ताज़ा खबरे
आग की घटना के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा का व्यवहार अस्वाभाविक, साजिश के सिद्धांत को जांच समिति ने किया खारिज
तीन जजों की इन-हाउस जांच समिति ने जस्टिस यशवंत वर्मा को उनके सरकारी बंगले से सटे स्टोर रूम में अघोषित नकदी रखने के लिए दोषी ठहराते हुए कहा कि 14 मार्च को आग की घटना के बाद उनका व्यवहार अस्वाभाविक था, जिससे उनके खिलाफ नकारात्मक निष्कर्ष निकलते हैं।द लीफलेट द्वारा सार्वजनिक किए गए इस जांच समिति की रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि जस्टिस वर्मा के खिलाफ दुर्व्यवहार के आरोपों में पर्याप्त आधार हैं।नकदी की बरामदगी और जस्टिस वर्मा की जवाबदेहीसमिति ने 55 गवाहों (जिसमें जस्टिस वर्मा और उनकी बेटी भी...
राजस्थान लघु खनिज नियम | राजस्थान हाईकोर्ट ने नियम 16(2) के तहत LOI के विस्तार के लिए लगाए गए जुर्माने की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा
राजस्थान लघु खनिज रियायत नियम, 2017 के नियम 16(2) के प्रावधान 3 की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि एक बार नियम को संवैधानिक और वैधानिक रूप से वैध मान लिया गया तो राज्य द्वारा इसके अनुपालन में की गई किसी भी कार्रवाई को केवल कठिनाई या असुविधा के आधार पर गलत नहीं ठहराया जा सकता। प्रावधान में जारी किए गए आशय पत्र (एलओआई) को एलओआई जारी करने की तिथि से ऐसी विस्तारित अवधि के लिए हर महीने वार्षिक डेड रेंट के 10% की दर से जुर्माना अदा करने की शर्त पर विस्तारित...
मेडिकल लापरवाही साबित करना शिकायतकर्ता की जिम्मेदारी: राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 'फोर्टिस अस्पताल' द्वारा दायर उस अपील को स्वीकार कर लिया, जिसमें अस्पताल ने राज्य आयोग के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें चिकित्सा लापरवाही के लिए अस्पताल को ₹15 लाख का मुआवज़ा देने का निर्देश दिया गया था।आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता अस्पताल और डॉक्टरों के खिलाफ कर्तव्य की अवहेलना, चोट और कारण संबंध को साबित करने में विफल रहे।पुरा मामला:शिकायतकर्ता को फोर्टिस अस्पताल में कुल घुटना प्रत्यारोपण (Total Knee Replacement) के लिए भर्ती कराया गया था। सर्जरी के बाद...
सीपीसी की धारा 47 के तहत पारित आदेश को कब डिक्री माना जा सकता है? राजस्थान हाईकोर्ट ने समझाया
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा सीपीसी की धारा 47 के तहत पारित आदेश को कब डिक्री माना जा सकता है? राजस्थान उच्च न्यायालय ने समझाया सीपीसी की धारा 47 के तहत न्यायालयों द्वारा पारित आदेशों को सीपीसी के आदेश XXI नियम 58, 97 और 99 के साथ पढ़ा जाए तो उन्हें डिक्री माना जाएगा और उन पर सीपीसी की धारा 96 के तहत अपील की जा सकती है।धारा 47 सीपीसी डिक्री निष्पादित करने वाले न्यायालय द्वारा निर्धारित किए जाने वाले प्रश्नों से संबंधित है। आदेश XXI नियम 58 संपत्ति की कुर्की के दावों या आपत्तियों के न्यायनिर्णयन से...
किसी आरोपी को दी गई ज़मानत के खिलाफ़ अपील पर राज्य का 'विचार' करना अन्य सह-आरोपियों को ज़मानत देने से इनकार करने का आधार नहीं है: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि समानता के आधार पर जमानत मांगने वाले व्यक्ति को केवल इसलिए राहत देने से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि राज्य सह-आरोपी को दी गई जमानत के आदेश को चुनौती देने पर विचार कर रहा है और इसलिए, महाराष्ट्र कानून और न्यायपालिका विभाग से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि वह दो सप्ताह के भीतर आदेश के खिलाफ अपील दायर करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे। सिंगल जज अमित बोरकर ने कहा कि जमानत आदेश के खिलाफ अपील दायर करने का मात्र इरादा या विचार ऐसे आदेश के कानूनी प्रभाव या बाध्यकारी...
