श्याम कुमार वी.एम. की खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा कि यदि इस याचिका पर अभी कोई आदेश दिया जाता है तो उससे उस आदेश का प्रभाव कम हो जाएगा, जिसके तहत दूसरी पीठ ने फिल्म की रिलीज की...

गुजरात सिविल जज भर्ती प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, हाइकोर्ट और राज्य सरकार से जवाब तलब
गुजरात सिविल जज भर्ती प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, हाइकोर्ट और राज्य सरकार से जवाब तलब

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर गुजरात हाइकोर्ट और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। अदालत ने दोनों से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को तय की।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने 26 फरवरी को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया।यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत 20 अभ्यर्थियों ने दायर की, जिन्होंने भर्ती परीक्षा में भाग लिया था। याचिका में कहा गया...

छह साल तक फैसला न सुनाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, इलाहाबाद हाइकोर्ट से तीन मामले अपने पास मंगाए
छह साल तक फैसला न सुनाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, इलाहाबाद हाइकोर्ट से तीन मामले अपने पास मंगाए

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाइकोर्ट द्वारा छह साल तक फैसला सुरक्षित रखने के बावजूद निर्णय न सुनाए जाने पर कड़ा रुख अपनाते हुए तीन आपराधिक पुनर्विचार याचिकाएं अपने पास स्थानांतरित कर ली हैं। इन मामलों के लंबित रहने के कारण वर्ष 1994 के एक हत्या मामले की सुनवाई वर्षों से ठप पड़ी हुई।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 139ए का प्रयोग करते हुए कहा कि सामान्यतः अदालतें अनुच्छेद 32 की याचिका में इस तरह की असाधारण शक्ति का उपयोग नहीं करतीं लेकिन इस मामले में न्याय में...

एक ही आदेश के खिलाफ दो समानांतर उपाय नहीं अपना सकता पक्षकार: राजस्थान हाइकोर्ट
एक ही आदेश के खिलाफ दो समानांतर उपाय नहीं अपना सकता पक्षकार: राजस्थान हाइकोर्ट

राजस्थान हाइकोर्ट ने कहा कि किसी आदेश या निर्णय के खिलाफ एक ही समय में दो समानांतर कानूनी उपाय अपनाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने इस आधार पर एक पुनर्विचार याचिका खारिज की।जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने कहा कि जब कोई पक्षकार उपाय चुन लेता है तो उसे उसी के साथ आगे बढ़ना होगा। यदि उस उपाय से राहत नहीं मिलती तो वह बीच में दूसरा उपाय अपनाकर दो नावों पर सवार” नहीं हो सकता।अदालत ने कहा,“दो समानांतर उपाय अपनाकर याचिकाकर्ता दो नावों में सवार होने का प्रयास कर रहा...

S.133 Contract Act | बिना सहमति के लोन लिमिट में बदलाव के बाद कर्जदार के पैसे निकालने पर श्योरिटी ज़िम्मेदार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
S.133 Contract Act | बिना सहमति के लोन लिमिट में बदलाव के बाद कर्जदार के पैसे निकालने पर श्योरिटी ज़िम्मेदार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि गारंटर की सहमति के बिना कर्जदार द्वारा मंज़ूर लिमिट से ज़्यादा निकाले गए लोन अमाउंट के लिए गारंटर ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि, गारंटर शुरू में गारंटी वाले लोन अमाउंट के लिए ज़िम्मेदार रहेगा।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच ने गुजरात हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें कहा गया कि लोन एग्रीमेंट में अंतर होने पर श्योरिटी पूरी ज़िम्मेदारी से मुक्त हो जाएगी।कोर्ट ने इंडियन कॉन्ट्रैक्ट एक्ट के चैप्टर VIII, खासकर धारा 133 और 139 के तहत...