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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पंचायतकर्मी की बर्खास्तगी का आदेश रद्द किया; कहा- उसे सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गुरुवार (19 जून) को एक पंचायतकर्मी के बर्खास्तगी आदेश को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा, निष्कासन/ बर्खास्तगी आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन था। याचिकाकर्ता को न तो लिखित बयान दाखिल करने का अवसर दिया गया और न ही सुनवाई का अवसर दिया गया।जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की पीठ ने कहा,"याचिकाकर्ता को बचाव में लिखित बयान दाखिल करने का अवसर नहीं दिया गया और न ही व्यक्तिगत रूप से सुनवाई का मौका दिया गया (हालांकि कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे, जिनका याचिकाकर्ता की ओर से...
ऑनलाइन सट्टेबाजी पर प्रतिबंध की मांग खारिज, P&H हाईकोर्ट ने कहा-हरियाणा सार्वजनिक जुआ रोकथाम अधिनियम के तहत उपाय मौजूद
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार (20 जून) को एक जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें सभी ऑनलाइन ओपिनियन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, मोबाइल एप्लीकेशन, वेबसाइट और डिजिटल माध्यमों को विज्ञापन देने और/या सट्टेबाजी और दांव लगाने की गतिविधियों को बढ़ावा देने से रोकने की मांग की गई थी। याचिका में इन गतिविधियों को सार्वजनिक जुआ अधिनियम का उल्लंघन बताया गया था।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस सुमित गोयल ने कहा,"चूंकि याचिका में व्यक्त शिकायतों के निवारण के लिए पर्याप्त वैधानिक ढांचे मौजूद हैं,...
किसी भी विदेशी की बात सुने बिना उसकी आवाजाही पर रोक नहीं लगाई जा सकती: केरल हाईकोर्ट
संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रक्रियात्मक निष्पक्षता को मजबूत करने वाले एक महत्वपूर्ण फैसले में, केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि विदेशी नागरिकों को विदेशी अधिनियम, 1946 के तहत उनकी आवाजाही को प्रतिबंधित करने वाले आदेश पारित करने से पहले सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए।जस्टिस सी. जयचंद्रन ने एक रिट याचिका में फैसला सुनाते हुए तीन नेपाली नागरिकों के खिलाफ विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (एफआरआरओ) द्वारा जारी किए गए आंदोलन प्रतिबंध आदेशों को अवैध घोषित कर दिया, क्योंकि वे याचिकाकर्ताओं को सुने बिना...
दिल्ली राज्य आयोग ने गलत रिपोर्ट देने पर डॉ. लाल पैथ लैब्स पर लगाया ₹3.5 लाख का जुर्माना
दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की अध्यक्ष, संगीता ढींगरा सहगल और पिंकी, न्यायिक सदस्य की खंडपीठ ने डॉ. लाल पैथलैब्स को गलत और दोषपूर्ण परीक्षण रिपोर्ट देने के लिए उत्तरदायी ठहराया है, जिसमें शिकायतकर्ता की जानलेवा स्थिति का संकेत दिया गया है और अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता है। 3,50,000 रुपये का मुआवजा दिया गया। खंडपीठ ने इन रिपोर्ट आधारों द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर गौर किया, जो डॉक्टर मरीजों को मेडिकल उपचार देते हैं और जरूरी दवाएं लिखते हैं।पूरा मामला: मैक्स हेल्थकेयर...
सभी कोर्ट रूम में डॉ. बी.आर. अंबेडकर के चित्र लगाएगा कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट बेंगलुरु, धारवाड़ और कलबुर्गी की पीठों और राज्य के जिला कोर्ट के सभी कोर्ट रूम में डॉ. बी.आर. अंबेडकर के चित्र/फोटोग्राफ प्रदर्शित करने का निर्णय लिया।दिनांक 26.04.2025 के फुल बेंच के प्रस्ताव का हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया था कि आम जनता, वकीलों, मंचों और संगठनों द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन और कर्नाटक सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किए गए संचार के मद्देनजर इस कार्यालय से अनुरोध किया गया कि वह कर्नाटक हाईकोर्ट के सभी कोर्ट रूम, बेंगलुरु की मुख्य पीठ, धारवाड़ और...
