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बांके बिहारी मंदिर के भक्त ने पुनर्विकास योजना की अनुमति वाले आदेश में बदलाव के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
बांके बिहारी मंदिर के भक्त ने पुनर्विकास योजना की अनुमति वाले आदेश में बदलाव के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

कोर्ट में अपने पहले के फैसले को संशोधित करने के लिए एक याचिका दायर की गई है, जिसमें उसने उत्तर प्रदेश सरकार को श्री बांके बिहारी मंदिर (वृंदावन) से गलियारे के विकास के लिए मंदिर के चारों ओर 5 एकड़ भूमि का अधिग्रहण करने के लिए धन का उपयोग करने की अनुमति दी थी, इस शर्त पर कि अधिग्रहित भूमि देवता के नाम पर पंजीकृत होगी।आवेदक की ओर से सीनियर एडवोकेट अमित आनंद तिवारी ने चीफ़ जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस ए जी मसीह की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कहा कि उक्त निर्णय आवेदक को पक्षकार बनाए बिना एकतरफा...

2001 हमले की बरसी पर संसद में प्रदर्शन क्यों किया?: 2023 सुरक्षा उल्लंघन मामले में आरोपी से दिल्ली हाईकोर्ट का सवाल
2001 हमले की बरसी पर संसद में प्रदर्शन क्यों किया?: 2023 सुरक्षा उल्लंघन मामले में आरोपी से दिल्ली हाईकोर्ट का सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार (20 मई) को 13 दिसंबर, 2023 को हुए संसद सुरक्षा उल्लंघन मामले में आरोपी नीलम आजाद और महेश कुमावत द्वारा दायर जमानत याचिकाओं पर आदेश सुरक्षित रख लिया।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने आरोपी के वकीलों और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एएसजी चेतन शर्मा की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने आरोपियों के वकीलों से सवाल किया कि विशिष्ट तारीख और स्थल का चयन क्यों किया गया जबकि विरोध प्रदर्शन के लिए अन्य निर्धारित...

कठमुल्लापन टिप्पणी | कोर्ट ने सीएम योगी के खिलाफ मानहानि की शिकायत खारिज करना बरकरार रखा
'कठमुल्लापन' टिप्पणी | कोर्ट ने सीएम योगी के खिलाफ मानहानि की शिकायत खारिज करना बरकरार रखा

लखनऊ की जिला जज बबीता रानी ने पिछले सप्ताह मजिस्ट्रेट कोर्ट का आदेश बरकरार रखा, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ इस साल फरवरी में विधान परिषद को संबोधित करते हुए उनके 'कठमुल्लापन' वाले बयान को लेकर दायर मानहानि की शिकायत खारिज कर दी गई थी। इस टिप्पणी का एक वीडियो उनके आधिकारिक 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर शेयर किया गया था।पूर्व आईपीएस अधिकारी और वर्तमान में आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर द्वारा दायर की गई शिकायत में दावा किया गया था कि सीएम आदित्यनाथ की...

Chhattisgarh Liquor Scam | निकट भविष्य में मुकदमा शुरू होने की कोई संभावना नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने PMLA आरोपी को जमानत दी
Chhattisgarh Liquor Scam | 'निकट भविष्य में मुकदमा शुरू होने की कोई संभावना नहीं': सुप्रीम कोर्ट ने PMLA आरोपी को जमानत दी

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी रायपुर के पूर्व मेयर एजाज ढेबर के भाई और व्यवसायी अनवर ढेबर को जमानत दी।जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने कहा कि अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम सजा सात साल है और निकट भविष्य में मुकदमा शुरू होने की कोई संभावना नहीं है।कोर्ट ने कहा,"सेंथिल बालाजी बनाम उप निदेशक के मामले में निर्धारित कानून के अनुसार, अपीलकर्ता जमानत पर रिहा होने का हकदार है।"सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जमानत याचिका का...

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 472 : मृत्युदंड प्राप्त दोषी द्वारा दया याचिका दायर करने की प्रक्रिया
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 472 : मृत्युदंड प्राप्त दोषी द्वारा दया याचिका दायर करने की प्रक्रिया

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 72 और 161 के अंतर्गत राष्ट्रपति और राज्यपाल को दोषियों को क्षमादान, दंड को निलंबित करने, दंड को क्षमित करने अथवा दंड को परिवर्तित करने की शक्ति प्राप्त है। इन्हीं संवैधानिक प्रावधानों के तहत दया याचिका की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से भारतीय नगरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 472 में विधिवत तरीके से सम्मिलित किया गया है।यह धारा विशेष रूप से उन दोषियों से संबंधित है जिन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है और वे या उनके परिजन राष्ट्रपति या राज्यपाल के समक्ष दया याचिका प्रस्तुत...

राजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 91 से 93 के अंतर्गत अतिक्रमण की स्थिति में तहसीलदार द्वारा की जाने वाली कानूनी कार्यवाही
राजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 91 से 93 के अंतर्गत अतिक्रमण की स्थिति में तहसीलदार द्वारा की जाने वाली कानूनी कार्यवाही

धारा 91 - भूमि का अनधिकृत अधिभोग (Unauthorised Occupation of Land)राजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम की धारा 91 इस बात से संबंधित है कि यदि कोई व्यक्ति राज्य की भूमि पर बिना वैध अधिकार के कब्जा कर लेता है या वैध अधिकार समाप्त हो जाने के बाद भी कब्जा बनाए रखता है, तो उसे 'अतिक्रमणकर्ता' (trespasser) माना जाएगा। इस धारा के अंतर्गत तहसीलदार को ऐसे अतिक्रमणकर्ताओं को बिना किसी लम्बी प्रक्रिया के हटाने का अधिकार दिया गया है। अतिक्रमण की स्थिति में कार्यवाही यदि कोई व्यक्ति किसी सरकारी भूमि पर कब्जा कर...

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एंड हरियाणा बार काउंसिल के चेयरमैन को हरियाणा बार चुनाव कराने के लिए पूर्व हाईकोर्ट जज के नामांकन पर प्रस्ताव पेश करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एंड हरियाणा बार काउंसिल के चेयरमैन को हरियाणा बार चुनाव कराने के लिए पूर्व हाईकोर्ट जज के नामांकन पर प्रस्ताव पेश करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एंड हरियाणा बार काउंसिल के चेयरमैन को हरियाणा में बार चुनाव कराने के लिए पूर्व हाईकोर्ट जज के नामांकन के संबंध में 2 दिन के भीतर प्रस्ताव पेश करने को कहा।कोर्ट ने कहा कि इस तरह से नामित पूर्व जज को अधिमानतः बार एसोसिएशन/बार काउंसिल के कामकाज से अच्छी तरह वाकिफ होना चाहिए।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने यह आदेश तब पारित किया जब पीएंडएच बार काउंसिल की ओर से पेश हुए वकील ने उपरोक्त संबंध में आवश्यक निर्देश देने में विफल रहे, जबकि कोर्ट ने पहले ही बार...

सेवारत भारतीय महिला सैन्य अधिकारियों की रिहाई पर रोक लगाने का आदेश उन अधिकारियों पर लागू होगा जिनके मामले SC/HC/AFT के समक्ष लंबित हैं: सुप्रीम कोर्ट
सेवारत भारतीय महिला सैन्य अधिकारियों की रिहाई पर रोक लगाने का आदेश उन अधिकारियों पर लागू होगा जिनके मामले SC/HC/AFT के समक्ष लंबित हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय सेना की सेवारत महिला अधिकारियों की रिहाई पर रोक लगाने के अपने अंतरिम आदेश को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह उन सभी अधिकारियों पर लागू होगा, जिनके मामले सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट या सशस्त्र बल न्यायाधिकरणों (SC/HC/AFT) के समक्ष लंबित हैं।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी (संघ की ओर से) द्वारा एक आवेदन के उल्लेख के अनुसरण में यह आदेश पारित किया।आदेश में इस प्रकार कहा गया:"दिनांक 09.05.2025 के आदेश को इस आशय से स्पष्ट किया...

तुच्छ मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर न देखें; संबंधित व्यक्तियों ने खेद व्यक्त किया: महाराष्ट्र प्रोटोकॉल उल्लंघन पर सीजेआई गवई
तुच्छ मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर न देखें; संबंधित व्यक्तियों ने खेद व्यक्त किया: महाराष्ट्र प्रोटोकॉल उल्लंघन पर सीजेआई गवई

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई ने अनुरोध किया कि महाराष्ट्र राज्य की उनकी यात्रा के दौरान प्रोटोकॉल उल्लंघन के मुद्दे को शांत किया जाए, क्योंकि सभी संबंधित व्यक्तियों ने पहले ही खेद व्यक्त किया।सीजेआई गवई ने आग्रह किया कि तुच्छ मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर न दिखाया जाए।इस संबंध में जारी प्रेस नोट में कहा गया:"चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की महाराष्ट्र यात्रा के दौरान प्रोटोकॉल मुद्दों के बारे में मीडिया में समाचार प्रकाशित हो रहे हैं। सभी संबंधित व्यक्तियों ने पहले ही खेद व्यक्त किया। चीफ जस्टिस ऑफ...

सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जजों की पदोन्नति के लिए LDCE कोटा बढ़ाया, योग्यता सेवा में कटौती की
सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जजों की पदोन्नति के लिए LDCE कोटा बढ़ाया, योग्यता सेवा में कटौती की

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निर्देश दिया कि सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के कैडर से जिला जजों के रूप में पदोन्नति के लिए सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा का कोटा 10% से बढ़ाकर 25% किया जाए।कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट और राज्य सरकारों को इस संबंध में अपने सेवा नियमों में संशोधन करने का निर्देश दिया।साथ ही LDCE में उपस्थित होने के लिए सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के लिए आवश्यक न्यूनतम योग्यता सेवा अवधि को घटाकर तीन वर्ष कर दिया गया। इसके अलावा, कोर्ट ने निर्देश दिया कि LDCE के माध्यम से तीन साल की योग्यता सेवा...

अंतरिम राहत के लिए मजबूत वजह जरूरी: सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधन कानून 2025 पर रोक लगाने की याचिका पर सुनवाई की
'अंतरिम राहत के लिए मजबूत वजह जरूरी': सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधन कानून 2025 पर रोक लगाने की याचिका पर सुनवाई की

सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करने के सवाल पर वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर तीन घंटे से अधिक समय तक सुनवाई की।सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा कि कानून पर रोक लगाने के लिए मजबूत मामला पेश करना होगा।सीजेआई गवई ने कहा,"हर कानून के पक्ष में संवैधानिकता की धारणा होती है। अंतरिम राहत के लिए आपको बहुत मजबूत और स्पष्ट मामला पेश करना होगा। अन्यथा, संवैधानिकता की धारणा बनी रहेगी।"सीनियर एडवोकेट कपिल...

सुप्रीम कोर्ट ने माफी के बाद आरोपियों का प्रतिनिधित्व करते हुए पीड़ितों के लिए याचिका दायर करने वाले वकील को दी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने माफी के बाद आरोपियों का प्रतिनिधित्व करते हुए पीड़ितों के लिए याचिका दायर करने वाले वकील को दी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 9 मई के अपने आदेश के एक हिस्से को वापस ले लिया, जिसमें तमिलनाडु बार काउंसिल के सचिव को तमिलनाडु कैश-फॉर-जॉब घोटाला मामले के संबंध में पेशेवर कदाचार के लिए अधिवक्ता एन सुब्रमण्यम के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था। न्यायालय ने 9 मई को उसी मामले से संबंधित मुकदमे में आरोपी संख्या 18 का प्रतिनिधित्व करते हुए भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की ओर से एसएलपी दायर करने के लिए अधिवक्ता सुब्रमण्यम की खिंचाई की थी।जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की पीठ ने कहा...

जेल से नशा तस्करी में जेल अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाएगी: पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में बताया
जेल से नशा तस्करी में जेल अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाएगी: पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में बताया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद पंजाब सरकार ने कोर्ट को अवगत कराया कि राज्य की जेलों से नशा तस्करी से जुड़े मामलों की जांच के लिए रेंज स्तर और कमिश्नरेट स्तर पर समितियाँ गठित की गई हैं।जस्टिस एन.एस. शेखावत ने पुलिस और जेल अधिकारियों के बीच अशुद्ध गठजोड़ पर चिंता जताई और कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि एसएसपी ने अमृतसर सेंट्रल जेल से नशा तस्करी के मामलों में जेल अधिकारियों से पूछताछ को बहुत हल्के में लिया।कोर्ट के निर्देश के अनुसार एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा जेल से तस्करी के मामलों...

सुप्रीम कोर्ट ने 65 वर्षीय दृष्टिहीन आरोपी को जमानत दी, कहा- ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट आना दुर्भाग्यपूर्ण
सुप्रीम कोर्ट ने 65 वर्षीय दृष्टिहीन आरोपी को जमानत दी, कहा- ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट आना दुर्भाग्यपूर्ण

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 65 वर्षीय आरोपी को जमानत दी उक्त आरोपी 50% दृष्टि विकलांगता से पीड़ित है और 7 महीने से हिरासत में है।जस्टिस अभय एस. ओक और जस्टिस उज्जल भूइयां की पीठ ने यह टिप्पणी की कि ऐसे मामूली अपराधों में भी आरोपी को जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट तक आना पड़े यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।कोर्ट ने कहा,"ये अपराध मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय हैं। अपीलकर्ता 65 वर्ष का है और 50% दृष्टिहीनता से पीड़ित है। वह 7 महीने से अधिक समय से जेल में है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसे मामलों में भी...