बिना अधिकार क्षेत्र के तलाशी का मामला: मद्रास हाईकोर्ट ने फिल्म निर्माता के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगाई, ED से जब्त सामग्री लौटाने को कहा
मद्रास हाईकोर्ट ने फिल्म निर्माता आकाश भास्करन और व्यवसायी विक्रम रविंद्रन के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा शुरू की गई सभी कार्यवाही पर रोक लगा दी। न्यायालय ने ED को याचिकाकर्ताओं से जब्त सभी सामग्री लौटाने का भी निर्देश दिया।जस्टिस एमएस रमेश और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायण की खंडपीठ ने कहा कि जिस प्राधिकरण के आधार पर ED ने याचिकाकर्ताओं के कार्यालयों और आवासों पर तलाशी ली थी वह प्रथम दृष्टया अधिकार क्षेत्र के बिना था, क्योंकि उनके खिलाफ कोई भी आपत्तिजनक सामग्री नहीं थी।न्यायालय ने यह भी कहा कि...
अरविंद दातार के बाद ED ने एक और सीनियर एडवोकेट को भेजा समन
सिनियर एडवोकेट अरविंद दातार के बाद अब ED ने मि. केयर हेल्थ इंश्योरेंस को दी गई कानूनी सलाह को लेकर एक और सिनियर एडवोकेट को समन जारी किया है। यह कानूनी सलाह रिलायंस एंटरप्राइज़ेज़ की पूर्व चेयरपर्सन रश्मि सलूजा को जारी किए गए ESOPs (इंप्लॉयी स्टॉक ओनरशिप) से संबंधित थी।यह समन सिनियर एडवोकेट प्रताप वेणुगोपाल को 18 जून को जारी किया गया, जिसमें उनसे यह कहा गया कि वे मि. केयर हेल्थ इंश्योरेंस लिमिटेड (CHIL) और मि. रेलिगेयर एंटरप्राइज़ेज़ लिमिटेड (REL) के बीच ESOPs पर दी गई कानूनी राय से संबंधित...
अगर मांसाहारी भोजन से धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं, तो शाकाहारी व्यक्ति मांसाहारी भोजन परोसने वाले रेस्टोरेंट से ऑर्डर क्यों करता है? : मुंबई उपभोक्ता आयोग
अगर कोई व्यक्ति "कट्टर" शाकाहारी है और मांसाहारी भोजन उसकी धार्मिक भावनाओं को "आहत" करता है, तो वह ऐसे रेस्टोरेंट से भोजन क्यों मंगवाता है जो शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह का भोजन परोसता है? — मुंबई की उपभोक्ता अदालत ने यह सवाल उठाया। अदालत ने उन दो व्यक्तियों की शिकायत खारिज कर दी, जिन्होंने यह दावा किया था कि लोकप्रिय फूड चेन "Wow Momo" ने उन्हें चिकन मोमोज भेज दिए, जिससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।मुंबई उपनगरीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष प्रदीप काडु और सदस्य गौरी कापसे की पीठ...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बाल बलात्कार मामले में मृत्युदंड की सजा कम की, कहा- 'यह कृत्य क्रूर था, लेकिन क्रूरता से नहीं किया गया'
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गुरुवार (19 जून) को अनुसूचित जनजाति के 20 वर्षीय व्यक्ति की मृत्युदंड की सजा कम की, जिसे 4 वर्षीय बच्चे के साथ बलात्कार करने का दोषी पाया गया था। निचली अदालत ने यह देखते हुए मृत्युदंड दिया था कि बच्चा स्थायी रूप से दिव्यांग हो गया था। हाईकोर्ट ने अपराध की गंभीरता स्वीकार करते हुए कहा कि यद्यपि यह कृत्य निर्विवाद रूप से क्रूर था, लेकिन इसे क्रूरता से नहीं किया गया।खंडपीठ ने सजा आजीवन कारावास में बदलते हुए दोषी के इतिहास, उसकी शिक्षा की कमी और आदिवासी पृष्ठभूमि जैसे कुछ कम...
हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के PGIMER हॉस्पिटल में स्टाफ की कमी पर लिया स्वतः संज्ञान
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुवार को चंडीगढ़ के पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) में नर्सिंग स्टाफ और अस्पताल परिचारकों की कमी का स्वतः संज्ञान लिया।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमन चौधरी की खंडपीठ ने कहा,"17.06.2025 को 'टाइम्स ऑफ इंडिया' की रिपोर्ट के आधार पर वर्तमान याचिका को रिट याचिका के रूप में स्वीकार किया गया। इस रिपोर्ट में में अस्पताल परिचारकों और नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी के कारण मरीजों और उनके परिचारकों की दुर्दशा को उजागर किया गया था।"PGIMER,...
