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झारखंड हाईकोर्ट ने 2013 में 6 पुलिसकर्मियों की हत्या के लिए दो कथित नक्सलियों को दी गई मौत की सजा पर विभाजित फैसला सुनाया
झारखंड हाईकोर्ट ने 2013 में 6 पुलिसकर्मियों की हत्या के लिए दो कथित नक्सलियों को दी गई मौत की सजा पर विभाजित फैसला सुनाया

झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 2013 में पुलिस दल पर हुए हमले के संबंध में, जिसमें पाकुड़ के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक और पांच अन्य पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी, दो कथित नक्सली व्यक्तियों को मृत्युदंड की सज़ा सुनाने वाली निचली अदालत के एक रेफरल पर विभाजित फैसला सुनाया है।जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय ने यह कहते हुए अभियुक्तों को बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष अपना मामला साबित करने में विफल रहा है, जबकि जस्टिस संजय प्रसाद ने निचली अदालत की मृत्युदंड की सज़ा को बरकरार रखा।पीठ ने अपने 197 पृष्ठों के फैसले में,...

लोकपाल ने पूर्व SEBI अध्यक्ष माधबी पुरी बुच के खिलाफ शिकायतों को खारिज करने के आदेश पर पुनर्विचार करने से किया इनकार
लोकपाल ने पूर्व SEBI अध्यक्ष माधबी पुरी बुच के खिलाफ शिकायतों को खारिज करने के आदेश पर पुनर्विचार करने से किया इनकार

लोकपाल ने पूर्व SEBI अध्यक्ष माधबी पुरी बुच के खिलाफ दायर कई शिकायतों को खारिज करने के अपने पहले के फैसले पर पुनर्विचार करने से इनकार कर दिया लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के तहत लोकपाल को कोई स्पष्ट समीक्षा अधिकार नहीं दिया गया।जस्टिस एएम खानविलकर (अध्यक्ष), जस्टिस एल नारायण स्वामी, जस्टिस संजय यादव, जस्टिस सुशील चंद्रा, जस्टिस ऋतु राज अवस्थी और जस्टिस अजय तिर्की की बेंच ने पूर्व आईपीएस अधिकारी और वर्तमान में आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर द्वारा दायर उस याचिका पर...

Isha Foundation v Nakkheeran Publications: सुप्रीम कोर्ट ने पक्षकारों से हाईकोर्ट में समाधान निकालने को कहा
Isha Foundation v Nakkheeran Publications: सुप्रीम कोर्ट ने पक्षकारों से हाईकोर्ट में समाधान निकालने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (21 जुलाई) को सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन से कहा कि वह तमिल मीडिया आउटलेट नक्खीरन पब्लिकेशन्स को फाउंडेशन के खिलाफ अपमानजनक सामग्री प्रकाशित करने से रोकने की अपनी याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखें।अदालत ने नक्खीरन को ईशा फाउंडेशन द्वारा दायर वाद खारिज करने के लिए सीपीसी के आदेश VII नियम 7 के तहत आवेदन दायर करने की भी अनुमति दी। हाईकोर्ट से अनुरोध किया गया कि वह पक्षकारों द्वारा दायर आवेदनों पर जल्द से जल्द विचार करे।इन टिप्पणियों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने नक्खीरन...

सुप्रीम कोर्ट का सवाल- पीलीभीत कार्यालय के लिए समाजवादी पार्टी को 115 रुपये में नगर निगम भवन कैसे मिला? बताया- राजनीतिक शक्ति का दुरुपयोग
सुप्रीम कोर्ट का सवाल- पीलीभीत कार्यालय के लिए समाजवादी पार्टी को 115 रुपये में नगर निगम भवन कैसे मिला? बताया- राजनीतिक शक्ति का दुरुपयोग