मेडिकल कॉलेज की मान्यता से पहले उसमें किया गया शिक्षण कार्य पात्रता के लिए शिक्षण अनुभव में नहीं गिना जा सकता: HP हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने माना कि भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1956 की धारा 10ए के तहत किसी मेडिकल कॉलेज की औपचारिक मान्यता या स्थापना से पहले अर्जित शिक्षण अनुभव को वैधानिक भर्ती नियमों के अनुसार सहायक प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति के लिए पात्रता निर्धारित करने के उद्देश्य से वैध नहीं माना जा सकता। खंडपीठ में चीफ जस्टिस जी.एस. संधावालिया और जस्टिस रंजन शर्मा शामिल थे।क्या है मामला?याचिकाकर्ता ने वर्ष 2000-2001 में MBBS की परीक्षा उत्तीर्ण की। उन्होंने जुलाई 2016 में हिमाचल प्रदेश...
राजस्थान हाईकोर्ट ने उस कांस्टेबल को बरी किया, जिसकी निगरानी से दो विचाराधीन कैदी भाग गए थे
राजस्थान हाईकोर्ट ने धारा 223 (IPC) के तहत आरोपित एक पुलिस कांस्टेबल को बरी कर दिया। उन्हें दो विचाराधीन कैदियों के जेल से फरार होने के बाद आरोपित किया गया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, जब एक पुलिस अधिकारी को सुरक्षा के साथ-साथ वायरलेस ऑपरेशन में भाग लेने जैसे दोहरे और एक साथ काम करने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है तो निगरानी बिना किसी गलती के हो, ऐसी अपेक्षाओं को और मैनपॉवर और बुनियादी ढांचे की व्यावहारिक सीमाओं को दूसरे के आमने-सामने रखकर देखा जाना चाहिए।धारा 223, IPC क्या है?धारा 223, IPC का...
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जिला कोर्ट क्लर्क के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई को सही ठहराया, जानकारी देने में देरी पर हुई थी कार्यवाही
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गुरुवार (19 जून) को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में कार्यरत एग्यीक्यूटेंट क्लर्क के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई बरकरार रखी। यह कार्रवाई हाईकोर्ट द्वारा मांगी गई महत्वपूर्ण जानकारी को समय पर न भेजने के कारण की गई थी।मामला जून 2016 का है, जब याचिकाकर्ता को महिलाओं, बच्चों, दिव्यांगजनों और अन्य संवेदनशील वर्गों से संबंधित अपराधों के मामलों का त्रैमासिक विवरण (1 अप्रैल से 30 जून 2016 तक) हाईकोर्ट को भेजना था। याचिकाकर्ता ने 2 जुलाई 2016 को जानकारी भेज दी थी...
नाबालिग बलात्कार पीड़िता पर नहीं थोपी जा सकती अनचाही' गर्भावस्था: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 12 वर्षीय लड़की को 29 सप्ताह के गर्भपात की दी अनुमति
यह देखते हुए कि वह बलात्कार पीड़िता को उसके अनचाहे गर्भ को धारण करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती, बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने हाल ही में नाबालिग लड़की को मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट के तहत उसके लगभग 29 सप्ताह के भ्रूण को गिराने की अनुमति दी।जस्टिस नितिन साम्ब्रे और जस्टिस सचिन देशमुख की खंडपीठ ने कहा कि लड़की को गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर करके राज्य उसके जीवन का मार्ग निर्धारित करने के अधिकार को छीन रहा है।जजों ने 17 जून को पारित आदेश में कहा,"यह न्यायालय पीड़िता को उसकी...
Right to Information Act सूचना नहीं दिए जाने पर अपनायी जाने वाली प्रक्रिया
इस अधिनियम में सूचना प्रदान नहीं किये जाने पर जुर्माना किये जाने का प्रावधान है। इस संबंध में इस एक्ट की धारा 20 दी गयी है जिसके अनुसार-(1) जहाँ किसी शिकायत या अपील का विनिश्चय करते समय, यथास्थिति, केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग की यह राय है कि, यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी ने, किसी युक्तियुक्त कारण के बिना सूचना के लिए कोई आवेदन प्राप्त करने से इंकार किया है या धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन सूचना के लिए विनिर्दिष्ट समय के भीतर सूचना नहीं दी है या...