गुरुग्राम में DLF रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के लिए पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरूवार को गुरुग्राम DLF में एक नए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट विकसित करने के लिए कथित तौर पर 2000 पेड़ों की कटाई के खिलाफ स्वतः संज्ञान जनहित याचिका (पीआईएल) शुरू की।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमन चौधरी की खंडपीठ ने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान याचिका पर विचार किया।न्यायालय ने कहा,"कार्यालय को हरियाणा राज्य के अलावा DLF लिमिटेड (पूर्व में दिल्ली भूमि एवं वित्त), शॉपिंग मॉल, तीसरी मंजिल, अर्जुन मार्ग, DLF सिटी फेज-1, गुरुग्राम, हरियाणा, 122002, इसके...
अनुच्छेद 285 के तहत रेलवे संपत्ति पर नहीं लगेगा कोई भी टैक्स: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में टिप्पणी की कि संघ की संपत्ति संविधान के अनुच्छेद 285(1) के अनुसार राज्य द्वारा लगाए गए किसी भी टैक्स से मुक्त होगी, भले ही उसका उपयोग वाणिज्यिक उद्देश्य से किया जाए।न्यायालय ने टिप्पणी की,“केवल इसलिए कि संबंधित संपत्ति का वाणिज्यिक उपयोग किया गया, इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। भारत के संविधान के अनुच्छेद 285(1) की स्पष्ट भाषा यह संकेत देती है कि संघ की संपत्ति राज्य या राज्य के भीतर किसी भी प्राधिकरण द्वारा लगाए गए सभी करों से मुक्त होगी।”जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और...
तमिलनाडु सर्विस नियमों के तहत वैवाहिक विवाद कदाचार, सरकारी विभाग कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर सकता है: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि तमिलनाडु सरकारी कर्मचारी आचरण नियम, 1973 के तहत वैवाहिक विवाद को कदाचार माना जाता है और सरकारी विभागों को ऐसे कदाचार के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का अधिकार है।जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम और जस्टिस एडी मारिया क्लेटे की खंडपीठ ने कहा कि सरकारी कर्मचारी से न केवल कार्यालय के अंदर बल्कि बाहर भी ईमानदारी, निष्ठा और अच्छे आचरण की अपेक्षा की जाती है। इस प्रकार, खंडपीठ ने कहा कि भले ही वैवाहिक संबंध में कोई कदाचार किया गया हो, विभाग अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू कर सकता...
"झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों को मुंबई के बाहरी इलाकों में नहीं धकेला जा सकता": हाईकोर्ट ने 'आरक्षित' खुली जगहों पर बनी झुग्गियों के पुनर्वास की योजना बरकरार रखी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को विकास नियंत्रण और संवर्धन विनियमन, (DCPR) 2034 के विनियमन 17(3)(डी)(2) रद्द करने से इनकार करते हुए कहा कि ऐसे शहर में जहां जगह और सेवाओं के वितरण में असमानता दिखाई देती है, झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों को शहर के बाहरी इलाकों में नहीं बल्कि शहर के भीतर औपचारिक आवास उपलब्ध कराना वास्तविक समानता की ओर एक कदम है। यह विनियमन DCPR 2034 के तहत 'खुली जगहों' के रूप में आरक्षित भूमि पर अतिक्रमण किए गए झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों के पुनर्वास का प्रावधान करता है।जस्टिस...
'राष्ट्रगान का अपमान' मामले में सीएम नीतीश कुमार को राहत, हाईकोर्ट ने खारिज की शिकायत
पटना हाईकोर्ट ने इस सप्ताह की शुरुआत में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ दायर शिकायत मामला खारिज कर दिया। इस मामले में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने 'सेपक टकराव' विश्व कप से संबंधित कार्यक्रम में राष्ट्रगान गाते समय मुस्कुराते चेहरे के साथ 'प्रणाम मुद्रा' में खड़े होकर राष्ट्रगान का अपमान किया।जस्टिस चंद्र शेखर झा की पीठ ने कहा कि सीएम के स्वीकार किए गए आचरण से राष्ट्रगान के प्रति केवल उच्च सम्मान का पता चलता है। कोर्ट ने कहा कि खड़े होकर 'प्रणाम मुद्रा' में हाथ जोड़ना और 'मुस्कुराता...