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (21 जुलाई) को समाजवादी पार्टी (SP) की उस याचिका पर विचार करने से इनकार किया, जिसमें पीलीभीत ज़िला कार्यालय से उसे बेदखल किए जाने को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने पार्टी को सिविल कोर्ट जाने को कहा, जहां उसने अंतरिम निषेधाज्ञा के लिए पहले ही एक दीवानी मुकदमा दायर कर रखा है।सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने कुछ मौखिक टिप्पणियां कीं, जिसमें पार्टी को नगर निगम के प्लॉट पर औने-पौने दामों पर कार्यालय मिलने के तरीके को अस्वीकार किया गया। साथ ही कहा गया कि यह आवंटन पार्टी के सत्ता में रहते...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों में गवाहों के बयानों की कॉपी-पेस्ट की फिर से निंदा की, राज्य सरकार से इस खतरे से निपटने को कहा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों में गवाहों के बयानों की कॉपी-पेस्ट की फिर से निंदा की, राज्य सरकार से इस खतरे से निपटने को कहा

लगातार चिंता व्यक्त करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एक बार फिर जांच अधिकारियों द्वारा गवाहों के बयानों की कॉपी-पेस्ट की प्रथा पर चिंता जताई। साथ ही राज्य सरकार को इस बढ़ती खतरे से निपटने का निर्देश दिया।जस्टिस विभा कंकनवाड़ी और जस्टिस संजय देशमुख की खंडपीठ ने आपराधिक याचिका का निपटारा करते हुए ये टिप्पणियां कीं, जिसे न्यायालय द्वारा राहत देने में अनिच्छा व्यक्त करने के बाद वापस ले लिया गया था।मामले की मुख्य सुनवाई 25 जून, 2025 को हुई और CrPC की धारा 161 के तहत गवाहों के बयानों की जांच के...

जनता की आवाज़ है चुना हुआ प्रतिनिधि: बिना प्रक्रिया अपनाए पंचायत सदस्यों को हटाने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने जताई सख्त आपत्ति
"जनता की आवाज़ है चुना हुआ प्रतिनिधि": बिना प्रक्रिया अपनाए पंचायत सदस्यों को हटाने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने जताई सख्त आपत्ति

राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत सदस्यों को हटाने से जुड़े कई मामलों पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि वर्ष 1996 के राजस्थान पंचायती राज नियमों के नियम 22 में निर्धारित अनिवार्य प्रक्रिया का पालन किए बिना हटाने के आदेश पारित किए जा रहे हैं। जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने पाया कि जांच अधिकारी इन नियमों से भलीभांति अवगत नहीं हैं, जिससे आदेशों में गंभीर त्रुटियां हो रही हैं।कोर्ट ने पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव, संभागीय आयुक्तों और जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया कि वे सभी पंचायत समितियों के मुख्य कार्यकारी...

केंद्र सरकार का Udaipur Files फिल्म में और बदलाव करने का आदेश , सुप्रीम कोर्ट ने तय की रिलीज़ की डेट
केंद्र सरकार का 'Udaipur Files' फिल्म में और बदलाव करने का आदेश , सुप्रीम कोर्ट ने तय की रिलीज़ की डेट

केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने विवादास्पद फिल्म "उदयपुर फाइल्स: कन्हैया लाल टेलर मर्डर" के लिए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) द्वारा दिए गए प्रमाण पत्र में संशोधन की मांग वाली याचिकाओं पर आदेश पारित किया।केंद्र के आदेश के अनुसार, फिल्म की विषय-वस्तु में छह बदलाव किए गए। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है जिसने इन बदलावों का सुझाव दिया था।इन बदलावों में विस्तृत अस्वीकरण शामिल है, जो स्पष्ट करता है कि फिल्म कलात्मक कृति है...

धोखाधड़ी के मामलों में एक्टर श्रेयस तलपड़े की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
धोखाधड़ी के मामलों में एक्टर श्रेयस तलपड़े की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक्टर श्रेयस तलपड़े को निवेशकों से धोखाधड़ी करने के आरोपी सहकारी समिति द्वारा किए गए कथित वित्तीय अपराध के संबंध में विभिन्न राज्यों में दर्ज मामलों में गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने प्रतिवादियों को अपना जवाब/प्रति-शपथपत्र दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया और निर्देश दिया कि इस बीच उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। मामले को आगे विचार के लिए 29 अगस्त को सूचीबद्ध किया गया।आरोप है कि...