Right to Information Act में अपील एक कानूनी अधिकार
किसी भी सूचना को मांगे जाने पर सूचना के नहीं दिए जाने पर आवेदक को मिला अपील का अधिकार एक कानूनी अधिकार है। अपील का अधिकार संविधि का सृजन है। यह मूल्यवान विधिक अधिकार है, जो व्यक्ति व्यक्ति को उच्चतर फोरम के समक्ष उसकी सहायता का आश्रय लेने के लिए तथा निम्नतर फोरम की त्रुटियों को सुधरवाने के लिए प्रदान किया गया है।अधिनियम की धारा 19 (1) अपील के ऐसे अधिकार का प्रयोग ऐसे व्यक्ति द्वारा किये जाने के लिए प्रदान करती है, जो व्यक्ति व्यक्ति को जिसने अधिनियम की धारा 6 के अधीन सूचना प्राप्त करने के लिए...
कर्नाटक सरकार ने चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ के बाद लोगों के एकत्र होने पर नियंत्रण के लिए भीड़ नियंत्रण विधेयक का प्रस्ताव रखा
कर्नाटक सरकार ने राज्य में राजनीतिक रैली, जात्रा, सम्मेलन आदि से संबंधित प्रायोजित कार्यक्रमों और सामूहिक सभा के स्थानों पर भीड़ को प्रभावी ढंग से प्रबंधित और नियंत्रित करने के लिए कर्नाटक भीड़ नियंत्रण (कार्यक्रमों और सामूहिक सभा के स्थानों पर भीड़ प्रबंधन) विधेयक, 2025 का प्रस्ताव रखा है।प्रस्तावित विधेयक पर अगली कैबिनेट बैठक में चर्चा होने की संभावना है। यह विधेयक IPL 2025 फाइनल में रॉयल चैलेंजर बैंगलोर (RCB) की जीत का जश्न मनाने के लिए आयोजित कार्यक्रम से पहले चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर...
स्पेशल NIA कोर्ट ने गौतम नवलखा की दिल्ली में रहने की याचिका खारिज की
मुंबई के स्पेशल NIA कोर्ट ने गुरुवार (19 जून) को मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा द्वारा दायर आवेदन खारिज कर दिया, जिन्होंने भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले में मुकदमे की समाप्ति तक मुंबई छोड़ने और दिल्ली में स्थायी रूप से रहने की अदालत से अनुमति मांगी थी।स्पेशल जज चकोर बाविस्कर ने कहा कि न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर यात्रा करना एक बात है और न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर स्थायी रूप से रहना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।जज बाविस्कर ने कहा,"मैं उल्लेख करता हूं कि अभियुक्त को न्यायालय के...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शराब की अधिक कीमत वसूलने से संबंधित याचिका पर राज्य को नोटिस जारी किया
विक्रेताओं द्वारा शराब की अधिक कीमत वसूलने से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य को नोटिस जारी किया। साथ ही इस संबंध में उनके द्वारा की गई कार्रवाई का संकेत देते हुए हलफनामा दाखिल करने को कहा।एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने कहा,"प्रतिवादियों को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया जाता है, जिसमें (i) 01.04.2025 से 15.06.2025 तक अधिकतम खुदरा मूल्य से अधिक कीमत पर बिक्री के आरोप के संबंध में प्राप्त शिकायतों तथा/या की गई छापेमारी...
नकदी जब्त करने में पुलिस की चूक 'लापरवाही' थी, लेकिन इससे जस्टिस वर्मा के बचाव में मदद नहीं मिली: जांच समिति
जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच करने वाली 3 जजों की समिति ने उनके सरकारी बंगले के स्टोररूम में अग्निशमन अभियान के दौरान मिले नोटों को जब्त न करने के लिए दिल्ली पुलिस की आलोचना की।पुलिस और अग्निशमन कर्मियों द्वारा बिना पंचनामा या जब्ती ज्ञापन तैयार किए मौके से चले जाने को समिति ने 'लापरवाही' करार दिया। हालांकि, समिति ने कहा कि उसका काम पुलिस प्रक्रिया में खामी ढूंढना नहीं था। चूंकि साक्ष्यों से नकदी के बड़े ढेर की मौजूदगी का संकेत मिलता है, जो जस्टिस वर्मा के इस दावे का खंडन करता है कि उनके...