बॉम्बे हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद हाउसिंग सोसाइटी ने आवारा कुत्तों को खाना खिलाने से रोकने के लिए नियुक्त बाउंसरों को हटाने पर सहमति जताई
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में मुंबई की एक हाउसिंग सोसाइटी द्वारा दिए गए बयान को स्वीकार कर लिया है कि वह उन बाउंसरों को हटाएगी, जिन्हें कथित तौर पर सोसाइटी के उन सदस्यों को परेशान करने के लिए नियुक्त किया गया था, जिन्होंने सोसाइटी परिसर में स्ट्रीट डॉग्स को खाना खिलाया था। जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस आरिफ डॉक्टर की खंडपीठ ने कहा कि 27 मार्च और 28 मार्च, 2023 और 24 अप्रैल, 2023 को पारित विस्तृत आदेशों द्वारा, सोसाइटी की समिति को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया था कि वे स्ट्रीट डॉग्स को खाना...
यदि पक्षकार निर्देशों का पालन करता है तो एकपक्षीय आदेश वापस लिया जा सकता है और कानूनी मुद्दों पर उचित निर्णय के लिए पूर्ण सुनवाई की आवश्यकता होती है: MP हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की पीठ ने माना कि एकपक्षीय आदेश को तब वापस लिया जा सकता है जब संबंधित पक्ष बाद में पेश हो, न्यायालय के निर्देशों का पालन करे, और मामले में जटिल कानूनी मुद्दे शामिल हों, जिसके लिए प्रभावी निर्णय के लिए दोनों पक्षों की निष्पक्ष सुनवाई की आवश्यकता हो। तथ्ययह आवेदन इस न्यायालय द्वारा 15.07.2024 को पारित एकपक्षीय आदेश को वापस लेने के लिए दायर किया गया है, जिसके तहत इस न्यायालय ने माना कि आवेदक द्वारा मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 47, 48 और 49 के...
क्या कानून के साथ संघर्षरत किशोर अग्रिम जमानत मांग सकता है? उत्तराखंड हाईकोर्ट तय करेगा
उत्तराखंड हाईकोर्ट इस प्रश्न पर विचार करने के लिए तैयार है कि किशोर न्याय (बालकों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के अनुसार, कानून का उल्लंघन करने वाले किशोर द्वारा धारा 482 BNSS (पूर्व में CRPC की धारा 438) के तहत दायर अग्रिम जमानत को बनाए रखा जा सकता है या नहीं। जस्टिस राकेश थपलियाल की पीठ ने उत्तराखंड राज्य को 4 सप्ताह में इस मुद्दे पर जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया है।एकल न्यायाधीश मुख्य रूप से रुड़की में सीओईआर विश्वविद्यालय के एक किशोर छात्र की अग्रिम जमानत याचिका पर विचार कर रहे...
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 80, 81 और 81A के अंतर्गत साइबर अपराधों से निपटने की कानूनी व्यवस्था
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000) डिजिटल युग में भारत का एक प्रमुख कानून है जो कंप्यूटर, इंटरनेट, साइबर अपराध और इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन से संबंधित पहलुओं को नियंत्रित करता है।अध्याय XIII अधिनियम के विविध प्रावधानों (Miscellaneous Provisions) से संबंधित है, जो पुलिस अधिकारियों के विशेष अधिकारों, अधिनियम की सर्वोपरिता, और इलेक्ट्रॉनिक चेक से जुड़े नियमों को स्पष्ट करता है। इस लेख में हम विशेष रूप से धाराएं 80, 81 और 81A को विस्तारपूर्वक सरल भाषा में समझेंगे। धारा...
Sales of Goods Act : माल विक्रय अधिनियम का परिचय
माल विक्रय अधिनियम का परिचय (Introduction to the Sales of Goods Act)माल विक्रय अधिनियम (Sales of Goods Act) कानून का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो वस्तुओं की बिक्री के लिए अनुबंधों (Contracts) को नियंत्रित करता है। भारत में, संबंधित कानून माल विक्रय अधिनियम, 1930 (Sale of Goods Act, 1930) है। यह अधिनियम चल संपत्ति (Movable Property) के हस्तांतरण (Transfer) से जुड़े जटिल लेन-देन (Transactions) को संबोधित करने के लिए एक विशिष्ट कानूनी ढांचे की आवश्यकता से उत्पन्न हुआ। इसके अधिनियमन (Enactment) से...




