[CrPC की धारा 200] पुलिस के पास जाने से पहले शिकायतकर्ता के मजिस्ट्रेट के पास जाने पर कोई रोक नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
[CrPC की धारा 200] पुलिस के पास जाने से पहले शिकायतकर्ता के मजिस्ट्रेट के पास जाने पर कोई रोक नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि संज्ञेय अपराध का आरोप लगाने वाला शिकायतकर्ता FIR दर्ज कराने के लिए पहले पुलिस के पास जाने के लिए बाध्य नहीं है। वह CrPC की धारा 200 के तहत सीधे मजिस्ट्रेट के पास जा सकता है।न्यायालय ने आगे कहा कि ऐसे मामलों में कोई अवैधता नहीं होती, जहां मजिस्ट्रेट शिकायत के आधार पर संज्ञान लेता है।जस्टिस संजय धर की पीठ ने कहा कि पुलिस के पास जाने के बजाय मजिस्ट्रेट के पास आपराधिक शिकायत के लिए जाने पर कोई रोक नहीं है, यहां तक कि उन मामलों में भी जहां संज्ञेय अपराधों का...

दिल्ली हाईकोर्ट ने यूट्यूबर मोहक मंगल की ANI के कॉपीराइट मुकदमे को आईपी डिवीजन के समक्ष ट्रांसफर करने की याचिका को सूचीबद्ध किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने यूट्यूबर मोहक मंगल की ANI के कॉपीराइट मुकदमे को आईपी डिवीजन के समक्ष ट्रांसफर करने की याचिका को सूचीबद्ध किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने यूट्यूबर मोहक मंगल की याचिका को सोमवार को बौद्धिक संपदा प्रभाग (Intellectual Property Division) की एक समन्वय पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया। मोहक मंगल ने एशियन न्यूज़ इंटरनेशनल (ANI) की ओर से पटियाला हाउस कोर्ट्स में उनके खिलाफ दायर कॉपीराइट और ट्रेडमार्क उल्लंघन के मुकदमे को हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की थी। जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने दिल्ली हाईकोर्ट बौद्धिक संपदा अधिकार प्रभाग नियम, 2022 के नियम 26 का संज्ञान लेते हुए शुक्रवार को मामले को एक समन्वय पीठ के समक्ष...

ईडी अपने मुवक्किलों के साथ विशेष संवाद के लिए वकीलों को कैसे बुला सकता है? इसके लिए दिशानिर्देश होने चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
'ईडी अपने मुवक्किलों के साथ विशेष संवाद के लिए वकीलों को कैसे बुला सकता है? इसके लिए दिशानिर्देश होने चाहिए': सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने आज प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और अन्य जांच एजेंसियों द्वारा आपराधिक मामलों में मुवक्किलों को दी जाने वाली कानूनी सलाह के संबंध में वकीलों को तलब करने के मुद्दे पर दिशानिर्देश बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ "इन रिः मामलों और संबंधित मुद्दों की जांच के दौरान कानूनी राय देने वाले या पक्षकारों का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ताओं को तलब करने के संबंध में" शीर्षक से स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर...

राजस्थान हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में किशोर को जमानत देने से इनकार किया; कहा- बेरहमी से हत्या के आरोप पर सावधानी बरतने की जरूरत
राजस्थान हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में किशोर को जमानत देने से इनकार किया; कहा- 'बेरहमी से हत्या' के आरोप पर सावधानी बरतने की जरूरत

राजस्थान हाईकोर्ट ने सह-अभियुक्त के साथ मिलकर एक व्यक्ति की "क्रूरतापूर्वक" हत्या करने के आरोप में आरोपित एक किशोर को अपराध की गंभीरता, उसकी प्रत्यक्ष संलिप्तता और ज़मानत देने के लिए ठोस कारणों के अभाव के आधार पर ज़मानत देने से इनकार कर दिया। किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 12 के प्रति जागरूकता को रेखांकित करते हुए जस्टिस मनोज कुमार गर्ग की पीठ ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के प्रावधानों के तहत, अपराध की गंभीरता ज़मानत देने या न देने के न्यायालय के निर्णय को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित...