धोखाधड़ी के लाभार्थी को सार्वजनिक धन से सहायता नहीं मिल सकती: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को 25 हजार से अधिक समूह सी और डी गैर-शिक्षण कर्मचारियों को 'वजीफा' देने से रोक दिया, जिनकी नियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट द्वारा नौकरियों के लिए नकद भर्ती घोटाले के मद्देनजर रद्द कर दी गई थीं।जस्टिस अमृता सिन्हा ने इन कर्मचारियों को 25,000 रुपये और 20,000 रुपये का भत्ता देने के राज्य के फैसले पर रोक लगा दी थी, जिनकी नियुक्तियां रद्द कर दी गई थीं।वर्तमान सुनवाई में न्यायालय ने निर्देश दिया कि राज्य सरकार को इन कर्मचारियों को सितंबर, 2025 तक कोई और ऐसा भुगतान करने...
निदेशक की पूर्व अनुमति के बिना वकीलों को समन जारी नहीं किया जाएगा: ED ने जारी किया सर्कुलर
एक मुवक्किल को उनकी कानूनी राय के संबंध में दो सीनियर एडवोकेट को समन जारी करने पर हुई तीखी प्रतिक्रिया के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सर्कुलर जारी किया, जिसमें अपने अधिकारियों को उनकी कानूनी राय के संबंध में वकीलों को समन जारी करने से प्रतिबंधित किया गया।यदि कानून के तहत उपलब्ध अपवादों के अनुसार कोई समन जारी किया जाना है तो एजेंसी के निदेशक की पूर्व अनुमति से ही ऐसा किया जाएगा, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अधिसूचित किया है।ED द्वारा अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर प्रकाशित एक पोस्ट में कहा...
पासपोर्ट के लिए आवेदन करने के लिए पत्नी को पति की अनुमति की आवश्यकता नहीं: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट के लिए आवेदन करते समय पत्नी के लिए अपने पति की अनुमति और उसके हस्ताक्षर लेना जरूरी नहीं है। अदालत ने कहा कि इस तरह की प्रथा एक ऐसे समाज के लिए अच्छी नहीं है जो महिलाओं की मुक्ति की ओर बढ़ रहा है और एक प्रकार का पुरुष वर्चस्ववाद है।अदालत ने कहा कि पति से पासपोर्ट के लिए आवेदन करने की अनुमति मांगने पर जोर देना उस समाज के लिए अच्छा नहीं है जो महिला मुक्ति की ओर बढ़ रहा है। यह प्रथा पुरुष वर्चस्ववाद से कम नहीं है। प्राधिकरण के जोर देने पर आश्चर्य जताते हुए जस्टिस...
LLM पास स्टूडेंट को AIBE में कर दिया 'फेल', परिणाम को हाईकोर्ट में दी चुनौती
गुजरात हाईकोर्ट ने 17 जून (मंगलवार) को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने यह नोटिस तब जारी किया, जब प्रथम श्रेणी के साथ मास्टर ऑफ लॉ (LLM) की डिग्री रखने वाली याचिकाकर्ता को अखिल भारतीय बार परीक्षा (AIBE) में 'फेल' घोषित किया गया, जो वकील बनने के लिए लॉ ग्रेजुएट के लिए अनिवार्य है।BCI द्वारा उसे 'फेल' घोषित करने के निर्णय को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई थी, जिसमें कहा गया कि हालांकि AIBE परीक्षा में 100 में से 7 प्रश्न वापस ले लिए गए थे, लेकिन सभी 100 प्रश्नों में...
क्या UAPA के तहत ज़मानत इस आधार पर दी जा सकती है कि आरोपी का आतंकवादी कृत्य से कोई सीधा संबंध नहीं है?
प्रस्तावना (Introduction): आतंकवाद निरोधक कानून और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संतुलनसुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण निर्णय वर्नन बनाम महाराष्ट्र राज्य (2023) में यह स्पष्ट किया गया कि अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष प्रमाण (Direct Evidence) नहीं है जिससे यह साबित हो कि उसने आतंकवादी गतिविधियों (Terrorist Acts) में भाग लिया है, तो अनलॉफ़ुल एक्टिविटीज़ (प्रिवेंशन) एक्ट, 1967 (Unlawful Activities Prevention Act – UAPA) के तहत उसकी ज़मानत (Bail) से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस...




