धारा 125 CrPC | भरण-पोषण अब केवल जीविका चलाने के लिए नहीं, बल्कि जीवनशैली को बनाए रखने के एक साधन के रूप में दिया जाता है: कलकत्ता हाईकोर्ट
धारा 125 CrPC | भरण-पोषण अब केवल जीविका चलाने के लिए नहीं, बल्कि जीवनशैली को बनाए रखने के एक साधन के रूप में दिया जाता है: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने माना कि भरण-पोषण देने के संबंध में न्यायशास्त्र में हुए विकास के कारण, अब इसे जीवन-यापन के लिए भुगतान के रूप में नहीं, बल्कि व्यक्ति की जीवनशैली की स्थिरता बनाए रखने के लिए दिया जाता है। जस्टिस बिभास रंजन डे की एकल पीठ ने कहा,"वर्तमान समय और युग में वैवाहिक दायित्वों के संबंध में समाज में भारी बदलाव आया है। इसलिए, यह तीव्र उतार-चढ़ाव भरण-पोषण देने के प्रति न्यायिक दृष्टिकोण में भी बदलाव की मांग करता है, क्योंकि भरण-पोषण अब केवल जीविका चलाने के लिए दिया जाने वाला अनुदान नहीं...

केवल जानबूझकर अवज्ञा करना अवमानना के बराबर है: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने IIM काशीपुर के अंतरिम अध्यक्ष और सीएओ के खिलाफ मामला बंद किया
'केवल जानबूझकर अवज्ञा करना अवमानना के बराबर है': उत्तराखंड हाईकोर्ट ने IIM काशीपुर के अंतरिम अध्यक्ष और सीएओ के खिलाफ मामला बंद किया

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने IIM काशीपुर के अंतरिम अध्यक्ष और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही को बंद कर दिया है। हाईकोर्ट ने फैसले में पिछले सप्ताह कहा कि हर अवज्ञा अवमानना नहीं होती, और न्यायालय के आदेश का उल्लंघन अवमानना के दायरे में लाने के लिए, यह 'जानबूझकर' अवज्ञा होनी चाहिए। जस्टिस रवींद्र मैठाणी की पीठ ने कहा कि न्यायालय के आदेश का पालन न करना अवमाननाकर्ता का एक सूचित निर्णय होना चाहिए, और यदि ऐसा है, तभी अवमानना का प्रावधान लागू होगा।पीठ मुख्यतः विनय शर्मा नामक व्यक्ति...

Insurance Act | सर्वेक्षक निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से काम करते हैं, उन्हें बीमा कंपनी की कठपुतली नहीं कहा जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
Insurance Act | सर्वेक्षक निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से काम करते हैं, उन्हें बीमा कंपनी की 'कठपुतली' नहीं कहा जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी दुर्घटना में हुए नुकसान का आकलन करके बीमा कंपनी द्वारा पॉलिसीधारक को देय राशि निर्धारित करने वाले व्यक्तियों को कंपनी की "कठपुतली" नहीं कहा जा सकता। जस्टिस मनोज जैन ने कहा, "वे निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से काम करते हैं और ऐसे सर्वेक्षकों और हानि-निर्धारकों को बीमा अधिनियम, 1938 के तहत बनाए गए नियमों में निर्दिष्ट अपने कर्तव्यों, जिम्मेदारियों और अन्य पेशेवर आवश्यकताओं के संबंध में आचार संहिता का पालन करना अनिवार्य है।"यह टिप्पणी जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा एक बीमा...

Byjus Insolvency: BCCI और रिजु रविंद्रन की NCLT द्वारा CIRP वापस लेने के लिए CoC की मंजूरी अनिवार्य करने के खिलाफ अपील खारिज
Byju's Insolvency: BCCI और रिजु रविंद्रन की NCLT द्वारा CIRP वापस लेने के लिए CoC की मंजूरी अनिवार्य करने के खिलाफ अपील खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और रिजु रविंद्रन द्वारा दायर दीवानी अपीलों को खारिज कर दिया, जिसमें राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड (बायजू का संचालन करने वाली कंपनी) की कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) वापस लेने के आवेदन के लिए ऋणदाताओं की समिति के 90 प्रतिशत सदस्यों की मंजूरी आवश्यक है।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। थिंक...

अगर मोटरबाइक का इस्तेमाल मानव शरीर को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाए तो वह IPC की धारा 324 के तहत खतरनाक हथियार बन जाती है: केरल हाईकोर्ट
अगर मोटरबाइक का इस्तेमाल मानव शरीर को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाए तो वह IPC की धारा 324 के तहत 'खतरनाक हथियार' बन जाती है: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अगर किसी मोटरसाइकिल का इस्तेमाल जानबूझकर नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाता है तो उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 324 के तहत 'खतरनाक हथियार' मानी जा सकती है। जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने उस प्रावधान की व्याख्या करते हुए फैसला सुनाया जो "खतरनाक हथियारों या साधनों से जानबूझकर चोट पहुंचाने" के अपराध को दंडित करता है।याचिकाकर्ता को भारतीय दंड संहिता की धारा 324 के तहत दोषी पाया गया था और प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने उसे उक्त अपराध के लिए दोषी ठहराया था। सत्र...

सभी दुकानों के गेट पर मालिकों के नाम और कॉन्टेक्ट डिटेल्स लगाने संबंधी जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
सभी दुकानों के गेट पर मालिकों के नाम और कॉन्टेक्ट डिटेल्स लगाने संबंधी जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने उस जनहित याचिका पर प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया, जिसमें उपभोक्ताओं द्वारा खरीदे जाने वाले उत्पादों के बारे में 'जानने के अधिकार' के तहत दुकान मालिक/विक्रेता के विवरण का अनिवार्य प्रकटीकरण करने की मांग की गई।केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारें और भारतीय विधि आयोग इस मामले में प्रतिवादी हैं।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता एडवोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से एडवोकेट एकलव्य द्विवेदी की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया।जनहित याचिका में...

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी और वन भूमि पर अतिक्रमण पर चिंता व्यक्त की, अवैध रूप से उगाए गए सेब के पेड़ों और बागों को राज्य भर में हटाने का आदेश दिया
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी और वन भूमि पर अतिक्रमण पर चिंता व्यक्त की, अवैध रूप से उगाए गए सेब के पेड़ों और बागों को राज्य भर में हटाने का आदेश दिया

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी या वन भूमि पर उगाए गए अवैध सेब के पेड़ों/बागों को राज्य भर में हटाने का आदेश दिया।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने दो संबंधित जनहित याचिकाओं (CWPIL संख्या 17 2014 और CWPIL संख्या 9, 2015) की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि सेब के पेड़ों और बागों को केवल उन भूखंडों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, जहां अतिक्रमणकारी वन भूमि पर फिर से कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके बजाय, सरकारी या वन भूमि पर अवैध रूप से उगाए गए सभी सेब के पेड़ों और...

प्रतिकूलता का पुनरुत्थान: केरल हाईकोर्ट द्वारा सहदायिकता कानून की गलत व्याख्या
प्रतिकूलता का पुनरुत्थान: केरल हाईकोर्ट द्वारा सहदायिकता कानून की गलत व्याख्या

प्रस्तावनाहाल ही में एक फैसले में, केरल हाईकोर्ट ने केरल संयुक्त हिंदू परिवार प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1975 (इसके बाद, 1975 अधिनियम) की धारा 3 और 4 को इस आधार पर निरस्त कर दिया कि वे हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 (इसके बाद, एसएसए) की धारा 6 के प्रतिकूल थीं। हालांकि यह फैसला लैंगिक न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता में नेकनीयत प्रतीत होता है, लेकिन इसमें गंभीर संवैधानिक और न्यायशास्त्रीय कानूनी खामियां हैं। न्यायालय ने, वास्तव में, एक ऐसी प्रतिकूलता पाई जहां कोई प्रतिकूलता मौजूद नहीं...